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उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना एवं केएफसीएल प्रबंधन का असहयोगात्मक रवैया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 30 मई अतिरिक्त श्रम आयुक्त के आदेश के अनुपालन में श्रमिक श्रम कार्यालय एवं तत्पश्चात केएफसीएल परिसर में उपस्थित हुए। हमारा उद्देश्य माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रदत्त राहत के अनुरूप नौकरी बहाली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था।

कई घंटों की प्रतीक्षा एवं वार्ता के उपरांत श्रम प्रवर्तन अधिकारी श्री सुरेश सिंह एवं श्री हेमंत कुमार द्वारा हमें अवगत कराया गया कि केएफसीएल प्रबंधन के विधिक सलाहकार एस. एल. मुखर्जी ने स्पष्ट रूप से यह कहा है कि “ये मेरे श्रमिक नहीं हैं, मैं इन्हें नहीं रखूंगा।”

यदि यह कथन सही है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है, क्योंकि यह माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश एवं श्रमिकों को प्रदान किए गए वैधानिक संरक्षण की भावना के प्रतिकूल प्रतीत होता है। हम पिछले लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की अपेक्षा कर रहे हैं, किंतु प्रबंधन का यह रवैया अत्यंत निराशाजनक एवं चिंताजनक है।

आज की बैठक से यह स्पष्ट हो गया कि प्रबंधन हमारी नौकरी बहाली के संबंध में सकारात्मक कदम उठाने के बजाय टालमटोल की नीति अपना रहा है। हम सभी श्रमिक कई घंटों तक भीषण गर्मी में प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन अंततः हमें यह जानकारी दी गई कि प्रबंधन हमें कर्मचारी के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

हम माननीय उच्च न्यायालय, श्रम विभाग तथा समस्त सक्षम प्राधिकारियों से मांग करते हैं कि इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए न्यायालय के आदेशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए तथा आदेशों की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए।

हम मीडिया जगत से भी अनुरोध करते हैं कि श्रमिकों के इस न्यायसंगत संघर्ष को जनता तक पहुंचाएं, ताकि सत्य सामने आए और श्रमिकों को उनका वैधानिक अधिकार प्राप्त हो सके। हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्याय और अपने वैधानिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए है।