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आपसी प्रेम] सद्भाव और भाईचारे का पर्व है ‘होली’!-डा0 जगदीश गांधी]

होलिका का दहन समाज की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक है होली भारत के सबसे पुराने पर्वों में से एक है। होली की हर कथा में एक समानता है कि उसमें ‘असत्य पर
सत्य की विजय’ और ‘दुराचार पर सदाचार की विजय’ का उत्सव मनाने की बात कही गई है। इस प्रकार होली लोक
पर्व होने के साथ ही अच्छाई की बुराई पर जीत, सदाचार की दुराचार पर जीत व समाज में व्याप्त समस्त बुराइयों के
अंत का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता व दुश्मनी को भूलकर एक-दूसरे के गले
मिलते हैं और फिर ये दोस्त बन जाते हैं। किसी कवि ने होली के सम्बन्ध में कहा है कि – नफरतों के जल जाएं सब
अंबार होली में। गिर जाये मतभेद की हर दीवार होली में।। बिछुड़ गये जो बरसों से प्राण से अधिक प्यारे , गले मिलने
आ जाऐं वे इस बार होली में।।
भारतीय संस्कृति का परिचायक है होली
होली को लेकर देश के विभिन्न अंचलों में तमाम मान्यतायें हैं और शायद यही विविधता में एकता, भारतीय
संस्कृति का परिचायक भी है। उत्तर पूर्व भारत में होलिकादहन को भगवान कृष्ण द्वारा राक्षसी पूतना के वध दिवस के
रूप में मनाया जाता है तो दक्षिण भारत में मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने कामदेव को तीसरा नेत्र खोल
भस्म कर दिया था। तत्पश्चात् कामदेव की पत्नी रति के दुख से द्रवित होकर भगवान शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित
कर दिया , जिससे प्रसन्न होकर देवताओं ने रंगों की वर्षा की। इसी कारण होली की पूर्व संध्या पर दक्षिण भारत में
अग्नि प्रज्ज्वलित कर उसमें गन्ना , आम की बौर और चन्दन डाला जाता है। यहाँ गन्ना कामदेव के धनुष , आम की
बौर कामदेव के बाण, प्रज्ज्वलित अग्नि शिव द्वारा कामदेव का दहन एवं चन्दन की आहुति कामदेव को आग से हुई
जलन हेतु शांत करने का प्रतीक है।
प्रभु के प्रति अटूट भक्ति एवं निष्ठा के प्रसंग की याद दिलाता है यह महान पर्व
होली पर्व को मनाये जाने के कारण के रूप में एक मान्यता यह भी है कि प्राचीन काल में हिरण्यकश्यपु नाम
का एक अत्यन्त बलशाली एवं घमण्डी राजा अपने को ही ईश्वर मानने लगा था। हिरण्यकश्यपु ने अपने राज्य में
ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी। हिरण्यकश्यपु का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर का परम भक्त था। प्रह्लाद की
ईश्वर भक्ति से कुद्ध होकर हिरण्यकश्यपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए , परंतु भक्त प्रह्लाद ने ईश्वर की भक्ति का
मार्ग न छोड़ा। हिरण्यकश्यपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती।
हिरण्यकश्यपु के आदेश पर होलिका प्रह्लाद को मारने के उद्देश्य से उसे अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई।
किन्तु आग में बैठने पर होलिका तो जल गई परंतु ईश्वर भक्त प्रह्लाद बच गये। इस प्रकार होलिका के विनाश तथा
भक्त प्रह्लाद की प्रभु के प्रति अटूट भक्ति एवं निष्ठा के प्रसंग की याद दिलाता है यह महान पर्व।
प्रहलाद ने बचपन में ही प्रभु की इच्छा तथा आज्ञा को पहचान लिया था
यह परमपिता परमात्मा की इच्छा ही थी कि असुर प्रवृत्ति तथा ईश्वर के घोर विरोधी दुष्ट राजा हिरण्यकश्यप
के घर में ईश्वर भक्त प्रहलाद का जन्म हुआ। प्रहलाद ने बचपन में ही प्रभु की इच्छा तथा आज्ञा को पहचान लिया था।
निर्दयी हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रहलाद से कहा कि यदि तू भगवान का नाम लेना बंद नहीं करेंगा तो मैं तुझे आग
में जला दूँगा। उसके दुष्ट पिता ने प्रहलाद को पहाड़ से गिराकर , जहर देकर तथा आग में जलाकर तरह-तरह से घोर
यातनायें दी। प्रहलाद ने अपने पिता हिरण्यकष्यप से कहा कि पिताश्री यह शरीर आपका है इसका आप जो चाहे सो

