एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और भारत सरकार ने आज महाराष्ट्र राज्य में प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में सुधार के लिए 350 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समावेशी विकास के लिए आर्थिक समूहों को जोड़ने की महाराष्ट्र परियोजना के हस्ताक्षरकर्ताओं में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामले विभाग के अपर सचिव श्री रजत कुमार मिश्रा ने भारत सरकार की ओर से और एडीबी के इंडिया रेजिडेंट मिशन के प्रभारी अधिकारी श्री हो यून जियोंग ने एडीबी के लिए हस्ताक्षर किए।
ऋण समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद श्री मिश्रा ने कहा कि परियोजना कनेक्टिविटी में सुधार, सेवाओं तक पहुंच की सुविधा और राज्य में पिछड़े जिलों के समावेशी आर्थिक विकास में तेजी लाकर अंतर-क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने में मदद करेगी।
श्री जियोंग ने कहा कि यह परियोजना महाराष्ट्र में राज्य राजमार्गों और प्रमुख जिला सड़कों के उन्नयन के लिए एडीबी के चल रहे समर्थन पर आधारित है। यह उन दृष्टिकोणों और प्रथाओं को प्रदर्शित करता है जो अभी तक सामान्य कार्याभ्यास नहीं रहा हैं। इसमें महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की जरूरतों के प्रति उत्तरदायी सड़क सुरक्षा प्रदर्शन गलियारे, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और आपदा-जोखिम में कमी और राजमार्ग कार्य जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
अहमदनगर, हिंगोली, जालना, कोहलपुर, नागुर, नांदेड़, नासिक, पुणे, सांगली और सतारा के 10 जिलों में राज्य के मुख्य सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कम से कम 319 किलोमीटर (किमी) राज्य राजमार्ग और 149 किलोमीटर जिला सड़कों को जलवायु और आपदा-प्रतिरोधी सुविधाओं को शामिल करते हुए उन्नत किया जाएगा। यह अविकसित ग्रामीण समुदायों को गैर-कृषि अवसरों और बाजारों से जोड़ने में मदद करेगा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं तक पहुंच में सुधार करेगा और छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों के लिए परिवहन लागत को कम करके कृषि मूल्य श्रृंखला में सुधार करेगा।
इसके अलावा इस परियोजना में नांदेड़ और पड़ोसी राज्य तेलंगाना को जोड़ने वाली 5 किलोमीटर की प्रमुख जिला सड़कों का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना राजमार्ग कार्यक्रमों, स्कूलों, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं में लैंगिक समानता और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देगी और बुनियादी स्वच्छता, शिक्षा और अन्य सेवाएं प्रदान करने के लिए एकीकृत सेवा केंद्र स्थापित करेगी। आजीविका के अवसर प्रदान करने के लिए गरीब महिलाओं और वंचित समूहों के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए कौशल प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। यह परियोजना बेहतर जीवन-चक्र गुणवत्ता और परिचालन दक्षता के लिए लंबी अवधि के सड़क रखरखाव में निजी क्षेत्र की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करेगी। इससे सड़क डिजाइन और रखरखाव में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और आपदा जोखिम में कमी के लिए एक अच्छे अभ्यास के अनुभव भी विकसित होंगे।
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तेरी बेपनहा मोहब्बत तेरी बेशुमार मेहरबानियाँ..
कानपुर नगर, दिनांक 30 दिसम्बर, 2022 (सू0वि0)*आज एच0बी0टी0यू0 स्थित डायरेक्टरेट ऑफ़ इंडस्ट्री एंड एंटरप्राइज प्रोमोशन के सभागार में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ़ इंडिया (एसटीपीआई), इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक इंटरैक्टिव सेशन का आयोजन किया गया, जिसमे कानपुर जनपद के आईटी कंपनियों, इंडस्ट्री संघो, शिक्षण संस्थाओं ने प्रतिभाग किया।
कानपुर 30 दिसंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, डी जी कॉलेज, कानपुर के मनोविज्ञान तथा भूगोल विभाग के सम्मिलित प्रयास द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन के गाइडलाइन के अनुसार, “जलवायु परिवर्तन का मनुष्य पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव” विषय एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय प्राचार्या प्रो. अर्चना वर्मा ने दीप प्रज्वलन कर किया।
व्याख्यान की मुख्य वक्ता महिला महाविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय से पधारी डॉ. प्रमिला तिवारी ने जलवायु परिवर्तन मानव को किस प्रकार मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित कर रहा है, इसका विशद वर्णन अपने व्याख्यान में किया। जिससे छात्राएं लाभान्वित हुई। इस कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ सुषमा शर्मा एवं भूगोल विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ संगीता सिरोही एवं सभी प्रवक्ताओं डॉ शशि बाला सिंह, डॉ शिप्रा श्रीवास्तव, डॉ अंजना श्रीवास्तव, डॉ श्वेता गोंड़, डॉ साधना सिंह समेत सभी छात्राओं की उपस्थिति सराहनीय रहा।
