Breaking News

लेख/विचार

सुलझा हुआ दिखने की बजाय सुलझा होना बेहतर

“सुलझा हुआ दिखने की जगह ..सुलझे होना ही बेहतर है “साफ़ शीशे की तरह। बाहर से हर कोई शान्त समुन्दर की तरह दिखता है मगर भीतर इक छिपा हुया तूफ़ान। ये बात इक महिला कमल की है जिसे मैं जानती हूँ।वो बेहद समझदार ,ख़ुश मिज़ाज ,अपने गुरू में पूरी आस्था रखने वाली।पूरे मोहल्ले की रौनक़।हमेशा उनका हँसता हुआ चेहरा देखा करती।आत्मविश्वास तो कूट कूट कर भरा पड़ा था।अच्छे खुले विचारों की धनी ,सहृदय की स्वामिनी।अपने काम खुद ही करती।वो तक़रीबन अस्सी साल की होगी।आज बहुत गर्मी थी।सारा दिन ऐ-सी मे बैठने से मन उकता सा गया था।मैंने गार्गी को फ़ोन मिलाया और उसे झील पर मिलने के लिए कह दिया। थोड़ी ही देर मे मै भी वहाँ पहुँच गई।चंडीगढ़ की झील और उसपर शाम का ठंडी हवा जैसे मन को शान्त कर रही थी।सामने से गार्गी अपनी ममी के साथ आती दिखाई दी, वो बचपन से ही कमल आंटी को जानती थी।अचानक मेरी नज़र कमल आंटी पर पड़ी। झील की पोडियो पर चुप सी आँखें बंद करके बैठी हुई थी।मुझे हैरानी हुई ये कमल आंटी जो इतनी रौनकी है आज इतनी चुप सी ,मैंने गार्गी को कहा, इनको क्या दुख हो सकता है ये तो रोते हुए को भी हंसा देती है।
गार्गी की ममी ने बताया कि कमल मेरी बचपन की सहेली है।जब कमल तीन साल की थीं।उनके पिता की मौत हो गई।इनका बचपन बहुत तंगी में गुजरा।दादा के साथ रह कर देसी घी बेचने की दुकान चलाया करती थी।दुकान और घर के बीच इक अंधेरा वाली गली आती थी।लोग रात को वहाँ से नही गुजरते थे और ये कमल हाथ मे इक लम्बी सी छड़ी ज़मीन पर मारती और “दादा जी मै आईं ,दादा जी मै आई“ज़ोर ज़ोर से कहते कहते अपने दादा के पास पहुँच जाती और दादा उसे डाँटते ! कयूं आई हो अन्धेरें से ,मै घर आ जाता अपने आप,तो कमल कहती! कयूं आप अकेले कयूं आते।उस अंधेरे वाली गली से।कही आप का पैर फिसल गया और कहीं चोट लग गई।इसी लिये मै आप को शाम को घर ले जाने के लिये आ जाती हूँ और दादा की बूढ़ी आँखें कमल की इस सोच पर भर जाया करती।बहुत निडर हुआ करती थी। वहाँ गाँव में इक ऊँचा लम्बा आदमी जिस की शकल ख़ूँख़ार सी हुआ करती थी।लोग उससे डरा करते थे।इक बार वो दुकान पर आ गया।सब गाहक डर कर इधर उधर हो गये क्यूँकि वो डाकू था और ये कमल बहुत बिन्दास हो कर कहने लगी।चाचा चाचा क्या आप डाकू है ?लोग आप से इतना डरते क्यों हैं।डाकू बोला !मैं अपने गाँव की इज़्ज़त उनकी बेटियों की रखवाली के लिये ही डाकू बना हूँ।ये कमल जो उस वक़्त शायद 10 साल की रही होगी बोली !आप इतने बुरे भी नहीं जैसे लोग समझते हैं।अगर रखवाली ही करनी है आप अपनी इन बड़ी बड़ी मूँछों को कटवा दें। फिर लोग आप से नही डरेंगे।दादा ने कमल को रोकना चाहा ,मगर कमल को रोक पाना इतना सहज नही था।उसके दादा बहुत ही शान्त क़िस्म के व्यक्ति थे।वो डाकू थोडा झेंप गया।कहने लगा !अच्छा अच्छा कटवा दूँगा और सच में अगले दिन उसने अपनी ढाडी मूँछें कटवा दी और अच्छे से पगड़ी बांध कर दुकान पर आया और दादा को कहने लगा ! मैं सब को डरा कर रखता हूँ और आप की पोती को मुझ से डर नहीं लगा।चाचा चाचा कह कर मुझे डाँट भी दिया। निडर हो कर जो कहना था कह भी दिया।अब देखो मेरा पूरा हुलिया ही बदल दिया।ऐसे ही वो डाकू रोज दुकान पर आता और ये कमल जो उस वक़्त सिर्फ़ 10 बरस की लड़की थी हर रोज डाकू चाचा को अपने गुरू की बाते और कहानियाँ सुनाने लगी, जो वो अपनी माँ से सुनती थी।सुना है कि कुछ देर के बाद उस डाकू ने लूट मार करना बंद कर अपनी छोटी सी कपड़े की दुकान लगा ली। कुछ वर्ष बाद इक कोड़ी गाँव के बाहर आ रहने लगा।लोगों ने उस रास्ते से आना जाना ही छोड़ दिया।जब कमल को पता चला तब वो 12 वर्ष की लड़की रही होंगी।घर वालों से छिपा कर उस कोड़ी को रोटी पानी दूध देने चली जाती।जब इनकी माँ को पता चला तो माँ से कमल को खूब डाँट पड़ी तो कमल कहने लगी! इस कोड़ी को हमारी ज़रूरत है।उसके बाद सब गाँव वाले खुद जा कर उस कोड़ी को रोटी दे कर आते है।ऐसी थी ,बडे दिल की मालकिन ,विशाल और सरल सहज तुम्हारी कमल आंटी। बड़ी हुई तो इक डाक्टर से शादी हो गई।फिर बताया कमल के संस्कार इतने शक्तिशाली हैं।बहुत नुक़सान देखा, दो जवाई गुजर गये पति भी गुज़र गये तो भी शुक्र करती और औरों को भी सांतवना देती।बात करते करते हम सब कमल आंटी के पास पहुँच गये।आज आंटी को देखने का मेरा नज़रिया बिल्कुल अलग था सामने से सूरज की किरणें उनके मुख पर पड़ने से मुख की लालिमा और भी ज़ोरों पर थी गार्गी की ममी ने उन्हें आवाज़ दी ।जैसे ही कमल आंटी ने आँखें खोली मुझे इक तेज प्रकाश का आभास हुआ।हमे देख कर इक दम से ख़ुश हो गई आंटी हमसे बातें करने लगी ।मैं उनके तेज को ही निहारे जा रही थी कितनी निर्मल ह्रदय है। इतना कुछ खोने के बाद भी इनकी शख़्सियत कितनी शक्तिशाली है। आंटी कमल इकदम उठी और गाड़ी की ओर चल पड़ी।मैं सोच रही कि ये औरत जिसे मैं इक आम इंसान समझती थी।क्या पता था कि इनके अन्दर भी इतनी उलझनों हो सकती हैं जो कभी वो ज़ाहिर नहीं करती। मैंने भी महसूस किया वाक़ई में ये सुलझी हुई औरत है जो भी मिला उसे सहर्ष स्वीकार किया और उलझा सा था कोई दूसरा उनमें।जो उनका गुरू ही था। जिस की ताक़त से वो जीवन जी रही थी। दोस्तों उलझने सब पर आती है उनको सुलझाना कैसे हैं। कमल आंटी इक उधारण है, ये बुज़ुर्ग हमारे समाज के लिये वरदान की तरह होते है इनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।हमें इन्हें आभार प्रकट करना चाहिए। दोस्तों इस कहानी की नायिका कोई और नही बल्कि “मेरी माँ “ही है।जो आज होमियोपैथी डाक्टर है~स्मिता

