इस अवसर पर बोलते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा का किसी के भी जीवन में मौलिक महत्व होता है। उन्होंने कहा कि कई शिक्षाविद् बच्चों के संतुलित विकास के लिए थ्री-एच फॉर्मूले की बात करते हैं, जिसमें पहला एच हार्ट (ह्रदय), दूसरा एच हेड (सिर) और तीसरा एच हैंड (हाथ) है। उन्होंने बताया कि हृदय का संबंध संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों, चरित्र की मजबूती एवं नैतिकता से है। उन्होंने कहा कि सिर या मस्तिष्क का संबंध मानसिक विकास, तर्क शक्ति और पढ़ाई से है और हाथ का संबंध शारीरिक कौशल एवं शारीरिक श्रम के प्रति सम्मान से है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के समग्र दृष्टिकोण पर बल देकर ही बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव होगा।
राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षण के पेशे में महिलाओं की भागीदारी को देखते हुए शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाली शिक्षिकाओं की संख्या और अधिक होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिला सशक्तिकरण के लिए छात्राओं और शिक्षकों को प्रोत्साहित करना बेहद महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार माना जाता है और इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र-निर्माता के रूप में शिक्षकों के महत्व को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षकों के साथ-साथ माता-पिता का भी यह कर्तव्य है कि वे प्रत्येक बच्चे की अनूठी क्षमताओं को पहचानें और संवेदनशीलता के साथ उन क्षमताओं को विकसित करने में बच्चे की मदद करें। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा उनके साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार किया जाए और माता-पिता बड़े विश्वास के साथ अपने बच्चों को शिक्षकों को सौंपते हैं। उन्होंने कहा कि एक कक्षा के 40-50 बच्चों के बीच प्यार बांटने का अवसर मिलना प्रत्येक शिक्षक के लिए बेहद सौभाग्य की बात है।
राष्ट्रपति ने कहा कि हर कोई अपने शिक्षकों को याद करता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षकों से जो प्रशंसा, प्रोत्साहन या सजा मिलती है वह उनकी यादों में बसी रहती है। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों में सुधार लाने के इरादे से उन्हें सजा दी जाती है, तो उन्हें इसका अहसास बाद में होता है। उन्होंने कहा कि उन्हें ज्ञान देने से ज्यादा महत्वपूर्ण प्यार और स्नेह देना है।
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कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता,कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय, स्वरूप नगर के गृह विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (दिनांक 01/09/2023 से 07/09/2023 तक ) के अंतर्गत पोषक तत्वों को एक प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित किया। प्रदर्शनी का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. पूनम विज द्वारा किया गया, उनके द्वारा छात्राओं को पोषण के महत्व एवं मोटे अनाजों के प्रयोग करने हेतु प्रेरित किया। गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम प्रभारी प्रो.अनुपम कुमारी द्वारा प्रदर्शनी के माध्यम से छात्रों को संतुलित आहार, भोजन के सातों समूहों को दैनिक आहार में शामिल करना एवं प्रति 100 ग्राम में पौष्टिक तत्वों की उपलब्धता को दर्शाया साथ ही मोटे अनाज (बाजरा ,रागी, ज्वार आदि) प्राचीन भारतीय व्यंजनों को आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त कर दिया है विषय पर विस्तृत चर्चा की । छात्राओं के द्वारा” सबके लिए पोषण” विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की जिसमें महाविद्यालय की 15 छात्राओं ने प्रतिभागिता की जिसका परिणाम इस प्रकार है। प्रथम- अंजली वर्मा बी.ए. तृतीय सेमेस्टर द्वितीय- सिमरन सोनकर बी.ए.तृतीय सेमेस्टर तृतीय- शिवानी वर्मा बी.ए.तृतीय सेमेस्टर,सांत्वना पुरस्कार- प्रज्ञा बी.ए.तृतीय सेमेस्टर इस प्रदर्शनी का महाविद्यालय की लगभग छात्रों सहित समस्त शिक्षिकाओं ने अवलोकन किया।
प्रमुख सचिव जी-20 शिखर सम्मेलन की तैयारियों से संबंधित समन्वय समिति के अध्यक्ष हैं। इस क्षमता में, डॉ पी के मिश्र द्वारा समीक्षा अभ्यास यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि एक स्मरणीय शिखर सम्मेलन की आवभगत के लिए योजना के अनुरूप सभी चीजें व्यवस्थित रहें। यह दौरा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि शिखर सम्मेलन के लिए आने वाले सभी राष्ट्राध्यक्षों और अन्य अंतर्राष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों को अपनी यात्रा के दौरान भारत की संस्कृति और विश्व स्तरीय अनुभव की झलक मिले।

कानपुर 5 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस.एन.सेन महाविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर महान शिक्षाविद डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व एवम कृतित्व पर प्रकाश डाला गया ।कार्यक्रम का औपाचारिक शुभारम्भ विभाग की विभागाध्यक्षा प्रोफेसर चित्रा सिंह तोमर ने द्वीप प्रज्जवलन एवं राधाकृष्णन जी की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर किया। इस अवसर स्नातक एवं परास्नातक कक्षा की छात्राओ द्वारा भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे लगभग 26 छात्राओ ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम .में महाविद्यालय की अंग्रेजी विभाग की विभाध्यक्ष डा अल्का टण्डन ,डॉ मोनिका सहाय एवं डॉ संगीता सिंह आदि उपस्थित रहीं।
उत्केला हवाई अड्डे का स्वामित्व ओडिशा सरकार के पास है। इसे भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय की उड़ान स्कीम के तहत 31.07 करोड़ रुपये की लागत से एक क्षेत्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया गया है। उत्केला हवाई अड्डे का रनवे (2,995 फीट) 30 मीटर की चौड़ाई के साथ 917 मीटर लंबा है। उत्केला हवाई अड्डे के जुड़ने से ओडिशा में अब पांच हवाई अड्डे हो जाएंगे।