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एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज और अमर उजाला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 27 जनवरी सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के चतुर्थ दिन एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज, कानपुर की कादोम्बिनी देवी राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई और अमर उजाला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में उच्च प्राथमिक विद्यालय कम्पोजिट, ग्राम पंचायत-नेतुआ, जनपद- उन्नाव, में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया गया जिसमें रक्तचाप, शुगर, नेत्र, रक्त आदि की मुफ़्त जाँच की गई| शिविर के आरंभ में एन.एस.एस. प्रभारी डॉ. श्वेता रानी, सह-प्रभारी डॉ. अनामिका, उपस्थित डॉक्टर्स और उनके सहयोगियों के द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित किए गए। शिविर में उजाला सिगनस के फिजिशियन डॉ. आर. के. तिवारी, नेत्र चिकित्सक डॉ. अभिषेक के द्वारा ग्रामीणों को मुफ़्त चिकित्सकीय परामर्श भी प्रदान किया गया। लगभग 200 ग्रामीणों ने मुफ़्त स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का लाभ उठाय। शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों ने भी अपने की जाँच करवाईं।

तृतीय दिवस की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के पश्चात्‌ स्वयंसेविकाओं ने बस्ती में जाकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य शिविर की जानकारी दी और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रेरित किया| एन. एस. एस. की स्वयंसेविका नंदिका श्रीवास्तव, दिव्यांशी शर्मा, कोमल दिवाकर, मन्तशा, अंशिका, शिवानी, सिमरन, खुशी एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी  हरिनारायण ने शिविर के सफल आयोजन में विशेष योगदान दिया। शिविर में लगभग 50 राष्ट्रीय स्वयंसेविकाओं ने सहभागिता की।

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दिल्ली के केली बॉयज बनाएंगे इंडियाज़ गॉट टैलेंट सीज़न 11’ में अपनी खास पहचान

भारतीय स्वरूप संवाददाता दिल्ली  देश के सबसे लोकप्रिय और प्रतिष्ठित टैलेंट रियलिटी शो ‘इंडियाज़ गॉट टैलेंट सीज़न 11’ में इस बार दिल्ली से आए दमदार कंटेस्टेंट केली बॉयज अपने अनोखे अंदाज़ और जबरदस्त परफॉर्मेंस से दर्शकों का दिल जीतने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब सवाल यही है कि क्या केली बॉयज शो के स्पॉटलाइट में अपनी जगह बना पाएंगे या नहीं—इसका जवाब जानने के लिए दर्शकों को देखना होगा सोनी पल, रोज़ाना रात 8 बजे, सोमवार से शनिवार।

दिल्ली से ताल्लुक रखने वाले केली बॉयज अपने अलग कॉन्सेप्ट, फ्यूज़न स्टाइल और ग्रुप केमिस्ट्री के लिए जाने जाते हैं। उनकी परफॉर्मेंस युवाओं के बीच खासा क्रेज़ पैदा कर रही है और यही वजह है कि दर्शक बेसब्री से उनके अगले परफॉर्मेंस का इंतज़ार कर रहे हैं।

इंडियाज़ गॉट टैलेंट सीज़न देश का सबसे बड़ा टैलेंट हंट शो है, जिसने सालों से सिंगिंग, डांसिंग, म्यूज़िक, स्टंट्स और अनोखी प्रतिभाओं को एक राष्ट्रीय मंच दिया है। सीज़न 11 में भी नए जोश, नए जुनून और बेहतरीन परफॉर्मेंस के साथ शो दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रहा है।

सोनी पल भारत का लोकप्रिय फ्री-टू-एयर एंटरटेनमेंट चैनल है, जो हर वर्ग के दर्शकों के लिए मनोरंजक और पारिवारिक कंटेंट प्रस्तुत करता है। सोनी पल पर प्रसारित होने वाला इंडियाज़ गॉट टैलेंट सीज़न 11’दर्शकों को प्राइम टाइम में बेहतरीन एंटरटेनमेंट का अनुभव दे रहा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या दिल्ली के केली बॉयज , इंडियाज़ गॉट टैलेंट सीज़न 11के मंच पर अपनी अलग पहचान बनाकर Spotlight में जगह बना पाते हैं या नहीं।

देखते रहिए सोनी पल, रोज़ रात 8 बजे, सोमवार से शनिवार—सिर्फ सोनी पल चैनल पर।

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दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ द्वारा खिचड़ी भोज आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के तत्वावधान में पारंपरिक खिचड़ी भोज का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आपसी सद्भाव, सहयोग और सामूहिक सहभागिता को सुदृढ़ करना रहा। इस अवसर पर महाविद्यालय स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम निदेशक प्रो अर्चना वर्मा एवं प्राचार्या प्रो. वंदना निगम की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के योगदान की सराहना की तथा इस प्रकार के आयोजनों को संस्थान की सकारात्मक कार्यसंस्कृति के लिए आवश्यक बताया।

कार्यक्रम में कार्यालय अधीक्षक कृष्णेन्द्र श्रीवास्तव, दीप द्विवेदी, शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र एवं सचिव सहित समस्त पदाधिकारी, प्राध्यापिकाएं, छात्रायें एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से खिचड़ी भोज का दही बड़ा, अचार तथा पापड़ के साथ आनंद लिया।कार्यक्रम के सफल आयोजन में शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा। अंत में संघ की ओर से सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया गया।

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भारतीय रेलवे ने 2026 की समय सारणी में 549 ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई जिससे यात्रा समय में कमी आई और कार्यकुशलता बढ़ी

