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महिला जगत

एस एन सेन महाविद्यालय में मेरी माटी, मेरा देश” कार्यक्रम की श्रंखला में कॉलेज परिसर में अमृत कलश वाटिका की स्थापना की

कानपुर 14 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. ऍन. सेन महाविद्यालय की ऍन. एस. एस. यूनिट ने स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के अंतर्गत “मेरी माटी, मेरा देश” कार्यक्रम की श्रंखला में अमृत कलश वाटिका की स्थापना कॉलेज परिसर में की जिसमें ऍन. एस. एस. की स्वयंसेविकाओं ने औषधिय पौधे लगाकर वाटिका के संरक्षण की शपथ ली । महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो० सुमन ने तुलसी का पौधा लगाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया । चीफ प्रॉक्टर ममता अग्रवाल, कार्यक्रम अधिकारी प्रो० चित्रा सिंह तोमर, सह-प्रभारी डॉ० प्रीति सिंह तथा अन्य शिक्षिकाओं ने कार्यक्रम में भाग ले कर कार्यक्रम सफल बनाया

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कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय में “स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना” के अंतर्गत छात्राओं को स्मार्टफ़ोन वितरित

कानपुर 13 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय, स्वरूपनगर में “स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना” के अंतर्गत सत्र 2022-23 की स्नातक तृतीय वर्ष की समस्त छात्राओं को स्मार्टफ़ोन का वितरण किया गया। कुल *213* छात्राओं को स्मार्टफ़ोन वितरित किए गए। उत्तर प्रदेश शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य छात्र- छात्राओं को डिजिटल माध्यमों से जोड़कर अधिक सशक्त एवं जागरूक बनाना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्राचार्या प्रो. पूनम विज ने सर्वप्रथम प्रबंध समिति के सचिव महोदय डॉ. डी.सी. गुप्ता का स्वागत किया एवं छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के तकनीकी युग में स्मार्टफ़ोन, टैबलेट जैसे उपकरण हमें सूचनाओं एवं ज्ञान के असीमित भंडार से जोड़ते हैं। इन माध्यमों के समुचित उपयोग से हम स्वयं को शिक्षित एवं जागरूक बना सकते हैं। सचिव महोदय एवं प्राचार्या के द्वारा छात्राओं को स्मार्टफ़ोन प्रदान किए गए। छात्राएँ स्मार्टफ़ोन पाकर ख़ुशी से झूम उठीं।
महाविद्यालय की समस्त शिक्षिकाओं एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सहयोग से वितरण का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऑंचल तिवारी ने किया। कार्यक्रम का संयोजन उक्त योजना की नोडल अधिकारी सुश्री कल्पना देवी एवं डॉ. ऑंचल तिवारी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

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एस.एन सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में “विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस” के उपलक्ष्य में “training: the body mind and soul by using acupressure techniques” विषय पर कार्यशाला आयोजित

कानपुर 11 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस.एन सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज के सभागार महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा “विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस” के उपलक्ष्य में “training: the body mind and soul by using acupressure techniques” विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की ग‌ई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता वरदान संस्थान की निदेशिका डॉ. पल्लवी रस्तोगी, प्राचार्या प्रो. सुमन, प्रबंध समिति की सदस्या दीपाश्री सेन, मुख्य अनुशासिका कैप्टन ममता अग्रवाल , मनोविज्ञान विभागाध्यक्षा डॉ. मोनिका सहाय तथा अन्य वरिष्ठ शिक्षिकाओं ने दीप प्रज्वलन व सरस्वती मां के समक्ष माल्यार्पण से किया। अतिथियों का स्वागत तथा आभार स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया गया |
कार्यक्रम में वरदान संस्थान की निदेशिका डॉ. पल्लवी ने छात्राओं को विभिन्न प्राकृतिक चिकित्साओं तथा एक्यूप्रेशर टेक्निक्स के माध्यम से अपने मन व शरीर को स्वस्थ व तनाव मुक्त रखने तथा अपने जीवन को अधिक शांत व खुशहाल बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया। जिससे वे भविष्य में अपने जीवन व कार्य स्थल की समस्याओं को और अधिक अच्छे से समाधान कर सकें बेहतर प्रदर्शन करें।

