17वीं लोकसभा का कार्यकाल 16 जून को समाप्त हो रहा है| 18वीं लोकसभा के लिए 19 अप्रैल से 1 जून 2024 तक सात चरणों में चुनाव सम्पन्न होंगे| यह दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा चुनाव होगा| जो 2019 के चुनाव को पीछे छोड़ते हुए 44 दिनों की अवधि वाला सबसे लम्बे समय तक चलने वाला आम चुनाव है| इस चुनाव के लिए 968 मिलियन भारतीय नागरिक मतदान हेतु पात्र माने गये हैं| जो कि 2019 के मुकाबले लगभग 150 मिलियन अधिक हैं| पहले चरण का चुनाव 19 अप्रैल को होगा| इस दिन 21 राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पश्चिम बंगाल, अंडमान निकोबार, जम्मू कश्मीर, लक्षद्वीप तथा पुद्दुचेरी की 102 लोकसभा सीटों के लिए मतदान होगा| जबकि दूसरे चरण में 26 अप्रैल को 13 राज्यों असम, बिहार, छतीसगढ़, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा जम्मू कश्मीर की कुल 89 सीटों के लिए वोट डाले जायेंगे| तीसरे चरण में 7 मई को 12 राज्यों असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दादर नागर हवेली एवं दमन दीव की कुल 94 सीटों के लिए चुनाव सम्पन्न होगा| चौथे चरण में 13 मई को 10 राज्यों आन्ध्र प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा जम्मू कश्मीर की कुल 96 सीटों पर मतदान होगा| पांचवें चरण में 20 मई को देश के 8 राज्यों छत्तीसगढ़, झारखण्ड, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर, एवं लद्दाख की 49 सीटों के लिए चुनाव होगा| छठे चरण में 25 मई को 7 राज्यों बिहार, हरियाणा, झारखण्ड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा दिल्ली की कुल 57 सीटों के लिए वोट पड़ेंगे और सातवें चरण में 1 जून को 8 राज्यों बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखण्ड, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं चंडीगढ़ की कुल 57 सीटों पर मतदान होगा|
2024 के चुनावी समर में मुख्य मुकाबला राजनीतिक दलों के दो प्रमुख गठबन्धनों सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जन तान्त्रिक गठबन्धन तथा कांग्रेस के नेतृत्व वाले भारतीय राष्ट्रीय विकासशील समावेशी गठबन्धन (इण्डिया) के बीच होगा| छह राष्ट्रीय दल इस चुनाव में भाग ले रहे हैं| भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), बहुजन समाज पार्टी, नेशनल पीपुल्स पार्टी, तथा आम आदमी पार्टी| इनमें बसपा को छोड़कर शेष सभी राष्ट्रीय दल दो में से किसी एक गठबन्धन का हिस्सा हैं| बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी अधिकांश राज्यों में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी परन्तु तेलंगाना तथा हरियाणा में गैर-भाजपा एवं गैर-कांग्रेसी दलों के साथ गठबन्धन करेगी| वहीँ आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमन्त्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, ओडिशा के मुख्यमन्त्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल तथा मिजोरम के मुख्यमन्त्री लालदुहोमा की पार्टी मिजोरम पीपुल्स मूवमेंट अपने-अपने राज्य में अकेले ही लोकसभा का चुनाव लड़ेगी|
सभी दल अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची लगभग फ़ाइनल कर चुके हैं| अधिक से अधिक सीटों पर फ़तेह हासिल करना सबका लक्ष्य है| वैसे तो सत्तारूढ़ दल काफी मजबूत स्थिति में है| लेकिन विपक्ष के कई बड़े दलों द्वारा एक होकर इण्डिया गठबन्धन बनाने के बाद भाजपा को चुनावी वैतरणी पार करने के लिए कुछ मशक्कत करनी पड़ सकती है| देश की 13 अलग-अलग एजेंसियों द्वारा जनवरी 2023 से फरवरी 2024 के बीच कराये गये सर्वेक्षणों के आधार पर भाजपा गठबन्धन को 44.30 प्रतिशत वोट मिलने की आशा है| जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को 36.52 प्रतिशत तथा अन्य दलों को 19 प्रतिशत के आसपास वोट मिल सकते हैं| 2019 में भाजपा गठबन्धन को 45.3 प्रतिशत वोट मिले थे| जबकि कांग्रेस को 28.5 प्रतिशत एवं अन्य को 27.2 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे| अब यदि उपरोक्त सर्वेक्षण के आधार पर सीटों की बात करें तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन को लगभग 341, भारतीय राष्ट्रीय विकासशील समावेशी गठबन्धन को 146 तथा अन्य दलों को 56 सीटें 2024 के लोकसभा चुनावों में मिलती हुई दिखाई देती हैं| राजग के प्रधानमन्त्री पद के दावेदार एक मात्र नरेन्द्र दामोदर दास मोदी हैं| जबकि इण्डिया गठबन्धन इस हेतु चुनाव के बाद निर्णय