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सजेती के रामपुर में चकमार्ग पर अवैध कब्जा हटाया, बुलडोज़र चला

दैनिक भारतीय स्वरूप (जिला सूचना कार्यालय) थाना समाधान दिवस में प्राप्त प्रकरण के क्रम में शनिवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रामपुर ग्राम, थाना सजेती, तहसील घाटमपुर स्थित चकमार्ग से अवैध कब्जा हटाया। गाटा संख्या 333, क्षेत्रफल 1460 वर्गमीटर पर होटल मालिक अशोक सिंह द्वारा बनाए गए ज़ीने और हमीरपुर निवासी बिल्डर फैजान अली आदि द्वारा खड़ी की गई दीवार को बुलडोज़र से ध्वस्त कर मार्ग को मुक्त कराया गया।

उपजिलाधिकारी घाटमपुर की मौजूदगी में राजस्व और पुलिस टीम ने पूरी कार्यवाही अंजाम दी। कब्जा मुक्त कराए गए रास्ते को ग्राम प्रधान को सुपुर्दगी में दे दिया गया है, ताकि ग्रामीणों के लिए रास्ते का निर्माण कराया जा सके।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कब्जेदारों को राजस्व निरीक्षक और लेखपाल द्वारा कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन न मानने पर कठोर कार्रवाई करनी पड़ी। कार्रवाई के दौरान शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपजिलाधिकारी और थाना प्रभारी स्वयं मौके पर मौजूद रहे।

ग्रामीणों ने रास्ता खुलने पर राहत की सांस लेते हुए प्रशासन का आभार जताया। उपजिलाधिकारी घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह ने कहा कि सार्वजनिक मार्ग आमजन और किसानों के आवागमन का साधन होता है। इस पर किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति या बिल्डर द्वारा कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अवैध कब्जों के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर महिला सशक्तिकरण और कल्याण को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर की मिशन शक्ति इकाई ने 13 सितंबर 2025 को मेरी आवाज, मेरी पसंद विषय पर मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं पर केंद्रित था और प्रॉक्टर एंड गैबल द्वारा उदारतापूर्वक प्रायोजित किया गया था। इसमें संकाय सदस्य, स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रही। मिशन शक्ति की प्रभारी प्रो मीत कमल ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया और मासिक धर्म स्वास्थ्य पर खुली बातचीत के महत्व पर जोर देकर सत्र की शुरुआत की उन्होंने कहा कि ये विषय हमेशा से कलंक और चुप्पी से घिरा रहा है।

प्राचार्य प्रो० विनय जॉन सेबेस्टियन ने इस पहल की सराहना की तथा इसे बाधाओं को तोडने वाला और महिलाओं को उपलब्ध स्वास्थ्य विकल्पों के बारे में जागरूक करने की दिशा में एक सार्थक कदम बताया। उप प्राचार्य प्रो. श्वेता चंद ने इस बात पर जोर दिया कि मासिक धर्म स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत स्वच्छता का मामला नहीं है, बल्कि यह सम्मान, समानता और अधिकारों का भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अतिधि वक्ताओं सूर्याश सक्सेना और अंजलि शुक्ला का संबोधन था, जिन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता के महत्व, उपेक्षा से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों और महिलाओं के प्रति भेदभाव को बढ़ावा देने वाले मिथकों को दूर करने की तत्काल आवश्यकता पर खुलकर बात की। इस सत्र में तथ्यों, व्यक्तिगत अंतर्दृष्टि और प्रेरक मार्गदर्शन का समावेश था, जिसने छात्राओं को गहराई से प्रभावित किया।कार्यक्रम का संचालन छात्रा स्वयंसेवकों ओजस्विनी, कांची, सुंदरम, अनमता, प्राची, वृंदा, वंशिका और आदर्श ने सुचारू रूप से किया। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. और एक स्वस्थ और अधिक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए जागरूकता, शिक्षा और स्वच्छता तक पहुँच आवश्यक है। सभी उपस्थित लोगों को सैनिटरी नैपकिन के निःशुल्क पैकेट वितरित किए गए। मिशन शक्ति मानसिकता बदलने और युवा महिलाओं को अपनी भलाई की जिम्मेदारी लेने के लिए सशक्त बनाने में योगदान देता है।

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पटना में एपीडा के पहले कार्यालय का उद्घाटन किया;  यह बिहार की कृषि-निर्यात यात्रा में एक नया अध्याय है

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बिहार को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात के केंद्र में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 11 सितंबर, 2025 को पटना, बिहार में आयोजित बिहार आइडिया फेस्टिवल में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी और उद्योग मंत्री श्री नीतीश मिश्रा के साथ-साथ बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, एपीडा नेतृत्व, उद्यमी, एफपीओ और किसान समूह भी उपस्थित थे।

बिहार का समृद्ध कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र शाही लीची, जर्दालू आम, मिथिला मखाना और मगही पान से लेकर मुख्य अनाज और फलों व सब्जियों के विविध मिश्रण तक, उच्च-संभावना वाले कृषि उत्पादों की एक विविध श्रृंखला के अनुकूल है। इनमें से कई उत्पादों को मिले भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग उनकी वैश्विक अपील को बढ़ाते हैं, जिससे बिहार को अंतर्राष्ट्रीय कृषि-व्यापार क्षेत्र में एक अद्वितीय बढ़त मिलती है।

