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भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना का मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से आज सेना के कमांडरों का सम्मेलन संपन्न हुआ

2023 के लिए आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का दूसरा संस्करण 16 से 20 अक्टूबर, 2023 के बीच हाइब्रिड मोड में संपन्न हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्तमान घटनाक्रम के संदर्भ में सुरक्षा संबंधी व्यापक पहलुओं पर चर्चा की।

माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 18 अक्टूबर, 2023 को भारतीय सेना के वरिष्ठ नेतृत्व को संबोधित किया। इस अवसर पर, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस)जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) जनरल मनोज पांडेऔर चीफ ऑफ एयर स्टाफ (सीएएस) एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने भी संबोधन दिया।

माननीय रक्षा मंत्री ने अप्रत्याशित की उम्मीद करते हुए हमेशा तत्पर रहने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक संकट और संघर्ष से सबक लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने टिप्पणी की कि ताकत में असमानता की गलत व्याख्या करने और प्रतिद्वंद्वी को कम आंकने की प्रवृत्ति किसी भी संघर्ष में जीत या हार के बीच की निर्णायक रेखा होगी।

सीडीएस ने बदलते प्रतिमान के अनुकूल राष्ट्रीय सुरक्षा के ढांचे और सैन्य मामलों में क्रांति की आवश्यकता को स्पष्ट किया। सीओएएस ने वर्तमान में जारी बदलाव की प्रक्रिया में उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए सेना की सराहना की। उन्होंने वरिष्ठ नेतृत्व से परिवर्तन की इस प्रक्रिया को जारी रखने का भी आह्वान किया। सीएएस ने परिचालन पहलुओं पर बात की और अधिकतम परिचालन परिणामों के लिए सेवाओं के बीच तालमेल के महत्व पर जोर दिया।

शीर्ष नेतृत्व ने वर्तमान/उभरते सुरक्षा परिदृश्यों पर विचारकिया और भारतीय सेना की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने संगठनात्मक संरचनाओं और बदलती प्रशिक्षण व्यवस्थाओं के मूलभूत पहलुओं पर भी गहराई से चर्चा की।

इस अवसर पर भारतीय सेना के लिए जरूरी सबक लेने के उद्देश्य से सैन्य नेतृत्व द्वारा रूस-यूक्रेन युद्ध और इज़राइल-हमास संघर्ष सहित भू-रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई।

सिक्किम में हाल ही में आई ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) और उसके परिणामस्वरूप हुए नुकसान और तैयारियों की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया। बचाव, राहत और संचार संबंधी बुनियादी ढांचे की त्वरित बहाली के लिए सरकार की सभी एजेंसियों के बीच तालमेल पर चर्चा हुई। साथ ही, इसी तरह की आपात स्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया के उद्देश्य से तंत्र स्थापित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का दोहन’विषय पर अपनी बातचीत के दौरान, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार श्री अजय कुमार सूद ने भविष्य के युद्ध पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव के बारे में बात की। उन्होंने क्वांटम कंप्यूटिंग में प्रगति, साइबर खतरों को कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास पर जोर दिया।

शीर्ष स्तर के इस कार्यक्रम से रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व को विचार-मंथन करने और कई पहलों को आगे बढ़ाने का अवसर भी मिला। बातचीत के माध्यम से शॉर्ट सर्विस कमीशन को और अधिक आकर्षक बनाने, सभी आंतरिक परीक्षाओं को ‘ऑनलाइन’ मोड में आयोजित करने और बुजुर्ग सैनिकों की चिंताओं को दूर करने का तंत्र तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले गए।

इसके अलावा, सैन्य नेतृत्व ने डिजिटलीकरण और स्वचालन पहल सहित नए युग में भारतीय सेना के लिए प्रशिक्षण के तौर तरीकों और उसके स्वरूप पर विचार-विमर्श किया, ताकि खतरों और संघर्षों के उभरतेस्वरूपों के अनुरूप सेना को “भविष्य के लिए तैयार” बनाया जा सके।

भारतीय सेना के बदलाव की दिशा में जारी प्रक्रिया के अनुरूप संचालन, प्रशिक्षण, रसद और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी एक ठोस नीति तैयार करने के लिए वरिष्ठ कमांडरों के विचार लिए गए। वैचारिक स्तर पर चर्चा की गई,जिससे भविष्य के लिए महत्वपूर्ण नीतियों के निर्माण का

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कौशल परिषद (एससीपीडब्ल्यूडी) ने ‘समावेशी कार्यक्रमों के लिए जॉब कोच’ के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

आजमानेसरगुरुग्राम स्थित आईआईसीए परिसर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीएऔर दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कौशल परिषद (एससीपीडब्ल्यूडीके बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयूपर हस्ताक्षर किए गए।

एमओयू का उद्देश्य एससीपीडब्ल्यूडी और आईआईसीए की विशेषज्ञता में तालमेल बिठाना हैताकि एससीपीडब्ल्यूडी और आईआईसीए के तत्वावधान में बनाई गई विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से विविध कार्यबल के निर्माण और प्रबंधन के लिए ज्ञानकौशल और दक्षता के संबंध में कॉर्पोरेट जगत को सक्षम बनाया जा सके। आईआईसीए के सहयोग सेएससीपीडब्ल्यूडी योग्यता – समावेशिता के लिए जॉब कोच (जेसीआई)” कार्यक्रमों या विविध क्षेत्रों में कौशल पाठ्यक्रमों के माध्यम से पहल करेगा।

आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख डॉगरिमा दधीच और एससीपीडब्ल्यूडी के सीईओ रवींद्र सिंह सिंह ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

आईआईसीए के महानिदेशक और सीईओ,  प्रवीण कुमार की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गएजिन्होंने इस पहल के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि कॉरपोरेट जगत और अन्य संगठनों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कार्यबल में दिव्यांगजनों को शामिल करने को बढ़ावा देंगे। आईआईसीएएससीपीडब्ल्यूडी सहयोग के परिणामस्वरूप कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों और ऐसे अन्य हितधारकों की क्षमता का निर्माण होगाजो विविधता और समावेश के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं।