लेगा| 3 फरवरी 2024 को टाइम्स नाउ-ईटीजी रिसर्च सर्वेक्षण के अनुसार सर्वे में शामिल 64 प्रतिशत लोगों ने अगले प्रधानमन्त्री के रूप में नरेन्द्र मोदी को पसन्द किया है| जबकि राहुल गाँधी 17 प्रतिशत लोगों की पसन्द रहे| सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर यदि कहा जाये तो भाजपा एवं उसके सहयोगी दलों के लिए सत्ता में वापसी काफी आसान लग रही है| लेकिन इस बीच चुनावी बांड को लेकर जिस तरह के खुलासे हो रहे हैं उससे भारतीय जनता पार्टी पर विशेष रूप से ऊँगली उठ रही है| जो सत्ता की राह में राजग के लिए एक स्पीड-ब्रेकर हो सकता है लेकिन दीवार नहीं| क्योंकि चुनावी बांड का गणित देश के आम जन को जब तक पूरी तरह से समझ में आयेगा तब तक 18वीं लोकसभा का गठन हो चुका होगा और नरेन्द्र दामोदर दास मोदी तीसरी बार भारत के प्रधानमन्त्री पद की शपथ भी ले चुके होंगे| क्योंकि देश इस समय भावनात्मक मुद्दों की सुनामी के आगोश में फंसा हुआ है| जिसके कारण एक बहुत बड़ा वर्ग भ्रष्टाचार, मंहगाई तथा बेरोजगारी जैसे मुद्दों को गम्भीरता से लेना तो दूर, इन पर बात तक नहीं करना चाहता है और न ही कोई विपक्षी दल इन ज्वलन्त मुद्दों को धार दे पाने में सफल हो रहा है| इसके अतिरिक्त कांग्रेस सहित लगभग सभी विपक्षी दल अपने नेताओं के भाजपा में पलायन से भी हलकान हैं| शाम को जिसके साथ चुनावी रणनीति बनती है अगली सुबह वह भाजपा के पाले में खड़ा दिखाई देता है| जिससे 2024 का आम चुनाव विकल्पहीनता की भेंट चढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है| अतः राजग की सत्ता में पुनः वापसी की राह उसकी लोकप्रियता नहीं अपितु विकल्पहीनता के कारण पूरी तरह से आसान दिखाई दे रही है|
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होली करीब आते जा रही थी और मेरे मन में उमंगे बढ़ती जा रही थी। इस बार पक्का सोच लिया था कि प्रतीक को ढेर सारा गुलाल लगाऊंगी और खुद लगवाऊंगी भी। मैं खास होली के लिए सफेद रंग की ड्रेस भी खरीद कर ले आई थी।
न ही मोहताज हूँ मैं…
मां हमेशा जिंदा रहती है…
कानपुर 11 जनवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा 27वां राष्ट्रीय युवा उत्सव नासिक, महाराष्ट्र में 12 जनवरी से 16 जनवरी 2024 के मध्य मनाया जा रहा है। डॉ श्याम मिश्रा, राष्ट्रीय सेवा योजना छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा अवगत कराया गया कि इस युवा महासम्मेलन में राष्ट्रीय सेवा योजना, छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर से 11 स्वयंसेवकों का दल टीम लीडर डॉ संगीता सिरोही के निर्देशन में आज कानपुर सेंट्रल से नासिक के लिए रवाना हुआ। इसमें डी जी कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही का चयन राष्ट्रीय सेवा योजना उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड कंटिजेंट लीडर के रूप में किया गया। साथ में डी जी कॉलेज की दो छात्राओं वर्षा सिंह एवं आरती वर्मा का चयन प्रतिभागी के रूप में हुआ। डी ए वी कॉलेज से ऋषि श्रीवास्तव, आकांक्षा सक्सेना एवं प्रज्ञा वाखले, बी एन डी कॉलेज से सक्षम मिश्रा, अरमापुर कॉलेज से रूपेंद्र सिंह यादव, डी एस एन कॉलेज उन्नाव से शिवांगी मिश्रा एवं आदर्श पांडे, एल वाई कॉलेज, फर्रुखाबाद से रजत गुप्ता एवं रमन चतुर्वेदी का चयन युवा सम्मेलन प्रतिभागियों के रूप में किया गया। जिसमें वे विभिन्न संस्कृत अकादमी एवं खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। उत्तर प्रदेश से कुल 60 प्रतिभागियों तथा 6 कार्यक्रम अधिकारियों का चयन क्षेत्रीय निदेशक, राष्ट्रीय सेवा योजना, उत्तर प्रदेश एवम् उत्तराखंड के द्वारा उक्त कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए किया गया है।
एक राज्य से दूसरे राज्य, एक देश से दूसरे देश में लोगों का प्रवास कोई नई बात नहीं है। यह बहुत पुरानी घटना है. इसके दो मुख्य कारण कारण हैं – पहला आर्थिक और दूसरा बेहतर जीवन के लिए। पहले को 80 प्रतिशत और बाकी 20 प्रतिशत ने दूसरे कारण से अपनाया। अब पिछले कुछ दशकों से शिक्षा युवा पीढ़ी के लिए उच्च शिक्षा के लिए दूसरे देशों की ओर पलायन का पहला कारण बन गई है क्योंकि स्वतंत्रता के बाद से हमारी सरकारों द्वारा शिक्षा क्षेत्र की उपेक्षा की गई है। हमारे देश से सभी राज्यों से छात्र शिक्षा के लिए पलायन करते हैं। लेकिन नौकरी और बेहतर जीवन शैली के लिए पंजाब, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश से अधिक लोग पलायन करते हैं।