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हिंदी दिवस पर बाली “इंडोनेशिया” में लोकगायिका अपर्णा सिंह ने की शिरकत

भारतीय स्वरूप संवाददाता अपर्णा सिंह ने बताया ये मेरे लिए ये बहुत खुशी की बात है। #स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र बाली एवं शब्द यात्रा के संयुक्त तत्वाधान से चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक और सांस्कृतिक सम्मेलन में हमारे गुरुजनों, माता पिता, बड़े बुजुर्गों, मित्रों और जीवन साथी के आशीर्वाद और सहयोग से भारत का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य इंडोनेशिया के बाली द्वीप में प्राप्त हुआ। लखनऊ से गई अपर्णा सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ अपनी टीम के साथ स्वागत गीत से और फिर कजरी गा कर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस गीत के माध्यम से अपने देश की माटी उसकी सुगंध से पूरा वातावरण महक उठा। खचाखच भरा पूरा सभागार लोगों की तालियों से पूरा वातावरण गूंज उठा#। भारत और बाली के साथ ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आए अनेक प्रतिष्ठित लेखक और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के माननीय निदेशक आदरणीय नवीन मेघवाल और बाली के जनरल काउंसलर डॉ शशांक ने सभी प्रतिभागियों,साहित्यकारों को अंग वस्त्र और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया । विशिष्ट अतिथि के रूप में बाली से पद्मश्री इंद्रा आगुस उड्डियान तथा पद्मश्री आई वायन डिबिया ने मंच की शोभा बढ़ाई। इस आयोजन ने ना केवल साहित्य के नए आयाम प्रस्तुत किए बल्कि विभिन्न देशों के साहित्यिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक विविधताओं को समझने का एक सुनहरा मंच भी प्रदान किया । इस प्रकार के आयोजन ना केवल साहित्य को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं बल्कि देशों के बीच आपसी संबंधों और सौहार्द बढ़ाने में सहायक होते हैं।

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उच्च ऊर्जा परमाणु जुड़ाव नई दिशा प्रदान कर रहा है, जिससे अगली पीढ़ी के क्वांटम उपकरणों के विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है

भारतीय क्वांटम अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि जब ऐसे परमाणु, जो हमारे चारों ओर के पदार्थ के मूल निर्माण के छोटे-छोटे खंड हैं, उनको बहुत अधिक ऊर्जा दी जाती है, तो वे स्वतंत्र कणों की तरह व्यवहार करना बंद कर देते हैं। इस अवस्था में वे अब अलग-अलग कणों की तरह नहीं रहते, बल्कि आपस में इतनी मजबूती से जुड़ जाते हैं कि रोशनी के साथ उनका संबंध भी बदल जाता है और उसकी प्रतिक्रिया विकृत दिखाई देने लगती है।

इतनी उच्च अवस्थाओं पर रिडबर्ग परमाणु संकेतों पर पहली बार देखी गई यह अनोखी विकृति भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर, सेंसर और संचार उपकरण बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

साधारण परमाणु छोटे-से कण होते हैं, लेकिन रिडबर्ग परमाणु असाधारण रूप से विशाल होते हैं। जब वैज्ञानिक किसी परमाणु के सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन को ऊर्जा के बहुत ऊंचे स्तर पर ले जाते हैं, तो उसका आकार सामान्य से कहीं बड़ा हो जाता है और वह अपने आस-पास के वातावरण के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाता है। यही अनोखे गुण रिडबर्ग परमाणुओं को भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों और अति-सटीक सेंसरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। हालांकि, यही संवेदनशीलता उन्हें अप्रत्याशित भी बना देती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान, रमन अनुसंधान संस्थान (आरआरआई) की एक टीम ने रुबिडियम परमाणुओं को लगभग परम शून्य तापमान तक ठंडा किया — इतना ठंडा कि वे मुश्किल से हिल पाते हैं। इन परमाणुओं को बाद में लेजर और चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से फंसा दिया गया। इसके बाद, प्रकाश किरणों का उपयोग करके वैज्ञानिकों ने उन्हें रिडबर्ग अवस्था में उत्तेजित किया। आमतौर पर परमाणु अपनी उत्तेजना को एक स्पष्ट और मूलग्रंथ जैसे पैटर्न में प्रकट करते हैं, जिसे ऑटलर-टाउन्स स्प्लिटिंग कहा जाता है।

चित्र- फंसे हुए ठंडे परमाणु सेट-अप में रिडबर्ग उत्तेजना का एक कलात्मक प्रतिनिधित्व

हालांकि जब शोधकर्ताओं ने परमाणुओं को 100वें ऊर्जा स्तर से आगे धकेला, तो साफ और नियमित पैटर्न अचानक टूट गया। अब उनका व्यवहार धुंधला तथा विकृत दिखने लगा। यह कोई त्रुटि नहीं थी, बल्कि एक अद्भुत खोज थी: परमाणु अब अकेले नहीं, बल्कि एक साथ कार्य कर रहे थे। यह ऐसा था कि जैसे एक बड़ा झुंड तालमेल से नाच रहा हो, वे एक-दूसरे से जुड़ रहे थे, प्रभाव डाल रहे थे और सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया दे रहे थे।