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करें , किन्तु आत्मा तो परमात्मा की है। इसे आपको देना भी चाहूँ तो कैसे दे सकता हूँ। प्रहलाद के चिन्तन में भगवान
आ गये तो हिरण्यकश्यप जैसे ताकतवर राजा का अंत नृसिंह अवतार के द्वारा हो गया। इसलिए हमें भी प्रहलाद की
तरह अपनी इच्छा नहीं वरन् प्रभु की इच्छा और प्रभु की आज्ञा का पालन करते हुए प्रभु का कार्य करना चाहिए।
सभी धर्मों के लोग मिलकर मनाते हैं होलिकोत्सव
होली जैसे पवित्र त्योहार के सम्बन्ध में सुप्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने अपने ऐतिहासिक यात्रा
संस्मरण में होलिकोत्सव का वर्णन किया है। भारत के अनेक मुस्लिम कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का
उल्लेख किया है कि होलिकोत्सव केवल हिंदू ही नहीं अपितु मुसलमान लोग भी मनाते हैं। इसका सबसे प्रामाणिक
इतिहास की तस्वीरे मुगलकाल की हैं और इस काल में होली के किस्से उत्सुकता जगाने वाले हैं। इन तस्वीरों में
अकबर को जोधाबाई के साथ तथा जहाँगीर को नूरजहाँ के साथ होली खेलते हुए दिखाया गया है। शाहजहाँ के समय
तक होली खेलने का मुगलिया अंदाज ही बदल गया था। इतिहास में वर्णन है कि शाहजहाँ के जमाने में होली को ‘ईद-
ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी’, रंगों की बौछार, कहा जाता था। अंतिम मुगल बादशाह शाह जफर के बारे में प्रसिद्ध है कि
होली पर उनके मंत्री उन्हें रंग लगाते थे।
प्राकृतिक रंगों से होली खेलने की परम्परा को बनाये रखने की आवश्यकता
होली रंगों का त्योहार है, हँसी-खुशी का त्योहार है। लेकिन होली के भी अनेक रूप देखने को मिलते हैं।
प्राकृतिक रंगों के स्थान पर रासायनिक रंगों का प्रचलन, नशेबाजी की बढ़ती प्रवृत्ति और लोक-संगीत की जगह फिल्मी
गानों का प्रचलन इसके कुछ आधुनिक रूप है। पहले जमाने में लोग टेसू और प्राकृतिक रंगों से होली खेलते थे।
वर्तमान में अधिक से अधिक पैसा कमाने की होड़ में लोगों ने बाजार को रासायनिक रंगों से भर दिया है। वास्तव में
रासायनिक रंग हमारी त्वचा के लिए काफी नुकसानदायक होते हैं। इन रासायनिक रंगों में मिले हुए सफेदा, वार्निश,
पेंट, ग्रीस, तारकोल आदि की वजह से हमको खुजली और एलर्जी होने की आशंका भी बढ़ जाती है। इसलिए होली
खेलने से पूर्व हमें बहुत सावधानियाँ बरतनी चाहिए। हमें चंदन , गुलाबजल , टेसू के फूलों से बना हुआ रंग तथा
प्राकृतिक रंगों से होली खेलने की परंपरा को बनाये रखते हुए प्राकृतिक रंगों की ओर लौटना चाहिए।
होली पर्व का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण ही है-
होली पर्व के पीछे तमाम धार्मिक मान्यताएं, मिथक, परम्पराएं और ऐतिहासिक घटनाएं छुपी हुई हैं पर
अंततः इस पर्व का मुख्य उद्देश्य मानव-कल्याण ही है। लोकसंगीत, नृत्य, नाट्य, लोककथाओं, किस्से – कहानियों
और यहाँ तक कि मुहावरों में भी होली के पीछे छिपे संस्कारों , मान्यताओं व दिलचस्प पहलुओं की झलक मिलती है।
होली को आपसी प्रेम एवं एकता का प्रतीक माना जाता है। होली हमें सभी मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे को गले
लगाने की प्रेरणा प्रदान करती है। इसके साथ ही रंग का त्योहार होने के कारण भी होली हमें प्रसन्न रहने की प्रेरणा
देती है। इसलिए इस पवित्र पर्व के अवसर पर हमें ईर्ष्या , द्वेष , कलह आदि बुराइयों को दूर करके आपसी प्रेम ,
सद्भाव और भाईचारे को बढ़ाना चाहिए। वास्तव में हमारे द्वारा होली का त्योहार मनाना तभी सार्थक होगा जबकि
हम इसके वास्तविक महत्व को समझकर उसके अनुसार आचरण करें। इसलिए वर्तमान परिवेश में जरूरत है कि इस
पवित्र त्योहार पर आडम्बरता की बजाय इसके पीछे छुपे हुए संस्कारों और जीवन-मूल्यों को अहमियत दी जाए तभी
व्यक्ति , परिवार , समाज और राष्ट्र सभी का कल्याण होगा।
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क्राइस्ट चर्च कॉलेज के एन एस एस स्वयंसेवकों ने “शिविरों” से लाभान्वित हुए स्थानीय निवासियों से फीडबैक लिया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर *आयोजक:* क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर (एनएसएस इकाई)