कार्यक्रम के अंत में प्रो. निशि प्रकाश, विभागाध्यक्षा समाजशास्त्र विभाग ने कार्यक्रम की सफलता हेतु सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया| कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संपादित होने में मनोविज्ञान विभाग की प्रवक्ताओं सुश्री प्रीति यादव, सुश्री मयूरिका गुप्ता आदि ने सक्रिय योगदान दिया |

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एस.एन सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में “करियर प्रॉस्पेक्ट्स विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित

एस.एन सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज सभागार में महाविद्यालय की प्लेसमेंट सेल तथा काउंसलिंग सेल के द्वारा “करियर प्रॉस्पेक्ट्स  विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया |
कार्यक्रम का शुभारंभ आज के मुख्य वक्ता महिन्द्रा एजुकेशनल इंस्टीट्यूट से आए मुख्य वक्ता हिरेंद्र मिश्रा एवं उनकी टीम, रोज़गार प्रकोष्ठ प्रभारी प्रोफेसर गार्गी यादव, परामर्श कोष्ठ प्रभारी डॉ. मोनिका सहाय, तथा महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर सुमन ने दीप प्रज्वलन व सरस्वती मां के समक्ष माल्यार्पण से किया। अतिथियों का स्वागत तथा आभार स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया गया | छात्राओं को संगोष्ठी में प्रतियोगिताओं हेतु अनिवार्य सामान्य अध्ययन की तैयारी करने की तकनीकी जानकारियां प्रदान की गईं तथा रोजगार से संबंधित सभी जिज्ञासाओं का समाधान सेमिनार में किया गया | कार्यक्रम मे समिति के सदस्यों प्रो. निशा वर्मा, डॉ. अनामिका, प्रीति यादव एवं श्वेता रानी ने सक्रिय योगदान दिया |

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‘‘आधुनिक शिक्षा एवं अनुशासित जीवन के मूल मंत्र

लखनऊ 10 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, राम प्रसाद बिस्मिल मेमोरियल पब्लिक स्कूल, काकोरी, लखनऊ के तत्त्वावधान में नक्षत्र फाउण्डेशन द्वारा ‘‘आधुनिक शिक्षा एवं अनुशासित जीवन के मूल मंत्र ‘‘ विषयक शैक्षिक दक्षता वृद्धि व्याख्यानमाला की द्वितीय प्रस्तुति का आयोजन किया गया। उक्त व्याख्यानमाला में वक्ता के रूप में डा0 सतीश तिवारी, असिस्टेंट प्रोफेसर, स्कूल ऑफ दर्शन एवं संस्कृति, श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, कटरा, जम्मू और कश्मीर, विद्यालय के प्रबंधक मो0 इरफान हुसैन, विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती विनीता अग्निहोत्री, नक्षत्र फाउण्डेशन से सुश्री सोनम सिंह उपस्थित रहे।

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एस ऍन सेन बी वी पी जी कॉलेज में “मेरी माटी मेरा देश अभियान’’ के अंतर्गत कार्यक्रम अयोजित

कानपुर 10 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, भारत सरकार युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, युवा कार्यक्रम विभाग रा.से.यो. क्षेत्रीय निदेशालय लखनऊ व एन.एस.एस. प्रभाग नई दिल्ली के पत्रानुसार ’’मेरी माटी मेरा देश अभियान’’ एस ऍन सेन बी वी पी जी कॉलेज में प्रारम्भ किया गया। जिसके अन्तर्गत महाविद्यालय की ऍन एस एस इकाई की स्वयंसेविकाओं से घर के प्रांगण से एक मुट्ठी मिट्टी व एक मुट्ठी चावल मंगाये गये। सर्वप्रथम महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सुमन द्वारा पंच प्रण की शपथ समस्त प्राध्यापक, कर्मचारियों व छात्र-छात्राओं को दिलायी गई। महाविद्यालय की ऍन एस एस इकाई की कार्यक्रम अधिकारी प्रो चित्रा सिंह तोमर ने कहा हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत की मिट्टी के लिये अपने प्राणों की आहुति दे दी। आज भारत के प्रत्येक गाॅंव, शहर की मिट्टी व चावल एकत्र किये जा रहे है। जिसे जिला स्तर पर ससम्मान पहुंचाया जायेगा। इसके उपरान्त प्राचार्य समस्त शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों द्वारा एक कलश में मिट्टी व एक कलश में चावलों का संग्रह किया गया। एवम ऍन एस एस यूनिट की स्वयंसेविकाओं द्वारा महाविद्यालय में सफाई का कार्य भी किया गया। एस एन सेन बालिका विद्यालया पी जी कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के द्वारा “मेरी माटी मेरा देश – अमृत कलश यात्रा” का आयोजन किया गया जिसमें समस्त शिक्षिकाओं, कर्मचारियों ने भी भाग लिया तथा माटी को वंदन व वीरों को नमन करते हुए पंच प्रण की शपथ ली।

