इटावा, भारतीय स्वरूप संवाददाता। जीवन प्रतिपल कुछ न कुछ सीखने का अवसर लेकर आता है, ज्ञान प्राप्त करने के लिए वृक्ष की तरह झुकना सीखिए। ढूंढनी है मंजिल अगर, तो अपना रहनुमा खुद ही बन,जिन्होंने तलाशा सहारा, वे मझधार में ही रह गए। महोपाध्याय डॉक्टर विद्या कांत तिवारी जी के अभिनंदन समारोह में आ कर में खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं। इनका ज्ञान और सानिध्य जिसे मिल जाए उसका जीवन तो धन्य हो ही जायेगा।
यह उदगार एस एस पी संजय वर्मा ने श्शकर धर्मार्थ नेत्र चिकित्सालय में ख्याति लब्ध शिक्षाविद डॉक्टर विद्या कांत तिवारी को प्रयाग हिंदी साहित्य सम्मेलन में साहित्य महोपाध्याय की उपाधि से विभूषित किए जाने की कृतज्ञता स्वरूप आयोजित सार्वजनिक अभिनंदन समारोह में मुख्य अतिथि पद से व्यक्त किए।
सामाजिक सुधारक, आध्यात्मिक, शैक्षिक प्रोत्साहनकर्ता के रूप में उनके जोशीले अंदाज़ ने समा बांध दिया। धन पिपासु गुरु के त्याग को आवश्यक बताते हुए उनका कहना था कि सामने वाले के मूल्यांकन के बिना सही दिशा और सत्य सत्संग संभव नहीं है। ज्ञान हीन व्यक्ति के कुसंग से संस्कारों और व्यक्तित्व का क्षरण ही होगा जबकि ज्ञानवान का सत्संग आपको निखार देगा।।
उनका कहना था कि नारी के धैर्य, त्याग, तपस्या जैसे सद्गुण अगर पुरुष में आ जाएं तो वह महात्मा बन जायेगा। नारी जगत का सम्मान नई पीढ़ी को सिखाए तो वे चरित्रवान बनेंगे। लड़कियां फेसबुक इंस्टाग्राम के फर्जी फोटो वालों के चक्कर में अपने जीवन को तबाह न करें और अपने परिजनों की सलाह का सम्मान करें तो ही कल्याण और प्रगति संभव है। अपने मां बाप का सम्मान न करने वाली नस्लें धिक्कारे जाने योग्य ही हैं।
उनका कहना था कि यही सत्य है कि जन्म से सभी शुद्र होते हैं,संस्कारों से ब्राह्मण बनना संभव होता है। गुरु जी के पास बैठ कर ज्ञानार्जन ही उपनिषद कहलाता है। ज्ञान की सीमाओं का परिमार्जन, शुद्धिकरण करने से गुणों के आधार पर व्यक्तित्व का निर्माण तभी संभव है जब श्रेष्ठ बनने की उत्कट इच्छाशक्ति हो।
आयोजन को अविस्मरणीय पवित्र बताते हुए उनका वक्ता भाव लगातार बोलते रहने को हिलोरे मारता रहा।तमाम निषेधों, नसीहतों पर विस्तार पूर्वक चर्चा में उनका कठोर प्रशासक का पुलिसिया स्वरूप भी उद्घाटित होता रहा।
अपने अविस्मरणीय सम्मान अविभूत डॉक्टर विद्या कांत तिवारी ने इटावा वासियों के स्नेह अतुलनीय सम्मान, सहयोग और अतिशय आदर भावना को अपने जीवन की अमूल्य पूंजी बताते हुए कहा कि इसे भुला पाना संभव नहीं है और कहा कि वे जब पचपन वर्ष पूर्व यहां आए तो कोई अपना नही था, यहां के विशालमना महानुभावों ने सहारा दिया और महाकवि तुलसी के शब्दों में बांह गहे की लाज रखी।
जिसके कारण ही अपने कर्तव्य पथ पर गुरु धर्म के निर्वाह में असीम आनंद भरपूर संतुष्टि और अकल्पनीय यश कीर्ति प्राप्त हो सकी। मेरे समर्पण भाव का मूल्यांकन करने वाले आप सब मनीषी जनों की महानता को प्रणाम करना ही धर्म है।सभी के प्रति आजन्म श्रेणी और कृतज्ञ रहने की योग्यता विकसित करने में सफल होऊ, यही आकांक्षा है। सेवा निवर्ति के पन्द्रह वर्ष बाद भी आप सब ने याद रखा,असीम आत्म बल प्रदान किया। यह आप सब की महानता का ही घोतक हैजिसे विस्मृत किया जाना प्रबुद्ध सम्मान के लिए संभव नहीं होगा।
