भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्य के लिए 23 अप्रैल 2018 की अधिसूचना संख्या 2 (2)/2018-एसपीएस के माध्यम से 2018 में औद्योगिक विकास योजना, 2017 की घोषणा की थी। इस योजना के अंतर्गत कुल वित्तीय परिव्यय 131.90 करोड़ रुपये था। यह आवंटित निधि वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान समाप्त हो गई है। इसके अलावा, 2028-2029 तक प्रतिबद्ध देनदारियों को पूरा करने के लिए 1164.53 करोड़ रुपये की अतिरिक्त निधि की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त वित्तीय परिव्यय के आवंटन के लिए औद्योगिक विकास योजना, 2017 के अंतर्गत मंत्रिमंडल की स्वीकृति मांगी गई थी।
मंत्रिमंडल ने आज अपनी बैठक में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए औद्योगिक विकास योजना, 2017 के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के प्रस्ताव पर विचार किया और 2028-29 तक योजना के तहत प्रतिबद्ध देनदारियों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता के लिए मंजूरी दे दी। उपर्युक्त योजना के अंतर्गत अतिरिक्त निधियों की स्वीकृति के अनुसार इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित प्रोत्साहन लाभान्वित होंगे।
- ऋण तक पहुंच के लिए केंद्रीय पूंजी निवेश प्रोत्साहन (सीसीआईआईएसी):
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में कहीं भी मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र में पर्याप्त विस्तार करने वाली सभी पात्र नई औद्योगिक इकाइयों और मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को 5.00 करोड़ रुपये की ऊपरी सीमा के साथ संयंत्र और मशीनरी में निवेश के लिए क्रेडिट तक पहुंच (सीसीआईआईएसी) @ 30 प्रतिशत के लिए केंद्रीय पूंजी निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।
- केंद्रीय व्यापक बीमा प्रोत्साहन (सीसीआईआई):
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में कहीं भी सभी पात्र नई औद्योगिक इकाइयों और मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को वाणिज्यिक उत्पादन/संचालन शुरू होने की तिथि से अधिकतम 5 वर्ष की अवधि के लिए भवन और संयंत्र और मशीनरी के बीमा पर 100 प्रतिशत बीमा प्रीमियम की प्रतिपूर्ति के लिए पात्र होंगे।
iii. शामिल व्यय:
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्य के लिए आईडीएस, 2017 का वित्तीय परिव्यय केवल 131.90 करोड़ रुपये था, जिसे 2021-2022 के दौरान जारी किया गया था। इसके अतिरिक्त 2028-29 तक योजना के अंतर्गत धन की अतिरिक्त आवश्यकता के माध्यम से प्रतिबद्ध देनदारियों को पूरा करने के लिए मंत्रिमंडल ने योजना के अंतर्गत 1164.53 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय परिव्यय को मंजूरी दी है।
अनुमान है कि 774 पंजीकृत इकाइयों द्वारा लगभग 48607 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित किये जाएंगे।
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर
कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता,कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय, स्वरूप नगर के गृह विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (दिनांक 01/09/2023 से 07/09/2023 तक ) के अंतर्गत पोषक तत्वों को एक प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित किया। प्रदर्शनी का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. पूनम विज द्वारा किया गया, उनके द्वारा छात्राओं को पोषण के महत्व एवं मोटे अनाजों के प्रयोग करने हेतु प्रेरित किया। गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम प्रभारी प्रो.अनुपम कुमारी द्वारा प्रदर्शनी के माध्यम से छात्रों को संतुलित आहार, भोजन के सातों समूहों को दैनिक आहार में शामिल करना एवं प्रति 100 ग्राम में पौष्टिक तत्वों की उपलब्धता को दर्शाया साथ ही मोटे अनाज (बाजरा ,रागी, ज्वार आदि) प्राचीन भारतीय व्यंजनों को आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त कर दिया है विषय पर विस्तृत चर्चा की । छात्राओं के द्वारा” सबके लिए पोषण” विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की जिसमें महाविद्यालय की 15 छात्राओं ने प्रतिभागिता की जिसका परिणाम इस प्रकार है। प्रथम- अंजली वर्मा बी.ए. तृतीय सेमेस्टर द्वितीय- सिमरन सोनकर बी.ए.तृतीय सेमेस्टर तृतीय- शिवानी वर्मा बी.ए.तृतीय सेमेस्टर,सांत्वना पुरस्कार- प्रज्ञा बी.ए.तृतीय सेमेस्टर इस प्रदर्शनी का महाविद्यालय की लगभग छात्रों सहित समस्त शिक्षिकाओं ने अवलोकन किया।
प्रमुख सचिव जी-20 शिखर सम्मेलन की तैयारियों से संबंधित समन्वय समिति के अध्यक्ष हैं। इस क्षमता में, डॉ पी के मिश्र द्वारा समीक्षा अभ्यास यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि एक स्मरणीय शिखर सम्मेलन की आवभगत के लिए योजना के अनुरूप सभी चीजें व्यवस्थित रहें। यह दौरा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि शिखर सम्मेलन के लिए आने वाले सभी राष्ट्राध्यक्षों और अन्य अंतर्राष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों को अपनी यात्रा के दौरान भारत की संस्कृति और विश्व स्तरीय अनुभव की झलक मिले।

कानपुर 5 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस.एन.सेन महाविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर महान शिक्षाविद डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व एवम कृतित्व पर प्रकाश डाला गया ।कार्यक्रम का औपाचारिक शुभारम्भ विभाग की विभागाध्यक्षा प्रोफेसर चित्रा सिंह तोमर ने द्वीप प्रज्जवलन एवं राधाकृष्णन जी की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर किया। इस अवसर स्नातक एवं परास्नातक कक्षा की छात्राओ द्वारा भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे लगभग 26 छात्राओ ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम .में महाविद्यालय की अंग्रेजी विभाग की विभाध्यक्ष डा अल्का टण्डन ,डॉ मोनिका सहाय एवं डॉ संगीता सिंह आदि उपस्थित रहीं।
उत्केला हवाई अड्डे का स्वामित्व ओडिशा सरकार के पास है। इसे भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय की उड़ान स्कीम के तहत 31.07 करोड़ रुपये की लागत से एक क्षेत्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया गया है। उत्केला हवाई अड्डे का रनवे (2,995 फीट) 30 मीटर की चौड़ाई के साथ 917 मीटर लंबा है। उत्केला हवाई अड्डे के जुड़ने से ओडिशा में अब पांच हवाई अड्डे हो जाएंगे।