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महिला जगत

एस.एन. बालिका विद्यालय पी.जी. कॉलेज में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में एक निबंध प्रतियोगिता एवं ध्यान सत्र आयोजित

कानपुर 9 सितम्बर भारतीय स्वरूप संवाददाता एस.एन. बालिका विद्यालय पी.जी. कॉलेज कानपुर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में एक निबंध प्रतियोगिता एवं ध्यान सत्र का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम मां सरस्वती जी की वंदना कर दीप प्रज्वलन किया गया। उक्त अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो० सुमन एवं कार्यक्रम के निर्णायक मंडल प्रोफेसर चित्रा सिंह तोमर एवं डॉक्टर संगीता सिंह अतिथि वक्ता के रूप में मनोज शुक्ला (आना पान सती ध्यान विशेषज्ञ) उपस्थित रहे। प्राचार्या जी ने कहा कि यह दिवस एक माध्यम है आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए। देश में आत्महत्या करने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है इसीलिए ऐसे कार्यक्रम का बहुत महत्व है, ताकि उसकी रोकथाम समय पर हो सके निबंध प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के रूप में प्रो० चित्रा सिंह तोमर विभागाध्यक्षा शिक्षा शास्त्र एवं डॉ संगीता सिंह प्रवक्ता शिक्षा शास्त्र विभाग थे। निर्णय इस प्रकार रहा
प्रथम पुरस्कार -अमरीन बी. ए. प्रथम वर्ष
द्वितीय पुरस्कार-महिमा यादव बी.ए. द्वितीय वर्ष
तृतीय पुरस्कार- प्रिया वर्मा बी.ए. प्रथम वर्ष
सांत्वना पुरस्कार – अंशिका बाजपेई बी.ए. प्रथम वर्ष तथा संजोली गुप्ता बी.ए. द्वितीय वर्ष
सभी विजेता छात्रों को मेडल तथा सर्टिफिकेट वितरित हुआ इसके पश्चात श्री मनोज शुक्ला ने आना पान सती ध्यान करवाया। अंत में सबने अपने अनुभव साझा किये और ध्यान से संबंधित अपनी शंकाएं दूर किया इसके पश्चात मनोविज्ञान की अध्यक्षा डॉ मोनिका सहाय ने धन्यवाद ज्ञापन किया और कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को ध्यान के लिए रोज समय निकालना बहुत जरूरी है ताकि हम मानसिक रूप से स्वस्थ रह सके । कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग विभाग की प्रवक्ताएं सुश्री प्रीति यादव,  मयूरिका गुप्ता आदि का रहा।

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एस. एन.सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज मे एक दिवसीय व्याख्यान आयोजित

कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता एस. एन.सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज के विज्ञान संकाय मे एक दिवसीय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रबंध तंत्र के संयुक्त सचिव श्री शुभ्रो सेन प्राचार्या प्रो सुमन विशिष्ट अतिथि तिलक महाविद्यालय औरैया के प्राचार्य डा रवि कुमार तथा मुख्य वक्ता डॉ शशि बाला ने दीप प्रज्वलित करके किया एवं छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए किया। मंच का संचालन रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.गार्गी यादव ने किया। अतिथि वक्ता के रूप में रामजस कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) की असिस्टैंट प्रोफेसर शशि बाला ने (Carbon capture and storage: A solution for environmental Carbon di oxide)कार्बन डाई आक्साइड के प्रपाशन एवं भंडारण के द्वारा ग्रीन हाउस गैसों से निपटने का एवं पर्यावरण को बचाने का मार्ग दिखाया , साथ ही उन्होंने बताया कि इस विषय में अभी उनका शोध कार्य चल रहा हैl
व्याख्यान से सभी छात्राओं मे जिज्ञासा एवं उत्साह दिखाई दिया। मंच पर आसीन सयुंक्त सचिव श्री शुब्रो सेन ने कार्यक्रम की प्रसंसा की। वनस्पति विभाग की विभागध्यक्ष डॉ प्रीति सिंह ने छात्राओं का उत्साहवर्धन किया साथ ही जंतु विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ शिवांगी यादव, वनस्पति विज्ञान की डॉ समीक्षा सिंह सहित महाविद्यालय की अन्य शिक्षका भी उपस्थित रहीं।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में सिविल सर्विसेज की तैयारी कैसे करें विषय पर कार्यक्रम आयोजित

कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता आज क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर में सिविल सर्विसेज की तैयारी कैसे करें विषय पर अवध ओझा के वक्तत्व का अयोजन कॉलेज के प्रचार्य जोसेफ डेनियल के दिशानिर्देशन में कैरियर काउंसिल सेल द्वारा आयोजित किया गया जिसकी संयोजिका प्रो मीत कमल है। कार्यक्रम में इकरा आईएएस के संस्थापक शाह फैसल एवं सदस्य सतेंद्र सिंह ,मयंक सिंह मोजूद रहे।
अवध ओझा सिर ने बताया बिना फाउंडेशन के कुछ नही हो सकता। आज के समय में जिसकी न्यूज पेपर में कमांड है वही आईएएस है। उन्होंने सबसे अच्छी बात कही की डर की आगे जीत नही डर के आगे डिप्रेशन है। पावर और अचीवमेंट जरूरी चीज है। एक प्रॉपर टाइम टेबल बनाओ जो सबसे ज्यादा जरूरी है। प्रैक्टिस इतनी गजब चीज है। शक्ति और उत्साह बहुत जरूरी है। ९८% लोग सेल्फ डिसीजन लेने की क्षमता नहीं रखते। जितने मानसिक ताकत होगी तो अच्छा रहेगा।
जीवन में सब चढ़कर यूटिलिटी पर ध्यान दो। ओझा सर ने चार मुख्य चीजों पर ध्यान देने को कहा पहला अवेयरनेस ,रिस्पेक्ट साधना और फाउंडेशन । उन्होंने बताया कि जहां विकल्प है वहां कन्फ्यूजन है।सफल होने के लिए क्वेश्चन फ्रेमिंग बहुत जरूरी हैं ।सिविल सर्विस एग्जाम में मीडियम कोई भी हो सफलता मिलती है ।इस कार्यक्रम में कॉलेज की उपप्राचार्या सबीना बोदरा, डॉ अंकिता जैस्मिन लाल , प्रो अरुणेश शुक्ला , प्रो आशीष दुबे , प्रो आशीष ओमर, प्रो मनीष कपूर , प्रो शालिनी कपूर एवम करियर काउंसलिंग सेल के छात्र प्रतिनिधि अंजली सचान,उज्ज्वल त्रिवेदी , प्राची गुप्ता , वैष्णवी दीक्षित, सुंदरम मिश्रा ,अभिषेक श्रीवास्तव , कृष्णा कनौजिया, विवेक पॉल, वीर मूर्ति मल्होत्रा ,यश विश्वकर्मा, अनुराधा शर्मा आदि का सहयोग रहा ।

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कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय में प्रदर्शनी आयोजित

कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय ,स्वरूप नगर के गृह विज्ञान विभाग द्वारा एक प्रदर्शन का आयोजन किया गया ।जिसमे पेडिलाइट कंपनी के श्री अनिल मल्होत्रा द्वारा छात्राओं को लिप्पन कला को विस्तार पूर्वक करके दिखाया। कार्यक्रम प्रभारी प्रो.अनुपम कुमारी द्वारा बताया कि यह बहुत पुरानी कच्छ,गुजरात की पारंपरिक शिल्प कला है। जिसको गोबर, मिट्टी के मिश्रण से शीशे लगाकर बनाते है जो घर के अंदरूनी हिस्सों को ठंडा रखती है। छात्राओं को इस तरह की कलाओं को सीख कर अपने अंदर छिपी प्रतिभा को प्रदर्शित करने की तरफ प्रेरित किया। इस प्रदर्शन में महाविद्यालय की लगभग 20 छात्राओं ने भाग लिया।

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कानपुर विद्या मन्दिर महिला महाविद्यालय में “रोजगार मेला” आयोजित

कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर विद्या मन्दिर महिला महाविद्यालय ,स्वरूप नगर’ कानपुर में  मुख्यता छात्राओं के लिये “रोजगार मेला” का आयोजन किया गया। जिनमें स्कोप लाइफ, जीवाथम, ए एस वर्ड ग्रुप आदि विभिन्न कंपनियों ने लगभग 200 से अधिक वेकैंसी के लिये जॉब ऑफर की। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से सम्बद्ध विभिन्न महाविद्यालयों की छात्राओं ने जॉब के लिये इंटरव्यू दिए। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर पूनम विज़ ने कहा कि बेटियो को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारा महाविद्यालय हमेशा ही प्रतिबद्ध रहा है । समय समय पर छात्राओं को ट्रेनिंग देकर रोजगार मेले का आयोजन करते रहेंगे। आयोजन करते रहेंगे।कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्रोफेसर निशा पाठक, प्रोफेसर अनुपमा कुमारी ,डॉ. आंचल तिवारी, महाविद्यालय की मीडिया प्रभारी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला ,डॉ. शालिनी गुप्ता , डॉ. रमा कटियार, डॉ. जसमीत कौर, निक्की वेदी, डॉ.सोनम सिंह, डॉ. स्निग्धा मिश्रा, सुश्री नम्रता भट्टाचार्य, सुश्री कल्पना देवी, डॉ. ऋतु नारंग, सुश्री नेहा सिंह आदि शिक्षिकाओं ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। रोजगार मेला में लगभग 300 छात्राओं ने जॉब के लिये इंटरव्यू दिए।