एपीडा के पटना कार्यालय की स्थापना बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक नए युग का सूत्रपात करती है, जिससे किसानों, उत्पादकों और निर्यातकों को पंजीकरण, परामर्श सेवाएं, बाज़ार सूचना, प्रमाणन में सहायता, निर्यात प्रक्रियाओं में सुगमता, बाज़ार सुगमता, बुनियादी ढांचे के विकास और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के अवसरों तक सीधी पहुंच प्राप्त होगी। अब तक, बिहार के निर्यातक वाराणसी स्थित एपीडा के क्षेत्रीय कार्यालय पर निर्भर थे। नया कार्यालय एफपीओ, एफपीसी और निर्यातकों को सीधी सहायता प्रदान करेगा, जिससे निर्यातकों के प्रश्नों के समाधान में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और राज्य-स्तरीय संस्थानों के साथ समन्वय दृढ़ होगा।

इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री पीयूष गोयल ने कहा कि पटना में एपीडा क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं है अपितु यह बिहार के किसानों को वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करने का एक मिशन है। हमारे किसान, उद्यमी और निर्यातक दुनिया को भोजन उपलब्ध कराने की क्षमता रखते हैं। उचित सहयोग से, बिहार उच्च मूल्य वाले, टिकाऊ कृषि-निर्यात में अग्रणी बनकर उभरेगा।

इसी भावना को दोहराते हुए, उप-मुख्यमंत्री ने केंद्र की पहल की सराहना की और किसान-आधारित विकास और निर्यात की तैयारी के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने हेतु बिहार सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। क्षमता निर्माण, बाज़ार संपर्क और गुणवत्ता संवर्धन के माध्यम से एपीडा के निरंतर समर्थन ने इन निर्यातों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उद्घाटन समारोह को ऐतिहासिक बनाते हुए, जीआई-टैग युक्त मिथिला मखाना की 7 मीट्रिक टन की खेप को न्यूज़ीलैंड, कनाडा और अमेरिका के लिए रवाना किया गया। यह निर्यात बिहार के दरभंगा की नेहाशी की संस्थापक, एक महिला उद्यमी सुश्री नेहा आर्या द्वारा किया गया और यह समावेशी और लैंगिक-संवेदनशील व्यापार संवर्धन के प्रति एपीडा की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

सुश्री आर्या की कहानी बिहार में महिलाओं के नेतृत्व वाली उद्यमिता के लिए एक मजबूत प्रोत्साहन का शानदार उदाहरण है, साथ ही यह बिहार के उच्च मूल्य, जीआई-टैग वाले उत्पादों के लिए बढ़ती वैश्विक मांग को उजागर करती है और सहकारी संघवाद का एक शानदार उदाहरण प्रस्तुत करती है, जो एपीडा और बिहार सरकार के माध्यम से वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई संस्थागत सहायता के माध्यम से बिहार के लोगों के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह पहल महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को सशक्त बनाकर और ग्रामीण उत्पादकों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करके समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए एपीडा के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। यह शिपमेंट बिहार के कृषि क्षेत्र में महिला उद्यमियों की बढ़ती निर्यात तत्परता का प्रमाण है।

निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप, बिहार ने निर्यात में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। जीआई-टैग वाला मिथिला मखाना वर्ष 2024-25 में संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका को निर्यात किया जा चुका है। वर्ष 2023 में, जीआई-टैग वाला जर्दालु आम भी अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में पहुंच चुका है। तिलकुट और तिल के लड्डू जैसी पारंपरिक मिठाइयां और शाही लीची जैसे फल अब वैश्विक खरीदार पा रहे हैं और यह बिहार की स्वदेशी उपज के अनूठे मूल्य को प्रदर्शित करते हैं।

पिछले तीन वर्षों में, एपीडा ने बिहार में राज्य के कृषि-निर्यात इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक व्यापक जुड़ाव रणनीति लागू की है। इसमें किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), निर्यातकों और अन्य हितधारकों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और अंतर्राष्ट्रीय अनुपालन प्रोटोकॉल पर प्रशिक्षित करने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम- भौतिक और आभासी दोनों- शामिल हैं। व्यावहारिक प्रदर्शन प्रदान करने के लिए, एपीडा ने एफपीओ और हितधारकों के लिए यूएई जैसे गंतव्यों और महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में उत्कृष्टता के घरेलू केंद्रों जैसे कि आईआईवीआर, आईआरआरआई और सीआईएसएच लखनऊ जैसे अंतर्राष्ट्रीय दौरों की सुविधा प्रदान की, जिससे प्रतिभागियों को फसल कटाई के बाद की प्रबंधन, गुणवत्ता आश्वासन और निर्यात दस्तावेजीकरण में सर्वोत्तम प्रथाओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिली। मुजफ्फरपुर में जीआई-टैग वाली शाही लीची के लिए दीर्घकालीन पैकेजिंग को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया इसके अलावा, बिहार के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, एपीडा और बिहार सरकार द्वारा संयुक्त रूप से 19-20 मई, 2025 को पटना के ज्ञान भवन में एक अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता बैठक (आईबीएसएम) का आयोजन किया गया, जिसमें 22 देशों के 70 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के साथ-साथ 40 से अधिक प्रमुख घरेलू निर्यातकों, पांच कृषि व्यापार संघों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

पटना में एपीडा कार्यालय का उद्घाटन और अंतर्राष्ट्रीय मखाना शिपमेंट का सफल शुभारंभ, बिहार के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। पटना स्थित एपीडा कार्यालय केवल एक नए भवन से कहीं अधिक है; यह संपूर्ण बिहार के हजारों किसानों, कृषि उद्यमियों, महिला-प्रधान उद्यमों, एफपीओ, एफपीसी, स्टार्ट-अप्स और नवोदित युवा निर्यातकों के लिए समृद्धि का द्वार है। यह संस्थागत मजबूती, बाजार पहुंच और तकनीकी मार्गदर्शन को सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचाता है। एपीडा और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के निरंतर सहयोग से, बिहार उच्च मूल्य, दीर्घकालिक और समावेशी कृषि व्यापार के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार है।