डॉदधीच ने इस बात पर जोर दिया कि यह एक सामयिक पहल हैक्योंकि भारत में विविधता और समावेश के अभियान को मजबूत करने और प्रभावशाली क्षमता निर्माण करने एवं ऐसे व्यक्तियों का एक कैडर बनाने की जरूरत हैजो कॉरपोरेट जगत और अन्य संगठनों में दिव्यांगजनों को रोजगार देने और रोजगार के बाद अपनाने की सुविधा देने तथा उन्हें समर्थन देने में विशेषज्ञता रखते हों। रवींद्र सिंह ने कहा कि कॉरपोरेट्स के क्षमता निर्माण की आवश्यकता हैताकि उनके द्वारा नियोजित दिव्यांगजनों को अनुकूल वातावरण प्रदान किया जा सके। आईआईसीए के एसओबीई के मुख्य कार्यक्रम कार्यकारी डॉरवि राज अत्रे और एससीपीडब्ल्यूडी के एसएंडक्यूए की प्रमुख डॉनिहारिका निगम इस सहयोग को क्रियान्वित करने के लिए नोडल अधिकारी हैं।

दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कौशल परिषद (एससीपीडब्ल्यूडीके बारे में

दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कौशल परिषद (एससीपीडब्ल्यूडीएक गैरलाभकारी‘ संगठन हैजो सोसायटी पंजीकरण अधिनियम1860 के तहत पंजीकृत है। राष्ट्रीय कौशल विकास और उद्यमिता नीति 2015 के एक विशिष्ट प्रावधान के अनुपालन मेंकौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तत्वावधान में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (एमएसजेई), राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी), और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआईद्वारा संयुक्त रूप से अक्टूबर2015 में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कौशल परिषद (एससीपीडब्ल्यूडीकी स्थापना की गई थीताकि दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडीको मुख्यधारा में लाने के मिशन को पूरा किया जा सके।

आईआईसीए के बारे में

आईआईसीएकॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए), भारत सरकार द्वारा एक स्वायत्त निकाय के रूप में स्थापित एक संस्था हैजो एक एकीकृत और बहुसंकाय दृष्टिकोण के माध्यम से भारत में कॉर्पोरेट क्षेत्र के विकास का समर्थन करने के लिए एक थिंकटैंक और उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य करती है। आईआईसीए विभिन्न स्कूलों और केंद्रों के माध्यम से अपनी क्षमतानिर्माण और सलाहकार समाधान प्रदान करता है। आईआईसीए का स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंटपर्यावरणसामाजिक प्रशासन (ईएसजी), कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआरऔर व्यापार तथा मानवाधिकार (बीएचआरके क्षेत्रों में काम करता है। स्कूल ने इस साल दिसंबर में जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की भी घोषणा की है। वर्तमान समझौता ज्ञापन की अगुआई देश में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरमेंटआईआईसीए द्वारा की जायेगी।

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भारत आज रक्षा क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से सुसज्जित हैः डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से सुसज्जित है।

उन्होंने कहा, अतीत के विपरीत, हमारे सशस्त्र बल ड्रोन, हेलिबोर्न ऑपरेशन और यूएवी सहित उन्नत हथियारों से सुसज्जित हैं और क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसी नई सीमाओं के लिए तैयार हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली में यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) द्वारा आयोजित भारतीय सैन्य विरासत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. सिंह ने कहा, भारत नई नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों को अपनाने में अग्रणी देशों के समकक्ष है, जिनमें रक्षा परिदृश्य को बदलने की क्षमता है। यह न केवल देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाती है बल्कि भारत को रक्षा क्षेत्र में वैश्विक प्रौद्योगिकी के अग्रणी देश के रूप में भी स्थापित करती है।

उन्होंने कहा, ”यह अतीत की बात है जब हमारी सेनाएं पुराने अस्त्रों का उपयोग करती थीं। हम विश्व के उन सात विशिष्ट देशों में से हैं जो क्वांटम प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, ”इस दृष्टिकोण के साथ, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस वर्ष मार्च में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन शुरू किया।”

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा, पुणे के आईआईएसईआर में स्थापित ‘आई-हब क्वांटम’, क्वांटम टेक्नोलॉजीज के क्षेत्र में काम कर रहा है और परमाणु इंटरफेरोमेट्री-आधारित सेंसिंग और नेविगेशन उपकरण विकसित कर रहा है; आईआईटी मद्रास में टीआईएच, अर्थात् आईआईटीएम प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन रक्षा कर्मियों के लिए एक सुरक्षित मोबाइल फोन विकसित करने पर काम कर रहा है; आईआईटी रूड़की में टीआईएच, अर्थात् आईहब दिव्य संपर्क आईडीआर डूट एमके-1 की सहायता कर रहा है, जो आतंकवादी/अराजकता विरोधी और रूम इंटरवेंशन ऑपरेशन के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों की मदद के लिए भारत का पहला स्वदेशी नैनो ड्रोन है; पुणे के आईआईएसईआर में स्थापित आई-हब क्वांटम परमाणु इंटरफेरोमेट्री-आधारित सेंसिंग और नेविगेशन उपकरणों को विकसित करने वाली क्वांटम टेक्नोलॉजीज के क्षेत्र में काम कर रहा है; आईआईटी मंडी में टीआईएच अर्थात् ह्यूमन कंप्यूटर इंटरेक्शन (एचसीआई) फाउंडेशन नेवल कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम (एनसीएमएस) विकसित कर रहा है, आईआईएससी बेंगलुरु में टीआईएच ऑटोमेशन सिस्टम आदि के सटीक नियंत्रण के लिए समेकित रोबोटिक ज्वाइंट एक्चुएटर्स विकसित कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, ये नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियां निरंतर विकसित हो रही हैं और सैन्य अभियानों पर उनका प्रभाव बढ़ता रहेगा। आधुनिक युग में सैन्य प्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए इन प्रौद्योगिकियों को अपनाना और उनका उपयोग करना आवश्यक होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जहां तक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवोन्मेषणों का प्रश्न है, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में यह भारत के लिए सबसे अच्छा समय है। चंद्रयान-3, आदित्य एल1 और कोविड टीकों की सफलता गाथाओं ने भारत की छवि में बड़े बदलाव लाने में योगदान दिया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, विशेष रुप से नई दिल्ली में हाल ही में सफल जी20 शिखर सम्मेलन के बाद विश्व के सबसे बड़े नेता के रूप में उभरे हैं। जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, 2070 तक नेट ज़ीरो के भारत के एमडीजी लक्ष्यों को अर्जित करने में काफी सहायता करेगा।