Read More »

एस एन सेन बी वी पी जी कॉलेज की एन एस एस इकाई के सात दिवसीय विशेष शिविर के दूसरे दिन महिलाओं एवम बच्चों को योगासन और प्राणायाम की विभिन्न मुद्राओं का अभ्यास कराया गया

कानपुर 27 मार्च, भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बी वी पी जी कॉलेज की एन एस एस इकाई के सात दिवसीय विशेष शिविर के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र का शुभारंभ एन एस एस प्रभारी डॉ चित्रा सिंह तोमर के द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर किया गया। स्वयं सेविकाओं ने प्रार्थना ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ से सत्र की शुरुआत की। डॉ अंजना गुप्ता ने शिविर में उपस्थित सभी महिलाओं एवम बच्चों को योगासन और प्राणायाम की विभिन्न मुद्राओं का अभ्यास करवाते हुए उनसे संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की जैसे कि याददाश्त तेज करने, तनावमुक्त रहने में कौन से योगासन की महती भूमिका है? स्वयं सेविकाओं ने ग्रामीण बच्चों को कविताएं याद करवाईं, गणित के सवाल हल करवाये तथा विज्ञान की जानकारी प्रदान की। सभी बच्चों ने शिविर में मनोरंजक गतिविधियों जैसे नृत्य, संगीत आदि में भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। प्रथम सत्र के अंत में स्वयं सेविकाओं ने कैंप में उपस्थित बच्चों में टॉफी का वितरण किया। शिविर का प्रथम सत्र काफी ऊर्जावान एवम रोचक रहा।शिविर के द्वितीय सत्र के आरंभ में डॉ प्रीति सिंह ने आरोग्य भारती संस्थान कानपुर के जिला अध्यक्ष डॉ बी एन आचार्य जी का परिचय शिविर से करवाया। स्वयं सेविकाओं ने गांव में ही उपलब्ध पत्तियों एवम फूलों से पुष्प गुच्छ बनाकर अथिति को भेंट किया । डॉ बी एन आचार्य ने ‘स्वस्थ जीवन शैली व संतुलित जीवन’ विषय पर व्याख्यान दिया तथा ग्रामीण महिलाओं एवम बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया। डॉक्टर साहब ने शिविर में लगभग 50 ग्रामीण महिलाओं व बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण करते हुए उनकी स्वास्थ्य समस्याओं का उचित समाधान किया। एन एस एस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ चित्रा सिंह तोमर ने डॉ बी एन आचार्य जी को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए द्वितीय सत्र का समापन किया। सत्र के अंत में स्वयं सेविकाओं ने शिविर में फल वितरण किया। इस अवसर पर डॉ प्रीति सिंह, डॉ अनामिका राजपूत, श्रीमती चेतना त्रिपाठी ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