*विषय:* पूर्व में आयोजित तीन एकदिवसीय और सात दिवसीय शिविरों के लाभार्थियों से फीडबैक प्राप्त करना तथा परमारपुरवा क्षेत्र की समस्याओं को नगर निगम के समक्ष प्रस्तुत करना।

*प्रातःकालीन सत्र* क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर* की *एनएसएस इकाई* द्वारा *परमारपुरवा की जुग्गी बस्ती* में अंतिम *एकदिवसीय शिविर* का आयोजन किया गया। स्वयंसेवक शिविर स्थल पर पहुंचे और परियोजना कार्य के अंतर्गत *पिछले तीन एकदिवसीय एवं सात दिवसीय शिविरों* से लाभान्वित हुए स्थानीय निवासियों से फीडबैक लिया।

*वार्ड 16, परमारपुरवा* के निवासियों ने एनएसएस इकाई द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की और बताया कि वे शिविरों से अत्यधिक लाभान्वित हुए हैं। सभी ने आयोजित गतिविधियों की सकारात्मक समीक्षा दी। *कॉलेज के प्रधानाचार्य श्री जोसेफ डेनियल* ने स्वयंसेवकों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने एनएसएस इकाई द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की प्रशंसा करते हुए एक प्रेरणादायक भाषण दिया। एनएसएस इकाई की *कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अंकिता जैस्मिन लाल* के मार्गदर्शन में और *प्रधानाचार्य डॉ. जोसेफ डेनियल* के नेतृत्व में *परमारपुरवा क्षेत्र की समस्याओं* को *कानपुर नगर निगम* के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इनमें मुख्य रूप से *सीवरेज व्यवस्था* एवं *तालाबों की साफ-सफाई* शामिल थीं।

नगर निगम ने एनएसएस इकाई द्वारा दिए गए आवेदन को स्वीकार किया। इस प्रकार, एनएसएस इकाई का यह *एकदिवसीय शिविर सफलतापूर्वक संपन्न* हुआ।

*समापन सत्र एवं निष्कर्ष*

स्वयंसेवकों ने इस शिविर में *निःस्वार्थ सेवा* का अनुभव किया और अपनी *सामूहिक मेहनत* पर गर्व महसूस किया। उन्होंने टीम वर्क की सराहना की और इस पूरे कार्यक्रम में *आर्यन जायसवाल एवं आयुष कुमार* के नेतृत्व को महत्वपूर्ण बताया। उनके योगदान के बिना यह कार्यक्रम सफल नहीं हो पाता।

इस प्रकार, *क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर की एनएसएस इकाई* का यह एकदिवसीय शिविर *सकारात्मक प्रभाव* छोड़ते हुए संपन्न हुआ।

