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महिला जगत

क्राइस्ट चर्च कॉलेज में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर महिला सशक्तिकरण और कल्याण को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर की मिशन शक्ति इकाई ने 13 सितंबर 2025 को मेरी आवाज, मेरी पसंद विषय पर मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं पर केंद्रित था और प्रॉक्टर एंड गैबल द्वारा उदारतापूर्वक प्रायोजित किया गया था। इसमें संकाय सदस्य, स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रही। मिशन शक्ति की प्रभारी प्रो मीत कमल ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया और मासिक धर्म स्वास्थ्य पर खुली बातचीत के महत्व पर जोर देकर सत्र की शुरुआत की उन्होंने कहा कि ये विषय हमेशा से कलंक और चुप्पी से घिरा रहा है।

प्राचार्य प्रो० विनय जॉन सेबेस्टियन ने इस पहल की सराहना की तथा इसे बाधाओं को तोडने वाला और महिलाओं को उपलब्ध स्वास्थ्य विकल्पों के बारे में जागरूक करने की दिशा में एक सार्थक कदम बताया। उप प्राचार्य प्रो. श्वेता चंद ने इस बात पर जोर दिया कि मासिक धर्म स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत स्वच्छता का मामला नहीं है, बल्कि यह सम्मान, समानता और अधिकारों का भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अतिधि वक्ताओं सूर्याश सक्सेना और अंजलि शुक्ला का संबोधन था, जिन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता के महत्व, उपेक्षा से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों और महिलाओं के प्रति भेदभाव को बढ़ावा देने वाले मिथकों को दूर करने की तत्काल आवश्यकता पर खुलकर बात की। इस सत्र में तथ्यों, व्यक्तिगत अंतर्दृष्टि और प्रेरक मार्गदर्शन का समावेश था, जिसने छात्राओं को गहराई से प्रभावित किया।कार्यक्रम का संचालन छात्रा स्वयंसेवकों ओजस्विनी, कांची, सुंदरम, अनमता, प्राची, वृंदा, वंशिका और आदर्श ने सुचारू रूप से किया। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. और एक स्वस्थ और अधिक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए जागरूकता, शिक्षा और स्वच्छता तक पहुँच आवश्यक है। सभी उपस्थित लोगों को सैनिटरी नैपकिन के निःशुल्क पैकेट वितरित किए गए। मिशन शक्ति मानसिकता बदलने और युवा महिलाओं को अपनी भलाई की जिम्मेदारी लेने के लिए सशक्त बनाने में योगदान देता है।

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दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज में नशा मुक्त युवा – विकसित भारत पर संगोष्ठी विषय पर संगोष्ठी आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत “नशा मुक्त युवा – विकसित भारत” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में विद्यार्थियों ने नशा मुक्ति के लिए सामूहिक शपथ ग्रहण की। भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के राष्ट्रीय सेवा योजना क्षेत्रीय निदेशालय से प्रायोजित और उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश शासन द्वारा समर्थित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे से होने वाले शारीरिक मानसिक और सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक करना रहा। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के राष्ट्रीय सेवा योजना विभाग द्वारा निर्देशित इस कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिनका उद्देश्य आज के समय में युवाओं के बीच तेजी से फैल रहे नशे की लत को जड़ से समाप्त करना है। कार्यक्रम का संयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा किया गया जिसमें कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने छात्राओं को नशे से होने वाले व्यापक नुकसान एवं उससे बचाव के उपायों पर विस्तार पूर्वक जानकारियां दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ अंजना श्रीवास्तव तथा समस्त वॉलिंटियर्स का विशेष योगदान रहा।

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सेन कॉलेज में इनोवेशन सेल के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम “संकल्प: हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वोमेन” विषय पर कार्यशाला आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज में इनोवेशन सेल के तत्वावधान में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम संकल्प: हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वोमेन के १० दिवसीय अभियान के अंतर्गत किया

