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आज के बदलते समय में रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए उद्योग आधारित अनुसंधान एवं विकास संस्थान-अकादमिक सहयोग काफी महत्वपूर्ण है: रक्षा सचिव

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आज के लगातार परिवर्तित होते समय में सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक एवं निजी उद्योग, डीआरडीओ जैसे अनुसंधान संस्थानों और शिक्षाविदों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है। रक्षा सचिव 12 सितंबर, 2025 को महाराष्ट्र के पुणे में दक्षिणी कमान द्वारा आयोजित ‘प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का तालमेल’ विषय पर उद्घाटन सत्र स्ट्राइड 2025 सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रौद्योगिकी व्यवधान न केवल युद्ध की प्रकृति को बदल रहा है, बल्कि रक्षा उद्योग के व्यवसाय को भी परिवर्तित कर रहा है, उन्होंने सभी हितधारकों से नवीनतम तकनीकी रुझानों से अवगत रहने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

रक्षा सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी श्रेष्ठता एवं औद्योगिक सामर्थ्य अक्सर युद्ध के परिणाम को निर्धारित करते हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता व्यक्त है कि रक्षा उद्योग हमारे विनिर्माण क्षेत्र के बाकी हिस्सों के साथ गति से बढ़े ताकि विकसित भारत तथा वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन नवाचार के क्षेत्र में एक विकसित राष्ट्र बनने, भारत की स्टार्टअप संस्कृति को विस्तार देने, हमारे औद्योगिक आधार को व्यापक बनाने, देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी बढ़ाने व रोजगार सृजन तथा प्रौद्योगिकी के दोहरे उपयोग से होने वाले लाभों के व्यापक मुद्दे के लिए महत्वपूर्ण है।

राजेश कुमार सिंह ने बताया कि चल रहे संघर्षों के परिणामस्वरूप दुनिया भर में प्रतिस्पर्धी लोकलुभावनवाद एवं आर्थिक संरक्षणवाद को बढ़ावा मिला है और साथ ही आर्थिक विखंडन, बहुपक्षीय संस्थाओं का पतन तथा राष्ट्रवाद की बढ़ती लहर भी देखी गई है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “हमें अपनी सॉफ्ट पावर को सहयोग देने की आवश्यकता है, क्योंकि हार्ड पावर अधिकाधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।”

रक्षा सचिव ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्यौरा दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश तकनीकी दौड़ में आगे रहे। इन उपायों में रक्षा खरीद मैनुअल 2009 और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में संशोधन करना शामिल है ताकि उन्हें अधिक गतिशील, सक्रिय, कम प्रक्रिया-भारी तथा परिणाम पर अधिक केंद्रित बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र और स्टार्टअप के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करने, जमीनी स्तर पर नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा प्रतिस्पर्धी बोली सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इसका उद्देश्य भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को व्यापक और विविध बनाना है।

राजेश कुमार सिंह ने रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने और इसे आत्मनिर्भर बनाने में निजी उद्योग की भूमिका की सराहना करते हुए उनसे अनुसंधान एवं विकास तथा विनिर्माण क्षमता में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में तब तक उस स्तर का नवाचार और क्षमता नहीं आ सकते हैं, जिसकी सशस्त्र सेनाओं को आवश्यकता है, जब तक कि निजी क्षेत्र में आगे रहने तथा निवेश करने की इच्छाशक्ति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि रक्षा एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें आपको छिटपुट आधार पर ऑर्डर मिलते हैं। राजेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि हमारे पास प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग की ताकत है, तो हम घरेलू तथा निर्यात ऑर्डर के संयोजन के माध्यम से खुद को बनाए रखने में सक्षम होंगे।

दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने अपने संबोधन में रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों के जाने-माने विशेषज्ञ, पूर्व सैनिक, विद्वान, डीआरडीओ, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी उद्योग और शिक्षा जगत के प्रतिनिधि एक साथ आए, जिसका उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास, उत्पादन, रखरखाव तथा नवाचार को शामिल करते हुए एक स्वदेशी डिफेंस इकोसिस्टम के लिए रोडमैप तैयार करना था। सेमिनार में निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर आकर्षक पैनल चर्चाएं हुईं:

