
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह एमआरआई स्कैनर देश में विकसित किया गया है, अतः आम आदमी के लिए एमआरआई स्कैनिंग की लागत बहुत कम होने की उम्मीद है, जिससे अभी तक अत्यधिक लागत वाले एमआरआई स्कैन तक भी सबकी पहुंच हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय बाजार से एमआरआई स्कैनर की खरीद में पूंजी निवेश भी बहुत हद तक तक कम हो जाएगा, जिसके कारण बहुत सारी विदेशी मुद्रा की भी बचत होगीI साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत में नैदानिक और चिकित्सीय विनिर्माण के दोहरे मिशन के उद्देश्य और आत्मनिर्भरता के समग्र उद्देश्य को भी अत्याधुनिक बनाया जा सकेगा। मंत्री महोदय ने कहा कि आने वाले वर्षों में, “भारत में बनाएं- विश्व के लिए बनाएं (मेक इन इंडिया-मेड फॉर द वर्ल्ड)” होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वास्तव में यह राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (एनबीएम), जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के लिए एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित करने वाली उपलब्धि है क्योंकि हम सार्वजनिक-निजी भागीदारी प्रारूप के अंतर्गत अपने पहले स्वदेशी रूप से विकसित अत्याधुनिक एमआरआई स्कैनर को सामने लेकर आए हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के अंतर्गत वोक्सेलग्रिड्स इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड ने देश की अब तक अपूर्ण आवश्यकता को पूरा करने के लिए अपने आप में सम्पूर्ण (कॉम्पैक्ट), कम भार वाले, अगली पीढ़ी के एमआरआई स्कैनर विकसित किया है।
मंत्री महोदय ने रेखांकित किया कि विश्व स्तरीय एमआरआई विकसित करने के लिए व्यय किए गए 17 करोड़ रुपये में से 12 करोड़ रुपये जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा प्रदान किए गए थे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सॉफ्टवेयर के साथ अगली पीढ़ी के हार्डवेयर के इस संयोजन ने नैदानिक छायांकन (डायग्नोस्टिक इमेजिंग) के क्षेत्र में एक अत्यधिक विघटनकारी उत्पाद को सफलतापूर्वक प्रस्तुत करने में सक्षम बनाया है, क्योंकि यह भारत सरकार के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से वाणिज्यिक बिक्री और निर्माण लाइसेंस प्राप्त करने वाली पहली भारतीय कंपनी है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि विश्व की 70 प्रतिशत जनसंख्या की मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) की नैदानिक (डायग्नोस्टिक) पद्धति तक पहुंच नहीं है। कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी), एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी अन्य छायांकन (इमेजिंग) प्रविधियों की तुलना में एमआरआई स्कैनर तक पहुंच सामान्य रूप से 3 गुना कम है। इसका कारण इसकी अत्यधिक उच्च पूंजीगत लागत है जो भारत जैसे विकासशील देशों में एक समस्या है। भारत में वर्तमान अनुमान बताते हैं कि एमआरआई का कुल स्थापित आधार 4800 है, जो कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) से 3 गुना कम है और जो संभवतः इस उत्पाद की उच्च लागत एवं आयात पर निर्भरता के कारण भी है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान में 350 से कम मशीनों की वार्षिक मांग है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ प्रमुख आयुष्मान भारत पहल सहित स्वास्थ्य देखभाल पहुंच और समावेशन में सुधार के लिए सरकार की कई पहलों के कारण, ग्लोबल डाटा इंक के अनुमानों के आधार पर वर्ष 2030 तक मांग दोगुनी से अधिक होने की उम्मीद है)।
मंत्री महोदय ने कहा कि भारत स्वदेशी रूप से विकसित पहला एमआरआई स्कैनर उपलब्ध कराकर इनमें से कई समस्याओं का समाधान करेगा, जो पहले से उपलब्ध मशीनों की तुलना में अत्यधिक लागत प्रभावी है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास इस सफलता को ग्लोबल साउथ में अन्य देशों के साथ साझा करने की संभावना भी प्रदान करता है ताकि उन्हें भी सस्ते और विश्वसनीय चिकित्सा इमेजिंग समाधानों तक पहुंच बनाने में सहायता मिल सके।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभा को यह भी बताया कि संसद में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी के मष्तिष्क की परिकल्पना, राष्ट्रीय अनुसन्धान फाउंडेशन (नेशनल रिसर्च फाउंडेशन -एनआरएफ) विधेयक के पारित होने के बाद, यह वैज्ञानिक और संबंधित मंत्रालयों के अलावा उद्योगों और राज्य सरकारों की भागीदारी तथा योगदान के लिए तंत्र बनाने के लिए उद्योग, शिक्षा और सरकारी विभागों एवं अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग स्थापित करने के साथ ही एक इंटरफ़ेस भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि यह एक नीतिगत ढांचा बनाने और नियामक प्रक्रियाओं को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करेगा जो अनुसंधान एवं विकास पर उद्योग द्वारा सहयोग और बढ़े हुए परिव्यय को प्रोत्साहित कर सके।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस सफलता को प्राप्त करने में यूपी इंडिया और डिजिटल इंडिया हमें देश को प्रगति और अंतरराष्ट्रीय पहचान की दिशा में ले जाने के लिए प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हमारे सक्षम नेतृत्व और इस सफलता को प्राप्त करने के लिए मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी राष्ट्रीय पहलों द्वारा निभाई गई भूमिका को स्वीकार करते हुए उनके प्रति आभार प्रकट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत, प्रौद्योगिकी का मात्र उपभोक्ता बने रहने के स्थान पर अब नवप्रवर्तक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