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मातृभाषाओं में अभिव्यक्ति का विराट उत्सव ‘बोली बानी’ आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता ‘बोली – बानी’ (मातृभाषाओं का त्यौहार) 21 फरवरी अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है और इसी को क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के प्रांगण में उतारते हुए हिंदी विभाग द्वारा मातृभाषाओं में अभिव्यक्ति का विराट उत्सव ‘बोली बानी’ महाविद्यालय के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में आयोजित किया गया। विभिन्न बोलियों और मातृभाषाओं में विविध विधाओं में जैसे गीत, नृत्य, कविता, वक्तव्य, संस्मरण आदि का शानदार प्रदर्शन न केवल छात्र-छात्राओं ने किया, अपितु कॉलेज के अध्यापकों ने भी इसमें बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया।
इस कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि महाविद्यालय के दर्शनशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश चंद्र श्रीवास्तव थे, विशिष्ट अतिथि इतिहास विभाग की सूफिया शहाब तथा विशेष अतिथि कॉलेज की उप प्राचार्य प्रो. श्वेता चंद थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य जोसेफ डेनियल ने की ।
अतिथियों का स्वागत स्मृति चिह्न प्रदान करके किया गया तथा विभागीय स्वागत हिंदी के शोधार्थी अर्जित पाण्डेय ने कन्नौजी बोली में किया। कार्यक्रम का आरंभ करते हुए प्रो. अनिंदिता भट्टाचार्य ने 21 फरवरी की महत्ता स्पष्ट करते हुए इस दिन मातृभाषा दिवस को मनाने का कारण बांग्ला भाषा में स्पष्ट किया। इसके बाद छात्र-छात्राओं द्वारा दी गईं एक के बाद एक मोहक प्रस्तुतियों की श्रृंखला सज गई। गरिमा, शाल्वी व साक्षी ने पंजाबी नृत्य किया, आकृति व ओजस्विनी ने राजस्थानी ‘कालबेलिया’ किया तो तन्वी ने मराठी ‘लावणी’ पर प्रस्तुति दी। तनिष्का ने राजस्थानी नृत्य किया तो वर्षा ने भोजपुरी छठ पूजा के गीत पर मोहक नृत्य किया और स्वस्तिक ने नेपाली गीत पर एकल नृत्य किया। साथ ही शरद ने राजस्थानी, तनिष्का ने अवधी व शिवा ने भोजपुरी में एकल गीत प्रस्तुत किए तथा नेहा, उपासना व अंजलि ने अवधी में भांवर गीत प्रस्तुत किया। वैष्णवी ने वंशीधर शुक्ल की अवधी की कविता तथा आदर्श, अब्दुल व पूजा ने क्रमशः हरियाणवी , उर्दू व बंगाली में मातृभाषा के प्रति अपने विचार प्रकट किए।
इसके उपरांत मंच सभी की प्रस्तुतियों के लिए खोल दिया गया। इस खुले मंच पर अनेक सुन्दर प्रस्तुतियाँ शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों आदि ने दीं। तदोपरांत विशेष अतिथि प्रो. श्वेता चंद ने भी एक कविता प्रस्तुत की। साथ ही विशिष्ट अतिथि सूफ़िया शहाब ने उर्दू में अपने विचार व्यक्त किए। सारस्वत अतिथि प्रो. दिनेशचंद्र श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए भोजपुरी में सबको संबोधित किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्राचार्य प्रो. जोसेफ़ डेनियल ने अपनी मातृभाषा मलयालम में बात करते हुए सभी को अपने देश और उसकी भाषाई विविधता के प्रति गर्व महसूस करने के प्रति प्रेरित किया।
धन्यवाद ज्ञापन हिंदी की शोधार्थी गौरांगी मिश्र द्वारा अवधी बोली में दिया गया। समस्त कार्यक्रम का कुशल संचालन अरुणेश शुक्ल द्वारा अवधी में किया गया। सुंदरम, कांची, प्रज्ञा, विख्यात, अंजलि, नेहा ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था की कमान संभाल रखी थी। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी और कर्मचारी-गण उपस्थित रहे और बोलियों की विविधता का आनंद लिया।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में विविधवर्णी आयोजन “वासंतिक” आयोजित

