बात बात पर भड़क रही थी शैफाली आज।रसोई के बर्तनो की आवाज़ से ही उसकी मन की व्यथा का अंदाज़ा लगाया जा सकता था।समीर की पत्नी शैफाली,जो किटी पार्टीयो में अक्सर आया जाया करती और आ कर अपने पति को परेशान करती और कहती ! समीर देखा !मेरी सहेली रीटा का घर बेस्ट लोकेशन में है हमारा कंयू नही। मोनिका ने अभी बंगला ख़रीदा है हम क्यों नहीं ले पा रहे।रात के खाने के बर्तन समेटते हुए शैफाली ने समीर से पूछा ?समीर तुम्हारी प्रमोशन का क्या बना ?बॉस से बात हुई क्या ? कब से कह रही हूँ बंगला ले लो।साल से ज़्यादा वक़्त हो गया हमें इस शहर में आये हुये।समीर चुपचाप अपनी पत्नी शैफाली की बाते सुन रहा था।शैफाली बोले जा रही थी ,मेरा मन भी करता है कि मै बंगले में रहूँ।अब तो मुझे ईर्ष्या सी होने लगी है सभी सहेलियों से।समीर तुम इतने काबिल हो कर भी कुछ कर नहीं पा रहे और बेधड़क भगवान को कोसे जा रही थी कि भगवान ने उसे ये फ़्लैट कंयू दिया,बंगला कयू नही दीया वग़ैरह वग़ैरह।समीर की ये सब बातें सुनना उसकी दिनचर्या में शामिल था।हर रोज ये बातें सुनता और मन ही मन में झुंझला जाता।चुपचाप अपने सोने के कमरे में चला गया।आँखे मूँद कर सोने का बहाना करने लगा।नींद तो उसे भी नहीं आ रही थी क्योंकि सोच तो वो भी यही रहा था कि कैसे तैसे कर के इक बंगला बन जाये।पता नहीं कब आँख लगी और सुबह हो गई।जल्दी से उठा और नाश्ता करके आफ़िस चला गया तो उसे वहाँ जा कर पता चला कि उसकी कंपनी जिस में वो काम करता था ,बैंकरपसी मतलब बंद होने को है और बॉस ने हाथ जोड़कर कर सभी कर्मचारियों को कहा !अब मेरी कंपनी बंद हो रही है और आप कहीं और काम देखिए।समीर के पैरो तले जैसे ज़मीन निकल गई।समीर अपनी कंपनी में बहुत अच्छी पोस्ट पर था।बड़ा अच्छा घर चल रहा था।ओह !अब क्या करेगा।आफ़िस से सीधा घर आया और शैफाली को भी ये बात बताई।अब दोनो परेशान कि अब कैसे घर चलेगा ,बच्चों की स्कूल की भारी फ़ीस कहाँ से देगा ,फ़्लैट की किश्त कैसे भरेंगा ।रात दिन नौकरी तालाश करने लगा।उसकी तो रातों की नींद ही उड़ गई।परेशान सा सोच रहा था कि अब जल्दी ही फ़्लैट भी ख़ाली करना पड़ेगा ,क्योंकि अगले महीने फ़्लैट की किश्त वो नहीं भर पायेगा।महीने का आख़िरी दिन है और जगह जगह नौकरी के लिये अपलाई कर चुका है मगर कहीं से कोई जवाब हाँ में नहीं आ रहा।कोई जवाब न पा कर बेहद निराश सा ,खोया सा बैठा था।कुछ नही सूझ रहा था उसे ।अचानक से दरवाज़े की घंटी बजी।समीर ने भारी कदमो से दरवाज़ा खोला ।वहाँ कोई उसे लैटर देने आया था।लैटर खोला तो देखा उसे इक कंपनी मे अच्छी नौकरी मिल गई है समीर इतना ख़ुश कि ख़ुशी से रोने ही लगा और कहने लगा कि शुक्र है भगवान ,तू कितना दयालु है मुझे सड़क पर जाने से बचा लिया।वरना मैं कहाँ ले कर जाता बच्चों को,और फ़्लैट को ऐसे देख रहा था जैसे वो फ़्लैट न हो कर उसका महल हो।शैफाली और समीर ख़ुशी से नाच रहे थे और भगवान का शुक्रिया कर रहे थे।
दोस्तों फ़्लैट तो वही था जो दोनों के दुख का कारण था और आज वही फ़्लैट सुख का कारण बना हुआ था।ख़ुशी कहाँ से आई अन्दर से ,स्वीकार करने मे ,शुक्र करने मे।ख़ुशी हमारी प्रतिक्रियाओं मे है कि हम हर हालात मे कैसे रिएक्ट करते है ।कैसे किसी हालात को समझते है।अपनी चीजों की कद्र हमे तब होती है जब वो हमारे हाथों से जा रही होती है या जा चुकी होती है ।सो वक़्त रहते हमे चीजो की,या हालातो की या अपने आसपास के लोगों की कद्र करना सीख लेना चाहिए।अकसर लोग सोचते है कि वो बहुत ख़ुश होते,अगर वो कहीं बाहर के देशों मे सैटल होते। विदेशों मे रहने वाले लोगों से पूछिए।वो भी परेशान है किसी न किसी बात पर।किसी को काम नही मिल रहा ,कोई बीमारी की वजह से परेशान,किसी के घर तालाक की बाते चल रही है कोई डिप्रेशन से घिरा हुआ है। जिसको सुख और सकून मिलना है वो कहीं भी रह कर भी मिल सकता है ।
दोस्तों ! दूसरो की उन्नति से ईषा करके कोई फ़ायदा नहीं ।अपने पास जो है उसी में सकून ढूँढिए।
“सकून की तालाश में अपना वक़्त न ज़ाया कर..सकून तेरे पास है और तू भटकाता फिर रहा है ..ऐ सकूने यार मे”।
✍️ लेखिका स्मिता केंथ (England)
मनोरंजन
यदि गलत धारणा बनायी जा रही हो, तो मीडिया को आत्मनिरीक्षण की जरूरत : अनुराग ठाकुर
“ये आकाशवाणी है”, वे अमर शब्द हैं, जिन्हें हर भारतीय पहचान सकता है, इनकी गूंज आज आकाशवाणी भवन के रंग भवन सभागार में सुनायी दे रही थी, क्योंकि श्री अनुराग ठाकुर ने इन शब्दों के साथ “और आज आप सूचना प्रसारण मंत्री को सुन रहे हैं” कहकर अपना वाक्य पूरा किया था। इन शुरुआती शब्दों ने आज राष्ट्रीय प्रसारण दिवस उत्सव को रेखांकित किया, इन्हीं शब्दों के साथ ऑल इंडिया रेडियो की 1927 में शुरुआत हुई थी, जो अब तक एक लंबी और शानदार यात्रा रही है।
उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि कुछ लोगों ने अनुमान लगाया था कि टेलीविजन और बाद में इंटरनेट के आने से रेडियो का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा, लेकिन रेडियो ने अपने दर्शकों की पहचान की है और न केवल अपनी प्रासंगिकता बल्कि विश्वसनीयता को भी बनाए रखा है।
उन्होंने कहा कि आज, जब लोग निष्पक्ष समाचार सुनना चाहते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से आकाशवाणी और दूरदर्शन की खबरें सुनते हैं। उन्होंने कहा कि आकाशवाणी देश के 92 प्रतिशत भू-भाग और 99 प्रतिशत से अधिक लोगों को कवर करती है और यह एक सराहनीय उपलब्धि है।