Read More »

होली में गुझिया क्यों?

होली रंगों का त्योहार सिर्फ नाम से ही आंखों के आगे गुलाल तैर जाता है। मौसम में भी त्यौहार की मिठास घुल जाती है। अनेक व्यंजनों के साथ-साथ गुझिया का विशेष स्थान रखता है। कभी सोचा है कि होली में गुझिया क्यों बनाई जाती है और इसकी शुरुआत कब हुई? कहा जाता है कि “गुझिया नहीं खाई तो होली क्या मनाई”। होली में गुझिया बनाने का चलन सदियों पुराना है। ऐसा माना जाता है कि होली में सबसे पहले ब्रज में भगवान कृष्ण को इस मिठाई का भोग लगाया जाता है और विशेष रूप से यह व्यंजन होली में ही बनाया जाता है इसका चलन भी ब्रज से ही शुरू हुआ। वैसे यह मध्यकालीन व्यंजन है जो मुगल काल में शुरू हुआ और कालांतर में त्योहारों की मिठाई बन गई।

मिठाई का सबसे पहला जिक्र तेरहवीं शताब्दी में एक ऐसे व्यंजन के रूप में आता है जिसमें गुड़ और आटे के पतले खोल में भरकर धूप में सुखाकर बनाया गया था और यह प्राचीन काल की स्वादिष्ट मिठाइयों में से थी लेकिन जब आधुनिक गुझिया की बात आती है तब इसे सबसे पहली बार सत्रहवीं सदी में बनाया गया था। गुझिया के बारे में ऐसा भी माना जाता है कि सबसे पहली बार उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में इसे बनाया गया था और वही से राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और अन्य प्रदेशों में यह प्रचलित हो गई।
कई जगह ऐसा भी कहा गया है कि भारत में समोसे की शुरुआत के साथ ही गुझिया भी भारत में आई और यहां की खास व्यंजनों में से एक बन गई। गुजिया और गुझिया दोनों में बड़ा अंतर है। अक्सर लोगों को इस मिठाई के दो नाम लेते हुए सुना होगा। गुजिया और गुझिया दोनों के बनाने की विधि भी अलग अलग है। वैसे तो दोनों ही मिठाइयों में भी मैदे के पतले खोल के अंदर खोया, सूजी या ड्राई फ्रूट्स का भरावन होता है और इसका स्वाद भी जरा अलग होता है।
दरअसल जब आप गुजिया की बात करते हैं तब इसे मैदे के अंदर खोया भरकर बनाया जाता है, लेकिन जब आप गुझिया के बारे में बताते हैं तब इसमें मैदे की कोटिंग के ऊपर चीनी की चाशनी भी डाली जाती है। अर्धचंद्राकार जैसी दिखने वाली जिसे पकवानों की रानी भी कहा जाता है। गुझिया जिसे दोनों ही मिठाइयां अपने -अपने स्वाद के अनुसार पसंद की जाती हैं। इस स्वादिष्ट मिठाई को देशभर में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जहां महाराष्ट्र में इसे करंजी कहा जाता है वहीं गुजरात में इसे घुघरा कहा जाता है, बिहार में इस मिठाई को पेड़किया नाम दिया गया है वहीं उत्तर भारत में से गुजिया और गुझिया नाम से जानी जाती है।
गुजिया के इतिहास में एक दिलचस्प बात ये सामने आती है कि एक समय ऐसा था जब औरतें गुजिया बनाने के लिए काफी दिनों पहले से ही अपने नाखून बढ़ाया करती थीं। तब औरतों का मानना था कि बढ़े हुए नाखूनों से गुजिया को आसानी से गोंठकर सही आकार दिया जा सकता है। पारंपरिक रूप से इसे हाथों से गोठ कर ही बनाया जाता था लेकिन अब इसे बनाने के लिये बाजार में सांचे उपलब्ध है। ~ प्रियंका वर्मा महेश्वरी 