जी20 में अफ्रीकी संघ के प्रवेश की सराहना करते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि नई दिल्ली शिखर सम्मेलन उपयुक्त रूप से यह प्रदर्शित करता है कि “विश्व आज प्रधानमंत्री श्री मोदी, जो जी20 को जी21 में बदलने के लिए इतिहास में जाने जाएंगे, की अगुवाई में भारत द्वारा नेतृत्व किए जाने के लिए तैयार है।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “उन्होंने भारत की भूमिका एक ऐसे राष्ट्र के रूप में स्थापित की है जो अब नेतृत्व नहीं सहेगा, बल्कि नेतृत्व करने के लिए तैयार है।”

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केंद्रीय मंत्री डॉ.  जितेंद्र सिंह ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली में अनुभव पुरस्कार 2023 प्रदान किए

पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग वर्ष 2023 के लिए पुरस्कार विजेताओं को उनके लेखन को सम्मानित करने के लिए 23.10.2023 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में अनुभव पुरस्कार 2023 समारोह का आयोजन ;  केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन केंद्रीय मंत्री डॉ.  जितेंद्र सिंह ने विज्ञान भवन में अनुभव पुरस्कार 2023 प्रदान किए

पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) ने प्रधानमंत्री के आदेश पर मार्च 2015 में अनुभव पोर्टल को लॉन्च किया था। यह पोर्टल सेवानिवृत्त हो रहे/सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके सराहनीय कार्यो को प्रस्‍तुत करने और दर्शाने के लिए एक ऑनलाइन व्‍यवस्‍था प्रदान करता है; सरकारी विभाग में कार्य करने के उनके अपने अनुभव साझा करना और शासन में सुधार के लिए सुझाव देना। इस विभाग के अनुभव पोर्टल पर 96 मंत्रालयों/विभागों/संगठनों ने पंजीकरण कराया है और अभी तक 10000 से अधिक आलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं।

इस समय,अनुभव के लेखन के अनुसार शीघ्र ही सेवानिवृत्त होने वाले/सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के सराहनीय कार्यो को प्रस्‍तुत करने और दर्शाने के लिए उनके प्रस्‍तुतिकरण को अधिकतम करने के उद्देश्य से एक अनुभव आउटरीच कार्यक्रम शुरू किया गया था। इस अभियान के परिणाम स्वरूप 1901 अनुभव आलेखों का प्रकाशन हुआ है, जो 2015 में इसकी शुरुआत के बाद से सबसे अधिक संख्या में है। प्रकाशित आलेखों की अधिकतम संख्या सीआईएसएफ से है। चिंतनशील प्रक्रिया के पश्‍चात्, 4 अनुभव पुरस्कार और 9 ज्‍यूरी प्रमाणपत्र प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। पुरस्कार विजेता 8 विभिन्न मंत्रालयों/विभागों/संगठनों से हैं। यह उल्लेख करना महत्‍वपूर्ण होगा कि इस प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए पहली बार 9 ज्यूरी प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जा रहे हैं। अनुभव पुरस्कार विजेताओं को एक पदक, एक प्रमाण पत्र और 10,000/- रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। ज्‍यूरी प्रमाणपत्र विजेताओं को एक पदक और एक प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जाएगा।

पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) भारत सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लाभ के लिए प्री-रिटायरमेंट काउंसलिंग (पीआरसी) कार्यशाला का आयोजन भी कर रहा है जो पेंशनभोगियों के ‘जीवनयापन में आसानी’ की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इस कार्यशाला में शीघ्र ही सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभ और मंजूरी प्रक्रिया से संबंधित प्रासंगिक जानकारी प्रदान की जाएगी।

इसके अतिरिक्‍त, अखिल भारतीय पेंशन अदालत पेंशन शिकायतों के निवारण हेतु एक प्रभावी मंच के रूप में उभर कर आई है। अब तक डीओपीपीडब्ल्यू द्वारा 08 पेंशन अदालतें आयोजित की गई हैं और पेंशन अदालत में उठाए गए 24,671 में से, इस पहल में भागीदारी करने वाले विभिन्न मंत्रालयों/विभागों/संगठनों द्वारा 17,551 शिकायतों का समाधान (71 प्रतिशत) किया गया था।

आगामी समारोह में, विषयगत अखिल भारतीय पेंशन अदालत आयोजित की जाएगी जिसमें मंत्रालयों/विभागों में लंबित पेंशन भुगतान आदेश मामलों को दिल्ली में डीओपीपीडब्ल्यूद्वारा और भारत भर में अन्य स्थानों पर मंत्रालयों/विभागों द्वारा लिया जाएगा।

डीओपीपीडब्ल्यू ने अब पोर्टलों को एकीकृत करने के औचित्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया है अर्थात् बड़े पैमाने पर पेंशनभोगियों के लिए जीवनयापन को आसान बनाने के लिए, सभी पोर्टल जैसे पेंशन वितरण बैंक पोर्टल, अनुभव, केंद्रीकृत पेंशन शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीईएनजीआरएएमएस), केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) आदि को नव निर्मित “एकीकृत पेंशनभोगी पोर्टल” (https://ipension.nic.in) में एकीकृत किया जाना चाहिए।