एक प्लेटफार्म के रूप में रेडियो के महत्व के बारे में श्री ठाकुर ने कहा कि कई प्रधानमंत्री हुए हैं, लेकिन किसी ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह रेडियो के मूल्य को नहीं समझा, जिन्होंने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिये देशवासियों से सीधे जुड़ने के लिए इसे अपने मनपसंद माध्यम के रूप में चुना है।

केन्द्रीय मंत्री ने मीडिया को सतर्क करते हुए कहा कि अगर कहीं ‘मीडिया ट्रायल’ जैसे कथनों के माध्यम से निजी मीडिया के बारे में गलत धारणा पैदा हो रही है, तो हमें अपने कामकाज के बारे में आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है।
आजादी का अमृत महोत्सव के भाव को अभिव्यक्ति प्रदान करने में दो संस्थाओं- आकाशवाणी और दूरदर्शन- की भूमिका को श्रेय देते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जहां स्वतंत्रता के बाद से अब तक की शिक्षा प्रणाली ने कई क्षेत्रीय स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका का उल्लेख नहीं किया, वहीं रेडियो और दूरदर्शन ने देश के दूर-दराज इलाकों के पांच सौ से अधिक गुमनाम नायकों के बारे में जानकारी एकत्रित की और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदानों की सराहना करते हुए इसे राष्ट्र के सामने प्रस्तुत किया।
केन्द्रीय मंत्री ने दोनों एजेंसियों के लिए सामग्री (कंटेंट) के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि यह सामग्री ही थी जिसने लोगों को इन दोनों चैनल की ओर खींचा। उन्होंने कहा कि टावरों के माध्यम से पहुंच चाहे जितनी भी हो जाए, वह सामग्री के महत्व की बराबरी नहीं कर सकती। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस डिजिटल युग में रेडियो लोगों के बीच अपनी उपस्थिति को और मजबूत करेगा।
केन्द्रीय मंत्री ने दूरदर्शन पर नए धारावाहिकों- कॉरपोरेट सरपंच: बेटी देश की, जय भारती, सुरों का एकलव्य और ये दिल मांगे मोर के साथ-साथ स्टार्टअप चैंपियंस 2.0 के प्रोमो को जारी किया।
केन्द्रीय सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने राष्ट्रीय प्रसारण दिवस के अवसर पर दर्शकों को शुभकामनाएं दीं। डॉ. मुरुगन ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान रेडियो द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला जब कई स्वतंत्रता सेनानियों ने इसका उपयोग ब्रिटिश साम्राज्यवादी सरकार के खिलाफ संचार के एक उपकरण के रूप में किया। उन्होंने देश के दूर-दराज के इलाकों को जोड़ने में रेडियो द्वारा निभाई गई भूमिका को रेखांकित किया और प्रसार भारती के दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक प्रसारक होने पर गर्व व्यक्त किया।
प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मयंक अग्रवाल ने टेलीविजन और रेडियो जैसे दो माध्यमों के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि इन प्लेटफार्मों पर प्रस्तुत समाचार सामग्री ने विश्वसनीयता की दृष्टि से निजी मीडिया की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है और इस तथ्य को विभिन्न सर्वेक्षणों द्वारा सामने लाया गया है।
इस अवसर पर आकाशवाणी के महानिदेशक श्री एन. वेणुधर रेड्डी तथा प्रसार भारती, दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
Read More »लोकसभा ने भारतीय अंटार्कटिक विधेयक, 2022 पारित किया, जिसका उद्देश्य भारत द्वारा अंटार्कटिक पर्यावरण और इस पर आश्रित व संबद्ध पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए राष्ट्रीय उपाय करना है
लोकसभा ने आज भारतीय अंटार्कटिक विधेयक, 2022 को पारित कर दिया। इस विधेयक को पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किया। विधेयक का उद्देश्य भारत द्वारा अंटार्कटिक पर्यावरण और इस पर आश्रित व संबद्ध पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए राष्ट्रीय उपाय करना है। विधेयक के बारे में जानकारी देते हुए, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य खनन या अवैध गतिविधियों से छुटकारा पाने के साथ-साथ क्षेत्र का विसैन्यीकरण सुनिश्चित करना है। इसका उद्देश्य यह भी है कि क्षेत्र में कोई परमाणु परीक्षण/विस्फोट नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक अंटार्कटिक संधि, पर्यावरण संरक्षण पर प्रोटोकॉल (मैड्रिड प्रोटोकॉल) के लिए अंटार्कटिक संधि और अंटार्कटिक समुद्री जीव संसाधनों के संरक्षण पर सम्मेलन के प्रति भारत के दायित्व के अनुरूप है।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि विधेयक सुस्थापित कानूनी तंत्रों के माध्यम से भारत की अंटार्कटिक गतिविधियों के लिए एक सामंजस्यपूर्ण नीति और नियामक ढांचा प्रदान करता है और यह भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम के कुशल और वैकल्पिक संचालन में भी सहायता प्रदान करेगा। यह विधेयक बढ़ते अंटार्कटिक पर्यटन और अंटार्कटिक जल में मत्स्य संसाधनों के सतत विकास के प्रबंधन में भारत की रुचि और सक्रिय भागीदारी को भी सुविधाजनक बनाएगा। यह अंतरराष्ट्रीय दृश्यता और ध्रुवीय क्षेत्र में भारत की विश्वसनीयता को बढ़ाने में भी सहायता करेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैज्ञानिक एवं रसद क्षेत्रों में सहयोग मिल सकेगा।