एस एस पी की विदुषी सह धर्मिनी नीलम रॉय वर्मा ने आध्यात्मिक प्रवचन कर्ता की भूमिका से अति विशिष्ट श्रोताओं को मंत्रमुग्ध और आह्लादित कर दिया। भगवान राम, कृष्ण के प्रसंगों समेत दिनकर जी की कविता और हरिवंश राय बच्चन जी कविताओं से मन मोह लिया। महिलाओं से आत्मीयता प्रदर्शित कर वे उनके दिलों पर छा गईं। पति पत्नी ने तालियां बजा कर परस्पर खूब प्रोत्साहित किया। दौनो का विद्वता पूर्ण खिलंदड़ स्वभाव मनीषियों की सभा को खिलखिलाने को विवश करता रहा।
प्रसिद्ध कवि कमलेश शर्मा की राष्ट्र चर्चित कविताष्राम हुए हैं- कितने और प्रमाण देंष् से भावुक श्रोताओं ने उन पर खूब प्यार लुटाया। उनका कहना था कि साहित्यिक क्षेत्र का इतना विशाल व्यक्तित्व हम सबको इतने सहज और सरल भाव में उपलब्ध है यह हम सब का सौभाग्य ही है। उनका सम्मान हम सबका गौरव है, सम्मान प्रदाताओं के प्रति हम कृतज्ञ हैं।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे भारत विकास परिषद के पांचाल प्रांत अध्यक्ष डॉक्टर रमेश चंद्र शुक्ला (औरैया) का समीक्षात्मक उद्बोधन प्रेरणा दायक रहा। उनकी कविता और पुलिस कप्तान दंपत्ति पर टिप्पणी उत्साह वर्धक रही।मंचासीन प्रसिद्ध कहानीकार प्रो दिनेश पालीवाल अपने अनुजवत तिवारी जी के सम्मान पर आत्म विभोर नज़र आए।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण, सम्मान, गणेश ज्ञानार्थी की गणेश वंदना, सुधीर मिश्र वा अपर्णा मिश्र की सरस्वती वंदना, वंदे मातरम गीत से हुआ। समापन अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर विभू दीक्षित के आभार प्रदर्शन के बाद राष्ट्र गान से हुआ। चौधरी चरण सिंह महा विद्यालय हेवरा के यशस्वी प्राचार्य डॉक्टर शैलेंद्र शर्मा का विशिष्ट संचालन प्रशंसित रहा। पत्रकार सुधीर मिश्र ने अतिथियों का परिचय कराया। इसी अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष विद्या कांत तिवारी और मंत्री राजेंद्र दीक्षित को जन्म दिन पर आत्मिक बधाई देते हुए माल्यार्पण किया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य महेश चंद्र तिवारी ने अभिनंदन ग्रंथ का वाचन किया गया। वरिष्ठ नागरिक पेंशनर सेवा संस्थान के कौशल चतुर्वेदी, गोपाल कल्याण वृंद के नारायण किशोर बाजपेई, राधा माधव संकीर्तन के राकेश पाठक, भारत विकास परिषद धर्मार्थ सेवा शाखा के के के त्रिपाठी, प्राचार्य महेश तिवारी, चौधरी रघुराज सिंह स्मारक संस्थान की ममता चौधरी, निशा चौधरी, शंकर दयाल दीक्षित स्मारक संस्थान की ओर से श्री मती सर्वेश दीक्षित, उद्योग व्यापार मंडल के अनंत अग्रवाल एवम आर एस एस के विभाग सर कार्यवाह विनोद चंद्र पाण्डेय आदि तमाम विशिष्ट जनों ने सम्मान भेंट प्रदान की।
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विकासखंड क्षेत्र स्थित हुसैनगंज मजरे पाराखुर्द से पुरासी वाया मोहनगंज व सुखलिया को जोड़ने वाले मार्ग का निर्माण आजादी से अब तक नहीं किया गया। करीब तीन किलोमीटर इस कच्चे रास्ते की नपाई तो पीडब्लूडी विभाग द्वारा कई बार कराई गई किन्तु नतीजा कागजों तक ही सीमित रहा।


कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता एस.एन सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज सभागार में महाविद्यालय की placement cell के द्वारा “सिविल परीक्षा हेतु आवश्यक रणनीति, चुनौती एवं मार्गदर्शन” विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया गया।