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कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय में शिक्षक संघ की नई कार्यकारिणी का गठन

कानपुर 9 सितम्बर भारतीय स्वरूप संवाददाता, कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय मे शिक्षक संघ इकाई की नई कार्यकारिणी का चुनाव हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. निशा पाठक उपस्थित रहीं। शिक्षक संघ इकाई की पूर्व अध्यक्षा प्रो अनुपमा कुमारी ने नई कार्यकारिणी सदस्यों को शपथ दिलवाई । नई कार्यकारिणी में अध्यक्ष पद हेतु डॉ आंचल तिवारी,सचिव पद हेतु डॉ पूर्णिमा शुक्ला, कोषाध्यक्ष पद हेतु निक्की वेदी ने शपथ ग्रहण की। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो निशा पाठक ने शिक्षक संघ इकाई से निष्पक्षता और ईमानदारी से कार्य करने की अपेक्षा की। कार्यक्रम में महाविद्यालय शिक्षक संघ इकाई के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

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राष्ट्रपति ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (5 सितंबर, 2023) शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में देशभर के शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए।

इस अवसर पर बोलते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा का किसी के भी जीवन में मौलिक महत्व होता है। उन्होंने कहा कि कई शिक्षाविद् बच्चों के संतुलित विकास के लिए थ्री-एच फॉर्मूले की बात करते हैं, जिसमें पहला एच हार्ट (ह्रदय), दूसरा एच हेड (सिर) और तीसरा एच हैंड (हाथ) है। उन्होंने बताया कि हृदय का संबंध संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों, चरित्र की मजबूती एवं नैतिकता से है। उन्होंने कहा कि सिर या मस्तिष्क का संबंध मानसिक विकास, तर्क शक्ति और पढ़ाई से है और हाथ का संबंध शारीरिक कौशल एवं शारीरिक श्रम के प्रति सम्मान से है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के समग्र दृष्टिकोण पर बल देकर ही बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव होगा।

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षण के पेशे में महिलाओं की भागीदारी को देखते हुए शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाली शिक्षिकाओं की संख्या और अधिक होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिला सशक्तिकरण के लिए छात्राओं और शिक्षकों को प्रोत्साहित करना बेहद महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार माना जाता है और इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र-निर्माता के रूप में शिक्षकों के महत्व को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षकों के साथ-साथ माता-पिता का भी यह कर्तव्य है कि वे प्रत्येक बच्चे की अनूठी क्षमताओं को पहचानें और संवेदनशीलता के साथ उन क्षमताओं को विकसित करने में बच्चे की मदद करें। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा उनके साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार किया जाए और माता-पिता बड़े विश्वास के साथ अपने बच्चों को शिक्षकों को सौंपते हैं। उन्होंने कहा कि एक कक्षा के 40-50 बच्चों के बीच प्यार बांटने का अवसर मिलना प्रत्येक शिक्षक के लिए बेहद सौभाग्य की बात है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हर कोई अपने शिक्षकों को याद करता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षकों से जो प्रशंसा, प्रोत्साहन या सजा मिलती है वह उनकी यादों में बसी रहती है। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों में सुधार लाने के इरादे से उन्हें सजा दी जाती है, तो उन्हें इसका अहसास बाद में होता है। उन्होंने कहा कि उन्हें ज्ञान देने से ज्यादा महत्वपूर्ण प्यार और स्नेह देना है।

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कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय में मनाया गया राष्ट्रीय पोषण सप्ताह

कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता,कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय, स्वरूप नगर के गृह विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (दिनांक 01/09/2023 से 07/09/2023 तक ) के अंतर्गत पोषक तत्वों को एक प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित किया। प्रदर्शनी का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. पूनम विज द्वारा किया गया, उनके द्वारा छात्राओं को पोषण के महत्व एवं मोटे अनाजों के प्रयोग करने हेतु प्रेरित किया। गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम प्रभारी प्रो.अनुपम कुमारी द्वारा प्रदर्शनी के माध्यम से छात्रों को संतुलित आहार, भोजन के सातों समूहों को दैनिक आहार में शामिल करना एवं प्रति 100 ग्राम में पौष्टिक तत्वों की उपलब्धता को दर्शाया साथ ही मोटे अनाज (बाजरा ,रागी, ज्वार आदि) प्राचीन भारतीय व्यंजनों को आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त कर दिया है विषय पर विस्तृत चर्चा की । छात्राओं के द्वारा” सबके लिए पोषण” विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की जिसमें महाविद्यालय की 15 छात्राओं ने प्रतिभागिता की जिसका परिणाम इस प्रकार है। प्रथम- अंजली वर्मा बी.ए. तृतीय सेमेस्टर द्वितीय- सिमरन सोनकर बी.ए.तृतीय सेमेस्टर तृतीय- शिवानी वर्मा बी.ए.तृतीय सेमेस्टर,सांत्वना पुरस्कार- प्रज्ञा बी.ए.तृतीय सेमेस्टर इस प्रदर्शनी का महाविद्यालय की लगभग छात्रों सहित समस्त शिक्षिकाओं ने अवलोकन किया।

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इस बार जन्माष्टमी का त्यौहार 6 सितम्बर को मनाया जाएगा

Krishna Janmashtami 2023: कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष योग, ऐसे करेंगे पूजा और  व्रत को कान्हा पूर्ण करेंगे हर कामना, krishna-janmashtami -2023-date-and-time-janmashtami-puja-vidhi-and ...प्रतिवर्ष भाद्रपक्ष कृष्णाष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। दरअसल मान्यता है कि इसी दिन मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी ने कृष्ण को जन्म दिया था। इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण की 5250वीं जन्माष्टमी मनाई जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार जन्माष्टमी का त्यो हार 6 सितम्बर को मनाया जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल अष्टमी तिथि बुधवार 6 सितंबर को दोपहर 3.37 बजे शुरू होगी, जिसका समापन 7 सितंबर की शाम 4 बजकर 14 मिनट पर होगा। वैसे जन्माष्टमी का त्योहार आमतौर पर दो दिन मनाया जाता है, पहले दिन (स्मार्त) गृहस्थियों द्वारा तथा दूसरे दिन वैष्णव सम्प्रदाय द्वारा। गृहस्थ लोग इस बार 6 सितंबर को जन्माष्टमी मनाएंगे जबकि वैष्णव सम्प्रदाय में 7 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव मनाया जाएगा।