डॉ जितेंद्र सिंह ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि अंटार्कटिका में भारतीय वैज्ञानिकों की निरंतर और बढ़ती उपस्थिति अंटार्कटिक अध्ययन के लिए समवर्ती प्रतिबद्धता और संवेदनशील अंटार्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के साथ अंटार्कटिका पर घरेलू कानून को अपनाने के लिए अंटार्कटिक संधि प्रणाली के सदस्य के रूप में अपने दायित्वों के अनुरूप है। इस तरह के कानूनों को लागू करने से अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में किए गए किसी भी विवाद या अपराधों से निपटने के लिए भारत की अदालतों को अधिकार क्षेत्र प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह का कानून नागरिकों को अंटार्कटिक संधि प्रणाली में प्रदत्त नीतियों के लिए बाध्य करेगा। यह विश्वसनीयता बनाने और विश्व स्तर पर देश की स्थिति को बढ़ाने में भी उपयोगी होगा।
इस विधेयक में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय अंटार्कटिक प्राधिकरण (आईएए) की स्थापना का भी प्रस्ताव है, जो सर्वोच्च निर्णय लेने वाला प्राधिकरण होगा और विधेयक के तहत अनुमत कार्यक्रमों और गतिविधियों के लिए सुविधा प्रदान करेगा। यह अंटार्कटिक अनुसंधान और अभियानों के प्रायोजन और पर्यवेक्षण के लिए एक स्थिर, पारदर्शी और जवाबदेह प्रक्रिया प्रदान करेगा; अंटार्कटिक पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण; और अंटार्कटिक कार्यक्रमों और गतिविधियों में लगे भारतीय नागरिकों द्वारा प्रासंगिक नियमों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत मानकों के अनुपालन को भी सुनिश्चित करेगा। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव, आईएए के अध्यक्ष होंगे और आईएए में संबंधित भारतीय मंत्रालयों के आधिकारिक सदस्यों के साथ इसके निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाएगें। वर्तमान में भारत के अंटार्कटिका में मैत्री (1989 में कमीशन) और भारती (2012 में कमीशन) नामक दो परिचालन अनुसंधान केंद्र हैं। भारत ने अब तक अंटार्कटिका में 40 वार्षिक वैज्ञानिक अभियानों का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया हैं। आर्कटिक के एनवाई-एलसंड, स्वालबार्ड में हिमाद्री स्टेशन के साथ, भारत अब उन राष्ट्रों के कुलीन समूह से शामिल है जिनके पास ध्रुवीय क्षेत्रों के भीतर कई शोध केंद्र हैं। 1 दिसंबर, 1959 को वाशिंगटन डी.सी. में अंटार्कटिक संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे और प्रारंभिक तौर पर इसमें 12 देशों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे। तब से, 42 अन्य देश भी इस संधि में शामिल हो चुके हैं। इस संधि मे कुल चौवन देश हैं, इनमें से उनतीस देशों को अंटार्कटिक सलाहकार बैठकों में मतदान के अधिकार के साथ सलाहकार देशों का दर्जा प्राप्त है और पच्चीस देश गैर-परामर्शदाता दल हैं जिन्हें मतदान देने का अधिकार नहीं है। भारत ने 19 अगस्त, 1983 को अंटार्कटिक संधि पर हस्ताक्षर किए थे और 12 सितंबर, 1983 को सलाहकार का दर्जा भी प्राप्त किया। अंटार्कटिक समुद्री जीवन संसाधनों के संरक्षण पर सम्मेलन पर 20 मई, 1980 को कैनबरा में हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें अन्य बातों के साथ, अंटार्कटिक पर्यावरण के संरक्षण और सुरक्षा के लिए विशेष रूप से, समुद्री जीव संसाधनों के संरक्षण और सुरक्षा करना शामिल है। भारत ने 17 जून, 1985 को सम्मेलन में अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और वह इस संधि के तहत अंटार्कटिक समुद्री जीव संसाधनों के संरक्षण आयोग का सदस्य है। अंटार्कटिक संधि प्रणाली को मजबूती प्रदान करने, अंटार्कटिक पर्यावरण और आश्रित एवं संबद्ध पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए एक व्यापक शासन को विकसित करने के लिए 4 अक्टूबर, 1991 को पर्यावरण संरक्षण पर मैड्रिड में अंटार्कटिक संधि के लिए प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए थे। भारत ने पर्यावरण संरक्षण पर अंटार्कटिक संधि के लिए 14 जनवरी, 1998 को प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। अंटार्कटिका दक्षिण अक्षांश के 60 डिग्री दक्षिण में स्थित एक प्राकृतिक रिजर्व है, और यह शांति और विज्ञान के लिए एक समर्पित स्थल है जिसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद का परिदृश्य या मामला नहीं बनना चाहिए।
Read More »केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, इसरो लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं के प्रदर्शन के माध्यम से अंतरिक्ष पर्यटन की दिशा में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने की प्रक्रिया में है
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसरो लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता के प्रदर्शन द्वारा अंतरिक्ष पर्यटन की दिशा में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने की प्रक्रिया में है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में एक सवाल का लिखित उत्तर देते हुए कहा कि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) अंतरिक्ष गतिविधियों को पूरा करने में निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना चाहता है, जिसमें अंतरिक्ष पर्यटन भी शामिल है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अंतरिक्ष गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों में 61 देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और संबंधों को आगे बढ़ाता है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) की स्थापना अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत एक सिंगल विंडो एजेंसी के रूप में की गई है, जिसे अंतरिक्ष डोमेन में निजी क्षेत्र की गतिविधियों को बढ़ावा देने, समर्थन देने और प्राधिकृत करने के लिए बनाया गया है, जिसमें युवा उद्यमी और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्र शामिल हैं।
