Breaking News

Bharatiya Swaroop

भारतीय स्वरुप एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है। सम्पादक मुद्रक प्रकाशक अतुल दीक्षित (published from Uttar Pradesh, Uttrakhand & maharashtra) mobile number - 9696469699 : 9415153880

मिशन शक्ति के अंतर्गत गुड टच एंड बैड टच जागरूकता सत्र आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। 18 दिसम्बर मिशन शक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में गुड टच एंड बैड टच पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं सहायक आचार्य अपुर्वा बाजपेयी ने छात्राओं को “गुड टच–बैड टच से आगे: सीमाओं और सहमति की समझ” विषय पर संबोधित किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए व्यक्तिगत सीमाओं और सहमति की स्पष्ट समझ अत्यंत आवश्यक है। कोई भी स्पर्श या व्यवहार तभी स्वीकार्य है, जब वह व्यक्ति की स्पष्ट इच्छा और सहजता के अनुरूप हो। असहजता भी एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिसे कभी सहमति नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि भय या तनाव की स्थिति में व्यक्ति तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे पाता, जिसे समाज अक्सर गलत रूप में समझ लेता है।
सत्र में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम (POSH Act) का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम की संयोजिका मिशन शक्ति कोऑर्डिनेटर डॉ. संगीता सिरोही रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्या प्रो. वंदना निगम ने की। सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो. अर्चना वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. साधना सिंह, श्वेता गोंड एवं विमला देवी का विशेष सहयोग रहा। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की लगभग 80 छात्राएँ उपस्थित रही। सत्र का उद्देश्य छात्राओं को जागरूक कर उन्हें आत्म-सुरक्षा, आत्म-सम्मान और स्वस्थ सामाजिक संबंधों के लिए सशक्त बनाना रहा।

Read More »

कानपुर स्मार्ट सिटी में मोटर वाहन अधिनियम की उड़ रहीं जमकर धज्जियां

स्मार्ट सिटी में कानून का हो रहा खुला उल्लंघन !

स्मार्ट सिटी की सड़कों पर ‘लोहे के अवैध कवच’ पहनकर दौड़ रहे सवारी वाहन

– करोड़ों खर्च कर लगाए गए कैमरों में क्यों नहीं कैद होती है मनमानी?

– चौराहों पर ड्यूटी में लगे यातायात पुलिस के जवान क्यों करते हैं अनदेखी ?

कानपुर। स्मार्ट सिटी कानपुर में सार्वजनिक परिवहन के नाम पर अराजकता का बोलबाला है। शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों—कल्याणपुर, रावतपुर, पनकी, विजय नगर, बर्रा, गोविंद नगर, किदवई नगर, बाबूपुरवा, नौबस्ता, रामादेवी, बारादेवी, झकरकटी, फजलगंज, टाटमिल, चुन्नीगंज, जरीब चौकी सहित अधिकतर क्षेत्रों में चलने वाले विक्रम टेम्पो, ऑटो और ई-रिक्शा के मालिकों के मनमाने रवैये ने सड़कों को असुरक्षित बना दिया है। इन वाहनों की बॉडी के चारों ओर अवैध रूप से लगाए गए लोहे के भारी एंगल न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि राहगीरों के लिए खतरनाक भी साबित हो रहे हैं।

मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के अनुसार, वाहनों की मूल संरचना (Structure) में इस तरह का बदलाव मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act) की धारा 52 का स्पष्ट उल्लंघन है।

वहीं वाहन की लंबाई, चौड़ाई या वजन में कोई भी ऐसा बदलाव जो आरसी (Registration Certificate) के विपरीत हो, पूरी तरह प्रतिबंधित है।

वहीं इन्हीं अवैध एंगलों की वजह से चालक, धारा 184 के तहत ‘खतरनाक ड्राइविंग’ को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि उन्हें अपने वाहन के क्षतिग्रस्त होने का डर नहीं रहता है।

स्मार्ट सिटी में चलने वाले ऑटो-विक्रम, ई रिक्शा चालक, अपने मनमुताबिक, लोहे के जालीदार एंगलों का इस्तेमाल ‘सुरक्षा कवच’ की तरह कर रहे हैं। जिसके कारण शहर के व्यस्त चौराहों पर आए दिन छोटी-मोटी भिड़ंत होती रहती है, जिससे कई बार विवाद पैदा हो जाता है और जाम की स्थिति पैदा होती है।

डिजिटल निगरानी पर सवाल ? आईटीएमएस (ITMS) के तहत लगे कैमरों की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर ये ‘मोडिफाइड’ वाहन चालान की जद से बाहर कैसे और क्यों हैं? वहीं यातायात पुलिस के जवानों की नजर इस ओर क्यों नहीं जाती ?

