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महिला जगत

क्राइस्ट चर्च कॉलेज और अखिल भारतीय महिला सम्मेलन’ (AIWC), के संयुक्त तत्वाधान में ‘वित्तीय साक्षरता पर जागरूकता कार्यक्रम’ आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन सेल (IQAC) द्वारा ‘अखिल भारतीय महिला सम्मेलन’ (AIWC), कानपुर शाखा के सहयोग से आज 30 मार्च 2026 को सुबह 11:00 बजे कॉलेज के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में ‘वित्तीय साक्षरता पर एक जागरूकता कार्यक्रम’ का सफल आयोज किया गया।

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ IQAC की समन्वयक प्रो. सुजाता चतुर्वेदी के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने अत्यंत गरिमामय ढंग से अतिथियों का स्वागत किया और युवाओं के बीच वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके पश्चात, कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबस्टियन ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में आज के गतिशील आर्थिक परिवेश में वित्तीय जागरूकता की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और छात्रों को सूचित आर्थिक निर्णय लेने के लिए वित्तीय साक्षरता अनिवार्य है।

कॉलेज की उप-प्राचार्या प्रो. श्वेता चंद ने भी छात्र जीवन से लेकर सेवानिवृत्ति योजनाओं तक वित्तीय निवेश और बचत पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि निवेश की योजना कम उम्र से ही शुरू कर देनी चाहिए। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए AIWC, कानपुर शाखा की सचिव रमिंदर कौर अरोरा ने वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में संस्था द्वारा की जा रही पहलों के बारे में जानकारी दी। डॉ. पवनेश मिश्रा ने मुख्य वक्ता अरविंद कुमार गुप्त (सेवानिवृत्त एजीएम, भारतीय स्टेट बैंक) का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। अपने सत्र में, अरविंद कुमार गुप्त ने वित्तीय साक्षरता के विभिन्न पहलुओं जैसे—बचत, निवेश के विकल्प, डिजिटल बैंकिंग, वित्तीय सुरक्षा और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव पर एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का समापन डॉ. रुक्मणी देवी द्वारा दिए गए धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

इस अवसर पर AIWC की अध्यक्षा अनीता गर्ग, नैक (NAAC) समन्वयक प्रो. सत्य प्रकाश सिंह, प्रो. शालिनी कपूर, प्रो. अनिंदिता भट्टाचार्य, प्रो. ज्योत्सना लाल, डॉ. शुभी तिवारी, डॉ. अंकिता जैस्मिन लाल सहित अन्य शिक्षकगण, गैर-शिक्षण कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। छात्रों की सक्रिय भागीदारी ने इस कार्यक्रम को भव्य रूप से सफल बनाया।

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डी जी कॉलेज में मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत छात्राओं ने महिलाओं को किया जागरूक

भारतीय स्वरूप संवाददाता दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा दिनांक 28 मार्च 2026 को महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम के निर्देशन में एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया, 

जिसमें मिशन शक्ति- 5.0 (द्वितीय चरण) के तहत छात्राओं द्वारा बस्ती क्षेत्र में महिलाओं एवं छात्राओं को सुरक्षा एवं आपातकालीन सेवाओं के प्रति जागरूक किया गया। शिविर के दौरान स्वयंसेविकाओं ने घर-घर जाकर एवं समूहिक संवाद के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों जैसे—112 (पुलिस), 1090 (महिला हेल्पलाइन), 108 (एम्बुलेंस), 181 (महिला हेल्प लाइन) आदि की जानकारी दी। साथ ही, इन सेवाओं के उपयोग की प्रक्रिया एवं महत्व के बारे में विस्तार से समझाया गया।

कार्यक्रम में महिलाओं को आत्मरक्षा, सतर्कता एवं डिजिटल सुरक्षा के प्रति भी जागरूक किया गया। प्रतिभागियों ने इस पहल को अत्यंत उपयोगी बताते हुए ऐसी गतिविधियों की सराहना की। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी स्वयंसेविकाओं एवं स्थानीय नागरिकों का आभार व्यक्त किया गया।

