भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 14 अप्रैल, दयानंद गर्ल्स कॉलेज में अंबेडकर जयंती के उपलक्ष में समारोह आयोजित किया गया। सर्वप्रथम प्राचार्या प्रोफेसर वंदना निगम एवं निदेशक प्रोफेसर अर्चना वर्मा के द्वारा माल्यार्पण किया गया। प्राचार्या जी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादाई ह। उन्होंने अपनी मेहनत, लगन एवं शिक्षा के द्वारा विश्व में अपनी एक अलग पहचान बनाई। राजनीति विज्ञान विभाग से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विशाखा के द्वारा छात्राओं को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जीवन वृतांत तथा उनके अविस्मरणीय योगदान पर विस्तृत व्याख्यान दिया गया। इस अवसर पर सभी ने संविधान की शपथ भी ली तथा छात्राओं *”डॉ भीमराव अंबेडकर तथा संविधान निर्माण”* विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किये। कार्यक्रम में महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर संगीता सिरोही, प्रोफेसर अर्चना श्रीवास्तव, समस्त विभाग प्रभारियों, प्राध्यापिकाओं, कर्मचारी तथा छात्राओं ने हर्षोल्लास के साथ हिस्सा लिया। सभी ने बाबा साहब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए।
शिक्षा
शिक्षा का स्रोत अब शुद्ध नहीं रहा
‘शिक्षा’ पाना हो गया दूभर,
जब से यह व्यापार बनी।
ज्ञान की गंगा सूख रही है,
शातिरों की दुकान चली।।”
👉शिक्षा के व्यावसायीकरण और उससे उपजी समस्याओं पर गहरा कटाक्ष करती मेरी शायरी न केवल एक भावनात्मक अभिव्यक्ति है, बल्कि समाज में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे पतन को भी उजागर करती है।
👉 एक कड़वी हकीकत यह है कि
शिक्षा, जो कभी ज्ञान, नैतिकता और जीवन मूल्यों की आधारशिला मानी जाती थी, आज एक विशाल व्यवसाय बन चुकी है। प्राचीन भारत में गुरुकुलों की परंपरा थी, जहां गुरु अपने शिष्यों को बिना किसी भेदभाव के ज्ञान प्रदान करते थे। लेकिन आज के दौर में शिक्षा एक ऐसा बाजार बन गया है, जहां डिग्रियां, सर्टिफिकेट और रैंकिंग्स की कीमत तय होती है, न कि ज्ञान की।
👉 अच्छी शिक्षा अब गरीब और मध्यम वर्ग के लिए एक बोझ बन गई है। महंगी फीस, कोचिंग संस्थानों की लूट, और निजी स्कूलों-कॉलेजों की मनमानी ने इसे एक ऐसा सपना बना दिया है, जो हर किसी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।
👉 शिक्षा का असली मकसद है व्यक्ति का सर्वांगीण विकास: बौद्धिक, नैतिक और सामाजिक। लेकिन आज शिक्षा केवल नौकरी पाने का जरिया बनकर रह गई है। स्कूलों और कॉलेजों में रट्टा मारने की संस्कृति, परीक्षा में नंबर लाने की होड़, और प्रतिस्पर्धा ने ज्ञान के प्रति जिज्ञासा को खत्म कर दिया है। बच्चे किताबों को बोझ की तरह ढोते हैं, लेकिन उनमें जीवन के लिए जरूरी समझ और संवेदनशीलता का विकास नहीं हो पाता।
इसके अलावा, शिक्षा का स्तर भी असमान है। सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी और शिक्षकों की उदासीनता है, तो निजी संस्थानों में मुनाफे की भूख। दोनों ही स्थितियों में असली हानि विद्यार्थियों की होती है। यह कटु सत्य है कि, “शिक्षा का स्रोत अब शुद्ध नहीं रहा, बल्कि प्रदूषित होकर केवल दिखावे का रह गया है।”
👉शिक्षा क्षेत्र में माफिया तंत्र की मौजूदगी को उजागर करता है। कोचिंग संस्थान, निजी विश्वविद्यालय, और डिग्री बेचने वाली दुकानें इस माफिया तंत्र का हिस्सा हैं। ये संस्थान मोटी फीस वसूलते हैं, लेकिन बदले में न गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देते हैं और न ही नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं। कई बार तो फर्जी डिग्रियां और पेपर लीक जैसे घोटाले भी सामने आते हैं, जो इस तंत्र की गहरी जड़ों को दिखाते हैं।