ऐसे में जरूरी है कि संभागीय परिवहन विभाग व यातायात पुलिस, एक साथ मिलकर संयुक्त चेकिंग अभियान चलाये और ऑटो – विक्रम व ई – रिक्शाओं में लगे अवैध एंगलों को मौके पर ही कटवाकर जब्त किया जाए।

~प्रेषक श्याम सिंह पंवार सम्पादक दैनिक जन सामना

Read More »

प्यार की महक

प्यार की महक कुछ भीनी-सी, गहरी-सी,

जो हृदय को दे अद्भुत स्पंदन।

ऐसा स्पर्श, जो पूरे जीवन को

नव-सृजन की ओर ले जाए।

कार्य की नई लय से

जीवन महके—बिखरे नहीं।

महकते कदमों के संग

उच्च दिशाओं की ओर बढ़ते हुए,

पूरा करने के दृढ़ संकल्प में

रास्ता अपना बनता है।

पथ पर आगे बढ़ते हुए

प्यार का उजाला फैलता है,

राहें सरल होती जाती हैं।

बाधाओं के बीच उभरता एक सरोवर,

जो सुन्दर कर्मों से

और गहरी आशाओं से भर जाता है।

मन की कल्पनाओं को मिलता है आकार,

कल्पना—जो भीतर की शाश्वत ज्योति है।

यही है प्यार का रंग।

और इस रंग को संजोकर रखना हमारी जिम्मेदारी।

~डॉ रश्मि गोयल

Read More »

दयानंद गर्ल्स कॉलेज में संविधान दिवस पर कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 26 नवम्बर दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में संविधान दिवस के उपलक्ष्य में “हमारा संविधान — हमारा स्वाभिमान” विषय के अंतर्गत विविध रचनात्मक एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में भारतीय संविधान के प्रति सम्मान, जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों की समझ को सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रमों में समान न्याय, समानता तथा अनेकता में एकता विषयों पर चित्रकला–पोस्टर प्रतियोगिता, स्लोगन लेखन प्रतियोगिता और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने पोस्टरों, स्लोगनों और भाषणों के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया।
इसके साथ ही छात्राओं द्वारा एक जागरूकता रैली भी निकाली गई, जिसमें विविधता, समानता और अधिकारों के संदेश दिए गए। कार्यक्रम के अंत में सभी छात्राओं और संकाय सदस्यों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ (शपथ) कर राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही के निर्देशन में किया गया। महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम ने छात्राओं को संविधान के आदर्शों को जीवन में अपनाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया।महाविद्यालय स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम की निदेशक प्रो. अर्चना वर्मा ने भी छात्राओं के उत्साह और सक्रिय भागीदारी की सराहना की।कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ ज्योत्सना पांडे, डॉ अंजना श्रीवास्तव, वन्या श्रीवास्तव एवं आकांक्षा अस्थाना का विशेष योगदान रहा।

Read More »

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में अत्याधुनिक डीपीएसयू भवन का उद्घाटन किया और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रदर्शन की समीक्षा की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नवनिर्मित डीपीएसयू भवन, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, नौरोजी नगर, नई दिल्ली में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) की एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में चार डीपीएसयू – म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल), आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल), इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (आईओएल) और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) को मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा दिए जाने पर सम्मानित किया गया।

श्री राजनाथ सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए देश के रक्षा विनिर्माण इको-सिस्टम को मज़बूत करने और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में डीपीएसयू के निरंतर योगदान की सराहना की। उन्होंने संगठनों को उनके निरंतर समर्पण और उत्कृष्टता के लिए बधाई देते हुए कहा कि हमारे सभी 16 डीपीएसयू देश की आत्मनिर्भरता के मज़बूत स्तंभ के रूप में कार्य कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में उनका उत्कृष्ट प्रदर्शन हमारे स्वदेशी प्लेटफार्मों की विश्वसनीयता और क्षमता का प्रमाण है।

श्री राजनाथ सिंह ने मिनीरत्न का दर्जा प्राप्त करने के लिए एचएसएल, एवीएनएल, आईओएल और एमआईएल की सराहना की। उन्होंने इसे रक्षा क्षेत्र में उनकी बढ़ती दक्षता, स्वायत्तता और योगदान का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में आयुध निर्माणी बोर्ड के सात नए डीपीएसयू में परिवर्तन से अधिक कार्यात्मक स्वतंत्रता, नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इन चार डीपीएसयू को दिया गया नया मिनीरत्न का दर्जा उन्हें क्षमता विस्तार, आधुनिकीकरण और सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों के भागीदारों के साथ संयुक्त उद्यम और विलय सहित नए उपक्रमों और सहयोगों की खोज करने के लिए सशक्त बनाएगा।

