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कानपुर

दो व्यक्तियों के बीच विवाद एक ने दूसरे पर कुल्हाड़ी से किया प्रहार

दैनिक भारतीय स्वरूप, संवादसूत्र विकास बाजपेई दो व्यक्तियों के बीच विवाद, विवाद इतना बढ़ा कि एक व्यक्ति ने दूसरे पर कुल्हाड़ी से प्रहार कर दिया। हमला गंभीर था और घायल व्यक्ति को चोटें भी आईं। दूसरे पक्ष को भी चोटें दिखाई दीं, लेकिन आसपास मौजूद कई लोगों का कहना था कि उन चोटों के पीछे किसी के द्वारा मारपीट नहीं हुई थी। यह बात मैं स्वयं नहीं कह रहा, बल्कि जैसा स्थानीय लोगों ने बताया, वैसा ही लिख रहा हूँ। घटना के बाद दोनों पक्ष पुलिस के पास पहुँचे और अपनी-अपनी बात रखी। काफी देर तक बातचीत और बहस चलती रही। अंत में जो निष्कर्ष सामने आया, उसने कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। बताया गया कि जिस व्यक्ति ने कुल्हाड़ी से हमला किया है, उसके विरुद्ध तत्काल कोई कठोर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। कारण यह बताया गया कि यदि ऐसा किया गया, तो मामला अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के अंतर्गत उलझ सकता है और संबंधित लोग स्वयं कानूनी परेशानी में पड़ सकते हैं।

यहीं से लोगों के मन में प्रश्न पैदा हुआ।  क्या किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई इस आधार पर रुके कि वह किस जाति से आता है? या कार्रवाई इस आधार पर होनी चाहिए कि उसने क्या किया है?

खैर, उस समय दोनों पक्ष अपने-अपने घर लौट गए। लेकिन घायल पक्ष के मन में यह बात लगातार चुभती रही कि उसके साथ न्याय नहीं हुआ। अंततः वह दोबारा पुलिस के पास पहुँचा और एक प्रार्थना पत्र दिया। उसमें उसने आरोप लगाया कि उस पर समझौते का दबाव बनाया गया। साथ ही उसने यह भी लिखा कि एक व्यक्ति, जो अक्सर पुलिस चौकी में आता-जाता है और उसी समुदाय से संबंध रखता है, उसने भी SC/ST Act का भय दिखाकर समझौते का दबाव बनाया। उसी प्रार्थना पत्र को पढ़ने के लिए मेरे पास भेजा गया। मैंने उसे ध्यान से देखा। मुझे लगा कि अपनी बात कहना आवश्यक है, लेकिन यदि बिना पर्याप्त आधार के पुलिस पर सीधे आरोप लगाए जाएँ तो उससे वास्तविक शिकायत भी कमजोर पड़ सकती है। इसलिए मैंने कुछ संशोधन सुझाए, ताकि शिकायत तथ्यों पर आधारित रहे, भावनाओं पर नहीं। इसके बाद पीड़ित पक्ष पुनः थाने पहुँचा। इस बार पुलिस की भूमिका पहले की तुलना में अधिक संतुलित और सकारात्मक दिखाई दी। अधिकारियों ने धैर्यपूर्वक पूरी बात सुनी और यह भी समझाया कि प्रारंभिक स्तर पर उन्होंने वैसा निर्णय क्यों लिया था। संवाद हुआ, गलतफहमियाँ कुछ हद तक दूर हुईं और माहौल पहले से बेहतर बना।

लेकिन…   एक प्रश्न आज भी वहीं खड़ा है। यदि वास्तव में किसी ने जानलेवा हमला किया है, तो क्या केवल इस आशंका से कि सामने वाला एक विशेष वर्ग से है, उसके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करने से बचना उचित है? यह प्रश्न किसी एक व्यक्ति का नहीं है। यह उस पूरे मोहल्ले के लोगों का प्रश्न है, जो इस घटना के साक्षी रहे और जिन्होंने यह चर्चा बार-बार की।