उदाहरण के लिए, भारत में इंजीनियरिंग, मेडिकल और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग संस्थानों का बोलबाला है। ये संस्थान लाखों रुपये की फीस लेते हैं, लेकिन हर छात्र को सफलता की गारंटी नहीं दे सकते। फिर भी, माता-पिता और छात्र सामाजिक दबाव और भविष्य की चिंता में शातिरों के चक्कर में पड़ जाते हैं। यह शातिरों की ऐसी दुकान है, जो सपनों को बेचती है, लेकिन हकीकत में केवल मुनाफा कमाती है।
👉शिक्षा के इस व्यावसायीकरण का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। सबसे बड़ा प्रभाव है। अमीर लोग अपने बच्चों को महंगे स्कूलों और विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ा सकते हैं, लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के लिए यह संभव नहीं। नतीजा यह है कि सामाजिक गतिशीलता रुक रही है, और गरीब हमेशा गरीब बना रहता है।
इसके अलावा, शिक्षा का यह रूप युवाओं में तनाव और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को भी बढ़ा रहा है। आत्मविश्वास की जगह असुरक्षा, और जिज्ञासा की जगह रटने की आदत ने नई पीढ़ी को खोखला कर दिया है।
👉 मेरी निजी राय है कि, “निजी संस्थानों पर सरकारी नियंत्रण की जरूरत है ! फीस व शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सख्त नियम बनाए जाएं, ताकि शिक्षा माफिया की मनमानी पर लगाम लगे।”
👉 शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर अनेक सवाल उठाती है और हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी भावी पीढ़ियों को क्या दे रहे हैं ?
✒️श्याम सिंह पंवार कानपुर।
Read More »डीएम की दो- टूक, “विद्यालय प्रबंधन स्कूल चलाएं ना कि दुकान
भारतीय स्वरूप जिला सूचना कार्यालय कानपुर 9 अप्रैल जिलाधिकारी महोदय की अध्यक्षता में आज जनपदीय शुल्क नियामक समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आहूत की गयी, उक्त बैठक में समिति के सदस्यो के साथ-साथ समिति की विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन उपस्थिति रही। बैठक में उन विद्यालयों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए जिनकी अभिभावकों ने सबसे ज्यादा शिकायतें की।
इन विद्यालयों के प्रतिनिधियों की ली क्लास*
जिलाधिकारी द्वारा जनपद के एक्मे पब्लिक स्कूल, गुजैनी, ऐन एल के इण्टर कालेज, अशोक नगर,ऐन एल के पब्लिक स्कूल, जवाहर नगर, एस०जे० विद्या निकेतन इण्टर कालेज, नौबस्ता, वेण्डी ऐकेडमी हाईस्कूल, साकेत नगर और चिन्टल्स स्कूल, 121 एच, आई०जी० रतनलाल विद्यालयों के प्रतिनिधियों को दो- टूक कहा कि वे स्कूल चलाएं ना कि दुकान। जिस पर विद्यालय के प्रतिनिधियों ने कहा, उन पर पर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं।छात्रों से ना तो गलत फीस वसूली जा रही है और ना ही उन्हें किताब अथवा कॉपी किसी चुनिंदा दुकान से खरीदने को बाध्य किया जाता है। प्रतिनिधियों के उक्त जवाब से जिलाधिकारी व समिति के सदस्य संतुष्ट नहीं दिखे। इसलिए उन्होंने 11 अप्रैल शुक्रवार को समिति के समक्ष बुक सेलर्स को भी बुलाने के निर्देश दिए।और जिला विद्यालय निरीक्षक व अन्य सदस्यों को निर्देशित करते हुए कहा कि बुक सेलर्स और विद्यालय प्रबंधन के सांठ – गाँठ की जांच की जाए । राजस्व एवं शिक्षा विभाग की टीम अभिभावकों के घर-घर जाकर उनका फीडबैक लें ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके। बैठक में विद्यालय के प्रतिनिधियों द्वारा बच्चों संग किताबों की लिस्ट साझा करने की बात कही गई लेकिन जिलाधिकारी इससे संतुष्ट न हुए। उन्होंने उनसे पूछा कि उनके विद्यालय द्वारा बच्चों के पठन-पाठन हेतु लागू की गई किताबें क्या प्रत्येक दुकानों पर उपलब्ध रहती हैं, सिलेबस क्या होता है और कितने दिनों में बदल जाता है, कॉपी- किताबों पर प्रकाशक का नाम और मूल्य लिखा जाता है अथवा नहीं। जिलाधिकारी ने प्रतिनिधियों से