कानपुर 17 फरवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर भारत में वसंत एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है और इसी को क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के प्रांगण में उतारते हुए हिन्दी विभाग का विविधवर्णी आयोजन “वासंतिक” 17 फरवरी 2025 को सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में आयोजित किया गया। पूर्णतः शास्त्रीय आधार पर आयोजित इस नृत्य, संगीत, कला व कविता के अभिनव सहमेल में कॉलेज के छात्रों ने बढ़-चढ़कर अपनी प्रतिभा का सुन्दर प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुश्री सूज़ी जोसेफ़ थीं और विशिष्ट अतिथि प्रो. श्वेता चंद थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य जोसेफ़ डेनियल ने की।
‘वासंतिक’ की शुरुआत वाद्य वृंद की राग यमन पर सामूहिक प्रस्तुति के साथ हुई और फिर महाप्राण निराला द्वारा रचित ‘वर दे वीणावादिनी’ के गान व नृत्य प्रस्तुति ने वसन्त की आभा बिखेर दी। इसी क्रम में ‘देव’ की कविता का पाठ अर्जित द्वारा, वसन्त से संबंधित विविध गीत, कथक नृत्य, सबद गान ने पूरे वातावरण को रागमय, अनुरागमय और रंगमय बना दिया। शास्त्रीय गायन में पारंगत अंकित श्रीवास्तव (पूर्व छात्र) ने वसन्त ऋतु पर अत्यंत सुन्दर प्रस्तुतियाँ दीं। साथ ही राहिल अहमद, सुप्रिया दास, तनिष्का वाजपेई और अनाया ने भी बसंत की बहार को गीतों द्वारा उकेरा। रसायनशास्त्र विभाग की प्रो. मीतकमल ने भी सबद गायन प्रस्तुत कर वसन्त का प्रभाव द्विगुणित किया। कथक के शास्त्रीय पारंपरिक नृत्य की मोहक प्रस्तुति अभिज्ञा चतुर्वेदी (पूर्व छात्रा) और अनया मिश्र ने दी तथा तन्वी, उर्वशी, साक्षी, शाल्वी, चहक, सृष्टि ने शास्त्रीय नृत्य की मोहक प्रस्तुतियों द्वारा सभी को प्रभावित किया। वादन में राग यमन और राग हंसध्वनि तबले पर उदित, बांसुरी पर हर्षित, हारमोनियम पर राहिल और ढफली पर शरद ने प्रस्तुत कर वसन्त का मधुर समां बाँध दिया।
मुख्य अतिथि के रूप में पधारी सूज़ी जोसेफ़ ने सभागार में उपस्थित सभी छात्र छात्राओं का न केवल उत्साहवर्धन किया अपितु वसंत के सांस्कृतिक एवं लौकिक पक्ष की भी चर्चा की। अध्यक्षीय भाषण कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जोसेफ डेनियल द्वारा प्रदान किया गया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभाशीष देते हुए महाविद्यालय में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की महत्ता और इनमें प्रतिभागिता का महत्त्व छात्रों को समझाया।
‘वासंतिक’ कार्यक्रम के अंतर्गत फूलों की रंगोली प्रतियोगिता सभागार के मुख्य द्वार पर सम्पन्न हुई इसमें महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर प्रतिभाग किया। रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शिवांग शुक्ला ने, द्वितीय स्थान तनिष्का चौरसिया ने और तृतीय स्थान कांची त्रिपाठी ने तथा सांत्वना पुरस्कार लावण्या , सृष्टि मिश्रा एवं फैरी ने प्राप्त किया। फूलों की रंगोली प्रतियोगिता ने जहाँ कॉलेज में ‘वासन्तिक’ की उद्घोषणा कर दी थी, वहीँ छात्रों ने बहुत मेहनत से पूरे सभागार का श्रृंगार फूलों से करके वसन्त को कॉलेज के आँगन में उतार दिया। अंजलि, अनंत, सुन्दरम, कांची, विख्यात, प्रज्ञा, फैरी ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था की कमान संभाल रखी थी। कार्यक्रम का कुशल संचालन गौरांगी मिश्र (शोध छात्रा) द्वारा किया गया। ‘वासन्तिक’ छात्रों की ऊर्जा व उत्साह से उल्लासमय और आनंदमय बन गया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी और कर्मचारी-गण उपस्थित रहे।

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Christ Church College के एन.एस.एस. स्वयंसेवकों द्वार स्लम बस्तियों में सात दिवसीय शिविर का समापन

कानपुर 16 फरवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च पी.जी. कॉलेज, कानपुर के एन.एस.एस. स्वयंसेवकों द्वारा वार्ड 16, जुही परंपुरा, कानपुर की स्लम बस्तियों में सात दिवसीय शिविर के अंतिम दिन समापन समारोह का आयोजन किया गया।