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चरणों में श्रद्धा पूर्वक पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर प्रबन्ध तंत्र के सचिव श्री पी के सेन, प्राचार्या प्रोफ़ेसर डॉ सुमन तथा राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती अनीता गुप्ता ने किया ।एंटी क्राइम ब्यूरो के चेयरमैन एडवोकेट रिजवान अली खान , महिला थाने की एस एच ओ कमर सुल्ताना, महिला कल्याण विभाग की काउंसलर मनोवैज्ञानिक डॉ राबिया सुल्ताना,श्रम विभाग तथा यूनिसेफ के टेक्निकल रिसोर्स पर्सन प्रतीक श्रीवास्तव,महिला कल्याण की जिला कोऑर्डिनेटर मोनिका यादव, महिला कल्याण विभाग की जेंडर स्पेशलिस्ट शैल शुक्ला तथा रागिनी श्रीवास्तव ने छात्राओं को अपने अपने विषय की जानकारी देते हुए हौसला बढ़ाया और बताया जीवन के संघर्ष में सरकार और महिला कल्याण मंत्रालय विभिन्न प्रकार से सहयोग के लिए तत्पर है । सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा एवं सहायता के लिये फ्री विधिक सहायता, पुलिस सहायता और अन्य सहायता योजनाएं संचालित की हैं जो तभी कारगर होंगी जब आपको उसकी जानकारी हो ।कार्यक्रम में १०० से अधिक छात्राओं ने जानकारी प्राप्त कर स्वयं का संबल बढ़ाया और भविष्य में स्वयं एवं अन्य महिलाओं की सुरक्षा में भागीदारी का संकल्प लिया ।कार्यक्रम में छात्राओं के अतिरिक्त महाविद्यालय की समस्त शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया ।डॉ प्रीति सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया और प्रो रेखा चौबे , प्रो गार्गी यादव प्रो अलका टंडन,कैप्टन ममता अग्रवाल डा रचना निगम डॉ शुभा,डॉ अनामिका और डॉ समीक्षा सिंह ने सक्रिय योगदान दिया।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में महिला अधिकारों एवं कानूनों पर विशेष जागरूकता वार्ता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 2 सितंबर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर में आज महिला अधिकारों एवं कानूनों पर एक विशेष जागरूकता वार्ता का आयोजन मिशन शक्ति यूनिट और ICC cell कमेेटी द्वारा किया गया। यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से प्रारम्भ हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत डाॅ अंजलि श्रीवास्तव ने आयोजन कमिटी औऱ सेल के बारे में जानकारी देकर किया ।इस अवसर पर कार्यक्रम के वक्ता वरिष्ठ ऐडवोकेट (क्रिमिनल) श्री मुरारी लाल गौर ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए महिला अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों तथा कानूनी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि महिलाएँ समाज की रीढ़ हैं और उनकी सुरक्षा एवं सम्मान के बिना वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।
उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न निरोधक कानून सहित अनेक प्रावधानों की जानकारी दी और युवाओं से अपील की कि वे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएँ।उहोंने अनुच्छेद 14 , अनुच्छेद 21 , दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 , घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी ।
कॉलेज के प्राचार्य विनय जॉन सेबेस्टियन आयोजन समिति ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा छात्र-छात्राओं को ऐसे कार्यक्रमों से प्रेरणा लेकर समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। कार्यक्रम मे उप प्राचार्या श्वेता चंद के साथ काॅलेज के अन्य फैक्लिटी सदस्य भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. मीत कमल एवं आयोजन समिति मिशन शक्ति यूनिट की ओर से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन वैष्णवी गुप्ता द्वारा किया गया। स्टुडेंट वॉलंटियर प्राची गुप्ता , आदर्श सिंह चौहान , इल्मा , जागृति गुप्ता , संस्कार , हर्षित मिश्रा , हर्ष बाजपेई के सहयोग से कार्यक्रम सफल रूप से संपन्न हुआ।

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कानपुर विद्यामंदिर महिला महाविद्यालय एवं आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी, गायत्री परिवार शांतिकुंज, हरिद्वार के संयुक्त तत्वाधान से 7 दिवसीय कार्यशाला का समापन