किताबों के चयन का आधार के बारे में भी पूछा जिसका वे जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक, द्वितीय को नियमानुसार शैक्षिक सत्र शुरू होने से 60 दिन पहले विद्यालयों के द्वारा सरकारी वेबसाइट पर समस्त डाटा अपलोड करने या ना करने वाले विद्यालयों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने बच्चों के यूनिफॉर्म बदलने के आधार को भी जानना चाहा जिसका प्रतिनिधियों द्वारा सही जवाब नहीं दिया गया। इस पर जिलाधिकारी ने समिति के सदस्यों से फीस, यूनिफार्म,आरटीई, कॉपी – किताबें इत्यादि समस्त मानकों की गहनता से जांच के निर्देश दिए, निर्देश दिए, 5 वर्षों में जितने स्कूलों ने बच्चों की यूनिफॉर्म बदलवायी है, उनकी लिस्ट बनाते हुए उन पर कार्रवाई किया जाए।इसके अलावा जिलाधिकारी ने समिति के सदस्यों को मनमानी फीस वसूलने और बच्चों के आर्थिक शोषण करने वाले स्कूलों की सूची बनाकर पेश करते हुए दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
*ये है कानून*
उ०प्र० स्ववित्तपोषित स्वतंत्र (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश-2018 की बिन्दु संख्या 10 में उल्लिखित किसी छात्र को पुस्तकें, जूते, मोजे व यूनिफार्म आदि किसी विशेष दुकान से क्रय करने के लिए बाध्य नही किये जाने का उल्लंधन माना जाता है अर्थ दंड के साथ-साथ अन्य आवश्यक कार्रवाई करना समिति के अधिकार क्षेत्र में आता है।
Read More »बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर “Awareness Talk on Intellectual Property Rights – Harnessing Research Potential” वार्ता आयोजित
कानपुर, 9 अप्रैल भारतीय स्वरूप संवाददाता– क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में “Awareness Talk on Intellectual Property Rights – Harnessing Research Potential” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता वार्ता का आयोजन
इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों, शोधार्थियों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों में बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं शोध कार्यों को सुरक्षित और व्यावसायिक रूप से उपयोगी बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. सुजाता चतुर्वेदी (IQAC समन्वयक) के स्वागत भाषण से हुआ। इसके पश्चात प्राचार्य प्रो. जोसेफ डेनियल ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में IPR की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे आधुनिक शोध की रीढ़ बताया।
मुख्य वक्ता के रूप में सीएसजेएम विश्वविद्यालय के सहायक डीन (Innovation), IPR एवं TT सेल के समन्वयक श्री दिव्यांश शुक्ला उपस्थित रहे। उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाते हुए पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक शोधकर्ता अपने नवाचार को कानूनी सुरक्षा प्रदान कर सकता है तथा उसे उद्योग जगत में व्यावसायिक रूप से प्रस्तुत कर सकता है।
इस अवसर पर शिक्षकों और विद्यार्थियों ने अपने प्रश्न भी रखे, जिनका वक्ता ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ उत्तर दिया।
कार्यक्रम का समापन प्रो. श्वेता चंद (उप-प्राचार्या) के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह आयोजन प्रतिभागियों के लिए अत्यंत लाभकारी एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ, जिसने उन्हें अनुसंधान को एक रणनीतिक दृष्टिकोण से देखने की दिशा में प्रेरित किया।
