कानपुर 23 दिसंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस ऍन सेन बी वी पी जी कॉलेज की ऍन ऐस ऐस यूनिट (काडोम्बिनी देवी) के द्वारा महाविद्यालय परिसर में नेत्र परिक्षण शिविर का आयोजन किया गया माँ सरस्वती को माल्यार्पण कर इस शिविर का शुभारम्भ प्राचार्या प्रो. (डॉ) सुमन के नेत्र परिक्षण से प्रारम्भ हुआ यह नेत्र परिक्षण शिविर सेंटर फॉर साइट के डॉ अलोक सचान एवम उनकी तकनीशियन टीम अभिनव मिश्रा, अनुराग शुक्ल एवम राजीव के द्वारा संपन्न किया गया,
इस शिविर में १०० छात्राओं, ५० अभिवावको, १० चतुर्थ श्रेणी कर्मचारीगण, १२ तृतीया श्रेणी कर्मचारीगण, २० प्रवक्ताओं ने अपनी नेत्रों का परिक्षण करवाया कैंप कोऑर्डिनेटर प्रो. चित्रा सिंह तोमर एवम डॉ. प्रीति सिंह ने सभी छात्राओं को कैंप में भाग लेने के लिए उत्साहित किया तथा प्राचार्य प्रो. (डॉ.) सुमन ने कैंप की सफलता पर सबको बधाई दी, कैंप का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया
महिला जगत
डी जी कॉलेज में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित
कानपुर 23 दिसंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, डी जी कॉलेज में भूगोल विभाग एवं मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान में एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें छात्राओं ने उत्साह पूर्वक भाग लिया।
प्राचार्य डॉ अर्चना वर्मा ने बताया कि यह प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता डॉ संगीता सिरोही तथा डॉ.सुषमा शर्मा के कुशल निर्देशन में आयोजित की गई।
उक्त प्रतियोगिता में टीम बी से नलिनी पटेल, महाम शफीक, आराधना व महिमा गुप्ता ने प्रथम; टीम ए व टीम डी से ममता, लक्ष्मी, नंदिनी, शुभी दीक्षित,अर्चना दीक्षित, पूर्णिमा, निधि व रागिनी कुमारी ने संयुक्त रूप से द्वितीय तथा टीम सी से शिवांशी राठौर, श्वेता यादव, मानसी व साहू दिव्यांका ने तृतीय स्थान प्राप्त किया अरीशा व निखत स्कोरर रही।
आयोजन को सफल बनाने में विभाग की सभी प्राध्यापिकाओं डॉ अंजना श्रीवास्तव, डॉ शिप्रा श्रीवास्तव, डॉ श्वेता गोंड, डॉ ज्योति आदि का सहयोग सराहनीय रहा।
क्राइस्ट चर्च कॉलेज में राष्ट्रीय जेंडर अभियान के अंतर्गत मिशन शक्ति द्वारा महिला सशक्तिकरण व घरेलू हिंसा विषय पर एक चर्चा आयोजित
कानपुर 22 दिसंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय जेंडर अभियान के अंतर्गत मिशन शक्ति द्वारा महिला सशक्तिकरण व घरेलू हिंसा को कैसे रोके इस विषय पर एक चर्चा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन मिशन शक्ति प्रभारी डॉ मीतकमल के द्वारा प्राचार्य डॉ जोसेफ डेनियल के दिशा निर्देशन में किया
गया। की वूमन सेल की कनवीनर डॉ शिप्रा श्रीवास्तव और कॉलेज की आईसीसी की
चेयर पर्सन सूफिया शाहब मुख्य वक्ता रही। डॉ शिप्रा ने छात्रों को घरेलू हिंसा व गुड और बैड टच के विषय में जानकारी दी। डॉ सूफिया ने बताया कि किस प्रकार आईसीसी का गठन हुआ और इसका उद्देश्य कालेज होने वाली समस्याओं का समाधान करना है। किस प्रकार एक महिला ही महिला को सशक्त बना सकती है ये भी समझाया गया। घरेलू हिंसा के अन्य पहलू और सरकार के वन स्टॉप सेंटर भी चर्चा के विषय रहे। कॉलेज की प्राचार्य सबीना बोदरा ने छात्राओं को समझाया की उन्हे अपने सशक्तिकरण का सदुपयोग करना चाहिए। छात्रा खुशी होटवानी ने सबको सरकार द्वारा चलाए गए महिला सशक्तिकरण के अभियानों से अवगत कराया। कुछ छात्र छात्राओं ने कविता के माध्यम से कार्यक्रम में अपना योगदान दिया
