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महिला जगत

क्राइस्ट चर्च कॉलेज में Many voice one science कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 10 फरवरी क्राइस्ट चर्च कॉलेज के रसायन विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. मीत कमल ने किया। इस दौरान छात्रों ने पोस्टर एवं model making competition का प्रदर्शन किया। अतिथि डाॅ निधि श्रीवास्तव (पी पी एन कालेज)ने छात्रों को संबोधित कर भविष्य के लिए प्रोत्साहित किया। प्रतियोगिता का मूल्यांकन पीपीएन कॉलेज के रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. निधि श्रीवास्तव और क्राइस्ट चर्च कॉलेज के रसायन विभाग के प्रोफेसर आशीष के. नथानियल ने किया। कार्यात्मक मॉडल श्रेणी में प्राची गुप्ता (M.Sc. 2nd सेमेस्टर) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, उसके बाद शिवांग शुक्ला और आर्यन गुप्ता (B.Sc. 6th सेमेस्टर) ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि अंबरीन इरशाद (M.Sc. 2nd सेमेस्टर) ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। पोस्टर निर्माण श्रेणी में अक्सा फातिमा (B.Sc. 2nd सेमेस्टर) ने प्रथम पुरस्कार जीता, आर्यन गुप्ता और अजीमा रहबर ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया और अलशुमा (BSc. 6th सेमेस्टर) ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। डॉ. धनंजय डे ने विज्ञान में महिलाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। प्रोफेसर ज्योत्सना लाल ने छात्रों को संपूर्ण कार्यक्रम की अवधारणा तैयार करने में सहायता की। प्रधानाचार्य प्रोफेसर विनय जॉन सेबेस्टियन ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और विजेताओं को उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मकता की सराहना करते हुए सम्मानित किया। उप-प्रधानाचार्य प्रो. श्वेता चंद ने विजेताओं के नवोन्मेषी प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन इल्मा तबस्सुम ने सुचारू रूप से किया। यह पूरा कार्यक्रम प्रिंसिपल प्रोफेसर विनय जॉन सेबेस्टियन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ और उन्होंने इस आयोजन के लिए department of chemistry और global women breakfast IUPAC की टीम को भी धन्यवाद दिया।और प्रो. अनिंदिता भट्टाचार्य द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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स्वच्छ भारत–स्वस्थ भारत अभियान के अंतर्गत स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा लल्लनपूर्वा बस्ती, कानपुर में कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में प्राचार्य प्रो वन्दना निगम के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ दिनांक 11 फ़रवरी को हुआ। सर्वप्रथम स्वयं सेविकाओं ने कैम्प स्थल हुई स्थल की साफ़ सफाई की।स्वयंसेवकों ने बस्ती में सफाई अभियान चलाकर सार्वजनिक स्थलों से कूड़ा-करकट हटाया तथा लोगों को स्वच्छ परिवेश बनाए रखने का संदेश दिया।उसके पश्चात एनएसएस लक्ष्य गीत गाकर कैम्प का शुभारंभ किया। शिविर के प्रथम प्रहर में शारीरिक गतिविधियों में योगा तथा क्रीड़ा गतिविधियां की गई।स्वल्पाहार के बाद शिविर के प्रथम दिवस “स्वच्छ भारत–स्वस्थ भारत अभियान” के अंतर्गत की जाने वाली गतिविधियों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई तथा छात्राओं के द्वारा पोस्टर, स्लोगन आदि तैयार किए गए। बस्ती में विशेष स्वच्छता एवं स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के अंतर्गत रैली निकालकर, नुक्कड़ नाटक, आपसी संवाद तथा पोस्टर-स्लोगन आदि के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्रीय निवासियों को स्वच्छता के महत्व, स्वास्थ्य सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।
इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलायी तथा बताया कि स्वच्छ वातावरण से ही स्वस्थ जीवन संभव है। लोगों को प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने, कूड़े को निर्धारित स्थान पर डालने तथा नियमित सफाई रखने की प्रेरणा के साथ बस्तीवासियों विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों को हाथ धोने की सही प्रक्रिया में प्रशिक्षित किया गया।कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के 50 स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बस्तीवासियों ने इस प्रकार के सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रमों की सराहना करते हुए साफ़ सफ़ाई तथा स्वच्छता की भी शपथ ली। दोपहर के भोजन के पश्चात स्वयंसेविकाओं ने बस्ती के बच्चों के साथ देशज खेलों खेल खो-खो खेलकर तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ राष्ट्रगान गाकरशिविर का समापन किया। शिविर को सफल बनाने में डॉ अंजना श्रीवास्तव, डॉ साधना सिंह, बसंत कुमार तथा ऋषभ का विशेष सहयोग रहा।