रिडबर्ग परमाणुओं में उच्च ऊर्जा पर दिखने वाली ये विचित्र विकृतियां क्वांटम तकनीक के लिए एक संकेत की तरह हैं। ये वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करती हैं कि किस समय परमाणु अकेले रहते हैं और कब वे एक साथ जुड़कर जटिल, आपस में उलझे समूह बनाते हैं, जो बड़ी एवं जटिल प्रणाली की नकल करने में सक्षम होते हैं। ये वास्तव में परिशुद्धता वाले प्रयोगों में उपयोगी हैं। यह जानना कि परमाणु कब और कैसे एक-दूसरे से ‘जुड़ना’ शुरू करते हैं, भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर, सेंसर और संचार उपकरण बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

आरआरआई में प्रोफेसर संजुक्ता रॉय और उनके पीएचडी विद्यार्थियों शिल्पा बी एस और शोवन के बारिक के नेतृत्व में आईआईएसईआर पुणे में प्रोफेसर रेजिश नाथ की टीम द्वारा सैद्धांतिक मॉडलिंग के साथ किये गए इस प्रयोग ने नाजुक इंजीनियरिंग को गहन भौतिकी अंतर्दृष्टि के साथ जोड़ा है। उनकी विशेष रूप से निर्मित पहचान प्रणाली इतनी संवेदनशील थी कि वह बहुत कम संख्या में फोटॉनों को भी पहचान सकती थी, जिससे उन्हें अत्यधिक उच्च ऊर्जा स्तरों पर रिडबर्ग परमाणुओं का अध्ययन करने में सहायता मिली, जहां अन्य विफल हो गए थे।

डॉ. रॉय के अनुसार, ‘हमारे प्रयोग में एक अत्यंत संवेदनशील पहचान प्रणाली स्थापित की गई, जो परमाणुओं द्वारा उत्सर्जित कुछ ही फोटॉनों का भी पता लगाने में सक्षम है। इससे हमें अत्यधिक उत्तेजित रिडबर्ग अवस्थाओं (n > 100) में मौजूद परमाणुओं का पता लगाने में मदद मिली, भले ही उनके संक्रमण की संभावनाएं बहुत कम रही हों। हमने अपने प्रयोग को इस तरह अनुकूलित किया है कि अत्यधिक उत्तेजित रिडबर्ग अवस्थाओं से आने वाले सिग्नल को उच्च सिग्नल-टू-शोर अनुपात के साथ मापा जा सके।’

इस खोज ने भारतीय शोधकर्ताओं को वैश्विक क्वांटम अनुसंधान के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर दिया है। यह दिखाता है कि जब वैज्ञानिक परमाणुओं को लगभग पूरी तरह स्थिर अवस्था तक ठंडा करते हैं और फिर उन्हें अत्यधिक ऊर्जावान बनाते हैं, तो वे पदार्थ को व्यक्तिगत से सामूहिक रूप में बदलते हुए देख सकते हैं।

परमाणु व्यवहार को समझने यह नई खोज भविष्य की क्वांटम प्रौद्योगिकियों की सीमाएं निर्धारित करती है। इस नाजुक संतुलन पर ही क्वांटम प्रौद्योगिकियों का भविष्य आकार ले रहा है और यह ज्ञान आने वाले उपकरणों के निर्माण में मार्गदर्शन करेगा।

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अगस्त, 2025 के लिए आठ प्रमुख उद्योगों का सूचकांक (आधार वर्ष: 2011-12=100)

अगस्त, 2024 के सूचकांक की तुलना में अगस्त, 2025 में आठ प्रमुख उद्योगों (आईसीआई) का संयुक्त सूचकांक 6.3 प्रतिशत (अनंतिम) बढ़ गया। इस्पात, कोयला, सीमेंट, उर्वरक, बिजली और पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में अगस्त, 2025 में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। वार्षिक सूचकांक, मासिक सूचकांक और वृद्धि दर का विवरण अनुबंध और अनुबंध II में दिया गया है।

आठ प्रमुख उद्योगों अर्थात् कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली के उत्पादन के संयुक्त और अलग-अलग प्रदर्शन को मापता है। यह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में शामिल वस्तुओं के भार का 40.27 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।

जुलाई, 2025 के लिए आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक की अंतिम वृद्धि दर 3.7 प्रतिशत रही। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान आठ प्रमुख उद्योग की संचयी वृद्धि दर पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 2.8 प्रतिशत (अनंतिम) है।

आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक का सारांश निम्नलिखित है:

कोयला – कोयला उत्पादन (भारांक: 10.33 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 11.4 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 0.7 प्रतिशत कम रहा।

कच्चा तेल – कच्चे तेल का उत्पादन (भारांक: 8.98 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 1.2 प्रतिशत घट गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 1.7 प्रतिशत घट गया।