Read More »

बिहार, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में ग्रामीण स्थानीय निकायों को 2221.2 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता जारी की गई

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों को अनुदान प्रदान करने के लिए शुक्रवार को बिहार, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल को 2,221.2 करोड़ रुपये की राशि जारी की।

बिहार को 1,112.7 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 473.9 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल को 634.6 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह अनुदान सहायता वर्ष 2021-22 में बिहार राज्य को सशर्त अनुदान और कर्नाटक एवं पश्चिम बंगाल राज्यों को बिना शर्त अनुदान की दूसरी किस्त है।

15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित सशर्त अनुदान दो महत्वपूर्ण सेवाओं अर्थात (ए) स्वच्छता एवं खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) दर्जा को बनाए रखने और (बी) पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल के संचयन एवं जल पुनर्चक्रण को बेहतर बनाने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की सिफारिशों पर ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) को जारी किया जाता है। 15वें वित्त आयोग द्वारा निर्धारित शर्तों को पूरा करने के बाद पंचायती राज मंत्रालय की सिफारिशों पर ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) को बिना शर्त अनुदान जारी किया जाता है।

पंचायती राज संस्थाओं के लिए निर्धारित कुल अनुदान सहायता में से 60 प्रतिशत राष्ट्रीय प्राथमिकताओं जैसे कि पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल के संचयन और स्वच्छता (सशर्त अनुदान के रूप में संदर्भित) के लिए निर्धारित किया जाता है, जबकि 40  प्रतिशत अनुदान सहायता बिना शर्त है और स्थान विशेष की जरूरतों को पूरा करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं के विवेक पर इसका उपयोग किया जाना है।

स्थानीय निकाय अनुदान दरअसल केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत स्वच्छता और पेयजल के लिए केंद्र और राज्य द्वारा आवंटित धन के अलावा ग्रामीण स्थानीय निकायों को अतिरिक्त धनराशि सुनिश्चित करने के लिए हैं।

वर्ष 2021-22 और वर्ष 2022-23 के दौरान अनुदान पाने के योग्‍य होने के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को कुछ शर्तों को पूरा करना होगा। पारदर्शिता बढ़ाने, स्थानीय निकायों के चुनाव नियमित रूप से कराने और स्थानीय निकायों द्वारा वार्षिक विकास योजनाएं तैयार करने के लिए ही ये शर्तें तय की गई हैं।

Read More »

