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भारत ने फरवरी 2026 तक 8,000 टन प्रति वर्ष की हरित हाइड्रोजन क्षमता चालू की

भारत सरकार राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन-एनजीएचएम को लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य देश को हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। भारत की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचने की संभावना है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 तक देश में लगभग 8000 टन प्रति वर्ष की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता चालू हो चुकी है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत आवंटित और उपयोग की गई धनराशि का विवरण नीचे दिया गया है:

निधि आवंटन (करोड़ रुपये में)

(संशोधित अनुमान)

उपयोग

(करोड़ रुपये में)

वित्तीय वर्ष 2023-24 100 0.11
वित्तीय वर्ष 2024-25 300 46.26
वित्तीय वर्ष 2025-26

( 19 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार )

300 203.75

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत, प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से खोजी गई हरित हाइड्रोजन की लागत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरी को आपूर्ति के लिए  397 रुपये प्रति किलोग्राम (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरियों को आपूर्ति के लिए 387 रुपये प्रति किलोग्राम (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) है।

विश्व बैंक समूह की “हाइड्रोजन उत्पादन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर” शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा (सौर और पवन) हरित हाइड्रोजन उत्पादन की कुल लागत का लगभग 50 से 70 प्रतिशत, यानी लगभग 235 रुपये प्रति किलोग्राम, हिस्सा है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने आज राज्यसभा में यह जानकारी दी।