प्राकृतिक गैस – प्राकृतिक गैस का उत्पादन (भारांक: 6.88 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 2.2 प्रतिशत घट गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 2.5 प्रतिशत घट गया।

पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद – पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादन (भारांक: 28.04 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 3.0 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 0.4 प्रतिशत बढ़ गया।

उर्वरक – उर्वरक उत्पादन (भारांक: 2.63 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 4.6 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 0.8 प्रतिशत कम हो गया।

इस्पात – इस्पात उत्पादन (भारांक: 17.92 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 14.2 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 10.4 प्रतिशत बढ़ गया।

सीमेंट – सीमेंट उत्पादन (भारांक: 5.37 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 6.1 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 8.4 प्रतिशत बढ़ गया।

बिजली – बिजली उत्पादन (भारांक: 19.85 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 3.1 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 0.5 प्रतिशत बढ़ गया।

 

नोट 1: जुलाई, 2025 के आँकड़े अंतिम हैं। अगस्त, 2025 के आंकड़े अनंतिम हैं। प्रमुख उद्योगों के सूचकांक स्रोत एजेंसियों से प्राप्त अद्यतन आँकड़ों के अनुसार संशोधित/अंतिम किए जाते हैं।

नोट 2: अप्रैल 2014 से नवीकरणीय स्रोतों से बिजली उत्पादन के आंकड़े भी शामिल हैं।

नोट 3: ऊपर दर्शाए गए उद्योग-वार भार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक से प्राप्त अलग-अलग उद्योग भार हैं तथा इन्हें आठ प्रमुख उद्योग के संयुक्त भार के अनुपातिक आधार पर 100 के बराबर बढ़ाया गया है।

नोट 4: मार्च 2019 से, तैयार स्टील के उत्पादन के अंतर्गत ‘कोल्ड रोल्ड (सीआर) कॉइल्स’ मद के अंतर्गत हॉट रोल्ड पिकल्ड एंड ऑइल्ड (एचआरपीओ) नामक एक नया स्टील उत्पाद भी शामिल किया गया है।

नोट 5: सितंबर, 2025 के लिए सूचकांक मंगलवार, 21 अक्टूबर, 2025 को जारी किया जाएगा।

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श्रीराम जन्म होते ही गूंजे गीत, बाल कलाकारो ने मन मोहा

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। श्रीराम रामलीला सोसाइटी परेड में रामलीला शुरू हुई। लीला के पहले दिन नारद मोह, राम जन्म और बाल लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। प्रभु श्रीराम के जन्म लेते ही अयोध्यावासी खुशी से झूम उठे। हर घर में लोग बधाइयां गाने लगे। महाराज दशरथ ने प्रभु राम को गोद में लेकर सभी अयोध्यावासियों को दर्शन कराए। लीला के मंचन में कलाकारों ने संवाद के माध्यम से ऐसा समा बांध की माहौल भक्तिमयीं हो गया । भगवान राम की जन्म और बाल लीला में प्रथम साहू सहित अन्य बच्चों ने अपनी लीला से सभी का मन मोह लिया । मंचन से पहले दोपहर में रामलीला भवन में मुकुट पूजन हुआ। शाम को बैंड बाजे के साथ रामलीला भवन से शोभायात्रा निकाली गई जो परेड रामलीला मैदान पहुंच कर समाप्त हुई । भगवान लक्ष्मी नारायण जी की आरती के बाद लीला का मंचन शुरू हुआ । व्यास महेश दत्त चतुर्वेदी के भजनों से भक्त भाव विभोर हो गए । इस दौरान सोसाइटी प्रधानमंत्री कमलकिशोर अग्रवाल, लाल जी शुक्ल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव गर्ग, संरक्षक राकेश गर्ग, मंत्री आलोक अग्रवाल, संयोजक जगत नारायण गुप्ता , अशोक अग्रवाल लोकेश अग्रवाल और वीरेंद्र अग्रवाल मौजूद थे ।

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कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई)/भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) 2 से 31 अक्टूबर, 2025 तक विशेष अभियान 5.0 चलाएगा

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) के निर्देशों के अनुरूप, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई)/भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) 2 से 31 अक्टूबर, 2025 तक विशेष अभियान 5.0 में भाग लेगा , जिसका प्रारंभिक चरण 15 से 30 सितंबर, 2025 तक चलेगा  इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता को संस्थागत बनानालंबित मामलों को कम करनारिकॉर्ड प्रबंधन और कबाड़ एवं ई-कचरे के वैज्ञानिक निपटान पर केंद्रित होगा ।

विशेष अभियान 4.0 के दौरान पिछले वर्ष कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई)/भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने लंबित मामलों को कम करने, फाइलों की समीक्षा और निपटान, कार्यालय स्थान रिक्त करने, कबाड़ और ई-कचरे का निपटान, राजस्व सृजन और आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की। इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए, सभी आईसीएआर संस्थानों, क्षेत्रीय केंद्रों और क्षेत्रीय कार्यालयों से विशेष अभियान 5.0 में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया गया है।