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दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने दुबई में आईआईएम अहमदाबाद के पहले विदेशी परिसर का उद्घाटन किया

दुबई के क्राउन प्रिंस, उप-प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री, महामहिम शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने आज दुबई में भारत के प्रमुख बिज़नेस स्कूल, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (आईआईएमए) के पहले विदेशी परिसर का उद्घाटन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान और संयुक्त अरब अमीरात के कार्यवाहक उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री डॉ. अब्दुल रहमान अब्दुल मन्नान अल अवार भी इस समारोह में उपस्थित थे।

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इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री प्रधान ने कहा कि दुबई के क्राउन प्रिंस, शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम द्वारा आईआईएम अहमदाबाद दुबई परिसर का उद्घाटन किया जाना हमारे लिए बेहद सम्मान की बात है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप भारतीय शिक्षा के वैश्वीकरण की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आईआईएम अहमदाबाद दुबई परिसर भारत की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा को दुनिया तक पहुंचाएगा। दुबई ने आज आईआईएम अहमदाबाद अंतर्राष्ट्रीय परिसर की मेजबानी करके ‘भारतीय भावना, वैश्विक दृष्टिकोण’ के सिद्धांत को साकार करने के लिए एक आदर्श मंच प्रदान किया है। उन्होंने भारत-यूएई ज्ञान सहयोग में एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ने के लिए शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में भारत के राजदूत श्री संजय सुधीर, भारत के महावाणिज्यदूत श्री सतीश सिवन, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष श्री पंकज पटेल, आईआईएमए के निदेशक प्रोफेसर भरत भास्कर और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। क्राउन प्रिंस शेख हमदान के साथ संयुक्त अरब अमीरात के गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे, जिनमें कैबिनेट मामले मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल्ला अल गर्गावी; अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम बिन्त इब्राहिम अल हाशिमी; शिक्षा मंत्री सारा बिन्त यूसुफ अल अमीरी; अर्थव्यवस्था और पर्यटन विभाग की महानिदेशक हेलाल सईद अल मारी और ज्ञान एवं मानव विकास प्राधिकरण की महानिदेशक आयशा अब्दुल्ला मीरान शामिल थे।

श्री धर्मेन्‍द्र प्रधान ने संयुक्त अरब अमीरात के कार्यवाहक उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री, डॉ. अब्दुलरहमान अब्दुलमन्नान अल अवार के साथ भी बैठक की। दोनों पक्षों ने उच्च शिक्षा में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की और ज्ञान के संबंधों को और परिपुष्‍ट करने के साथ-साथ ज्ञान, नवाचार और अनुसंधान को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख घटक बनाने पर सहमति व्यक्त की। महत्वपूर्ण और उभरते क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान, क्षमता निर्माण और द्विपक्षीय सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई।

श्री प्रधान ने दुबई में भारतीय शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए योगदान, विशेष रूप से पारस्परिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक संपर्क को बढ़ावा देने और साथ ही संयुक्त अरब अमीरात में और अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले भारतीय संस्थानों की स्थापना के लिए दिए गए समर्थन की सराहना के लिए डॉ. अब्दुलरहमान अल अवार का धन्यवाद किया। मंत्री महोदय ने कहा कि भारत प्रतिभाओं का एक वैश्विक केंद्र है और संयुक्त अरब अमीरात एक वैश्विक आर्थिक केंद्र है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात दोनों ही लोगों के बीच संपर्क को मज़बूत करने और अपने सदियों पुराने और मज़बूत संबंधों को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

बाद में, धर्मेन्‍द्र प्रधान ने दुबई स्थित मणिपाल विश्वविद्यालय परिसर का भी दौरा किया, जहां उन्होंने सिम्बायोसिस, बिट्स पिलानी, एमआईटी, एमिटी आदि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के प्राचार्यों के साथ एक गोलमेज चर्चा की। श्री प्रधान ने यूएई के शैक्षणिक दृष्टिकोण और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्‍होंने शोध मूल्य श्रृंखला को शोध पत्रों के प्रकाशन से आगे बढ़ाकर उत्पादीकरण और विपणन की ओर ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता के मानचित्र पर ब्रांड इंडिया को मजबूत बनाने पर भी सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

श्री प्रधान ने संयुक्त अरब अमीरात में 109 भारतीय पाठ्यक्रम वाले स्कूलों के प्रधानाचार्यों से भी वार्तालाप किया। अन्य जीसीसी देशों और सभी वैश्विक सीबीएसई स्कूलों के सीबीएसई स्कूलों के प्रधानाचार्य वर्चुअल माध्यम से इसमें शामिल हुए। इस अवसर पर, श्री प्रधान ने जीसीसी देशों के सीबीएसई स्कूलों में 12 अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने की घोषणा की, ताकि छात्रों में व्यावहारिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) परियोजनाओं के माध्यम से वैज्ञानिक जिज्ञासा और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा सके।

