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“स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ऋण देना राष्ट्र के लिए सबसे सुरक्षित निवेश है: शिवराज सिंह चौहान

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 20 फरवरी 2026 को हैदराबाद में वित्तीय साक्षरता और लचीलेपन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में  नीति निर्माताओं, नियामकों, वित्तीय संस्थानों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) और सामुदायिक नेताओं ने भाग लिया और ग्रामीण भारत में वित्तीय जागरूकता को मजबूत करने, घरेलू लचीलेपन को बढ़ाने और समावेशी आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।

इस सम्मेलन में वित्तीय साक्षरता, घरेलू स्तर पर वित्तीय सुदृढ़ता और आजीविका एवं उद्यमों के लिए ऋण तक पहुंच बढ़ाने जैसे विषयगत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। विभिन्न सत्रों के दौरान  निरंतर वित्तीय शिक्षा, व्यापक वित्तीय समावेशन और मजबूत संस्थागत समन्वय के महत्व पर बल दिया गया। स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और उनके संघों जैसी सामुदायिक संस्थाओं को वित्तीय सेवाएं और वित्तीय साक्षरता संबंधी हस्तक्षेप प्रदान करने के लिए विश्वसनीय और विस्तार योग्य मंच के रूप में मान्यता दी गई।

21 फरवरी 2026 को हैदराबाद में 25वीं केंद्रीय स्तरीय समन्वय समिति (सीएलसीसी) की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ग्रामीण वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में नीतिगत संवाद को आगे बढ़ाने और समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री और सीएलसीसी के अध्यक्ष श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बैठक की अध्यक्षता की। इसमें माननीय केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी और तेलंगाना सरकार की माननीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती डी. अनुसूया सीताक्का ने भी भाग लिया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय और तेलंगाना सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह, अतिरिक्त सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार, संयुक्त सचिव श्रीमती स्मृति शरण और संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति शर्मा भी शामिल थे। तेलंगाना सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास के प्रधान सचिव श्री एन. श्रीधर और पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास आयुक्त एवं एसईआरपी तेलंगाना की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती दिव्या देवराजन शामिल थीं, साथ ही नाबार्ड, आरबीआई, बैंकों, एशियाई विकास बैंक और विभिन्न राज्यों के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय सम्मेलन से प्राप्त प्रमुख जानकारियों के सारांश के साथ हुई, जिसके बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती स्मृति शरण द्वारा “डेय-एनआरएलएम की रणनीतिक अंतर्दृष्टि और आगे का रोडमैप” विषय पर एक प्रस्तुति दी गई।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों, नियामकों और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों, जिनमें बैंक सखी, बीसी सखी, वित्तीय साक्षरता सामुदायिक संसाधन व्यक्ति और बीमा सखी शामिल हैं, के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, स्वयं सहायता समूहों के लिए बैंक संपर्क को मजबूत करने और व्यक्तिगत महिला उद्यमियों को समर्थन देने के लिए एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर जोर दिया।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ऋण देना जोखिम नहीं बल्कि राष्ट्र के लिए सबसे सुरक्षित निवेशों में से एक है। महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों के सामूहिक सहयोग से, “दीदी” लखपति से करोड़पति बन सकती हैं, जिससे महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण परिवर्तन में तेजी आएगी और विकसित भारत के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

माननीय केंद्रीय मंत्री ने अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय पहुंच को मजबूत करने, उद्यम वित्तपोषण का विस्तार करने और ग्रामीण परिवारों के लिए जोखिम संरक्षण तंत्र में सुधार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

इस आयोजन के दौरान तीन प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया गया:

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए व्यक्तिगत उद्यम बैंक ऋण प्रणाली*

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए यूपीआई आधारित क्रेडिट लाइनें*

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए वित्तीय साक्षरता पर डिजिटल मॉड्यूल*

इन पहलों का उद्देश्य ऋण वितरण को सरल बनाना, डिजिटल वित्त को अपनाने को बढ़ावा देना और ग्रामीण महिलाओं के बीच वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है।

ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह ने वित्तीय समावेशन, उद्यम विकास और आर्थिक लचीलेपन को बढ़ावा देने में सामुदायिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा को अब उद्यम-नेतृत्व वाली सशक्तिकरण की ओर विकसित होना चाहिए, जिसमें वित्त तक पहुंच से ध्यान हटाकर उत्पादक ऋण, उद्यम प्रोत्साहन और सतत वित्तीय क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया जाए।

श्रीमती डी. अनुसूया सीताक्का ने कहा कि हालांकि तेलंगाना देश का सबसे युवा राज्य है, लेकिन यहां सबसे पुराना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) है, और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मिशन के नेतृत्व में किए गए हस्तक्षेप तेलंगाना की महिलाओं को उद्यम निर्माण के अगले चरण का नेतृत्व करने में सक्षम बनाएंगे।

इस कार्यक्रम में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकिंग संस्थानों को पुरस्कार देकर वित्तीय संस्थानों के योगदान को भी मान्यता दी गई।

बैठक का समापन हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करने, वित्तीय नवाचार को बढ़ावा देने और ग्रामीण भारत में समावेशी विकास को गति देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

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अहमदाबाद में आयोजित चिंतन शिविर में भारत द्वारा 30 अरब डॉलर का आँकड़ा पार किए जाने पर औषधि निर्यात के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया गया

चिंतन शिविर श्रृंखला, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया जा रहा है, के अंतर्गत “स्केलिंग अप फार्मा एक्सपोर्ट्स” विषय पर एक उद्योग संवाद आयोजित किया गया। यह संवाद उद्योग और नियामकों के साथ घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से भारत के निर्यात दायरे को विस्तार देने की सरकार की प्राथमिकता को प्रतिबिंबित करता है।

भारत का औषधि निर्यात प्रदर्शन निरंतर स्थिर वृद्धि दर्शा रहा है। वित्त वर्ष 2024–25 में औषधि निर्यात 30.47 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा, जो इसके पिछले वर्ष की तुलना में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वर्तमान में लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के इस क्षेत्र का वर्ष 2030 तक 130 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। मात्रा के आधार पर भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है तथा 200 से अधिक बाज़ारों में दवाओं का निर्यात करता है। कुल निर्यात का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कठोर नियामक मानकों वाले बाज़ारों को जाता है। भारत के औषधि निर्यात में 34 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी संयुक्त राज्य अमेरिका की तथा 19 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी यूरोप की है। संवाद में निरंतर निर्यात त्वरण हेतु अनुकूल परिस्थितियाँ सुनिश्चित करने पर सरकार के विशेष बल को रेखांकित किया गया, जबकि उद्योग ने 2026–27 में द्विअंकीय वृद्धि का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अपनी तत्परता व्यक्त की।

कार्यक्रम का शुभारंभ वाणिज्य विभाग के वाणिज्य सचिव के वीडियो संदेश से हुआ, जिसमें उन्होंने निर्यातकों और विनिर्माताओं के साथ सतत् संवाद बनाए रखने तथा विनियमित बाज़ारों में उत्पन्न चुनौतियों पर समयबद्ध प्रतिक्रिया देने के महत्व पर बल दिया। संदेश में एक विश्वसनीय व्यापार भागीदार के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने, वैश्विक औषधि बाज़ारों में अपनी हिस्सेदारी का विस्तार करने तथा भारत से सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं की विश्वभर में निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए विशेष जोर को पुनः रेखांकित किया गया।

उद्घाटन सत्र में वाणिज्य विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन तथा खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन सहित उद्योग से जुड़े हितधारकों की प्रतिभागिता रही। चर्चाएँ नियामकीय प्रक्रियाओं, निर्यात सुगमता तथा नीतिगत उपायों और क्षेत्र की आगामी विकास अवस्था के बीच समन्वय पर केंद्रित रहीं, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के संदर्भ में, जिन्हें प्रायः अनुपालन, प्रलेखन तथा निरीक्षण संबंधी आवश्यकताओं का महत्वपूर्ण सामना करना पड़ता है।