यहाँ यह बात भी स्पष्ट रहनी चाहिए कि SC/ST Act का उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों को अत्याचार से सुरक्षा प्रदान करना है, और यह एक महत्वपूर्ण कानून है। लेकिन किसी भी कानून का सही स्वरूप तभी कायम रहता है, जब उसका प्रयोग निष्पक्षता के साथ हो और हर मामले में तथ्य, साक्ष्य और कानून के आधार पर निर्णय लिया जाए—न कि केवल आशंकाओं के आधार पर। कानून का सम्मान तभी बना रहता है, जब वह सभी के लिए समान रूप से लागू होता हुआ दिखाई दे। भय अपराधी को होना चाहिए, न्याय माँगने वाले को नहीं।

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एस. एन. सेन बा.वि.पी. जी. कॉलेज में “पुस्तक पढ़ें” कार्यक्रम का आयोजन*

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन बा.वि.पी. जी. कॉलेज में विद्यार्थियों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “एक पुस्तक पढ़ें” कार्यक्रम का आयोजन किया गया,

कार्यक्रम कुलाधिपति/राज्यपाल की प्रेरणा एवं कुलपति के मार्गदर्शन में आयोजित हो रहा है। कॉलेज की पुस्तकालय समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को पुस्तकों के करीब लाना और उनमें नई सोच व ज्ञान की जिज्ञासा जागृत करना है, इस अवसर पर प्राचार्या प्रो सुमन ने कहा कि “ज्ञान के बढ़ते ग्राफ में किताबों का बहुत योगदान है”। पुस्तकें न केवल नई खोज कराती हैं बल्कि अज्ञानता का नाश भी करती हैं साहित्य विज्ञान व कला की विभिन्न किताबो को पढने के लिए प्रेरित किया। प्राचार्या ने अब्दुल कलाम की पुस्तकों ,रामायण के विभिन्न अनुवादित पुस्तकों पर प्रकाश डाला । महत्वपूर्ण संदर्भ से संबंधित पुस्तकें पढऩे पर जोर दिया । पुस्तकालय समिति की प्रभारी व दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्षा प्रो किरन ने छात्राओं को पुस्तक पठन – पाठन हेतु प्रेरित किया और पुस्तकों को प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु लाभदायक बताया।  समाजशास्त्र विभाग की प्रवक्ता डा. रेनू कुरील ने छात्राओं को पुस्तकों को सबसे अच्छी दोस्त बताया और ज्ञान संवर्द्धन हेतु पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित किया।  मनोविज्ञान विभागाध्यक्षा डॉ . मोनिका सहाय ने पुस्तक पठन को मनोविज्ञान के ज्ञान से संबद्ध किया व अंग्रेजी विभागाध्यक्षा डॉ . कोमल सरोज ने पुस्तक पठन को साहित्य के विविध विधाओ से संदर्भित किया। कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु डॉ. रोली मिश्रा ने संयोजन किया डॉ. पूजा गुप्ता, डॉ .रेशमा, डॉ. श्वेता रानी ने सक्रीय भूमिका निभाई । इस कार्यक्रम मे महाविद्यालय की कुलानुशासक कैप्टन ममता अग्रवाल प्रो निशा वर्मा प्रो. प्रीति पाण्डेय, प्रो. मीनाक्षी व्यास डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. शुभा बाजपेयी व सभी शिक्षिकाओं ने पुस्तक पठन कार्यक्रम मे प्रतिभाग किया।

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दयानन्द गर्ल्स पी. जी. कॉलेज में “पुस्तक पढ़ें” अभियान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार दिनांक 06 जुलाई को दयानन्द गर्ल्स पी. जी. कॉलेज, कानपुर में “एक पुस्तक पढ़ें” कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन नोडल अधिकारी डॉ अर्चना दीक्षित के निर्देशन में सम्पन्न किया गया।कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो वंदना निगम तथा सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो अर्चना वर्मा के द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की 100 छात्राओं एवं समस्त शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि जागृत करना, नियमित पठन-पाठन की आदत विकसित करना तथा ज्ञानार्जन के महत्व को समझाना था।
पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो क्षमा त्रिपाठी ने कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को पुस्तकों के महत्व पर प्रेरक विचारों से अवगत कराया तथा सभी प्रतिभागियों ने एक पुस्तक पढ़ने एवं उससे प्राप्त ज्ञान को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। पुस्तकें पढ़ने के उपरांन्त सामूहिक चर्चा भी की गई जिसमें पठन संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम सफलतापूर्वक एवं शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। अंत में रेंजर प्रभारी प्रो स्वाति सक्सेना ने सभी उपस्थित शिक्षिकाओं एवं छात्राओं का आभार व्यक्त किया।