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दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में आयोजित एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम में, श्री प्रधान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए “एक पेड़ मां के नाम 2.0” अभियान के अंतर्गत, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रीय वृक्ष- ग़फ़ का एक पौधा लगाया। श्री प्रधान ने कहा कि यह संयुक्त अरब अमीरात में स्थिरता और शांति का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक है। वाणिज्य दूतावास में स्थित ग़फ़ वृक्ष भारत-यूएई मैत्री का एक सदाबहार प्रमाण भी रहेगा।

इस यात्रा ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थायी मित्रता की पुष्टि की, जो पारस्परिक सम्मान, साझा आकांक्षाओं और शिक्षा के माध्यम से भावी पीढ़ियों को सशक्त बनाने के दृष्टिकोण पर आधारित है। श्री प्रधान ने सभी हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक गतिशील और समावेशी शैक्षिक पारिस्थितिकी व्‍यवस्‍था को आकार देने में निरंतर सहयोग की आशा व्यक्त की।

 

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राष्ट्रपति ने सी. पी. राधाकृष्णन को भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में पद की शपथ दिलाई

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (12 सितंबर, 2025) राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सी. पी. राधाकृष्णन को भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में पद की शपथ दिलाई।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (12 सितंबर, 2025) राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सी. पी. राधाकृष्णन को भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में पद की शपथ दिलाई।

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भारत-यूरोपीय संघ एक संतुलित मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप प्रदान करने के लिए ईमानदारी एवं प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) के 65वें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और यूरोपीय संघ एक व्यापक एवं संतुलित मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप प्रदान करने के लिए गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं जिससे दोनों पक्षों के व्यवसायों एवं उपभोक्ताओं को लाभ प्राप्त होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस प्रकार का समझौता एकतरफा नहीं हो सकता है क्योंकि प्रत्येक वार्ता को निष्पक्ष एवं संतुलन बनाने के लिए कुछ हद तक लेन-देन शामिल किया जाता है।

मंत्री ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि एक आदर्श समझौते को प्रगति का दुश्मन नहीं बनने दिया जाए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वार्ता बहुत सकारात्म दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस प्रक्रिया के माध्यम से उजागर हो रही संभावनाओं के प्रति आशा व्यक्त किया जो विशाल है और व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं गहन आर्थिक भागेदारी का अवसर खोलेगी।

श्री गोयल ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि ऑटोमोटिव घटक क्षेत्र जैसे साहसिक एवं दूरदर्शी उद्योग, जो पहले की एफटीए वार्ताओं से लगातार मजबूत हुआ है, को भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी के अंतर्गत तैयार किए जा रहे प्रावधान आकर्षक एवं संभावनाओं से भरपूर लगेंगे।

उन्होंने आशा व्यक्त किया कि ऑटोमोटिव घटक क्षेत्र, जिसने हमेशा एफटीए वार्ताओं को मजबूती प्रदान की है, को भारत और यूरोपीय संघ के बीच हो रही व्यवस्थाएं आकर्षक एवं रोमांचक लगेंगी तथा उनमें व्यवसायों के विकास, सहयोग, नवाचार तथा अनुसंधान एवं विकास में शामिल होने की भरपूर संभावनाएं होंगी। मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र ने भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता का समर्थन करके एवं वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत होकर लगातार लचीलापन एवं दूरदृष्टि दिखाई है।

श्री गोयल ने कहा कि एफटीए भारतीय निर्माताओं के लिए अपने यूरोपीय समकक्षों और विश्व के अन्य क्षेत्रों की कंपनियों के साथ साझेदारी करने का नया मार्ग खोलेगा, जिससे संयुक्त उद्यमों, प्रौद्योगिकी साझेदारी और सहयोगात्मक नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि जहां तक लागत प्रतिस्पर्धात्मकता का सावाल है तो भारत महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है चाहे वह डिज़ाइन, विकास या अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र हों और देश में कुशल प्रतिभा भंडार के साथ यह भारत को वैश्विक ऑटोमोटिव कंपनियों के लिए एक आकर्षक केंद्र बना देगा। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार की साझेदारियां लागत में कमी लाने, उत्पादकता बढ़ाने, भारतीय युवाओं के लिए रोज़गार उत्पन्न करने और देश को उच्च-गुणवत्ता वाले ऑटोमोटिव घटक निर्माण का एक अग्रणी केंद्र बनाने में मदद करेंगी।

इस सत्र को यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा, अंतर-संस्थागत संबंध एवं पारदर्शिता आयुक्त, महामहिम मारोस शेफोविच ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ अभूतपूर्व गति से एक अभूतपूर्व मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इस वर्तमान चर्चा को दोनों भागीदारों के बीच अब तक की सबसे गहन एवं रचनात्मक चर्चाओं में से एक कहा। उन्होंने कहा कि यद्यपि मुक्त व्यापार समझौते पर पहले भी बातचीत के प्रयास किए गए लेकिन इससे पहले यह प्रक्रिया इतनी गंभीर, आपसी विश्वास और साझा महत्वाकांक्षा के स्तर तक कभी नहीं पहुंची थी। आयुक्त ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा पूर्व में व्यक्त की गई प्रतिबद्धता के अनुरूप इस वर्ष के अंत तक बातचीत को अंतिम रूप देने के लिए अधिकतम प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दोनों पक्ष एक ऐसा आर्थिक रूप से सार्थक पैकेज बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो उत्पादकों, निर्यातकों एवं उपभोक्ताओं के हितों को समान रूप से संतुलित करे। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य एक ऐसे वास्तविक लाभप्रद समझौते पर पहुंचना है जो न केवल वस्तुओं एवं सेवाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाए बल्कि दोनों पक्षों के बीच निवेश, नवाचार, सतत प्रथाओं और गहन सहयोग को भी बढ़ावा दे। उन्होंने कहा कि भारत तेज गति से वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख इंजन बन रहा है और भारत के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी यूरोपीय संघ के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी,  ठीक उसी तरह जैसे यूरोपीय प्रौद्योगिकी एवं पैमाने से भारत के विकास को लाभ प्राप्त होगा।