संवाद में केंद्रीय बजट 2026–27 में निर्धारित दिशा को भी संज्ञान में लिया गया, जिसमें बायोफार्मा और जैविक औषधियों को भारत की भावी स्वास्थ्य तथा विनिर्माण प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा गया है। प्रस्तावित ₹10,000 करोड़ की बायोफार्मा शक्ति पहल, जिसे पाँच वर्षों में क्रियान्वित किया जाना है, का उद्देश्य जैविक औषधियों और बायोसिमिलर्स के लिए भारत की संपूर्ण पारितंत्र क्षमता को सुदृढ़ करना, आयात निर्भरता को कम करना तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है, जिससे वैश्विक बायोफार्मास्यूटिकल बाज़ार में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राप्त करने के लक्ष्य के अनुरूप प्रगति की जा सके।

इस संदर्भ में तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान स्थापित करने, सात मौजूदा संस्थानों का उन्नयन करने, 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल परीक्षण स्थलों का विकास करने तथा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की क्षमता को विशेषज्ञ वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्मिकों की नियुक्ति के माध्यम से सुदृढ़ करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। इन उपायों को जटिल उत्पादों के त्वरित मूल्यांकन को सक्षम बनाने तथा भारत की नियामकीय व्यवस्था में विश्वास को सुदृढ़ करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया।

पैनल चर्चाओं और विषयगत सत्रों में विनिर्माण अनुशासन से बाज़ार स्वीकृति तक की निर्यात यात्रा का परीक्षण किया गया। “स्केलिंग एक्सिलेंस थ्रू एंटरप्रेन्योरियल जर्नी,” “फ्रॉम कमोडिटी सप्लायर टु ट्रस्टेड ग्लोबल पार्टनर,” “वृद्धि का मंत्र – ग्रोथ का यंत्र,” तथा “स्केल अप मंत्र फॉर इमर्जिंग कंपनीज़” जैसे सत्रों में औषधि निर्यात के अगले दशक की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने गुणवत्ता प्रणालियों को सुदृढ़ करने, अनुपालन तत्परता सुनिश्चित करने तथा मूल्य श्रृंखला में उन्नयन के संबंध में अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए, साथ ही लागत और आपूर्ति में विश्वसनीयता बनाए रखने पर भी बल दिया।

निर्यातकों को प्रमुख साझेदारों, जिनमें यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं, के साथ हालिया व्यापारिक सहभागिताओं से उत्पन्न अवसरों के बारे में भी अवगत कराया गया। यह उल्लेख किया गया कि अधिक निकट आर्थिक व्यवस्थाएँ बाज़ार पहुँच तथा स्थिर मांग के लिए स्पष्ट मार्ग सुनिश्चित करने में, विशेषकर बड़े, विनियमित बाज़ारों में, सहायक हो सकती हैं। 572.3 अरब अमेरिकी डॉलर के औषधि और चिकित्सा उपकरण बाज़ार के संदर्भ में यूरोपीय संघ के साथ सहभागिता पर चर्चा की गई, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार व्यवस्था भारतीय औषधि कंपनियों के लिए बाज़ार पहुँच और मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता को और सुदृढ़ कर सकती है।

भारत की औषधि निर्यात संवर्धन परिषद (फार्मेक्सिल) की गतिविधियों तथा 12वीं अंतरराष्ट्रीय औषधि एवं स्वास्थ्य सेवा उद्योग प्रदर्शनी (आईफेक्स) पर एक प्रस्तुति दी गई, जिसके पश्चात निर्यातकों और हितधारकों के साथ एक खुला संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 200 निर्यातकों ने भाग लिया, जिनमें अधिकांश भारत के पश्चिमी क्षेत्र से थे।

अहमदाबाद में हुई चर्चाओं में निर्यातकों और व्यापक जनहित से संबंधित प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित रखा गया, जिनमें त्वरित और अधिक सुनिश्चित अनुमोदन, सुदृढ़ नियामकीय सहयोग और मात्रा-आधारित निर्यात से जैविक औषधियों, बायोसिमिलर्स और नवाचार-प्रेरित उत्पादों जैसे उच्च-मूल्य खंडों की ओर क्रमिक बदलाव शामिल हैं। वाणिज्य विभाग निर्यातकों, नियामक निकायों और विदेशों में भारतीय मिशनों के साथ सतत् संवाद जारी रखेगा, जिससे समस्‍याओं की समय पर पहचान और समाधान सुनिश्चित किया जा सके तथा वैश्विक बाज़ारों में भारत के औषधि निर्यात की निरंतर वृद्धि को समर्थन मिले।