इन-स्पेस, इसरो केंद्रों में उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं और विशेषज्ञता को निजी संस्थाओं के साथ साझा करने में सक्षम तंत्र को लेकर आएगा।
एक संबंधित प्रश्न के जवाब में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) एक व्यापक, एकीकृत अंतरिक्ष नीति का मसौदा तैयार कर रहा है, जो निजी भारतीय अंतरिक्ष उद्योग की गतिविधियों को दिशा प्रदान करेगा।
Read More »पर्यटन और आतिथ्य भारत में रोजगार पैदा करने वाले सबसे बड़े क्षेत्रों में शुमार है: जी किशन रेड्डी
पर्यटन और आतिथ्य का क्षेत्र भारत में सबसे बड़े रोजगार सृजन के क्षेत्रों में शुमार है और विदेशी मुद्रा आय (एफईई) का एक बड़ा हिस्सा पैदा करने में योगदान दे रहा है। वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के तीसरे टीएसए (पर्यटन उपग्रह खाता) के अनुसार देश के रोजगार में पर्यटन का योगदान इस प्रकार है:
| 2017-18 | 2018-19 | 2019-20 | |
| नौकरी में हिस्सेदारी (फीसदी में) | 14.78 | 14.87 | 15.34 |
| प्रत्यक्ष (फीसदी में) | 6.44 | 6.48 | 6.69 |
| अप्रत्यक्ष (फीसदी में) | 8.34 | 8.39 | 8.65 |
| पर्यटन के कारण प्रत्यक्ष/ अप्रत्यक्ष रोजगार (मिलियन में) | 72.69 | 75.85 | 79.86 |
18 जुलाई 2022 तक अतुल्य भारत पर्यटन सुविधा (आईआईटीएफ) मूल प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के 3 बैचों के लिए परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की गई है, जिसके तहत कुल 3795 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया गया है और उनका पुलिस सत्यापन पूरा होने के बाद उन्हें प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। आईआईटीएफ प्रमाणन कार्यक्रम के लिए संशोधित दिशानिर्देश के तहत, मौजूदा क्षेत्रीय स्तर के गाइड (आरएलजी) का नाम बदलकर अतुल्य भारत पर्यटक गाइड (आईआईटीजी) कर दिया गया है। कुल 1795 आईआईटीजी (पूर्व में जिसे आरएलजी के रूप में जाना जाता है) ने रिफ्रेशर कोर्स सफलतापूर्वक पूरा किया है।
देशभर में सुप्रशिक्षित और पेशेवर पर्यटक सुविधाकर्ताओं का एक पूल बनाने के उद्देश्य से आईआईटीएफसी कार्यक्रम एक जनवरी 2020 को शुरू किया गया था। यह एक डिजिटल पहल है जो उम्मीदवारों के लिए बुनियादी, उन्नत (विरासत और साहसिक), स्पोकन लेंग्वेज और रिफ्रेशर कोर्स के लिए आईआईटीएफसी कार्यक्रम के तहत एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफाॅर्म प्रदान करती है। आईआईटीएफसी के लिए दिशानिर्देश बाजार की मांग, पर्यटन हितधारकों के अनुरोध आदि को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं। हाल ही में, हितधारकों से प्राप्त अनुरोध के अनुसार, आईआईटीजी (एडवांस एंड हेरिटेज) पाठ्यक्रम के लिए न्यूनतम शैक्षिक मानदंड स्नातक या समकक्ष डिग्री तक बढ़ा दिया गया है।
यह जानकारी पर्यटन मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
Read More »भारत के खिलाफ काम करने वाली 747 वेबसाइटों और 94 यूट्यूब चैनलों पर 2021-22 के दौरान रोक लगाई गई: केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने आज कहा कि 2021-22 में मंत्रालय ने देशहित के खिलाफ काम करने वाले यूट्यूब चैनलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। राज्य सभा में एक प्रश्न के उत्तर में, श्री ठाकुर ने कहा कि मंत्रालय ने 94 यूट्यूब चैनलों, 19 सोशल मीडिया अकाउंट और 747 यूआरएल के खिलाफ कार्रवाई की है और उन्हें रोक दिया गया है। यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69ए के तहत की गई है।
मंत्री ने आगे कहा कि सरकार ने फर्जी खबरें फैलाकर और इंटरनेट पर दुष्प्रचार करके देश की संप्रभुता के खिलाफ काम करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।
Read More »खुद से हठ करना ग़लत नहीं है इक ताक़त है
अक्तूबर का महीना और सुहानी हवायों का धीरे धीरे चलना।होटल के लॉन में फूलो की सजावट क़ाबिले तारीफ़ थी और फूलो की सोंधी सोंधी ख़ुशबू हवा मे जैसे घुल कर सारे वातावरण को मदहोश कर रही थी। होटल भी इक पहाड़ी पर, वाह !जहां से चारों ओर पहाड़ ही पहाड़,ढलती हुई शाम और उस पर गाने की धुन बड़ी ही मनमोहक प्रतीत हो रही थी।शाही खानो के स्टालस और उसपर खाने की ख़ुशबू ,मैं उस शादी के माहौल का पूरे मन से आनन्द ले रही थी।बहुत सालों के बाद इंग्लैंड से भारत आई थी,बानी की शादी मे शामिल होने के लिये।बानी मेरी सहेली की