श्री राजनाथ सिंह ने इस क्षेत्र के उल्लेखनीय प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 2024-25 में, भारत ने 1.51 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हासिल किया, जिसमें डीपीएसयू का योगदान कुल 71.6 प्रतिशत रहा। रक्षा निर्यात 6,695 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो भारत की स्वदेशी प्रणालियों में वैश्विक विश्वास को दर्शाता है। इससे यह स्पष्ट है कि ‘मेड इन इंडिया’ रक्षा उत्पाद वैश्विक सम्मान प्राप्त कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने इस गति को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए सभी डीपीएसयू से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के तीव्र स्वदेशीकरण, समग्र अनुसंधान एवं विकास, उत्पाद गुणवत्ता संवर्धन, समय पर डिलीवरी और निर्यात बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने डीपीएसयू को निर्देश दिया कि वे मापनीय लक्ष्यों के साथ स्पष्ट स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास रोडमैप तैयार करें और अगली समीक्षा बैठक में प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से, मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि जहाँ भी विशेष हस्तक्षेप या सहायता की आवश्यकता होगी, वह तुरंत प्रदान की जाएगी।

इस आयोजन के एक भाग के रूप में, डीपीएसयू के बीच तीन प्रमुख समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया, जो सहयोग और आत्मनिर्भरता की भावना को दर्शाता है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) ने यंत्र इंडिया लिमिटेड (वाईआईएल) के आधुनिकीकरण प्रयासों का समर्थन करने और 10,000 टन फोर्जिंग प्रेस सुविधा स्थापित करने के लिए उसके साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जो रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों में उपयोग किए जाने वाले एल्यूमीनियम मिश्र धातुओं के लिए आयात निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एचएएल ने वाईआईएल को 435 करोड़ रुपये की ब्याज-मुक्त अग्रिम राशि देने की प्रतिबद्धता जताई है, जबकि बीडीएल दस वर्षों में 3,000 मीट्रिक टन तक का निरंतर कार्यभार प्रदान करेगा। राष्ट्रीय महत्व की रक्षा परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मिधानी में एक मेटल बैंक के निर्माण के लिए तीसरे समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

रक्षा मंत्री ने एचएएल अनुसंधान एवं विकास मैनुअल सहित अनुसंधान एवं विकास पहलों की एक श्रृंखला का भी अनावरण किया, जिसका उद्देश्य डिजिटलीकरण, बौद्धिक संपदा सृजन और भारतीय शिक्षा क्षेत्र के साथ सहयोग के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास इको-सिस्टम को मज़बूत करना है। डीपीएसयू का अनुसंधान एवं विकास रोडमैप वर्तमान पहलों और भविष्य की रणनीतियों को एकीकृत करता है, जो लाइसेंस प्राप्त उत्पादन से स्वदेशी डिज़ाइन और विकास की ओर बदलाव का प्रतीक है, जो रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

सतत रक्षा विनिर्माण की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में, श्री राजनाथ सिंह ने – स्वयं (एसडब्ल्यूएवाईएएम) – सतत और हरित रक्षा निर्माण –  का शुभारंभ किया। यह एक व्यापक संग्रह है जो डीपीएसयू में हरित परिवर्तन को दर्शाता है। व्यापक ऊर्जा दक्षता कार्य योजना 2023 में शामिल, स्वयं, रक्षा उत्पादन इको-सिस्टम में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने का विस्तार करने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों का विवरण देता है। स्वर्ण डैशबोर्ड और डीपीएसयू ऊर्जा दक्षता सूचकांक जैसे डिजिटल उपकरणों द्वारा समर्थित, यह पहल आत्मनिर्भरता के साथ स्थिरता को जोड़ने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