सारे दुख हमारे अंदर का संसार देता है

एक संसार बाहर है एक अन्दर .. हम कह देते है संसार ने हमें बहुत दुख दिया है ये ग़लत है, सारे दुख हमारे अंदर का संसार देता है।
तकलीफ़ निंदा जब हमें मिलती है तो प्रतिक्रिया अन्दर होती है। हम दुखी होते हैं।क्रोध अग्नि में जलते है।बदला लेने की भावना होती है। कोई इन्सान ऐसी प्रतिक्रिया से आनन्द महसूस कर ही नहीं सकता। हालात कोई भी हो अगर हम शान्ति से स्वीकार कर लेते हैं।किसी का कुछ भी किया और कहा माफ़ कर उसे भूल जाते है तो प्रतिक्रिया पाजिटिव होगी ..साकारातमक होगी ,जो हमे आनन्द का अहसास करवायेंगी और मन सुखी होगा। दुख या सुख हमारा अपना रचा हुआ है ..दुख सुख तो संसार है दुख हमें इतना दुखी नहीं करता जितनी हमारी अपनी ही प्रतिक्रिया।सो कोशिश करें ,हम प्रतिक्रिया न दे कर हालातों को बैलेंस करने की कोशिश करे।कोई आप के साथ ग़लत करता है, तो शान्त रहे, ख़ामोशी से सह जाये वक़्त ख़ुद ही फ़ैसला कर देता है।खुद लाठी न उठाये।वक़्त को अपना काम करने दे।जब हम दुख सुख से निकलते हैं। हम और भी निखर कर बाहर आते हैं।अगर किसी ने ग़रीबी को झेला हो,वो ही इक गरीब की व्यथा को समझ सकता है।जब हम हमेशा सुख में रहते हैं तो हम किसी की तकलीफ़ को नहीं समझ सकते।ये कटु अनुभव ही हमें बेहतर इन्सान बनाते है।इक फूल का पौधा तब ही सुन्दर ख़ुशबूदार फूल दे पाता।जब वो कड़ी धूप ,बारिश,आँधी तूफ़ान, कभी गर्मी सर्दी सहता है,तो ही पौधों के तने में जान आती हैं।तब वो समय आने पर बहुत ही शानदार फूलों से बाग को भर देते है।ये पौधों की फूल देने की क्षमता किस ने बड़ाई. ये विपरीत मौसम ने।पौधों को अगर इन विपरीत मौसमों से न गुजरना पड़े तो फूल भी बड़े और सुन्दर न हो पायेंगे। कई बार हमें स्थितियाँ हालात बेहद विपरीत दुख देने वाले दिखते हैं मगर हमें और शक्तिशाली बनाने के लिये ही आते है। दुख तकलीफ़ हमें अपने कर्मों से मिलता है।हर कोई अपना रोल जो उन्हें विधाता की तरफ़ से मिला है,निभा रहे हैं।हम यूँही कह देते हैं कि उसने मेरे साथ ऐसा किया वैसा किया .. कई बार वो नहीं कर रहा होता ,हमारे ही क्रम हमें दुखी या सुखी कर रहे होते हैं। इक बार बहुत बड़ा सेठ गाँव में रहता था .. दूसरे गाँव में मेला लगा।सारा गाँव मेला देखने चला गया ..घर में कोई नहीं था .. वो अकेला ही था। उसका इक गुरू था।अपने गुरू को बहुत याद किया करता था।ख़ूब मन लगा कर भक्ति किया करता था।उस रात जब वो अकेला था..चार चोर आ गये।उसका सब कुछ लूटने लगे।सेठ को मारा कूटा।सेठ बहुत गिड़गिड़ाया मगर चोरों ने उसके हाथ पैर मुहं बाँध दिये।गाँव के और घरों में भी चोरों ने चोरी की।जाने से पहले कहने लगे ! ये सेठ इस गाँव का जाना माना व्यक्ति है।इस की गवाही पर हम पकड़े भी जा सकते है।इस को मार कर ही जाते हैं ताकि कोई गवाह बचे ही नही।जैसे ही उसे मारने लगे।सेठ ने कहा मेरे हाथ पैर खोल दो। मरना तो है ही मुझे।मरने से पहले मुझे अपने रब को याद करने दो।सेठ कहने लगा !सिर्फ़ इक घंटा मुझे अपने रब को याद करने दो।चोरों ने सोचा अभी रात बहुत पड़ी है,तब तक हम भी कुछ खा पी लेते हैं।थोड़ा सुस्ता लेते हैं।गाँव वाले भी तो दिन चढ़ने पर ही आयेंगे।वो मान गये।अब सेठ को खोल दिया ।सेठ आँखें बंद कर अपने गुरू से बातें करने लगा ..कहता है गुरू जी मैंने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा तो ये सब मेरे साथ क्या हो रहा है।फिर चुपचाप ध्यान मग्न हो गया। घंटे बाद उठा तो बढ़ा ख़ुश।कहने लगा चोरों से !अब आप मुझे मार सकते हो।मैं तैयार हूँ मरने के लिए।सब चोर हैरान हो कर सोचने लगे।कुछ देर पहले तो गिड़गिड़ा रहा था।अपने जीवन की भीख माँग रहा था।अचानक से ऐसा क्या हो गया। उन्होंने पूछा! ऐसा क्या हुआ कि इतनी विपरीत हालात में भी तुम ख़ुश हो।क्या राज है बता।कहता है कि मेरे गुरू ने मुझे बताया है कि ये तेरा ही करम है जो तुम हिसाब दे रहे हो। गुरू ने कहा ये सारे चोर अलग अलग जन्म में तेरे भाई ही थे तुमने इनको तरह तरह से इनका धन लूटा फिर इनके गले भी काट दिये।गुरू कहते है कि तुम चाहो तो चार जन्म ले कर इनके हाथों से मारे जाओ, या आज इन चारों के हाथ से मर कर ..एक ही बार में इन चारों का हिसाब पूरा कर दो।सेठ कहने लगा मैंने फ़ैसला किया है कि आप चारों मुझे मार कर अपना हिसाब पूरा करे। चोर सोच में पड गये और पूछने लगे क्या ऐसा भी होता है।इस हिसाब से तो हम आज तुम्हें मारेंगे कल या किसी जन्म में तुम हमें मारोगे।ऐसे तो सिलसिला चलता ही रहेगा।पूछने लगे कौन है तेरा गुरू?हमें उसके पास ले चल।सुबह हुई पाँचों गुरू के पास पहुँच गये।चारों चोर गुरू से बहुत प्रभावित हुये और गुरू से गुरू दिक्षा भी ले ली। और अच्छे इन्सानों की तरहा जीवन जीने लगे। यहाँ उन्हें मौक़ा मिला अपना बदला ,अपना हिसाब ..पूरा करने का ,मगर उन्होंने बदला न ले कर पुराने किये गये करम को माफ़ करने का रास्ता चुन लिया।ऐसे ही करमो से आत्मा में बल बढ़ता है। दोस्तों! दुख जब आते हैं किसी की भी तरफ़ से तो माफ़ कर दे।इसमें फ़ायदा ही फ़ायदा है हम क्रोध और बुराई से बचे रहते हैं।किसी और के लिए नहीं बल्कि हमें अपनी मन की शांति के लिए ही माफ़ करना है।माफ़ करना कमजोरी नहीं ..बहुत बड़ी ताक़त है जो हमारी आत्मा को और भी बलवान बना देती है। अगर हम उम्मीद रखते है कि रब हमे हमारी ग़लतियों के लिए माफ़ कर दे,तो पहले हमे ही दूसरों को माफ़ करने का सलीका सीखना होगा।🙏 स्मिता 