पेंशनभोगियों को बैंक बदलने, जीवन प्रमाण पत्र जमा करने, पेंशनभोगियों के मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करने, पेंशन पर्ची और पेंशन पर्ची की पुनर्प्राप्ति, आयकर कटौती डेटा / फॉर्म 16, पेंशन रसीद की जानकारी जैसी समस्याओं को कम करने के लिए, पेंशन वितरण बैंकों की वेबसाइटों को भी एकीकृत पेंशनभोगी पोर्टल के साथ एकीकृत किया जाएगा। स्‍टेट बैंकऑफ इंडिया (एसबीआई) और केनरा बैंक के पेंशन सेवा पोर्टल को भविष्य पोर्टल के साथ एकीकृत करने का कार्य पूरा हो गया है।

अब, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी अपने पेंशन पोर्टल को इंटीग्रेटेड पेंशनर्स पोर्टल के साथ एकीकृत कर दिया है। 4 सुविधाएं अर्थात् मासिक पेंशन पर्ची, जीवन प्रमाण पत्र की स्थिति, पेंशनभोगी का सबमिशन फॉर्म 16 और पेंशन बकाया का देय एवं आहरित विवरण इन बैंको द्वारा प्रदान किया जा रहा है। इस आयोजित समारोह में केंद्रीय मंत्री (पीपी) पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ एकीकृत पेंशनभोगी पोर्टल लॉन्च करेंगे।

पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग 70 लाख केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों को जीवन प्रमाण पत्र जमा करने में सक्षम बनाने के लिए नवंबर, 2023 में राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान 2.0 का आयोजन करेगा। 17 बैंकों के सहयोग से भारत भर के 100 शहरों में 500 स्थानों पर डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) शिविर आयोजित किए जाएंगे। इस अभियान के नियंत्रण के लिए केंद्रीय राज्‍य मंत्री 23 अक्टूबर, 2023 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रीय डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) पोर्टल को लॉन्च करेंगे।

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मैरीटाइम अमृतकाल विजन 2047 के अनावरण के तीन दिनों के भीतर भारत ने 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हासिल किया

मैरीटाइम अमृतकाल विजन 2047 के अनावरण के तीन दिनों के भीतर भारत ने 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हासिल किय

दुनिया में सबसे बड़े समुद्री शिखर सम्मेलनों में से एक ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट (जीएमआईएस), 2023 में तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश जुटाने में कामयाबी मिली। यह शिखर सम्मेलन आज संपन्न हो गया। इस बड़ी उपलब्धि के साथ, जीएमआईएस का तीसरे संस्करण 80 ट्रिलियन रुपये के निवेश का ‘अमृत काल विजन 2047’ हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

जीएमआईएस, 2023 के समापन सत्र के दौरान केंद्रीय पत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग एवं आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीसपत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री श्रीपद नाक और पत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर आदि के साथ ‘जीएमआईएस 2023 मुंबई डिक्लेयरेशन’ का अनावरण किया।

जीएमआईएस, 2023 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय पत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग एवं आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट, 2023 ने दूरदर्शी प्रधानमंत्री मोदी के मैरीटाइम अमृत काल विजन, 2047 को प्राप्त करने की दिशा में 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निवेश प्रतिबद्धता हासिल करके एक शानदार शुरुआत की है। मोदी जी द्वारा  जारी किया गया विजन दस्तावेज कई क्षेत्रों में समयबद्ध कार्यान्वयन योजना के साथ भारत के समुद्री क्षेत्र के विकास के लिए एक रोडमैप पेश करता है। हितधारकों के बीच रिकॉर्ड संख्या में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर के साथ, शिखर सम्मेलन ने भारत के वैश्विक मैरीटाइम हब बनने की राह खोल दी है। हम 50 से अधिक भागीदार देशों, सभी हितधारकों, प्रतिनिधियों के प्रति अपना आभार व्यक्त करना चाहते हैं जिन्होंने सहयोग के लिए चिह्नित क्षेत्रों पर सहयोग करने और भविष्य के लिए सुरक्षित समाधान तैयार करने के लिए इस शिखर सम्मेलन के दौरान संबंध स्थापित किए हैं। आपके सक्रिय समर्थन से इस शिखर सम्मेलन की सफलता को देखते हुए, हमारा मानना है कि जीएमआईएस ने अपना उद्देश्य हासिल कर लिया है जो क्षेत्रीय सहयोग, समुद्री देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करता है।” गोयल ने भारत की एग्जिम (निर्यात-आयात) व्यापार क्षमता को बढ़ाने के लिए पत्तन, पोत और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की, जिसके द्वारा 2022-23 में 450 बिलियन डॉलर से अधिक का व्यापार हासिल किया गया है।

वैश्विक शिखर सम्मेलन में कई देशों, 215 अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय वक्ताओं और 50,000 भौतिक रूप से और वर्चुअल माध्यम से उपस्थित लोगों की भागीदारी देखी गई। अपने पिछले संस्करणों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, तीसरी बैठक ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री हितधारकों के लिए व्यापक संभावनाओं की पेशकश की।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नवाचार और प्रौद्योगिकी की भूमिका के बारे में बताते हुए कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में, भारत क्षेत्रीय दक्षता बढ़ाने, क्षमता निर्माण की दिशा में अनुसंधान और विकास और मौजूदा प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन में सबसे आगे रहा है। समुद्री दक्षता के लिए डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र (सीओईएमई) की स्थापना उन कई पहलों में से एक है जो स्वदेशी और सहयोगात्मक विकास दोनों के लिए तकनीकी विकास के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती हैं। इस क्रम में, हमारी सरकार के लिए भारत के समुद्री स्टार्ट अप इकोसिस्टम की क्षमता का दोहन करने का मुख्य रूप से जोर रहेगा।”

इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान, हरित बंदरगाहों और नौवहन के साथ सतत विकास के बारे में भी काफी चर्चा हुई, जो एक ऐसा क्षेत्र जिसमें नॉर्वे और अन्य अग्रणी समुद्री राष्ट्र सर्वोत्तम तौर तरीकों को परिभाषित कर रहे हैं और नए मानक स्थापित कर रहे हैं जिनका बाकी दुनिया को पालन करना चाहिए। सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “उदाहरण के लिए, भारत हरित ईंधन, विद्युतीकृत/ नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित यार्ड उपकरण और वाहनों के उपयोग के साथ जीएचजी उत्सर्जन में कमी लाने से जुड़े अन्य प्रमुख क्षेत्रों में कार्बन तटस्थता (कार्बन न्यूट्रैलिटी) विकसित करने की योजना बना रहा है।”

केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा“हम वैश्विक अर्थव्यवस्था के गुमनाम नायकों – हमारे नाविकों को धन्यवाद देते हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘प्रमुख श्रमिक’ के रूप में नामित किया गया है। वैश्विक स्तर पर नाविकों की आपूर्ति में 5वें स्थान पर भारत का होना, उसकी उद्योग के लिए तैयार प्रतिभाओं के विकास को बढ़ावा देने में हमारे दशक भर के प्रयासों का प्रमाण है।

उन्होंने नाविकों के लिए महामारी के बाद के युग में विकसित अधिक मददगार और सहज कामकाजी माहौल प्रदान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योगवस्त्रउपभोक्ता मामलेखाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयलगुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने श्री सोनोवाल के साथ जीएमआईएस 2023 का समापन किया और इस बारे में अपने विचार साझा किए कि कैसे भारत का समुद्री क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो सभी सार्वजनिक और निजी बंदरगाह प्राधिकरणों, शिपिंग लाइनों, कंपनियों, स्टार्टअप, एमएसएमई और अन्य सहायक उद्योगों के लिए योगदान देती है।

शिखर सम्मेलन के तीन दिनों में ज्ञानवर्धक गोलमेज बैठकों और सत्रों की एक श्रृंखला देखी गई, जिनमें से प्रत्येक में भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी), बिम्सटेक, चाबहार बंदरगाह आईएनटीएससी गलियारे पर चर्चा के साथ-साथ प्रमुख क्षेत्रीय विकास पहल सहित समुद्री क्षेत्र के अहम पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। भारतीय और यूरोपीय संघ के देशों को जोड़ने वाले कई बंदरगाहों के विकास, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से निपटने, बिम्सटेक और आईएमईसी आर्थिक गलियारों के लिए समुद्री मार्ग को प्रवेश द्वार के रूप में बढ़ावा देने और आईएमओ में प्रासंगिक फोकस क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए संयुक्त मंचों की सुविधा जैसे पहलू चर्चा के कुछ प्रमुख क्षेत्र थे।

जीएमआईएस 2023 में जहां भारत के क्रूज क्षेत्र में मौजूद अवसरों के बारे में बताया गया, वहीं अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को भारत में अपना आधार स्थापित करने के लिए आमंत्रित करने के साथ-साथ क्रूज टर्मिनल से जुड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण, करों में छूट के साथ प्रोत्साहन, क्रूज़ के लिए समर्पित प्रशिक्षण अकादमियों के साथ संस्थागत क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक आकर्षक एवं टिकाऊ नीतिगत ढांचे जैसे उपायों के साथ क्रूज क्षेत्र को विकसित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला गया। सरकार एक समग्र क्रूज प्रोत्साहन नीति जारी करने की योजना बना रही है।

जीएमआईएस 2023 शिखर सम्मेलन केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया और पत्तन, पोत्त और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर की अध्यक्षता में हुए शिपिंग उद्योग से संबंधित प्रासंगिक सत्रों के साथ संपन्न हुआ।

डॉ. मंडाविया ने कहा, “समुद्री क्लस्टर उद्योग में सहयोग, नवाचार और दक्षता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और हमारे उद्योग को आगे बढ़ाने के लिहाज से अपरिहार्य हैं। अच्छी तरह से सभी सुविधाओं से युक्त और विशिष्ट क्लस्टर स्थापित करके, हमारा लक्ष्य प्रतिस्पर्धी दरों पर उच्च गुणवत्ता वाली मरम्मत सेवाओं की मांग वाले दुनिया भर के जहाजों को आकर्षित करना है।”

इसके बाद भारत सरकार की माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में समुद्री वित्तपोषण, बीमा और मध्यस्थता पर एक विशेष चर्चा हुई। केंद्रीय विदेश एवं संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने भी जीएमआईएस शिखर सम्मेलन का भ्रमण किया।

देश के समुद्री क्षेत्र की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए श्रीमती सीतारमण ने कहा, “पिछले 9 वर्षों के दौरान, हमारे प्रयासों से समुद्री क्षेत्र में उल्लेखनीय 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के साथ बड़ा बदलाव लाया है, जिससे इस महत्वपूर्ण उद्योग में खासी प्रगति देखने को मिली है। भारत के बंदरगाह अब वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्थिति में हैं, जो मात्र 0.9 दिन के टर्नअराउंड समय के साथ सिंगापुर और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय केंद्रों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।”

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीएमआईएस 2023 का उद्घाटन किया और उद्घाटन सत्र के दौरान 3.24 लाख करोड़ रुपये 34 एमओयू के साथ 18,800 करोड़ रुपये की 21 परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इसमें 1.8 लाख करोड़ की हरित परियोजनाएं और 1.1 लाख करोड़ रुपये की बंदरगाह विकास और आधुनिकीकरण की परियोजनाएं शामिल थीं। पीएम मोदी ने मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 भी शुरु किया, जो अगले 25 वर्ष यानी 2047 तक भारत को आत्मनिर्भर बनाने से संबंधित अमृत काल के लिए समुद्री क्षेत्र के विकास का एक रोडमैप है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने इस अवधि के दौरान समुद्री क्षेत्र के विकास के लिए 80 लाख करोड़ रुपये के निवेश को खोले जाने के अपने दृष्टिकोण को साझा किया। वैश्विक आर्थिक गलियारों पर हुए गोलमेज सम्मेलन में विभिन्न देशों के 60 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें 33 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और 17 भारतीय कंपनियों के सीईओ शामिल थे। उद्घाटन सत्र में मंच पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ विभिन्न देशों के 10 मंत्री भी उपस्थित रहे। जीएमआईएस, 2023 के विभिन्न सत्रों में 10 देशों के 21 मंत्रियों ने भाग लिया।

 

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महाना ने प्रेस क्लब पदाधिकारियों को सकारात्मक रूप से पत्रकारिता करने का संकल्प दिलाया