भारतीय रेलवे ने ट्रेन समय सारणी 2026 के अंतर्गत अनेक नई ट्रेनें शुरू करने के अलावा मौजूदा सेवाओं का विस्तार किया और ट्रेनों के फेरे बढ़ाए। इसके साथ ही कई ट्रेनों को सुपरफास्ट में तब्दील किया और विभिन्न रेलवे जोन में सेवाओं की गति बढ़ाई गई। मध्य रेलवे जोन में 4 नई ट्रेनें चलाई गईं, 6 का विस्तार किया गया और 30 ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई गई। इसी तरह पूर्व तटीय रेलवे में 4 नई ट्रेनों चलाई गईं, 4 का विस्तार किया गया और 3 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई। पूर्व मध्य रेलवे में उल्लेखनीय विस्तार करते हुए 20 नई ट्रेनें चलाई गईं, 20 का विस्तार किया गया और 12 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई। पूर्व रेलवे में भी 6 नई ट्रेनें चलाई गईं, 4 का विस्तार किया गया और 32 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई।

उत्तर मध्य रेलवे ने 2 नई ट्रेनों शुरू कीं, 4 का विस्तार किया, 2 के फेरे बढ़ाए और 1 ट्रेन की गति बढ़ाई। उत्तर पूर्व रेलवे ने 8 नई ट्रेनें जोड़ीं, 4 का विस्तार किया, 2 के फेरे बढ़ाए और 12 ट्रेनों की गति में इजाफा किया। उत्तर पूर्व सीमांत रेलवे ने 10 नई ट्रेनें शुरू कीं और 36 ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई। इसी तरह, उत्तर रेलवे ने 20 नई ट्रेनें शुरू कीं, 10 का विस्तार किया और 24 ट्रेनों की गति बढ़ाई। उत्तर पश्चिम रेलवे ने अपनी सेवा में 12 नई ट्रेनें जोड़ीं, 6 का विस्तार किया, 2 के फेरे बढ़ाए और 89 ट्रेनों की गति में वृद्धि की।

दक्षिण रेलवे ने 6 नई ट्रेनें शुरू कीं, 4 का विस्तार किया, 2 को सुपरफास्ट में परिवर्तित किया और 75 ट्रेनों की गति बढ़ाई। दक्षिण पश्चिम रेलवे ने 8 नई ट्रेनें शुरू कीं, 6 का विस्तार किया, 8 को सुपरफास्ट में तब्दील किया और 117 ट्रेनों की गति बढ़ाई जो सभी जोनों में सबसे ज्यादा है।

पश्चिम मध्य रेलवे ने 8 नई ट्रेनें शुरू कीं और 27 ट्रेनों की गति बढ़ाई। वहीं, पश्चिम रेलवे  ने 10 नई ट्रेनें शुरू कीं, 10 ट्रेनों का विस्तार किया, 2 ट्रेनों के फेरे बढ़ाए और 80 ट्रेनों की गति में सुधार किया।

कुल मिलाकर, ट्रेनों की समय सारिणी 2026 के तहत, 122 नई ट्रेनें शुरू की गईं, 86 ट्रेनों का विस्तार किया गया, 8 ट्रेनों के फेरे बढ़ाये गए, 10 ट्रेनों को सुपरफास्ट ट्रेनों में बदला गया और 549 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई।

नई ट्रेनों की शुरुआत का विवरण

ट्रेन समय सारणी 2026 के तहत प्रीमियम, एक्सप्रेस और पैसेंजर सभी तरह की सेवाओं मेंमेंq मिलाजुला कर 122 नई ट्रेनों को शामिल किया गया। इनमें से 26 ‘अमृत भारत’ ट्रेनें शुरू की गईं, जिनमें 4 ट्रेनें टीएजी-टीओडी  के माध्यम से शुरू की गईं हैं। सबसे अधिक हिस्सेदारी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की है जिनकी 60 सेवाएँ शुरू की गईं, जिनमें से 8 सेवाएँ टीएजी-टीओडी के माध्यम से शुरू हुईं। इसके अतिरिक्त 2 हमसफर ट्रेनें, 2 जन शताब्दी ट्रेनें, 2 नमो भारत रैपिड रेल सेवाएँ और 2 राजधानी ट्रेनें शुरू की गईं।

इसके अतिरिक्त, सेमी-हाई-स्पीड कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए 28 वंदे भारत ट्रेनें जोड़ी गईं। कुल मिलाकर, इन श्रेणियों में इस अवधि के दौरान शुरू की गई कुल 122 नई ट्रेनें शामिल हैं।

ट्रेनों की गति बढ़ाई गई

समय की पाबंदी में सुधार और यात्रा के समय को कम करने के लिए ट्रेनों की समय सारिणी 2026 के तहत कुल 549 ट्रेनों की गति बढ़ा दी गई है। इनमें से 376 ट्रेनों की गति 5 से 15 मिनट तक, 105 ट्रेनों की गति 16 से 30 मिनट तक, 48 ट्रेनों की गति 31 से 59 मिनट तक और 20 ट्रेनों की गति 60 मिनट या उससे अधिक बढ़ा दी गई।

दक्षिण पश्चिम रेलवे ने इसमें प्रमुख योगदान दिया, जिन ट्रेनों की गति बढ़ाई गई उनमें  66 ट्रेनों की गति 5-15 मिनट, 29 ट्रेनों की गति 16-30 मिनट, 12 ट्रेनों की गति 31-59 मिनट और 10 की 60 मिनट या उससे अधिक की गति वाली 10 ट्रेनें शामिल हैं। मध्य रेलवे ने 13 ट्रेनों की गति में 5–15 मिनट, 13 ट्रेनों में 16–30 मिनट और 4 ट्रेनों में 31–59 मिनट का सुधार किया। पूर्व तटीय रेलवे  ने 2 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट और 1 ट्रेन की गति 16–30 मिनट बढ़ाई। पूर्व मध्य रेलवे  ने 7 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट, 2 ट्रेनों की 16–30 मिनट, 2 ट्रेनों की 31–59 मिनट और 1 ट्रेन की गति में 60 मिनट या उससे अधिक का सुधार किया। पूर्व रेलवे ने भी 29 ट्रेनों की गति में 5–15 मिनट और 3 ट्रेनों में 16–30 मिनट की वृद्धि की।

उत्तर मध्य रेलवे ने 1 ट्रेन की गति में 5–15 मिनट का सुधार किया। पूर्वोत्तर रेलवे ने 9 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट और 3 ट्रेनों की गति 16–30 मिनट बढ़ाई। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने 20 ट्रेनों की गति में 5–15 मिनट, 10 ट्रेनों में 16–30 मिनट, 3 ट्रेनों में 31–59 मिनट और 3 ट्रेनों में 60 मिनट या उससे अधिक का सुधार किया। उत्तर रेलवे ने 22 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट और 2 ट्रेनों की गति 16–30 मिनट बढ़ाई। उत्तर पश्चिम रेलवे ने 67 ट्रेनों की गति को 5–15 मिनट, 14 ट्रेनों में 16–30 मिनट, 7 ट्रेनों में 31–59 मिनट और 1 ट्रेन की गति को 60 मिनट से अधिक बढ़ाया।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने 9 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट और 2 ट्रेनों की गति 16–30 मिनट बढ़ाई। दक्षिण रेलवे ने 53 ट्रेनों की गति में 5–15 मिनट, 10 ट्रेनों में 16–30 मिनट, 9 ट्रेनों में 31–59 मिनट और 3 ट्रेनों में 60 मिनट से अधिक का सुधार किया। पश्चिम मध्य रेलवे ने 25 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट, 1 ट्रेन की गति 16–30 मिनट और 1 ट्रेन की गति 31–59 मिनट बढ़ाई। पश्चिम रेलवे ने 53 ट्रेनों की गति को 5–15 मिनट, 15 ट्रेनों में 16–30 मिनट, 10 ट्रेनों में 31–59 मिनट और 2 ट्रेनों की गति को 60 मिनट या उससे अधिक बढ़ाया।

कुल मिलाकर, ट्रेनों की समय सारणी 2026, यात्रा के समय और यात्रियों की सुविधा को बेहतर बनाने के लिए इंडियन रेलवे के मज़बूत इरादे को दिखाती है। सभी ज़ोन में 549 ट्रेनों की गति बढ़ाने की इस पहल से समयपालन, परिचालन दक्षता और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा जिससे देश भर में तेज़ और अधिक विश्वसनीय रेल सेवाएँ सुनिश्चित होंगी।

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पर्यटन मंत्रालय ने 2015 में शुरू की गई स्वदेश दर्शन योजना के तहत 75 परियोजनाएं पूरी कीं

पर्यटन संबंधी आंकड़े

• वर्ष 2024 के दौरान भारत में 20.57 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन (आईटीए)।

• वर्ष 2024 के दौरान पर्यटन से 2,93,033 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित (एफईई)।

• वर्ष 2024 के दौरान भारत में 2948.19 मिलियन घरेलू पर्यटक यात्राएं (डीटीवी)।

बुनियादी ढांचे का विकास

पर्यटन मंत्रालय ने थीम-आधारित पर्यटन सर्किट के विकास हेतु जनवरी 2015 में स्वदेश दर्शन योजना का शुभारंभ किया था। इस योजना के तहत कुल 5290.33 करोड़ रुपये की लागत से कुल 76 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनमें से 75 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटक एवं गंतव्य केन्द्रित दृष्टिकोण को अपनाते हुए स्थायी एवं जिम्मेदार गंतव्य विकसित करने के उद्देश्य से अपनी स्वदेश दर्शन योजना को स्वदेश दर्शन 2.0 (एसडी2.0) के तौर पर नया रूप दिया है। एसडी2.0 योजना के तहत 2208.27 करोड़ रुपये की 53 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।

पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटक मूल्य श्रृंखला के सभी केन्द्रों पर पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने हेतु स्वदेश दर्शन 2.0 योजना की उप-योजना के तौर पर ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास’ (सीबीडीडी) के लिए दिशा-निर्देश तैयार की है। चार थीम वाली श्रेणी – (i) आध्यात्मिक पर्यटन, (ii) संस्कृति एवं विरासत, (iii) वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, (iv) इकोटूरिज्म एवं अमृत धरोहर स्थल – के तहत 648.11 करोड़ रुपये की लागत से 36 परियोजनाएं मजूर की गई हैं।

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जनजातीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने हेतु प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (पीएम-जेयूजीए) को मंजूरी दे दी है। पर्यटन मंत्रालय पीएम-जेयूजीए योजना के तहत 1,000 जनजातीय होमस्टे विकसित करेगा। इन कदमों को स्वदेश दर्शन की उप-योजना के तौर पर लागू किया जाएगा। जनजातीय होमस्टे के विकास हेतु दिशानिर्देश बनाई और जारी कर दी गई हैं।

वर्ष 2024-25 की बजट घोषणाओं के फॉलो-अप के तौर पर, देश में प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों के पूर्ण विकास और वैश्विक स्तर पर उनकी ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग के लिए राज्यों को 50 वर्ष की अवधि के लिए दीर्घकालिक ब्याज-मुक्त ऋण देने हेतु, पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) – प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों को वैश्विक स्तर पर विकसित करने की योजना के तहत 23 राज्यों में 3295.76 करोड़ रुपये की लागत से कुल 40 परियोजनाएं मंजूर  की गई हैं।

पर्यटन मंत्रालय ने देश में चुने हुए तीर्थ स्थलों के समग्र विकास हेतु तीर्थयात्रा कायाकल्प एवं  आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रसाद) से संबंधित राष्ट्रीय मिशन योजना का शुभारंभ  किया है। इस योजना के तहत 1726.74 करोड़ रुपये की लागत से कुल 54 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनमें से 31 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

केन्द्रीय एजेंसियों को सहायता योजना के तहत, पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास हेतु  आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, पोर्ट ट्रस्ट ऑफ इंडिया, आईटीडीसी, रेल मंत्रालय आदि जैसी केन्द्रीय  एजेंसियों को वित्तीय मदद प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत 948.78 करोड़ रुपये की लागत से कुल 66 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनमें से 39 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 10 परियोजनाएं बंद कर दी गई हैं।

प्रचार एवं विपणन

पर्यटन मंत्रालय ने गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के तौर पर 26 से 31 जनवरी 2025 के दौरान दिल्ली के लाल किले के मैदान में “भारत पर्व” कार्यक्रम का आयोजन किया। देश के अलग-अलग पर्यटन संबंधी आकर्षणों को प्रदर्शित करने हेतु विभिन्न राज्यों/केन्द्र- शासित प्रदेशों के थीम वाले पवेलियन स्थापित किए गए थे। विभिन्न क्षेत्रीय सांस्कृतिक संगठनों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। भारत पर्व की थीम ‘देखो अपना देश’ थी।

पर्यटन मंत्रालय ने 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) के उपलक्ष्य में 21 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। पर्यटन मंत्रालय ने देश भर में 40 सांस्कृतिक एवं  प्राकृतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित किए। ये कार्यक्रम वैश्विक थीम “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” के अनुरूप थे और इनमें समग्र स्वास्थ्य, सांस्कृतिक विरासत और स्थायी पर्यटन पर जोर दिया गया।

चलो भारत वैश्विक प्रवासी अभियान: चलो भारत पहल के तहत एक लाख मुफ्त ई-टूरिस्ट वीजा की घोषणा की गई। यह 31 मार्च 2025 तक मान्य है ताकि भारतीय प्रवासी अपने 5 गैर-भारतीय दोस्तों को भारत आने के लिए प्रोत्साहित करके अतुल्य भारत के दूत बन सकें।

पर्यटन मंत्रालय भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित करने हेतु उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट (आईटीएम) का आयोजन कर रहा है। 13वां इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट (आईटीएम) 13 से 16 नवंबर 2025 के दौरान सिक्किम के गंगटोक में आयोजित किया गया था। इस चार-दिवसीय कार्यक्रम में घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन से जुड़े विभिन्न हितधारक एक साथ आए।

मंत्रालय ने मीटिंग, इंसेंटिव, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन (माइस) के लिए भारत को एक प्रमुख वैश्विक गंतव्य के तौर पर पेश करने हेतु एक समग्र डिजिटल माइस कैटलॉग तैयार किया है। इस कैटलॉग में 60 शहरों में भारत की माइस संबंधी अवसंरचना की जानकारी दी गई है, जिसमें बड़े कन्वेंशन सेंटर, कनेक्टिविटी, सुविधाएं और आस-पास के आकर्षण शामिल हैं। यह पहल घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय इवेंट प्लानर्स के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का काम करती है, जिससे भारत की दृश्यता, प्रतिस्पर्धात्मकता और बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करने की क्षमता बढ़ती है।

कौशल विकास

पर्यटन मंत्रालय ने सामाजिक समावेशन, रोजगार और आर्थिक प्रगति के लिए पर्यटन को एक जरिया बनाने के साथ-साथ पर्यटकों को ‘पर्यटकों के अनुकूल’ लोगों से मिलवाकर गंतव्य पर उनके समग्र अनुभव को बेहतर बनाने हेतु ‘पर्यटन मित्र एवं पर्यटन दीदी’ नाम की एक राष्ट्रीय जिम्मेदार पर्यटन पहल शुरू की थी। ये लोग अपने गंतव्य के गौरवान्वित दूत और कहानीकार हैं। इस कार्यक्रम के तहत लगभग 4382 पर्यटन सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण दी गई है।

माइस पर्यटन

पर्यटन मंत्रालय ने माइस उद्योग के लिए राष्ट्रीय रणनीति एवं रोडमैप तैयार की है और भारत को बड़ी कॉन्फ्रेंस और प्रदर्शनी के केन्द्र के तौर पर बढ़ावा देने हेतु ‘मीट इन इंडिया’ सब-ब्रांड लॉन्च किया है। घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय प्लानर्स को सहायता प्रदान करने हेतु 60 से अधिक शहरों – जिसमें जी20 के आयोजक शहर भी शामिल हैं – में बुनियादी ढांचे एवं सुविधाओं को कवर करने वाला एक पूरा डिजिटल माइस कैटलॉग तैयार किया गया है। 4-6 मई को जयपुर में संपन्न मीट इन इंडिया कॉन्क्लेव 2025 भारत के माइस एजेंडा को आगे बढ़ाने और माइस सेक्टर में भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने का एक अहम प्लेटफॉर्म साबित हुआ।

चिकित्सा पर्यटन

अपनी उच्च-गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा और इलाज की किफायती लागत का लाभ उठाकर, भारत दुनिया भर में किफायती चिकित्सा एवं कल्याण पर्यटन के एक प्रमुख गंतव्य के तौर पर उभर रहा है। भारत का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ उच्च-गुणवत्ता वाली तृतीयक स्तर की देखभाल की सुविधा – जैसे कि हृदय की शल्य चिकित्सा, घुटने का ट्रांसप्लांट, कॉस्मेटिक सर्जरी और डेंटल केयर – प्रदान करने में निहित है। भारत आधुनिक स्वास्थ्य सेवा को आयुष प्रणाली (पारंपरिक भारतीय चिकित्सा) के साथ आसानी से जोड़ता है। वर्ष 2024 में, भारत में चिकित्सा के उद्देश्य से 6,44,387 विदेशी पर्यटक आए, जो 2020 की तुलना में लगभग 252 प्रतिशत अधिक है। चिकित्सा एवं कल्याण के उद्देश्य से की जाने वाली यात्रा को आसान बनाने हेतु भारत सरकार ने ई-मेडिकल वीजा और ई-आयुष वीजा शुरू किए हैं। यह सुविधा 171 देशों के यात्रियों के लिए उपलब्ध है।

अपने पोर्टल http://www.indiahealthcaretourism.com के जरिए चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु पर्यटन मंत्रालय ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत सर्विस एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साथ सहयोग भी किया है।

बजट घोषणाओं का कार्यान्वयन:

बजट घोषणा 2023-24: देश घरेलू और विदेशी, दोनों प्रकार के पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक पेशकश करता है। पर्यटन में बहुत अधिक संभावनाएं हैं, जिनका सदुपयोग किया जा सकता है। यह क्षेत्र, विशेष तौर पर युवाओं को, नौकरियों और उद्यमिता के बड़े अवसर प्रदान करता  है। पर्यटन को बढ़ावा देने का काम मिशन मोड पर किया जाएगा, जिसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी, सरकारी कार्यक्रमों का तालमेल और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप शामिल होगी।

अब तक की प्रगति: पर्यटन मंत्रालय ने विभिन्न गंतव्यों के समग्र विकास हेतु स्वदेश दर्शन के तहत एक उप-योजना, चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) के लिए दिशानिर्देश तैयार की हैं। चुनौती आधारित गंतव्य विकास योजना राज्यों की सक्रिय भागीदारी, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप और सरकारी कार्यक्रमों के तालमेल से मिशन मोड में पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने के विजन का हिस्सा है।

इस योजना का उद्देश्य पर्यटक मूल्य श्रृंखला के सभी केन्द्रों पर पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना है। सीबीडीडी पहल के तहत, 648.11 करोड़ रुपये की लागत से 36 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।

बजट घोषणा 2023-24: ‘देखो अपना देश’ पहल के उद्देश्यों को पूरा करने हेतु क्षेत्र विशिष्ट  कौशल एवं उद्यमिता के विकास को जोड़ा जाएगा। इसे प्रधानमंत्री ने मध्यम वर्ग से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के बजाय घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता देने की अपील के तौर पर शुरू किया था। थीम-आधारित पर्यटक सर्किट के एकीकृत विकास हेतु, ‘स्वदेश दर्शन योजना’ भी शुरू की गई थी। वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत, सीमावर्ती गांवों में पर्यटन संबंधी अवसंरचना एवं सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा।

अब तक की प्रगति: पर्यटन मंत्रालय ने ‘पर्यटन मित्र/पर्यटन दीदी’ नाम से एक राष्ट्रीय जिम्मेदार पर्यटन पहल की शुरुआत की है। इस पहल को प्रायोगिक परियोजना के तौर पर शुरू करने हेतु कुल 7 पर्यटक गंतव्य – ओरछा (मध्य प्रदेश), गांडिकोटा (आंध्र प्रदेश), बोधगया (बिहार), आइजोल (मिजोरम), जोधपुर (राजस्थान), श्रीनगर (जम्मू एवं कश्मीर) और श्री विजय पुरम (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) – चुने गए थे। विश्व पर्यटन दिवस 2024 के अवसर पर, पर्यटन मंत्रालय ने देश भर में 50 पर्यटक गंतव्यों पर पर्यटन मित्र और पर्यटन दीदी कार्यक्रम का विस्तार किया। अब तक, इस पहल के तहत लगभग 4382 लोगों को प्रशिक्षित किया गया है।

इसके अलावा, पर्यटन मंत्रालय अपनी ‘सेवा प्रदाता का क्षमता विकास (सीबीएसपी)’ योजना के तहत, हुनर ​​से रोजगार तक, कौशल जांच प्रमाण-पत्र  आदि जैसे विभिन्न अल्पकालिक आतिथ्य  और पर्यटन से संबंधित कौशल विकास कार्यक्रम चलाता है। पर्यटन मंत्रालय ‘इंक्रेडिबल इंडिया टूरिस्ट फैसिलिटेटर (आईआईटीएफ) और इंक्रेडिबल इंडिया टूरिस्ट गाइड (आईआईटीजी) सर्टिफिकेशन’ कार्यक्रम भी चला रहा है – जिसका उद्देश्य पूरे देश में, पर्यटन क्षमता वाले दूरदराज के इलाकों सहित, अच्छी तरह से प्रशिक्षित और पेशेवर टूरिस्ट फैसिलिटेटर/गाइड का एक पूल बनाना है। ये नियमित पाठ्यक्रम हैं जो ऑनलाइन आयोजित किए जाते हैं, जिसमें पंजीकरण पूरे साल खुली रहती है और परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाती है।

पर्यटन मंत्रालय ने देश में स्थायी एवं जिम्मेदार पर्यटक गंतव्य विकसित करने के उद्देश्य से अपनी स्वदेश दर्शन योजना को स्वदेश दर्शन 2.0 के रूप में नया रूप दिया है और 2208.27 करोड़ रुपये की लागत से 53 परियोजनाएं मजूर की हैं।

पर्यटन मंत्रालय ने ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास’ (सीबीडीडी) पहल के तहत वाइब्रेंट विलेजेस को एक थीम वाली श्रेणी के रूप में शामिल किया है, जो स्वदेश दर्शन योजना की एक उप-योजना है और इस श्रेणी के तहत पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 5 गांवों की पहचान की है। सीबीडीडी योजना के तहत अरुणाचल प्रदेश (किबिथो), हिमाचल प्रदेश (रक्षम-छितकुल), सिक्किम (ग्राथांग) और उत्तराखंड (जादुंग एवं माना) राज्यों में वाइब्रेंट विलेजेस थीम के तहत 24.90 करोड़ रुपये की लागत से 5 परियोजनाएं मजूर की गई हैं।

बजट घोषणा 2024-25 / अंतरिम बजट: राज्यों को प्रसिद्ध पर्यटन केन्द्रों के पूर्ण विकास, उनकी ब्रांडिंग और वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सुविधाओं और सेवाओं की गुणवत्ता के आधार पर इन केन्द्रों की रेटिंग के लिए एक फ्रेमवर्क बनाया जाएगा। इस प्रकार के विकास का वित्त पोषण करने हेतु राज्यों को मिलान के आधार पर दीर्घकालिक अवधि के लिए बिना ब्याज वाले ऋण दिए जाएंगे।

अब तक की प्रगति: पर्यटन मंत्रालय ने पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) – प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों को वैश्विक स्तर पर विकसित करने के लिए कार्यात्मक दिशानिर्देश जारी की हैं। इस योजना का उद्देश्य विभिन्न राज्यों को देश में प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों को पूरी तरह से विकसित करने, उनकी ब्रांडिंग और वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग के लिए 50 वर्ष की अवधि के लिए दीर्घकालिक ब्याज-मुक्त ऋण प्रदान करना है। पर्यटन मंत्रालय ने इस योजना की दिशानिर्देशों के अनुरूप 23 राज्यों में 40 परियोजनाओं का चयन किया है, जिनके लिए व्यय विभाग द्वारा 3295.76 करोड़ रुपये मजूर किए गए हैं।

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राष्ट्रीय खेल बोर्ड (खोज-सह-चयन समिति) नियम, 2026 की अधिसूचना

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अंतर्गत राष्ट्रीय खेल बोर्ड (खोज-सह-चयन समिति) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है।

इस अधिसूचना के तहत केंद्र सरकार को कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक खोज-सह-चयन समिति गठित करने का अधिकार दिया गया है। इस समिति में सचिव (खेल), खेल प्रशासन में अनुभव रखने वाला एक व्यक्ति और राष्ट्रीय खेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले दो व्यक्ति शामिल होंगे।

समिति को यह जिम्मा दिया गया है कि वह अध्यक्ष और बोर्ड के दो सदस्यों के पदों के लिए ऐसे व्यक्तियों के नामों की सिफारिश करे, जो योग्यता, सत्यनिष्ठा और उत्तम प्रतिष्ठा रखते हों। इन व्यक्तियों को लोक प्रशासन, खेल प्रशासन, खेल कानून या अन्य संबंधित क्षेत्रों में ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए।

राष्ट्रीय खेल बोर्ड (खोज-सह-चयन समिति) नियम, 2026 के तहत राष्ट्रीय खेल बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह बोर्ड देश में राष्ट्रीय खेल निकायों को मान्यता प्रदान करने के साथ-साथ उनके शासन, वित्तीय प्रबंधन और नैतिक मानकों के अनुपालन की निगरानी करने वाले केंद्रीय प्राधिकरण की भूमिका निभाएगा।

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केंद्र ने तमिलनाडु में 235 करोड़ रुपये की पत्तन परियोजनाएं शुरू कीं

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग के केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने चेन्नई पत्तन प्राधिकरण और कामराजार पत्तन लिमिटेड में 235 करोड़ रुपये की पत्तन अवसंरचना तथा डिजिटल शासन परियोजनाओं का शुभारंभ किया। यह पहल तमिलनाडु की समुद्री क्षमता को सुदृढ़ करने और भारत के समुद्री क्षेत्र के नेतृत्व वाले विकास के एजेंडा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चेन्नई में आयोजित “विकसित भारत, विकसित पोर्ट्स” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि ये परियोजनाएं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, जलवायु-सहिष्णु तथा डिजिटल रूप से सक्षम पत्तनों के निर्माण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। साथ ही, ये पहल व्यवसाय करने में सुगमता और तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने में भी सहायक होंगी।

 सर्बानंद सोनोवाल ने कहा “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी वह विज़न और नेतृत्व प्रदान करते हैं जो भारत के समुद्री क्षेत्र के रूपांतरण को गति देता है। “मोदी जी का विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत पर स्पष्ट ध्यान हमारे द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक सुधार का मार्गदर्शन करता है। हम पत्तनों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं, तटीय लचीलापन सुदृढ़ कर रहे हैं, परिचालनों का डिजिटलीकरण कर रहे हैं तथा व्यापार सुगमता का विस्तार कर रहे हैं, जिससे भारतीय पत्तन विकास के इंजन, राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के आधार और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के केंद्र के रूप में उभर सकें।”

कुल व्यय में से 129.36 करोड़ रुपये चेन्नई पत्तन प्राधिकरण में परियोजनाओं के लिए तथा 105.64 करोड़ रुपये कामराजार पत्तन लिमिटेड में पहलों के समर्थन हेतु निर्धारित किए गए हैं।

चेन्नई पत्तन प्राधिकरण के लिए केंद्रीय मंत्री ने लचीलापन, सुरक्षा और सार्वजनिक सेवा प्रदाय पर केंद्रित तीन परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में लगभग 850 मीटर लम्‍बी तटीय बर्थ के पीछे स्थित तटीय संरक्षण तटबंध की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण शामिल है। यह कार्य 33.28 करोड़ रुपये की लागत से जलवायु-सहिष्णु अभिकल्पों के साथ किया जाएगा। मंत्री ने तेल गोदी क्षेत्र में तेल उद्योग सुरक्षा निदेशालय के सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के लिए 43 करोड़ रुपये के निवेश से एक नए अग्निशमन पंप गृह के निर्माण का भी शिलान्यास किया। इससे महत्वपूर्ण ऊर्जा-सुरक्षा परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा मानकों के पूर्ण अनुपालन वाली समर्पित, उच्च-क्षमता अग्निशमन अवसंरचना स्थापित होगी। इसके अतिरिक्त, 8.08 करोड़ रुपये के निवेश से चेन्नई पत्तन अस्पताल के आधुनिकीकरण के लिए भी शिलान्यास किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य वार्डों, शल्य चिकित्सा कक्षों, निदान सुविधाओं तथा सहायक सेवाओं का उन्नयन करने के साथ-साथ निर्बाध चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करना है।

 सोनोवाल ने एंटरप्राइज बिजनेस सिस्टम (ईबीएस) का भी उद्घाटन किया, जो एक सैप-आधारित (एसएपी- आधारित) एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है और यह वित्त, पत्तन संचालन, मानव संसाधन, परिसंपत्तियों, खरीद एवं ग्राहक सेवाओं को एक इकहरे आधार पर लाता है। इस प्रणाली का विकास 45 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है और इसके माध्यम से पारदर्शिता, अनुपालन और संचालन दक्षता में वृद्धि होने की अपेक्षा है, जिससे व्यवसाय की सुगमता में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

कामराजार पत्तन लिमिटेड के लिए, मंत्री ने उत्तरी-पश्चिमी सीमा पर नई सीमा दीवार का शिलान्यास किया, जो उत्तरी पत्तन पहुँच मार्ग (एनपीएआर) से जुड़ती है, और इसकी लागत 1.39 करोड़ रुपये है। इससे पहुँच नियंत्रण और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा। केंद्रीय मंत्री ने 105 करोड़ रुपये के निवेश से पुनर्वासित उत्तरी ब्रेकवॉटर हेड का उद्घाटन भी किया, जिसे चक्रवात से हुए नुकसान के बाद सुदृढ़ किया गया है, जिससे नौवहन सुरक्षा और पत्तन संचालन में निरंतरता सुनिश्चित की जा सके। यह परियोजना भारत के पूर्वी समुद्री गलियारे में पत्तन की भूमिका को मजबूत करती है। पुनर्वास में 202 मीटर क्षेत्र शामिल है, जिसमें 3035 नए 25 मीट्रिक टन के टेट्रापॉड लगाए गए हैं। यह क्षेत्र पहले चक्रवात थाने और नीलम के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ था।

भारत के समुद्री क्षेत्र में इन परियोजनाओं की भूमिका के महत्व पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “ये परियोजनाएं भारत को विश्व के अग्रणी समुद्री देशों में स्थापित करने के लिए एक बड़े, एकीकृत प्रयास का हिस्सा हैं। पत्तनों का आधुनिकीकरण, लचीलापन सुदृढ़ करना, परिचालनों का डिजिटलीकरण और व्यवसाय की सुगमता में सुधार करके, हम वह समुद्री आधार तैयार कर रहे हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था को रूपांतरित करने और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के विज़न की दिशा में अग्रसर करने के लिए आवश्यक है।”

एक राष्ट्रीय स्तर की व्यापार-सुगमता पहल के तहत, जो “एक राष्ट्र–एक पत्तन प्रक्रिया” (ओएनओपी) के अनुरूप है, सोनोवाल ने ई-पोर्ट क्लियरेंस पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से पत्तन मंजूरी प्रमाण पत्र, जिसमें अग्रिम मंजूरी भी शामिल है, ऑनलाइन प्रस्तुत और जारी किए जा सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य इस पूरी प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और पूरे भारत में समुद्री संचालन के लिए पूर्वानुमान क्षमता में सुधार लाना है। पोर्टल शिपिंग लाइन/स्टीमर एजेंटों को ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करने और अपने यूज़र लॉगिन के माध्यम से पत्तन मंजूरी प्रमाण पत्र डाउनलोड करने की सुविधा देगा—इससे समुद्री संचालन में पारदर्शिता, गति और पूर्वानुमान क्षमता मजबूत होगी। माननीय केंद्रीय मंत्री ने चेन्नई पत्तन विद्यालय के 20 छात्रों के नौकायन प्रशिक्षण के लिए रॉयल मद्रास यॉट क्लब (आरएमवाईसी) को 18 लाख रुपये का चेक भी प्रदान किया।

श्री सोनोवाल ने कहा कि इन संयुक्त निवेशों से एक समुद्री शक्ति के रूप में तमिलनाडु की स्थिति उन्नत होगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत होगी। उन्‍होंने कहा, “सागरमाला के तहत निरंतर निवेश और सुधार भारत के पत्तनों को वैश्विक मानकों वाले केंद्रों में बदल रहे हैं, जो विकास, रोजगार और राष्ट्रीय गौरव को समर्थन देते हैं।”

इस कार्यक्रम ने “वन्दे मातरम् @150” की राष्ट्रीय भावना को भी प्रतिबिंबित किया, जो इस प्रतिष्ठित गीत के 150वें वर्ष का प्रतीक है और एक मजबूत, आत्मनिर्भर भारत निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प की पुनः पुष्टि करता है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने विशेष आवश्‍यकता वाले बच्चों के लिए शहर के टोंडियारपेट इलाके में स्थित स्वबोधिनी विद्यालय एवं व्यावसायिक केंद्र का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकगण के साथ संवाद किया और समावेशी विकास के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। सोनोवाल ने स्वबोधिनी के एकीकृत मॉडल की समीक्षा की, जिसमें विशेष शिक्षा को व्यावसायिक, वाक् और संवेदी चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, खेल, योग और व्यावसायिक प्रशिक्षण के साथ जोड़ा गया है। इसमें मुद्रण, मोमबत्ती एवं साबुन बनाना और कम्प्यूटर शिक्षा जैसे कौशल विकास कार्यक्रम भी शामिल हैं। माननीय मंत्री को मापनीय परिणामों की जानकारी दी गई, जिनमें बच्चों की गतिशीलता, संचार कौशल में सुधार और सफल नियुक्तियाँ शामिल हैं। इसके अलावा, स्‍थायित्‍व के मूल्यों को सुदृढ़ करते हुए श्री सोनोवाल ने “एक-पेड-माँ-के-नाम” अभियान के तहत एक पौधा भी रोपा।

इस कार्यक्रम में डॉ. मालिनी वी. शंकर, कुलपति, इंडिया मैरीटाइम यूनिवर्सिटी (आईएमयू), एस. विश्वनाथन, अध्यक्ष, चेन्नई पत्तन प्राधिकरण, जे.पी. आइरीन सिंथिया, प्रबंध निदेशक, कामराजार पत्तन लिमिटेड सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया। इसके अलावा भी 450 से अधिक प्रतिभागियों, जिनमें पत्तन हितधारक, समुद्री पेशेवर, इंडिया मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के छात्र और अधिकारी शामिल थे, ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भिखारियों के लिए कल्याण और पुनर्वास के उपायों पर समीक्षा बैठक की

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भिखारियों के कल्याण और पुनर्वास’ पर एक बैठक कल नई दिल्ली के डॉ अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित की गई।

बैठक में चर्चा छह महानगरों- दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलूरू और हैदराबाद को भिखारी मुक्त बनाने पर केंद्रित रही। इस उद्देश्य के लिए अभियान नगर निगमों, शहरी स्थानीय निकायों, राज्य समाज कल्याण विभागों, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और अन्य प्रमुख हितधारकों के बीच नजदीकी तालमेल से चलाया जाएगा।

हाइब्रिड तरीके से आयोजित इस बैठक में दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और बेंगलूरू के नगर निगमों और संबंधित राज्य समाज कल्याण विभागों के प्रतिनिधियों, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अधिकारियों तथा अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया।

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बैठक में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव ने सूचित किया कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और नियम, 2020 के लागू होने के बावजूद, प्रमुख महानगरों में ट्रैफिक सिग्नलों पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के भिक्षावृत्ति में निरंतर संलिप्त रहने के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई एक बैठक में पहले भी चिंता जताई गई थी। सुरक्षा और गरिमा का ध्यान रखते हुए, यह तय किया गया कि शुरुआत में छह पहचान किये गए मेट्रो शहरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि वहां भिक्षावृति समाप्त की जा सके।

सरकार की मुख्य पहलों पर भी ज़ोर दिया गया, जिनमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समान अवसर नीति (2024), नेशनल ट्रांसजेंडर पोर्टल, ट्रांसजेंडर पहचान पत्र और आयुष्मान कार्ड जारी करना, गरिमा गृहों की स्थापना और स्माइल योजना (आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर पड़े व्यक्तियों के लिए सहायता योजना) का कार्यान्वयन शामिल है। इसके अंतर्गत ट्रांसजेंडर और भिक्षावृत्ति दोनों उप-योजनाएं शामिल हैं। बैठक में देशव्यापी अभियान “भिक्षावृत्ति मुक्त भारत” की भी समीक्षा की गई जिसके पहले चरण में 181 शहर शामिल हैं।

 

कल्याणकारी उपायों को लागू करने की स्थिति, भीख मांगने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पुनर्वास में आने वाली चुनौतियों और ‘स्माइल’ (भिक्षावृत्ति) योजना के तहत हुई प्रगति पर बैठक के दौरान प्रेजेंटेशन दिए गए। यह योजना अभी दिल्ली और हैदराबाद में लागू है और इसे दूसरे शहरों में भी लागू करने का प्रस्ताव है।

मंत्री महोदय ने राज्यों को गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से एक महीने का गहन अभियान चलाने का निर्देश दिया, जिसमें ट्रैफिक सिग्नलों पर भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों के कौशल विकास, रोजगार और पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के लिए सुरक्षित, संरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने हेतु केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, नगर निगमों और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा समन्वित और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में भिक्षावृत्ति-मुक्त दर्जा प्राप्त करने वाले शहरों को पुरस्कृत करने का भी संकेत दिया गया।

बैठक का समापन सभी हितधारकों की उस सामूहिक प्रतिबद्धता के दोहराव के साथ हुआ, जिसमें शहरों को भिक्षावृत्ति-मुक्त बनाने और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों एवं भिक्षुओं के सामाजिक समावेशन और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया।

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प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जागृत करने में सोमनाथ धाम की शाश्वत भूमिका को एक सुभाषित के माध्यम से रेखांकित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पावन सोमनाथ धाम में श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जागृत करने में इसकी शाश्वत भूमिका को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पावन सोमनाथ धाम ने सदियों से अपनी दिव्य ऊर्जा के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह ऊर्जा आज भी आस्था, साहस और आत्मसम्मान के मार्ग को आलोकित करती हुई युगों से सभी भारतवासियों के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में कार्य कर रही है।

एक संस्कृत श्लोक को एक्स पर उद्धृत करते हुए मोदी ने लिखा:

“पावन-पुनीत सोमनाथ धाम की भव्य विरासत सदियों से जन-जन की चेतना को जागृत करती आ रही है। यहां से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा युग-युगांतर तक आस्था, साहस और स्वाभिमान का दीप प्रज्वलित करती रहेगी।

आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै।

आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्।

प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥”

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दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में रोड सेफ़्टी जनजागरूकता अभियान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर के रोड सेफ़्टी क्लब द्वारा मलिन बस्तियों में जनमानस को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने हेतु एक व्यापक जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य छात्र–छात्राओं, महाविद्यालय कर्मचारियों तथा अभिभावकों के मध्य सड़क सुरक्षा संबंधी नियमों व सावधानियों का प्रचार-प्रसार करना रहा।

अभियान के अंतर्गत जागरूकता रैली, शपथ कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक एवं जनसंपर्क गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने हेलमेट पहनने, यातायात नियमों का पालन करने तथा सड़क दुर्घटनाओं से बचाव के संकल्प लिए। रैली के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित यातायात व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

यह कार्यक्रम समिति सदस्य डॉ. अंजना श्रीवास्तव के कुशल निर्देशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम को महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर वंदना निगम का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। साथ ही एन.सी.सी. के सहयोग से अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया गया। इस अवसर पर उपस्थित छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और समाज में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का शपथपूर्वक संकल्प लिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन से महाविद्यालय की सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।

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