भारतीय स्वरूप संवाददाता भारत 26 नवंबर 2024 को भारतीय संविधान लागू होने के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। इस अवसर पर क्राइस्ट चर्च कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग ने “भारतीय संविधान के 75 वर्षों की यात्रा” विषय पर एक व्याख्यान और पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि, क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्रिंसिपल और सचिव प्रोफेसर जोसेफ डैनियल; मुख्य वक्ता श्री प्रकल्प शर्मा, कानूनी विशेषज्ञ और डिप्टी रजिस्ट्रार आईआईटी कानपुर; और राजनीति विज्ञान विभाग पूर्व प्रमुख प्रो. आशुतोष सक्सेना ने अध्यक्षता की.
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और ज्ञान की देवी मां सरस्वती के आह्वान के साथ हुई। संयोजिका प्रो. विभा दीक्षित ने विशिष्ट अतिथियों, सहकर्मियों और छात्रों का स्वागत किया और कार्यक्रम की विषयवस्तु से परिचय कराया। उन्होंने संविधान में निहित सिद्धांतों की रक्षा और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुख्य वक्ता और संवैधानिक कानून विशेषज्ञ, श्री प्रकल्प शर्मा ने संवैधानिक साक्षरता के महत्व पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया. उन्होंने बताया कि कैसे प्रत्येक नागरिक की अपने अधिकारों के बारे में चैतन्यता लोकतंत्र की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। “संविधान हमारे अतीत का एक दस्तावेज मात्र नहीं है; यह हमारे भविष्य का मार्ग दर्शक है।” उनके व्याख्यान में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कैसे भारतीय संविधान ने विभिन्न चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया है और समावेशी और जीवंत लोकतंत्र को बढ़ावा देते हुए शासन में संवैधानिक मूल्यों, आदर्शों और दृष्टिकोण को अक्षुण्ण रखा है।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि प्रोफेसर जोसेफ डेनियल ने छात्रों को भारतीय संविधान में निहित आदर्शों और उद्देश्यों का पालन करते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए खुद को समर्पित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सत्र के अध्यक्ष प्रो. आशुतोष सक्सेना ने पैनलिस्टों के दृष्टिकोण में निहित सार को बताते हुए विषय पर अपनी मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रस्तुत की. उन्होंने संवैधानिक व्याख्या, कानूनी मिसालों के महत्व और युवा नागरिक जीवन में संविधान का महत्व पर प्रकाश डाला। सभी पैनलिस्टों ने इस बात पर जोर दिया कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सक्रिय, ज्ञानपूर्ण नागरिक भागीदारी आवश्यक है। इसके उपरान्त इंटरैक्टिव सत्र में छात्रों एवं शिक्षकों ने संविधान में डिजिटल गोपनीयता, सामाजिक न्याय और पर्यावरण नीति पर सवाल किये. सभी पनेलिस्ट ने छात्रों और शिक्षकों को समान रूप से संवैधानिक मूल्यों के संरक्षक के रूप में अपनी भूमिकाओं के बारे में गंभीरता से सोचने के लिए प्रोत्साहित किया।
राजनीति विज्ञान के बी. ए. प्रथम सेमेस्टर के छात्रों ने इस विषय पर एक “पोस्टर प्रदर्शनी” लगाई और सभी उपस्थित लोगों से इस प्रयास की सराहना की। सर्वश्रेष्ठ पोस्टरों को पुरस्कार के लिए चुना गया। कार्यक्रम का समापन डॉ. अर्चना पांडे द्वारा प्रस्तावित धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। डॉ. अर्चना वर्मा और उनकी आयोजन टीम, जिसमें परमा मिश्रा, पूजा कमल और छात्र शामिल थे, के प्रभावी समन्वय के कारण यह कार्यक्रम बेहद सफल रहा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों और शिक्षकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही जिनमे डॉ. जुनेजा, डॉ. अनिंदिता, डॉ. नवीन अम्बष्ट, डॉ. सत्यप्रकाश डॉ. हिमांशु आदि मौजूद थे.
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जिसमें महाविद्यालय की नॉलेज इंस्टीट्यूशन प्रभारी डॉ ज्योत्सना पांडे ने सभी छात्राओं को माय भारत पोर्टल के महत्व एवं उस पर रजिस्ट्रेशन करने के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारियां दी। महाविद्यालय की माई भारत कैंपस एंबेसडर श्रद्धा त्रिवेदी ने एनएसएस की छात्राओं के साथ-साथ महाविद्यालय की अन्य छात्राओं को भी माई भारत पोर्टल पर रजिस्टर करवाया। साथ में वॉलिंटियर सिमरन वर्मा व आदिती का योगदान सराहनीय रहा। कार्यक्रम में 75 छात्राएं उपस्थित रही
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जिसमें छात्राओं ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के द्वारा आपदा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखें। महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम ने बताया कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य छात्राओं को विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक एवं मनुष्यकृत आपदाओं से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्रदान करना तथा आपदाओं से बचने हेतु किस प्रकार की प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता है ? इन विषयों की जानकारी देना है। महाविद्यालय की सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो अर्चना वर्मा ने छात्राओं के लिए इस प्रकार की संगोष्ठियों के आयोजन को अति महत्वपूर्ण बताया तथा भूगोल विभाग को आपदा प्रबंधन जैसे समीचीन विषय पर संगोष्ठी आयोजित करने के लिए शुभकामनाएं दी। इस संगोष्ठी में कुल 25 छात्राओं के द्वारा अपने प्रेजेंटेशन दिए गए तथा लगभग 200 छात्राएं उपस्थिति रही। संगोष्ठी की अध्यक्षता भूगोल विभाग प्रभारी डॉ संगीता सिरोही ने तथा संचालन संगोष्ठी की कन्वीनर डॉ अंजना श्रीवास्तव ने किया । संगोष्ठी की संयोजिका डॉ शशि बाला सिंह तथा सहसंयोजिका श्रीमती श्वेता गोंड रही।