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मिशन पोषण 2.0 के तहत, 15वें वित्त आयोग चक्र की अवधि के दौरान, सरकारी भवनों में स्थित दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी के रूप में सुदृढ़ किया जा रहा है

 पोषण 2.0 के तहत, वित्त मंत्रालय के 15वें चक्र के दौरान, सरकारी भवनों में स्थित दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को (प्रति वर्ष 40,000 आंगनवाड़ी केंद्रों की दर से) सक्षममिशन आंगनवाड़ी केंद्रों में रूपांतरित किया जा रहा है ताकि बेहतर पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा प्रदान की जा सके। सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों को पारंपरिक आंगनवाड़ी केंद्रों की तुलना में बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान किया गया है, जिसमें एलईडी स्क्रीन, जल शोधन प्रणाली, पोषण वाटिका, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा सामग्री (ईसीसीई) और बाला पेंटिंग शामिल हैं। 20.03.2026 तक, देश भर में कुल 1,04,403 आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों में उन्नत किया जा चुका है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन में चेहरा पहचान प्रणाली (एफआरएस) विकसित की है ताकि घर ले जाने वाले राशन वितरण की अंतिम चरण तक निगरानी की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ केवल एप्लिकेशन में पंजीकृत लक्षित लाभार्थी को ही मिले। इसके अलावा, आधार आधारित ट्रैकिंग से लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित हुई है, डेटा लीक को रोका जा सका है और फर्जी प्रविष्टियां समाप्त हुई हैं।

16 मार्च, 2026 तक पोषण भी पढ़ाई भी (पीबीपीबी) कार्यक्रम के पहले चरण में 41,648 राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर (एसएलएमटी) और 10,40,590 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यूडब्ल्यू) को प्रशिक्षित किया जा चुका है। एडब्ल्यूडब्ल्यू को प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) की शिक्षण विधियों और पोषण सेवाओं के वितरण में प्रशिक्षित किया गया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण ईसीसी प्रदान करने में एडब्ल्यूडब्ल्यू की क्षमता का निर्माण करना है।

‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन को आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की सभी गतिविधियों की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित शासन माध्यम के रूप में शुरू किया गया है। यह एप्लिकेशन निर्धारित संकेतकों पर आधारित है। इसने आंगनवाड़ी सेवाओं जैसे कि आंगनवाड़ी केंद्रों का खुलना, बच्चों की दैनिक उपस्थिति, प्राथमिक एवं बाल विकास (ईसीसीई) गतिविधियां, बच्चों की वृद्धि की निगरानी, ​​पूरक पोषण का प्रावधान आदि के लिए लगभग वास्तविक समय में डेटा संग्रह को सुगम बनाया है। पोषण ट्रैकर के तहत प्रौद्योगिकी का उपयोग 0-6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में बौनापन, कुपोषण, अल्प-वजन और अधिक-वजन की व्यापकता की गतिशील पहचान के लिए किया जा रहा है। इन संकेतकों पर राज्यवार जानकारी पोषण ट्रैकर के सार्वजनिक डैशबोर्ड पर उपलब्ध है: https://www.poshantracker.in/statistics

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 1 अप्रैल, 2022 से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए व्यापक मिशन शक्ति के सामर्थ्य वर्टिकल के तहत पालना योजना को लागू किया है।

आंगनवाड़ी केंद्र विश्व के सबसे बड़े शिशु देखभाल संस्थान हैं जो बच्चों को आवश्यक देखभाल और सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित हैं और देखभाल सुविधाओं की व्यापर पहुंच सुनिश्चित करते हैं। अपनी तरह की अभिनव पहल में मंत्रालय ने आंगनवाड़ी सह शिशुगृह (एडब्ल्यूसीसी) के माध्यम से शिशु देखभाल सेवाओं का विस्तार किया है। आंगनवाड़ी सह शिशुगृह पहल का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में ‘महिला कार्यबल भागीदारी’ बढ़ाना है। इस योजना का उद्देश्य 6 महीने से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिशुगृह सुविधा, पोषण संबंधी सहायता, स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक विकास, वृद्धि की निगरानी और टीकाकरण प्रदान करना है। पालना योजना के अंतर्गत सभी माताओं को उनकी रोजगार स्थिति की परवाह किए बिना शिशुगृह सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