कार्यान्वयन की निगरानी, ​​दैनिक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने और अधिकतम दृश्य प्रभाव वाले आदर्श अभियान स्थलों को प्रदर्शित करने के लिए एसएमडी-वार नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। प्रारंभिक गतिविधियों में स्वच्छतास्थान प्रबंधनई-कचरा निपटानलंबित संदर्भ और रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए लक्ष्य निर्धारण शामिल हैं , जिनका पूर्ण कार्यान्वयन 2 अक्टूबर, 2025 से शुरू होगा।

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई)/भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) इस अभियान के माध्यम से स्पष्ट परिणाम प्राप्त करने तथा स्वच्छतादक्षता और सार्वजनिक सेवा वितरण की संस्कृति को बनाए रखने की योजना बना रहा है ।

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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से 2 अक्टूबर, 2025 से विशेष अभियान 5.0 का आयोजन किया जाएगा

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार कृषि एवं किसान कल्याण विभाग 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2025 तक विशेष अभियान 5.0 के तहत विभिन्न गतिविधियां संचालित करने की योजना बना रहा है। इस अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को संस्थागत बनाना, सरकारी कार्यालयों में लंबित मामलों को कम करना और इन कार्यालयों के साथ आम जनता के अनुभव को बेहतर बनाना है। अभियान का महत्वपूर्ण पहलू सरकारी कार्यालयों में उत्पन्न ई-कचरे का नियमों के अनुसार निपटान करना है।

पिछले वर्ष विशेष अभियान 4.0 के तहत कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पूरे भारत में 1791 स्थलों की सफाई की। इससे कार्यालयों में लगभग 55473 वर्ग फुट जगह खाली कराया गया और 11299 किलोग्राम कचरे का निपटान किया गया। इसके साथ ही 61,07,784/- रुपये की राजस्व की प्राप्ति हुई। इसके अलावा 22269 जन शिकायतों का निपटारा किया गया। 53660 भौतिक फाइलों की समीक्षा की गई और 19241 फाइलों को हटाया गया।

विशेष अभियान 5.0 के लिए विभाग ने पहले ही नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। इस विभाग के सभी प्रभागों और सभी अधीनस्थ/संलग्न कार्यालय, सार्वजनिक उपक्रम, स्वायत्त निकाय और डीएएंडएफडब्ल्यू के प्रशासनिक नियंत्रण वाले प्राधिकरण से अभियान को सफल बनाने के लिए इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया गया है।

डीएएंडएफडब्ल्यू के सचिव ने स्वच्छता ही सेवा और विशेष अभियान 5.0 के दौरान किए जाने वाले कार्यों पर चर्चा करने के लिए इस विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में विभाग के नोडल अधिकारी और उसके संबद्ध एवं अधीनस्थ कार्यालयों आदि के साथ दो बार विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकें आयोजित की गईं।

उनसे अनुरोध किया गया कि वे तैयारी के प्रारंभिक चरण के दौरान स्वच्छता स्थलों, स्थान प्रबंधन, ई-कचरे, स्क्रैप और अनावश्यक वस्तुओं के निपटान, सांसदों, राज्य सरकारों, अंतर-मंत्रालयी संदर्भों, संसदीय आश्वासनों, पीएमओ संदर्भों, लोक शिकायतों और उसकी अपीलों तथा रिकॉर्ड प्रबंधन आदि से संबंधित लक्ष्यों की पहचान करें और उन्हें प्रस्तुत करें।

डीएएंडएफडब्ल्यू के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत सभी प्रभागों/क्षेत्रीय और बाहरी कार्यालयों के संबंध में विशेष अभियान 5.0 के लिए प्रारंभिक चरण में निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए 2 अक्टूबर, 2025 से कार्यान्वयन चरण शुरू किया जाएगा।

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पटना में एपीडा के पहले कार्यालय का उद्घाटन किया;  यह बिहार की कृषि-निर्यात यात्रा में एक नया अध्याय है

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बिहार को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात के केंद्र में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 11 सितंबर, 2025 को पटना, बिहार में आयोजित बिहार आइडिया फेस्टिवल में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी और उद्योग मंत्री श्री नीतीश मिश्रा के साथ-साथ बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, एपीडा नेतृत्व, उद्यमी, एफपीओ और किसान समूह भी उपस्थित थे।

बिहार का समृद्ध कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र शाही लीची, जर्दालू आम, मिथिला मखाना और मगही पान से लेकर मुख्य अनाज और फलों व सब्जियों के विविध मिश्रण तक, उच्च-संभावना वाले कृषि उत्पादों की एक विविध श्रृंखला के अनुकूल है। इनमें से कई उत्पादों को मिले भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग उनकी वैश्विक अपील को बढ़ाते हैं, जिससे बिहार को अंतर्राष्ट्रीय कृषि-व्यापार क्षेत्र में एक अद्वितीय बढ़त मिलती है।