अपने संबोधन में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव, डीबीटी, डॉ. राजेश गोखले ने कहा कि उनके विभाग ने अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से भारत में उपकरणों और नैदानिक पारिस्थितिकी तंत्र पर ध्यान देने के साथ ही जैवऔषधि (बायोफार्मा) क्षेत्र को सशक्त करने के लिए जबरदस्त प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) द्वारा कार्यान्वित जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) का राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (एनबीएम) टीकों, समरूपजैव चिकित्सा उत्पादों (बायोसिमिलर्स), चिकित्सा उपकरणों और नैदानिकी (डायग्नोस्टिक्स) सहित जैव चिकित्सा शास्त्र (बायोथेराप्यूटिक्स) में भारत की प्रौद्योगिक एवं उत्पाद विकास करने की क्षमताओं में तेजी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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कानपुर सहकारी आंदोलन की अग्रणी संस्था कानपुर क्रय विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड के निर्वाचन का क्रियान्वन घोषणा निर्वाचन अधिकारी दिग्विजय सिंह जिला उद्यान अधिकारी ने भाजपा के राहुल सिंह को सभापति श्रीमती श्वेता सिंह को उप सभापति घोषित किया तथा संचालक सर्वश्री ज्ञान पाल सिंह अभिलाष कुमार त्रिपाठी जयराम रोहित कुमार उमेश कुमार निषाद सुमन लता सिंह प्रताप सिंह रामचंद्र भारती नीरज सिंह को निर्वाचित घोषित किया निर्वाचन में सभापति हेतु राहुल सिंह ने अपने प्रतिद्वंदी प्रताप सिंह को 5 वोटों से पराजित किया तथा उपसभापति में श्वेता सिंह ने भी रामचंद्र भारती को 5 मतों से हराया निर्वाचन की घोषणा होते ही राहुल सिंह के कैंप व श्वेता सिंह के कैंपों में खुशी की लहर दौड़ गई लोगों ने मालाओं से लाद दिया की जबकि नामांकन ज्ञातव्य हो कि जब नामांकन में प्रत्याशी सहित दो संचालकों के और हस्ताक्षर होते हैं कुल 3 मत की जगह दो मत ही मिले लगता है कि प्रस्तावक या समर्थक में कोई एक मत जो राहुल सिंह व श्वेता सिंह को प्राप्त हुआ!. उक्त निर्वाचन में सहकारिता आंदोलन के खाटी नेता सुरेश गुप्ता की अहम भूमिका रही उक्त निर्वाचन के समय श्री अजय प्रताप सिंह चेयरमैन जिला सहकारी फेडरेशन शिव हर्षवर्धन सिंह शिव मोहन सिंह ए.पी.सिंह भदोरिया गंगाराम शर्मा पुष्पेंद्र सिंह आदित्य तिवारी संजय सिंह सत्यम सिंह संदीप गुप्ता शिवनाथ कुरील रमाशंकर अग्रहरि आदि प्रमुख थे
भारतीय स्वरूप संवाददाता, विगत दिवस दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के अंतर्गत महाविद्यालय में गठित किए गए रोड सेफ्टी क्लब तथा राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के संयुक्त तत्वाधान में रोड सेफ्टी क्लब की प्रभारी डॉ संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में *सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा अर्थात सड़क सुरक्षा पखवाड़े* के समापन 31 जुलाई, 2023 के अवसर पर छात्राओं के द्वारा निबंध लेखन व पोस्टर प्रतियोगिता, जन-जागरण रैली एवम् शपथ का आयोजन किया गया।
जन–जागरण हेतु वॉलिंटियर्स के द्वारा महाविद्यालय के बाहर एवं मर्चेंट चेंबर चौराहे पर आने जाने वाले यात्रियों, वाहन चालको, विशेष रुप से ई- रिक्शा चालक को रोककर
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन जी महान स्वतन्त्रता सेनानी, समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक थे, खत्री विनय माधव खन्ना अध्यक्ष खत्री सभा कानपुर में बताया प्रखर विद्वान हिंदी भाषा के शिखर पुरुष महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की जयंती पर आज श्रद्धा स्मरण किया गया, इस दौरान मुख्य रूप से विधायक सुरेंद्र मैथानी विजय कपूर विनय माधव खन्ना , दीपक खन्ना सुरेश चंद्र मेहरोत्रा गीता कपूर टंडन निम्मी खन्ना रवि कोहली संजय मेहरोत्रा निखिल टंडन राजीव मेहरोत्रा सुनील खन्ना अतुल मेहरोत्रा राकेश मेहरोत्रा,वीडी राय ,आशीष शर्मा सानू,अमित मेहरोत्रा बबलू, पूनम कपूर भरत सेठ पदम खन्ना रामजी कपूर मोहित अरोड़ा सुधीर मेहरोत्रा श्याम मेहरोत्रा आदि लोग मौजूद थे
कानपुर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज कानपुर ने शैक्षणिक विकास हेतु भारतीय विचारक समिति कानपुर के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) किया भारतीय विचारक समिति के सचिव उमेश कुमार दीक्षित तथा एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज की प्राचार्य प्रो. सुमन ने MoU पर हस्ताक्षर किए। समारोह का आयोजन के. डी. पैलेस कानपुर में किया गया | महाविद्यालय की assistant professor डॉ. अनामिका को भारतीय विचारक समिति ने अपनी समिति के साथ जोड़ते हुए सम्मानित किया, महाविद्यालय प्रबंध तंत्र एवं समस्त महाविद्यालय परिवार इस MoU से आशान्वित तथा हर्ष उल्लासित है। इस MoU सेरेमनी के अवसर पर महाविद्यालय की शिक्षिकाएं किरन तथा डॉ. प्रीति सिंह उपस्थित रहीं।