राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने ‘एनआरआई विवाहों में परित्यक्त महिलाओं को न्याय के लिए अंतरराष्ट्रीय पहुंच: नीति एवं प्रक्रिया संबंधी अंतर’ विषय पर एक परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया ताकि एनआरआई पतियों द्वारा परित्यक्त भारतीय महिलाओं को राहत प्रदान करने के लिए सभी संबंधित हितधारकों को एक प्लेटफॉर्म पर साथ लाया जा सके और एनआरआई वैवाहिक मामलों से निपटने में आने वाली चुनौतियों एवं तकनीकी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा सके।

एनआरआई वैवाहिक मामलों में आने वाली वास्तविक चुनौतियों एवं तकनीकी मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए आयोग ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, गैर सरकारी संगठनों और संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों जैसे पुलिस, भारतीय दूतावासों/ विदेश में मिशनों, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों, राष्ट्रीय/ राज्य / जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण आदि से विशेषज्ञों को आमंत्रित किया। परामर्श को तीन तकनीकी सत्रों में विभाजित किया गया था: ‘एनआरआई/ पीआईओ से विवाहित भारतीय महिलाओं के सामने आने वाली समस्याओं की पहचान’, ‘न्याय तक पहुंच: भारतीय न्याय प्रणाली में चुनौतियों का सामना’ और ‘विदेश में न्याय तक पहुंच: विदेशी न्याय प्रणाली में चुनौतियां’। सत्र का संचालन महिला संसाधन एवं वकालत केंद्र, चंडीगढ़ के कार्यकारी निदेशक डॉ. पाम राजपूत, हरियाणा के डीआईजी (महिला सुरक्षा) आईपीएस सुश्री नाजनीन भसीन और एनआरआई के लिए पंजाब राज्य आयोग के पूर्व चेयरमैन न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राकेश कुमार गर्ग ने किया। एक खुली परिचर्चा के तहत विभिन्न संगठनों के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। परिचर्चा के दौरान विभिन्न राज्यों के शिकायतकर्ताओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। पैनलिस्टों द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों में एनआरआई मामलों से निपटने वाली एजेंसियों/ पुलिस अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, दूतावासों द्वारा संकटग्रस्त महिलाओं के मामले को प्राथमिकता के आधार पर उठाना, पीड़ितों के लिए एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन स्थापित करना और उन्हें विदेश कार्य मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के बारे में सूचित करना शामिल था। विशेषज्ञों ने तलाक, भरण-पोषण, बच्चों की परवरिश, उत्तराधिकार आदि के मामलों से संबंधित विदेशी अदालत द्वारा पारित आदेशों के पीड़ित महिलाओं पर प्रभाव के बारे में भी चर्चा की। साथ ही इस बात पर भी गौर किया गया कि भारतीय कानूनी व्यवस्था के मौजूदा प्रावधानों के तहत किस प्रकार ऐसी महिलाओं को राहत प्रदान की जा सकती है। राष्ट्रीय महिला आयोग का उद्देश्य इस विचार-विमर्श के जरिये पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी कानूनी उपाय करने के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
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इस भीषण गर्मी के बीच देश में गंभीर बिजली संकट पैदा हो गया है। मांग के अनुपात में बिजली नहीं मिल पा रही है। बारह राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश गंभीर बिजली संकट से जूझ रहे हैं। कोयले की कमी के कारण उत्पन्न हुआ यह संकट कोई पहली बार नहीं है। पिछले साल भी यह संकट गहराया था लेकिन इस बार बिजली की किल्लत कुछ ज्यादा ही महसूस की जा रही है। कई राज्यों में बिजली कटौती की घोषणा कर दी गई है जिसकी वजह से आम जन परेशान हो गए हैं। चालू वित्त वर्ष में कोल इंडिया का बिजली कंपनियों को करीब 21.600 करोड़ रूपया बकाया था अब भी कोल इंडिया का बिजली कंपनियों पर 12,300 करोड़ों का बकाया है और बिजली का यह संकट कर्ज ना चुका पाने के कारण है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) की डेली कोल स्टॉक रिपोर्ट के मुताबिक 165 थर्मल पावर स्टेशनों में से 56 में से 10 फ़ीसदी या उससे कम कोयला बचा है। कम से कम 26 के पास पांच फीसदी से भी कम स्टॉक है। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन के मुताबिक महत्वपूर्ण बिजली संयंत्रों के पास एक दिन से भी कम का कोयला बचा है। बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर जलापूर्ति व्यवस्था पर संसाधनों पर पड़ा है बिजली कटौती से आम जनता को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा हैं। इसके अलावा अस्पताल और मेट्रो सेवाओं में बाधा उत्पन्न होगी सो अलग। बिजली संकट से जो स्थिति उत्पन्न हो गई है वो तकलीफ देने के लिए काफी है। वह भविष्य में आने वाले संकटों के लिए आगाह कर रही है और बारह राज्यों में बिजली कटौती का अर्थ यह नहीं है अन्य प्रदेश इस संकट से बचे हुए हैं। इस संकट की आहट उन्हें भी महसूस हो गई है। बिजली प्रबंधन के मामले में देश में बहुत लचर व्यवस्था चल रही है और इसी वजह से यह समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। लगभग हर साल यही सुनने में आता है कि एक-दो दिन की बिजली के लिए कोयला बचा है। लगभग सभी ताप बिजलीघर आधे से भी कम क्षमता पर चल रहे हैं। यदि कोयला समाप्ति पर है तो आगे की व्यवस्था, रखरखाव और मरम्मत किस प्रकार होगी? और सरकार इस अव्यवस्था को नजरअंदाज कर रही है। सरकार का ध्यान ग्रीन एनर्जी की तरफ ज्यादा है।
मीरा एक घरेलू औरत जो नौकरों की मदद से घर को चला रही है।गर्मी से झुनझुनाइये शेखर ने अपने नौकर से पानी माँगा और सोफ़े पर बैठ गया।बाहर बहुत गर्मी है!ज़रा ऐ-सी तेज करो नौकर से ये कह कर आँखे बंद कर थोड़ा आराम करने के इरादे से लेट गया।सारा दिन काम करके थक जाता हूँ ,शेखर सोच रहा था कितने सालों से वो सारा बिज़नेस अकेले ही देख रहा है ,किस के लिए अपनी पत्नी और बच्चों के लिये।फिर सोचने लगा!
कानपुर 14 मई भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज में विश्व योग दिवस के उपलक्ष में एक विशेष पूर्व योगाभ्यास सत्र का अयोजन किया गया जो पिछले सप्ताह से महाविद्यालय की एनएसएस वॉलिंटियर्स के द्वारा निरंतर जारी है। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही ने छात्राओं को विभिन्न योग आसनों की उपयोगिता व उनके महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि स्वस्थ मस्तिष्क में ही *स्वस्थ शरीर का वास होता है।*
अतः हमें अपने शरीर को आहार-विहार, योगाभ्यास व विचार सभी के द्वारा स्वस्थ रखने का सतत् प्रयास करना चाहिए तभी एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकेगा। इस दौरान छात्राओं ने विभिन्न आसनों का अभ्यास भी किया। महाविद्यालय प्राचार्या प्रो. सुनंदा दुबे जी ने छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी वॉलिंटियर्स , कार्यालय सहायिका आकांक्षा अस्थाना व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पवित्रा का सहयोग सराहनीय रहा।।
संगोष्ठी की शुरुआत कविता सिंह व सोनल बादल द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुति और न्यास की राष्ट्रीय सचिव डॉ नीरा तोमर के स्वागत भाषण से हुई। मुख्य अतिथि कानपुर महानगर की महापौर प्रमिला पांडे ने उपस्थित अतिथियों व वक्ताओं को अपनी शुभकामनाएं दीं। विशिष्ट अतिथियों में पोर्टलैंड प्रभु सतीश ने बताया कि कर्नाटक के मध्यम परिवार में उनका जन्म हुआ और बचपन से ही संघर्षों का सामना करते हुए आज पोर्टेलेंड में एक कंपनी के निदेशक पद पर कार्यरत हैं तो इसके पीछे उनकी माँ ही प्रेरणा बनीं जिन्होंने उन्हें प्रत्येक अवसर पर उनका साथ दिया। पीएसआईटी की वाइस चेयरमैन निर्मला सिंह ने उपस्थित सभी महिलाओं को समाज में बढ़ चढ़कर अपनी सहभागिता प्रदान करने की बात कही। न्यास की राष्ट्रीय मंत्री कल्पना पांडे ने बताया कि वे झांसी में जरूरतमंदों के लिए सेवाकार्य करने के साथ-साथ ज्योतिष के