रक्षा मंत्री ने आईओएल और बीईएल को 100 प्रतिशत हरित ऊर्जा उपयोग प्राप्त करने के लिए सम्मानित किया। आईओएल सितंबर 2025 से पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा पर स्थांतरित हो चुका है, जिससे वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 8,669 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है और 26.36 लाख रुपये की बचत हुई है। नवरत्न डीपीएसयू, बीईएल, जनवरी 2025 में आरई100 उपलब्धि हासिल करने वाला प्रथम बन गया, जिससे उसका स्कोप-2 उत्सर्जन 15,000 मीट्रिक टन से घटकर पूर्ण शून्य हो गया, जो उसके नेट ज़ीरो लक्ष्यों की ओर एक महत्वपूर्ण प्रगति है। राजनाथ सिंह ने देश के रक्षा विनिर्माण इको-सिस्टम को आगे बढ़ाने में डीपीएसयू के नेतृत्व, नवाचार और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर देश को न केवल रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लें, बल्कि इसे एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में भी स्थापित करें। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास में निरंतर योगदान के लिए सभी डीपीएसयू को शुभकामनाएं दीं।

नव स्थापित डीपीएसयू भवन श्री राजनाथ सिंह और रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ के नेतृत्व में परिकल्पित एक अत्याधुनिक सुविधा है। रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा विकसित, यह भवन सभी 16 डीपीएसयू के लिए ‘संगच्छध्वं संवदध्वं’ (‘एक साथ चलें, एक साथ संवाद करें’) के आदर्श वाक्य के अंतर्गत सहयोग, नवाचार और तालमेल को बढ़ावा देने हेतु एक साझा मंच के रूप में कार्य करता है। आधुनिक सम्मेलन कक्षों, सिमुलेशन सुविधाओं और एक प्रदर्शनी क्षेत्र से सुसज्जित, यह भवन डीपीएसयू की क्षमताओं को सुदृढ़ करने और घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय हितधारकों के समक्ष देश की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित करने में मदद करेगा।

इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ, सचिव (रक्षा उत्पादन) श्री संजीव कुमार, सभी डीपीएसयू के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Read More »

चेन्नई के तांबरम में राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) अभियान 4.0 के अंतर्गत मेगा कैंप

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय का पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) डिजिटल इंडिया और जीवन की सुगमता के तहत पेंशनभोगियों के डिजिटल सशक्तिकरण के सरकार के दृष्टिकोण के हिस्से के रूप में 1 से 30 नवंबर 2025 तक राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) अभियान 4.0 चला रहा है।

इस अभियान के तहत, रक्षा लेखा महानियंत्रक कार्यालय 11 नवंबर 2025 को वायु सेना सभागार, तांबरम, चेन्नई में एक मेगा कैंप का आयोजन करने जा रहा है। सचिव (पेंशन) और पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस कैंप का दौरा करेंगे, जहां पेंशनभोगियों को विभिन्न डिजिटल माध्यमों से अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा करने में सहायता प्रदान की जाएगी। यूआईडीएआई आधार रिकॉर्ड अद्यतनीकरण में सहायता प्रदान करेगा और संबंधित तकनीकी समस्याओं का समाधान करेगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात (24 नवंबर 2024) कार्यक्रम और संविधान दिवस (26 नवंबर 2024) के अवसर पर अपने संबोधन में पेंशन प्रक्रियाओं को सरल बनाने में डिजिटल इंडिया की भूमिका की सराहना की। 5 नवंबर 2025 को राज्य मंत्री (डॉ जितेंद्र सिंह) की ओर से शुरू डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) अभियान 4.0  में संतृप्ति-आधारित आउटरीच के माध्यम से 2,000 से अधिक शहरों में दो करोड़ पेंशनभोगियों को लक्षित किया गया है। इस अभियान में आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को बढ़ावा दिया गया है, जिससे पेंशनभोगी बिना बायोमेट्रिक उपकरणों के आसानी से जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं।

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (डाक विभाग) की डोरस्टेप डीएलसी सेवाओं के माध्यम से सुपर-सीनियर और अलग-अलग विकलांग पेंशनरों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। अब तक, 78.26 लाख डीएलसी जमा किए गए हैं, जिसमें 46.36 लाख डीएलसी  फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए, 46 हजार से अधिक डीएलसी 90 से अधिक वर्ष वाले और 100 से अधिक वर्ष वाले 1200 डीएलसी शामिल हैं।

इस अभियान में डिजिटल समावेशन सुनिश्चित करने के लिए सीजीडीए, बैंकों, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, यूआईडीएआई, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई), एनआईसी और पेंशनभोगी कल्याण संघों को एक साथ शामिल किया जा रहा है। चेन्नई मेगा कैंप में पेंशनभोगियों के साथ सचिव (पी एंड पीडब्ल्यू) के संवादात्मक सत्रों की योजना बनाई गई है, जिसमें विभिन्न विभागों के लगभग 1,000 पेंशनभोगियों के शामिल होने की उम्मीद है।