  • रिवर्स इंजीनियरिंग और शैक्षणिक अनुसंधान के लिए उद्योग वित्तपोषण के माध्यम से विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को तेजी से आगे बढ़ाना।
  • स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने में डीआरडीओ की भूमिका को सशक्त करना।
  • निजी उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और शिक्षा जगत के बीच बेहतर सहयोग के माध्यम से रक्षा विनिर्माण विकास में तेजी लाना।

इस कार्यक्रम के एक भाग के रूप में एक उपकरण प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें अत्याधुनिक स्वदेशी नवाचारों को प्रदर्शित किया गया और भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं के निर्माण की दिशा में सहयोग तथा साझेदारी को बढ़ावा दिया गया।

सेमिनार में आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने, हितधारकों के बीच तालमेल को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर राष्ट्रीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए दक्षिणी कमान की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

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निफ्ट पटना और एबीएफआरएल ने केंद्रीय वस्‍त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह की उपस्थिति में स्वयं सहायता समूह जीविका की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) पटना ने आज केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह की मौजूदगी में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उद्योग कौशल प्रदान कर बिहार के बढ़ते वस्त्र क्षेत्र में रोजगार के अवसर दिलाना है, ताकि उनके जीवन में सकारात्‍मक बदलाव आए।

गिरिराज सिंह ने साझेदारी के महत्व का उल्‍लेख करते हुए कहा कि निफ्ट पटना ने बेगूसराय में जीविका दीदियों के लिए पहले ही कई सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं, जिससे उनके सिलाई कौशल और आय क्षमता में बढ़ोतरी हुई है। उन्‍होंने कहा कि इस समझौता ज्ञापन से निफ्ट विस्तार केंद्र में प्रशिक्षित जीविका दीदियों को अब एबीएफआरएल कारखाने में नौकरियां मिल पाएगी। शुरू में, आसपास के क्षेत्र की 3.5 लाख महिलाओं को लाभ मिलेगा और भविष्य में, निकटवर्ती जिलों की महिलाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

समझौता ज्ञापन सहयोग के तहत, जीविका दीदियों के नाम से पहचाने जाने वाली स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को निफ्ट पटना में परिधान निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और मशीनरी संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को बेगूसराय जिले में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) की आगामी वस्त्र निर्माण इकाई में रोजगार देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे इन महिलाओं के कौशल विकास से लेकर सुरक्षित आजीविका तक का सुव्यवस्थित मार्ग तैयार होगा।

जीविका दीदियां, बिहार के जीविका कार्यक्रम की रीढ़ हैं, जिसे भारत सरकार और विश्व बैंक के सहयोग से बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (बीआरएलपीएस) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में पिछले कुछ वर्षों में  1.4 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी है, जिससे उन्हें कम राशि के वित्त प्राप्त करने, घरेलू आय में वृद्धि और सामाजिक सशक्तिकरण में मदद मिली है। यह समझौता ज्ञापन जीविका दीदियों को वस्‍त्र और फैशन क्षेत्र में रोज़गार के औपचारिक अवसरों से जोड़ता है, जिससे उनकी भूमिका स्थानीय उद्यमों से विस्‍तारित होकर मुख्यधारा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था तक पहुंचती है।

भारत की फ़ैशन और वस्‍त्र क्षेत्र की अग्रणी खुदरा कंपनियों में से एक, एबीएफआरएल के साथ साझेदारी सुनिश्चित करती है कि उसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले कौशल आधुनिक वस्त्र उत्पादन की मांग पूरा करेगी। निफ्ट की शैक्षणिक विशेषज्ञता को एबीएफआरएल की उद्योग आवश्यकताओं से जोड़ने संबंधी यह पहल शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग का सहक्रियात्मक मॉडल भी प्रस्‍तुत करती है। यह मॉडल पूरे भारत में  विशेषकर महिला समूह और ग्रामीण आजीविका स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ वाले राज्‍यों में भविष्य की साझेदारियों के लिए एक खाका प्रस्‍तुत करेगा।

