कानपुर 10 अक्टूबर को मण्डलायुक्त, कानपुर मण्डल, कानपुर की अध्यक्षता में विकास कार्यों की समीक्षा में योजनावार निम्नलिखित निर्देश दिए गए:-
1. जिलाधिकारीगण विशेष सत्यापन पखवाड़ा के अन्तर्गत जनहानि के दृष्टिगत महत्वपूर्ण स्थलों यथा गैस गोदाम, होटल, माल, निजी/सरकारी अस्पतालों आदि में फायर सैफ्टी व्यवस्था, परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मील राशन रखे जाने वाले कमरो के साफ-सफाई एवं सीलन की स्थिति, विद्यालयों के समीप से गुजरने वाले हाई टेंशन विद्युत लाइन, जर्जर कमरों में अध्यापन व आस-पास सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न मार्गो पर पुराने निर्मित पुलों के जर्जर होने की स्थिति तथा स्टेडियम के दर्शक दीर्घा स्टैण्ड की स्थिति का सत्यापन करावें तथा विभिन्न भवनो/चौराहों/मार्गो पर स्थापित सी0सी0टी0वी0 कैमरा के क्रियाशील होने की स्थिति का सत्यापन कराना सुनिश्चित करें।
2. दिनांक 09.11.2022 तक आई0जी0आर0एस0 के अन्तर्गत कानपुर मण्डल में मुख्यमंत्री सन्दर्भ के 14 प्रकरण डिफाल्टर श्रेणी से आच्छादित है। मण्डलायुक्त द्वारा आगामी 03 दिवस में समस्त डिफाल्टर सन्दर्भो को निस्तारित करने के निर्देश दिये गये। जनपद कानपुर देहात और कन्नौज में डिफाल्टर श्रेणी में एक भी प्रकरण नहीं है। समस्त अधिकारियों से कार्यालय दिवस में प्रातः 10ः00 बजे से 12ः00 बजे तक जनता की सुनवाई के उपस्थित होने के निर्देश दिये गये।
3. शासन के निर्देशानुसार ससमय समस्त मार्गों का गढड़ामुक्त किये जाने की समीक्षा की गयी। मुख्य अभियन्ता पी0डब्लू0डी0 द्वारा अवगत कराया गया कि मण्डल में पैच मरम्मत के 4631.98 कि0मी0, नवीनीकरण के 801.24 कि0मी0 व विशेष मरम्मत के 673.63 कि0मी0 लक्ष्य के सापेक्ष क्रमशः 3194.62 कि0मी0, 301.29 कि0मी0 व 203.17 कि0मी0 की क्रमिक प्रगति प्राप्त कर ली गयी है। मण्डलायुक्त ने गड्ढा मुक्त कराये गये सड़कों के दिनांक 15.11.2022 तक शत-प्रतिशत सत्यापन के निर्देश दिये गये तथा मण्डल स्तर पर 02-02 टीमें गठित कर रैण्डम सत्यापन के भी निर्देश दिये गये।
4. क्षेत्रीय खाद्य नियन्त्रक द्वारा अवगत कराया गया कि धान क्रय केन्द्र हेतु मण्डल में लक्षित 239 केन्द्रों के सापेक्ष 174 केन्द्र स्थापित कर लिये गये है एवं 02 केन्द्रों पर खरीद प्रारम्भ हो चुकी है। मण्डल के लक्ष्य 367000 मी0टन के सापेक्ष अद्यतन 40.84 मी0टन की खरीद की जा चुकी है। इसी प्रकार बाजरा में 7000 मी0टन लक्ष्य के सापेक्ष 442.15 मी0टन खरीद हो चुकी है, जबकि मक्के में खरीद प्रारम्भ नहीं हुयी है। निर्धारित समस्त केन्द्रों पर पूर्ण क्षमता के साथ धान क्रय किया जाए। ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कृषकों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़ें।
5. पी0एम0स्वनिधि एवं डिजिटल ट्रांजेक्शन के अन्तर्गत समीक्षा में पाया गया कि द्वितीय ऋण वितरण की प्रगति जनपद कानपुर देहात में 70.38 प्रतिशत व इटावा 76.07 प्रतिशत कम है, जबकि डिजटली एक्टिव स्ट्रीट वेण्डर की प्रगति जनपद कानपुर नगर में 35 प्रतिशत को छोड़कर अन्य जनपदांें में अपेक्षाकृत कम है। मण्डलायुक्त द्वारा निर्देशित किया गया कि राज्य औसत से अधिक प्रगति सुनिश्चित करायी जाय।