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दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज में मेरी माटी मेरा देश – अमृत कलश यात्रा” के अंतर्गत अलग-अलग शहीद स्थलों एवम् स्मारकों की मिट्टियों को लाकर अमृत कलश में एकत्रित किया गया

कानपुर 10 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के द्वारा कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के निर्देशन में “मेरी माटी मेरा देश – अमृत कलश यात्रा” के अंतर्गत एनएसएस वॉलिंटियर्स के द्वारा कानपुर के अलग-अलग शहीद स्थलों एवम् स्मारकों की मिट्टियों को लाकर अमृत कलश में एकत्रित किया गया तथा माटी को वंदन व वीरों को नमन करते हुए पंच प्रण की शपथ ली गई। प्राचार्य प्रोफेसर अर्चना वर्मा जी ने अपने उद्बोधन में छात्राओं को कहा कि उनके द्वारा मेरी माटी मेरा देश अभियान के अंतर्गत किए जा रहे कार्य अत्यधिक सराहनीय व प्रशंसनीय हैं इससे छात्राओं में देशभक्ति की भावना का संचार होता है जिससे उनके अंदर नैतिक मूल्य सर्जित होते हैं। कार्यक्रम में कार्यालय अधीक्षक कृष्णेंद्र श्रीवास्तव, दर्शनशास्त्र की प्रभारी डॉ सुचेता शुक्ला एनएसएस की समस्त वॉलिंटियर्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

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दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज में “भूगोल में भौगोलिक सूचना प्रणाली एवं सुदूर संवेदन तकनीक पर व्याख्यान आयोजित”

कानपुर 9 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में भूगोल विभाग द्वारा एकदिवसीय व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यान के मुख्य वक्ता डॉ मंजीव विश्वकर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, डी बी एस कॉलेज, कानपुर ने भौगोलिक सूचना प्रणाली एवं सुदूर संवेदन तकनीक के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए महत्वपूर्ण जानकारियां देते हुए कहा कि यह भौगोलिक शोध एवम् अन्वेषण की दृष्टि से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि रिमोट सेंसिंग संवेदकों के माध्यम से पृथ्वी के सतह से डाटा जमा करने का काम करता है जबकि जी आई एस डाटा एकीकरण और क्षैतिज विश्लेषण के लिए एक उपकरण होता है। इसका प्रयोग जैव वातावरण की मॉनिटरिंग, आपदा प्रबंधन, रिसोर्स मैनेजमेंट, जलवायु परिवर्तन विश्लेषण, शहरी विकास योजना, यातायात, दूरसंचार, कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य समेत अनेक क्षेत्रों में किया जाता है। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर अर्चना वर्मा ने मुख्य वक्ता तथा सभी का स्वागत किया तथा व्याख्यान विषय की महत्ता को छात्राओं के भविष्य के लिए उपयोगी बताया। व्याख्यान की संयोजिका डॉ शशि बाला सिंह ने व्याख्यान विषय पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ अंजना श्रीवास्तव के द्वारा तथा धन्यवाद प्रस्ताव विभाग की इंचार्ज डॉक्टर संगीता सिरोही के द्वारा किया गया। व्याख्यान असि प्रो डॉ श्वेता गोंड का सक्रिय योगदान रहा। कार्यक्रम में शोध छात्र विवेक चौरसिया, सुभाष, विकास, अनिल, अतुल, विपुल, दिलीप, दीक्षा मालवीया, कल्पना, नेहा, जयललिता तथा विभाग पाई समस्त छात्राएं उपस्थित रही।