केंद्रीय मंत्री गोयल ने आगे कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता रणनीतिक तत्वों से युक्त एक व्यापक आर्थिक साझेदारी होगी। उन्होंने कहा कि भारत को यूरोप की तकनीक एवं नवाचार से लाभ होगा जबकि यूरोपीय संघ को भारत के विकास, पैमाने एवं लचीलेपन से लाभ होगा। उन्होंने भारत में वाहनों तक लोगों की पहुंच को वर्तमान में प्रति हज़ार 34 कारों से बढ़ाकर उल्लेखनीय रूप से उच्च स्तर तक ले जाने की भारत की आकांक्षाओं का भी उल्लेख किया, जिससे ऑटो घटक उद्योग के लिए वैश्विक स्तर पर विस्तार के अवसर उत्पन्न होंगे।

मंत्री ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑटोमोबाइल उद्योग को मेक इन इंडिया कार्यक्रम का अग्रदूत कहा है। भारत में मेक इन इंडिया के 10 वर्ष पूरे होने पर, मंत्री ने कहा कि यह उच्च लक्ष्य निर्धारित करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, लचीलापन बनाने तथा रोजगार, निर्यात एवं उच्च-गुणवत्ता वाले विनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने का एक उपयुक्त समय है।

श्री गोयल ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के लचीलेपन की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश ने 100 से ज़्यादा देशों को दवाइयां और टीके, जिनमें से कई मुफ़्त थे, उपलब्ध कराने से लेकर बिना किसी मुनाफ़ा के आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर सभी वैश्विक प्रतिबद्धता को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि इससे भारत को वैश्विक रूप से विश्वास प्राप्त हुआ है और आज भारत को एक विश्वसनीय एवं भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखा जाता है।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हाल ही में किए गए जीएसटी सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना एक ऐतिहासिक सुधार है और ऑटो उद्योग के लिए एक बड़ी राहत है। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है जिससे कृषि क्षेत्र को बहुत बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि इस सुधार के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की जानी चाहिए क्योंकि इससे स्पेयर पार्ट्स और भी सस्ते हो जाएंगे, औपचारिकता मज़बूत होगी, रोज़गार के अवसर उत्पन्न होंगे और मूल्य श्रृंखला में मांग बढ़ेगी। उन्होंने बल देकर कहा कि इसका पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए।

मंत्री ने कहा कि जीएसटी सुधारों का यह दौर आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा सुधार है और इससे हर भारतीय को लाभ मिलेगा। उन्होंने बल देकर कहा कि 1.4 अरब लोगों में से एक भी नागरिक ऐसा नहीं होगा जिसे इन सुधारों से लाभ नहीं मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री गोयल ने रतन टाटा को उद्धृत करते हुए अपनी बात समाप्त की: “लोग आप पर जो पत्थर फेंकते हैं, उन्हें स्वीकार करें और एक स्मारक बनाएं।” उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को एवं राष्ट्र को चुनौतियों से विचलित नहीं होना चाहिए तथा आत्मविश्वास, लचीलेपन एवं सामूहिक प्रयास से भारत निरंतर मजबूत होता जाएगा।

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विश्व खाद्य भारत 2025, वैश्विक मेगा खाद्य आयोजन के चौथे संस्करण का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया जाएगा

वैश्विक मेगा फ़ूड इवेंट, वर्ल्ड फ़ूड इंडिया (WFI) 2025 के चौथे संस्करण का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 25 सितंबर 2025 को शाम 6:00 बजे भारत मंडपम, नई दिल्ली में करेंगे। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान भी उपस्थित रहेंगे।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई), भारत सरकार द्वारा आयोजित, विश्व खाद्य भारत 2025, 25-28 सितंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचानते हुए, इस प्रमुख वैश्विक आयोजन का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण मूल्य श्रृंखला में सहयोग, नवाचार और निवेश को बढ़ावा देकर भारत को “विश्व के खाद्य केंद्र” के रूप में स्थापित करना है।

अपने पिछले संस्करणों की उल्लेखनीय सफलता के आधार पर वर्ल्ड फ़ूड इंडिया का चौथा संस्करण एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करेगा, जो नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, उद्यमियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों को भारत के तेज़ी से विकसित होते खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र में अवसरों को जोड़ने, सहयोग करने और तलाशने के लिए एक साथ लाएगा। इसमें बड़ी संख्या में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों के भाग लेने की उम्मीद है, जो इसे वैश्विक खाद्य पारिस्थितिकी तंत्र के सबसे व्यापक प्रदर्शनों में से एक बना देगा।

इस वर्ष, न्यूजीलैंड और सऊदी अरब को भागीदार देश के रूप में नामित किया गया है, जबकि जापान, यूएई, वियतनाम और रूस फोकस देशों के रूप में भाग लेंगे। उनकी भागीदारी द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करेगी, ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाएगी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा करेगी।