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 30 कानपुर विद्यामंदिर महिला महाविद्यालय, स्वरूप नगर कानपुर में समाजशास्त्र विभाग एवं आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी, गायत्री परिवार शांतिकुंज, हरिद्वार के संयुक्त तत्वाधान से एक हफ्ते की कार्यशाला का समापन हुआ।यह कार्यशाला सोमवार दिनांक 25.08.2025 से प्रारंभ हुई थी।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती को नमन करके किया गया। अतिथियों का स्वागत, प्राचार्या प्रो० पूनम विज द्वारा मोमेंटो भेंट देकर किया गया।प्राचार्या जी ने अपने उद्बोधन में इस विशिष्ट कार्यशाला से लाभान्वित छात्राओं को इसे शत प्रतिशत अपने जीवन और आचरण में उतारने के लिए प्रेरित किया और कहा कि यदि आप इसे अपने जीवन में उतारेंगी तो आप 100% एक अच्छी इंसान तो बनेंगी साथ ही जीवन के हर क्षेत्र में सफलता भी अर्जित करेंगी। आप इस देश का भविष्य है अतः आपके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ होने से ही हमारे देश की स्वस्थ भावी और संस्कारवान पीढ़ी का सृजन संभव है। आज आवश्यकता है कि भटकी हुई युवा पीढ़ी जागृत हो तभी भारत का बेहतर कल संभव है। मैं इस सफल आयोजन के लिए समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ पूर्णिमा शुक्ला को बधाई देती हूं कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय *आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी* पर इतने अच्छे और संपूर्ण स्वास्थ्य की जानकारी से पूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया और इसे एक रेगुलर कोर्स के रूप में छात्राओं के लिए आयोजित कर रहीं हैं ताकि हमारी छात्राओं के व्यक्तित्व का चहुंमुखी विकास हो।

 कार्यशाला के अंतिम दिन पूरे सप्ताह के हर सेशन की रिपोर्ट छात्राओं द्वारा पढ़ी गई और साथ ही छात्राओं ने अपने अनुभव को भी साझा किया। छात्राओं ने बताया कि हमें पहले कभी भी इस विषय में जानकारी नहीं थी कि हम पूर्ण रूप से कैसे स्वस्थ रह सकते हैं। छात्रा शिफा और कहकशा ने बताया कि हमने इस कार्यशाला में प्रतिभाग लेकर जाना कि हम अच्छा और स्वस्थ जीवन जीने की मूलभूत रूप से हमें क्या करने की आवश्यकता है।इस तरह की जानकारी तो हर छात्र, छात्रा को अनिवार्य रूप से मिलनी चाहिए। छात्रा महक और प्रिया ने कहा कि अभी तक हम सिर्फ शारीरिक स्वस्थ होने को ही पूर्ण स्वास्थ्य मानते थे लेकिन हमने इस कार्यशाला में जाना कि मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ होने पर ही कोई व्यक्ति पूर्ण स्वस्थ होगा। छात्रा बेबो और तनीषा ने कहा कि हमें जागरूक होने के साथ साथ जागृत भी होना है ताकि हम एक बेहतर कल और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें।

 इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ० संगीता सारस्वत, सीनियर गाइनेकोलॉजिस्ट एवं आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट,कन्वीनर द्वारा छात्राओं को गहनता से उनके वातावरण, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, दिनचर्या इत्यादि का उनके जीवन और आने वाले भविष्य पर प्रभाव को वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि आज का युवा अपनी शक्तियों का दुरूपयोग कर रहा है। संस्कारों की जागृति से ही नई पीढ़ी का भविष्य संरक्षित और संवर्धित हो सकता है। 

विशिष्ट वक्ता डॉ नीरू तिवारी जी ने छात्राओं की एक आदर्श दिनचर्या और पोषण के विषय में बताया और कहा कि ईश्वर ने अपने बाद यदि किसी को सृजन की शक्ति दी है तो केवल स्त्री को । अतः हमें अपने आत्मबल और शक्तियों को पहचान कर सही दिशा में आगे बढ़ना है और एक नई ऊर्जा के साथ भावी पीढ़ी का निर्माण करना है। कार्यशाला की वक्ता डॉ० शिखा अग्रवाल ने छात्राओं को जीवन में योग की महत्ता को बताया कि किस समय, कब और कैसे योग को करना चाहिए जिससे कि हमारा शरीर और मस्तिष्क दोनों ही स्वस्थ रहें। 