6. अपर निदेशक पशुपालन द्वारा अवगत कराया गया कि वृहद गोवंश संरक्षण स्थलों में मण्डल में अभी भी 05 केन्द्र निर्माणाधीन है, जो कानपुर नगर में ग्राम खोदन वि0ख0 शिवराजपुर, कानपुर देहात में ग्राम जगदीशपुर वि0ख0 मलासा, ग्राम जेसलपुर महादेवा, वि0ख0 राजपुर, इटावा में ग्राम थरी वि0ख0 भरथना व औरैया में ग्राम रजुआमऊ, वि0ख0 अछल्दा हैं। उपस्थित सम्बन्धित जिलाधिकारियों द्वारा माह दिसम्बर, 2022 तक पूर्ण कराने का आश्वासन दिया गया। मण्डलायुक्त द्वारा निर्देश दिये गये कि गोवंश का ठण्ड से बचाव हेतु अभी से सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली जाय। लम्पी रोग से ग्रसित पशुओं के उपचार में शिथिलता नहीं बरती जाए। अतिरिक्त टीमे लगाकर प्रभावित क्षेत्र में शत-प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण कराया जाए।
7. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रमों के अन्तर्गत डेंगू एवं अन्य संक्रामक रोग से बचाव, हेल्थ ए0टी0एम0, आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड व हेल्थ एवं वेलनेस सेन्टर हेतु भूमि की उपलब्धता के सम्बन्ध में समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिये गये। संक्रमक रोग के प्रसार को देखते हुए, इसके रोकथाम हेतु जन सामान्य को जागरुक करें। घर-घर लार्वारोधी दवाओं का छिड़काव कराया जाए। मरीजों को उचित चिकित्सा सुविधा मुहैया कराया जाए। प्रधानमंत्री जन अरोग्य योजना के अन्तर्गत गोल्डन कार्ड बनाए जाने की अपेक्षित प्रगति न होने पर खेद व्यक्त करते हुए अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य को निर्देशित किया गया कि मासान्त तक 35 प्रतिशत लाभार्थियों को गोल्डेन कार्ड से आच्छादित कर दिया जाए। संस्थागत प्रसव तथा गोल्डेन कार्ड में अपेक्षित प्रगति हेतु आशाओं का दायित्व निर्धारित करते हुए अपेक्षित प्रगति करने के निर्देश दिए गए।
8. संयुक्त निदेशक कृषि एवं जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि फसल अवशेष जलाए जाने की घटना कहीं भी प्रकाश में न आए, साथ ही पराली प्रबन्धन के दृष्टिगत नियमित समीक्षा की जाय। संयुक्त निदेशक कृषि यह देख ले कि मण्डल में कहीं भी उर्वरक की कमी न रहे।
9. बेसिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत आपरेशन कायाकल्प, डी0बी0टी0 के माध्यम से प्रति छात्र भुगतान, पाठ्य पुस्तकों का वितरण व गोद लिये विद्यालयों की प्रगति के सम्बन्ध में समीक्षा की गयी एवं आवश्यक निर्देश दिये गये। आपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत असंतृप्त विद्यालयों की संख्या कानपुर देहात में 309, कन्नौज 302, औरैया 271, कानपुर नगर 268, फर्रूखाबाद 217 व इटावा 46 है। इसी प्रकार डी0बी0टी0 के माध्यम से लक्ष्य के सापेक्ष भुगतान की स्थिति कानपुर नगर में 54.23 प्रतिशत, कन्नौज 62.47 प्रतिशत, फर्रूखाबाद 65.60 प्रतिशत, औरैया 66.79 प्रतिशत, कानपुर देहात 68.04 प्रतिशत व इटावा 69.59 प्रतिशत है।