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मेरी ज़िंदगी का खूबसूरत गुलाब हो तुम

दोस्तों ! महकता हुआ मखमली गुलाब कुदरत की दी हुई बेहतरीन सौग़ात हमें फूल के रूप में मिली है जिसे वेलेंटाइन के मौक़े पर बहुत से चाहने वाले अपने प्यार का इज़हार करने के लिये ढेरों,

लाल गुलाब देंगे और लेंगे,और बहुत कुछ कहा भी जाएगा जैसे कि “मेरी ज़िंदगी का खूबसूरत गुलाब हो तुम..,एक नाज़ुक सा एहसास ,महकता हुआ जज़्बात हो तुम “🌺…. और कुछ लोग ऐसा भी कहेंगे । “ज़िन्दगी की मेरी ज़रूरत हो तुम ,गुलाब तो खूबसूरत हैं ही मगर गुलाब से भी हसीन हो तुम”… 🌺 और कुछ तो प्रेमी को खुदा का ही ख़िताब दे डालेंगे।

“ सोचते हैं गुलाब दे कर दिल का हाल दिखा दें उन्हें..तुम ख़ुदा हो हमारे लिए ,ये भी बता दें उन्हें…

🌺 वगैरह वगैरह ….!!ढेरों कविताएँ, ढेरों शायरी कही जायेगी…मेरी शुभकामनाएँ है उन के लिए जो अपने अपने पार्टनर या प्रेम की तालाश में है .. कुछ का इंतज़ार आज ख़त्म होगा ,कईयो की तालाश अभी जारी रहने वाली होगी।ये सिलसिला तो सालों से चलता आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा…. पर दोस्तों ! गुलाब उसी को देना ,जिसको आप दिल से चाहते है..जिसके साथ आप हर दुख सुख बाँटना चाहते है। ये बहुत ही महत्वपूर्ण, संवेदनशील नाजुक पल होता है .. इसकी मर्यादा को बनाए रखना ज़रूरी है.. ये फ़ैसला कुछ पलों का नहीं बल्कि उम्र का होना चाहिए । पर अफ़सोस तो ये है !!असल में हमें पता ही नहीं कि प्रेम क्या है। चलिए पहले समझते है प्रेम को …प्रेम जीवन में बहुतो से होता है जैसे कि मांबाप बहन भाई.. अपने दोस्त ,सहेलियों ,अपने सहयोगियों से ,पड़ोसियों से ..रिश्तेदारों से ,देश से ,यहाँ तक की कथा कहानियों से प्रेम हो जाता है ,और तो और भगवान से भी सभी प्रेम ही करते हैं इश्क़ नही ।

🌺प्रेम का मतलब है (लगाव )