पूरे तमिलनाडु में, एसबीआई, इंडियन बैंक, आईओबी, आईपीपीबी और छह पेंशनभोगी कल्याण संघों के साथ साझेदारी में 84 शहरों और 155 स्थानों पर डीएलसी शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। 160 नोडल अधिकारी अभियान का सुचारू संचालन सुनिश्चित करेंगे।

पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान जैसे सतत, प्रौद्योगिकी-संचालित सुधारों के माध्यम से पेंशनभोगियों के जीवन को आसान बनाने और डिजिटल सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।

Read More »

भारत और सऊदी अरब ने सांस्कृतिक सहयोग समझौता पर हस्ताक्षर किए

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और सऊदी अरब के संस्कृति मंत्री प्रिंस बद्र बिन अब्दुल्ला बिन फरहान अल सऊद ने 9 नवंबर 2025 को रियाद में सांस्कृतिक सहयोग पर द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य कला, विरासत, संगीत और साहित्य सहित विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देकर दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करना है। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने, नियामक और नीतिगत अनुभवों को साझा करने और त्योहारों एवं आयोजनों में भागीदारी को सुगम बनाने पर आधारित है। यह समझौता सांस्कृतिक संस्थानों के बीच संचार को भी प्रोत्साहित करता है और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से संबंधित ज्ञान और व्यवहार के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।

दोनों मंत्रियों ने, हस्ताक्षर समारोह से पहले द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों में सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने और सांस्कृतिक क्षेत्र में संयुक्त सहयोग गतिविधियों को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। भारत और सऊदी अरब के बीच दीर्घकालिक सांस्कृतिक संबंधों और लोगों के बीच आपसी संपर्क पर आधारित गहरे ऐतिहासिक संबंधों का सम्मान करते हुए दोनों मंत्री इस बात पर सहमत हुए कि सांस्कृतिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों में बढ़ती गति को और बल मिलेगा।

दोनों संस्कृति मंत्री भारत-सऊदी अरब सामरिक भागीदारी परिषद (एसपीसी) के अंतर्गत पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग की नवगठित मंत्रिस्तरीय समिति के सह-अध्यक्ष भी हैं। इस समिति की घोषणा अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सऊदी अरब के जेद्दा की राजकीय यात्रा के दौरान की गई थी। ध्यान रहे, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग पर मंत्रिस्तरीय समिति के गठन के बाद से दोनों संस्कृति मंत्रियों की यह पहली द्विपक्षीय बैठक है।

Read More »

इफ्फी 2025 में भारत और दुनिया भर से सात निर्देशकों की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्में दिखाई जाएंगी

अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में बेहतरीन नई प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, 56वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव  (इफ्फी) 2025 में निर्देशक के बेस्ट डेब्यू फीचर फिल्म अवॉर्ड के लिए विशेष रूप से चुनी गई पांच अंतरराष्ट्रीय और दो भारतीय फ़िल्में दिखाई जाएंगी।

विजेता को प्रतिष्ठित सिल्वर पीकॉक, ₹10 लाख का नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र मिलेगा।

सिनेमा के दिग्गजों की जानी-मानी जूरी विजेता का फैसला करेगी। जूरी की अध्यक्षता मशहूर भारतीय फिल्म निर्माता राकेश ओमप्रकाश मेहरा करेंगे। उनके साथ ग्रीम क्लिफर्ड (संपादक और निर्देशक, ऑस्ट्रेलिया), कैथरीना शटलर (एक्टर, जर्मनी), चंद्रन रत्नम (फिल्म निर्माता, श्रीलंका) और रेमी एडेफरासिन (सिनेमैटोग्राफर, इंग्लैंड) भी होंगे।

हर साल की तरह, इस वर्ष के फिल्मोत्सव में भी पहली बार फिल्म बनाने वाले फिल्म निर्माताओं के बेहतरीन काम को दिखाया जायेगा और दुनिया भर के अगली पीढ़ी के कहानीकारों के सिनेमैटिक विज़न को पेश किया जाएगा।

फ्रैंक

एस्टोनियाई फिल्म निर्माता टोनिस पिल इस मार्मिक कमिंग-ऑफ-एज ड्रामा के साथ फीचर फिल्म में डेब्यू कर रहे हैं। फिल्म का प्रीमियर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल फॉर चिल्ड्रन एंड यंग ऑडियंस – श्लिंगेल 2025 में हुआ, जहाँ इसे FIPRESCI जूरी पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों के लिए नामित किया गया था।

