नेहा इंजीनियरिंग की डिग्री तो मिल गई है अब तुम्हारा आगे का क्या विचार है? स्मिता:- यार ! मेरे विचार से क्या होता है? घरवाले लड़का देख रहे हैं। एक जगह बात भी चल रही है। मम्मी कह रही थी कि अगर अच्छा लड़का मिल गया तो हाथ पीले कर दूंगी।
नेहा:- तो जॉब के लिए ट्राई नहीं करेगी?
स्मिता:- करना तो चाह रही लेकिन पता नहीं क्या कर पाती हूं और अनमनी होकर घर जाने लगी।
स्मिता के बारे में सोचते सोचते नेहा घर पहुंच गई।
नेहा:- मां क्या बनाया है खाने में?
मां:- कढ़ी चावल है, फ्रेश हो जाओ फिर खा लो। फिर आराम से बात करते हैं। नेहा ने सवालिया नजर से मां की तरफ देखा।
मां:- तेरी बुआ ने एक लड़का बताया है। अच्छा घर परिवार है ऐसा बोल रही थी जीजी। अच्छा घरबार होगा तो रिश्ता तय कर सकते हैं।
नेहा:- मां मेरी पढ़ाई अभी बाकी है। मुझे एमबीए करना है फिर जॉब करना है। इस बारे में फिर सोचूंगी।
मां:- देखो ! लोग अच्छे होंगे तो रिश्ता तय कर देंगे फिर चाहे शादी बाद में करें। नेहा कुछ नहीं बोली। नेहा शाम की राह देखने लगी कि वह पापा से इस विषय पर बात करेगी। पढ़ाई कर लेने के बाद में क्या तुरंत शादी कर देना ही सही होता है? क्या यही एक जिम्मेदारी रह जाती है हमारी हम लड़कियों के प्रति? यही सब सोचते सोचते नेहा की आंख लग गई। शाम को पापा आए तो नेहा ने चाय बना कर दी और कहा, “पापा मुझे आपसे कुछ बात करनी है।”
पापा बोले, “बोलो बेटा क्या चल रहा है दिमाग में?
नेहा:- पापा मुझे अभी एमबीए करके जॉब करनी है फिर उसके बाद मेरी शादी की जाये पर मम्मी और बुआ अभी से मेरे पीछे पड़ी है!
पापा:- देखो बेटा तुमको कुछ करने के लिए मना नहीं किया है और हम अभी से देखेंगे तब जाकर एक-दो साल में कुछ ढंग के रिश्ते आएंगे और तुमको जो करना है उसके लिए कोई मना थोड़ी कर रहे है। जब तुम आर्थिक रूप से मजबूत हो जाओगी हम तभी तुम्हारी शादी करेंगे।
इधर स्मिता के घर में उसके ऊपर लगातार शादी के लिए दबाव बन रहा था। स्मिता भी चाह रही थी कि वह जॉब करें और उसके बाद ही उसकी शादी हो लेकिन उसकी मां यह बात नहीं समझ पा रही थी।
इधर नेहा को प्लेसमेंट मिल गया था और वह अपनी नौकरी के साथ साथ एमबीए की तैयारी में लग गई थी।
स्मिता ने भी अपने पापा से परमिशन लेकर अपनी जॉब शुरू कर दी लेकिन स्मिता के पापा ने स्पष्ट कह दिया था कि यदि ससुराल वाले नौकरी नहीं पसंद करेंगे तो तुझे नौकरी छोड़नी पड़ेगी। स्मिता कुछ नहीं बोली यह सोच कर कि चलो घर से बाहर काम कदम तो निकले। दोनों सहेलियां अपनी अपनी राह पर चलने लगी। दोनों में अक्सर फोन के जरिए बातचीत होते रहती थी।
नेहा:- हेलो स्मिता ! मेरी शादी पक्की हो गई है मेरा कलीग ही है। अजय नाम है उसका। बस हाय हेलो ही थी, ज्यादा कुछ बातचीत भी नहीं थी हमारी। अजय मुझे पसंद करते हैं यह बात मुझे पता नहीं थी। उसके घरवालों ने पापा से मिलकर मेरा हाथ मांग लिया।
स्मिता:- अरे वाह! कांग्रेचुलेशन ! शादी की तारीख कब निकली है ? मुझे भी तो शॉपिंग करनी है, अभी से शुरू करनी होगी।
नेहा:- तीन महीने बाद की तारीख निकली है।
स्मिता:- वाह़़….. बढ़िया!