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योग दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज के प्रांगण में योग शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रोफेसर अर्चना वर्मा ने किया। योग शिविर का संचालन रेंजर प्रभारी प्रोफेसर स्वाति सक्सेना ने किया तथा बताया योग शरीर और मस्तिष्क को जोड़ने की एक सफल विधि है यदि स्वस्थ शरीर होगा तो मस्तिष्क भी स्वस्थ होगा और आम जीवन शैली में व्यक्ति बेहतर जीवन की पाएगा। विषय प्रवर्तन डॉ दीपाली सक्सेना ने किया की स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग कितना आवश्यक है और थीम के विशिष्ट पहलुओं चर्चा कीl योगा फॉर ऑल और स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग विषय पर कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक योग संस्थान हरिद्वार के प्रोफेसर सीडी यादव सर . ने छात्राओं को योग के महत्व को बताया कि कैसे योग को वर्तमान जीवन शैली में शामिल करके हम स्वस्थ जीवन जी सकते हैं छात्राओं को बताया कि अपने परिवार तथा आस पास पड़ोस में स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग की थीम के अनुसार छात्राएं कैसे जागरूकता कर सकती हैं योग को हमें आम जनमानस तक कैसे पहुंचlना है.. छात्रों को प्राणायाम अनुलोम विलोम भ्रामरी उत्तानपादासन पद्मासन जैसे अनिवार्य आसनों के माध्यम से बताया गया शरीर के सभी अंगों को कैसे स्वस्थ रखा जा सकता है सर्वप्रथम प्रार्थना कराई गई और अंत में लाफिंग थेरेपी की गई की कैसे शारीरिक और मानसिक विकारों से मुक्ति पाई जा सकती है l धन्यवाद ज्ञापन डॉ विनीत श्रीवास्तव ने दिया l

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एसोसिएशन आफ स्माल एंड मीडियम न्यूज़ पेपर्स आफ इंडिया की राष्ट्रीय परिषद की बैठक दिल्ली के यूपी भवन में संपन्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, एसोसिएशन आफ स्माल एंड मीडियम न्यूज़ पेपर्स आफ इंडिया के राष्ट्रीय परिषद की बैठक यूपी भवन मीटिंग रुम में बड़े उत्साह पूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। बैठक में समाचार पत्र पंजीयक योगेश बवेजा और अतिरिक्त पंजीयक संतोश कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहें तथा सदस्यों की समस्याओं को सुना और संतोष जनक कार्यवाही का आश्वासन भी दिया। सदस्यों ने पीआरजीआइ के पोर्टल संबधी समस्याएं उठाइ तथा एडिट का आप्शन देने की मांग की। जिसे समाचार पत्र पंजीयक ने स्वीकार कर लिया। बैठक में यूपी, उत्तराखण्ड, दिल्ली, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तैलंगाना, तमिलनाडु, राजस्थान महाराष्ट्र, गुजरात उडीसा से आए राष्ट्रीय पार्षदों ने भाग लिया और अपने विचार तथा छोटे समाचार पत्रों की समस्याएं उठाई। बैठक का संचालन महामंत्री शंकर कतीरा ने किया तथा अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव दत्त चंदोला ने किया। बैठक में भगवती चन्दोला, निशा रस्तोगी, श्याम सिंह पंवार, अतुल दीक्षित, प्रवीण पाटिल, आलोक अग्निहोत्री, गोपाल गुप्ता, कुंडलराव सेंडी रेड्डी, के स्वयं प्रकाश, आदि ने अपने विचार व्यक्त किए बैठक के प्रारम्भ में समाचार पत्र पंजीयक योगेश बवेजा, अपर प्रेम पंजीयक संतोष कुमार, गौहाटी के सुरेश गारोदिया, और दिल्ली के सुरेश अग्रवाल को शाल उढ़ा कर उनका स्वागत सम्मान किया गया।