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एस. एन.सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज मे विश्व जंतु दिवस के उपलक्ष में माडल प्रतियोगिता आयोजित

कानपुर 4 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता एस. एन.सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज के जन्तु विज्ञान विभाग मे विश्व जंतु दिवस दिवस के उपलक्ष में माडल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर (डॉ.) सुमन तथा निर्णायक मंडल के सदस्य डॉ गार्गी यादव, डॉ प्रीति सिंह ने द्वीप प्रज्वलन करके किया। विषय की जानकारी देते हुए जन्तु विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिवांगी यादव ने बताया कि विश्व जंतु दिवस का महत्व और जंतु संरक्षक के महत्व को बताया।
इस प्रतियोगिता में बी.एससी. प्रथम वर्ष , बी.एससी. द्वितीय वर्ष तथा बी.एससी. तृतीय वर्ष की छात्राओ ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। प्राचार्या प्रोफेसर(डॉ) सुमन मुख्य अतिथि एवं जज डॉ. गार्गी यादव एवं डॉ प्रीति सिंह ने छात्राओं के माडल का अवलोकन एवं मूल्यांकन किया । इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार बी. एससी प्रथम वर्ष की तुलिका चटर्जी, द्वितीय पुरुस्कार बी. एससी प्रथम वर्ष की अंशिका चौरसिया तथा
तृतीय पुरुस्कार काव्या यादव तथा पूजा को मिला।

बी. एससी. तृतीय वर्ष से अनन्या, महक विश्वकर्मा को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।

प्रतियोगिता के अवसर पर रसायन विज्ञान की विभाग अध्यक्ष डॉ गार्गी यादव एवं वनस्पति विभाग की विभागद्यक्ष डॉ प्रीति सिंह ने छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का समापन डॉ शैल वाजपेयी ने सभी शिक्षक तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का धन्यवाद ज्ञापन करके किया। इस मौके पर वनस्पति विज्ञान की डॉ समीक्षा सिंह, रसायन विज्ञान की अमिता सिंह, डॉ मीनाक्षी व्यास, डॉ ममता अग्रवाल समेत महाविद्यालय की अन्य सम्मानित शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।

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वजूद है तुम्हारा मेरी तलाश में