10. पंचायती राज विभाग के अन्तर्गत वर्ष 2022-23 में 5000 से अधिक आबादी वाले ग्रामों को मॉडल ओ0डी0एफ0 प्लस ग्रामों में वित्तीय प्रगति, जनपद स्तर पर प्रस्तावित प्रशिक्षण, वर्ष 2022-23 के अन्त्येष्टि स्थल निर्माण हेतु ग्राम पंचायत चयन तथा क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत द्वारा व्यय धनराशि की समीक्षा की गयी। उप निदेशक पंचायत द्वारा अवगत कराया गया कि एस0एल0डब्लू0एम0 के अन्तर्गत मण्डल को धनराशि रू0 87.24 करोड़ प्राप्त हुआ है, जिसके सापेक्ष व्यय मात्र 3.54 करोड़ हुआ है। इसी प्रकार जनपद कानपुर देहात व फर्रूखाबाद में प्रशिक्षण कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ है। अन्त्येष्टि स्थल निर्माण हेतु जनपद औरैया व फर्रूखाबाद से प्रस्ताव अप्राप्त है। क्षेत्र पंचायत के अन्तर्गत जनपद कानपुर नगर में व्यय मात्र 14.54 प्रतिशत है, जो मण्डल में सबसे कम है। इसी प्रकार जिला पंचायतों में जनपद कानपुर देहात की वित्तीय प्रगति 16.41 प्रतिशत व इटावा की प्रगति 17.19 प्रतिशत है। मण्डलायुक्त के द्वारा एस0एल0डब्लू0एम0 व क्षेत्र/जिला पंचायत की वित्तीय प्रगति बढ़ाने के साथ-साथ जनपद कानपुर देहात व फर्रूखाबाद में प्रशिक्षण तत्काल प्राारम्भ कराये जाने व जनपद औरैया व फर्रूखाबाद से अन्त्येष्टि स्थल के प्रस्ताव प्रेषित किये जाने के निर्देश दिये गये।
11. आज की इस मण्डलीय बैठक में सभी कार्यक्रमों की समीक्षा में जनपदों द्वारा औसत प्राप्तांक के आधार पर रैंकिंग निर्धारित की गयी, जिसमें जनपद फर्रूखाबाद प्रथम 96.54 प्रतिशत, इटावा द्वितीय 96.08 प्रतिशत, औरैया तृतीय 94.04 प्रतिशत, कन्नौज चतुर्थ 92.94 प्रतिशत, कानपुर नगर पांचवा 92.69 प्रतिशत व कानपुर देहात 91.82 प्रतिशत अन्तिम स्थान पर है।
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शिक्षा और भूमि के बाद अब मेडिकल माफियाओं का फैलता संजाल कानून व्यवस्था के लिए एक नयी चुनौती बनकर उभरा है| इसके लिए देश की लचर एवं अदूरदर्शी स्वास्थ्य नीतियाँ ही सर्वाधिक जिम्मेदार हैं| वहीँ सरकारी तन्त्र में व्याप्त भ्रष्टाचार कडुवे करेले को नीम का सम्बल प्रदान कर रहा है| हाल ही में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तथा उड़ीसा के बरहामपुर में मेडिकल माफियाओं के विरुद्ध हुई पुलिसिया कार्रवाई से इस बात को भलीभांति समझा जा सकता है| गोरखपुर के मेडिकल माफिया पर फर्जी दस्तावेज के सहारे मेडिकल कालेज चलाने का आरोप है तो उड़ीसा में एक ऐसा गैंग पुलिस द्वारा पकड़ा गया है जो सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजनों को बहला-फुसला कर प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने के लिए प्रेरित करता था| जिसके बदले प्राइवेट अस्पतालों से उन्हें दलाली के रूप में मोटी रकम मिलती थी| ऐसे मेडिकल माफिया मात्र गोरखपुर और बरहामपुर में ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने में फैले हुए हैं| जो अपनी तिजोरी भरने के लिए सदैव आम जन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं| मानक को ताक पर रखकर गली-गली चल रहे नर्सिंग होम स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से