तत्काल रोज़गार प्रदान करने के अलावा, इस कार्यक्रम से सामाजिक और आर्थिक दूरगामी परिणाम की उम्मीद है। महिलाओं को आजीविका के स्थिर साधन प्रदान कर  यह उन्‍हें अधिक वित्तीय स्वतंत्रता, घरों में निर्णय लेने की बेहतर शक्ति और सम्मान बढा़एगा। साथ ही, बेगूसराय में एबीएफआरएल की विनिर्माण इकाई की स्थापना से बिहार के औद्योगिक विकास में मदद मिलेगी,  जिससे महिलाओं के साथ ही स्थानीय स्‍तर पर कार्यबल के लिए व्‍यापक अवसर उत्‍पन्‍न होंगे।

यह समझौता ज्ञापन एक ऐतिहासिक पहल है जो समावेशी और सतत विकास लक्ष्‍य को पूरा करने के सरकार के दृष्टिकोण, शैक्षणिक विशेषज्ञता और उद्योग नेतृत्व को समेकित करता है। यह दर्शाता है कि कौशल विकास, रोज़गार आश्वासन के साथ जुड़कर, जीवन में कैसे बदलाव ला सकता है। यह विकास का ऐसा मॉडल दे सकता है, जिसे देशभर में मापा और दोहराया जा सके।

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भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) कार्यालयों के मीडिया और संचार अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की

  1. भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के कार्यालयों के मीडिया और संचार अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।
  1. कार्यक्रम में 51 मीडिया नोडल अधिकारियों (एमएनओ) और सोशल मीडिया नोडल अधिकारियों (एसएमएनओ) ने हिस्सा लिया।
  1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ उद्घाटन सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित किया।
  1. कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि गलत सूचनाओं के बढ़ते खतरे के मद्देनजर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भारत में संविधान के अनुसार चुनाव सख्ती से कराए जाते है और भ्रामक सूचनाओं का तथ्यों के साथ खंडन किया जाना चाहिए।
  1. मीडिया और अन्य हितधारकों के साथ समय पर तथ्यात्मक जानकारी देने के लिए सीईओ कार्यालयों के संचार संत्र को मजबूत करने के लिए सत्र आयोजित किए गए।
  1. कार्यशाला में मीडिया और सोशल मीडिया के परिप्रेक्ष्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण पर समर्पित सत्र आयोजित किए गए ।
  1. गलत सूचनाओं का खंडन करने के लिए विभिन्न उपकरणों, तकनीकों और रणनीतियों पर एक विशेषज्ञ सत्र भी आयोजित किया गया।
  1. यह कार्यक्रम इस तरह का तीसरा संवादात्मक आयोजन था। इससे पहले, आईआईआईडीईएम के सीईओ कार्यालयों के मीडिया और संचार अधिकारियों के लिए 9 अप्रैल, 2025 और 5 जून, 2025 को नई दिल्ली में नीतिगत कार्यक्रम (ओरिएंटेशन प्रोग्राम) आयोजित किए गए थे।

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दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज में नशा मुक्त युवा – विकसित भारत पर संगोष्ठी विषय पर संगोष्ठी आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत “नशा मुक्त युवा – विकसित भारत” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में विद्यार्थियों ने नशा मुक्ति के लिए सामूहिक शपथ ग्रहण की। भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के राष्ट्रीय सेवा योजना क्षेत्रीय निदेशालय से प्रायोजित और उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश शासन द्वारा समर्थित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे से होने वाले शारीरिक मानसिक और सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक करना रहा। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के राष्ट्रीय सेवा योजना विभाग द्वारा निर्देशित इस कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिनका उद्देश्य आज के समय में युवाओं के बीच तेजी से फैल रहे नशे की लत को जड़ से समाप्त करना है। कार्यक्रम का संयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा किया गया जिसमें कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने छात्राओं को नशे से होने वाले व्यापक नुकसान एवं उससे बचाव के उपायों पर विस्तार पूर्वक जानकारियां दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ अंजना श्रीवास्तव तथा समस्त वॉलिंटियर्स का विशेष योगदान रहा।