कानपुर। कानपुर प्रेस क्लब का संकल्प समारोह आज गेंजेस क्लब में आयोजित हुआ । दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ हुए इस समारोह में यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियो को दायित्वों के निर्वहन में पूर्ण निष्ठा एवं लगन से कार्य करने का संकल्प दिलाया। मुख्य अतिथि सतीश महाना , विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष सरस बाजपेई, महामंत्री शैलेश अवस्थी, कोषाध्यक्ष सुनील साहू वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरव सारस्वत सहित अन्य पदाधिकारियो को गले में पट्टिका पहनाने के साथ ही प्रमाण पत्र प्रदान किये । मुख्य अतिथि सतीश महाना ने अपने संबोधन में कहां की समाज में पत्रकारिता का अपना एक विशेष स्थान है। अखबार के समाचार को 90 प्रतिशत व्यक्ति सच मानते है , परंतु पिछले कुछ समय में विश्वसनीयता कुछ कम हुई है ऐसे में हम सब की जिम्मेदारी बनती है कि पत्रकारिता मे सकारात्मक रूप में से भी चीजों को देखा जाए श्री महाना ने कानपुर प्रेस के पदाधिकारियो से उम्मीद जताई की नई पीढ़ी के लोग जो पत्रकारिता में आ रहे हैं , उन्हें सकारात्मक रूप से समाज की कैसे सेवा करनी है उसका मार्गदर्शन करें । उन्होंने वर्तमान राजनीति के परिदृश्य पर भी चर्चा करते हुए कहा कि एक आम धारणा थी कि राजनीति में गुंडे और कम पढ़े लिखे लोग आते हैं लेकिन उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद इस मिथक पर विराम लगाया गया और यह बताया की राजनीति में शिक्षक, वकील, डॉक्टर सहित विभिन्न कार्य क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति रहते हैं। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार सत्य प्रकाश त्रिपाठी जी ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला । प्रेस क्लब के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए सरस वाजपेई ने पत्रकारों के समक्ष अपने तीन संकल्प को बयां किये, उन्होंने बताया कि पत्रकारों के लिए मेडिक्लेम पॉलिसी सहित कई अन्य कार्य हैं जो उनकी प्राथमिकता में है। इससे पूर्व वर्तमान महामंत्री कुशाग्र पांडे ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया । समारोह मे पूर्व मंत्री एवम कल्याणपुर की विधायक नीलिमा कटियार , पूर्व मंत्री एवम किदवई नगर के विधायक महेश त्रिवेदी, विधायक सुरेंद्र मैथानी , समाजवादी पार्टी के विधायक अमिताभ बाजपेई, भाजपा जिलाध्यक्ष भाजपा उत्तर दीपू पाण्डेय, कांग्रेस के शहर अध्यक्ष नौशाद अलम मंसूरी, सपा शहर अध्यक्ष फजल महमूद , पूर्व महापौर रवीद्र पाटनी और डेन नेटवर्क के डायरेक्टर संजीव दीक्षित सहित विभिन्न कार्य क्षेत्र की महान विभूतियों ने विशेष रूप से शिरकत की। आयोजन मे बड़ी संख्या मे वरिष्ठ पत्रकारों ने अपनी सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन डॉ रमेश वर्मा ने और आभार अवनीश दीक्षित ने व्यक्त किया।

अध्यक्ष सरस वाजपेई , महामंत्री शैलेश अवस्थी , कोषाध्यक्ष सुनील साहू , वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरव सारस्वत , उपाध्यक्ष मनोज यादव , वरिष्ठ मंत्री मोहित दुबे , मंत्री शिवराज साहू और कार्यकारिणी पद के लिए कौस्तुभ शंकर मिश्रा , विवेक पांडे सोनू , दीपक सिंह , अमन चतुर्वेदी , गगन पाठक , अंकित शुक्ला , मयंक मिश्रा , दिवस पांडे , उत्सव शुक्ला , मोहम्मद नौशाद और रोहित निगम ने संकल्प लिया

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्‍मृति जूबिन इरानी ने अमेठी सांसद खेल-कूद प्रतियोगिता-2023′ के विजेता खिलाड़ियों को दिया पुरस्कार एवं लगभग ₹700 करोड़ की 879 परियोजनाओं का किया लोकार्पण

  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्‍मृति जूबिन इरानी ने जनपद अमेठी में सांसद खेलकूद प्रतियोगिता-2023 के विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरित करने के साथ ही 699.79 करोड़ की लागत से 879 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया।

इस अवसर केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्‍मृति जूबिन इरानी ने खेलकूद प्रतियोगिता के खिलाड़ियों को संबोधित करते हुये कहा कि  अमेठी कई साल तक अंधेरे में रहा, लेकिन आज 1 लाख 23 हजार घरों को बिजली मिल रही है। मनरेगा में आज 2 लाख से अधिक हाथों को काम मिला है। उन्होंने कहा कि जो काम 40 साल में नहीं हुए, वो प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले 4 सालों में हुए हैं।

केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में  हर ग्राम पंचायत में सांसद खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन हुआ है जिसके फलस्वरुप अमेठी में कुल 1 लाख 11 हज़ार खिलाड़ी एकत्रित हुए। श्रीमती इरानी ने कहा कि पिछले 25 दिनों में युवाशक्ति ने लगभग 50 हजार मेडल प्राप्त किये जो कि गर्व की बात है। स्‍मृति जूबिन इरानी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुये कहा प्रधानमंत्री आज से चार वर्ष पूर्व अमेठी कि इस धरा पर पधारे थे लेकिन आज भी उनके मन में अमेठी और इसके नागरिकों के लिये उनके दिल में सम्मान है।केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि अमेठी लोकसभा क्षेत्र में पहले मात्र 40 प्रतिशत शौचालय थे जो प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बढकर स्कूलों में बेटियों के लिये 100 प्रतिशत हो गये. प्रधानमंत्री मोदी ने आज वीडियो संदेश के माध्यम से अमेठी सांसद खेल प्रतियोगिता 2023 के समापन समारोह को संबोधित किया।सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेठी सांसद खेल प्रतियोगिता 2023 में भाग लेने वालों के साथ जुड़ना एक विशेष अहसास है। यह महीना देश में खेलों के लिए शुभ है, क्योंकि भारतीय खिलाड़ियों ने एशियाई खेलों में पदकों का शतक बनाया है, इसलिए इसे मद्देनजर रखते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि इन आयोजनों के जरिये अमेठी के अनेक खिलाड़ियों ने भी अमेठी सांसद खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