चिकित्सा सेवा के नाम पर जो कुछ कर रहे हैं वह भी अब धीरे-धीरे उजागर होने लगा है| अनगिनत झोलाछाप डॉक्टर और फार्मासिस्ट स्वयं का नर्सिंग होम खोलकर बैठे हैं और सुबह-शाम डॉक्टर बनकर ओपीडी करते हैं| जिससे इनके झांसे में आने वाले आम जन का जीवन संकट में पड़ना स्वाभाविक है| यह सर्वविदित है कि लगभग सभी सरकारी डॉक्टर अपना छोटा-बड़ा नर्सिंग होम चलाते हैं| लेकिन अब तो सरकारी अस्पतालों के फार्मासिस्ट एवं कर्मचारी तक भी अपना-अपना निजी अस्पताल खोले हुए हैं| जहाँ मानक की धज्जियाँ उड़ती हुई कभी भी देखी जा सकती हैं| ज्यादातर ने अपने यहाँ मानक विहीन ट्रामा सेंटर, आई.सी.यू. (इंटेंसिव केयर यूनिट) तथा एन.आई.सी.यू.(नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) तक खोल रखा है| जिसके नाम पर गम्भीर मरीजों से पहले तो जमकर वसूली होती है और जब मरीज की हालत ज्यादा अधिक गम्भीर हो जाती है तब उनके परिजनों से कहीं और ले जाने के लिए कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है| इस परिस्थिति में दो-चार प्रतिशत सौभाग्यशाली मरीजों को छोड़कर शेष की मृत्यु हो जाना सुनिश्चित है| मरीज की मृत्यु से आहत परिजन यदि हंगामा करते हैं तो कानून के रक्षक अस्पतालों की सुरक्षा में तटस्थ नजर आते हैं| परिणामस्वरूप परिजनों को अपने मरीज की मृत्यु को विधि का लेख मानकर सन्तोष करना पड़ता है और मेडिकल माफिया फिर नये शिकार की प्रतीक्षा में लग जाते हैं| कुछ जागरूक परिजन यदि इलाज में हुई लापरवाही की शिकायत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से करते हैं तो जाँच के नाम पर उन्हें परेशान करते हुए शासनादेश संख्या 13-1/97-का-1/97 का हवाला देकर शिकायत से सम्बन्धित शपथ-पत्र एवं साक्ष्य के साथ बयान देने हेतु उपस्थित होने का निर्देश दिया जाता है| जो एक सामान्य व्यक्ति के लिए दुरूह कार्य जैसा है| इसलिए कई शिकायतकर्ता जाते ही नहीं हैं| तो कई पर अस्पताल से जुड़े लोग साम, दाम एवं दण्ड की नीति अपनाकर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाते हैं और प्रायः सफल भी होते हैं| दोनों ही मामलों में अपस्ताल सञ्चालकों पर लगाये गये आरोप फर्जी सिद्ध करते हुए उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया जाता है| जो शिकायतकर्ता शपथ-पत्र, साक्ष्य और बयान देने हेतु पहुँच भी जाते हैं| उन्हें तरह-तरह के पश्नों और दलीलें देकर हतोत्साहित करने का प्रयास होता है| मसलन ‘आप उस अपस्ताल में गये ही क्यों?’, ‘आपने उस अपस्ताल के डाक्टरों की डिग्री देखे बिना उनसे इलाज क्यों शुरू करवाया?’, ‘आपके मरीज की रिपोर्ट देखकर लगता है कि उनकी हालत बहुत ख़राब थी लेकिन उनका इलाज जितना हुआ है वह सही हुआ है|’ या ‘उनकी उम्र बहुत ज्यादा थी’ आदि बेतुके सवालों और कुतर्कों के माध्यम से अस्पताल संचालकों को बचाने का पूरा प्रयास किया जाता है| ऐसे में मेडिकल माफियाओं के हौंसले बुलन्द होना स्वाभाविक है|





गंगा वाटर रैली की तैयारी तथा नदी मार्ग के सर्वे के लिए , आयुक्त कानपुर मंडल डाक्टर राजशेखर ने हरी झंडी दिखाकर रेकी दल को रवाना किया।इस अवसर पर