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‘एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् की बैठक संपन्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता अड्डांकी, बापट्ला। देश के लघु एवं मझोले वर्ग के समाचारपत्र संगठन ‘एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् की बैठक आन्ध्र पदेश राज्य के बापट्ला जिले के अड्डांकी, सिंगारकोण्डा में आयोजित।

सम्मेलन का शुभारम्भ पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्रीदुग्गाबत्ती वेंकटेश्वरा राव, पूर्व मंत्री गोट्टीपति पति रवि कुमार, पद्मश्री येदलापल्ली वेंकटेश्वरा राव, मुख्य सूचना आयुक्त, एसोसियेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव दत्त चन्दोला, राष्ट्रीय महासचिव शंकर कतीरा के करकमलों द्वारा संयक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

लघु एवं मझोले वर्ग के अखबारों के प्रकाशकों के तीन दिवसीय सम्मेलन में लघु एवं मझोले वर्ग की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, असम, उत्तराखण्ड, उड़ीसा सहित अनेक राज्यों से शामिल हुए प्रकाशकों ने अनेक समस्याओं को विस्तार से बताया।

सम्मेलन में शामिल हुए प्रकाशकों व पदाधिकारियों द्वारा रखे गये प्रस्तावों पर राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव दत्त चन्दोला ने कहा कि छोटे व मझोले वर्ग के अखबारों का उत्पीड़न, केन्द्र व राज्यों की सरकारों को बन्द करना चाहिये छोटे व मझोले वर्ग के अखबार ही स्थानीय स्तर की समस्याओं को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। ऐसे में उनका उत्पीड़न निन्दनीय है।

श्री चन्दोला ने कहा कि, हम मांग करते हैं कि छोटे व मझोले वर्ग के अखबारों की विकासदर बढ़ाने के लिये केन्द्र व राज्यों की सरकारों को आगे आना चाहिये और अखबारों का आर्थिक स्तर मजबूत करने के लिये उनके हिस्से का विज्ञापन, विज्ञापन नियमावली के अनुसार नियत बजट के आधार पर जारी करना चाहिये।

राष्ट्रीय सचिव डॉ. अनन्त शर्मा ने कहा कि सभी पदाधिकारी अपने अपने राज्यों से प्रकाशित होने वाले अखबारों की समस्याओं को बिन्दुवार लिखकर भेजें। उनका समाधान करवाने हेतु केन्द्र सरकार व सम्बन्धित राज्यों की सरकारों को पत्र प्रेषित किया जायेगा।

सम्मेलन में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय सचिव प्रवीण पाटिल, कोषाध्यक्ष भगवती चन्दोला, संगठन सचिव अतुल दीक्षित, किरि रांगहेंग, उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष श्याम सिंह पंवार राजस्थान राज्य इकाई के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता, महाराष्ट्र राज्य इकाई अध्यक्ष प्रदीप कुलकर्णी, गुजरात राज्य इकाई अध्यक्ष मयूर बोरीचा, उड़ीसा राज्य इकाई अध्यक्ष चन्द्रकान्त सूतर, राष्ट्रीय कार्यपरिषद् के सदस्य एम. अरुणा, के. वेंकटेश रेड्डी, वेनुगोपाल, तारिका वेल्कर, के. परशुराम, अकरम खान सहित अनेक प्रकाशक मौजूद रहे। एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् के सम्मेलन में आन्ध्र प्रदेश राज्य के अध्यक्ष सेंडीरेड्डी कोण्डला राव ने उपस्थित प्रदेश अध्यक्षों को शॉल उढ़ाकर व स्मृतिचिन्ह भेंट कर एवं राष्ट्रीय परिषद् के सदस्यों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इसी दौरान राजस्थान राज्य इकाई, असम राज्य इकाई ने भी अतिथियों व पदाधिकारियों को सम्मानित किया।

एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् के सम्मेलन में छात्राओ ने उपस्थित जनों के स्वागत में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। 