पालना योजना केंद्र प्रायोजित योजना है। कार्यक्रम अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) की बैठकें राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के साथ प्रतिवर्ष आयोजित की जाती हैं, जिनमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आंगनवाड़ी-सह-क्रेच खोलने के प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं और उन्हें कार्यान्वित करते हैं। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन भी योजना के कार्यान्वयन के लिए अपना निर्धारित हिस्सा योगदान करते हैं।

15वें वित्त चक्र के दौरान अर्थात वित्त वर्ष 2025-26 तक, पालना योजना के तहत कुल 17,000 आंगनवाड़ी-सह-क्रेच (एडब्ल्यूसीसी) स्थापित किए जाने हैं। अब तक, देश भर में 3,130 एडब्ल्यूसीसी कार्यरत हैं।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री  सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

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राष्ट्रपति 19 से 21 मार्च तक उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगी

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 19 से 21 मार्च, 2026 तक उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगी।

19 मार्च को राष्ट्रपति अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाएंगी। वे राम जन्मभूमि मंदिर के विभिन्न स्थानों पर दर्शन और आरती करेंगी तथा श्री राम यंत्र स्थापना कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगी।

20 मार्च को राष्ट्रपति वृंदावन में रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के नंद किशोर सोमानी ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन करेंगी।

21 मार्च को, दिल्ली लौटने से पहले राष्ट्रपति का गोवर्धन परिक्रमा का भी कार्यक्रम हैं।

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दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज द्वारा नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 19 मार्च दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) तथा नशा मुक्ति समिति के संयुक्त तत्वावधान में नशा मुक्ति जागरूकता हेतु एक सेमिनार एवं रैली का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन शैली के लिए प्रेरित करना था।
*सेमिनार / कार्यशाला* के अंतर्गत छात्राओं को नशा मुक्ति के प्रति सचेत रहने हेतु व्याख्यान एवं काउंसलिंग प्रदान की गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव एवं अपूर्वा बाजपेई ने नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्परिणामों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। इसी क्रम में विमला देवी तथा श्वेता गोंड ने छात्राओं को नशे की लत से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हुए महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं द्वारा एक *‘Say no to Drugs’ जागरूकता रैली* भी निकाली गई, जिसे प्राचार्या द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। रैली के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि नशा व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र—तीनों के लिए अत्यंत हानिकारक है। छात्राओं ने “Say No to Drugs”, “तंबाकू को ना कहें”, “सिगरेट को ना कहें”, “पान मसाले को ना कहें” जैसे प्रभावी नारों के माध्यम से जन-जागरूकता का प्रयास किया।
इसके अतिरिक्त छात्राओं ने *रंगोली एवं पोस्टर* के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों को सृजनात्मक रूप में प्रस्तुत किया, जिसका निर्देशन पूजा श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. वंदना निगम एवं सेल्फ फाइनेंस की निदेशक प्रो. अर्चना वर्मा का पूर्ण सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अंजना श्रीवास्तव, डॉ. सुषमा शर्मा, डॉ. साधना सिंह, पूजा श्रीवास्तव, डॉ. ज्योत्सना पांडे, डॉ. पारुल त्रिवेदी तथा कार्यालय अधीक्षक कृष्णेंद्र श्रीवास्तव तथा समस्त छात्राओं का सराहनीय योगदान रहा।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 9 मार्च क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के जेंडर सेंसिटाइजेशन एंड वूमेन डेवलपमेंट सेल (GSWDC) द्वारा सरवेपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑडिटोरियम में बड़े उत्साह के साथ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। यह कार्यक्रम “Celebrating Strength, Equality & Empowerment” विषय के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य समकालीन समाज में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के महत्व को रेखांकित करना था। कार्यक्रम की शुरुआत छात्र एंकर अक्षिता वर्मा और आदर्श के स्वागत एवं परिचयात्मक संबोधन से हुई, जिन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। कविता पाठ के सत्र में गौरी अग्निहोत्री, पूजा डे और श्रुति ने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में प्रभावशाली कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिनमें महिलाओं की दृढ़ता, सशक्तिकरण और शक्ति के भाव को अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत छात्र एंकर अक्षिता वर्मा और आदर्श के स्वागत एवं परिचयात्मक संबोधन से हुई, जिन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। कविता पाठ के सत्र में गौरी अग्निहोत्री, पूजा डे और श्रुति ने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में प्रभावशाली कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिनमें महिलाओं की दृढ़ता, सशक्तिकरण और शक्ति के भाव को अभिव्यक्त किया गया।कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने महिला प्रतिनिधित्व पर केंद्रित चर्चित फिल्मों की समीक्षाएँ भी प्रस्तुत कीं। ये समीक्षाएँ पूजा डे, श्रेयांशी शर्मा, अंशिका मिश्रा और आदित्य कुमार द्वारा प्रस्तुत की गईं, जिन्होंने मीडिया में महिलाओं की छवि और प्रस्तुति पर विचारोत्तेजक चर्चा को प्रेरित किया।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण “आईना-ए-समाज” शीर्षक से प्रस्तुत एक नाट्य मंचन रहा, जिसमें ध्रुव, श्रुति, विभांश, रिद्धिमा यादव, श्रेयांशी, शिवा, उपासना और क्रति ने अभिनय किया तथा इसका संचालन अक्षिता द्वारा किया गया। यह प्रस्तुति दो लिंगों के बीच भूमिका परिवर्तन की हास्यपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से सामाजिक संरचनाओं पर व्यंग्य करती हुई दिखाई गई।सांस्कृतिक कार्यक्रम में एक भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति भी शामिल रही, जिसने महिलाओं की गरिमा, साहस और शक्ति का सुंदर चित्रण किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य अतिथि प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन, संरक्षक एवं प्राचार्य, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर ने की। इस कार्यक्रम का सफल आयोजन डॉ. विभा दीक्षित, समन्वयक, जेंडर सेंसिटाइजेशन एंड वूमेन डेवलपमेंट सेल के मार्गदर्शन में किया गया। इस आयोजन में सह-समन्वयकों डॉ. फिरदौस, डॉ. आशीष, डॉ. रुक्मणी और डॉ. मनीषी त्रिवेदी का विशेष योगदान रहा।