बेटी।हालाँकि शादियाँ इंग्लैंड में भी बहुत अच्छे से होती हैं, मगर इंगलिश टच तो कहीं न कहीं होता ही है।मैं बहुतों से मिलते मिलाते बानी को मिली।बहुत ही प्यारी लग रही थी दुल्हन के रूप में।बानी के पिता का अच्छा कारोबार था तो ज़ाहिर था,शादी भी बड़े ही स्तर पर थी।जो साज सजावट से ही साफ़ दिखाई दे रही थी।मेरे बचपन की सहेली निशा भी मिली।बड़ा अच्छा लग रहा था।खाने की ख़ुशबू मुझे खाने की स्टालस की ओर खींचने लगी।मै और निशा स्टालस की बढ़ रही थी तो पीछे से आवाज़ आई ,बेटा आरूश तुम्हारी ममी कहाँ है ? जा बेटा ,ज़रा बुला कर ला।आरूश अपनी दादी से कह रहा था।दादी इतने लोगों के बीच कहाँ ढूँढू ममी को।अच्छा देखता हूँ शायद शैल आंटी से पास खडी हो।आरूश भागा भागा गया और अपनी ममी स्वाति को बुला लाया।दादी ने स्वाति से कह रही थी।
बहू स्वाति !मेरी खाने की प्लेट तो बना ला ज़रा ,और ये भी देख लेना ,तुमहारे पापा ने खाना खा लिया क्या ?और हाँ सुन ज़्यादा तीखी चीजें मेरी प्लेट मत लाना।सब थोड़ा ही डालना ,बहुत ज़्यादा खाना तो मै खा ही नही सकूँगी ।
इक और आवाज़ फिर सुनाई दी ,जो कह रही थी ! नही पूनम तुम ख़ुद उठो और खुद अपनी प्लेट बना कर लाओ।ये क्या तरीक़ा है पूनम ऐसे तो तुमहारी टाँगें काम करना बंद कर देंगी,और अगर तुम खुद चलोगी तो अपनी पसंद का खाना ,ज़रूरत के मुताबिक़ डाल कर ला सकती हो।बहू तो मर्ज़ी से कुछ भी प्लेट में डाल कर ले आयेगी।वो शायद तुम खाना चाहोगी कि नहीं ,इसी लिये कह रही हूँ ।अभी तुम चल सकती हो ,तो चलना चाहिए न ।इस तरह बच्चों से ऐसे छोटी छोटी बाते की अपेक्षा कंयू करती हो और तुम अपने पति गोयल साहब की भी फ़िक्र क्यों कर रही हो ,देखा नही वो अपने दोस्तों के बीच कितना हंस खेल रहे है ,वो भी खा ही लेंगे अपने दोस्तों के साथ।
तुम बस मेरा हाथ पकड़ो ,मैं चलती हूँ तुमहारे साथ।और पूनम कह रही थी।मैं कहाँ जाऊँगी ,बहू ले आयेगी न अपने आप।मुझ से नहीं चला जाता इतनी भीड़ में।फिर इक ज़ोर से हंसी सुनाई दी।सारी बाते मेरे कानों मे साफ़ सुन रही थी।
मैंने मुड कर देखा तो इक बड़ी उम्र की महिला ,जो आंटी शोभना थी और अपनी सहेली पूनम का हाथ बड़े प्यार से पकड़ कर धीरे धीरे खाना की स्टालस की तरफ़ ले जा रही थी। मुख पर तेज ,आवाज़ मे रोबीलापन था और चाल भी बेमिसाल थी।बड़ा अच्छा लगा ये देख कर कि आंटी शोभना बड़ी उम्र होने के बाद भी उनकी सोच कितनी पाजीटिव है।जब कि हम इन्हें पुरानी पीढ़ी मे गिनते है और उन्हें पुराने ख़यालात वाले समझते है।
मैं खाने की प्लेट ले कर लाईन मे खड़ी थी।वो दोनों महिलायें हमारे पास आई तो मैंने शिष्टाचार निभाते हुए ,लाईन मे उन्हें आगे करना चाहा मगर आंटी शोभना ने बहुत ही प्यार से मुझे धन्यवाद दिया और कहाँ नही बेटा ,आप पहले अपनी प्लेट बनाइये ,हमारी बारी भी आ जायेंगीं जब कि आंटी शोभना के हाथ में भी चलने के लिये छड़ी पकड़ी हुई थी।मैं सोच रही थी ये आंटी जो खुद ठीक से चल भी नहीं पा रही।चेहरे पर पसीने की बूँदें भी चमक रही थी खुद आंटी की उम्र 80 साल के लगभग होगी शायद,मगर अपनी सहेली को कैसे समझा रही थी,और पूनम आंटी उनसे उम्र मे छोटी लग रही थी और यही नही ,निशा बता रही थी मुझे कि शोभना आंटी तो इस उम्र मे भी,इतनी शहर की ट्रैफ़िक होने के बावजूद भी ,खुद अपनी गाड़ी चलाती हैं ।बाहर के सारे काम खुद ही करती है।मैं सोचने लगी मैं आज भी अपनी सासु माँ की खाने की प्लेट लगा कर देती हूँ। कहीं न कहीं हम ही है जो बुजुर्गों को प्रोत्साहित नहीं करते कि वो अपना काम खुद से करते रहे।शोभना आंटी ठीक ही तो कह रही थी कि जब तक जान है।जब तक शरीर मे ताक़त है तब तक हिम्मत करते रहना चाहिए।ये कितनी अच्छी सीख है बुजुर्गों के लिये और हम सब के लिए ।
बहुत लोग ऐसा सोचते भी हैं कि बहू आ गई तो अब सास को बहू पर ज़िम्मेदारी सौंप देनी चाहिए।दोस्तों मैं खुद ऐसी सोच को सलाम करती हूँ ।बच्चे लाख अच्छे हो फिर भी अपने आप का काम करते रहना चाहिए।इससे शरीर भी चलता रहता है ।मन भी लगा रहता है।हठ करते रहना चाहिए।ये ज़रूरी नही कि आप की उम्र क्या है ज़रूरी ये है कि आप ,किस उम्र की सोच रखते है यू भी खुद से हठ करना ग़लत नहीं है ,ये इक ताक़त है सच में “कुछ लोग चंदन की तरह, ताउम्र खुशबू देते रहते हैं।”
बढ़ती उम्र उन्हें मुरझाने नहीं देती ,क्योंकि वो उम्र को हराना जानते हैं अपनी जवान सोच के साथ।
🙏लेखिका स्मिता
नेशनल मीडिया क्लब के “मैंगो फेस्टिवल” में छाया मोदी आम
यूपी सरकार की कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने किया उदघाटन ।
महोत्सव में हर आम और खास ने शिरकत किया।
कानपुर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, इंसान के हाँथ की बनाई नही खाते हम आम के मौसम में मिठाई नही खाते, यह पंक्तियां नेशनल मीडिया क्लब के मैंगो फेस्टिवल पर सटीक बैठती है , इस मैंगो फेस्टिवल का उदघाटन मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करने पहुँची उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल व वर्तमान में योगी मंत्रिमंडल की कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने फीता काटकर किया । कानपुर के प्रमिला सभागार में आयोजित इस मैंगो फेस्टिवल में मंत्री , सांसद , विधायक , उद्योगपति , आलाअधिकारी समाजसेवियों के अलावा और नामचीन हस्तियों का तांता लगा रहा । इस कार्यक्रम में लगभग 300 से ज्यादा प्रजातियों के आम की प्रदर्शनी लगाई गई । जिसमें मोदी आम मेहमानों में आकर्षण का केंद्र बना । जिसके बाद कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्या ने मोदी आम को बेस्ट मैंगो के खिताब से नवाज़ा । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बेबी रानी मौर्य के अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री संजय गंगवार, राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने इस महोत्सव की जमकर तारीफ की ।
कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्या ने इस खास आम महोत्सव की जमकर तारीफ़ की । उन्होंने कहा कि देशभर में उन्होंने अब तक अनगिनत पार्टी देखी , लेकिन इस मैंगो पार्टी में आकर एक अलग एहसास हुआ । उन्होंने कहा कि मैंने अपने कई साथियों से सुना कि उन्हें इस मैंगो पार्टी का बेसब्री से इंतजार रहता है, ऐसे आयोजन देश मे होना एक अलग एहसास कराता है ।
इस दौरान राज्यमंत्री संजय गंगवार ने नेशनल मीडिया क्लब के संस्थापक व सहारा समय के समूह संपादक रमेश अवस्थी की जमकर तारीफ करते हुए कहा की यह फेस्टिवल अपने आप में एक अलग छटा बिखेरता है । उन्होंने इस आम महोत्सव के लिए आयोजकों को बधाई दी साथ ही कहा कि कृषि प्रधान देश में कृषकों की फसल को इतना बड़ा प्लेटफार्म देना काबिले तारीफ है। वहीं उत्तरप्रदेश सरकार की राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ल ने कहा कि नेशनल मीडिया क्लब की आम पार्टी का सभी को एक साल तक इंतजार रहता है। क्योकि यह अन्य आयोजनों से अलग है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कानपुर की महापौर प्रमिला पाण्डेय ने कहा कि मैं इस आयोजन का हर वर्ष बेसब्री से इंतजार करती हूँ, ऐसा आयोजन जिसमे देश प्रदेश व कानपुर नगर के कई नामचीन हस्तियों का एक साथ होना इस आयोजन को अति ख़ास बनाता है, मैं ऐसे आयोजन में आकर और आमो की इतनी प्रजातियों को देखकर महसूस करती हूँ कि ये सच मे खास लोगों की आम पार्टी है। वहीं आरएसएस के प्रांत प्रचारक श्री राम जी ने मैंगो फ्रेस्टिवल में आम की प्रदर्शनी की जमकर तारीफ की, उन्होंने प्रदर्शनी में आये हुए किसानों का भी उत्साहवर्धन किया ।
वहीं नेशनल मीडिया क्लब के संस्थापक और सहारा समय के ग्रुप एडिटर रमेश अवस्थी ने आये हुए मेहमानों का स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया, इस दौरान उन्होंने बताया कि मैंगो फेस्टिवल का मकसद किसानों की मेहनत से जनता को रूबरू कराना तो है साथ ही आम जनमानस को पता चले कि हमारे देश का किसान कितनी मेहनत करके उन्हें स्वाद और शक्ति उत्पन्न करने वाले फल और अनाज पैदा करता है । उन्होंने कहा कि आम का स्वाद तो सभी को लुभाता है लेकिन इसकी गुठलियां भी कारगर होती है ।
नेशनल मीडिया क्लब के अध्यक्ष और मैंगो फेस्टिवल के आयोजक सचिन अवस्थी के ने बताया कि पार्टी का मकसद लोगो को आम की प्रजतियो से अवगत करना था । उन्होंने कहा की देश में 700 ज्यादा प्रकार के आम उपलब्ध है । जिनमे से 300 से अखिक आम के प्रकार इस प्रदर्शनी में मौजूद है ।
इस कार्यक्रम के दौरान संगीत लहरियों ने भी भक्ति व फिल्मी गीत संगीत से कार्यक्रम में चार चाँद लगाए । इस दौरान भारतीय जनता पार्टी से सांसद सत्यदेव पचौरी, पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी, महापौर प्रमिला पाण्डेय, एमएलसी सलिल विश्नोई , विधायक सुरेंद्र मैथानी , जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण , पूर्व विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया , वरिष्ठ भाजपा नेता वीरेंद्र दुबे, प्रकाश पाल, पंजाबी अकादमी के चेयरमैन गुरविंदर सिंह छाबड़ा , गुरु सिंह सभा के हरविंदर सिंह लार्ड , सुखविंदर सिंह लाडी, जिला अध्यक्ष सुनील बजाज , महामंत्री वीरेश त्रिपाठी , महामंत्री संतोष शुक्ला , दक्षिण की भाजपा जिलाध्यक्ष बिना आर्या पटेल , महामंत्री शिवराम सिंह , क्षेत्रीय सह मीडिया प्रभारी अनूप अवस्थी , भाजपा युवा मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सुनील साहू , पूर्व जिला अध्यक्ष नवाब सिंह ,राज्य महिला आयोग की सदस्य पूनम कपूर, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश अवस्थी, पार्षद नवीन पंडित, पार्षद संदीप जायसवाल, पूनम द्विवेदी समेत सैकड़ो भाजपाई मौजूद रहे । वही समाजवादी पार्टी से विधायक अमिताभ बाजपेई, विधायक हसन रूमी, पूर्व विधायक सतीश निगम, वीरेंद्र शुक्ला, महासचिव अभिषेक गुप्ता मोनू मौजूद रहे । जबकि प्रशानिक महकमें से जॉइन कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी, एडीसीपी ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव, डीसीपी प्रमोद कुमार, डीसीपी विजय ढुल, केडीए सचिव शत्रुघन वैश्य , अपर नगर आयुक्त रोली गुप्ता , कार्डियोलॉजी निदेशक डॉ विनय कृष्णा, डॉ राकेश वर्मा समेत दर्जनों अधिकारी मौजूद रहे ।
वहीं डेन केबिल नेटवर्क के डायरेक्टर संजीव दीक्षित , कानपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अवनीश दीक्षित , उधोगपति विजय कपूर, आईआईए अध्यक्ष आलोक , महाराज शिवाकान्त शास्त्री महाराज, जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश तिवारी , चरनजीत सिंह बंटी आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत कर के कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई ।
ससुराल गेंदा फूल
नेहा इंजीनियरिंग की डिग्री तो मिल गई है अब तुम्हारा आगे का क्या विचार है? स्मिता:- यार ! मेरे विचार से क्या होता है? घरवाले लड़का देख रहे हैं। एक जगह बात भी चल रही है। मम्मी कह रही थी कि अगर अच्छा लड़का मिल गया तो हाथ पीले कर दूंगी।
नेहा:- तो जॉब के लिए ट्राई नहीं करेगी?