शादी के दिन करीब आ रहे थे और तैयारियां शुरू हो चुकी थी। नेहा ऑफिस के काम के साथ-साथ शादी की तैयारी भी कर रही थी । आखिर वह दिन भी आ गया जब नेहा शादी करके ससुराल चली गई। अजय को पति रूप में पाकर नेहा खुश थी लेकिन एक अनजाना सा डर भी था उसके मन में कि पता नहीं हम दोनों में सामंजस्य हो पाएगा कि नहीं? मैं नौकरी छोड़ना नहीं चाहती थी और पता नहीं अजय के मन में क्या है? अजय क्या चाहते हैं मैंने कभी इस विषय पर बात भी नहीं की? उसका ससुराल में पहला दिन बहुत अच्छा रहा। घर के माहौल और तौर-तरीकों को समझने का प्रयास करते रही। किचन में सब देखती समझती रही, यथासंभव काम में हाथ बंटाती रही। मेरे ऑफिस की छुट्टियां अब खत्म होने वाली थी। कुछ दिनों में मुझे ऑफिस ज्वाइन करना था और मुझे अब अजय से बात करना जरूरी हो गया था। शाम को जब वह घर आए तो चाय मैं कमरे में ही ले आई।
नेहा:- सुनो! कुछ बात करनी है आपसे।
अजय:- हां…. बोलो ।
नेहा:- मेरे ऑफिस ज्वाइन करने का समय आ रहा है, छुट्टियां खत्म हो रही है।
अजय:- हां तो दिक्कत क्या है? समय से ऑफिस ज्वाइन कर लो।
नेहा:- वो…. मम्मी पापा से बात….
अजय:- उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। तुम ऑफिस जाना शुरु कर दो।
मैं मुस्कुरा कर रह गई। मम्मी को बताना जरूरी था कि मैं ऑफिस जाने वाली हूं। सुबह किचन में काम करते हुये मैंने कहा, मम्मी जी मैं मंडे से ऑफिस जाना शुरू कर रही हूं।
मम्मी:- हां ठीक है… सारे मेहमान चले गये हैं और रस्में भी पूरी हो गई है तो तुम अपना ऑफिस शुरू कर सकती हो। मुझे आश्चर्य हो रहा था कि सब इतनी आसानी और नॉर्मल तरीके से कैसे हो रहा है। रात में खाना खाने के बाद जब मैं अजय के साथ वॉक पर निकली तो उनसे पूछा कि घर में किसी को एतराज नहीं है मेरे काम करने पर?
अजय:- जब हमारे रिश्ते की बात चल रही थी तब तुम्हारे पापा ने हमें पहले ही बता दिया था कि तुम नौकरी करना चाहती हो और उन्होंने कहा भी था कि लड़की आर्थिक रूप से मजबूत रहे तो ज्यादा अच्छा है। मम्मी ने बस इतना ही कहा था कि घर बाहर मैनेज कर लेगी तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। तुम्हारे पापा ने कहा कि आप लोगों का साथ और समय उसे जरुर मदद करेगा और मैं भी चाहता हूं कि तुम अपनी नौकरी नहीं छोड़ो।
मुझे पापा पर बहुत प्यार आया। मैं खुश थी।
सुबह मम्मी ने पूछा, “ऑफिस के लिए कितने बजे निकलेगी?”
नेहा:- मैं 9:00 बजे निकल जाऊंगी मम्मी ।
मम्मी:- अरे अजय! इसे ऑफिस छोड़ते हुए चले जाना।
अजय:- हम दोनों का रूट अलग है मम्मी! इसे छोड़ने के चक्कर में मुझे लेट हो जाएगा।
नेहा:- कोई बात नहीं मैं रिक्शा से चली जाऊंगी।
मम्मी:- ठीक है कुछ दिन एडजस्ट कर लो। (अजय से कहते हुये) इसे टू व्हीलर दिला दो ताकि आने-जाने में सुविधा रहे।
मैं देख रही थी कि मम्मी मेरे सभी कामों में मदद करती थी और मैं धीरे-धीरे घर में सेट होते जा रही थी मम्मी धीरे धीरे जिम्मेदारियां मेरे ऊपर डाल रही थी मेरे मन का डर निकलते जा रहा था और घर में मैं रमते जा रही थी।
इधर स्मिता की भी शादी तय हो गई थी। मन में डर भी था और खुशी भी थी। कुछ नये सपने सजने लगे थे। नेहा को जब शादी का पता चला तो वह स्मिता को छेड़ने लगी।
नेहा:- अब तो महारानी के भाव नहीं मिलेंगे ! अब तो नखरे ही नखरे दिखेंगे! अब कहां मुझे याद रखोगी! अच्छा तुम जीजू से कब मिलवा रही हो ?