एस. एन. सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज में एस. रामानुजन जी की जयंती के उपलक्ष में मनाया गया राष्ट्रीय गणित दिवस
कानपुर 22 दिसंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. एन. सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज कानपुर के विज्ञान संकाय एवं ट्रेंनिंग एंड प्लेसमेंट सेल द्वारा एस. रामानुजन जी की जयंती पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय गणित दिवस के अवसर पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता, विकास जैन जी , सुजीत सिंह जी, प्रबंध समिति के सचिव पी के सेन एवं प्राचार्य डॉ सुमन ने दीप प्रज्वलित कर किया।
मुख्य वक्ता विकास जैन जी ने रामानुजन जी की समकालीन परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता के बारे में छात्राओं को विस्तृत जानकारी दी। अन्य प्रमुख वक्ता सुजीत सिंह जी ने अनेक गणितीय सूत्रों के बारे में भी बताया की आज के बढ़ते कंपटीशन के दौर में छात्र कैसे इनका प्रयोग करके कम समय में ही प्रश्नों को हल कर सकते हैं। प्राचार्या प्रो.(डॉ.) सुमन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि आज के समय में छात्र एक विषय या क्षेत्र को लेकर भ्रमित रहते हैं इसलिए वे ज्यादा सफल नहीं हो पाते हैं। एक ही क्षेत्र में अधिक रुचि रखने की प्रवृत्ति ने ही रामानुजन को एक महान गणितज्ञ के रूप में पहचान दिलाई।एक महान प्रतिभा के जन्मोत्सव पर उनके नेक विचारों पर चलने का प्रण, हमारी सफलता के सफर की राहें आसान कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया की महाविद्यालय में स्थापित ट्रेंनिंग एंड प्लेसमेंट सेल द्वारा छात्राओं के ज्ञानवर्धन, विकास और रोजगार से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम करवाता रहेगा जिससे छात्राओं का सर्वांगीण विकास हो सके।
कार्यक्रम का संचालन विज्ञान संकाय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अमिता सिंह ने किया व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. निशा वर्मा ने किया। कार्यक्रम में प्लेसमेंट सेल की अध्यक्षा प्रो गार्गी यादव , सदस्या डॉ. कोमल सरोज व विज्ञान संकाय की एसिटेंट प्रोफेसर डॉ शिवांगी यादव , कु वर्षा , कु तय्यबा, डॉ समीक्षा , डॉ राई घोष एवं समस्त प्रवक्ताएं और छात्राएं उपस्थित रही।
जीवन की कठनाइयो से हार कहा मैं मानी हूं
गर्दिश में थे सितारे मेरे फिर भी मैं मुस्काई हूं।
अपनो की खुशियों के खातिर रोज ही मैं बिखरी हूं
बिखरे तिनके खुद चुन लू इतना साहस लाई हूं
जीवन की कठनाइयों से…
थक गया मन मेरा औरों के लिए मैं क्या बोलूं
जब शर्म ने उनको छुआ नहीं मैं शब्दों में क्या बोलूं
चारदीवारी मुस्काए खड़े मैं बिंदु कहा कह पाई हूं
कठिनाईयां मुझसे पूछ रहीं इतना साहस कहा से लाई हैं।
जीवन की कठनाइयों…..
बिन सुविधा रह भी लू पर मान बिना न रह पाऊं। बिन रोटी मैं रह भी लू अपमान का घूट न पी पाऊं।
झिट छोर खड़ी हो जाऊ पर मर्यादा तोड़ न पाऊं मैं।
जीवन की कठिनाइयों से हार कहा …….
दो घर होगे मेरे यह परिभाषा सब ने भेदी थी।
लहू लगेगा दीवारों पर मेरा ये राज न उनने खोला था
रंग लहू देकर दस बरस बिताए मैंने हैं
जीवन की ……
खुद पर बीती भूल गई मैं अंश पे छाले न सह पाऊं ।
अश्क को पी कर रह जाती मुंह से कुछ न कह पाऊं।
अभिलाषाएं अब टूट रही व्यथा न मन की कह पाऊं।
नया सबेरा खिलेगा एक दिन खुद से ही मैं कह पाऊं
जीवन की ..