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नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत कृषि ड्रोन का वितरण

सरकार ने वर्ष 2023-24 से 2025-26 की अवधि के लिए ₹1261 करोड़ के परिव्यय के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान करने के लिए ‘नमो ड्रोन दीदी’ को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में मंजूरी दी है। उर्वरक विभाग द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, लीड फर्टिलाइजर कंपनियों (एलएफसी) ने 2023-24 में अपने आंतरिक संसाधनों का उपयोग करके स्वयं सहायता समूहों की ड्रोन दीदियों को 1094 ड्रोन वितरित किए हैं। वितरित किए गए इन 1094 ड्रोनों में से 500 ड्रोन ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत वितरित किए गए हैं। ड्रोन प्राप्त करने वाली ड्रोन दीदियों को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा अधिकृत विभिन्न रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (आरपीटीओ) में ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। जनवरी 2026 तक एलएफसी (एलएफसी) द्वारा स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए ड्रोनों की राज्य-वार संख्या और ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का विवरण अनुलग्नक-I में दर्शाया गया है।

बेंगलुरु स्थित एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट एंड रूरल ट्रांसफॉर्मेशन सेंटर (एडीआरटीसी) ने नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत उर्वरक कंपनियों द्वारा प्रदान किए गए इन 500 ड्रोनों के संचालन की आर्थिक और व्यावसायिक व्यवहार्यता पर एक अध्ययन किया है। यह अध्ययन दर्शाता है कि स्वयं सहायता समूह पहले मुख्य रूप से खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों में लगे हुए थे, और उन्हें दिए गए ड्रोनों ने ड्रोन तकनीक के माध्यम से आधुनिक कृषि पद्धतियों तक उनकी पहुंच का विस्तार किया है, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर, ड्रोन को अपनाने से स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों में विविधता आई है, कृषि पद्धतियों में सुधार हुआ है और ग्रामीण समुदायों में महिलाओं के लिए आय के अवसर बढ़े हैं।

अनुलग्नक-I

जनवरी 2026 तक लीड फर्टिलाइजर कंपनियों द्वारा स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए ड्रोनों की राज्य-वार संख्या और ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का विवरण

क्रम संख्या  राज्य का नाम  एलएफसी द्वारा ड्रोन प्रदान किए गए एसएचजी की संख्या और ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित महिला एसएचजी के सदस्यों की संख्या
1 आंध्र प्रदेश 108
2 असम 28
3 बिहार 32
4 छत्तीसगढ़ 15
5 गोवा 1
6 गुजरात 58
7 हरियाणा 102
8 हिमाचल प्रदेश 4
9 जम्मू और कश्मीर 2
10 झारखंड 15
11 कर्नाटक 145
12 केरल 51
13 मध्य प्रदेश 89
14 महाराष्ट्र 60
15 ओडिशा 16
16 पंजाब 57
17 राजस्थान 40
18 तमिलनाडु 44
19 तेलंगाना 81
20 उत्तर प्रदेश 128
21 उत्तराखंड 3
22 पश्चिम बंगाल 15
कुल 1094

यह जानकारी आज राज्यसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर द्वारा एक लिखित उत्तर में दी गई।

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अमरोहा कौशल महोत्सव में 2400 से अधिक नौकरियों की पेशकश;- जयंत चौधरी ने नियुक्ति पत्र सौंपे

भारत सरकार में कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री  जयंत चौधरी ने आज अमरोहा कौशल महोत्सव में चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे। यह जमीनी स्तर पर कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने पर सरकार के निरंतर ध्यान को दर्शाता है।

भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित कौशल महोत्सव में अमरोहा और आसपास के जिलों के युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिसमें लगभग 4,000 उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए उपस्थित हुए। विभिन्न क्षेत्रों में 2,400 से अधिक उम्मीदवारों का चयन किया गया और उन्हें नौकरी के प्रस्ताव दिए गए। इसमें 55 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया और ऑटोमोटिव, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवा, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ एवं बीमा (बीएफएसआई), विनिर्माण, खुदरा और सेवाएं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए।

यह कार्यक्रम रोजगार, प्रशिक्षण और करियर मार्गदर्शन तक पहुंच प्रदान करने वाले एक एकल-खिड़की मंच के रूप में कार्य करता था, जो परिणामोन्मुखी कौशल विकास पर मंत्रालय के विशेष प्रयास को दर्शाता है। अमरोहा में आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद श्री चौधरी कंवर सिंह तंवर, विधायक श्री महेंद्र सिंह खड़गवंशी, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, डीडीजी श्री अरुण यादव और एमएसडीई के निदेशक श्री वीएस अरविंद भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में  जयंत चौधरी ने कहा, “चौधरी अजीत सिंह जी की जयंती पर, हम ग्रामीण भारत और उसके युवाओं की शक्ति में उनके अटूट विश्वास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। अमरोहा में उद्यमशीलता की भावना से लेकर मेहनती युवा आबादी तक अपार संभावनाएं हैं। आज 4,000 से अधिक युवाओं द्वारा दिखाया गया उत्साह उनकी आकांक्षा और तत्परता दोनों को दर्शाता है। कौशल महोत्सव जैसे मंच प्रतिभा और अवसर के बीच की खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये हमारे युवाओं के दरवाजे तक उद्योग को लाते हैं जिससे उन्हें काम की तलाश में पलायन किए बिना रोजगार, प्रशिक्षण और करियर मार्गदर्शन प्राप्त करने में मदद मिलती है।”

श्री जयंत चौधरी ने कहा,  “मैं अमरोहा के युवाओं को एसओएआर – ‘एआई के लिए तैयारी के प्रति कौशल विकास’ जैसी पहलों के माध्यम से अपने कौशल को लगातार निखारने के लिए प्रोत्साहित करता हूं, जो उन्हें उभरती प्रौद्योगिकी-आधारित भूमिकाओं के लिए तैयार करती हैं। उन्हें हर दूसरे वर्ष आयोजित होने वाली इंडियास्किल्स प्रतियोगिता के क्षेत्रीय सत्रों में भी भाग लेना चाहिए, जहां अमरोहा जैसे जिलों की प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकती हैं और यहां तक ​​कि अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर सकती हैं। आज कौशल विकास का अर्थ है स्थानीय क्षमता को उजागर करना और वैश्विक स्तर पर आत्मविश्वास बढ़ाना। ऐसे मंचों के माध्यम से ही अमरोहा जैसे जिले विकसित भारत 2047 की परिकल्‍पना में सार्थक योगदान दे सकते हैं।”

कौशल महोत्सव को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) द्वारा व्यापक जमीनी स्तर पर जागरूकता प्रयासों के माध्यम से समर्थन दिया गया था, इसके साथ ही निर्बाध उद्योग समन्वय और कार्यक्रम के प्रभावी जमीनी क्रियान्वयन को भी सुनिश्चित किया गया है।

अमरोहा कौशल महोत्सव, रोजगार और प्रशिक्षण के अवसरों को युवाओं तक उनके घरों के करीब पहुंचाने के लिए मंत्रालय के चल रहे जिला स्तरीय प्रयासों का एक हिस्सा है। इस कार्यक्रम में पीएमकेवीवाई 4.0 जैसी पहलों, एनएपीएस के तहत विस्तारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और हाल ही में घोषित पीएम-एसईटीयू योजना के तहत आईटीआई के आधुनिकीकरण के माध्यम से भारत के कौशल विकास तंत्र में हो रहे व्यापक परिवर्तन का भी उल्‍लेख किया गया।

मंत्रालय ने समावेशी विकास को मजबूत करने और कुशल, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण करने के लिए देश भर में इस तरह के कौशल महोत्सवों को बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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पर्यटन मंत्रालय ने देश में पर्यटन अवसंरचना और अनुभवों के उन्नयन सहित गंतव्य आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 (स्वदेश दर्शन योजना का संशोधित संस्करण) पर्यटन गंतव्यों के सतत विकास पर केंद्रित है और इस योजना के तहत मंत्रालय ने 53 परियोजनाओं को 2208.31 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अलावा, स्वदेश दर्शन योजना के तहत चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) के अंतर्गत पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए 38 परियोजनाओं को 697.94 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

‘तीर्थ यात्रा पुनरुज्जीवन एवं आध्यात्मिक धरोहर संवर्धन अभियान (प्राशाद)’ योजना के तहत मंत्रालय ने 54 परियोजनाओं को 1726.74 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद योजनाओं के तहत परियोजनाओं की स्वीकृति देते समय क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाता है, जबकि परियोजनाओं की स्वीकृति संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा योजना दिशानिर्देशों, सरकारी निर्देशों, बजट उपलब्धता, परस्पर प्राथमिकता आदि के अनुरूप परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने के अधीन प्रदान की जाती है।

इन परियोजनाओं का कार्यान्वयन, संचालन और प्रबंधन भी संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाता है। उपरोक्त योजनाओं के तहत स्वीकृत घटक मुख्य रूप से पर्यटकों और आगंतुकों की सुविधा से संबंधित हैं, जिनमें डिजिटल हस्तक्षेप शामिल हैं।

ये घटक परियोजना आवश्यकता के अनुसार स्वीकृति के लिए विचार किए जाते हैं और पर्यटन मुख्य उत्पादों से संबंधित हो सकते हैं जैसे पर्यटक सुविधा केंद्र, व्याख्या केंद्र, पर्यटन गतिविधियां, स्वास्थ्य स्वच्छता एवं सुरक्षा, कनेक्टिविटी, पार्किंग, सामान्य स्थल विकास, सॉफ्ट हस्तक्षेप आदि।

पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन 2.0 के योजना दिशानिर्देशों में पर्यटन क्षमता बढ़ाने वाले घटकों की एक उदाहरणात्मक सूची भी शामिल की है।

एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद के तहत परियोजनाएं पूरे भारत स्तर पर स्वीकृत की गई हैं और ये स्थानीय रोजगार के अवसरों के सृजन तथा पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं और साधनों के सृजन में सहायता प्रदान करती हैं, जिससे आगंतुकों की संख्या में वृद्धि होती है। चूंकि इन योजनाओं के माध्यम से सृजित संपत्तियां राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन की जाती हैं, इसलिए मंत्रालय ने उन्हें फुटफॉल, रोजगार, उत्पन्न राजस्व और अन्य मापदंडों के संबंध में डेटा कैप्चर करने की सलाह दी है।मंत्रालय अपनी चल रही प्रचार गतिविधियों के हिस्से के रूप में अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया गतिविधियों, आयोजनों आदि के माध्यम से देश के विभिन्न पर्यटन गंतव्यों और उत्पादों का भी प्रचार करता है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दी गई।

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मधुमक्खी के हमले से शहीद अंपायर को खेल प्रेमियों ने दी श्रद्धांजलि