हाथो में जाम थामे विराज पूरी महफ़िल में झूमता सा दिख रहा था..,
कुंवर प्रताप सिंह का बेटा विराज जिसका व्यक्तित्व देखने में बिन्दास ,मन मौजी सा ,मगर अन्दर से गंभीर, शांत व्यक्तित्व का स्वामी था।
विराज की ख़ुशी की वजह सौम्या का पार्टी मे होना ही था ।
शांत स्वभाव वाली सौम्या,..सोने जैसा रंग और उस पर नीले रगं के लिबास में लिपटी पार्टी में सब से मिल रही थी।
कुंवर प्रताप सिंह के चरण स्पर्श कर उनको उनके जन्मदिन की हार्दिक बधाई देती है कुँवर प्रताप सिंह जाने माने शहर के लोगों में से एक है .. सौम्या उनके दोस्त की बेटी जो इंग्लैंड से डिग्री ले आई थी अभी।
विराज की नज़रें सौम्या पर ही थी।धड़कते दिल से सौम्या के पास आया और धीरे से अपने होंठ सौम्या के कान के पास ले जा पूछने लगा ! कब आई इंग्लैंड से ? मुझे बताया नहीं ,कि तुम आने वाली हो।सौम्या ने मुड़ कर देखा तो विराज को अपने बेहद क़रीब पाया।विराज कहता जा रहा था। सौम्या तुम पर तो इंग्लैंड का रंग बिलकुल नही चढा।
वही हीरे जैसी चमकती आँखे जो झील से भी गहरी है ..पार्टी में म्यूज़िक की आवाज़ ऊँची होने पर भी सौम्या विराज की हर बात को सुन पा रही थी। सौम्या ने इक नज़र विराज को देखा, और बिना कुछ कहे आगे निकल गई। विराज सौम्या के पास जा कर कहने लगा !
तुम से बात करनी है मुझे ..इतने सालों के बाद तुम्हें मिल रहा हूँ और तुम ….,
सौम्या बोली !
होश में तो आप आ जायें पहले,फिर बात भी कर लूँगी और फिर जल्दी से कुंवर प्रताप सिंह से इजाज़त ले कर पार्टी से निकल गई। विराज को लगा जैसे कोई हवा का झोंका आया और उसके दिल और दिमाग़ पर तूफ़ान सा छोड़ गया और उसके बाद पार्टी में क्या हुआ,सबसे बेख़बर सा ,लुटा लुटा सोच रहा था।पार्टी तो चल रही है लोग भी है यहाँ, पर मैं क्यों ख़ाली ख़ाली सा महसूस कर रहा हूँ।क्या हो गया मुझे इक दम अचानक से ? वजह भी जानता था विराज ….
ज़िन्दगी में कोई ख़ास ऐसा होता ही है .. जिस के होने,या न होने से बहुत फ़र्क़ पड़ता है ..ऐसा कोई ख़ास शख़्स ,रूह से जुड़ा होता है
जिस के बिना हर चीज़ बे-मायने हो जाती है।और उसकी जुदाई आप की रूह को जला डालती है ।
उसे याद आ रहा था कि कैसे सौम्या और वो इक दूजे को चाहते थे मगर विराज की शादी रोशनी से,जो शहर के जाने माने रईस की बेटी थी तय कर दी गई थी ।जब सौम्या को उसकी सगाई का पता चला तो बिना कुछ कहे लंदन चली गई थी .. .. सौम्या की नाराज़गी से वाक़िफ़ था विराज।
इक रोज़ विराज ने सौम्या को काफ़ी के लिए बुलाया।
सौम्या के लिए न करना आसान नही था।रेस्टोरेन्ट में सौम्या का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा विराज बार बार घड़ी देख रहा था तभी उसने सौम्या को देखा आते हुये देखा…
कच्चे पीले रंग का दुपट्टा ,जो बार बार लहरा कर उसके चेहरे को ढके जा रहा था ,उसपर आँखो पर काला चश्मा बेहद खूबसूरत लग रहा था।
सौम्या की गंभीर आँखों को देख कर विराज बोला! नाज़ है मुझे मेरी पसंद पर ..
तुम कुछ भी न कहो चाहे ,सौम्या मगर
मेरी मौजूदगी तुम्हारी आँखों में आज भी साफ़ दिख रही है…
. वजूद तो तुम्हारा है वहाँ …मगर मेरी ही तालाश में ..
अक्सर तुम्हारी तसवीर देखता हूँ तुम्हारे फ़ोन पर
होंठों पर मुस्कुराहट तो होती है वहाँ..मगर फीकी फीकी सी …. जैसे तुम्हारी आँखे देखती तो सबको है ,मगर ढूँढती मुझे ही है।
सौम्या बोली! इतना जानते हो मुझे ,तो ये भी जानते होंगे कि मैं नाराज़ हूँ आप से।मेरे लिए ,मेरी चाहत के लिए जरा सा भी लड़ नहीं पाये किसी से ..और मुझे नहीं पता था कि आप रोशनी से शादी कर लोगे ।मुझे लगा !आप और मैं …कहते कहते सौम्या का गला भर आया।सौम्या कहती जा रही थी..विराज आप भागते जा रहे हो दुनिया की चाहते ले कर ..और मैं …कुछ न चाह कर ..बस आप तक ही आ कर ठहर गई थी मगर आप वहाँ न ठहर सके।विराज बोला !