Read More »क्राइस्ट चर्च कॉलेज की मिशन शक्ति यूनिट द्वारा नवरात्रि के सुअवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज की मिशन शक्ति यूनिट द्वारा नवरात्रि के सुअवसर पर एक विशेष सेवा कार्य का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन प्राचार्य जोसेफ डेनियल के मार्गदर्शन में किया गया, जिसका उद्देश्य समाज के जरूरतमंद वर्ग की सहायता करना था। इस सेवा कार्य के अंतर्गत मिशन शक्ति यूनिट की टीम ने बेसिक शिक्षा निकेतन, कल्याणपुर के बच्चों को आवश्यक वस्तुएँ वितरित कीं। इनमें चटाई, खाद्य सामग्री एवं अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएँ शामिल थीं, जो उन बच्चों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होंगी।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मिशन शक्ति यूनिट की समन्वयक डॉ. मीत कमल एवं डॉ. अनंदिता भट्टाचार्य ने विशेष भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे आयोजन की रूपरेखा तैयार की और छात्रों को प्रेरित किया। इसके अलावा, इस अभियान में क्राइस्ट चर्च कॉलेज के कई विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। अंजली सचान, अनंत सक्सेना, वैष्णवी दीक्षित, सिमरन, सलोनी, सुरभि एवं अन्य छात्रों ने अपनी सक्रिय भागीदारी से इस सेवा कार्य को सफल बनाया।
इस पुनीत कार्य से न केवल जरूरतमंद बच्चों को सहायता मिली, बल्कि छात्रों में सामाजिक सेवा और परोपकार की भावना भी जागृत हुई। यह कार्यक्रम मिशन शक्ति यूनिट के उद्देश्य, ‘समाज सेवा और सशक्तिकरण,’ को सार्थक करता है।
Read More »क्राइस्ट चर्च कॉलेज में प्रतिभा और सृजनात्मकता का भव्य उत्सव “अभिव्यक्ति ~2025” संपन्न
कानपुर 4 अप्रैल भारतीय स्वरूप संवाददाता *क्राइस्ट चर्च कॉलेज* ने अपने प्रतिष्ठित सांस्कृतिक उत्सव *अभिव्यक्ति-2025* का सफलतापूर्वक आयोजन किया, जिसमें विविध प्रकार की प्रतियोगिताएँ और प्रस्तुतियाँ हुईं, जिसने प्रतिभागियों और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह भव्य आयोजन *25 मार्च 2025* को उद्घाटन समारोह के साथ आरंभ हुआ, जिसने एक बौद्धिक और कलात्मक रूप से समृद्ध यात्रा की नींव रखी।
प्रतियोगिताओं की श्रृंखला में पहला आयोजन *क्रिएटिव राइटिंग* कंपटीशन था , जो *25 मार्च 2025* को हुई। इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपनी साहित्यिक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया। इसके बाद *27 मार्च 2025* को एक *क्विज कंपटीशन* आयोजित की गई, जिसमें छात्रों की सामान्य ज्ञान और त्वरित सोचने की क्षमता की परीक्षा ली गई। *29 मार्च 2025* को *ओपन माइक* कार्यक्रम हुआ, जिसने विद्यार्थियों को अपनी अभिव्यक्ति और विचार साझा करने का अवसर प्रदान किया। इसी दिन का दूसरा प्रमुख आयोजन *वेस्ट टू वेल्थ* था, जो नवाचार और पुनर्चक्रण के माध्यम से स्थिरता को बढ़ावा देने पर केंद्रित था।
*4 अप्रैल 2025* को हुआ ग्रैंड फिनाले इस उत्सव की सबसे भव्य और आकर्षक पक्ष था। इस दिन *मोनो एक्टिंग, सिंगिंग और डांस* जैसी प्रस्तुतियाँ हुईं, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी उत्कृष्ट कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया। इनमें श्री *अश्विनी श्रीवास्तव*, वरिष्ठ रंगमंच कलाकार, लखनऊ; प्रोफेसर *संगीता श्रीवास्तव*, संगीत विभागाध्यक्ष, डी.जी. कॉलेज; और *माननीय वनिता मेहरोत्रा*, प्राचार्य, शीलिंग हाउस स्कूल शामिल थे। इसके अलावा, *प्रोफेसर जोसेफ डेनियल*, सचिव एवं प्राचार्य, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, तथा *प्रोफेसर श्वेता चंद्रा,* उप-प्राचार्य, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, भी इस भव्य आयोजन का हिस्सा बने।
इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण नाटक *”वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर: धर्म और न्याय की देवी”* रहा, जिसका निर्देशन *प्रोफेसर मीत कमल* ने किया था। यह अद्भुत प्रस्तुति, जो अहिल्याबाई होल्कर की न्यायप्रियता और कर्तव्यपरायणता को प्रदर्शित करती है, ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जीतने की उपलब्धि प्राप्त की और इसके बाद इसे उत्तर प्रदेश के *माननीय राज्यपाल की उपस्थिति में राजभवन, लखनऊ* में प्रस्तुत करने का गौरव प्राप्त हुआ।