वंदना बाजपेई
Read More »वैधव्य
“अरे संजय लेट हो जाएगा…. उठो! ऑफिस के लिए लेट हो रहा है।” आज फिर मैं देर तक सोती रही (मन ही मन बढ़बढ़ाते हुए बोली)। जल्दी से फ्रेश होकर चाय बनाई और चाय लेकर कमरे में संजय को उठाने आई। कमरे में आते ही जैसे मैं वर्तमान में आ गई, शायद जैसे कोई सपना देख रही थी मैं। मेरा जी धक् से रह गया और मैं निढाल होकर पलंग पर बैठ गई। अतीत के पन्ने मेरे मानस पटल पर चित्रित होने लगे। संजय को साथ छोड़े हुए दो बरस हो रहे थे लेकिन मैं अभी भी संजय के साथ साथ जी रही थी। मैं संजय के बिना जीने की कल्पना को स्वीकार नहीं कर पा रही थी। मैं अभी भी पुराने दिनों की याद में जी कर अपने अवसाद को बढ़ा रही थी। संजय से आगे मेरी सोचने समझने की शक्ति खो चुकी थी। मैं हर उस चीज से भाग रही थी जो मुझे अकेलेपन का एहसास करवा रही थी। शायद मैं अपने आप से दूर होकर एक अलग ही दुनिया में जीने लग गई थी। दूसरों की बातें, सलाह सब मुझे बोझ लगते। वो सब अजनबी लगते जो मुझे नियमों में बांधने की कोशिश करते।
संजय के साथ बिताए हुये पल अभी भी जीवंत थे। मैं हर कुछ देर में समय से पीछे चली जाती और अतीत में जीने लगती। संजय का मुझे अति प्रेम करना ही शायद मुझे उनसे दूर नहीं कर पा रहा था। अपने प्यार के घेरे में मुझे इस तरह बांध रखा था उन्होंने कि उनके आगे मेरी दुनिया खत्म थी। वो मेरा हाथ थामें हर जगह साथ रहते। कहीं भी जाना हो, घूमना हो मैं साथ में ही रहती थी। बच्चों की जिम्मेदारियों से मैं फ्री हो गई हो थी और हम दोनों ज्यादातर वक्त साथ बिताते थे। बेटा बेटी की शादी कर दी थी और वह अपने परिवार में व्यस्त हो गए थे। अब हम दोनों के पास पहले से अधिक समय था और हम अक्सर देशाटन को निकल जाते।
सब कुछ सामान्य चल रहा था मगर यह किसे खबर थी कि जिंदगी की तस्वीर बदलने में वक्त नहीं लगता। एक दिन संजय का ब्लडप्रेशर हाई हो गया और उन्हें पैरेलेटिक अटैक आ गया। जीवन जैसे थम सा गया था। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि सब कैसे ठीक करूं? उनका दाहिना हिस्सा पूरा बेकार हो चुका था। डाक्टर कोशिश कर रहे थे उन्हें ठीक करने की। दवाइयों के साथ साथ फीजियोथेरेपी भी चल रही थी लेकिन नतीजा सिफर था। अब वो पूरी तरह से मुझ पर निर्भर थे। मैं जैसे तैसे परिस्थितियों को संभाल रही थी । बेटी बेटा भी अपनी तरफ से सहयोग कर रहे थे लेकिन नौकरी और घर की व्यस्तता के कारण वह बहुत ज्यादा साथ नहीं दे पा रहे थे।
बेटा:- “मां! महीना हो गया है, मुझे दिल्ली वापस जाना होगा। शुभम का स्कूल मिस हो रहा है और प्रिया की भी छुट्टियां पूरी हो गई है। मैं आता रहूंगा।”
मैं:- “ठीक है बेटा! समय निकालते रहना।”
बेटी:- “मां मुझे भी जाना होगा और अब रोज-रोज आना संभव नहीं है। घर में सब को खटकता है। कल ही मम्मी जी कह रही थी कि जो हो गया सो हो गया अब खुद को संभालो और घर पर ध्यान दो। मैं बीच-बीच में आती रहूंगी आपसे मिलने।”
मां:- (असहाय भाव से) ठीक है बेटा, जैसा ठीक लगे। जब भी समय मिले आ जाया करना।”