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भारत में शीघ्र ही विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो सेवा नेटवर्क उपलब्ध होगा: हरदीप सिंह पुरी

आवासन एवं शहरी कार्य तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने देश भर में शहरी परिवहन नेटवर्क को सशक्त बनाने के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता पर जोर दिया है। वे कल आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) से जुड़ी संसदीय सलाहकार समिति के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। इस बैठक में चर्चा का मुख्य विषय शहरी परिवहन था।

इस बैठक में आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री कौशल किशोर, संसद सदस्य (लोकसभा) श्री तिरु ए.के.पी. चिनराज, संसद सदस्य (लोकसभा) श्री एम.वी.वी. सत्यनारायण, संसद सदस्य (लोकसभा) डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे, संसद सदस्य (लोकसभा) श्री रमेश बिधूड़ी और संसद सदस्य (राज्यसभा) श्री अबीर रंजन विश्वास, संसद सदस्य (राज्यसभा) श्रीमती वंदना चव्हाण और संसद सदस्य (राज्यसभा) तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय में सचिव श्री मनोज जोशी व आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।

आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव और विशेष कार्य अधिकारी श्री जयदीप ने इस बैठक में शामिल हुए सदस्यों के समक्ष नगरीय परिवहन पर विस्तार से एक विशेष प्रस्तुति दी। इस व्याख्यान में देश भर में वर्तमान मेट्रो नेटवर्क के विकास पर विवरण को साझा किया गया।

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कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी प्रतिनिधियों को एकल कार्ड द्वारा मेट्रो, रेल, बस एवं अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रदाताओं (पीटीओ) के माध्यम से निर्बाध यात्रा करने में समर्थ बनाने और खुदरा दुकानों/रेस्तरां/एटीएम/कियोस्क/ईंधन भरवाने/पार्किंग तथा रिटेल आउटलेट आदि में खरीदारी हेतु अपने उपयोग के लिए ‘वन नेशन वन कार्ड’ के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी गई। स्वदेशी रूप से विकसित इस नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) कार्ड का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मार्च 2019 में एक कार्यक्रम के दौरान किया गया था। वर्तमान में नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड का इस्तेमाल इन मेट्रो रेल सेवाओं का उपभोग करने के लिए किया जा सकता है:

दिल्ली मेट्रो (डीएमआरसी)

बेंगलुरु मेट्रो (बीएमआरसीएल)

मुंबई मेट्रो

चेन्नई मेट्रो (सीएमआरएल)

अहमदाबाद मेट्रो (जीएमआरसीएल)

कानपुर मेट्रो (यूपीएमआरसीएल)

इसके अलावा, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड के इकोसिस्टम को अपनाने वाले परिवहन सेवा प्रदाताओं के लिए राज्य सड़क परिवहन उपक्रमों (एसआरटीयू) में कदंबा ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड, गोवा, बी.ई.एस.टी. उपक्रम, मुंबई और हरियाणा रोडवेज शामिल हैं।

संसद सदस्यों ने इस बैठक के दौरान नगरीय परिवहन से संबंधित मुद्दों का उल्लेख किया, जिनमें उनके संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों/राज्यों में मेट्रो सेवा संचालन, देश के अन्य भागों में मेट्रो परिचालन को बढ़ाना, अंतिम छोर तक परिवहन सेवा की उपलब्धता, सुविधाओं में बढ़ोतरी, यात्रा में सुलभता व यात्रियों से जुड़ी सुविधाओं आदि से संबंधित मामले शामिल थे।

आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने सांसदों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए बताया कि फिलहाल देशभर के 20 शहरों में करीब 874 किलोमीटर मेट्रो रेल सेवा जारी है और अनेक शहरों में करीब 986 किलोमीटर मेट्रो रेल का कार्य निर्माणाधीन है। उन्होंने जोर देते हुए बताया कि भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क सेवा बनाने की राह पर अग्रसर है।

देशभर में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार इस प्रकार से है:

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आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के आधार पर 10,000 ई-बसों को तैनात करके नगरीय बस संचालन को बढ़ाने के उद्देश्य से हाल ही में मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित एक योजना “पीएम-ईबस सेवा” के बारे में भी जानकारी साझा की। इस योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार से हैं:

  • सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल के आधार पर 10,000 ई-बसों की तैनाती
  • 10 वर्षों तक बसों के संचालन में सहयोग
  • बस डिपो के विकास एवं उन्नतिकरण के लिए सहायता
  • बिजली की आवश्यकता पूरा करने हेतु बुनियादी ढांचे के लिए मदद
  • 3 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में विस्तार
  • चुनौती पद्धति के माध्यम से शहरों का चयन