…याद रखे अगर एक से ज़्यादा लोगों से आप इश्क़ का दावा करते है समझ जाईये …ये सिर्फ़ लगाव या प्रेम हो सकता है “इश्क़ नही।” इश्क़ तो किसी विरले के हिस्से में आता है। इश्क़ अलग अहसास है .. वो सिर्फ़ एक से ही होगा ,दूसरे से नही .. जब इश्क़ मिलता है तो किसी दूसरे का कोई स्थान रह ही नही जाता। न ही उसकी जगह कोई ओर ले सकता है। इश्क़ तो वो शय है ,वो मिले न मिले पर हम उसी के हो कर रह जाते है अपनी ही मर्ज़ी से। उसे हासिल करना कोई मायने नहीं रखता।वो पास न होकर भी करीब ही महसूस होता है।जहाँ आशिक़ की सिर्फ़ इक झलक पर ही अपनी सारी ज़िंदगी गुज़ार दी जाती है। इसका उदाहरण कृष्ण दीवानी मीरा बाई जी थी.. “जहाँ रूह कह उठती है कि हम उसके बग़ैर संसार को विरान लिखते है ,”और हम कितनी आसानी से कह देते है कि हमें इश्क़ हुआ है ,मगर सच यही है कि हम सब अभी प्रेम में ही है। कोई विरला आशिक ही इस इश्क़ की पाकीज़ा गली से गुज़रता हैं ।आमतौर पर होता क्या है .. बस जवान हुए ,कालेज मे कोई लड़की या लड़का अच्छा लगा तो सोच लिया कि हमे प्रेम हो गया है .. बस गुलाब दे दो और अपने मन की बात कह दो .. और फिर कुछ देर के बाद शादी… और दूसरी ओर इश्क़ जो इतना सस्ता नहीं कि हर किसी को,और किसी से भी हो जाए..न ही इतना आसान है कि इसे हर कोई पा सके।ये मिलेगा उसे ही जिसमे शिद्दत होगी ,गहराई होगी ,सब्र होगा,..इश्क़ खुद तुमसे तुमको माँगता है। क्या कर सकते हो खुद को किसी के हवाले ? दोस्तों!! ये कोई टाइम पास या मस्ती करना नहीं होता।इश्क़ नाईट क्लबों या चकाचौंध से भरी दुनिया में नहीं मिल सकता। इश्क़ गहरा इसीलिए है क्योंकि वो मर्यादित है ,सीमाबद्ध है ,उसके अपने दायरे है और वो दायरों को तोड़ना नही जानता,अपनी या सामाज की खींची हुई लकीर में ही रहता है। इश्क़ आनन्दमय भी हो सकता है और उदासी,बैचेनी बिछोह का भी रूप हो सकता है। प्रेम अगर आसानी से मिल जाये, तो

उसमें गहराई नहीं होगी। मुश्किल से मिला प्रेम मूल्यवान होगा और वही प्रेम धीरे धीरे इश्क़ का रूप होने लगता है….

“इश्क़ बँधता नहीं, न ही इसे

बांधने की कोशिश ही नही करनी चाहिए …जो बाँधा जाये वो इश्क़ नही .…वो तो क़ैद होगी ..इश्क़ तो खुद ब ख़ुद बंध जाता है और खुद को किसी से बांधें रखना

ही इश्क़ है “इश्क़ बिल्कुल भगवान और भक्त जैसा है भगवान चाहे दिखे न दिखे.. बात करे न करे .. मिले ना मिले..चाहे जो भी दे दे .. भक्त उसकी हर रज़ा में राज़ी रहता है। ऐसी इश्क़ की अवस्था में भगवान के देह स्वरूप की भक्त को कोई ज़रूरत महसूस नही होती।वो उसे अपना मान चुका होता है..भक्त कहता है कि आप कहीं भी हो ..दुनिया के किसी भी कोने मे हो …हे भगवन ! मैं तुम्हारा हूँ ।हर इंसान जो प्रेम की तलाश मे है उसे सोचना होगा कि क्या वो ज़िम्मेदारियों के लिए तैयार है,क्योंकि प्रेम अकेला नहीं आता ..बहुत कुछ अपने साथ लेकर आता है।हमारी माँ बाप की जब शादी हुई थी उन लोगों ने प्रेम को निभाया .. संसार को आगे बढ़ाया …संस्कारों को बांटा …क्या हम संस्कारों को आगे बढ़ा पाएंगे .. नई जनरेशन से मैं यही कहूँगी अगर शादी करनी है तो पहले सोचिये।

लडकियों से भी कह रही हूँ कि शादी सिर्फ़ लाखों का लहंगा पहनना नहीं होता ,महंगा मेकअप करवाना नहीं होता ..शादी के साथ बहुत सी ज़िम्मेदारियाँ आती हैं जो हमें निभानी होती हैं।पहले उसके लिए खुद को तैयार करे .. फिर गुलाब का फूल देने और लेने की सोचे।आज की जनरेशन को अगर आज प्यार होता है तो दो चार दिनों में अपनी सहूलियत के हिसाब से एक दूसरे को बलोक भी कर देते है .. ये कैसा प्रेम है जो मात्र बलोक करने से सब ख़त्म हो जाता है..जो लड़को की जेब को पहले देखता है..उसकी कौन सी गाड़ी है .. उसका कामकाज क्या है …उसका क्या कोई अपना घर है भी या नहीं …ये प्रेम कैसे हो सकता है।

ये तो एक व्यापार ही कह सकते है और हम कह देते है कि हम प्यार मे है ।

हमारे बुजुर्गों ने भी शादी के बाद मिल कर घर बनाये थे।पहले इस तरह के सवाल नहीं हुआ करते थे।अगर पहले ही आप को बना बनाया सब कुछ मिल जाएगा तो आप क्या करेंगे। ..

लड़के भी लड़की की ब्यूटी को ही देखते है ,गोरे रंग पर मर मिटते है चाहे लड़की मे घर सँभालने का कोई भी गुण न हो …चेहरे से ज़्यादा सीरत पर ध्यान देना ज़रूरी है

अंतर्मन को पढ़ना ज़रूरी है

रूप आज है कल नहीं रहेगा…

तो फिर क्या होगा.प्रेम भी दो चार महीने ..सालो में हवा में कहीं उड़ जायेगा..नई जनरेशन को जरा सोच विचार करना होगा।

जब लड़कियां आजकल कमा रही है तो क्यों आप लड़कों से इतनी अपेक्षाएँ रखती है..क्यों लड़को पर इतना बोझ डालती है।अगर प्रेम करे तो तैयार भी रहे, मिल जुल कर जीवन जीने के लिये।

गुलाब देने से या लेने से पहले सोचिये ज़रूर…,

पहचाने खुद को ,परखें अपने प्रेम को …क्या वाक़ई में आप प्रेम में हैं ? क्या सामने वाले में भी आप के लिए वही चाहत है जो आप उसके लिए महसूस करते है ?क्या सच में आप उम्र भर प्रेम निभा पाएंगे ?

या फिर आप सिर्फ़ ट्रेंड के साथ चल रहे है। सोचियेगा ज़रूर …..आप की दोस्त ✍️ स्मिता

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उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली स्वयं सेविकाएं और विजेता स्वयंसेविकाएं सम्मानित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज कानपुर में सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के सफल समापन पर शिविर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली स्वयं सेविकाओं और शिविर में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं की विजेता स्वयंसेविकाओं को महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर सुमन के द्वारा सम्मानित करने हेतु एक पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन स्मार्ट क्लास (कॉमन रूम) में राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी डाॅ. श्वेता रानी के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम में स्वयंसेविकाओं ने शिविर के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए सर्वप्रथम जागरूकता अभियान और फिर प्रशासन का सहयोग वांछनीय है। कार्यक्रम में प्रो. निशी प्रकाश, प्रो. गार्गी यादव, प्रो. अलका टण्डन, कैप्टन ममता अग्रवाल, प्रो. मीनाक्षी व्यास, डाॅ. अनामिका, डाॅ. प्रीता अवस्थी, डाॅ. मोनिका शुक्ला और सभी स्वयंसेविकायें उपस्थित रहें।

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एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज में सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के पाँचवे दिन फैशन शो प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 28 जनवरी एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज, कानपुर की कादोम्बिनी देवी राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की प्रभारी डॉ. श्वेता रानी के निर्देशन में उच्च प्राथमिक विद्यालय कम्पोजिट, ग्राम पंचायत-नेतुआ, जनपद- उन्नाव, में सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के पाँचवे दिन के प्रथम सत्र का आरंभ राष्ट्रीय स्वयंसेविकाओं के फैशन शो प्रतियोगिता से किया गया| फैशन-शो आत्मविश्वास, संप्रेषण कौशल, अनुशासन, रचनात्मकता, टीमवर्क, मंचीय शिष्टाचार तथा आत्म-अभिव्यक्ति के माध्यम से व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का मंच प्रस्तुत करता है | नंदिका श्रीवास्तव, कोमल दिवाकर, अदिति ओझा, सिमरन, अंशिका यादव, खुशी, अंशिका विश्वकर्मा, शताक्षी, माही मिश्रा, जाह्नवी मिश्रा ने प्रतिभाग किया।

प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की महती भूमिका का निर्वाह प्रोफेसर गार्गी यादव और लक्ष्मी तिवारी ने किया। प्रथम पुरस्कार नंदिका, द्वितीय पुरस्कार कोमल, तृतीय पुरस्कार अदिति और सांत्वना पुरस्कार सिमरन को दिया गया। प्राथमिक विद्यालय की कक्षा सात की दो छात्राओं मनीषा और अंजलि को भी रैम्प वॉक करने के लिए प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गय। दूसरे सत्र में चतुर्थ दिवस की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के पश्चात्‌ स्वयंसेविकाओं ने बस्ती में जाकर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल के स्वास्थ्य लाभ, घर से जल निकासी के उचित प्रबंध करने और ठोस कूड़ा निस्तारण के उपायों के बारे में जागरूक किया सह-प्रभारी डॉ. अनामिका और. एस. एस. की स्वयंसेविका दिव्यांशी शर्मा, मन्तशा, शुभांशी,प्रियल. शिवानी एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हरिनारायण ने शिविर के सफल आयोजन में विशेष योगदान दिया। शिविर में लगभग 50 राष्ट्रीय स्वयंसेविकाओं ने सहभागिता की।

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एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज और अमर उजाला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 27 जनवरी सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के चतुर्थ दिन एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज, कानपुर की कादोम्बिनी देवी राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई और अमर उजाला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में उच्च प्राथमिक विद्यालय कम्पोजिट, ग्राम पंचायत-नेतुआ, जनपद- उन्नाव, में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया गया जिसमें रक्तचाप, शुगर, नेत्र, रक्त आदि की मुफ़्त जाँच की गई| शिविर के आरंभ में एन.एस.एस. प्रभारी डॉ. श्वेता रानी, सह-प्रभारी डॉ. अनामिका, उपस्थित डॉक्टर्स और उनके सहयोगियों के द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित किए गए। शिविर में उजाला सिगनस के फिजिशियन डॉ. आर. के. तिवारी, नेत्र चिकित्सक डॉ. अभिषेक के द्वारा ग्रामीणों को मुफ़्त चिकित्सकीय परामर्श भी प्रदान किया गया। लगभग 200 ग्रामीणों ने मुफ़्त स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का लाभ उठाय। शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों ने भी अपने की जाँच करवाईं।

तृतीय दिवस की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के पश्चात्‌ स्वयंसेविकाओं ने बस्ती में जाकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य शिविर की जानकारी दी और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रेरित किया| एन. एस. एस. की स्वयंसेविका नंदिका श्रीवास्तव, दिव्यांशी शर्मा, कोमल दिवाकर, मन्तशा, अंशिका, शिवानी, सिमरन, खुशी एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी  हरिनारायण ने शिविर के सफल आयोजन में विशेष योगदान दिया। शिविर में लगभग 50 राष्ट्रीय स्वयंसेविकाओं ने सहभागिता की।

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दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ द्वारा खिचड़ी भोज आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के तत्वावधान में पारंपरिक खिचड़ी भोज का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आपसी सद्भाव, सहयोग और सामूहिक सहभागिता को सुदृढ़ करना रहा। इस अवसर पर महाविद्यालय स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम निदेशक प्रो अर्चना वर्मा एवं प्राचार्या प्रो. वंदना निगम की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के योगदान की सराहना की तथा इस प्रकार के आयोजनों को संस्थान की सकारात्मक कार्यसंस्कृति के लिए आवश्यक बताया।

कार्यक्रम में कार्यालय अधीक्षक कृष्णेन्द्र श्रीवास्तव, दीप द्विवेदी, शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र एवं सचिव सहित समस्त पदाधिकारी, प्राध्यापिकाएं, छात्रायें एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से खिचड़ी भोज का दही बड़ा, अचार तथा पापड़ के साथ आनंद लिया।कार्यक्रम के सफल आयोजन में शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा। अंत में संघ की ओर से सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया गया।

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दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में रोड सेफ़्टी जनजागरूकता अभियान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर के रोड सेफ़्टी क्लब द्वारा मलिन बस्तियों में जनमानस को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने हेतु एक व्यापक जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य छात्र–छात्राओं, महाविद्यालय कर्मचारियों तथा अभिभावकों के मध्य सड़क सुरक्षा संबंधी नियमों व सावधानियों का प्रचार-प्रसार करना रहा।