कानपुर 19 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, राष्ट्रीय सेवा योजना दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर की वॉलिंटियर्स ने ‘स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम’ के अंतर्गत पर्यावरण को साफ स्वच्छ रखने की शपथ ली। महाविद्यालय की कार्यक्रम अधिकारी तथा कानपुर नगर की जिला नोडल ऑफिसर डॉ संगीता सिरोही ने बताया कि इस अवसर पर छात्राओं के द्वारा एक जागरूकता रैली भी निकाली गई। स्वच्छ एवं स्वस्थ महाविद्यालय के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय परिसर , मुख्य मार्ग एवं महाविद्यालय गेट पर स्वच्छता अभियान चलाया गया। तदोपरांत उसके आसपास की गंदगी को एकत्र कर कूड़ेदान में निस्तारण हेतु डाला। एनएसएस वॉलिंटियर्स ने महाविद्यालय तथा सड़क पर उपस्थित लोगों से भी अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने का आग्रह किया। अभियान को सफल बनाने में महाविद्यालय प्राचार्य प्रो अर्चना वर्मा जी, कार्यालय अधीक्षक श्री कृष्णेंद्र श्रीवास्तव का विशेष सहयोग रहा। इस कार्यक्रम में 50 वॉलिंटियर्स ने अपना योगदान दिया।
। विभांशु वैभव को नाटक अकादमी पुरस्कार, नट सम्राट दिल्ली पुरस्कार, भारतेन्दु पुरस्कार प. प्रताप नारायण मिश्र युवा साहित्यकार पुरस्कार, अखिल भारतीय मानवाधिकार पुरस्कार, उर्दू अकादमी, दिल्ली सम्मान जैसे ढेर सारे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। कई भाषाओं में नाटकों का अनुवाद, हिन्दी की कई पत्र पत्रिकाओं के लिये लेखन किया महारथी, बाबूजी, कहो तो बोलूँ, मंथन, पांचाली. ठुमरी, गुण्डा, ना मैं धर्मी ना अधर्मी, सोल सागा, तेरे मेरे सपने, तरसत जियरा हमार, छुटटन दूबे के सपने शब-ब-खैर जैसे नाटकों का लेखन और मंचन किया। वर्कशॉप के पहले दिन स्क्रिप्ट को अच्छे से और आराम से पढ़ लेना है। अपने डायलॉग को अच्छे से याद कर लेना है।और महसूस करना है। जान लिजीए कि हर लाईन किसी के जश्बारी स्क्रिप्ट किसी कि जिदंगी के सुख दुःख लम्हो को बया करती हैं। आप जिस किरदार के डायलॉग बोलने वाले है। डायलॉग के हर एक शब्द को अच्छे से महसूस करके बोले। और अभिनय की उत्पति कैसे हुई ये बताया गया । कार्यशाला में छात्रों को अभिनय की बुनियादी बाते और एक अच्छा अभिनय करने की बारीकियां बताई जाएंगी इसके साथ साथ शारीरिक और मानसिक संतुलन को बनाए रखने के तरीके शारीरिक गतिविधियां ध्यान केन्द्रित करना संवाद वितरण आदि विषयों पर भी बताया जाएगा कार्यशाला में 50 विद्यार्थी उपस्थित रहे
कानपुर 16 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. एन.सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज के वनस्पति विज्ञान संकाय मे ओजोन दिवस के अवसर पर पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्याप्रोफेसर सुमन ने दीप प्रज्वलित् करके किया एवं छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए किया। मंच का संचालन डॉ प्रीति सिंह ने किया। कार्यक्रम के निर्णायक मंडल के रूप में रसायन विज्ञान विभाग विभागाध्यक्ष डॉ गार्गी यादव तथा शारीरिक शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ प्रीति पांडे उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की आयोजक एवं वनस्पति विज्ञान की विभागाध्यक्ष ने ओजोन के मह्त्व को समझाया साथ ही ग्रीन हाउस गैसों से निपटने का एवं पर्यावरण को बचाने का मार्ग दिखाया।