तुम ने ये कैसे सोचा कि मैं रोशनी से शादी करूँगा। मेरी मजबूरी थी वो ,शायद तुम्हें नहीं पता।जब मेरी सगाई की हुई ।तब पापा की तबियत इक दम से ख़राब हो गई थी और पापा दिल्ली अस्पताल में दाखिल थे।तब मैं पापा से कुछ नहीं कहना चाहता था ,मगर कुछ दिन बाद मैंने वो रिश्ता खुद ही तोड़ दिया था। रोशनी ने भी इस बात को समझा कि वो मेरे साथ कभी ख़ुश नहीं रह पायेगी।तब तक तुम जा चुकी थी। तुम ने मुझ से कोई सवाल नहीं किया ,न ही कभी कोई जवाब माँगा.. भरोसा नहीं था मुझ पर ,या मेरे प्यार पर ..कितना इन्तज़ार किया है मैंने तुम्हारा ।मैं तुम्हें चाहता था मगर खुद ही जान नहीं पाया मैं, कि तुम मेरे लिए कितनी ज़रूरी थी।तुम्हीं मेरा प्यार हो ,तुम मेरा बचपन हो ,.. तुम ही तो हो जिस ने मेरे दिल पर राज किया है।
सौम्या बोली! तो क्या आप रोशनी को चाहते नहीं थे।पागल हो तुम !
इतना भी पहचान नहीं पाई मुझे।विराज का यूँ सौम्या को पागल कहना ,सौम्या को इक अपनेपन का अहसास करवा रहा था
विराज बोला।रोशनी को बचपन से जानता ज़रूर हूँ मगर अपनी पत्नी के रूप में उसे कभी नहीं देखा था।
मेरी बेशुमार चाहतों की तुम ही अकेली वारिस रही हो।
सौम्या बोली !विराज
पिछले चार सालों में मैंने दर्द तो सहा ,मगर आप से नाराज़ नहीं हो पाई।विराज बोला ! सौम्या किसी से हँस कर बात करना ,प्यार नहीं होता .. ,जो दिल मे छिपा रहता है वही प्यार है,ज़ाहिर रिश्तों मे गहराई नही हुआ करती।रोशनी मेरी दोस्त से ज़्यादा कुछ भी नहीं ..याद है मुझे इक रोज़ तुम ने कहा !तुम मुझ से कभी बात नहीं करोगी ,न ही कभी मिलोगी।ये सोच कर मैं अक्सर बेचैन रहता था ,फिर तुम मुझे छोड़ कर इंग्लैंड पढ़ने चली गई और तुम्हें देखने की मेरी तमन्ना मुझे दिवाना बना दिया करती।कभी कभी तो जैसे पंजाबी में कहते हैं न,खो पढ़ जाना ऐसे तुम्हें देखने के लिए मुझे हुआ करती थी।तुम नहीं थी यहाँ , मैं खुद को काम मे बीज़ी रखने लगा, पार्टियों में जाने लगा,गाने सुनता मगर सकून मुझ से कोसों दूर ही रहा।
तुम्हारी याद मुझे बेचैन रखती।बहुत मिस करता था तुम्हें।
मिस करना जैसा लफ़्ज़ शायद बहुत छोटा है।सौम्या को, ये सब सुनना कहीं न कहीं सकून दे रहा था।अच्छा लग रहा था कि विराज को भी उसकी कमी का अहसास होता रहा है ..जैसे वो खुद महसूस किया करती थी।विराज कहता जा रहा था लोगों की नज़रों में जो मैं दिखता हूँ मैं वैसा बिलकुल भी नहीं .. सौम्या बोली !
विराज मेरी नाराज़गी अपनी जगह थी .. फ़िक्र अपनी जगह थी ..नही चाहती थी कि तुम से बात करूँ कभी ..मगर मुझे भी बार बार तलब उठती थी ..तुम्हें देखने की . ..तुम से बात करने की मगर मैं खुद को रोक लेती थी।
विराज कहने लगा जितनी ऊँची दिवारें तुम बनाती रही अपने इर्द गिर्द ,उतनी ही मेरी चाहत बढ़ती रही।विराज ने सौम्या का हाथ पकड़ कर धीरे से कहा !अगर तुम्हारी इजाज़त हो तो मैं अपने पापा से बात करूँ शादी की ?
और सौम्या ने भरी आँखों से अपना सर विराज के कंधे पर रख दिया जैसे हाँ की स्वीकृति दे रही हो ..
दोस्तों !
ग़लतफ़हमियाँ ही वजह बनती है दूरियों की … वक़्त रहते उन्हें सुलझा लेना चाहिए क्योंकि
कोई भरोसा नही ,कब ज़िन्दगी बेवफ़ाई कर हमारे अपनों को हम से दूर ले जाये और हमारे हाथ तरसने ..तड़पने और बेचैन होने के इलावा कोई रास्ता ही न बचे।
यही मेरी इल्तिजा है सब के लिए ..वक़्त रहते.. अपने दिल के क़रीब रिश्तों को संभाल लीजिए .. —स्मिता केंथ

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