धरती का तापमान धीरे-धीरे नहीं, बल्कि खतरनाक गति से बढ़ रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, बीसवीं सदी में भूमंडलीय औसत तापमान में लगभग 0.6 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। यदि तापमान वृद्धि की यही प्रवृत्ति जारी रही, तो 21वीं सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में लगभग 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह परिवर्तन केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मानव जीवन, प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन का सबसे गंभीर प्रभाव हिमालयी हिमनदों पर पड़ रहा है। अनुमान है कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रही, तो सन् 2040 तक हिमाचल प्रदेश की अधिकांश हिमनदियाँ पिघलकर समाप्त हो सकती हैं। गंगोत्री हिमनद, जो गंगा नदी का प्रमुख स्रोत है, प्रतिवर्ष लगभग 23 मीटर की दर से संकुचित हो रही है। इस हिमनद का तीव्र क्षरण भविष्य में गंगा नदी के अस्तित्व के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है, जिससे करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित होगा।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल हिमालय तक सीमित नहीं है। ग्लेशियरों की बर्फ तेजी से पिघलकर नदियों के माध्यम से समुद्र तक पहुँच रही है, जिसके परिणामस्वरूप समुद्री जलस्तर में निरंतर वृद्धि हो रही है। वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, 2100 तक समुद्र का जलस्तर 9 से 88 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। यह वृद्धि कई तटीय क्षेत्रों और द्वीपों के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकती है।
समुद्री जलस्तर में हो रही वृद्धि के कारण अनेक द्वीपीय और तटीय क्षेत्र जलमग्न होने के खतरे का सामना कर रहे हैं। मॉरीशस, मालदीव, अंडमान और निकोबार जैसे द्वीप समूह इस संकट के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। यदि समय रहते प्रभावी नीतियाँ और पर्यावरणीय संरक्षण उपाय नहीं अपनाए गए, तो इन क्षेत्रों की भौगोलिक पहचान और जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है। इसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी, सतत विकास, और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की तत्काल आवश्यकता है। जब तक मानव और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित नहीं किया जाता, तब तक पिघलते हिमनद और बढ़ता समुद्री जलस्तर हमारे भविष्य के लिए निरंतर खतरा बने रहेंगे। ~रश्मि गोयल
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भारतीय स्वरूप संवाददाता
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