घरेलू हिंसा की क्रूर घटना के बाद, 13 वर्ष का पॉल अपनी जगह से उजड़ जाता है और खुद को नए शहर में पाता है। वहाँ अपनेपन की भावना की तलाश उसे गलत फैसलों की श्रृंखला में ले जाती है। जैसे ही उसका भविष्य बिगड़ने लगता है, एक सनकी, दिव्यांग अजनबी के साथ अप्रत्याशित रिश्ता उसके जीवन की दिशा बदल देता है।

यह फिल्म टूटे परिवारों, बचपन के ज़ख्मों के शांत दर्द और अप्रत्याशित दोस्ती की परिवर्तनकारी शक्ति को कोमलता से दिखाती है।

फ्यूरी (मूल नामला फुरिया)

स्पैनिश फिल्ममेकर जेम्मा ब्लास्को की पावरफुल डेब्यू फीचर फिल्म फ्यूरी एक ब्रूटल ड्रामा है जो बोल्ड नई आवाज़ के आने का संकेत देती है। यह फिल्म SXSW फिल्म फेस्टिवल 2025 और सैन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 में प्रीमियर हुई।

अभिनेत्री एलेक्जेंड्रा ने फिल्म में मेडिया की भूमिका निभाई है। नए साल की शाम को रेप होने के बाद वह मेडिया के किरदार के ज़रिए अपने दर्द को बाहर निकालती है, जबकि उसका भाई एड्रियन उसे बचाने में नाकाम रहने के लिए शर्मिंदगी और गुस्से से जूझता है।

यह फिल्म महिलावादी नजरिए से  उस डर, शर्म, घृणा और गिल्ट की पड़ताल पेश करती है जिसका सामना हिंसक, पितृसत्तात्मक समाज में यौन शोषण से बचे लोगों को करना पड़ता है।

कार्ला

जर्मन फिल्ममेकर क्रिस्टीना टूर्नाट्ज़ेस का डेब्यू ड्रामा कार्ला का प्रीमियर म्यूनिख फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहाँ इसने बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट स्क्रीनराइटर के दोअवॉर्ड जीते।

1962 में म्यूनिख में सेट, यह फिल्म 12 वर्ष की कार्ला की सच्ची कहानी बताती है, जो वर्षों के दुर्व्यवहार से सुरक्षा पाने के लिए अपने पिता के खिलाफ केस दर्ज कराती है।

बहुत ज़्यादा संवेदनशीलता और एटमॉस्फेरिक सिनेमैटोग्राफी के साथ बनाई गई, यह फिल्म बच्चे की अपनी ही ज़ुबान में बताई गई कहानी का सशक्त वर्णन है। कार्ला के साथ, टूर्नाट्ज़ेस एक ऐसी सिनेमैटिक भाषा बनाती हैं जो अनकही बातों को कहने में सक्षम है – जो कोमलता, स्पष्टता और ज़बरदस्त सुरक्षा से बनी है।

माई  डॉटर्स हेयर (ओरिजिनल टाइटल – राहा)

ईरानी निर्देशक हेसाम फराहमंद अपनी मशहूर लघु फिल्मों और डॉक्यूमेंट्रीज़ के बाद राहा के साथ एक ज़बरदस्त सोशल ड्रामा लेकर आए हैं।

फिल्म तोहिद पर आधारित है, जो अपने परिवार के लिए थोड़ी खुशी लाने के लिए अपनी छोटी बेटी के बाल बेचकर सेकंड हैंड लैपटॉप खरीदता है। लेकिन जब एक अमीर परिवार लैपटॉप की ओनरशिप पर सवाल उठाता है, तो झगड़ों की एक चेन गहरे क्लास डिवीज़न को सामने लाती है।

असल ज़िंदगी की सच्चाइयों से प्रेरित होकर, फराहमंद एक ऐसी दुनिया बनाते हैं जहाँ नैतिकता धुंधली हो जाती है और न्याय कमज़ोर होता है। बिना किसी लाग-लपेट के ऑब्ज़र्वेशन के साथ, राहा गरिमा, संघर्ष और ज़िंदा रहने की खामोश कीमत के बारे में सार्वभौमिक कहानी बन जाती है।

  डेविल स्मोक्स (एंड सेव्स द बर्न्ट मैचेस इन द सेम बॉक्स)

(ओरिजिनल टाइटल – एल डियाब्लो फुमा (वाई गार्डस लास कैबेज़ास डे लॉस सेरिलोस क्वेमाडोस एन ला मिस्मा काजा))

मैक्सिकन फिल्ममेकर अर्नेस्टो मार्टिनेज़ बूसियो की विशेष पहली फीचर फिल्म ने बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 में पहला पर्सपेक्टिव्स कॉम्पिटिशन जीता।