एपीडा के पटना कार्यालय की स्थापना बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक नए युग का सूत्रपात करती है, जिससे किसानों, उत्पादकों और निर्यातकों को पंजीकरण, परामर्श सेवाएं, बाज़ार सूचना, प्रमाणन में सहायता, निर्यात प्रक्रियाओं में सुगमता, बाज़ार सुगमता, बुनियादी ढांचे के विकास और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के अवसरों तक सीधी पहुंच प्राप्त होगी। अब तक, बिहार के निर्यातक वाराणसी स्थित एपीडा के क्षेत्रीय कार्यालय पर निर्भर थे। नया कार्यालय एफपीओ, एफपीसी और निर्यातकों को सीधी सहायता प्रदान करेगा, जिससे निर्यातकों के प्रश्नों के समाधान में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और राज्य-स्तरीय संस्थानों के साथ समन्वय दृढ़ होगा।

इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री पीयूष गोयल ने कहा कि पटना में एपीडा क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं है अपितु यह बिहार के किसानों को वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करने का एक मिशन है। हमारे किसान, उद्यमी और निर्यातक दुनिया को भोजन उपलब्ध कराने की क्षमता रखते हैं। उचित सहयोग से, बिहार उच्च मूल्य वाले, टिकाऊ कृषि-निर्यात में अग्रणी बनकर उभरेगा।

इसी भावना को दोहराते हुए, उप-मुख्यमंत्री ने केंद्र की पहल की सराहना की और किसान-आधारित विकास और निर्यात की तैयारी के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने हेतु बिहार सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। क्षमता निर्माण, बाज़ार संपर्क और गुणवत्ता संवर्धन के माध्यम से एपीडा के निरंतर समर्थन ने इन निर्यातों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उद्घाटन समारोह को ऐतिहासिक बनाते हुए, जीआई-टैग युक्त मिथिला मखाना की 7 मीट्रिक टन की खेप को न्यूज़ीलैंड, कनाडा और अमेरिका के लिए रवाना किया गया। यह निर्यात बिहार के दरभंगा की नेहाशी की संस्थापक, एक महिला उद्यमी सुश्री नेहा आर्या द्वारा किया गया और यह समावेशी और लैंगिक-संवेदनशील व्यापार संवर्धन के प्रति एपीडा की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

सुश्री आर्या की कहानी बिहार में महिलाओं के नेतृत्व वाली उद्यमिता के लिए एक मजबूत प्रोत्साहन का शानदार उदाहरण है, साथ ही यह बिहार के उच्च मूल्य, जीआई-टैग वाले उत्पादों के लिए बढ़ती वैश्विक मांग को उजागर करती है और सहकारी संघवाद का एक शानदार उदाहरण प्रस्तुत करती है, जो एपीडा और बिहार सरकार के माध्यम से वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई संस्थागत सहायता के माध्यम से बिहार के लोगों के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह पहल महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को सशक्त बनाकर और ग्रामीण उत्पादकों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करके समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए एपीडा के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। यह शिपमेंट बिहार के कृषि क्षेत्र में महिला उद्यमियों की बढ़ती निर्यात तत्परता का प्रमाण है।

निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप, बिहार ने निर्यात में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। जीआई-टैग वाला मिथिला मखाना वर्ष 2024-25 में संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका को निर्यात किया जा चुका है। वर्ष 2023 में, जीआई-टैग वाला जर्दालु आम भी अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में पहुंच चुका है। तिलकुट और तिल के लड्डू जैसी पारंपरिक मिठाइयां और शाही लीची जैसे फल अब वैश्विक खरीदार पा रहे हैं और यह बिहार की स्वदेशी उपज के अनूठे मूल्य को प्रदर्शित करते हैं।

पिछले तीन वर्षों में, एपीडा ने बिहार में राज्य के कृषि-निर्यात इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक व्यापक जुड़ाव रणनीति लागू की है। इसमें किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), निर्यातकों और अन्य हितधारकों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और अंतर्राष्ट्रीय अनुपालन प्रोटोकॉल पर प्रशिक्षित करने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम- भौतिक और आभासी दोनों- शामिल हैं। व्यावहारिक प्रदर्शन प्रदान करने के लिए, एपीडा ने एफपीओ और हितधारकों के लिए यूएई जैसे गंतव्यों और महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में उत्कृष्टता के घरेलू केंद्रों जैसे कि आईआईवीआर, आईआरआरआई और सीआईएसएच लखनऊ जैसे अंतर्राष्ट्रीय दौरों की सुविधा प्रदान की, जिससे प्रतिभागियों को फसल कटाई के बाद की प्रबंधन, गुणवत्ता आश्वासन और निर्यात दस्तावेजीकरण में सर्वोत्तम प्रथाओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिली। मुजफ्फरपुर में जीआई-टैग वाली शाही लीची के लिए दीर्घकालीन पैकेजिंग को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया इसके अलावा, बिहार के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, एपीडा और बिहार सरकार द्वारा संयुक्त रूप से 19-20 मई, 2025 को पटना के ज्ञान भवन में एक अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता बैठक (आईबीएसएम) का आयोजन किया गया, जिसमें 22 देशों के 70 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के साथ-साथ 40 से अधिक प्रमुख घरेलू निर्यातकों, पांच कृषि व्यापार संघों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