स्मिता:- करना तो चाह रही लेकिन पता नहीं क्या कर पाती हूं और अनमनी होकर घर जाने लगी।
स्मिता के बारे में सोचते सोचते नेहा घर पहुंच गई।
नेहा:- मां क्या बनाया है खाने में?
मां:- कढ़ी चावल है, फ्रेश हो जाओ फिर खा लो। फिर आराम से बात करते हैं। नेहा ने सवालिया नजर से मां की तरफ देखा।
मां:- तेरी बुआ ने एक लड़का बताया है। अच्छा घर परिवार है ऐसा बोल रही थी जीजी। अच्छा घरबार होगा तो रिश्ता तय कर सकते हैं।
नेहा:- मां मेरी पढ़ाई अभी बाकी है। मुझे एमबीए करना है फिर जॉब करना है। इस बारे में फिर सोचूंगी।
मां:- देखो ! लोग अच्छे होंगे तो रिश्ता तय कर देंगे फिर चाहे शादी बाद में करें। नेहा कुछ नहीं बोली। नेहा शाम की राह देखने लगी कि वह पापा से इस विषय पर बात करेगी। पढ़ाई कर लेने के बाद में क्या तुरंत शादी कर देना ही सही होता है? क्या यही एक जिम्मेदारी रह जाती है हमारी हम लड़कियों के प्रति? यही सब सोचते सोचते नेहा की आंख लग गई। शाम को पापा आए तो नेहा ने चाय बना कर दी और कहा, “पापा मुझे आपसे कुछ बात करनी है।”
पापा बोले, “बोलो बेटा क्या चल रहा है दिमाग में?
नेहा:- पापा मुझे अभी एमबीए करके जॉब करनी है फिर उसके बाद मेरी शादी की जाये पर मम्मी और बुआ अभी से मेरे पीछे पड़ी है!
पापा:- देखो बेटा तुमको कुछ करने के लिए मना नहीं किया है और हम अभी से देखेंगे तब जाकर एक-दो साल में कुछ ढंग के रिश्ते आएंगे और तुमको जो करना है उसके लिए कोई मना थोड़ी कर रहे है। जब तुम आर्थिक रूप से मजबूत हो जाओगी हम तभी तुम्हारी शादी करेंगे।
इधर स्मिता के घर में उसके ऊपर लगातार शादी के लिए दबाव बन रहा था। स्मिता भी चाह रही थी कि वह जॉब करें और उसके बाद ही उसकी शादी हो लेकिन उसकी मां यह बात नहीं समझ पा रही थी।
इधर नेहा को प्लेसमेंट मिल गया था और वह अपनी नौकरी के साथ साथ एमबीए की तैयारी में लग गई थी।
स्मिता ने भी अपने पापा से परमिशन लेकर अपनी जॉब शुरू कर दी लेकिन स्मिता के पापा ने स्पष्ट कह दिया था कि यदि ससुराल वाले नौकरी नहीं पसंद करेंगे तो तुझे नौकरी छोड़नी पड़ेगी। स्मिता कुछ नहीं बोली यह सोच कर कि चलो घर से बाहर काम कदम तो निकले। दोनों सहेलियां अपनी अपनी राह पर चलने लगी। दोनों में अक्सर फोन के जरिए बातचीत होते रहती थी।
नेहा:- हेलो स्मिता ! मेरी शादी पक्की हो गई है मेरा कलीग ही है। अजय नाम है उसका। बस हाय हेलो ही थी, ज्यादा कुछ बातचीत भी नहीं थी हमारी। अजय मुझे पसंद करते हैं यह बात मुझे पता नहीं थी। उसके घरवालों ने पापा से मिलकर मेरा हाथ मांग लिया।
स्मिता:- अरे वाह! कांग्रेचुलेशन ! शादी की तारीख कब निकली है ? मुझे भी तो शॉपिंग करनी है, अभी से शुरू करनी होगी।
नेहा:- तीन महीने बाद की तारीख निकली है।
स्मिता:- वाह़़….. बढ़िया!
शादी के दिन करीब आ रहे थे और तैयारियां शुरू हो चुकी थी। नेहा ऑफिस के काम के साथ-साथ शादी की तैयारी भी कर रही थी । आखिर वह दिन भी आ गया जब नेहा शादी करके ससुराल चली गई। अजय को पति रूप में पाकर नेहा खुश थी लेकिन एक अनजाना सा डर भी था उसके मन में कि पता नहीं हम दोनों में सामंजस्य हो पाएगा कि नहीं? मैं नौकरी छोड़ना नहीं चाहती थी और पता नहीं अजय के मन में क्या है? अजय क्या चाहते हैं मैंने कभी इस विषय पर बात भी नहीं की? उसका ससुराल में पहला दिन बहुत अच्छा रहा। घर के माहौल और तौर-तरीकों को समझने का प्रयास करते रही। किचन में सब देखती समझती रही, यथासंभव काम में हाथ बंटाती रही। मेरे ऑफिस की छुट्टियां अब खत्म होने वाली थी। कुछ दिनों में मुझे ऑफिस ज्वाइन करना था और मुझे अब अजय से बात करना जरूरी हो गया था। शाम को जब वह घर आए तो चाय मैं कमरे में ही ले आई।
नेहा:- सुनो! कुछ बात करनी है आपसे।
अजय:- हां…. बोलो ।
नेहा:- मेरे ऑफिस ज्वाइन करने का समय आ रहा है, छुट्टियां खत्म हो रही है।
अजय:- हां तो दिक्कत क्या है? समय से ऑफिस ज्वाइन कर लो।
नेहा:- वो…. मम्मी पापा से बात….
अजय:- उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। तुम ऑफिस जाना शुरु कर दो।
मैं मुस्कुरा कर रह गई। मम्मी को बताना जरूरी था कि मैं ऑफिस जाने वाली हूं। सुबह किचन में काम करते हुये मैंने कहा, मम्मी जी मैं मंडे से ऑफिस जाना शुरू कर रही हूं।
मम्मी:- हां ठीक है… सारे मेहमान चले गये हैं और रस्में भी पूरी हो गई है तो तुम अपना ऑफिस शुरू कर सकती हो। मुझे आश्चर्य हो रहा था कि सब इतनी आसानी और नॉर्मल तरीके से कैसे हो रहा है। रात में खाना खाने के बाद जब मैं अजय के साथ वॉक पर निकली तो उनसे पूछा कि घर में किसी को एतराज नहीं है मेरे काम करने पर?