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सेन कॉलेज में इनोवेशन सेल के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम “संकल्प: हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वोमेन” विषय पर कार्यशाला आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज में इनोवेशन सेल के तत्वावधान में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम संकल्प: हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वोमेन के १० दिवसीय अभियान के अंतर्गत किया

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चरणों में श्रद्धा पूर्वक पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर प्रबन्ध तंत्र के सचिव श्री पी के सेन, प्राचार्या प्रोफ़ेसर डॉ सुमन तथा राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती अनीता गुप्ता ने किया ।एंटी क्राइम ब्यूरो के चेयरमैन एडवोकेट रिजवान अली खान , महिला थाने की एस एच ओ कमर सुल्ताना, महिला कल्याण विभाग की काउंसलर मनोवैज्ञानिक डॉ राबिया सुल्ताना,श्रम विभाग तथा यूनिसेफ के टेक्निकल रिसोर्स पर्सन प्रतीक श्रीवास्तव,महिला कल्याण की जिला कोऑर्डिनेटर मोनिका यादव, महिला कल्याण विभाग की जेंडर स्पेशलिस्ट शैल शुक्ला तथा रागिनी श्रीवास्तव ने छात्राओं को अपने अपने विषय की जानकारी देते हुए हौसला बढ़ाया और बताया जीवन के संघर्ष में सरकार और महिला कल्याण मंत्रालय विभिन्न प्रकार से सहयोग के लिए तत्पर है । सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा एवं सहायता के लिये फ्री विधिक सहायता, पुलिस सहायता और अन्य सहायता योजनाएं संचालित की हैं जो तभी कारगर होंगी जब आपको उसकी जानकारी हो ।कार्यक्रम में १०० से अधिक छात्राओं ने जानकारी प्राप्त कर स्वयं का संबल बढ़ाया और भविष्य में स्वयं एवं अन्य महिलाओं की सुरक्षा में भागीदारी का संकल्प लिया ।कार्यक्रम में छात्राओं के अतिरिक्त महाविद्यालय की समस्त शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया ।डॉ प्रीति सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया और प्रो रेखा चौबे , प्रो गार्गी यादव प्रो अलका टंडन,कैप्टन ममता अग्रवाल डा रचना निगम डॉ शुभा,डॉ अनामिका और डॉ समीक्षा सिंह ने सक्रिय योगदान दिया।

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व्यक्तित्व विकास हेतु सॉफ्ट स्किल्स पर दो दिवसीय कार्यशाला” 10 और 11 सितंबर 2025”

भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर में लैंगिक संवेदनशीलता एवं महिला विकास प्रकोष्ठ के अंतर्गत, 10 और 11 सितंबर को सर्वपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज सभागार में “व्यक्तित्व विकास हेतु सॉफ्ट स्किल्स पर दो दिवसीय कार्यशाला” संपन्न।कार्यशाला के पहले दिन व्यावसायिक और व्यक्तिगत सफलता के लिए छात्रों में संचार कौशल को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। सत्र का विषय था “बोलें, नेतृत्व करें और प्रेरित करें: नेतृत्व और प्रबंधन के लिए संचार कौशल में निपुणता प्राप्त करें।”

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि वक्ता प्रो. नीता जैन, प्राचार्य विनय जे. सेबेस्टियन, उप-प्राचार्य प्रो. श्वेता चांद और जीएसडब्ल्यूडीसी समन्वयक प्रो. विभा दीक्षित द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद आदरणीय प्राचार्य ने अपने संबोधन में करियर की सफलता और व्यक्तिगत विकास के लिए प्रभावी संचार के महत्व पर अपने विचार साझा किए। जीएसडब्ल्यूडीसी समन्वयक, विभा दीक्षित ने सॉफ्ट स्किल कार्यशाला के विषय और उद्देश्यों तथा छात्रों के लिए इसके अपेक्षित परिणामों के बारे में जानकारी दी। मुख्य सत्र सीएसजेएम विश्वविद्यालय और क्राइस्ट चर्च कॉलेज की पूर्व प्राचार्य और डीन प्रो. नीता जैन ने दिया, जिन्होंने व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास में प्रभावी संचार, आत्मविश्वास निर्माण और नेतृत्व के महत्व पर बहुमूल्य अंतर्दृष्टि साझा की। उन्होंने इंटरैक्टिव गतिविधियों और रोल-प्ले सत्रों के माध्यम से टीम निर्माण, निर्णय लेने और समस्या-समाधान जैसे नेतृत्व और प्रबंधन कौशल पर विस्तार से बताया। डॉ. रुक्मणी देवी ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा और मनीषी त्रिवेदी ने प्रभावी ढंग से सत्र का संचालन किया।