Read More »

जिलाधिकारी ने होली को देखते हुए कानून व्यवस्था की समीक्षा की

होली को देखते हुए जिलाधिकारी ने रूप रेखा तय की
◆ नगर निगम शहरी क्षेत्रों में जहां जहां होलिका दहन का कार्यक्रम होना है वहा पर मिट्टी डालने का कार्य करे तथा आयोजकगण भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए नगर निगम से संपर्क कर मिट्टी डाललवाने का कार्य करवाए ।

◆शहरी क्षेत्र में केस्को एवं ग्रामीण क्षेत्रों में दक्षिणाचल लटकते बिजली के तारों को कसवा ले । सभी सब स्टेशन में गैंग उपस्थित रहे यह सुनिश्चित कराया जाए ।
◆ हाई स्पीड से होली एवं गंगा मेले वाले दिन पानी की सप्लाई करायी जाए तथा सभी जलापूर्ति स्टेशनों में बैकअप में जनरेटर की व्यवस्था भी कर लिया जाए ।

◆ स्वास्थ्य विभाग सभी अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी तथा एंबुलेंस को एक्टिव मोड पर रखें।

◆ हटिया गंगा मेले के रूट में लटकते बिजली के तारों को कसा जाए तथा जुलूस के साथ साथ बिजली गैंग तथा एम्बुलेंस भी रहे यह सुनिश्चित किया जाए।
◆ नगर निगम अभियान चलाकर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराएं।

◆ सरसैया घाट में आयोजित होने वाले होली मिलन समारोह तथा शहर में आयोजित होने वाले अन्य होली मिलन समारोह में यातायात व्यवस्था एवं प्रकाश व्यवस्था आदि सुनिश्चित की जाए।

◆ त्वरित प्रतिक्रिया निस्तारण हेतु अभी विभागों के सदस्यों की टीम का गठन किया जाए ।

उक्त निर्देश आज जिलाधिकारी श्रीमती नेहा शर्मा ने कलेक्ट्रेट सभागार में होली तथा गंगा मेला की तैयारियों के संबंध में आयोजित बैठक में समस्त संबंधित अधिकारियों को दिए।
उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि समस्त विभाग अपनी अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए दिए गए निर्देशों का पालन समय से सुनिश्चित कराएं।
उन्होंने बैठक में उपस्थित समस्त उप जिलाधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि वे सभी अपनी उपस्थिति में थानों में होने वाली बैठकों का आयोजन कराए तथा की जाने वाली व्यवस्थाओं कोसुनिश्चित कराए ।
बैठक में अपर जिलाधिकारी नगर श्री अतुल कुमार, समस्त उप जिलाधिकारी , नगर निगम ,केस्को ,जल निगम आदि सभी सम्बन्धित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

Read More »

होली का महत्व

 योग का नियमित अभ्यास किसी भी मनुष्य को प्रह्लाद बना सकता है – वही प्रह्लाद, जिसकी कथाएँ पुराणों में निहित हैं और जिसे हिरण्यकश्यप ने फाल्गुन मॉस की पूर्णिमा को, होलिका दहन में जलाकर मारने का प्रयास किया था। किन्तु उस रात की शक्ति ही कुछ ऐसी थी कि प्रह्लाद बिना जले आग से बाहर आ गया और होलिका , जिसे न जलने का वरदान प्राप्त था, फिर भी जलकर राख़ हो गयी।

पुराणों में निहित कथाएँ केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं बल्कि ज्ञान का भंडार हैं। एक साधारण मनुष्य उन्हें सिर्फ कहानियाँ ही मानता है। सीमित बुद्धि के कारण उसमें इन कथाओं में निहित ज्ञान को जानने की जिज्ञासा ही नहीं होती। और यही इन कथाओं का उद्देश्य भी है कि उनमें छिपे ज्ञान और रहस्यपूर्ण शक्तियों तक एक योग्य साधक ही पहुँच सके।

ज्ञान की प्राप्ति और दैविक शक्तियों का अनुभव गुरु द्वारा निर्धारित क्रियाओं और साधनाओं के नियमित अभ्यास से ही संभव हैं।