स्मिता:- फोन पर बात कर लो और फिर किसी दिन मिलवा भी दूंगी।
नेहा:- अच्छा यह बताओ तुम तो यहां ही बड़ी मुश्किल से नौकरी कर रही हो वहां पर लोग क्या बोल रहे हैं?
स्मिता:- अभी तक किसी ने कुछ कहा नहीं है आलोक को भी एतराज नहीं है मेरे काम करने से। सासू जी बोल रही थी कि मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती है, मुझसे घर के काम अब संभाले नहीं जाते।
नेहा के मन में घर लौटते समय यही सवाल घूम रहा था कि स्मिता ससुराल में एडजस्ट कर पाएगी क्या? उसे सबका सपोर्ट मिलेगा क्या?
तय समय पर स्मिता की शादी हो गई। पहले ही दिन से स्मिता ने घर के काम संभाल लिए। ऑफिस की छुट्टी खत्म होते ही स्मिता ने घर में कहा कि कल से वह ऑफिस जा रही है। सास ने कहा, “नाश्ता खाना निपटा कर जाना मेरी तबीयत ठीक नहीं है।”
स्मिता:- जी मम्मी !
अगले दिन जब स्मिता ऑफिस जाने लगी तो सास में टोक दिया, “नई नई शादी हुई है थोड़ा बहुत तैयार होकर, साड़ी पहन कर जाया करो। तुमको तो कोई कुछ कहेगा नहीं मुझे ही सब कहेंगे कि बहू बहुत तेज है।”
स्मिता:- जी मम्मी ।
शादी के कुछ दिन गुजरने के बाद इस स्मिता अपनी सुविधानुसार कपड़े पहनकर ऑफिस जाने लगी। सास मुंह तो बना लेती पर कहती कुछ नहीं। बस बड़बड़ाते रहती कि हमारे वक्त में मजाल था कि हम अपने बड़ों के कहने से बाहर जाए और आजकल के बच्चे हैं जिन्हें कुछ सुनना ही नहीं।”
घर के रीति-रिवाज और तौर-तरीकों पर मम्मी जी मेरे मायके से तुलना करती रहती और मेरी कोशिश होती कि मैं जल्दी से जल्दी घर से ऑफिस चली जाऊं अगर आलोक का साथ ना होता तो शायद मैं ससुराल में सामंजस्य नहीं बैठा पाती। आलोक हर बात को हल्के में लेकर हंसी मजाक में उड़ा देते और मैं चैन की सांस लेती थी। कितना फर्क है है मेरे और नेहा के ससुराल में। नेहा की सास हर काम में मदद करती है और मुझे मदद की उम्मीद रखनी पड़ती है। मैं आलोक के सहारे सफर तय कर रही हूं। ससुराल और उनसे जुड़े रिश्तो के बारे में न जाने कितनी बातें होती रहती हैं यह सच है कि हम हर एक को एक ही तराजू मैं नहीं तोल सकते हैं।
प्रियंका वरमा माहेश्वरी
गुजरात
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर

रामू काका सब खिड़कियाँ दरवाज़े अच्छे से बंद कर दीजिए,आज बारिश खूब जम कर हो रही है।अपने नौकर को आवाज़ दे कर श्वेता ने खिड़की से झांका तो सोच रही थी,चलो अच्छा भी है आज मेरे पौधों को पानी मिल गया।पिछले काफ़ी दिनों से तेज धूप से बेचारे मुरझा से गये थे। इतने में कबीर ,श्वेता के पति जो शहर के अच्छे बिज़नेस मैन मे से एक है ,कमरे में दाखिल हुए और कहने लगे।खुद से क्या बातें किये जा रही हो ?श्वेता कहने लगी !आज बोर हो गई हूँ सुबह से बारिश भी हो रही है।श्वेता ने कबीर से पूछा !कंयू न आज सावी के यहाँ चले? श्वेता की सहेली”सावी का पति भी शहर का माना हुआ सर्जन है,
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्क्वैश खेलने के शौकीन 68 वर्षीय डॉ जयशंकर ने कहा कि आज स्क्वैश कोर्ट का उद्घाटन करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है। खेल मंत्रालय इस परियोजना को पूरा करने और सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध है। कई खेलों को अब पहचान मिल रही है और देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा फिटनेस की जीवन शैली विकसित करने तथा प्रतिभाओं को अवसर देने का संदेश हर जगह गूंज रहा है। मोदी जी हमेशा शारीरिक फिटनेस, प्रतिस्पर्धा और मानसिक शक्ति पर जोर देते हैं, जो न्यू इंडिया के लिए बहुत जरूरी है। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत सरकार देश में इस तरह की और अधिक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। हम यथासंभव अधिक से अधिक खेल सुविधाएं विकसित करना सुनिश्चित करेंगे। मैंने 24 साल की उम्र में स्क्वैश खेलना शुरू किया था और आज मैं 68 साल का हूं। हमें बस अच्छी सुविधाओं, अच्छे कोच तथा खेलने के इरादे की जरूरत है। खेलो इंडिया और फिट इंडिया सभी के लिए है। इसके लिए कोई उम्र की सीमा नहीं है। पूर्व केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने दिसंबर 2020 में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। क्रियान्वयन से पहले स्क्वैश रैकेट फेडरेशन के प्रतिनिधियों तथा प्रख्यात खिलाड़ियों के बीच वरिष्ठ स्तर पर विभिन्न बैठकें आयोजित की गईं और यह निर्णय लिया गया कि स्टेडियम में कुल 6 स्क्वैश कोर्ट बनाए जाएं। इन 6 में से कुल 3 सिंगल कोर्ट को कन्वर्टिबल कोर्ट के रूप में रखा जाएगा, जो 2 डबल्स कोर्ट में कन्वर्टिबल होंगे।अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी जी हमेशा से खेल में ताकत और प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ-साथ मानसिक विश्वास को बढ़ाना चाहते हैं। राष्ट्रीय राजधानी में इस तरह की सुविधा का होना उस लक्ष्य को प्राप्त करने का एक और माध्यम है। जब ऐसा मौका मिलता है तो नए सितारों के उभरने की संभावना बढ़ जाती है।इस बात का उल्लेख करते हुए कि युवा चैंपियन भारत सरकार की योजनाओं से कैसे लाभान्वित हो सकते हैं, श्री ठाकुर ने कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि इस तरह का विश्व स्तरीय स्क्वैश इंफ्रास्ट्रक्चर आने वाले वर्षों में निश्चित रूप से ऐसे अनेक होनहार चैंपियनों को तैयार करेगा और हम अपनी लक्षित ओलंपिक पोडियम योजना तथा खेलो इंडिया योजना के माध्यम से उनका सहयोग करने के लिए तैयार हैं। भारत ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान स्क्वैश के खेल में राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 3 पदक और एशियाई खेलों में 13 पदक जीते हैं। यह आंकड़ा बढ़ता रहेगा। मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में स्क्वैश कोर्ट के निर्माण को भारतीय खेल प्राधिकरण की शासी निकाय की बैठक में कुल 5.52 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। भारत सरकार के स्वामित्व वाले राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) ने नई दिल्ली में कोविड-19 और प्रदूषण संबंधी प्रतिबंधों के बावजूद इस परियोजना को पूरा किया।इस परिसर में 80 व्यक्तियों के बैठने की जगह है और यहां पर पुरुष, महिला एवं दिव्यांग व्यक्तियों के लिए शौचालय, टूर्नामेंट रूम / कार्यालय कक्ष, फिजियोथेरेपी कक्ष, स्टोर, रिसेप्शन लॉबी, रखरखाव क्षेत्र आदि बनाये गए हैं। इस भवन को विश्व स्क्वैश महासंघ द्वारा अनुमोदित एएसबी सिस्टम में 100 दीवारों के साथ फैक्ट्री फिनिश्ड कस्टम डिजाइन पीईबी सुपर संरचना द्वारा बनाया गया है, जिसमें लेमिनेशन के साथ पीयूएफ की छत है।
केंद्रीय मंत्री के साथ ही अरुणाचल प्रदेश सरकार में शिक्षा, सांस्कृतिक मामले, स्वदेशी मामलों के मंत्री ताबा तेदिर और अरुणाचल प्रदेश सरकार में कृषि, बागवानी, पशु पालन एवं पशु चिकित्सा मंत्री तेगे तेकी के अलावा कई अन्य योग के चाहने वाले आज सुबह हुए योग उत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर श्री सोनोवाल ने कहा कि योग मन और शरीर दोनों का विकास करता है। यह हमारी आत्मा को सक्रिय करते हुए हमें शांति और व्यवस्थित रखता है। उन्होंने कहा कि भवगद् गीता ने योग के सार को खूबसूरती से बताया है, जो स्वयं की, स्वयं के माध्यम से, स्वयं की यात्रा है। उन्होंने कहा, मैं आज सुबह खूबसूरत जीरो वैली में योग का अभ्यास करके खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहा हूं।