इसमें वैश्विक विचारकों, नीति निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों के साथ उच्च-स्तरीय ज्ञान सत्रों और पैनल चर्चाओं की एक श्रृंखला होगी। खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, मशीनरी, कोल्ड चेन और संबद्ध उद्योगों में नवीनतम नवाचारों, प्रौद्योगिकियों और समाधानों को उजागर करने वाली क्षेत्रीय प्रदर्शनियाँ, रणनीतिक साझेदारी और सहयोग बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए B2B और B2G नेटवर्किंग के अवसर। पाककला के अनुभव और शेफ प्रतियोगिताएं भारत की समृद्ध खाद्य विविधता और स्वस्थ, टिकाऊ और भविष्य के खाद्य पदार्थों में वैश्विक रुझानों को प्रदर्शित करेंगी।

दो प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन, एफएसएसएआई द्वारा तीसरा वैश्विक खाद्य नियामक शिखर सम्मेलन, जो वैश्विक नियामकों को खाद्य सुरक्षा मानकों के सामंजस्य पर चर्चा करने और नियामक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करेगा। सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईएआई) द्वारा 24वां इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो (आईआईएसएस) भारत की बढ़ती समुद्री खाद्य निर्यात क्षमता और वैश्विक बाजार संबंधों पर ध्यान केंद्रित करते हुए वर्ल्ड फूड इंडिया के हिस्से के रूप में समानांतर कार्यक्रमों के रूप में आयोजित किया जा रहा है।

इस मेगा इवेंट की तैयारी में, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, श्री चिराग पासवान ने 11 सितंबर 2025 को भारत मंडपम का दौरा किया और व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए स्थल लेआउट, लॉजिस्टिक्स, स्टॉल प्लानिंग, सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल का आकलन किया।

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कृषि क्षेत्र में सरकार का अपनी तरह का पहला एआई-आधारित मौसम पूर्वानुमान कार्यक्रम, 3.8 करोड़ किसानों तक पहुंच रहा है

देश के करोड़ों किसानों की आय और आजीविका का मुख्य स्रोत खरीफ की खेती है लेकिन इसके लिए किसान वर्षा पर निर्भर हैं। मानसून के बारे में यदि किसानों को पहले से ही मौसम संबंधी पूर्व जानकारी मिल जाए तो उन्हें यह निर्णय लेने काफी मदद मिल सकती है कि कौन सी फसल, कितनी मात्रा में और कब बोनी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा संचालित मौसम पूर्वानुमान में क्रांति के कारण अब यह संभव हो सका है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (एमओएएफडब्ल्यू) किसानों के लिए एआई की शक्ति का उपयोग कर रहा है। एक अनूठी सार्वजनिक पहल के तहत, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इस वर्ष 13 राज्यों के लगभग 3.8 करोड़ किसानों को एसएमएस (एम-किसान) के माध्यम से एआई-आधारित मानसून पूर्वानुमान भेजे । यह पूर्वानुमान बारिश से चार सप्ताह पहले तक कहीं उपलब्ध थे। एआई-आधारित मॉडलों ने किसानों की ज़रूरतों के अनुसार विशेष रूप से पूर्वानुमान तैयार करना संभव बना दिया है, जिससे किसानों को खरीफ फसल संबंधी निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण मिला। यह अब तक एआई मौसम पूर्वानुमानों का अपनी तरह का पहला लक्षित प्रसार है, जिसने मंत्रालय को किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए एआई मौसम पूर्वानुमान लागू करने में विश्व-अग्रणी के रूप में स्थापित किया है।

अपर सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मेहरदा और संयुक्त सचिव श्री संजय कुमार अग्रवाल ने कृषि भवन में 8 सितंबर को आयोजित एक कार्यक्रम समीक्षा बैठक में, नोबेल पुरस्कार विजेता और शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइकल क्रेमर के साथ मंत्रालय की इस अभूतपूर्व पहल और कार्यक्रम के विस्तार पर चर्चा की। डॉ. मेहरदा ने कहा, ” यह कार्यक्रम निरंतर वर्षा की भविष्यवाणी करने के लिए एआई-आधारित मौसम पूर्वानुमान में क्रांति का उपयोग करता है, जिससे किसानों को अधिक आत्मविश्वास के साथ कृषि गतिविधियों की योजना बनाने और जोखिमों का प्रबंधन करने में मदद मिलती है। हम आने वाले वर्षों में इस प्रयास को और बेहतर बनाने की आशा करते हैं।”

इस वर्ष, मानसून समय से पहले आ गया था, लेकिन उत्तर की ओर बढ़ने में रुकावट आने से 20 दिनों तक बारिश रुकी रही। मंत्रालय ने एआई आधारित पूर्वानुमानों से मानसून की इस रुकावट की सटीक पहचान की। सरकार ने किसानों को हर हफ्ते अद्यतन जानकारी भेजी। श्री अग्रवाल ने कहा, “जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में परिवर्तनशीलता बढ़ रही है, इसलिए पूर्वानुमान किसानों को समय के साथ तारतम्य स्थापित करने में मदद करने का एक उपयोगी साधन हैं।”

मौसम पूर्वानुमान में एआई क्रांति

वर्ष 2022 से, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्रेरित क्रांति ने मौसम पूर्वानुमान के विज्ञान को पूरी तरह बदल दिया है और कई स्थितियों में अधिक सटीक पूर्वानुमान प्रदान किए हैं। इन मॉडलों को उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है और ये भारतीय मानसून जैसी जटिल घटनाओं का हफ्तों पहले पूर्वानुमान लगाने की क्षमता को और बढ़ा रहे हैं। मंत्रालय ने करोड़ों किसानों के हित के लिए इस क्रांति को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा इस्तेमाल किए गए पूर्वानुमान दो ओपन-एक्सेस मॉडलों—गूगल के न्यूरल जीसीएम और ईसीएमडब्ल्यूएफ के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फोरकास्टिंग सिस्टम्स (एआईएफएस)—का मिश्रण थे। कड़े विश्लेषणों में, ये मॉडल किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर मानसून की शुरुआत की भविष्यवाणी करने में अन्य उपलब्ध पूर्वानुमानों से स्पष्ट रूप से बेहतर साबित हुए।

नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने कहा कि मौसम संबंधी जानकारी प्रदान करते समय किसानों की ज़रूरतों पर ध्यान देना ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “यह पहल बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसानों की ज़रूरतों पर केंद्रित है और आसान भाषा में मौसम संबंधी पूर्वानुमान प्रदान करके उन्हें कृषि संबंधी निर्णय लेने में मदद करती है।”

डेवलपमेंट इनोवेशन लैब – इंडिया और प्रिसिजन डेवलपमेंट की टीमों के साथ काम करते हुए मंत्रालय ने किसानों के साथ प्रत्यक्ष रूप से संवाद स्थापित किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संदेश उनकी समझ में आ गए हैं और उन्हें अमल में लाया जा सकता है।

नोबेल पुरस्कार विजेता माइकल क्रेमर ने कहा, “यह कृषि मंत्रालय की एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे लाखों किसानों को लाभ होगा और भारत किसानों की जरूरतों को पूरा करने में अग्रणी स्थान पर रहेगा।” उन्होंने कहा, “मंत्रालय का कार्यक्रम इस बात का एक मॉडल है कि एआई के युग में लोगों को कैसे प्राथमिकता दी जाए।”

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आज के बदलते समय में रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए उद्योग आधारित अनुसंधान एवं विकास संस्थान-अकादमिक सहयोग काफी महत्वपूर्ण है: रक्षा सचिव

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आज के लगातार परिवर्तित होते समय में सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक एवं निजी उद्योग, डीआरडीओ जैसे अनुसंधान संस्थानों और शिक्षाविदों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है। रक्षा सचिव 12 सितंबर, 2025 को महाराष्ट्र के पुणे में दक्षिणी कमान द्वारा आयोजित ‘प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का तालमेल’ विषय पर उद्घाटन सत्र स्ट्राइड 2025 सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रौद्योगिकी व्यवधान न केवल युद्ध की प्रकृति को बदल रहा है, बल्कि रक्षा उद्योग के व्यवसाय को भी परिवर्तित कर रहा है, उन्होंने सभी हितधारकों से नवीनतम तकनीकी रुझानों से अवगत रहने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

रक्षा सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी श्रेष्ठता एवं औद्योगिक सामर्थ्य अक्सर युद्ध के परिणाम को निर्धारित करते हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता व्यक्त है कि रक्षा उद्योग हमारे विनिर्माण क्षेत्र के बाकी हिस्सों के साथ गति से बढ़े ताकि विकसित भारत तथा वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन नवाचार के क्षेत्र में एक विकसित राष्ट्र बनने, भारत की स्टार्टअप संस्कृति को विस्तार देने, हमारे औद्योगिक आधार को व्यापक बनाने, देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी बढ़ाने व रोजगार सृजन तथा प्रौद्योगिकी के दोहरे उपयोग से होने वाले लाभों के व्यापक मुद्दे के लिए महत्वपूर्ण है।

राजेश कुमार सिंह ने बताया कि चल रहे संघर्षों के परिणामस्वरूप दुनिया भर में प्रतिस्पर्धी लोकलुभावनवाद एवं आर्थिक संरक्षणवाद को बढ़ावा मिला है और साथ ही आर्थिक विखंडन, बहुपक्षीय संस्थाओं का पतन तथा राष्ट्रवाद की बढ़ती लहर भी देखी गई है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “हमें अपनी सॉफ्ट पावर को सहयोग देने की आवश्यकता है, क्योंकि हार्ड पावर अधिकाधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।”

रक्षा सचिव ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्यौरा दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश तकनीकी दौड़ में आगे रहे। इन उपायों में रक्षा खरीद मैनुअल 2009 और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में संशोधन करना शामिल है ताकि उन्हें अधिक गतिशील, सक्रिय, कम प्रक्रिया-भारी तथा परिणाम पर अधिक केंद्रित बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र और स्टार्टअप के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करने, जमीनी स्तर पर नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा प्रतिस्पर्धी बोली सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इसका उद्देश्य भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को व्यापक और विविध बनाना है।

राजेश कुमार सिंह ने रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने और इसे आत्मनिर्भर बनाने में निजी उद्योग की भूमिका की सराहना करते हुए उनसे अनुसंधान एवं विकास तथा विनिर्माण क्षमता में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में तब तक उस स्तर का नवाचार और क्षमता नहीं आ सकते हैं, जिसकी सशस्त्र सेनाओं को आवश्यकता है, जब तक कि निजी क्षेत्र में आगे रहने तथा निवेश करने की इच्छाशक्ति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि रक्षा एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें आपको छिटपुट आधार पर ऑर्डर मिलते हैं। राजेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि हमारे पास प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग की ताकत है, तो हम घरेलू तथा निर्यात ऑर्डर के संयोजन के माध्यम से खुद को बनाए रखने में सक्षम होंगे।

दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने अपने संबोधन में रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों के जाने-माने विशेषज्ञ, पूर्व सैनिक, विद्वान, डीआरडीओ, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी उद्योग और शिक्षा जगत के प्रतिनिधि एक साथ आए, जिसका उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास, उत्पादन, रखरखाव तथा नवाचार को शामिल करते हुए एक स्वदेशी डिफेंस इकोसिस्टम के लिए रोडमैप तैयार करना था। सेमिनार में निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर आकर्षक पैनल चर्चाएं हुईं:

  • रिवर्स इंजीनियरिंग और शैक्षणिक अनुसंधान के लिए उद्योग वित्तपोषण के माध्यम से विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को तेजी से आगे बढ़ाना।
  • स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने में डीआरडीओ की भूमिका को सशक्त करना।
  • निजी उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और शिक्षा जगत के बीच बेहतर सहयोग के माध्यम से रक्षा विनिर्माण विकास में तेजी लाना।

इस कार्यक्रम के एक भाग के रूप में एक उपकरण प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें अत्याधुनिक स्वदेशी नवाचारों को प्रदर्शित किया गया और भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं के निर्माण की दिशा में सहयोग तथा साझेदारी को बढ़ावा दिया गया।

सेमिनार में आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने, हितधारकों के बीच तालमेल को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर राष्ट्रीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए दक्षिणी कमान की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

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निफ्ट पटना और एबीएफआरएल ने केंद्रीय वस्‍त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह की उपस्थिति में स्वयं सहायता समूह जीविका की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) पटना ने आज केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह की मौजूदगी में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उद्योग कौशल प्रदान कर बिहार के बढ़ते वस्त्र क्षेत्र में रोजगार के अवसर दिलाना है, ताकि उनके जीवन में सकारात्‍मक बदलाव आए।

गिरिराज सिंह ने साझेदारी के महत्व का उल्‍लेख करते हुए कहा कि निफ्ट पटना ने बेगूसराय में जीविका दीदियों के लिए पहले ही कई सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं, जिससे उनके सिलाई कौशल और आय क्षमता में बढ़ोतरी हुई है। उन्‍होंने कहा कि इस समझौता ज्ञापन से निफ्ट विस्तार केंद्र में प्रशिक्षित जीविका दीदियों को अब एबीएफआरएल कारखाने में नौकरियां मिल पाएगी। शुरू में, आसपास के क्षेत्र की 3.5 लाख महिलाओं को लाभ मिलेगा और भविष्य में, निकटवर्ती जिलों की महिलाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

समझौता ज्ञापन सहयोग के तहत, जीविका दीदियों के नाम से पहचाने जाने वाली स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को निफ्ट पटना में परिधान निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और मशीनरी संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को बेगूसराय जिले में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) की आगामी वस्त्र निर्माण इकाई में रोजगार देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे इन महिलाओं के कौशल विकास से लेकर सुरक्षित आजीविका तक का सुव्यवस्थित मार्ग तैयार होगा।

जीविका दीदियां, बिहार के जीविका कार्यक्रम की रीढ़ हैं, जिसे भारत सरकार और विश्व बैंक के सहयोग से बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (बीआरएलपीएस) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में पिछले कुछ वर्षों में  1.4 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी है, जिससे उन्हें कम राशि के वित्त प्राप्त करने, घरेलू आय में वृद्धि और सामाजिक सशक्तिकरण में मदद मिली है। यह समझौता ज्ञापन जीविका दीदियों को वस्‍त्र और फैशन क्षेत्र में रोज़गार के औपचारिक अवसरों से जोड़ता है, जिससे उनकी भूमिका स्थानीय उद्यमों से विस्‍तारित होकर मुख्यधारा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था तक पहुंचती है।

भारत की फ़ैशन और वस्‍त्र क्षेत्र की अग्रणी खुदरा कंपनियों में से एक, एबीएफआरएल के साथ साझेदारी सुनिश्चित करती है कि उसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले कौशल आधुनिक वस्त्र उत्पादन की मांग पूरा करेगी। निफ्ट की शैक्षणिक विशेषज्ञता को एबीएफआरएल की उद्योग आवश्यकताओं से जोड़ने संबंधी यह पहल शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग का सहक्रियात्मक मॉडल भी प्रस्‍तुत करती है। यह मॉडल पूरे भारत में  विशेषकर महिला समूह और ग्रामीण आजीविका स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ वाले राज्‍यों में भविष्य की साझेदारियों के लिए एक खाका प्रस्‍तुत करेगा।

तत्काल रोज़गार प्रदान करने के अलावा, इस कार्यक्रम से सामाजिक और आर्थिक दूरगामी परिणाम की उम्मीद है। महिलाओं को आजीविका के स्थिर साधन प्रदान कर  यह उन्‍हें अधिक वित्तीय स्वतंत्रता, घरों में निर्णय लेने की बेहतर शक्ति और सम्मान बढा़एगा। साथ ही, बेगूसराय में एबीएफआरएल की विनिर्माण इकाई की स्थापना से बिहार के औद्योगिक विकास में मदद मिलेगी,  जिससे महिलाओं के साथ ही स्थानीय स्‍तर पर कार्यबल के लिए व्‍यापक अवसर उत्‍पन्‍न होंगे।

यह समझौता ज्ञापन एक ऐतिहासिक पहल है जो समावेशी और सतत विकास लक्ष्‍य को पूरा करने के सरकार के दृष्टिकोण, शैक्षणिक विशेषज्ञता और उद्योग नेतृत्व को समेकित करता है। यह दर्शाता है कि कौशल विकास, रोज़गार आश्वासन के साथ जुड़कर, जीवन में कैसे बदलाव ला सकता है। यह विकास का ऐसा मॉडल दे सकता है, जिसे देशभर में मापा और दोहराया जा सके।

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