कार्यशाला में काफी संख्या में छात्रों और शिक्षकों ने बहुत उत्साह से सहभागिता की और आत्म-अभिव्यक्ति और नेतृत्व रणनीतियों के लिए आयोजित व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लिया। उपस्थित कुछ संकाय सदस्यों में प्रोफेसर सुजाता चतुर्वेदी, ज्योत्सना लाल, मीतकमल, एस.पी. सिंह, फिरदौस कटियार, आशीष ओमर और छात्र टीम में वर्षा, छवि, सृष्टि और सुप्रिया शामिल हुए

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में महिला अधिकारों एवं कानूनों पर विशेष जागरूकता वार्ता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 2 सितंबर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर में आज महिला अधिकारों एवं कानूनों पर एक विशेष जागरूकता वार्ता का आयोजन मिशन शक्ति यूनिट और ICC cell कमेेटी द्वारा किया गया। यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से प्रारम्भ हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत डाॅ अंजलि श्रीवास्तव ने आयोजन कमिटी औऱ सेल के बारे में जानकारी देकर किया ।इस अवसर पर कार्यक्रम के वक्ता वरिष्ठ ऐडवोकेट (क्रिमिनल) श्री मुरारी लाल गौर ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए महिला अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों तथा कानूनी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि महिलाएँ समाज की रीढ़ हैं और उनकी सुरक्षा एवं सम्मान के बिना वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।
उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न निरोधक कानून सहित अनेक प्रावधानों की जानकारी दी और युवाओं से अपील की कि वे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएँ।उहोंने अनुच्छेद 14 , अनुच्छेद 21 , दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 , घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी ।
कॉलेज के प्राचार्य विनय जॉन सेबेस्टियन आयोजन समिति ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा छात्र-छात्राओं को ऐसे कार्यक्रमों से प्रेरणा लेकर समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। कार्यक्रम मे उप प्राचार्या श्वेता चंद के साथ काॅलेज के अन्य फैक्लिटी सदस्य भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. मीत कमल एवं आयोजन समिति मिशन शक्ति यूनिट की ओर से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन वैष्णवी गुप्ता द्वारा किया गया। स्टुडेंट वॉलंटियर प्राची गुप्ता , आदर्श सिंह चौहान , इल्मा , जागृति गुप्ता , संस्कार , हर्षित मिश्रा , हर्ष बाजपेई के सहयोग से कार्यक्रम सफल रूप से संपन्न हुआ।

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कलस्टर/समूह में स्थापित करें परियोजना/स्वरोजगार इकाई, मिलेगा ₹50,000/- का अनुदान

दैनिक भारतीय स्वरूप जिला सूचना कार्यालय कानपुर 30 अगस्त, 2025* जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास)/जिला प्रबंधक, उ०प्र० अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड, कानपुर नगर, शिल्पी सिंह ने बताया कि केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के अंतर्गत ग्रांट-इन-एड योजनान्तर्गत अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के लिए स्वरोजगार हेतु योजना संचालित की जा रही है।

इस योजना के तहत इच्छुक व्यक्ति कम से कम तीन लोगों का समूह बनाकर तथा कलस्टर के माध्यम से अपनी स्वरोजगार इकाई स्थापित कर सकते हैं। योजना में संबंधित व्यवसाय का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा और परियोजना स्थापित कराकर आय सृजन हेतु ₹50,000/- अथवा परियोजना लागत का 50 प्रतिशत (जो भी कम हो) अनुदान प्रदान किया जाएगा। परियोजना लागत का 05 प्रतिशत लाभार्थी का अंशदान होगा तथा शेष राशि बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।