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संगीत को जीने वालों ने सजाई सुरों की शानदार महफिल

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर , गीत संगीत सुनने और जीने का शौक रखने वालों के लिए रविवार का दिन अत्यंत खूबसूरत रहा कार्यक्रम में कानपुर और आस पास के शहरों के संगीत में रुचि रखने वालों के लिए खुशनुमा त्यौहार जैसा था। कार्यक्रम के आयोजन का विचार रेलबाजार निवासी गोविंद सिंह का था, जिसे अति अल्प समय में बेहद खूबसूरत तरीके से क्रियान्वित करने का कार्य उनकी टीम खासकर बॉबी खान, टेक्निकल टीम के चौधरी भाई आदि ने बखूबी निभाया, मंच संचालन कर रहे बॉबी खान की फुलझड़ियों और माही के अंदाज ने सबका मन मोह लियामाँ शारदे का आशीर्वाद लेकर और विघ्न विनाशक श्री गणेश जी की कृपा पाकर कार्यक्रम का शुभारंभ सुमधुर बांसुरी वादन और गोविंद जी के गायन से हुआ,

समाज के विभिन्न क्षेत्रों जैसे समाजसेवा, मीडिया आदि से भी लोगों की सहभागिता रही।  म्यूजिकल किसी भी कार्यक्रम की सफलता के दो मुख्य घटक गायक/गायिका और श्रोता होते है, और कहना पड़ेगा कि इस मामले में सारे श्रोता बेहद शालीन और अनुशासित दिखे । पूरे कार्यक्रम के दौरान मौजूद सभी श्रोताओं ने गायक गायिकाओं का जोरदार उत्साहवर्धन किया।. इस मंच के तत्वावधान में पहला आयोजन होने के कारण आयोजकों में पहले जो असमंजस और डर था , थोड़ी ही देर में सभी के परफॉर्मेंस और सहयोग से दूर हो गया। पूरे दिन एक से बढ़कर एक नए और पुराने गीतों की वो स्वर लहरी बही कि कोई भी उससे अछूता नहीं रह गया।

कार्यक्रम में राजेंद्र श्रीवास्तव , आशीष अवस्थी , दिवाकर शुक्ला, अतुल दीक्षित , गिरीश मारवाह ,आरती त्रिपाठी , अंजना अवस्थी , रेनू अग्रवाल , रेनू अवस्थी ,सुषमा श्रीवास्तव , प्रीति श्रीवास्तव, भारती दीक्षित, नीलम दीक्षित, स्मिता श्रीवास्तव आदि की धमाकेदार गीतों की प्रस्तुति को सबने खूब सराहा।

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टीडीबी-डीएसटी ने पुणे के मेसर्स ग्रीनजूल्स प्राइवेट लिमिटेड को स्वदेशी द्वितीय पीढ़ी के डीजल समतुल्य जैव ईंधन प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए सहयोग प्रदान किया है

भारत स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों और पुनः उपयोग वाली अर्थव्यवस्था-संचालित औद्योगिक विकास की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। इसी क्रम में, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने पुणे के मेसर्स ग्रीनजूल्स प्राइवेट लिमिटेड को “द्वितीय पीढ़ी के डीजल समतुल्य जैव ईंधन का निर्माण” परियोजना के लिए सहयोग प्रदान किया है। इस परियोजना का उद्देश्य कृषि अपशिष्ट और कृषि-प्रसंस्करण अवशेषों से प्राप्त उन्नत जैव ईंधन के उत्पादन के लिए एक वाणिज्यिक स्तर की सुविधा स्थापित करना है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अपशिष्ट से धन सृजन के मिशन और शुद्ध शून्य ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देगी।