मैं कठिन होती जा रही परिस्थिति को सोचने संभालने और संजय की बीमारी से चिंतित होने लगी थी। मैं सोचने लगी कि जीवन में जो लोग अपने महसूस होते हैं बुरे वक्त में वो भी पराए हो जाते हैं। अपने आप को खुद ही मजबूत कर आगे बढ़ना पड़ता है। मैं साहस करके अकेले ही स्थिति को संभालने में लग गई। सबसे पहले डॉक्टर से विचार-विमर्श करके एक नर्स की व्यवस्था की, जो संजय को संभालने में मेरी मदद कर सके। फिर घर की व्यवस्था की ओर ध्यान दिया। उसे व्यवस्थित करके मैंने बिजनेस पर ध्यान दिया। मैंने दुकान जाने का समय बांधा ताकि संजय को अनदेखा ना कर सकूं। हमारी मिठाई की दुकान होने के कारण सुबह सुबह काम ज्यादा रहता था। दूध के आने से लेकर मिठाइयां बनाने में सुबह सुबह व्यस्तता ज्यादा रहती थी। अभी तक संजय ही सब संभालते थे मुझे कभी देखने की जरूरत ही नहीं पड़ी लेकिन अब यह जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई थी। सुबह चार बजे उठकर फारिग होकर दुकान के लिए निकल जाती थी। वहां सब को निर्देशित करके वापस घर आ जाती थी और संजय को संभालती थी। ऐसे कठिन समय में मेरी मां मेरा बहुत साथ निभा रही थी। दोपहर से लेकर शाम तक जब मैं दुकान पर होती थी तब तक मां ही संजय की देखरेख करती थी। इसी तरह सब कुछ चल रहा था।
कुछ समय तक तो सब ठीक रहा फिर संजय की तबीयत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। उनकी बाडी उन्हें सपोर्ट नहीं कर रही थी। उन्हें हर थोड़े दिनों में एक नई बीमारी हो रही थी। उन्हें हॉस्पिटलाइज किया गया डॉक्टरों की निगरानी में भी संजय की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था और फिर एक दिन वो मुझे छोड़ कर चले गए। यह सारी घटना मेरे जेहन से हटती नहीं। एक आघात, एक अकेलापन, संजय से दूर होने की छटपटाहट ने मुझे अवसाद ग्रस्त कर दिया था। मुझे भ्रम स्वरूप संजय दिखते रहते। मेरे ख्यालों में भी संजय जीवंत रहते। कई बार डॉक्टरों के साथ काउंसलिंग की, डिप्रेशन की दवाइयां ले रही थी मगर मैं वास्तविकता से भाग रही थी। घर छोड़कर यहां वहां घूमने निकल जाती थी क्योंकि घर में हर जगह संजय की यादें बसी हुई थी और वहां पर मैं खुद को अकेला पाती थी।
जब आपके हाथ में कुछ ना हो और जब सबकुछ आपके हाथ से छूटने लगे तब ईश्वर आपका हाथ थाम लेते हैं। शायद ईश्वर ने भी मेरा हाथ थाम लिया था। सोमनाथ जाते हुए ट्रेन में मिली महिला सहयात्री के रूप में। वह महिला सहयात्री जो कि वृद्ध आश्रम की देखरेख करने वाली संचालक थी। मेरी उससे मित्रता हुई उसने मुझे अपने आश्रम में आमंत्रित किया और कहा कि वहां आपको कुछ अलग अनुभव होगा। आप जरूर आइएगा। उन्होंने अपने आश्रम का पता दिया। कुछ घंटे साथ रहकर वह अपने गंतव्य पर उतर गई। मैं घर आकर सोचने लगी कि वह अकेली महिला कितनी विश्वास और ऊर्जा से भरी हुई थी। एक दिन उसके आश्रम जरूर जाऊंगी, यह सोचकर मैं घर और दुकान में व्यस्त हो गई। हम व्यापार करने वालों की कोई छुट्टी नहीं रहती, सब दिन समान रहते हैं। रविवार का दिन था। आज सुबह से ही दुकान में भीड़ जरा ज्यादा ही थी तो दुकान से हिल पाना भी मुश्किल हो रहा था। कही बाहर जाने का तो सवाल ही नहीं था।
दोपहर का वक्त था इस समय काम ज्यादा नहीं था। मैं घर जाने का सोच रही थी और दराज बंद करने के लिए चाबी निकालने के लिए पर्स में हाथ डाला कि वृद्धा आश्रम वाला कार्ड मेरे हाथ में आ गया। मैंने सोचा कि चलो आज यहीं जाकर आया जाए और मैं आश्रम की ओर चल दी।