पटना में एपीडा कार्यालय का उद्घाटन और अंतर्राष्ट्रीय मखाना शिपमेंट का सफल शुभारंभ, बिहार के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। पटना स्थित एपीडा कार्यालय केवल एक नए भवन से कहीं अधिक है; यह संपूर्ण बिहार के हजारों किसानों, कृषि उद्यमियों, महिला-प्रधान उद्यमों, एफपीओ, एफपीसी, स्टार्ट-अप्स और नवोदित युवा निर्यातकों के लिए समृद्धि का द्वार है। यह संस्थागत मजबूती, बाजार पहुंच और तकनीकी मार्गदर्शन को सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचाता है। एपीडा और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के निरंतर सहयोग से, बिहार उच्च मूल्य, दीर्घकालिक और समावेशी कृषि व्यापार के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार है।

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सरकार ने फसल वर्ष 2025-26 के मद्देनजर मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अफीम पोस्त की खेती के लिए वार्षिक लाइसेंसिंग नीति की घोषणा की

केंद्र सरकार ने आज मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए अफीम पोस्त की खेती के लाइसेंस संबंधी वार्षिक लाइसेंसिंग नीति की घोषणा की। यह नीति 1 अक्टूबर, 2025 से 30 सितंबर, 2026 फसल वर्ष के दौरान जारी रहेगी।

नीति की सामान्य शर्तों के अनुसार, इन राज्यों में लगभग 1.21 लाख किसान अफीम की खेती के लाइसेंस प्राप्त करने के पात्र है। यह पिछले फसल वर्ष में जारी किए गए लाइसेंसों की संख्या से 23.5 प्रतिशत अधिक है । इस प्रकार लगभग 15,000 अतिरिक्त किसान इस नीति से जुड़े है, जिन्हें इस वर्ष अफीम की खेती से लाभ मिलने की उम्मीद है।

केंद्र सरकार चिकित्सा और उपशामक देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एल्कलॉइड की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसके साथ ही, आवश्यक मादक औषधियों के उत्पादन हेतु एल्कलॉइड की आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से, स्वदेशी और आत्मनिर्भर उपायों के माध्यम से प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।

वार्षिक लाइसेंस नीति की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • मौजूदा अफीम गोंद उत्पादकों को बनाए रखना जिन्होंने प्रति हेक्टेयर 4.2 किलोग्राम या उससे अधिक औसत मॉर्फिन उपज (एमक्यूवाई-एम) हासिल की है
  • 3.0 किलोग्राम से 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच मॉर्फिन उपज वाले मौजूदा अफीम गोंद उत्पादक अब पांच साल की लाइसेंस वैधता के साथ, पोस्ता भूसा सांद्रण (सीपीएस) विधि के तहत चीरा लगाए बिना पोस्ता भूसे की खेती करने के पात्र हैं।

इसके अलावा, 1995-96 से किसानों की संख्या के कंप्यूटराइजड रिकॉर्ड (डिजिटलीकरण) से समावेशिता बढ़ी है, जिससे पिछले वर्षों के सीमांत किसानों को निर्धारित पात्रता और शिथिल मानदंडों को पूरा करके लाइसेंस प्राप्त करने में मदद मिली है।

सरकार का बेहतर प्रदर्शन करने वाले उन किसानों को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव है, जिन्होंने 900 किलोग्राम/हेक्टेयर या उससे अधिक अफीम की उपज प्राप्त की है, और उन्हें अफीम गोंद की खेती की पारंपरिक विधि अपनाने का विकल्प प्रदान करती है। इस बदलाव का उद्देश्य उनकी जोतों से अफीम की अधिक पैदावार को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही यह खेत से अफीम के अन्य स्रोतों के उपयोग के जोखिम को कम करने के लिए एक सकारात्मक सुदृढ़ीकरण तंत्र के रूप में भी कार्य करेगा।

सरकार सीपीएस खेती के तहत फसल वर्ष 2025-26 के लिए उन किसानों के लाइसेंस निलंबित करेगी, जिन्होंने पिछले फसल वर्ष (2024-25) के दौरान 800 किलोग्राम/हेक्टेयर की निर्धारित न्यूनतम योग्यता उपज (एमक्यूवाई) को पूरा नहीं किया था।

सरकार अपने अफीम और अल्कलॉइड कारखानों की क्षमता बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष, नीमच स्थित सरकारी अल्कलॉइड कारखाने को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से जीएमपी प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इस नीति का उद्देश्य सरकारी नियंत्रित अल्कलॉइड इकाइयों के लिए आत्मनिर्भरता को संतुलित करने के साथ अल्कलॉइड एपीआई और फॉर्मूलेशन में भारतीय दवा कंपनियों को सहयोग प्रदान करना है। उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और ब्रांड विश्वसनीयता का लाभ उठाकर, इस पहल का उद्देश्य मेक फॉर वर्ल्ड विजन को बढ़ावा देना है।