अभिव्यक्ति-2025 की यह शानदार सफलता कॉलेज के छात्रों, शिक्षकों और आयोजकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम थी। यह आयोजन न केवल छात्रों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच बना, बल्कि क्राइस्ट चर्च कॉलेज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी सुदृढ़ किया, जिसमें रचनात्मकता, बौद्धिकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित किया जाता है। संपूर्ण आयोजन को *डॉ. संजय सक्सेना*, को-करीकुलर प्रोग्राम कमेटी के समन्वयक, के मार्गदर्शन में संपन्न किया गया। छात्रों की अथक मेहनत और समर्पण ने इस आयोजन को और भी शानदार और यादगार बना दिया।
Read More »दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘कानपुर थ्रू दि एजेज अनवेलिंग द लेयर्स ऑफ़ हिस्ट्री ‘(युग -युगीन कानपुर) का शुभारंभ
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज कानपुर के इतिहास विभाग के तत्वाधान में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘कानपुर थ्रू दि एजेज अनवेलिंग द लेयर्स ऑफ़ हिस्ट्री ‘(युग -युगीन कानपुर) का उद्घाटन दिनाँक आज 28 मार्च 2025 को किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रवीण कुमार मिश्रा, सचिव प्रोबीर कुमार सेन, प्राचार्य प्रोफेसर सुमन, संयुक्त सचिव शुभ्रो सेन तथा कोषाध्यक्ष दीपाश्री सेन, तथा संगोष्ठी की संयोजिका डाॅ. मनीषा दीवान ने सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन से किया। प्रोफेसर सुमन ने अपने स्वागत उद्बोधन के द्वारा सभागार में उपस्थित सभी बुद्धिजीवी अतिथियों का महाविद्यालय संगोष्ठी में स्वागत करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। डाॅ. मनीषा दीवान ने विषय प्रवर्तन के द्वारा कानपुर के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता बाल मुकुंद पांडेय (राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली), चेयर पर्सन संजयश्री हर्ष, (राष्ट्रीय संगठन सह- सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली), गेस्ट ऑफ़ ऑनर प्रोफेसर अनिल कुमार मिश्रा (संयोजक इतिहास विषय, सी. एस. जे. एम. यू. कानपुर), स्पेशल स्पीकर प्रोफेसर विग्नेश त्यागी (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ), ने अपनी गरिमामय उपस्थिति तथा उद्बोधन से संगोष्ठी को गौरवान्वित किया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम तथा द्वितीय तकनीकी सत्र में देश के विभिन्न भागों से आए हुए इतिहास के लगभग 80 अध्येताओं व शोधार्थियों द्वारा कानपुर के परंपरागत इतिहास की पुर्नव्याख्या करते हुए ऐतिहासिक कानपुर की विशिष्ट उपलब्धियों, चुनौतियों ,समस्याओं आदि विषयों का मंथन कर नई रोशनी डाली गई। शिक्षा शास्त्र विभागध्यक्षा प्रो. चित्रा सिंह तोमर ने मंच संचालन की महती भूमिका का निर्वाह करते हुए संगोष्ठी को दिशा प्रदान की। प्रथम तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. प्रीति सिंह, तथा द्वितीय तकनीकी सत्र का संचालन प्रो. मीनाक्षी व्यास ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. निशी प्रकाश के निर्देशन में महाविद्यालय की सभी शिक्षिकाओं ने अभूतपूर्व सहयोग प्रदान किया।