कार्यक्रम के अंतिम चरण में छात्राओं का पूरी कार्यशाला में पढ़ाए गए पाठयक्रम पर आधारित एक परीक्षा का आयोजन भी किया गया जिसमें प्राप्त अंकों के आधार पर छात्राओं को गायत्री परिवार शांतिकुंज की ओर से प्रमाणपत्र भी दिए जाएंगे। इस कार्यशाला में 70 से अधिक छात्राओं ने प्रतिभाग लिया । कार्यक्रम का समापन डॉ० रितु नारंग, असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा धन्यवाद ज्ञापन देकर किया गया। कार्यक्रम का कुशल संयोजन एवं संचालन समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ० पूर्णिमा शुक्ला द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी की कानपुर डिस्ट्रिक टीम एवं महाविद्यालय की सभी शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।

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कानपुर विद्यामंदिर महिला महाविद्य एवं आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी, गायत्री परिवार शांतिकुंज, हरिद्वार के संयुक्त तत्वाधान में 7 दिवसीय कार्यशाला शुभारंभ

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 25 अगस्त कानपुर विद्यामंदिर महिला महाविद्यालय, स्वरूप नगर कानपुर में समाजशास्त्र विभाग एवं आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी, गायत्री परिवार शांतिकुंज, हरिद्वार के संयुक्त तत्वाधान से 7 दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला दो चरणों में आयोजित होगी। यह कार्यशाला का प्रथम चरण है। कार्यशाला के द्वितीय चरण के बाद प्रतिभाग लेने वाली छात्राओं को संस्था द्वारा प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा। कार्यशाला का उद्देश्य छात्राओं को मानसिक,भावनात्मक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है तथा आज की युवा पीढ़ी को कल के बेहतर समाज की नींव रखने के लिए तैयार करना है। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों का स्वागत एवं प्राचार्या प्रो० पूनम विज द्वारा मोमेंटो भेंट देकर किया गया प्राचार्या जी ने अपने उद्बोधन में इस विशिष्ट कार्यशाला के आयोजन के प्रयास हेतु समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ पूर्णिमा शुक्ला की सराहना की एवं छात्राओं को इस कार्यक्रम कार्यशाला की महत्ता से अवगत कराया।
इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ० संगीता सारस्वत, सीनियर गाइनेकोलॉजिस्ट एवं आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट,कन्वीनर द्वारा छात्राओं को गहनता से उनके वातावरण, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, दिनचर्या इत्यादि का उनके जीवन और आने वाले भविष्य पर प्रभाव को वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक तरीके से समझाया। कैसे आज का युवा अपनी शक्तियों का दुरूपयोग कर रहा है। संस्कारों की जागृति से ही नई पीढ़ी का भविष्य संरक्षित और संवर्धित हो सकता है। ईश्वर के बाद यदि कोई सृजन कर सकता है तो केवल स्त्री। हमें अपने आत्मबल और शक्तियों को पहचान कर सही दिशा देकर एक नई ऊर्जा के साथ भावी पीढ़ी का निर्माण करना है। इस कार्यशाला में 55 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक और गंभीरता के साथ प्रतिभाग लिया। कार्यक्रम का कुशल संयोजन एवं संचालन समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ० पूर्णिमा शुक्ला द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी की डिस्ट्रिक कॉर्डिनेटर नीरू तिवारी एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।

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कोयला खनन में महिलाएँ

कोल इंडिया लिमिटेड ने 14 जुलाई, 2025 को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के वसंत विहार डिस्पेंसरी, बिलासपुर में पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित और प्रबंधित अपनी पहली डिस्पेंसरी का उद्घाटन किया। इस डिस्पेंसरी में व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाली पूरी तरह से महिला कर्मचारियों की टीम कार्यरत है।

लैंगिक समानता और संस्थागत उत्कृष्टता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने, कोयला क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और देश भर में स्वास्थ्य सेवा, तकनीकी, नियोजन इकाइयों जैसे विविध क्षेत्रों में उनके लिए नेतृत्व के अवसर सृजित करने के लिए महिलाओं के नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण पहल लागू की गई हैं।

i) सीआईएल की विभिन्न सहायक कंपनियों में लागू और पूरी तरह से कार्यरत महिलाओं के नेतृत्व वाली पहल इस प्रकार हैं:

  • वसंत विहार डिस्पेंसरी, बिलासपुर, एसईसीएल।
  • राजेंद्र नगर डिस्पेंसरी, रांची, सीसीएल
  • कोयला नगर अस्पताल (सुबह की पाली), धनबाद, बीसीसीएल
  • सद्भावना कॉलोनी डिस्पेंसरी, पाटनसांगी, नागपुर, डब्ल्यूसीएल
  • केंद्रीय उत्खनन कार्यशाला, गेवरा, एसईसीएल में स्थिति आधारित निगरानी प्रयोगशाला।
  • धनबाद में एलईडी और सौर उपकरणों के लिए केंद्रीकृत तकनीकी केंद्र।
  • लागत और बजट प्रकोष्ठ एनसीएल मुख्यालय, सिंगरौली, एनसीएल।

ii) कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने अपने शीर्ष प्रशिक्षण संस्थान भारतीय कोयला प्रबंधन संस्थान (आईआईसीएम) के माध्यम से महिला नेतृत्व की एक प्रमुख पहल, “ज्योति – एक साथ उठना, मार्ग प्रशस्त करना” शुरू की है। यह एक स्ट्रक्चर्ड पाँच महीने की महिला नेतृत्व यात्रा है। इसे संचार, निर्णय लेने, भावनात्मक इन्टेलिजन्स, बातचीत कौशल, व्यक्तिगत विकास और नेतृत्व तत्परता में दक्षताओं को मजबूत करके सीआईएल के भीतर उच्च जिम्मेदारियों के लिए महिला अधिकारियों को तैयार करने के लिए तैयार किया गया है। यह कार्यक्रम सर्वोत्तम प्रथाओं, नेटवर्किंग के अवसरों, मार्गदर्शन और संस्थागत समर्थन से भी परिचित कराता है।  इससे कोयला क्षेत्र में महिला प्रमुखों की एक मजबूत श्रृंखला तैयार होती है।

iii) अब कर्मचारी की मृत्यु होने पर महिला आश्रितों को उनकी वैवाहिक स्थिति की परवाह किए बिना आश्रित नियोजन के लिए विचार किया जाएगा। यह पहले कोल इंडिया लिमिटेड में नहीं था।

iv) संगठनात्मक मामलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और लैंगिक संवेदनशीलता, समानता और समावेशिता के प्रति कोल इंडिया लिमिटेड की व्यापक प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करने के लिए, सभी समितियों में एक महिला प्रतिनिधि को शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है।

v) भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने एलईडी और सौर ऊर्जा उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव के लिए अपने पहले केंद्रीकृत तकनीकी केंद्र का उद्घाटन किया है।  इसका संचालन पूरी तरह से महिला तकनीशियनों द्वारा किया जाता है। कोयला नगर धनबाद में स्थित यह केंद्र पारंपरिक रूप से पुरुष कर्मचारियों के प्रभुत्व वाले मुख्य तकनीकी कार्यों में महिलाओं को लाने की दिशा में एक अग्रणी कदम है।

vi) कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों में लैंगिक समानता और संस्थागत उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए, महिला कर्मचारियों को खनन सरदार योग्यता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए भूमिगत प्रशिक्षण में भेजा जाता है।

vii) महिलाओं को बचाव कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और उन्हें बचाव और पुनर्प्राप्ति कार्य का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। अब तक वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) की 19 महिला कर्मचारियों और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) की 9 महिलाओं को बचाव और पुनर्प्राप्ति कार्य का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

viii) महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH अधिनियम) के अंतर्गत आंतरिक शिकायत समितियाँ (ICC) गठित की गई हैं। ये समितियाँ कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने, प्रतिबंधित करने और उसका समाधान करने के लिए कार्य कर रही हैं।

ix) इसके अलावा NLC इंडिया लिमिटेड (NLCIL) इस पहल में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है और अपनी खदानों में महिलाओं को नियुक्त कर रहा है। NLCIL के खनन क्षेत्र में 190 महिलाएँ कार्यरत हैं, जिनमें से 48 कार्यकारी पदों पर हैं। अपने इतिहास में पहली बार NLCIL ने महिलाओं को मुख्य खनन कार्यों में शामिल किया है। यह लैंगिक समावेशिता के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता में एक मील का पत्थर है। महिलाओं को सर्वेक्षक, खनन सरदार और ओवरमैन जैसे नौ प्रमुख वैधानिक पदों पर नियुक्त किया गया है।