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विज्ञान और टेक्नोलॉजी मंत्रालय के समर्थन से वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग का “सीआरटीडीएच एम्पावरिंग एमएसएमई” विषय पर एक दिन का चिंतन शिविर दिल्ली फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (डीपीएसआरयू), नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image005YUWQ.jpg   विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के सीआरटीडीएच कार्यक्रम के अंतर्गत पांच चिंतन शिविरों की श्रृंखला में पांचवें “सीआरटीडीएच एम्पावरिंग एमएसएमईः विषय पर चिंतन शिविर” का उद्घाटन 13 अक्टूबर 2023 को दिल्ली फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी के डीएसआईआर-सीआरटीडीएच में हुआ। डीपीएसआरयू), नई दिल्ली। चिंतन शिविर अधिक सार्थक अनुसंधान को मजबूत बनाने तथा वैज्ञानिक ज्ञान, विचारों और आविष्कारों तथा बाजार योग्य उत्पादों और सेवाओं के व्यावहारिक अप्लीकेशन के बीच के अंतर को पाटने के लिए एक अनुकूल इको-सिस्टम बनाने में उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को सहज बनाने के लिए आयोजित किया गया था। चिंतन शिविर के प्रारंभ में मुख्य अतिथि, डीएसआईआर की सचिव और महानिदेशक डॉ. एन. कलईसेल्वी का उद्घाटन भाषण हुआ। डॉ. कलईसेल्वी ने अपनी टिप्पणी में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “आत्मनिर्भर भारत” बनाने के विजन को साकार करने के लिए एमएसएमई, स्टार्टअप और इनोवेटर्स को सक्षम बनाने में डीएसआईआर और सीआरटीडीएच के महत्त्व पर बल दिया। डीपीएसआरयू के कुलपति प्रोफेसर रमेश के गोयल ने विभिन्न हितधारकों को उनकी अनुसंधान एवं विकास संबंधी गतिविधियों में सहायता करने में डीएसआईआर-सीआरटीडीएच-डीपीएसआरयू के प्रयासों की सराहना की। सीआरटीडीएच की प्रमुख डॉ. सुजाता चकलानोबिस ने चिंतन शिविर के बारे में संपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि एमएसएमई नवाचार इको-सिस्टम के एक प्रमुख घटक के रूप में भारत को वैश्विक स्तर पर अनुसंधान एवं विकास और मेन्युफेक्चरिंग के केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। डीपीएसआरयू के रजिस्ट्रार प्रोफेसर हरविंदर पोपली ने डीपीएसआरयू में अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार के लिए उद्योगों को संगठित करने की दिशा में डीपीएसआरयू के प्रयासों की जानकारी दी। डीपीएसआरयू में सीआरटीडीएच की परियोजना समन्वयक प्रोफेसर गीता अग्रवाल ने सीआरटीडीएच के उद्देश्य, प्राप्त उद्देश्य तथा भविष्य के लक्ष्यों, एमएसएमई कनेक्ट पहल, एमएसएमई के लिए सुलझाए गए विषयों, प्रस्तुत सेवाओं और एमएसएमई के लिए उपलब्ध अवसरों के बारे में जानकारी दी।https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image0045GWU.jpg

सीआरटीडीएच द्वारा “मैन्य़ुफेक्चरिंग और अनुसंधान एवं विकास चुनौती: हेल्थकेयर एमएसएमई के लिए समर्थन प्रणाली बनाने” के विषय पर एक पैनल चर्चा का संचालन वैज्ञानिक-एफ और सदस्य सचिव-सीआरटीडीएच, डीएसआईआर डॉ. विपिन सी शुक्ला ने किया। चर्चा में विभिन्न पैनलिस्ट उद्योग, शिक्षा और सरकार की ओर से थे। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य डीएसआईआर अधिकारी डॉ. वंदना कालिया, डॉ. रणजीत बैरवा, डॉ. शशि कुमार और श्री नवीन चंद थे। इस कार्यक्रम में डीपीएसआरयू, नई दिल्ली की सीआरटीडीएच टीम, उद्योग के प्रतिनिधि और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के प्रतिनिधि, स्टार्ट-अप, व्यक्तिगत नवाचारी, फैकल्टी और विद्यार्थी भी उपस्थित थे।https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image002XG4D.jpg इस आयोजन में गहन चर्चा, महत्वपूर्ण विश्लेषण और रणनीतिक योजना के माध्यम से सरकारी  अधिकारियों, डीपीएसआरयू और हितधारकों के संयुक्त समझ, ज्ञान और विशेषज्ञता का उपयोग किया गया। इस सार्थक बातचीत में देश में एमएसएमई, स्टार्ट-अप और इनोवेटर्स के सामने आने वाली चुनौतियों को हल करने के संभावित उपायों पर विचार-मंथन किया गया, साथ ही भारत को किफायती स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में औद्योगिक अनुसंधान और मैन्युफेक्चरिंग का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने के अवसरों का लाभ उठाया गया।

 

 

 

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वित्तीय सेवा विभाग के सचिव डॉ. विवेक जोशी ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के त्वरित कार्यान्वयन के लिए पंजाब, हरियाणा एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव डॉ. विवेक जोशी ने नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के त्वरित कार्यान्वयन के संबंध में क्रमशः पंजाब और हरियाणा एवं केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के अधिकारियों के साथ चंडीगढ़ में 12 अक्टूबर, 2023 को दो बैठकों की अध्यक्षता की। इन बैठकों में बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के अतिरिक्त, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के अपर सचिव, संयुक्त सचिव (डीएफएस), केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के क्षेत्रीय निदेशक के साथ-साथ दोनों राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

पंजाब सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक

हरियाणा राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के अधिकारियों के साथ बैठक

डॉ. जोशी ने इस बात पर बल दिया कि पारंपरिक शिल्प और कौशल में लगे व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूरा करने और प्रधानमंत्री के सबका विकास (समावेशी विकास) के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए,  प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को कौशल प्रशिक्षण तक पहुंच के माध्यम से 18 चिन्हित व्यवसायों से जुड़े पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों की सहायता, संपार्श्विक मुक्त ऋण, आधुनिक उपकरण,  बाजार लिंकेज समर्थन और डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए समग्र रूप से इसे विस्तारित करने हेतु डिजाइन किया गया है।

डीएफएस के सचिव ने राज्य सरकार के क्षेत्र पदाधिकारियों से प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत लाभ प्रदान करने के लिए लाभार्थियों का निर्बाध नामांकन, त्वरित सत्यापन और पंजीकरण सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। इस योजना का मुख्य जोर आज के विश्वकर्माओं को कल के उद्यमियों में रूपांतरित करना है।

 

बैठकों के दौरान, एमएसएमई, एमएसडीई, क्षेत्रीय कौशल विकास और उद्यमिता निदेशालय (आरडीएसडीई) तथा डीएफएस एवं भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) द्वारा व्यापक प्रस्तुतियां दी गईं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और कार्यान्वयन की प्रगति का विवरण देते हुए ये प्रस्तुतियां दी गईं।

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