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कृषि क्षेत्र में सरकार का अपनी तरह का पहला एआई-आधारित मौसम पूर्वानुमान कार्यक्रम, 3.8 करोड़ किसानों तक पहुंच रहा है

देश के करोड़ों किसानों की आय और आजीविका का मुख्य स्रोत खरीफ की खेती है लेकिन इसके लिए किसान वर्षा पर निर्भर हैं। मानसून के बारे में यदि किसानों को पहले से ही मौसम संबंधी पूर्व जानकारी मिल जाए तो उन्हें यह निर्णय लेने काफी मदद मिल सकती है कि कौन सी फसल, कितनी मात्रा में और कब बोनी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा संचालित मौसम पूर्वानुमान में क्रांति के कारण अब यह संभव हो सका है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (एमओएएफडब्ल्यू) किसानों के लिए एआई की शक्ति का उपयोग कर रहा है। एक अनूठी सार्वजनिक पहल के तहत, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इस वर्ष 13 राज्यों के लगभग 3.8 करोड़ किसानों को एसएमएस (एम-किसान) के माध्यम से एआई-आधारित मानसून पूर्वानुमान भेजे । यह पूर्वानुमान बारिश से चार सप्ताह पहले तक कहीं उपलब्ध थे। एआई-आधारित मॉडलों ने किसानों की ज़रूरतों के अनुसार विशेष रूप से पूर्वानुमान तैयार करना संभव बना दिया है, जिससे किसानों को खरीफ फसल संबंधी निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण मिला। यह अब तक एआई मौसम पूर्वानुमानों का अपनी तरह का पहला लक्षित प्रसार है, जिसने मंत्रालय को किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए एआई मौसम पूर्वानुमान लागू करने में विश्व-अग्रणी के रूप में स्थापित किया है।

अपर सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मेहरदा और संयुक्त सचिव श्री संजय कुमार अग्रवाल ने कृषि भवन में 8 सितंबर को आयोजित एक कार्यक्रम समीक्षा बैठक में, नोबेल पुरस्कार विजेता और शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइकल क्रेमर के साथ मंत्रालय की इस अभूतपूर्व पहल और कार्यक्रम के विस्तार पर चर्चा की। डॉ. मेहरदा ने कहा, ” यह कार्यक्रम निरंतर वर्षा की भविष्यवाणी करने के लिए एआई-आधारित मौसम पूर्वानुमान में क्रांति का उपयोग करता है, जिससे किसानों को अधिक आत्मविश्वास के साथ कृषि गतिविधियों की योजना बनाने और जोखिमों का प्रबंधन करने में मदद मिलती है। हम आने वाले वर्षों में इस प्रयास को और बेहतर बनाने की आशा करते हैं।”

इस वर्ष, मानसून समय से पहले आ गया था, लेकिन उत्तर की ओर बढ़ने में रुकावट आने से 20 दिनों तक बारिश रुकी रही। मंत्रालय ने एआई आधारित पूर्वानुमानों से मानसून की इस रुकावट की सटीक पहचान की। सरकार ने किसानों को हर हफ्ते अद्यतन जानकारी भेजी। श्री अग्रवाल ने कहा, “जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में परिवर्तनशीलता बढ़ रही है, इसलिए पूर्वानुमान किसानों को समय के साथ तारतम्य स्थापित करने में मदद करने का एक उपयोगी साधन हैं।”

मौसम पूर्वानुमान में एआई क्रांति

वर्ष 2022 से, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्रेरित क्रांति ने मौसम पूर्वानुमान के विज्ञान को पूरी तरह बदल दिया है और कई स्थितियों में अधिक सटीक पूर्वानुमान प्रदान किए हैं। इन मॉडलों को उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है और ये भारतीय मानसून जैसी जटिल घटनाओं का हफ्तों पहले पूर्वानुमान लगाने की क्षमता को और बढ़ा रहे हैं। मंत्रालय ने करोड़ों किसानों के हित के लिए इस क्रांति को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा इस्तेमाल किए गए पूर्वानुमान दो ओपन-एक्सेस मॉडलों—गूगल के न्यूरल जीसीएम और ईसीएमडब्ल्यूएफ के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फोरकास्टिंग सिस्टम्स (एआईएफएस)—का मिश्रण थे। कड़े विश्लेषणों में, ये मॉडल किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर मानसून की शुरुआत की भविष्यवाणी करने में अन्य उपलब्ध पूर्वानुमानों से स्पष्ट रूप से बेहतर साबित हुए।

नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने कहा कि मौसम संबंधी जानकारी प्रदान करते समय किसानों की ज़रूरतों पर ध्यान देना ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “यह पहल बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसानों की ज़रूरतों पर केंद्रित है और आसान भाषा में मौसम संबंधी पूर्वानुमान प्रदान करके उन्हें कृषि संबंधी निर्णय लेने में मदद करती है।”

डेवलपमेंट इनोवेशन लैब – इंडिया और प्रिसिजन डेवलपमेंट की टीमों के साथ काम करते हुए मंत्रालय ने किसानों के साथ प्रत्यक्ष रूप से संवाद स्थापित किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संदेश उनकी समझ में आ गए हैं और उन्हें अमल में लाया जा सकता है।