यह जानकारी केंद्रीय कोयला और खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  द्वारा राजधानी में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का भव्य आयोजन

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त ट्रस्ट  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  ने 14 अगस्त को सेंट्रल पार्क, नई दिल्ली में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया। नागरिकों को उन लोगों द्वारा सहन की गई असीमित पीड़ा से परिचित कराया, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने घरों, आजीविका और सम्मान का बलिदान दिया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र वर्ष 2022 से इसके तहत स्मारक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और स्वास्थ्य और रसायन और उर्वरक मंत्री श्री जेपी नड्डा, केन्‍द्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली के उपराज्यपाल श्री विजय कुमार सक्सेना, , इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और केन्‍द्रीय संस्‍कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल भी मौजूद थे।

कार्यक्रम के रूप में, ‘जैसा उन्होंने देखा: भारत का विभाजन 1947’ नामक पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसका संपादन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और भारतीय भाषा एवं साहित्य अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी ने किया है। यह पुस्तक इतिहास के इस महत्वपूर्ण क्षण पर बहुमूल्य दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। ‘द डर्वाल्स एंड पार्टीशन’ नामक एक डीवीडी भी लॉन्च की गई, जिसमें इस त्रासदी से जुड़े अनुभवों और आख्यानों का एक मार्मिक दृश्य ूप्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें विभाजन की मानवीय कीमत पर पुनर्विचार किया गया और विस्थापित हुए देशवासियों को गंभीरता से याद किया गया। अनगिनत पीड़ितों की स्मृति में एक मौन जुलूस भी निकाला गया, जो उनके धैर्य के प्रति एक सम्मानजनक श्रद्धांजलि थी। इस अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) द्वारा मंचित और लोकेंद्र त्रिपाठी द्वारा निर्देशित ‘बतावारा’ नामक एक नाटक का भी मंचन किया गया।

यह उल्लेखनीय है कि देश के विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई, कई लोगों को अपनी अचल संपत्ति से हाथ धोना पड़ा और अनगिनत महिलाओं को अपनी गरिमा के साथ खिलवाड़ का सामना करना पड़ा। विभाजन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों की पीढ़ियाँ आज भी इसके घाव सह रही हैं। भारत का विभाजन मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है। हालांकि लोगों का पलायन अगस्त 1947 से पहले ही शुरू हो गया था, लेकिन इसका सबसे विनाशकारी प्रभाव विभाजन की औपचारिक घोषणा के बाद देखा गया। इस दर्दनाक घटना के सबसे गंभीर परिणाम पंजाब, बंगाल और सिंध में हुए, फिर भी इसका प्रभाव पूरे देश में महसूस किया गया। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस अभूतपूर्व मानवीय संकट में लगभग 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए और लगभग 20 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई। प्रदर्शनी और कार्यक्रम ने जनता की काफ़ी रुचि आकर्षित की, ख़ासकर इस त्रासदी के सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक आयामों के विस्तृत चित्रण के कारण, जिससे आगंतुकों को व्यक्तिगत स्मृतियों को सामूहिक इतिहास से जोड़ने का अवसर मिला। पुस्तक विमोचन, डीवीडी लॉन्च के माध्यम से दृश्य दस्तावेज़ीकरण और गरिमापूर्ण जनभागीदारी के रूप में विद्वत्ता के इस एकीकरण के माध्यम से, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  स्मृति की संस्कृति को मज़बूत करना चाहता है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि विभाजन के सबक आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्र की साझा चेतना का एक स्थायी हिस्सा बने रहें।