अभियान के अंतर्गत जागरूकता रैली, शपथ कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक एवं जनसंपर्क गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने हेलमेट पहनने, यातायात नियमों का पालन करने तथा सड़क दुर्घटनाओं से बचाव के संकल्प लिए। रैली के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित यातायात व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

यह कार्यक्रम समिति सदस्य डॉ. अंजना श्रीवास्तव के कुशल निर्देशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम को महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर वंदना निगम का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। साथ ही एन.सी.सी. के सहयोग से अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया गया। इस अवसर पर उपस्थित छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और समाज में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का शपथपूर्वक संकल्प लिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन से महाविद्यालय की सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।

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एस. एन. सेन बालिका विद्यालय पी.जी. कॉलेज में “डिजिटल अरेस्ट हेतु अवेयरनेस” विषय पर व्याख्यान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन बालिका विद्यालय पी.जी. कॉलेज में “डिजिटल अरेस्ट हेतु अवेयरनेस” विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सुमन, कार्यक्रम प्रभारी डॉ प्रीति सिंह, पुलिस विभाग से शरद तिलाराज एवं सत्य पाल सिंह द्वारा किया गया। SI सत्यपाल ने साइबर क्राइम क्या है, इससे कैसे बचा जाये तथा साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल अरेस्ट से बचने के उपाय बताये| उन्होंने कहा कि बिना जानकारी वाले व्यक्ति से लेन देन से बचना चाहिए| भारत में वित्तीय साइबर अपराधों की रिपोर्ट करने के लिए राष्ट्रीय टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 पर या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं । इसका संचालन गृह मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

कार्यक्रम की साज सज्जा डा. रचना निगम द्वारा की गई| एन. सी. सी., एन. एस. एस. की छात्राओं का विशेष योगदान रहा| महाविद्यालय की समस्त शिक्षिकाएं, छात्राएं, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

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जलवायु परिवर्तन: पिघलते हिमनद और डूबता भविष्य

धरती का तापमान धीरे-धीरे नहीं, बल्कि खतरनाक गति से बढ़ रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, बीसवीं सदी में भूमंडलीय औसत तापमान में लगभग 0.6 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। यदि तापमान वृद्धि की यही प्रवृत्ति जारी रही, तो 21वीं सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में लगभग 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह परिवर्तन केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मानव जीवन, प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन का सबसे गंभीर प्रभाव हिमालयी हिमनदों पर पड़ रहा है। अनुमान है कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रही, तो सन् 2040 तक हिमाचल प्रदेश की अधिकांश हिमनदियाँ पिघलकर समाप्त हो सकती हैं। गंगोत्री हिमनद, जो गंगा नदी का प्रमुख स्रोत है, प्रतिवर्ष लगभग 23 मीटर की दर से संकुचित हो रही है। इस हिमनद का तीव्र क्षरण भविष्य में गंगा नदी के अस्तित्व के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है, जिससे करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित होगा।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल हिमालय तक सीमित नहीं है। ग्लेशियरों की बर्फ तेजी से पिघलकर नदियों के माध्यम से समुद्र तक पहुँच रही है, जिसके परिणामस्वरूप समुद्री जलस्तर में निरंतर वृद्धि हो रही है। वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, 2100 तक समुद्र का जलस्तर 9 से 88 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। यह वृद्धि कई तटीय क्षेत्रों और द्वीपों के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकती है।

समुद्री जलस्तर में हो रही वृद्धि के कारण अनेक द्वीपीय और तटीय क्षेत्र जलमग्न होने के खतरे का सामना कर रहे हैं। मॉरीशस, मालदीव, अंडमान और निकोबार जैसे द्वीप समूह इस संकट के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। यदि समय रहते प्रभावी नीतियाँ और पर्यावरणीय संरक्षण उपाय नहीं अपनाए गए, तो इन क्षेत्रों की भौगोलिक पहचान और जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है। इसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी, सतत विकास, और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की तत्काल आवश्यकता है। जब तक मानव और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित नहीं किया जाता, तब तक पिघलते हिमनद और बढ़ता समुद्री जलस्तर हमारे भविष्य के लिए निरंतर खतरा बने रहेंगे। ~रश्मि गोयल

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