यह पाँच भाई-बहनों की कहानी है जिन्हें उनके माता-पिता छोड़कर चले जाते हैं और वे खुद ही अपना ख्याल रखते हैं। जैसे-जैसे वे अकेलेपन से गुज़रते हैं, वे अपनी चिंताओं को अपनी सिज़ोफ्रेनिक दादी के अस्थिर दिमाग के ज़रिए दिखाते हैं, और एक-दूसरे का साथ बनाए रखने की लड़ाई में कल्पना और हकीकत के बीच की लाइन को धुंधला कर देते हैं।

एलिप्टिकल नैरेटिव के ज़रिए बनाई गई यह फिल्म बचपन के डर और इंस्टिंक्ट्स के बारे में तीखी, परेशान करने वाली बातें बताती है। यह जानी-पहचानी “होम अलोन” कहानी को डर, कल्पना और ज़िंदा रहने की परत दर परत मनोवैज्ञानिक खोज में बदल देती है।

शेप ऑफ़ मोमो

भारतीय  फिल्म निर्माता त्रिबेनी राय की पहली फीचर फिल्म शेप ऑफ़ मोमो ने शानदार फेस्टिवल जर्नी के बाद डेब्यू कॉम्पिटिशन में अच्छी एंट्री की है। यह कान 2025 में “HAF गोज़ टू कान” शोकेस के लिए पांच एशियन वर्क्स-इन-प्रोग्रेस में से एक के तौर पर चुनी गई थी। इस फिल्म का प्रीमियर बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ और सैन सेबेस्टियन में भी दिखाई गई, जहाँ इसे न्यू डायरेक्टर्स अवॉर्ड के लिए नामित किया गया था।

सिक्किम में सेट और नेपाली में फिल्माई गई, यह कहानी बिष्णु के बारे में है। वह अपने कई पीढ़ियों वाले महिलाओं के घर लौटती है, जो अब सुस्ती में डूबा हुआ है। खुद के लिए और उनके लिए आज़ादी वापस पाने के लिए दृढ़, वह पितृसत्ता द्वारा बनाए गए रूटीन को तोड़ती है। हर उस महिला को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है कि वह विरासत में मिली सीमाओं को स्वीकार करे या उनका विरोध करे।

शेप ऑफ़ मोमो परंपरा, आज़ादी और परिवारों के अंदर पैदा होने वाली शांत क्रांतियों पर भावपूर्ण विचार है।

आता थांबायचा नाय! (इंग्लिश टाइटल – नाउ,  देयर इज नो शॉपिंग!)

एक्टर शिवराज वायचल की यह पहली फीचर फिल्म है। यह मराठी भाषा का ड्रामा है जो मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के क्लास IV सफाई  कर्मियों के एक समूह की सच्ची कहानी पर आधारित है। ये लोग एक समर्पित अधिकारी से प्रेरित होकर अपनी 10वीं कक्षा की परीक्षा पूरी करने के लिए स्कूल वापस जाने का फैसला करते हैं।

हास्य और भावनाओं का मेल यह फिल्म हिम्मत, काम की गरिमा और शिक्षा की बदलने वाली ताकत का सम्मान करती है – यह साबित करती है कि सीखने, सपने देखने या फिर से शुरू करने में कभी देर नहीं होती।

Read More »