भारतीय संस्कृति में जन्माष्टमी का इतना महत्व क्यों है, यह जानने के लिए श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन और उनकी अलौकिक लीलाओं को समझना जरूरी है। द्वापर युग के अंत में मथुरा में अग्रसेन नामक राजा का शासन था। उनका पुत्र था कंस, जिसने बलपूर्वक अपने पिता से सिंहासन छीन लिया और स्वयं मथुरा का राजा बन गया। कंस की बहन देवकी का विवाह यदुवंशी वसुदेव के साथ हुआ। एक दिन जब कंस देवकी को उसकी ससुराल छोड़ने जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि हे कंस! जिस देवकी को तू इतने प्रेम से उसकी ससुराल छोड़ने जा रहा है, उसी का आठवां बालक तेरा संहारक होगा। आकाशवाणी सुन कंस घबरा गया और देवकी की ससुराल पहुंचकर उसने अपने जीजा वसुदेव की हत्या करने के लिए तलवार खींच ली। तब देवकी ने अपने भाई कंस से निवेदन करते हुए वादा किया कि उसके गर्भ से जो भी संतान होगी, उसे वह कंस को सौंप दिया करेगी। कंस ने देवकी की विनती स्वीकार कर ली और वसुदेव-देवकी को कारागार में डाल दिया।
कारागार में देवकी ने पहली संतान को जन्म दिया, जिसे कंस ने मार डाला। इसी प्रकार एक-एक कर उसने देवकी के सात बालकों की हत्या कर दी। जब कंस को देवकी के 8वें गर्भ की सूचना मिली तो उसने वसुदेव-देवकी पर पहरा और कड़ा कर दिया। आखिरकार वह घड़ी भी आ गई, जब देवकी ने कृष्ण को जन्म लिया। उस समय घोर अंधकार छाया हुआ था तथा मूसलाधार वर्षा हो रही थी। तभी वसुदेव जी की कोठरी में अलौकिक प्रकाश हुआ। उन्होंने देखा कि शंख, चक्र, गदा और पद्मधारी चतुर्भुज भगवान उनके सामने खड़े हैं। भगवान के इस दिव्य रूप के दर्शन पाकर वसुदेव और देवकी उनके चरणों में गिर पड़े। भगवान ने वसुदेव से कहा, ‘‘अब मैं बालक का रूप धारण करता हूं। तुम मुझे तत्काल गोकुल में नंद के घर पहुंचा दो, जहां अभी एक कन्या ने जन्म लिया है। मेरे स्थान पर उस कन्या को कंस को सौंप दो। मेरी ही माया से कंस की जेल के सारे पहरेदार सो रहे हैं और कारागार के सारे ताले भी अपने आप खुल गए हैं। यमुना भी तुम्हें जाने का मार्ग अपने आप देगी।’’
वसुदेव ने भगवान की आज्ञा पाकर शिशु को छाज में रखकर अपने सिर पर उठा लिया। यमुना में प्रवेश करने पर यमुना का जल भगवान श्रीकृष्ण के चरण स्पर्श करने के लिए हिलोरं, लेने लगा और जलचर भी श्रीकृष्ण के चरण स्पर्श के लिए उमड़ पड़े। गोकुल पहुंचकर वसुदेव सीधे नंद बाबा के घर पहुंचे। घर के सभी लोग उस समय गहरी नींद में सोये हुए थे पर सभी दरवाजे खुले पड़े थे। वसुदेव ने नंद की पत्नी यशोदा की बगल में सोई कन्या को उठा लिया और उसकी जगह श्रीकृष्ण को लिटा दिया। उसके बाद वसुदेव मथुरा पहुंचकर अपनी कोठरी में पहुंच गए। कोठरी में पहुंचते ही कारागार के द्वार अपने आप बंद हो गए और पहरेदारों की नींद खुल गई।
कंस को जैसे ही कन्या के जन्म का समाचार मिला, वह तुरन्त कारागार पहुंचा और कन्या को बालों से पकड़कर शिला पर पटककर मारने के लिए ऊपर उठाया लेकिन कन्या अचानक कंस के हाथ से छूटकर आकाश में पहुंच गई। आकाश में पहुंचकर उसने कहा, ‘‘मुझे मारने से तुझे कुछ लाभ नहीं होगा। तेरा संहारक गोकुल में सुरक्षित है।’’ यह सुनकर कंस के होश उड़ गए। उसके बाद कंस ने उन्हें मारने के लिए अनेक प्रयास किए। कंस ने श्रीकृष्ण का वध करने के लिए अनेक भयानक राक्षस भेजे परन्तु श्रीकृष्ण ने एक-एक कर उन सभी का संहार कर दिया। बड़ा होने पर कंस का वध कर उग्रसेन को राजगद्दी पर बिठाया और अपने माता-पिता वसुदेव और देवकी को कारागार से मुक्त कराया। तभी से भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की स्मृति में जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाने लगा।
बाल्याकाल से लेकर बड़े होने तक श्रीकृष्ण की अनेक लीलाएं विख्यात हैं। उन्होंने अपने बड़े भाई बलराम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमान जी का आव्हान किया था, जिसके बाद हनुमान जी ने बलराम की वाटिका में जाकर बलराम से युद्ध किया और उनका घमंड चूर-चूर कर दिया था। श्रीकृष्ण ने नररकासुर नामक असुर के बंदीगृह से 16100 बंदी महिलाओं को मुक्त कराया था, जिन्हें समाज द्वारा बहिष्कृत कर दिए जाने पर उन महिलाओं ने श्रीकृष्ण से अपनी रक्षा की गुहार लगाई और तब श्रीकृष्ण ने उन सभी महिलाओं को अपनी रानी होने का दर्जा देकर उन्हें सम्मान दिया था।

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 एस.एन.सेन महाविद्यालय में शिक्षक दिवस पर महान शिक्षाविद डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व एवम कृतित्व पर प्रकाश डाला गया

कानपुर 5 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस.एन.सेन महाविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर महान शिक्षाविद डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व एवम कृतित्व पर प्रकाश डाला गया ।कार्यक्रम का औपाचारिक शुभारम्भ विभाग की विभागाध्यक्षा प्रोफेसर चित्रा सिंह तोमर ने द्वीप प्रज्जवलन एवं राधाकृष्णन जी की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर किया। इस अवसर स्नातक एवं परास्नातक कक्षा की छात्राओ द्वारा भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे लगभग 26 छात्राओ ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम .में महाविद्यालय की अंग्रेजी विभाग की विभाध्यक्ष डा अल्का टण्डन ,डॉ मोनिका सहाय एवं डॉ संगीता सिंह आदि उपस्थित रहीं।

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