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टॉक्सिक रिलेशनशिप 

कहते हैं जब कोई इंसान प्रेम में होता है या कोमल भावनाओं के साथ किसी रिश्ते में जुड़ जाता है तो कुछ भी करने को, सहने को तैयार हो जाता है। 

जब दो विपरीत प्रवृति के लोग किसी रिश्ते में जुड़ जाते तो सबसे भयावह स्थिति उत्पन्न होती है। दिल और दिमाग का तालमेल संभव नहीं हो पाता। भावुक इंसान चूंकि भावनाओं से जुड़ता है इस लिए रिश्ते में तमाम समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। दिमाग वाला बिना नफा नुकसान देखे कोई काम नहीं करता। नतीजा भावुक इंसान पीड़ा ,अवसाद में घिरने लगता है। लेकिन तमाम दुख ,दर्द ,अवहेलना , अपमान सहने के बाद भी उस रिश्ते को बचाने में लगा रहता है और दूसरे इंसान को कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

टॉक्सिक रिलेशनशिप आखिर क्या है इसे कैसे पहचाना जाए? अगर किसी रिश्ते में आपको लगातार पीड़ा ,तिरस्कार , अवहेलना मिल रही हो बेवजह प्रताड़ना ,गलत साबित किया जा रहा हो ,रिश्ते में खुशी से ज्यादा दुख ने पाँव पसार लिए हों तो निःसंदेह आप गलत रिश्ते में जुड़े हैं। ऐसे रिश्ते में दूसरा व्यक्ति नकारात्मक रूप से आपको प्रभावित करके नियंत्रित करने की कोशिश करता है। इसके लिए अनैतिक बर्ताव, कटु बाणी ,आरोप प्रत्यारोप आम बातें हो जाती हैं। जबकि दूसरा इंसान कुछ बीते अच्छे दिनों की यादें समेटे बदलाव की उम्मीद में सब सहता रहता है। नतीजतन दोनों ही इस चीज़ के अभ्यस्त हो जाते हैं।

अगर हम कहें कि टॉक्सिक रिलेशन जुए के खेल जैसा होता है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जैसे जुए में दस बार हारने के बाद भी जीतने की उम्मीद बनी रहती है। वैसे ही भावनाओं से जुड़ा इंसान बदलाव की उम्मीद में सब सहता रहता है और एक समय ऐसा आ जाता है कि ये उसकी आदत बन जाती है और मर मर कर जीना उसकी नियति ।

   जीवन हमें एक बार ही मिलता है।कोशिश करें इसे हम उन लोगों के साथ गुजारें जिन्हें हमारी परवाह है। जिनको हमारे सुख दुख से फ़र्क पड़ता हो। महज भावुकता में बह कर ऐसे किसी रिश्ते को ना ढोयें जो आपको कष्ट देना ही जानता हो । 

टूटने ,बिखरने का भय त्याग कर अपने स्वभाव अनुसार रिश्तों में जुड़िए फिर देखिए जीवन कितना खूबसूरत है। बस इस बदलाव के लिए अपने अंदर दृढ़ इच्छा शक्ति पैदा करनी होगी।

  • निवेदिता शुक्ला
  • इटावा , उत्तर प्रदेश

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एस एन सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज में एंटी रैगिंग वीक के अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 18 अगस्त एस एन सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज महाविद्यालय, माल रोड ,में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशानुसार एंटी रैगिंग वीक के अंतर्गत एक पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया, जिसमें महाविद्यालय की छात्राओं ने भाग लिया। जिसमें से प्रथम स्थान स्नेहा सिंह ,द्वितीय स्थान भूमि गुप्ता तथा तृतीय स्थान शुभेका खान ने प्राप्त किया। शिक्षा शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर चित्रा सिंह तोमर ने एंटी रैगिंग विषय पर अपना विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर निशि प्रकाश ने की। मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने बताया यह कार्यक्रम कैप्टन ममता अग्रवाल तथा प्रो मीनाक्षी व्यास के निर्देशन में संपन्न हुआ। प्रोफेसर रेखा चौबे ,प्रोफेसर अलका टंडन ,डॉक्टर रेनू कुरील आदि उपस्थिति रही।

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