अजय:- जब हमारे रिश्ते की बात चल रही थी तब तुम्हारे पापा ने हमें पहले ही बता दिया था कि तुम नौकरी करना चाहती हो और उन्होंने कहा भी था कि लड़की आर्थिक रूप से मजबूत रहे तो ज्यादा अच्छा है। मम्मी ने बस इतना ही कहा था कि घर बाहर मैनेज कर लेगी तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। तुम्हारे पापा ने कहा कि आप लोगों का साथ और समय उसे जरुर मदद करेगा और मैं भी चाहता हूं कि तुम अपनी नौकरी नहीं छोड़ो।
मुझे पापा पर बहुत प्यार आया। मैं खुश थी।
सुबह मम्मी ने पूछा, “ऑफिस के लिए कितने बजे निकलेगी?”
नेहा:- मैं 9:00 बजे निकल जाऊंगी मम्मी ।
मम्मी:- अरे अजय! इसे ऑफिस छोड़ते हुए चले जाना।
अजय:- हम दोनों का रूट अलग है मम्मी! इसे छोड़ने के चक्कर में मुझे लेट हो जाएगा।
नेहा:- कोई बात नहीं मैं रिक्शा से चली जाऊंगी।
मम्मी:- ठीक है कुछ दिन एडजस्ट कर लो। (अजय से कहते हुये) इसे टू व्हीलर दिला दो ताकि आने-जाने में सुविधा रहे।
मैं देख रही थी कि मम्मी मेरे सभी कामों में मदद करती थी और मैं धीरे-धीरे घर में सेट होते जा रही थी मम्मी धीरे धीरे जिम्मेदारियां मेरे ऊपर डाल रही थी मेरे मन का डर निकलते जा रहा था और घर में मैं रमते जा रही थी।
इधर स्मिता की भी शादी तय हो गई थी। मन में डर भी था और खुशी भी थी। कुछ नये सपने सजने लगे थे। नेहा को जब शादी का पता चला तो वह स्मिता को छेड़ने लगी।
नेहा:- अब तो महारानी के भाव नहीं मिलेंगे ! अब तो नखरे ही नखरे दिखेंगे! अब कहां मुझे याद रखोगी! अच्छा तुम जीजू से कब मिलवा रही हो ?
स्मिता:- फोन पर बात कर लो और फिर किसी दिन मिलवा भी दूंगी।
नेहा:- अच्छा यह बताओ तुम तो यहां ही बड़ी मुश्किल से नौकरी कर रही हो वहां पर लोग क्या बोल रहे हैं?
स्मिता:- अभी तक किसी ने कुछ कहा नहीं है आलोक को भी एतराज नहीं है मेरे काम करने से। सासू जी बोल रही थी कि मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती है, मुझसे घर के काम अब संभाले नहीं जाते।
नेहा के मन में घर लौटते समय यही सवाल घूम रहा था कि स्मिता ससुराल में एडजस्ट कर पाएगी क्या? उसे सबका सपोर्ट मिलेगा क्या?
तय समय पर स्मिता की शादी हो गई। पहले ही दिन से स्मिता ने घर के काम संभाल लिए। ऑफिस की छुट्टी खत्म होते ही स्मिता ने घर में कहा कि कल से वह ऑफिस जा रही है। सास ने कहा, “नाश्ता खाना निपटा कर जाना मेरी तबीयत ठीक नहीं है।”
स्मिता:- जी मम्मी !
अगले दिन जब स्मिता ऑफिस जाने लगी तो सास में टोक दिया, “नई नई शादी हुई है थोड़ा बहुत तैयार होकर, साड़ी पहन कर जाया करो। तुमको तो कोई कुछ कहेगा नहीं मुझे ही सब कहेंगे कि बहू बहुत तेज है।”
स्मिता:- जी मम्मी ।
शादी के कुछ दिन गुजरने के बाद इस स्मिता अपनी सुविधानुसार कपड़े पहनकर ऑफिस जाने लगी। सास मुंह तो बना लेती पर कहती कुछ नहीं। बस बड़बड़ाते रहती कि हमारे वक्त में मजाल था कि हम अपने बड़ों के कहने से बाहर जाए और आजकल के बच्चे हैं जिन्हें कुछ सुनना ही नहीं।”
घर के रीति-रिवाज और तौर-तरीकों पर मम्मी जी मेरे मायके से तुलना करती रहती और मेरी कोशिश होती कि मैं जल्दी से जल्दी घर से ऑफिस चली जाऊं अगर आलोक का साथ ना होता तो शायद मैं ससुराल में सामंजस्य नहीं बैठा पाती। आलोक हर बात को हल्के में लेकर हंसी मजाक में उड़ा देते और मैं चैन की सांस लेती थी। कितना फर्क है है मेरे और नेहा के ससुराल में। नेहा की सास हर काम में मदद करती है और मुझे मदद की उम्मीद रखनी पड़ती है। मैं आलोक के सहारे सफर तय कर रही हूं। ससुराल और उनसे जुड़े रिश्तो के बारे में न जाने कितनी बातें होती रहती हैं यह सच है कि हम हर एक को एक ही तराजू मैं नहीं तोल सकते हैं।
प्रियंका वरमा माहेश्वरी
गुजरात
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री श्री शिंजो आबे के निधन पर सम्मान स्वरूप कल एक दिन का राष्ट्रीय शोक
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री श्री शिंजो आबे का 08 जुलाई 2022 को निधन हो गया। दिवंगत गणमान्य व्यक्ति के सम्मान में, भारत सरकार ने निर्णय लिया है कि कल पूरे भारत में एक दिन का राष्ट्रीय शोक होगा।
पूरे भारत में शोक के दिन राष्ट्रीय ध्वज उन सभी भवनों पर आधे पर झुके रहेंगे, जहां राष्ट्रीय ध्वज नियमित रूप से फहराये जाते हैं और इस दिन कोई आधिकारिक मनोरंजन नहीं होगा।
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