प्रातः 8:00 बजे स्वयंसेवक शिविर स्थल पर पहुंचे और सामूहिक रूप से सफाई कार्य किया। इसके उपरांत प्रोजेक्ट कार्य के अंतर्गत बस्ती के गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों को स्कूल बैग, किताबें, स्टेशनरी आदि वितरित किए गए। इसके पश्चात बच्चों को आकर्षक गतिविधियों जैसे नृत्य एवं संगीत में सम्मिलित किया गया, जिससे वे आनंदित हुए।

*मुख्य सत्र*

मुख्य सत्र में कानपुर पुलिस कमिश्नरेट से कांस्टेबल अफसाना मैम और सब-इंस्पेक्टर अमित कुमार यादव ने उपस्थित होकर स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया। स्वयंसेवकों ने एक दिन पहले कौशल विकास गतिविधि के दौरान बनाए गए उत्पाद जैसे पक्षियों के लिए घोंसले, मॉइस्चराइज़र, टोनर आदि स्मृति चिन्ह के रूप में अतिथियों को भेंट किए।

इसके बाद, पुलिस अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा एवं जागरूकता पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विशेष रूप से हेलमेट पहनने की अनिवार्यता पर जोर दिया, भले ही यात्रा छोटी ही क्यों न हो। अधिकारियों ने सात दिवसीय शिविर के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की और उनके प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

समारोह के दौरान सभी स्वयंसेवकों ने मिलकर एन.एस.एस. लक्ष्य गीत गाया, जिससे पूरा वातावरण प्रेरणादायक हो गया।

*भोजन अवकाश*

शिविर के अंतिम दिन स्वयंसेवकों द्वारा हमारे अतिथियों को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन परोसा गया। इसके पश्चात स्वयंसेवकों ने भी भोजन का आनंद लिया।

*समापन एवं निष्कर्ष*

अंत में, सम्माननीय अतिथियों को पूरे सम्मान के साथ विदाई दी गई। चूंकि यह शिविर का अंतिम दिन था, स्वयंसेवकों ने इन अंतिम क्षणों को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया। उन्होंने गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से अपनी खुशियों को व्यक्त किया।

कार्यक्रम के समापन पर कार्यक्रम अधिकारी अंकिता जैस्मिन लाल मैम ने उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों एवं सभी स्वयंसेवकों को उनके अथक प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।

इसके साथ ही, सात दिवसीय शिविर का विधिवत समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

यह कार्यक्रम सहायक कृष्णा सिंह, विनय गौतम एवं जॉय रस्किन सर और एन.एस.एस. प्रमुख आर्यन जायसवाल एवं आयुष भारती के बिना संभव नहीं हो सकता था। उनके अद्भुत मार्गदर्शन और कठिन परिश्रम ने इस शिविर को सफल बनाया।

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हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षा वर्ष 2025 की तैयारियों के सम्बन्ध में कानपुर नगर में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आवश्यक बैठक सम्पन्न

मुख्य सचिव, उ०प्र० शासन के शासनादेश एवं अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा, उ०प्र० शासन द्वारा निर्गत दिशा-निर्देश के क्रम में माध्यमिक शिक्षा परिषद, उ०प्र० प्रयागराज द्वारा दिनांक 24 फरवरी, 2025 से दिनांक 12 मार्च, 2025 के मध्य आयोजित होने वाली हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षा वर्ष 2025 की तैयारियों के सम्बन्ध में आज चन्द्र शेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, आजाद नगर, कानपुर नगर में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक आवश्यक बैठक सम्पन्न हुयी, जिसमें मनोज पाण्डेय, पुलिस उपायुक्त, कानून एवं व्यवस्था, कमिश्नरेट, राजेश कुमार, अपर जिलाधिकारी (वि०/रा०), अरूण कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक, राजीव कुमार यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक (द्वितीय) के साथ समस्त जोनल/सेक्टर/स्टैटिक मजिस्ट्रेट, केन्द्र व्यवस्थापक, बाह्य केन्द्र व्यवस्थापक, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कन्ट्रोल रूम प्रभारियों तथा सचल दल प्रभारी उपस्थित रह बैठक में सर्वप्रथम जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा बैठक में उपस्थित समस्त अधिकारियों/प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों का स्वागत करते हुये माध्यमिक शिक्षा परिषद, उ०प्र० प्रयागराज द्वारा आयोजित होने वाली हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षा वर्ष 2025 को सम्पन्न कराये जाने हेतु शासन/विभाग द्वारा निर्धारित मानकों एवं प्राविधानों के सम्बन्ध में अवगत कराते हुये महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा की गयी। तदुपरान्त पुलिस उपायुक्त, कानून एवं व्यवस्था, कमिश्नरेट द्वारा परिषदीय परीक्षा वर्ष 2025 में केन्द्रों एवं केन्द्रों पर परीक्षा सम्पन्न कराने, प्रश्न-पत्रों की सुरक्षा तथा सचल दल की सुरक्षा हेतु सशस्त पुलिस बल उपलब्ध कराये जाने एवं पुलिस द्वारा पूर्ण सहयोग दिये जाने के सम्बन्ध में अवगत कराया गया। इसी कम में अपर जिलाधिकारी (वि०/रा०) द्वारा केन्द्र व्यवस्थापक, बाह्य केन्द्र व्यवस्थापक एवं स्टैटिक मजिस्ट्रेटों को एक टीम के रूप में परीक्षा सम्पादित कराये जाने के निर्देश प्रदान किये गये। साथ ही उनके द्वारा विगत वर्षों की परीक्षाओं में आई कठिनाइयों के निराकरण पर भी अपने विचार रखे। जिलाधिकारी द्वारा शासन द्वारा निर्गत शासनादेशों के अनुपालन में माध्यमिक शिक्षा परिषद, उ०प्र० प्रयागराज द्वारा आयोजित होने वाली हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षा वर्ष 2025 को निर्धारित तिथि से पूर्व अपने-अपने केन्द्र पर समस्त व्यवस्थायें पूर्ण कराते हुये परीक्षा को सकुशल, शुचितापूर्ण एवं नकलविहीन सम्पन्न कराये जाने हेतु महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा करते हुये निर्देश प्रदान किये गये। जिलाधिकारी द्वारा परीक्षाथियों को परीक्षा देने में कोई समस्या न हो, इस पर केन्द्र व्यवस्थापकों को विशेष निर्देश प्रदान किये गये। बैठक में अन्त में अरूण कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा बैठक में उपस्थित समस्त अधिकारियों, प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुये बैठक की कार्यवाही की घोषणा की गयी।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज की एनएसएस इकाई ने निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया

भारतीय स्वरूप संवाददाता सात दिवसीय एनएसएस शिविर के पाँचवें दिन, क्राइस्ट चर्च कॉलेज की एनएसएस इकाई ने अक्षी आई केयर सेंटर के सहयोग से श्री रतन शुक्ल महापालिका इंटर कॉलेज में निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया। जुही परमपुरवा क्षेत्र के निवासियों सहित विभिन्न आयु वर्ग के लगभग चालीस लोगों ने भाग लिया और विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा आधुनिक उपकरणों के साथ नेत्र जांच कराई गई। स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम के संचालन में अहम भूमिका निभाई।अक्षी आई केयर सेंटर के डॉ. मलय चतुर्वेदी ने छात्र स्वयंसेवकों के साथ कंप्यूटर विजन सिंड्रोम पर इंटरएक्टिव सत्र आयोजित कर, स्वस्थ आँखों के लिए उपयोगी सुझाव और उपाय साझा किए।

कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अंकिता जैस्मिन लाल, कृष्णा सिंह एवं विनय गौतम के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में एनएसएस प्रमुख आर्यन जायसवाल एवं आयुष कुमार भारती का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर स्थल पर ही स्वयंसेवकों को स्वादिष्ट भोजन परोसा गया।

स्थानीय लोगों एवं अस्पताल कर्मचारियों ने इस आयोजन की व्यवस्था और स्वयंसेवकों की मेहनत की सराहना की।

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जूही परंपुरवा में क्राइस्ट चर्च कॉलेज की NSS इकाई ने लगाया निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर

कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च कॉलेज की NSS इकाई ने अपने सात दिवसीय शिविर के तीसरे दिन सेंट कैथरीन अस्पताल के सहयोग से जूही परंपुरा बस्ती में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया। इस शिविर में मधुमेह, रक्तचाप, छाती, पेट, अंगों, दंत व मानसिक स्वास्थ्य की जांच की गई।शिविर में बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी, विशेष रूप से बच्चे अपने माता-पिता के साथ शामिल हुए। सेंट कैथरीन अस्पताल की मेडिकल टीम ने आवश्यक उपकरणों के साथ जांच की, जिसमें NSS स्वयंसेवकों ने पूरी व्यवस्था और सहायता प्रदान की।

कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अंकिता जैस्मिन लाल, कृष्णा सिंह और विनय गौतम के नेतृत्व में हुआ। NSS प्रमुख आर्यन जायसवाल और आयुष कुमार भारती ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अस्पताल स्टाफ ने स्वयंसेवकों के सहयोग और आतिथ्य की सराहना की।

कार्यक्रम के अंत में स्वयंसेवकों ने स्थल पर बने भोजन का आनंद लिया। इस सफल आयोजन ने स्वास्थ्य सेवा को जरूरतमंदों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज की एनएसएस ईकाई द्वारा साप्ताहिक शिविर का उद्घाटन

कानपुर 10 फरवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर की एनएसएस ईकाई द्वारा साप्ताहिक शिविर का औपचारिक उद्घाटन समारोह किया गया जिसमें अतिथि के रूप में विद्या देवी पार्षद वार्ड संख्या 16 के साथ  पंकज त्रिवेदी जी और नगर निगम इंटर कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक अखिलेश कुमार सिंह जी ने उद्घाटन समारोह में सम्मिलित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रोग्राम ऑफिसर के स्वागत भाषण से हुआ इसके बाद अतिथि गण का स्वागत सुंदर पौधें देकर स्वागत किया गया फिर पार्षद जी द्वारा स्वयंसेवकों को संबोधित किया गया और शिविर के लिए शुभकामनाएं दी गई और इंटर कॉलेज के अध्यापक द्वारा भी बच्चों का उत्साहवर्धन किया कार्यक्रम का समापन स्वयंसेविका अनमता शहाबुद्दीन के धन्यवाद् ज्ञापन से हुआ उदघाटन समारोह के बाद पार्षद जी द्वारा उद्यान का निरीक्षण कराया गया जिसका उद्देश्य पेड़ पौधें की पहचान करना जिससे हम बस्ती में उपयोगी पौधे को लेके निवासी लोगो को जागरुक कर सके इस उद्देश्य से स्वयंसेवकों द्वारा उद्यान का निरीक्षण किया गया और साथ ही एक सप्ताह में लगने वाले कैंप के विवरण का पेम्प्लेट्स घर घर जाके वितरण किया गया परंपुरवा बस्ती छेत्र में लोगों को जागरुक भी किया गया। जिसके बाद लंच ब्रेक लिया गया जिसमें स्वयंसेवकों द्वारा स्वयं पूरी सब्जी बनाई गई और आनंद से सेवन किया गया। प्रोग्राम ऑफिसर डॉ अंकिता जैस्मीन लाल ,कृष्ण सिंह और विनय गौतम की उपस्थित में कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ। हेड आर्यन जायसवाल और आयुष कुमार भारती का अहम योगदान रहा।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज की एनएसएस ईकाई के स्वयंसेवकों द्वारा बस्ती छेत्र में गंदगी से होने वाले कीड़ों की समस्या के निवारण के लिए जागरूक किया

कानपुर 6 जनवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर की एनएसएस ईकाई द्वारा एक दिवसीय शिविर के अंतर्गत स्वयंसेवकों द्वार जूही परंपुरवा बस्ती छेत्र में गंदगी से होने वाले कीड़ों की समस्या के निवारण के लिए आज प्रकृति से मिलने वाली साम्रगी का उपयोग कर स्वयंसेवकों ने कीटनाशक बनाया और पूरी बस्ती के गली मोहले और तालाब में स्वयंसेवकों द्वारा छिड़काव किया गया | जिसके बाद लंच ब्रेक लिया गया जिसमें स्वयंसेवकों द्वारा स्वयं पोहा बनाया और आनंद से खाया गया इसके पश्चात अब इन समस्याओं के समाधान के लिए स्वयंसेवकों में विचार विमर्श हुआ जिससे अब आने वाले दिनों में इसका समाधान निकाला जाएगा और इसी के साथ एक दिवसीय शिविर का समापन हुआ | प्रोग्राम ऑफिसर डॉ अंकिता जैस्मीन लाल ,जॉय रसकिन वनस्पति विभाग और मोनिका डेनियल कार्यालय सहायक की उपस्थित में कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ| हेड आर्यन जायसवाल और आयुष कुमार भारती का अहम योगदान रहा |

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