योजनान्तर्गत स्थापित की जा सकने वाली परियोजनाओं में कलस्टर आधारित बुटीक, ब्यूटी पार्लर, सोलर पैनल इंस्टॉलेशन तकनीशियन, लॉजिस्टिक वाहन चालक, कीऑस्क/किराना/जनरल स्टोर, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी सेवा, ऑटो/ई-रिक्शा चालक सेवा, मुर्गी पालन, डेयरी एवं वर्मी कम्पोस्टिंग, बकरी पालन, मल्टी-स्किल्ड निर्माण कार्य, महिला गृह उद्योग, टू-व्हीलर/थ्री-व्हीलर मैकेनिक सेवा, आईटी सपोर्ट/हार्डवेयर कार्य, मॉड्यूलर फर्नीचर/बढ़ई कार्य तथा जनसुविधा संबंधी कार्य शामिल हैं।

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक अनुसूचित जाति का व्यक्ति और जनपद का निवासी होना चाहिए। उसकी आयु 18 से 50 वर्ष के बीच हो तथा परियोजना के अनुसार साक्षर होना आवश्यक है। आवेदक समूह/कलस्टर में काम करने का इच्छुक हो, निगम की किसी योजना का बकायेदार न हो और ओ०टी०एस० के माध्यम से ऋण का भुगतान न किया हो। चयन में आय की कोई सीमा निर्धारित नहीं है, लेकिन वार्षिक ₹2.50 लाख तक आय वाले परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। समूह या कलस्टर को परिवार इकाई के रूप में मान्यता दी जाएगी। आवेदक को राज्य सरकार की अन्य योजना अथवा एस०सी०ए० अम्ब्रेला योजना के अंतर्गत पूर्व में वित्तपोषित नहीं होना चाहिए तथा उसका सिबिल स्कोर मानक के अनुरूप होना चाहिए। आवेदन पत्र के साथ आवश्यक स्व-सत्यापित दस्तावेजों में दो पासपोर्ट साइज फोटो, पैन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, उच्चतम शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की प्रति और परियोजना रिपोर्ट संलग्न करनी होगी।

आवेदक https://grant-in-aid.upsfdc.in वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। शहरी क्षेत्र के आवेदक कार्यालय, जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास)/जिला प्रबंधक, उ०प्र० अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड, 14 लखनपुर, कानपुर नगर (निकट गुरूदेव पैलेस चौराहा) में तथा ग्रामीण क्षेत्र के आवेदक संबंधित विकास खंड के सहायक/ग्राम विकास अधिकारी (स०क०) से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 7607171710 पर संपर्क किया जा सकता है

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कानपुर विद्यामंदिर महिला महाविद्यालय एवं आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी, गायत्री परिवार शांतिकुंज, हरिद्वार के संयुक्त तत्वाधान से 7 दिवसीय कार्यशाला का समापन

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 30 कानपुर विद्यामंदिर महिला महाविद्यालय, स्वरूप नगर कानपुर में समाजशास्त्र विभाग एवं आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी, गायत्री परिवार शांतिकुंज, हरिद्वार के संयुक्त तत्वाधान से एक हफ्ते की कार्यशाला का समापन हुआ।यह कार्यशाला सोमवार दिनांक 25.08.2025 से प्रारंभ हुई थी।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती को नमन करके किया गया। अतिथियों का स्वागत, प्राचार्या प्रो० पूनम विज द्वारा मोमेंटो भेंट देकर किया गया।प्राचार्या जी ने अपने उद्बोधन में इस विशिष्ट कार्यशाला से लाभान्वित छात्राओं को इसे शत प्रतिशत अपने जीवन और आचरण में उतारने के लिए प्रेरित किया और कहा कि यदि आप इसे अपने जीवन में उतारेंगी तो आप 100% एक अच्छी इंसान तो बनेंगी साथ ही जीवन के हर क्षेत्र में सफलता भी अर्जित करेंगी। आप इस देश का भविष्य है अतः आपके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ होने से ही हमारे देश की स्वस्थ भावी और संस्कारवान पीढ़ी का सृजन संभव है। आज आवश्यकता है कि भटकी हुई युवा पीढ़ी जागृत हो तभी भारत का बेहतर कल संभव है। मैं इस सफल आयोजन के लिए समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ पूर्णिमा शुक्ला को बधाई देती हूं कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय *आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी* पर इतने अच्छे और संपूर्ण स्वास्थ्य की जानकारी से पूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया और इसे एक रेगुलर कोर्स के रूप में छात्राओं के लिए आयोजित कर रहीं हैं ताकि हमारी छात्राओं के व्यक्तित्व का चहुंमुखी विकास हो।