प्रस्तावित परियोजना में अभिलाषा बायोफ्यूल्स (एबीएफ) के उत्पादन के लिए एक ग्रीनफील्ड विनिर्माण केंद्र स्थापित करना शामिल है। एबीएफ अगली पीढ़ी का नवीकरणीय डीजल और नेफ्था विकल्प है, जिसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। “ड्रॉप-इन” ईंधन के रूप में डिज़ाइन किया गया, एबीएफ मौजूदा इंजनों, ईंधन प्रणालियों या वितरण बुनियादी ढांचे में किसी भी संशोधन की आवश्यकता के बिना पारंपरिक जीवाश्म-आधारित डीजल को सीधे प्रतिस्थापित कर सकता है, जिससे यह परिवहन और औद्योगिक ऊर्जा खपत को कार्बनमुक्त करने के लिए एक व्यावहारिक और बडे पैमाने पर समाधान बन जाता है।

पूरी तरह से भारत में विकसित, यह तकनीक नवीन थर्मो-केमिकल रूपांतरण प्रक्रियाओं को एकीकृत करती है जो कृषि अवशेषों और कृषि-औद्योगिक अपशिष्ट को उच्च गुणवत्ता वाले नवीकरणीय ईंधन में परिवर्तित करती है। यह प्रक्रिया थर्मल क्रैकिंग, उत्प्रेरक उन्नयन और डाउनस्ट्रीम शोधन तकनीकों को मिलाकर ऐसे जैव ईंधन का उत्पादन करती है जो जीवाश्म-आधारित समकक्षों के समान स्थापित गुणवत्ता विनिर्देशों को पूरा करती हैं। इस ईंधन का उत्पादन पहले ही लगभग चालीस विभिन्न फीडस्टॉक से सफलतापूर्वक किया जा चुका है, जो भारत के विविध जैव अवशेष संसाधनों के लिए उल्लेखनीय आसानी और अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।

इस तकनीक की एक प्रमुख विशेषता ग्रीनजूल्स की अधिकतम जैव अवशेष मिश्रणों की पहचान करने और ईंधन उत्पादन और दक्षता को अधिकतम करने के लिए उन्हें अनुकूलित उत्प्रेरक प्रणालियों के साथ मिलाने की उसकी प्रमुख विशेषज्ञता में निहित है। यद्यपि प्रक्रिया के अलग-अलग चरण ज्ञात औद्योगिक पद्धतियाँ हैं, कंपनी द्वारा फीडस्टॉक चयन, उत्प्रेरक अनुकूलन और प्रक्रिया अभियांत्रिकी का अनूठा एकीकरण इसकी मुख्य बौद्धिक संपदा है और यह कम मूल्य वाले कृषि अपशिष्ट से उन्नत जैव ईंधन का व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादन संभव बनाता है।

यह परियोजना नवीकरणीय डीजल, नवीकरणीय नेफ्था, जैव कचरा और गैसीय ईंधन के उत्पादन में कंपनी की क्षमताओं को और बढ़ाएगी, जिससे अपशिष्ट से ऊर्जा का एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार होगा। कृषि अवशेषों को, जिन्हें अक्सर जला दिया जाता है या फेंक दिया जाता है, मूल्यवान ऊर्जा उत्पादों में परिवर्तित करके, यह तकनीक एक साथ कई राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरा करती है, जिनमें पराली जलाने में कमी, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, ग्रामीण मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना और आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना शामिल है।

यह पहल भारत सरकार की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, पुनः उपयोग की अर्थव्यवस्था के उद्देश्यों और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है। यह उन्नत जैव ईंधन और वैकल्पिक ऊर्जा समाधानों में मजबूत घरेलू क्षमताएं विकसित करने के देश के दृष्टिकोण का भी समर्थन करती है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा, “कृषि अवशेषों से प्राप्त उन्नत जैव ईंधन ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और ग्रामीण आर्थिक विकास प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मार्ग प्रशस्त करते हैं। कचरे को उच्च मूल्य वाले ईंधन में परिवर्तित करने वाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियां न केवल जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करती हैं, बल्कि पुनः उपयोग वाली अर्थव्यवस्था के भीतर नए अवसर भी पैदा करती हैं। ऐसे नवाचार देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और आयातित कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। टीडीबी भारत के स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम को मजबूत करने वाली प्रौद्योगिकियों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही ठोस आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक लाभ भी प्रदान करती है।”

समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए, ग्रीनजूल्स प्राइवेट लिमिटेड ने कहा कि यह सहायता उनकी स्वदेशी जैव ईंधन प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण और विस्तार में तेजी लाने में सहायता करेगी, जिससे औद्योगिक और परिवहन क्षेत्रों में टिकाऊ ईंधन समाधानों का व्यापक उपयोग संभव होगा। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि यह परियोजना भारत के लिए एक स्वच्छ, आत्मनिर्भर और सुरक्षित ऊर्जा भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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कानपुर में 1 जून से 31 अगस्त तक सभी नदियाँ एवं बहती जलधाराएँ ‘नो फिशिंग जोन’ घोषित

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर नगर, 05 जून 2026।** मछलियों के प्रजनन काल की सुरक्षा तथा मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से जिला प्रशासन कानपुर नगर द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जिलाधिकारी  जितेंद्र प्रताप सिंह ने जनपद की समस्त नदियों एवं बहती जलधाराओं को 01 जून 2026 से 31 अगस्त 2026 तक ‘नो फिशिंग जोन’ घोषित किया है।

जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रतिबंध अवधि के दौरान किसी भी नदी अथवा बहती जलधारा में मत्स्य आखेट (मछली पकड़ना) तथा बाड़े (घेराबंदी) लगाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध मछलियों के प्रजनन एवं संवर्धन को सुरक्षित रखने तथा प्राकृतिक मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से लागू किया गया है।

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया है कि आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। इसके लिए मत्स्य विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने तथा सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सहायक निदेशक मत्स्य, कानपुर नगर डॉ. जितेंद्र कुमार ने सभी मत्स्यजीवी सहकारी समितियों के सदस्यों एवं जनपदवासियों से अपील की है कि वे मत्स्य संरक्षण अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान करें तथा प्रतिबंध अवधि के दौरान निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से ही जल संसाधनों एवं मत्स्य संपदा का प्रभावी संरक्षण संभव है।

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ओडीओपी प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना के तहत लेदर और होजरी ट्रेड में निःशुल्क प्रशिक्षण हेतु आवेदन आमंत्रित

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर नगर। उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केन्द्र, कानपुर नगर अंजनीश प्रताप सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में “एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना” संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत जनपद के इच्छुक अभ्यर्थियों को लेदर एवं होजरी टेक्सटाइल उत्पाद ट्रेड में 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि योजना के तहत आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक अभ्यर्थी विभागीय वेबसाइट http://msme.up.gov.in/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 21 जून 2026 निर्धारित की गई है।

योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी हेतु अभ्यर्थी कार्यालय दिवसों में जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केन्द्र, कानपुर नगर में संपर्क कर सकते हैं।

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विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता विषयक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर  विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय सेवा योजना दयानन्द गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर द्वारा कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता विषयक विभिन्न कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य फोकस जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास पर रहा, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो वंदना निगम के द्वारा पौधारोपण कर किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने तथा दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही ने पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता हेतु सक्रिय योगदान देने तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की शपथ दिलवायी।
इस अवसर पर एनएसएस वॉलंटियर्स के द्वारा वृक्षारोपण अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता तथा पर्यावरण जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। छात्राओं ने जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवन, स्वच्छता तथा हरित पर्यावरण जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में लगभग 50 छात्राओं के द्वारा प्रतिभाग किया गया।
कार्यक्रम में रेंजर प्रभारी प्रो स्वाति सक्सेना ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ विनीता श्रीवास्तव , डॉ अलका त्रिपाठी, डॉ. शिखा, श्वेता गोंड, एनसीसी एवं रेंजर्स छात्राओं एवं शिक्षिकाओं का योगदान सराहनीय रहा।

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