नोबेल पुरस्कार विजेता माइकल क्रेमर ने कहा, “यह कृषि मंत्रालय की एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे लाखों किसानों को लाभ होगा और भारत किसानों की जरूरतों को पूरा करने में अग्रणी स्थान पर रहेगा।” उन्होंने कहा, “मंत्रालय का कार्यक्रम इस बात का एक मॉडल है कि एआई के युग में लोगों को कैसे प्राथमिकता दी जाए।”

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निफ्ट पटना और एबीएफआरएल ने केंद्रीय वस्‍त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह की उपस्थिति में स्वयं सहायता समूह जीविका की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) पटना ने आज केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह की मौजूदगी में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उद्योग कौशल प्रदान कर बिहार के बढ़ते वस्त्र क्षेत्र में रोजगार के अवसर दिलाना है, ताकि उनके जीवन में सकारात्‍मक बदलाव आए।

गिरिराज सिंह ने साझेदारी के महत्व का उल्‍लेख करते हुए कहा कि निफ्ट पटना ने बेगूसराय में जीविका दीदियों के लिए पहले ही कई सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं, जिससे उनके सिलाई कौशल और आय क्षमता में बढ़ोतरी हुई है। उन्‍होंने कहा कि इस समझौता ज्ञापन से निफ्ट विस्तार केंद्र में प्रशिक्षित जीविका दीदियों को अब एबीएफआरएल कारखाने में नौकरियां मिल पाएगी। शुरू में, आसपास के क्षेत्र की 3.5 लाख महिलाओं को लाभ मिलेगा और भविष्य में, निकटवर्ती जिलों की महिलाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

समझौता ज्ञापन सहयोग के तहत, जीविका दीदियों के नाम से पहचाने जाने वाली स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को निफ्ट पटना में परिधान निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और मशीनरी संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को बेगूसराय जिले में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) की आगामी वस्त्र निर्माण इकाई में रोजगार देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे इन महिलाओं के कौशल विकास से लेकर सुरक्षित आजीविका तक का सुव्यवस्थित मार्ग तैयार होगा।

जीविका दीदियां, बिहार के जीविका कार्यक्रम की रीढ़ हैं, जिसे भारत सरकार और विश्व बैंक के सहयोग से बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (बीआरएलपीएस) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में पिछले कुछ वर्षों में  1.4 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी है, जिससे उन्हें कम राशि के वित्त प्राप्त करने, घरेलू आय में वृद्धि और सामाजिक सशक्तिकरण में मदद मिली है। यह समझौता ज्ञापन जीविका दीदियों को वस्‍त्र और फैशन क्षेत्र में रोज़गार के औपचारिक अवसरों से जोड़ता है, जिससे उनकी भूमिका स्थानीय उद्यमों से विस्‍तारित होकर मुख्यधारा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था तक पहुंचती है।

भारत की फ़ैशन और वस्‍त्र क्षेत्र की अग्रणी खुदरा कंपनियों में से एक, एबीएफआरएल के साथ साझेदारी सुनिश्चित करती है कि उसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले कौशल आधुनिक वस्त्र उत्पादन की मांग पूरा करेगी। निफ्ट की शैक्षणिक विशेषज्ञता को एबीएफआरएल की उद्योग आवश्यकताओं से जोड़ने संबंधी यह पहल शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग का सहक्रियात्मक मॉडल भी प्रस्‍तुत करती है। यह मॉडल पूरे भारत में  विशेषकर महिला समूह और ग्रामीण आजीविका स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ वाले राज्‍यों में भविष्य की साझेदारियों के लिए एक खाका प्रस्‍तुत करेगा।

तत्काल रोज़गार प्रदान करने के अलावा, इस कार्यक्रम से सामाजिक और आर्थिक दूरगामी परिणाम की उम्मीद है। महिलाओं को आजीविका के स्थिर साधन प्रदान कर  यह उन्‍हें अधिक वित्तीय स्वतंत्रता, घरों में निर्णय लेने की बेहतर शक्ति और सम्मान बढा़एगा। साथ ही, बेगूसराय में एबीएफआरएल की विनिर्माण इकाई की स्थापना से बिहार के औद्योगिक विकास में मदद मिलेगी,  जिससे महिलाओं के साथ ही स्थानीय स्‍तर पर कार्यबल के लिए व्‍यापक अवसर उत्‍पन्‍न होंगे।

यह समझौता ज्ञापन एक ऐतिहासिक पहल है जो समावेशी और सतत विकास लक्ष्‍य को पूरा करने के सरकार के दृष्टिकोण, शैक्षणिक विशेषज्ञता और उद्योग नेतृत्व को समेकित करता है। यह दर्शाता है कि कौशल विकास, रोज़गार आश्वासन के साथ जुड़कर, जीवन में कैसे बदलाव ला सकता है। यह विकास का ऐसा मॉडल दे सकता है, जिसे देशभर में मापा और दोहराया जा सके।

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