आकाश से बरसात तक : क्लाउड सीडिंग का विज्ञान और प्रभावशीलता

क्लाउड सीडिंग, यानी कृत्रिम वर्षा उत्पन्न करने की एक वैज्ञानिक तकनीक। जब बादल मौजूद होते हुए भी वर्षा नहीं होती, तब वैज्ञानिक उनमें कुछ रासायनिक तत्वों का छिड़काव करते हैं, जिससे जलवाष्प संघनित होकर वर्षा की बूंदों में बदल जाती है।आमतौर पर इसमें सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड या ड्राई आइस जैसे पदार्थों का प्रयोग किया जाता है।आज बढ़ते तापमान, घटते जलस्तर, पिघलते ग्लेशियर और जल–विनाश की वजह से सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है। ऐसे में क्लाउड सीडिंग को एक आशाजनक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।यह तकनीक कई देशों में लंबे समय से सफलतापूर्वक अपनाई जा रही है, जबकि भारत में अभी यह सीमित स्तर पर ही प्रयोग में है।हाल के वर्षों में भारत सरकार और कई राज्य सरकारें सूखे से निपटने के लिए इस तकनीक को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इसका प्रयोग हो चुका है।हालाँकि यह भी सच है कि हर जगह या हर मौसम में क्लाउड सीडिंग कारगर नहीं होती।अगर बादलों में नमी का स्तर या तापमान अनुकूल न हो, तो वर्षा की संभावना कम हो जाती है।इस प्रक्रिया के लिए वायुमंडलीय परिस्थितियाँ, ऊर्जा और नमी का सही संतुलन होना जरूरी है।इसी कारण बिना मौसम अनुमान के क्लाउड सीडिंग करना महंगा और व्यर्थ साबित हो सकता है।दिल्ली–एनसीआर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गंगा के मैदानी इलाकों में यह तकनीक वायु प्रदूषण घटाने के उपाय के रूप में भी चर्चा में रही है।ठंड के मौसम में जब वायुमंडलीय परतें नीचे बैठ जाती हैं और प्रदूषक कण ऊपर नहीं जा पाते, तब हवा की गुणवत्ता “खराब” या “बहुत खराब” स्तर पर पहुँच जाती है।ऐसे में यदि मौसम अनुकूल हो तो क्लाउड सीडिंग प्रदूषण कम करने का एक संभावित उपाय हो सकता है।

क्लाउड सीडिंग की संभावनाएँ और सीमाएँ

ठंड और गंगा–यमुना के मैदानी क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर रहती है।यह तब और बढ़ जाती है जब हवा की गति कम हो जाती है और धूल तथा धुआँ वातावरण में फँस जाता है।क्लाउड सीडिंग को इस स्थिति में संभावित समाधान के रूप में देखा गया है, क्योंकि कृत्रिम वर्षा से हवा में मौजूद धूल के कण नीचे बैठ सकते हैं और प्रदूषण का स्तर घट सकता है।हालाँकि यह प्रक्रिया पूरी तरह मौसम और नमी पर निर्भर करती है।भारत में इसका प्रयोग पहली बार 1945 में अमेरिका के उदाहरण से प्रेरित होकर किया गया था।इसके बाद 1983, 1984 और 1993–94 में भारत के कई राज्यों में इस पर कार्य हुआ।आईआईटी कानपुर ने भी 2003–06 के बीच क्लाउड सीडिंग पर शोध किया।आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर मनीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि बादलों में 15 फ़ीसदी नमी के चलते कृत्रिम बारिश का प्रयोग सफल नहीं हो सका , लेकिन उन्होंने माना कि भविष्य में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।दिल्ली की जलवायु को देखते हुए सर्दियों में क्लाउड सीडिंग की संभावना कम रहती है, क्योंकि ठंड तो होती है लेकिन पर्याप्त नमी नहीं होती।जब तक कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) न आए, तब तक यहाँ बादलों का बनना मुश्किल होता है।यानी, तकनीकी तौर पर जब तक वातावरण अनुकूल न हो, क्लाउड सीडिंग संभव नहीं ~डॉ. रश्मि गोयल

Read More »

सहज योग पर कार्यशाल आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में  सहज योग पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसके लिए नागपुर से ६ सदस्यीय टीम आई जिसमे महेश , राजू , उमेश, मेघा, वंदना एवं वनिता रहीं। माँ सरस्वती के वंदन से कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। आज की तनाव भरी ज़िंदगी में आस पास के लोगों से प्रभावित होने ,एकाग्रता की कमी ,पढ़ाई में रुचि न होने और मानसिक रूप से परेशान रहने की समस्या से बचने के लिये इस कार्यशाला का आयोजन किया गया ।
मुख्य वक्ता मेघा लड़वीकर ने सर्वप्रथम विभिन्न नाड़ी चक्रों की सैद्धांतिक जानकारी छात्राओं को प्रदान की। इसके पश्चात 20 मिनट का सहज योग अभ्यास सदन को करवाया। मैडिटेशन के पश्चात छात्राओं के अनुभव पूछे और प्रत्येक व्यक्ति के भिन्न भिन्न प्रश्नों के उत्तर दिए तथा उनके अनुभव के कारण बताए।

प्राचार्या प्रो. सुमन ने सहज योग समिति का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज की तनाव भरी जिंदगी में सहज योग का अभ्यास वांछनीय है। कार्यशाला का संयोजन तथा संचालन डॉ प्रीति सिंह द्वारा किया गया। इस कार्यशाला में ६२ छात्राओं तथा २५ प्रवक्ताओं ने सहजयोग की सहजता को समझा और लाभान्वित हुए, सभी छात्राओं तथा शिक्षिकाओं ने कार्यशाला में उत्साहपूर्ण सहभागिता की।

Read More »