मेरी कल्पना से परे मेरे लिए एक नया माहौल था आश्रम का। कई महिलाएं बगीचे का, कोई किचन का, कोई सफाई का हर महिला किसी न किसी काम में व्यस्त थी। कुछ महिलाएं जो ज्यादा उम्र कि होने के कारण काम नहीं कर सकती थी या बीमार रहती थी, कुछ महिलाएं उनकी देखभाल कर रही थी। यह सब मेरी आंखों को सुखद लगने के साथ-साथ दुख और आश्चर्य भी हो रहा था कि यह महिलाएं आखिर यहां क्यों है? और किस वजह से उन्हें अकेला छोड़ दिया गया है? कुछ महिलाओं से मैंने दोस्ती की और उन सबकी अलग-अलग कहानी थी। कोई दहेज, कोई घरेलू हिंसा, किसी के बच्चे और पति ने छोड़ दिया, तो कोई सहारा ना होने के कारण यहां पर थी। इनके दुख के आगे मुझे अपना दुख बौना जान पड़ा। मैं सोचने लगी कि ईश्वर ने मुझे इतना सक्षम बनाया है कि मैं अपने दुख का सामना कर सकती हूँ और अपनी मदद के साथ साथ दूसरों की भी मदद कर सकूं। मैंने हर रविवार इन महिलाओं से मिलने का निश्चय किया और मैं हर रविवार इनके पास आने लगी। वहां कई महिलाओं से मेरी दोस्ती हो गई। मैं उनके लिए कुछ ना कुछ खाने की चीज जरूर ले जाती क्योंकि मन का रास्ता पेट से होकर जाता है ऐसा सुना था। मैं यथासंभव उनके कामों में मदद भी करने लगी थी। मुझे अब एक नया परिवार मिल गया था, मैं धीरे-धीरे अपने दुख से बाहर आने लगी थी और अब मैं इन्हीं लोगों के साथ अपनी सारी खुशियां बांटने लगी थी। मैं पलंग से उठी और लान में आराम से चाय पीकर अपनी दि
नचर्या में व्यस्त हो गई।
~ प्रियंका वर्मा महेश्वरी
एस.एन. सेन बालिका विद्यालय पी.जी. कालेज में “किशोरावस्था में स्वास्थ्य एवं पोषण” विषय पर वार्ता आयोजित
कानपुर 19 दिसंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस.एन. सेन बालिका विद्यालय पी.जी. कालेज में गृह विज्ञान विभाग द्वारा एक वार्ता का आयोजन किया गया ।जिसका विषय “किशोरावस्था में स्वास्थ्य एवं पोषण” निर्धारित किया गया।
विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ मोनिका शुक्ला ने कहा कि किशोरावस्था मानव जीवन में माइलस्टोन की तरह कार्य करती है जिसमें विशेष शारीरिक परिवर्तन के साथ रीप्रोडक्टिव ऑर्गन भी सुचारू रूप से कार्य करने लगते हैं अतः पौष्टिक तत्वों की मांग बढ़ जाती है। मुख्य वक्ता के रूप में रघुनाथ गर्ल्स पी.जी. कॉलेज मेरठ की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ श्वेता त्यागी ने कहा कि छात्राओ मे मासिक धर्म की समस्या बहुत बढती जा रही है। डॉक्टर शिवागी यादव ने शारीरिक बदलाव मे पोषक तत्वों के महत्व पर प्रकाश डाला।डॉअमिता सिंह असिस्टेंट प्रोफेसर एस.एन. सेन बी.वी. पी.जी. कॉलेज ने किशोरावस्था मे मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के बारे मे बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर सुमन द्वारा मुख्य अतिथि को पुष्प गुच्छ भेंट करके किया गया। कार्यक्रम का संचालन गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.मोनिका शुक्ला द्वारा किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर सुमन ने कहा ‘ऐसे कार्यक्रम छात्राओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।महाविद्यालय की छात्राएं अस्मिता सिंह, आन्या अग्रवाल, प्रज्ञा वर्मा, पल्लवी निगम, दीक्षा सिंह, समृद्धि बाजपेई आदि ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में सभी शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
डी जी कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा 108वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘विज्ञान ज्योत’ सेरेमनी में भाग लिया