छात्र समन्वयक आर्यन, आदर्श और पूजा ने कार्यक्रम के आयोजन और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन डॉ. मनीषी त्रिवेदी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

औपचारिक कार्यक्रम के पश्चात कॉलेज के संकाय सदस्यों को प्रो. सत्य प्रकाश और प्रो. मीत कमल द्वारा एक आनंदपूर्ण अवकाश समारोह में आमंत्रित किया गया, जिसने सभी शिक्षकों को आपसी सौहार्द और उत्सव की भावना के साथ एकत्र होने का अवसर प्रदान किया।

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एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज के विज्ञान संकाय के रसायन विज्ञान,वनस्पति विज्ञान एवं जंतु विज्ञान विभाग ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया ।महाविद्यालय की मुख्य प्रॉक्टर कैप्टन ममता अग्रवाल, प्रो गार्गी यादव,डॉ प्रीति सिंह तथा डॉ शैल बाजपेयी ने माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । इस अवसर पर इस वर्ष की थीम “विज्ञान में महिलाओं का योगदान “ तथा अपने पाठ्यक्रम से संबंधित विषयों पर पोस्टर एवं मॉडल बनाकर छात्राओं ने प्रदर्शनी में प्रतिभाग किया । छात्राओं ने ५० पोस्टर और मॉडल प्रदर्शित किये और उनके विषय में बताया ।इस प्रदर्शनी का मूल्यांकन कैप्ट ममता अग्रवाल, प्रो प्रीति पांडे और प्रो मीनाक्षी व्यास ने किया ।

परिणाम इस प्रकार रहा –बी एस सी द्वितीय सेमेस्टर प्रथम कीर्ति गुप्ता, द्वितीय- सृष्टि पाल तथा अंजलि सिंह, तृतीय-आयना ,सांत्वना-इशिता 

बी एस सी चतुर्थ सेमेस्टर –प्रथम-काजोल गौतम, द्वितीय-ज़िया, तृतीय-सदा 

बी एस सी षष्ठ सेमेस्टर –प्रथम समरीन अनवर, द्वितीय मुस्कान, तृतीय एकता तथा लक्ष्मी सभी विजेता छात्राओं को मेडल प्रदान किए गए और सभी प्रतिभागी छात्राओं को उत्साह वर्धन करते हुए अल्प पुरस्कार दिए गए। 

कार्यक्रम में डॉ प्रीता अवस्थी ,डॉ प्रीति यादव, डॉ अनामिका डॉ समीक्षा डॉ श्वेता आदि उपस्थित रहे  अवधेश तथा रेखा ने विशेष सहयोग प्रदान किया।

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राष्ट्रपति ने पीडी हिंदुजा अस्पताल के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘जीवन बचाओ स्वस्थ भारत बनाओ’ का उद्घाटन किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुंबई के लोक भवन में पीडी हिंदुजा अस्पताल द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी अभियान ‘जीवन बचाओ और एक स्वस्थ भारत बनाओ’ का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार ने पिछले एक दशक में यह सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं कि सभी नागरिक स्वस्थ रहें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों। देश भर में 180,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान भारत योजना के तहत, लगभग 12 करोड़ परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा की सुविधा प्राप्त होती है। मिशन इंद्रधनुष, टीबी मुक्त भारत अभियान और सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम नागरिकों को बीमारियों से बचाने में योगदान दे रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण डॉक्टरों और पैरामेडिकल पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए कई राज्यों में नए एम्स और मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं। इन प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। हालांकि, एक स्वस्थ भारत के निर्माण में सरकार के साथ-साथ सभी हितधारकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। “जीवन बचाओ और एक स्वस्थ भारत बनाओ” अभियान इसी दिशा में एक प्रयास है।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी की जान बचाना सबसे बड़ा परोपकार है। आपातकालीन चिकित्सा सुविधा तक पहुंच जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि उचित चिकित्सा देखभाल समय-सीमा के भीतर प्रदान करने से अधिकांश लोगों की जान बचाई जा सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि तत्काल चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण किसी की जान न जाए, प्रधानमंत्री राहत योजना के माध्यम से दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का नकद उपचार प्रदान किया जाता है। एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटरों के साथ-साथ, गंभीर दुर्घटनाओं और चिकित्सा आपात स्थितियों में जीवन बचाने के लिए जागरूकता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वस्थ नागरिक एक मजबूत राष्ट्र की नींव हैं। लोगों को बीमारियों से बचाने के साथ-साथ उन्हें समय पर और समुचित चिकित्सा देखभाल प्रदान करना उन्हें स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य सेवा राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग है। नागरिकों का स्वास्थ्य एक सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी हितधारकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि सबसे गरीब लोगों को भी समय पर और उचित चिकित्सा देखभाल मिले। ‘सभी को किफायती विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं’ उपलब्ध कराना हम सभी का मिशन होना चाहिए।राष्ट्रपति ने कहा कि अन्य क्षेत्रों की तरह ही प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में इनकी भूमिका और भी बढ़ेगी और हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। भारत सरकार नवाचार और नई प्रौद्योगिकियों को व्यापक रूप से अपनाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। इंडियाएआई मिशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक अग्रणी दवा उत्पादक देश है। हमारे देश में निर्मित दवाएं विश्व भर के लोगों के इलाज में योगदान दे रही हैं। हालांकि, हम अभी भी कई चिकित्सा उपकरणों और महत्वपूर्ण दवाओं के लिए आयात पर निर्भर हैं। ये आयातित उपकरण और दवाएं आम लोगों पर भारी आर्थिक बोझ डालती हैं। अपने नागरिकों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए देश में दवाओं और उपकरणों का निर्माण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मेक इन इंडिया और पीएलआई जैसी पहलें इस दिशा में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने चिकित्सा जगत और व्यापार जगत से इस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करके राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वस्थ नागरिक एक मूलभूत आवश्यकता हैं। नागरिक तभी स्वस्थ रह पाएंगे जब उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे सामूहिक प्रयासों से हमारे नागरिकों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी और भारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में अधिक मान्यता प्राप्त करेगा।

राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें-

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“स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ऋण देना राष्ट्र के लिए सबसे सुरक्षित निवेश है: शिवराज सिंह चौहान

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 20 फरवरी 2026 को हैदराबाद में वित्तीय साक्षरता और लचीलेपन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में  नीति निर्माताओं, नियामकों, वित्तीय संस्थानों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) और सामुदायिक नेताओं ने भाग लिया और ग्रामीण भारत में वित्तीय जागरूकता को मजबूत करने, घरेलू लचीलेपन को बढ़ाने और समावेशी आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।

इस सम्मेलन में वित्तीय साक्षरता, घरेलू स्तर पर वित्तीय सुदृढ़ता और आजीविका एवं उद्यमों के लिए ऋण तक पहुंच बढ़ाने जैसे विषयगत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। विभिन्न सत्रों के दौरान  निरंतर वित्तीय शिक्षा, व्यापक वित्तीय समावेशन और मजबूत संस्थागत समन्वय के महत्व पर बल दिया गया। स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और उनके संघों जैसी सामुदायिक संस्थाओं को वित्तीय सेवाएं और वित्तीय साक्षरता संबंधी हस्तक्षेप प्रदान करने के लिए विश्वसनीय और विस्तार योग्य मंच के रूप में मान्यता दी गई।

21 फरवरी 2026 को हैदराबाद में 25वीं केंद्रीय स्तरीय समन्वय समिति (सीएलसीसी) की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ग्रामीण वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में नीतिगत संवाद को आगे बढ़ाने और समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री और सीएलसीसी के अध्यक्ष श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बैठक की अध्यक्षता की। इसमें माननीय केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी और तेलंगाना सरकार की माननीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती डी. अनुसूया सीताक्का ने भी भाग लिया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय और तेलंगाना सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह, अतिरिक्त सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार, संयुक्त सचिव श्रीमती स्मृति शरण और संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति शर्मा भी शामिल थे। तेलंगाना सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास के प्रधान सचिव श्री एन. श्रीधर और पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास आयुक्त एवं एसईआरपी तेलंगाना की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती दिव्या देवराजन शामिल थीं, साथ ही नाबार्ड, आरबीआई, बैंकों, एशियाई विकास बैंक और विभिन्न राज्यों के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय सम्मेलन से प्राप्त प्रमुख जानकारियों के सारांश के साथ हुई, जिसके बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती स्मृति शरण द्वारा “डेय-एनआरएलएम की रणनीतिक अंतर्दृष्टि और आगे का रोडमैप” विषय पर एक प्रस्तुति दी गई।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों, नियामकों और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों, जिनमें बैंक सखी, बीसी सखी, वित्तीय साक्षरता सामुदायिक संसाधन व्यक्ति और बीमा सखी शामिल हैं, के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, स्वयं सहायता समूहों के लिए बैंक संपर्क को मजबूत करने और व्यक्तिगत महिला उद्यमियों को समर्थन देने के लिए एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर जोर दिया।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ऋण देना जोखिम नहीं बल्कि राष्ट्र के लिए सबसे सुरक्षित निवेशों में से एक है। महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों के सामूहिक सहयोग से, “दीदी” लखपति से करोड़पति बन सकती हैं, जिससे महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण परिवर्तन में तेजी आएगी और विकसित भारत के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

माननीय केंद्रीय मंत्री ने अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय पहुंच को मजबूत करने, उद्यम वित्तपोषण का विस्तार करने और ग्रामीण परिवारों के लिए जोखिम संरक्षण तंत्र में सुधार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

इस आयोजन के दौरान तीन प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया गया:

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए व्यक्तिगत उद्यम बैंक ऋण प्रणाली*

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए यूपीआई आधारित क्रेडिट लाइनें*

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए वित्तीय साक्षरता पर डिजिटल मॉड्यूल*

इन पहलों का उद्देश्य ऋण वितरण को सरल बनाना, डिजिटल वित्त को अपनाने को बढ़ावा देना और ग्रामीण महिलाओं के बीच वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है।

ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह ने वित्तीय समावेशन, उद्यम विकास और आर्थिक लचीलेपन को बढ़ावा देने में सामुदायिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा को अब उद्यम-नेतृत्व वाली सशक्तिकरण की ओर विकसित होना चाहिए, जिसमें वित्त तक पहुंच से ध्यान हटाकर उत्पादक ऋण, उद्यम प्रोत्साहन और सतत वित्तीय क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया जाए।

श्रीमती डी. अनुसूया सीताक्का ने कहा कि हालांकि तेलंगाना देश का सबसे युवा राज्य है, लेकिन यहां सबसे पुराना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) है, और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मिशन के नेतृत्व में किए गए हस्तक्षेप तेलंगाना की महिलाओं को उद्यम निर्माण के अगले चरण का नेतृत्व करने में सक्षम बनाएंगे।

इस कार्यक्रम में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकिंग संस्थानों को पुरस्कार देकर वित्तीय संस्थानों के योगदान को भी मान्यता दी गई।

बैठक का समापन हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करने, वित्तीय नवाचार को बढ़ावा देने और ग्रामीण भारत में समावेशी विकास को गति देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

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बाल विवाह: भारतीय समाज की स्थानिक-सामाजिक चुनौती

भारत में बाल विवाह एक ऐसी सामाजिक और भौगोलिक चुनौती है, जो आधुनिक विकास और शिक्षा विस्तार के बावजूद आज भी अनेक समुदायों में गहराई तक जड़ें जमाए हुए है। यह प्रथा विशेष रूप से लड़कियों के जीवन को प्रभावित करती है—उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, अवसर, क्षमता और आत्मनिर्भर भविष्य, सभी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019–21) के अनुसार 20–24 वर्ष आयु-वर्ग की 23.3% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले ही हो चुका था। यह तथ्य इस बात का संकेत है कि कानूनी निषेध और नीति-हस्तक्षेपों के बावजूद सामाजिक-जड़ता, परंपरा और असमान विकास के कारण बाल विवाह अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। इसके स्थानिक पैटर्न भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं—पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्य, जैसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और छत्तीसगढ़, अभी भी बाल विवाह की उच्चतम दर वाले क्षेत्रों में आते हैं। इन राज्यों में शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना का कमजोर होना, ग्रामीण निर्धनता का व्यापक होना, सामाजिक-पितृसत्तात्मक मान्यताओं का प्रबल होना और महिलाओं की निम्न साक्षरता दर जैसे कारक इस कुप्रथा को बनाए रखते हैं। कम आयु में विवाह लड़कियों को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर अनेक जोखिमों के सामने ला देता है—कम उम्र में गर्भधारण से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर बढ़ती है, कुपोषण और एनीमिया की समस्याएँ गंभीर रूप ले लेती हैं और प्रजनन स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर पड़ता है। शिक्षा रुक जाने से लड़कियों के कौशल-विकास, रोजगार और आजीविका के अवसर भी सीमित हो जाते हैं, जिससे उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रगति बाधित होती है। भारतीय न्याय संहिता (2023) ने 18 वर्ष से कम आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध को बलात्कार की श्रेणी में रखा है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने भी विभिन्न याचिकाओं में राज्यों को बाल विवाह पर कड़ा नियंत्रण लागू करने के निर्देश दिए हैं। भारत सरकार द्वारा 2025 तक बाल विवाह की दर को 23.3% से घटाकर 10% तक लाने और 2030 तक देश को बाल विवाह-मुक्त बनाने का लक्ष्य भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विवाह पंजीकरण को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देना, समुदायों और धार्मिक संस्थानों को जागरूकता अभियानों में शामिल करना, महिलाओं को नेतृत्वकारी भूमिकाओं में सक्षम बनाना, तथा बाल संरक्षण एजेंसियों की क्षमता को मजबूत करना जैसे बहुआयामी उपाय लागू किए जा रहे हैं। समग्रतः, बाल विवाह केवल एक कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी एक गहरी सामाजिक-संरचनात्मक समस्या है, जिसका समाधान तभी संभव है जब सरकार, समाज और परिवार—तीनों स्तरों पर सतत और सामूहिक प्रयास किए जाएँ।~डॉ रश्मि गोयल 

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