Read More »पांच दिवसीय डिजिटल मार्केटिंग विषय पर विकास प्रबंधन कार्यक्रम ( MDP) आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर विद्यामंदिर महिला महाविद्यालय, स्वरुप नगर, कानपुर में सुगंध एवं सुरम्य, एम.एस.एम.ई.एवं नवाचार प्रकोष्ठ छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर, के संयुक्त तत्वाधान में पांच दिवसीय डिजिटल मार्केटिंग विषय पर विकास प्रबंधन कार्यक्रम ( MDP) आयोजन (दिनांक – 21/03/2025 से 26/03/2025 तक स्नातक छात्राओं के लिए डिजिटल मार्केटिंग पर पांच दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें ऑनलाइन मार्केटिंग रणनीतियों के प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। सेमिनार का उद्देश्य छात्रों को मार्केटिंग दक्षता बढ़ाने के लिए विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई टूल्स के व्यावहारिक ज्ञान से लैस करना था। सत्रों का नेतृत्व प्रतिष्ठित वक्ताओं: अरुण्य रस्तोगी, डॉ. शिल्पा कैस्था, डॉ. शुनील शुक्ला और अनिल त्रिपाठी ने किया, जिन्होंने डिजिटल मार्केटिंग के विभिन्न पहलुओं पर गहन जानकारी दी।
विभिन्न विषयों को कवर किया गया जैसे कि Google विज्ञापन, Amazon Marketplace, विक्रेता रणनीतियों, उत्पाद रैंकिंग और विज्ञापन तकनीकों की व्याख्या करना; लिंक्डइन मार्केटिंग, पेशेवर नेटवर्किंग, ब्रांड निर्माण और लीड जनरेशन पर जोर देना; मार्केटिंग में AI टूल्स का उपयोग, डेटा-संचालित निर्णय लेना और सामग्री निर्माण। सेमिनार का समापन 26.03.2025 को क्रिएटिव ऑनलाइन मार्केटिंग के साथ हुआ, जिसमें सोशल मीडिया एंगेजमेंट, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और कंटेंट स्ट्रैटेजी के लिए अभिनव दृष्टिकोणों पर चर्चा की गई। इसमें 52 छात्राओं ने प्रतिभाग लिया
Read More »एस.एन. सेन बालिका विद्यालय पी.जी. महाविद्यालय में छात्राओं को जल संरक्षण एवं अर्थ ऑवर डे के बारे में जागरूक किया गया
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बालिका विद्यालय पी.जी. महाविद्यालय में विश्व जल दिवस के अवसर पर रसायन विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में डॉ. राजेश वाजपेयी जी और फहद राज़ी जी द्वारा छात्राओं को जल संरक्षण एवं अर्थ ऑवर डे के बारे में जागरूक किया गया।
वर्ष 2025 के विश्व जल दिवस का विषय ग्लेशियर संरक्षण है। डॉ. राजेश वाजपेयी जी, फहद राज़ी जी, प्राचार्या प्रो सुमन, प्रो निशि प्रकाश, प्रो गार्गी यादव, डॉ प्रीति सिंह ने माँ सरस्वती के समक्ष माल्यार्पण किया। जल संरक्षण और भविष्य में इसके महत्व को पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से छात्राओं को जागरूक किया गया । उन्होंने छात्राओं से साझा किया कि वॉटर फुटप्रिंट का किस प्रकार प्रबंधन किया जाना चाहिए। जल संरक्षण के चार महत्वपूर्ण उपाय के रूप में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वॉटर रिसाइकल, रियूज वॉटर और वॉटर फुटप्रिंट की मैपिंग की चर्चा की गई।
छात्राओं ने आज शाम 08:30 – 09:30 तक सभी विद्युत उपकरण बंद रख कर अर्थ ऑवर मनाने की शपथ भी ली। कार्यक्रम का संयोजन प्रोफेसर गार्गी यादव ने किया एवं मंच संचालन डॉक्टर अमिता सिंह ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की सभी शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
“एड्रेसिंग कार्बन फुटप्रिंट्स फॉर ए बेटर टुमॉरो” विषय पर संगोष्ठी आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 22 मार्च क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के आतंरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आई.क्यू.ए.सी.) एवं जस्ट फॉर एनवायरनमेंट के संयुक्त तत्वावधान में “एड्रेसिंग कार्बन फुटप्रिंट्स फॉर ए बेटर टुमॉरो” संगोष्ठी का आयोजन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में किया गया। क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर की आधारभूत मान्यताओं में सहयोग, समन्वय और संपोषण महत्वपूर्ण है। इसी कारण कॉलेज की संस्कृति में समस्त पर्यावरण के विकास और स्वच्छता हेतु सतत प्रयास रच-बस गए हैं।
उसी कड़ी में आज की यह संगोष्ठी एक महत्वपूर्ण कदम है, जो “जस्ट फॉर एनवायरनमेंट” संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई है। इस सामाजिक संस्था का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण तथा सतत विकास के मुद्दे पर बात करते हुए लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है। संस्था का लक्ष्य सार्वजनिक अभियान, सेमिनार या कार्यशाला आदि के आयोजन द्वारा पर्यावरणीय समस्याओं, जैसे जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग आदि के प्रति जनसाधारण में जागरूकता उत्पन्न करना है।
संगोष्ठी के उदघाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम की संयोजक और आई.क्यू.ए.सी. समन्वयक, प्रो. सुजाता चतुर्वेदी, ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के विषय से सबका परिचय सुश्री अनीता अग्रवाल, जस्ट फॉर एनवायरनमेंट की अध्यक्ष ने करवाया तथा इस संस्था के संरक्षक प्रो. नरेंद्र मोहन ने मुख्य वक्तव्य दिया। महाविद्यालय की उप प्राचार्य प्रो. श्वेता चंद ने अपने वक्तव्य द्वारा प्रकृति के संपोषित विकास पर बल दिया तथा गौरैया जैसी विलुप्त होती अनेक प्रजातियों की देखभाल एवं जल संरक्षण की महत्ता स्पष्ट की। इसी कड़ी में कॉलेज की छात्रा वैष्णवी दीक्षित द्वारा बनाए गए पक्षियों के घर कॉलेज में लगाने हेतु प्राचार्य जी को भेंट किये गए। ये पूर्णतः पर्यावरण अनुकूल है जिसे उन्होंने प्रयोग में न लाई जा सकने वाली वस्तुओं द्वारा बनाया है। इसके पश्चात अध्यक्षीय भाषण में प्राचार्य प्रो. जोसेफ़ डेनियल ने पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और सतत विकास को छात्रों और देश के भविष्य के लिए अत्यावश्यक बताया। इसके बाद जस्ट फॉर एनवायरनमेंट संस्था ने पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु संस्था के रूप में क्राइस्ट चर्च कॉलेज को और साथ ही अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों, जैसे डॉ. सिधान्शु राय (सी.एस.जे.एम.यू, कानपुर), डॉ. द्रौपदी यादव (सी.एस.जे.एम.यू, कानपुर), डॉ. ब्रजेश कुमार (एच.बी.टी.आई., कानपुर) एवं श्री बी.के.सिंघल (यू.वी.टी.प्रा.लि.) को सम्मानित किया।
तकनीकी सत्र में पाँच विद्वान् वक्ताओं ने अपने विचार अर्यावरण के विभिन्न आयामों पर रखे। इनमें जस्ट फॉर एनवायरनमेंट के सदस्य श्री बी.के. सिंघल, सुश्री नीलम चतुर्वेदी और सुश्री अनुष्का कनोडिया ने पर्यावरण चेतना, जल संरक्षण, संपोषित विकास आदि महत्वपूर्ण अवधारणाओं पर प्रकाश डालते हुए आज के जीवन में इनके समन्वय की महती आवश्यकता बताई। क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्रो. नवीन कुमार अम्बष्ट और ने वैश्विक जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता पर उनके प्रभाव पर चर्चा की और श्री अवधेश मिश्र ने एंथ्रोपोसीन की पृष्ठभूमि में वक्तव्य प्रस्तुत किया। तकनीकी सत्र का सफल संचालन डॉ. अंकिता लाल और डॉ. शुभी तिवारी ने किया।
इस संगोष्ठी के अंतर्गत एक पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था, जिसमें शहर और प्रदेश के अनेक छात्र छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। इसके विजेता छात्रों को भी कार्यक्रम के अंत में पुरस्कृत किया गया। पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान अंजलि सचान ने, द्वितीय स्थान कांची त्रिपाठी ने और तृतीय स्थान शिवांग शुक्ला ने प्राप्त किया तथा प्रोत्साहन पुरस्कार उर्वशी कुरील और लवी सोनकर को प्रदान किया गया। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति की सचिव प्रो. मीत कमल ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन छात्रा कांची त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, शोध विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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