 कार्यशाला के अंतिम दिन पूरे सप्ताह के हर सेशन की रिपोर्ट छात्राओं द्वारा पढ़ी गई और साथ ही छात्राओं ने अपने अनुभव को भी साझा किया। छात्राओं ने बताया कि हमें पहले कभी भी इस विषय में जानकारी नहीं थी कि हम पूर्ण रूप से कैसे स्वस्थ रह सकते हैं। छात्रा शिफा और कहकशा ने बताया कि हमने इस कार्यशाला में प्रतिभाग लेकर जाना कि हम अच्छा और स्वस्थ जीवन जीने की मूलभूत रूप से हमें क्या करने की आवश्यकता है।इस तरह की जानकारी तो हर छात्र, छात्रा को अनिवार्य रूप से मिलनी चाहिए। छात्रा महक और प्रिया ने कहा कि अभी तक हम सिर्फ शारीरिक स्वस्थ होने को ही पूर्ण स्वास्थ्य मानते थे लेकिन हमने इस कार्यशाला में जाना कि मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ होने पर ही कोई व्यक्ति पूर्ण स्वस्थ होगा। छात्रा बेबो और तनीषा ने कहा कि हमें जागरूक होने के साथ साथ जागृत भी होना है ताकि हम एक बेहतर कल और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें।

 इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ० संगीता सारस्वत, सीनियर गाइनेकोलॉजिस्ट एवं आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट,कन्वीनर द्वारा छात्राओं को गहनता से उनके वातावरण, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, दिनचर्या इत्यादि का उनके जीवन और आने वाले भविष्य पर प्रभाव को वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि आज का युवा अपनी शक्तियों का दुरूपयोग कर रहा है। संस्कारों की जागृति से ही नई पीढ़ी का भविष्य संरक्षित और संवर्धित हो सकता है। 

विशिष्ट वक्ता डॉ नीरू तिवारी जी ने छात्राओं की एक आदर्श दिनचर्या और पोषण के विषय में बताया और कहा कि ईश्वर ने अपने बाद यदि किसी को सृजन की शक्ति दी है तो केवल स्त्री को । अतः हमें अपने आत्मबल और शक्तियों को पहचान कर सही दिशा में आगे बढ़ना है और एक नई ऊर्जा के साथ भावी पीढ़ी का निर्माण करना है। कार्यशाला की वक्ता डॉ० शिखा अग्रवाल ने छात्राओं को जीवन में योग की महत्ता को बताया कि किस समय, कब और कैसे योग को करना चाहिए जिससे कि हमारा शरीर और मस्तिष्क दोनों ही स्वस्थ रहें। 

कार्यक्रम के अंतिम चरण में छात्राओं का पूरी कार्यशाला में पढ़ाए गए पाठयक्रम पर आधारित एक परीक्षा का आयोजन भी किया गया जिसमें प्राप्त अंकों के आधार पर छात्राओं को गायत्री परिवार शांतिकुंज की ओर से प्रमाणपत्र भी दिए जाएंगे। इस कार्यशाला में 70 से अधिक छात्राओं ने प्रतिभाग लिया । कार्यक्रम का समापन डॉ० रितु नारंग, असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा धन्यवाद ज्ञापन देकर किया गया। कार्यक्रम का कुशल संयोजन एवं संचालन समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ० पूर्णिमा शुक्ला द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी की कानपुर डिस्ट्रिक टीम एवं महाविद्यालय की सभी शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।

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