कानपुर 18 दिसंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, डी जी कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा 108वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘विज्ञान ज्योत’ सेरेमनी में प्रतिभाग किया गया।*
इंडियन साइंस कांग्रेस कोलकाता एवं राष्ट्रसंत तुकादोजी महाराज विश्वविद्यालय, नागपुर के सहयोग से दिनांक 3 से 7 जनवरी तक नागपुर में 108वीं इंडियन साइंस कांग्रेस – 2023 का आयोजन किया जा रहा है जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा किया जाएगा।
उक्त कार्यक्रम हेतु विज्ञान जोत का शुभारंभ दिनांक 17.12.2022 को उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक महाविद्यालय डी ए वी कॉलेज, कानपुर से सचिव महाविद्यालय की सचिव श्रीमती कुमकुम स्वरूप द्वारा विज्ञान जोत मशाल को ISCA प्रेसिडेंट प्रो. विजय लक्ष्मी सक्सेना जी को हैंड ओवर करके किया गया। डी जी कॉलेज के सचिव इं .गौरवेंद्र स्वरूप ने हरी झंडी दिखाकर ज्ञान एवं विज्ञान का प्रचार-प्रसार करने के लिए इस ऐतिहासिक विज्ञान जोत की मैराथन को रवाना किया। जिसे एनएसएस व एनसीसी के वॉलिंटियर्स के द्वारा पूर्ण किया गया।
108वीं आई एस सी, विज्ञान ज्योत- ज्ञान की श्रद्धेय ऐतिहासिक ज्योत, छात्रों एवं युवाओं को विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित करने एवम् कल के वैज्ञानिक और अन्वेषक तैयार करने के उद्देश्य से सड़क मार्ग द्वारा कानपुर से नागपुर तक ले जायी जाएगी। इस दौरान यह विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से होकर, 3 राज्यों को पार करते हुए मेजबान शहर तक पहुंचने के लिए 3000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के नेहरू युवा केंद्र संगठन तथा राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के युवाओं को प्रेरित करने हेतु उत्साह पूर्वक विज्ञान जोत का समर्थन किया जाएगा।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रो. अशोक सक्सेना, एमएम एक्टिव की पूरी टीम, डीएवी प्राचार्य प्रो.अरुण कुमार दीक्षित, डॉ राजुल श्रीवास्तव, डॉ संगीता सिरोही, समस्त प्राध्यापको, प्राध्यापिकाओं समेत छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
तुम जीतते रहे और मैं हारती रही
रिश्तो की बाज़ियाँ चलती रही… तुम जीतते रहे और मैं हारती रही ….मगर अफ़सोस नहीं था मुझे इस हार का..जितनी बार मै हारती गई, भीतर से जीत का अहसास होता चला गया।”
ज़िन्दगी इक शतरंज ही है दोस्तों। हार जीत तो तय है “कभी मेरी कभी तेरी”…
खेल चलता रहे ,तो ज़ाहिर है ,चाले भी चलनी पड़ती है ,मगर खेल को चलाते वक़्त कई बार शय और कई बार मात मिलती है और हर बार खुद को बचाया जाता है यही ज़िंदगी है दोस्तों !हार हो जाये कभी तो घबराना नहीं,जीत हो जाये तो इतराना नही !! बस इतना याद रखिए।
ज़िन्दगी बस इक खेल ही है।खेल में “हार जीत”…खेल के साथ ही ख़त्म हो जाती ..जब खेल ख़त्म होगा.. तो न आप होंगे . न आपकी जीत होगी ,न ही आप की हार .. इस लिए ज़िन्दगी को बहुत गंभीरता से न ले कर ज़रा हल्के से लीजिए जनाब।
छोड़िये सब झंझट और वक़्त के साथ चलिए ,जो मिल रहा है उसी में ख़ुश रहिये।बहुतो को तो ये भी नसीब नहीं…और मैं अच्छे से ये भी जानती हूँ।तुम हर बाज़ी जीत जाओगे और सब मुश्किलों को बेहतर से मात दे पाओगे।
🌹यू भी दोस्तों !