यह सृष्टि पांच तत्वों के संयोजन और सम्मिश्रण से उत्पन्न हुई है। जब शरीर में कोई दोष होता है तभी ये तत्व मिलकर उस शरीर की संरचना करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, वात, पित्त और कफ ही शरीर के दोष हैं तथा वेदानुसार कोई नकारात्मक विचार या स्वार्थ की भावना ही शरीर में दोष का कारण है।

यही दोष, एक मनुष्य की मूल प्रकृति को निर्धारित करते हैं। तत्वों की शुद्धता और अशुद्धता का स्तर ही एक व्यक्ति की विचार धारा को निर्धारित करता है। अगर तत्व शुद्ध हैं तो विचार उच्चकोटि के होंगे, परमार्थ के होंगे और यदि तत्व अशुद्ध है तो मनुष्य के विचार, स्वार्थ भावना और स्थूल स्तर के होंगे।

पञ्च तत्वों में अग्नि तत्व का उल्लेख, विशेष महत्त्वपूर्ण है क्योंकि केवल इसी तत्व को दूषित नहीं किया जा सकता। यही एक ऐसा तत्व है जो गुरुत्वाकर्षण के बावजूद ऊपर की ओर उठता है। इसके संपर्क में जो कुछ भी आता है वह शुद्ध और पवित्र हो जाता है। यही अग्नि, मनुष्य का उत्थान करने की क्षमता रखती है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि ऋग वेद का पहला शब्द अग्नि ही है।

अग्नि की शक्ति को प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं जिसमें होली भी एक है। इस दिन होलिका, प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गयी थी किन्तु वह एक साधिका थी और अग्नि द्वारा उसके पवित्र होने का समय आ चुका था,इसलिए वरदान होते हुए भी अग्नि ने उसे स्वीकार कर लिया और प्रह्लाद , जो पहले से ही पवित्र और विशुद्ध था, बिना जले बाहर आ गया। जो शरीर पूर्ण रूप से शुद्ध होता है, अग्नि उसको प्रभावित नहीं करती। अग्नि से तात्पर्य स्थूल अग्नि तो है ही साथ ही हमारे जीवन में किसी भी प्रकार की नकारात्मकता, अशांति या विघ्न से भी है।

एक पवित्र देह उच्च लोकों में जाने योग्य है जहाँ उसका संपर्क दैविक शक्तियों से रहता है और ऐसी आत्मा सदैव आनन्द की स्थिति में होती है वहीँ एक अशुद्ध शरीर इस सँसार के भोगों को भोगने में व्यस्त रहता है,भोग जो क्षणभंगुर तो हैं ही साथ ही उस प्राणी को रोग की ओर भी ले जाते हैं। ऐसे व्यक्ति को लगता है कि उसका मनोरंजन हो रहा है और उसका समय सही व्यतीत हो रहा है, किन्तु वास्तव में समय ही उसे व्यतीत कर रहा है और रोगों की ओर ले जा रहा है क्योंकि रोग ही तो भोग का विपरीत है। सृष्टि स्वयं भी तो एक दूसरे के विपरीत पहलुओं का ही परिणाम है।

सनातन क्रिया में भी होली के दिन करने के लिए कुछ शुद्दिकरण प्रक्रियाएं दी गयी हैं। इसमें साधक अपने चारों और अग्नि चक्र बना कर, गुरु द्वारा दिए गए मन्त्रों का जाप करते है जिससे तुरंत ही उनमे आत्मिक शुद्धि की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

योगी अश्विनी – ध्यान आश्रम के योगी अश्विनी से सम्पर्क करने के लिए dhyanashram.ya@gmail.com पर लिखें । गुरुवार 17 मार्च को दुनिया भर में ध्यान फाउंडेशन केंद्रों पर विशेष होली यज्ञ। भाग लेने के लिए www.dhyanfoundation.com पर रजिस्टर करें  09318451205

Read More »

दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजाजीपुरम , लखनऊ में वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता, लखनऊ 3 मार्च को पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजाजीपुरम , लखनऊ में वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य महोदया प्रोफेसर अर्चना राजन जी ने की कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में श्री नरेंद्र शंकर पांडे  (सलाहकार,गृह मंत्रालय, भारत सरकार )एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती मीरा पांडे जी उपस्थित रहे सर्वोच्च अंक प्राप्त मेधावी छात्राओं को सम्मानित किया गया साथ ही वर्ष पर्यंत आयोजित की गई विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजई प्रतिभागियों को भी मुख्य अतिथि के कर कमलों से प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए इस अवसर पर महाविद्यालय की समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ नेहा जैन की पुस्तक “कार्यशील महिलाओं का समाजशास्त्रीय अध्ययन “का विमोचन किया गया महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका एवं इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ प्रियंका शर्मा की पुस्तक “social history in modern india”का भी विमोचन कार्यक्रम संपन्न हुआ  इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारी गण उपस्थित रहे

Read More »

मजबूत लोकतंत्र

लोकतंत्र मतलब जनता द्वारा जनता के लिए निर्धारित व्यवस्था। जनता द्वारा निर्धारित व्यक्ति संरक्षक की भूमिका निभाता है। अच्छा बुरा सोच कर उनके हितों को ध्यान में रखता है। इस चुनावी बयार में ही लोकतंत्र की मजबूती का भान होता है। एक वक्त था जब नेता शब्द सम्मानजनक माना जाता था। वो देश – समाज के लिए समर्पणभाव रखता था लेकिन जैसे-जैसे सत्ता में नेताओं की पकड़ मजबूत होती गई वैसे वैसे उनकी सोच, समझ, सलीका और शैली भी बदलती गई। आज के नेता अपने वैचारिक स्तर से नीचे गिर गए हैं। चुनाव, घोषणा – पत्र और सभाओं में दिए के प्रलोभनों द्वारा जनता को बरगलातें हैं लेकिन जनता भी इनको समझ चुकी है। फ्री की चीजों को लेने के बाद वो भी नेताओं जैसा ही व्यवहार करने लगी है। नेताओं के वादों पर से अब लोगों का भरोसा उठ गया है। आज नेताओं को दल बदलने में जरा भी वक्त नहीं लगता। जो नेता पहले अन्य दल की बुराई कर रहे थे दल बदलते ही पुराने दल का विरोध करने लगते हैं। निजी हितों के लिए व्यापारियों की तरह खुलेआम सौदेबाजी खरीद-फरोख्त करते हैं। इनका मकसद अच्छा बुरा सोचे बिना जैसे भी बने सिर्फ अपना कार्य सिद्ध करना होता है।
गौरतलब है कि कोरोना काल में जो भी नियम कानून बने वह बस जनता के लिए ही थे। चुनावी रैलियों पर यह नियम नहीं लागू हुये। तो सरकार कौन सी सोशल डिस्टेंसिंग की बात कर रही थी। जहां लोगों को मरने के लिए आमंत्रित किया जा रहा था। शादी समारोहों में लोगों की उपस्थिति पर संख्या निर्धारित कर दी गई, स्कूल – कॉलेज बंद कर दिए गए लेकिन चुनावी क्षेत्रों में कोरोना का कहीं असर नहीं दिखाई देता था। सरकारी घोषणाएं, मंत्रियों के मुस्कुराते चेहरे और अखबार के विज्ञापनों में आंकड़ों में विकास नजर आ जाता है तो फिर आज का युवा रोजगार क्यों मांग रहा है? वो क्यों परेशान है? यदि समस्याएं खत्म हो गई है तो आंदोलन क्यों हो रहे हैं? जनता का पैसा चुनाव प्रचार, रैलियों और विज्ञापनों में खर्च हो जाता है और बचा कुचा घपला कर भगोड़े ले जाते हैं और जनता को मुफ्त नाम का लॉलीपॉप थमा दिया जाता है।
हम सरकार चुनते हैं तो यह जरूरी नहीं हो जाता कि सरकार के हर निर्णय का समर्थन किया  जाये। हमारे घर का मुखिया पिता होता है और उसके द्वारा लिया हुआ निर्णय अंतिम निर्णय होता है। मगर जब वह गलत निर्णय या तानाशाही करता है तो पुत्र, पुत्री और पत्नी द्वारा विरोध के स्वर उठने लगते हैं। उसे चेताया जाता है कि आपका यह निर्णय सही नहीं है। कुछ यही बात लोकतंत्र के प्रतिनिधि पर भी लागू होती है सरकारें आयेंगी और जायेंगी लेकिन जनता को सही गलत का फर्क समझ में आना चाहिए और आज लोकतंत्र की यही मांग भी है। –प्रियंका वर्मा महेश्वरी

Read More »

केन्द्रीय गृह मंत्रीअमित शाह ने आज नई दिल्ली में एक बैठक में जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में एक बैठक में जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। बैठक में जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजित डोभाल तथा जम्मू और कश्मीर प्रशासन और सेना सहित भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों की सराहना की जिससे पिछले कुछ वर्षों में जम्मू और कश्मीर में आतंकी घटनाओं में कमी आई है। आतंकी घटनाएँ 2018 में 417 से घटकर 2021 में 229 हो गई हैं, जबकि सुरक्षा बलों के शहीद हुए कर्मियों की संख्या 2018 में 91 से कम होकर 2021 में 42 हो गई है।

गृह मंत्री ने सुरक्षा ग्रिड को और अधिक मज़बूत करने के निर्देश दिये ताकि सीमा-पार घुसपैठ शून्य हो और आतंकवाद का उन्मूलन हो सके।

Read More »