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर । क्रिकेट मैच के दौरान मधुमक्खियों के हमले से शहीद हुए अंपायर मानिक गुप्ता को आज याद किया गया । परेड स्थित भरत स्ट्राइकर क्लब कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ खिलाड़ियों एवं अंपायर ने पुष्पांजलि कर स्वर्गीय मानिक गुप्ता को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान मौजूद खेल प्रेमियों ने 2 मिनट का मौन रखकर मृतक अंपायर की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ अंपायर एवं क्रिकेट कोच जहीर अहमद ने कहा कि मानिक गुप्ता क्रिकेट के लिए एक समर्पित व्यक्ति थे,जिन्होंने संपूर्ण जीवन क्रिकेट के लिए ही दे दिया।ये एक हृदय विदारक घटना है,जिसने उनके परिवार को और क्रिकेट जगत को गहरी क्षति की है। भरत क्लब के कप्तान अरुण पाण्डेय(पूर्व अंपायर), ने कहा कि क्रिकेट मैदान में उनकी मृत्यु क्रिकेट के प्रति शहादत है। उन्होंने अपना पूरा जीवन क्रिकेट को समर्पित कर दिया था ।वरिष्ठ खिलाड़ी अतुल सक्सेना ने कहा स्वर्गीय मानिक गुप्ता का परिवार क्रिकेट पर ही निर्भर था, इसलिए उनके पूरे परिवार के समक्ष आर्थिक समस्या होगी,अतः उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को उनके परिवार को आर्थिक मदद करनी चाहिए। इस दौरान भारतेन्दु पुरी,जितेन्द्र मिश्रा और प्रदीप पांडे ने भी अपने विचार रखे। श्रद्धांजलि सभा का संचालन वरिष्ठ खिलाड़ी संजय भारती ने किया। सभा में अंपायर पुनीत झा,आदित्य पांडे,सुनील साहू, सतीश पांडे , प्रशान्त पुरी,दुर्गा सिंह,अतुल साहू, बाकर अली,रमेश शर्मा,पृथ्वीराज, कृपेश त्रिपाठी,दीपक पांडेय आदि ने उनकी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतर महाविद्यालय ताइक्वांडो प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज कानपुर ने अंतर महाविधालयी ताइक्वांडो प्रतियोगिता का भव्य एवं सफल आयोजन विश्व विद्यालय के बहु उद्देशयीय सभागार में आयोजित किया गया। यह प्रतियोगिता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक एवं प्राचार्या प्रो सुमन के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में सम्पन्न हुई।

मुख्य अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता पूमसे खिलाड़ी राम गोपाल एवं बलराम यादव उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों को तकनीकी दक्षता, आत्मसंयम और निरंतर अभ्यास के महत्व पर प्रेरणादायी विचार साझा किए।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के खेल सचिव डॉ. निमिषा सिंह कुशवाहा, सह-प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर पांडे, की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों की टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और क्योरुगी एवं पूमसे दोनों वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता परिणाम इस प्रकार रहे — पूमसे (व्यक्तिगत) वर्ग में श्वेता तिवारी (CSJMU) ने प्रथम, ऋषिका (DAV) ने द्वितीय, दुर्गा त्रिवेदी (BND) ने तृतीय तथा शालिनी गुप्ता (DGPG) ने चतुर्थ स्थान प्राप्त किया। टीम पूमसे में CSJMU की श्रृष्टि वर्मा, श्वेता तिवारी एवं सानिया गौतम की टीम ने प्रथम स्थान अर्जित किया, जबकि दुर्गा त्रिवेदी (BND), दिव्या मौर्य (DAV) एवं रिया सुदर्शन (BND) की टीम द्वितीय रही। क्योरुगी के अंडर 46 किग्रा वर्ग में प्रभा सिंह (KSDDD PG) प्रथम एवं पायल (PD महिला) द्वितीय रहीं; अंडर 49 किग्रा वर्ग में सानिया गौतम (CSJMU) प्रथम एवं अर्चिता बिरहा (PPN) द्वितीय रहीं; तथा अंडर 53 किग्रा वर्ग में शिमरन कनौजिया ( बाबू सिंह) प्रथम एवं ऋषिका (DAV) द्वितीय स्थान पर रहीं। समग्र प्रदर्शन के आधार पर CSJMU को ओवरऑल चैंपियन तथा बाबू सिंह महाविद्यालय को रनर-अप घोषित किया गया।

प्रतियोगिता अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में सम्पन्न हुई। विश्वविद्यालय परिवार ने सभी विजेताओं एवं प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।

सम्पूर्ण कार्यक्रम की आयोजन सचिव प्रो प्रीती पाण्डेय ने सभी ‘ अतिथियो, खिलाडियो, मिर्णायक मण्डल का आभार व्यक्त किया ।

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छात्राओं को शैक्षिक एवं व्यवसायिक निर्देशन के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज, कानपुर में प्राचार्या प्रो. सुमन के पर्यवेक्षण में शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा छात्राओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य छात्राओं का शैक्षिक एवं व्यवसायिक निर्देशन करना था। कार्यक्रम में सी. एस. जे. एम. यूनिवर्सिटी के बी. एड. विभाग की प्रवक्ता डॉ. स्नेह पाण्डेय एवं डॉ. प्रिया तिवारी ने छात्राओं को विश्वविद्यालय में चलाए जा रहे बी. एड. एवं अन्य कोर्सेज की जानकारी प्रदान की एवं छात्राओं की जिज्ञासा का निवारण किया।
कार्यक्रम का संयोजन शिक्षाशास्त्र विभाग प्रभारी प्रो. चित्रा सिंह तोमर के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षाशास्त्र विभाग की असि. प्रो. ऋचा सिंह, डॉ. अनामिका राजपूत, डॉ. रेनू शुक्ला द्वारा किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की शिक्षिकाएं कर्मचारी एवं छात्राएं उपस्थित रहे।

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एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में एमएसएमई–टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर द्वारा उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित ल

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर में एमएसएमई–टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर द्वारा उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम(Entrepreneurship Awareness Program) का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुमन ने अपने संबोधन में कहा कि आज के युवाओं के लिए उद्यमिता आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की आयोजन सचिव प्रो. प्रीति पांडेय ने अपने वक्तव्य में कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा एमएसएमई द्वारा संचालित योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं के रूप में हृदयनारायण पांडेय, तनमय तिवारी, सपना रॉय एवं आदित्य निगम उपस्थित रहे।
सह-आयोजक मंडल में डॉ. शैल बाजपेयी, डॉ. रोली मिश्रा एवं डॉ. कोमल सरोज का विशेष योगदान रहा। मुख्य वक्ताओं ने उद्यमिता के महत्व, स्टार्टअप की संभावनाओं, व्यवसाय स्थापना की प्रक्रिया तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और अपने प्रश्नों के माध्यम से जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रो.अलका टंडन प्रोफेसर रेखा चौबे, प्रो.मीनाक्षी व्यास प्रो.निशा वर्मा। प्रो. गार्गी यादव,पूजा गुप्ता डॉ रेशमा, डॉ प्रीत अवस्थी डॉक्टर शुभा बाजपेई आदि उपस्थित रहे।

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एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन, पोषण एवं खाद्य सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा लल्लनपूर्वा बस्ती में संचालित सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन समारोह दिनांक 17 फ़रवरी 2026 को महाविद्यालय प्राचार्या प्रोफेसर वन्दना निगम के के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। समापन दिवस का मुख्य विषय “पोषण एवं खाद्य सुरक्षा अभियान” रहा, जिसमें स्वयंसेविकाओं ने बस्ती की महिलाओं एवं बच्चों को संतुलित आहार, स्वच्छ भोजन, एनीमिया से बचाव तथा कुपोषण के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी।कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक और संवाद सत्र आयोजित किए गए। स्वयंसेविकाओं ने बताया कि हरी सब्ज़ियाँ, दालें, दूध, फल और स्वच्छ पानी का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। साथ ही खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, साफ-सफाई बनाए रखने और मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचने के उपाय भी बताए गए।
कार्यक्रम में महाविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना समिति की वरिष्ठ सदस्या डॉ अंजना श्रीवास्तव ने कहा कि सही पोषण से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है और युवाओं की भागीदारी से जागरूकता अभियान और प्रभावी बनता है। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही ने बताया कि शिविर के दौरान की गई गतिविधियों स्वच्छता, सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, ए आई/ डिजिटल लिटरेसी, साइबर सिक्योरिटी, नशामुक्त युवा – नशा मुक्त भारत अभियान और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए।समापन अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वयंसेविकाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अंत में सभी ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में पोषण संबंधी जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय की शिक्षिकाओं डॉ . साधना सिंह, डॉ . दीप्ति शुक्ला, डॉ . ज्योत्सना पाण्डेय, बसंत कुमार समस्त स्वयंसेविकाओं, क्षेत्रीय नागरिकों तथा मीडिया बंधुओं का विशेष योगदान रहा।कार्यक्रम अधिकारी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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