जीतने वाला सिकन्दर तो हो सकता है मगर जिसे ये पता हो “कहाँ पर क्या हारना है “वो ही असल में बादशाह कहलाता है और सब के दिलों पर हकूमत भी वही कर पाता है।हार को कभी कम मत आंकिए।कई बार हम हार कर बहुत कुछ जीत लेते हैं बस यही याद रखने की बात है
लेखिका स्मिता ✍️
टाटा कैंसर हॉस्पिटल के अध्ययन के अनुसार स्तन कैंसर के मरीजों के इलाज में योग को शामिल करना बहुत लाभकारी है
टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के एक अध्ययन के अनुसार स्तन कैंसर के रोगियों के उपचार में योग को शामिल करना बहुत लाभकारी है। कैंसर के इलाज में योग को शामिल करने से रोग मुक्त उत्तरजीविता (डीएफएस) में 15 प्रतिशत और समग्र उत्तरजीविता (ओएस) में 14 प्रतिशत सुधार देखा गया है।

योग परामर्शदाताओं, चिकित्सकों के साथ-साथ फिजियोथेरेपिस्ट से प्राप्त जानकारी के साथ-साथ योग उपायों को स्तन कैंसर के रोगियों और इस रोग से मुक्त हुए लोगों की जरूरतों के अनुसार, उनके उपचार और रोगमुक्ति के विभिन्न चरणों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था। योग प्रोटोकॉल में विश्राम और प्राणायाम की नियमित अवधि के साथ आसान और स्वास्थ्यकर आसनो को शामिल किया गया। इन आसनों को योग्य और अनुभवी योग प्रशिक्षकों द्वारा कक्षाओं के माध्यम से लागू किया गया। इसके अलावा, अनुपालन बनाए रखने के लिए प्रोटोकॉल के हैंडआउट्स और सीडी भी उपलब्ध कराये गए।
स्तन कैंसर में योग का उपयोग सबसे बड़ी नैदानिक परीक्षण वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि यह भारतीय परंपरागत उपचार का ऐसा पहला उदाहरण है जिसका मजबूत नमूनों के आकार के साथ रैन्डमाइज़्ड अध्ययन के मजबूत पश्चिमी ढांचे में परीक्षण किया जा रहा है। स्तन कैंसर न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर महिलाओं को प्रभावित करने वाला आमतौर पर होने वाला कैंसर है। इससे महिलाओं में अधिक चिंता व्याप्त रहती है। इस कारण महिलाओं को पहले कैंसर के डर से जीवन समाप्त होने का खतरा और दूसरे इस खतरे के साथ-साथ इस रोग के उपचार के दुष्प्रभाव और उससे निपटने की चिंता के कारण दोहरी मार झेलनी पड़ती है। यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि परिश्रम और मजबूती के साथ योग की प्रक्टिस ने जीवन की उत्कृष्ट गुणवत्ता को बनाए रखने में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर दी है और योग ने इस रोग की पुनरावृत्ति और इससे होने वाली मृत्यु के जोखिम को संख्यात्मक रूप से 15 प्रतिशत तक कम कर दिया है।
डॉ. नीता नायर ने अमरीका में वार्षिक रूप से आयोजित किए जाने वाले विश्व के सबसे प्रतिष्ठित स्तन कैंसर सम्मेलनों में से एक, सैन एंटोनियो स्तन कैंसर संगोष्ठी (एसएबीसीएस) में एक स्पॉटलाइट प्रस्तुति के रूप में प्रस्तुत स्पॉटलाइट शोध-पत्र प्रस्तुत किया। जिसमें स्तर कैंसर पर योग के ऐतिहासिक प्रशिक्षण प्रभाव प्रस्तुत किए गए हैं। इस सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए हजारों शोध-पत्रों में से कुछ को स्पॉटलाइट विचार-मिमर्श के लिए चुना गया है और उपायों की नवीनता तथा स्तन कैंसर के परिणामों को प्रभावित करने वाले पहले भारतीय उपाय के कारण हमारा अध्ययन सर्वथा इसके योग्य है।
Read More »
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर