भारतीय स्वरूप संवाददाता राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर के द्वारा महाविद्यालय की एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी तथा जिला नोडल अधिकारी, कानपुर नगर डॉ संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में मेरी माटी मेरा देश – हर घर तिरंगा अभियान 2024 के अंतर्गत तिरंगा यात्रा रैली निकाली गई। इस रैली के दौरान लगभग 100 छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि नमामि गंगे विभाग, भाजपा, उत्तर प्रदेश के प्रदेश संयोजक श्री कृष्णा दीक्षित बड़े जी रहे। उनके साथ में अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष श्री अनूप चौधरी व फरहान भी रैली में सम्मिलित हुए। उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व पर हम देश के वीर बलिदानी शहीदों को याद करते हुए उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस तिरंगा यात्रा के दौरान 50 झंडो का वितरण छात्राओं तथा जन- सामान्य को किया गया। सभी न एस एस वॉलंटियर्स ने उत्साह के साथ देशभक्ति के गीत गए, नारे लगाए व झंडे के साथ सेल्फी भी ली जिसे मेरी माटी मेरा देश व युवा पोर्टल पर अपलोड किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस वॉलिंटियर्स अंतरा कश्यप , श्रद्धा, सान्या,, सिमरन, बुशरा, इन्नमा, अदिति व चंचल का विशेष सहयोग रहा।
महिला जगत
भारत में महिलाएं और पुरुष 2023” नामक पुस्तिका का विमोचन
यह पुस्तिका एक व्यापक और अंतर्दृष्टिपूर्ण दस्तावेज है जो भारत में महिलाओं और पुरुषों की स्थिति के बारे में समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का प्रयास करता है और जनसंख्या, शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था में भागीदारी, निर्णय लेने में सहभागिता आदि जैसे विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला पर डेटा प्रदान करता है। यह जेंडर, शहरी-ग्रामीण विभाजन और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग डेटा प्रस्तुत करता है, जो महिलाओं और पुरुषों के विभिन्न समूहों के बीच विद्यमान असमानताओं को समझने में मदद करता है। पुस्तिका में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों/संगठनों के प्रकाशित आधिकारिक डेटा से प्राप्त महत्वपूर्ण संकेतक शामिल हैं।
“भारत में महिलाएं और पुरुष 2023” न केवल लैंगिक समानता की दिशा में की गई प्रगति को रेखांकित करता है, बल्कि उन क्षेत्रों की भी पहचान करता है जहां महत्वपूर्ण अंतर बने हुए हैं। विभिन्न सामाजिक-आर्थिक संकेतकों की जांच करके, पुस्तिका समय के साथ रुझानों का कुछ विश्लेषण प्रस्तुत करती है और इस प्रकार नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और आम जनता को सूचित निर्णय लेने और जेंडर-संवेदनशील नीतियों के विकास में योगदान करने में मदद करती है।
यह रिपोर्ट भारत में महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए जनसांख्यिकीय परिवर्तनों और उनके निहितार्थों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है। यह लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने की वकालत और कार्रवाई करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करता है कि विकास प्रयास समावेशी और टिकाऊ हों।
“भारत में महिलाएं और पुरुष 2023” मंत्रालय की वेबसाइट (https://mospi.gov.in/) पर उपलब्ध है।
पुस्तिका के कुछ मुख्य अंश इस प्रकार हैं:
- 2036 तक भारत की जनसंख्या के 152.2 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है, महिला प्रतिशत 2011 के 48.5 प्रतिशत की तुलना में मामूली वृद्धि के साथ 48.8 प्रतिशत होगा। संभवतः प्रजनन क्षमता में गिरावट के कारण 15 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों का अनुपात 2011 की तुलना में 2036 में घटने का अनुमान है। इसके विपरीत, इस अवधि के दौरान 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी के अनुपात में अधिक वृद्धि होने का अनुमान है।


- 2036 में भारत की जनसंख्या में 2011 की जनसंख्या की तुलना में स्त्रियों की संख्या अधिक होने की उम्मीद है, जैसा कि जेंडर अनुपात में परिलक्षित होता है, जिसके 2011 में 943 से बढ़कर 2036 तक 952 होने का अनुमान है। यह लैंगिक समानता में सकारात्मक प्रवृत्ति को दर्शाता है।

- यह स्पष्ट है कि 2016 से 2020 तक, 20-24 और 25-29 आयु वर्ग में आयु विशिष्ट प्रजनन दर क्रमशः 135.4 और 166.0 से घटकर 113.6 और 139.6 हो गई है। उपरोक्त अवधि के लिए 35-39 आयु के लिए एएसएफआर 32.7 से बढ़कर 35.6 हो गया है, जो दर्शाता है कि जीवन में व्यवस्थित होने के बाद, महिलाएं परिवार के विस्तार पर विचार कर रही हैं।
- 2020 में किशोर प्रजनन दर निरक्षर आबादी के लिए 33.9 थी, जबकि साक्षर लोगों के लिए 11.0 थी। यह दर उन लोगों के लिए भी अत्यधिक कम है जो साक्षर हैं, लेकिन निरक्षर महिलाओं की तुलना में बिना किसी औपचारिक शिक्षा के (20.0) के हैं। यह तथ्य महिलाओं को शिक्षा प्रदान करने के महत्व पर फिर से जोर देता है।

- मातृत्व मृत्यु दर (एमएमआर) एसडीजी संकेतकों में से एक है और इसे 2030 तक 70 तक लाया जाना एसडीजी ढांचे में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण, भारत ने समय रहते अपने एमएमआर (2018-20 में 97/लाख जीवित शिशु) को कम करने का प्रमुख मील का पत्थर सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है और एसडीजी लक्ष्य को भी हासिल करना संभव होना चाहिए।

- शिशु मृत्यु दर में पिछले कुछ वर्षों में पुरुष और महिला दोनों के लिए कमी आ रही है। महिला आईएमआर हमेशा पुरुषों की तुलना में अधिक रही है, लेकिन 2020 में, दोनों 1000 जीवित शिशु पर 28 शिशुओं के स्तर पर बराबर थे। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर के आंकड़ों से पता चलता है कि यह 2015 में 43 से घटकर 2020 में 32 हो गई है। यही स्थिति लड़के और लड़कियों दोनों के लिए है और लड़के तथा लड़कियों के बीच का अंतर भी कम हुआ है।
- आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की श्रम बल भागीदारी दर 2017-18 से पुरुष और महिला दोनों आबादी के लिए बढ़ रही है। यह देखा गया है कि 2017-18 से 2022-23 के दौरान पुरुष एलएफपीआर 75.8 से बढ़कर 78.5 हो गया है और इसी अवधि के दौरान महिला एलएफपीआर 23.3 से बढ़कर 37 हो गई है।
- 15वें राष्ट्रीय चुनाव (1999) तक, 60 प्रतिशत से कम महिला मतदाताओं ने भाग लिया, जिसमें पुरुषों का मतदान 8 प्रतिशत अधिक था। हालांकि, 2014 के चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 65.6 प्रतिशत हो गई और 2019 के चुनावों में यह और अधिक बढ़कर 67.2 प्रतिशत हो गई। पहली बार, महिलाओं के लिए मतदान प्रतिशत थोड़ा अधिक रहा, जो महिलाओं में बढ़ती साक्षरता और राजनीतिक जागरूकता के प्रभाव को दर्शाता है।

· उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने जनवरी 2016 में अपनी स्थापना के बाद से दिसंबर 2023 तक कुल 1,17,254 स्टार्ट-अप को मान्यता दी है। इनमें से 55,816 स्टार्ट-अप महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो कुल मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप का 47.6 प्रतिशत है। यह महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व भारत के स्टार्ट-अप इकोसिस्टम में महिला उद्यमियों के बढ़ते प्रभाव और योगदान को रेखांकित करता है।
एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज कानपुर द्वारा राष्ट्रीय संस्कृत प्रतिभा खोज आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज कानपुर द्वारा राष्ट्रीय संस्कृत प्रतिभा खोज का आयोजन किया गया इस प्रतियोगिता में स्नातकोत्तर स्तरीय हिंदी विभाग व संस्कृति विभाग द्वारा संस्कृत युवा गीत संस्कृत भाषण व श्रुत लेखन की प्रतिभागिता छात्राओ से कराई गई इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंधन तंत्र समिति के अध्यक्ष श्री प्रवीण कुमार मिश्रा सचिव श्री प्रोवीर कुमार सेन संयुक्त सचिव श्री शुभ्रो सेन प्राचार्य प्रोफेसर सुमन समाजशास्त्र विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर निशि प्रकाश व प्रोफेसर रेखा चौबे ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया छात्रों को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने कहा की भाषा विभाग उत्तर प्रदेश शासन अधीन उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ द्वारा आयोजित जनपद मंडल तथा राज्य स्तरीय संस्कृत प्रतिभा खोज प्रतिवर्ष आयोजित होती है जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयी महाविद्यालयी छात्र-छात्राएं विभिन्न प्रतियोगिता में प्रतिभाग करते हैं जिसमें संस्कृत भाषा ज्ञान से संबंधित उत्कृष्ट प्रतिभा सामने उभर कर आती है इसी के प्रेरणा स्रोत अब प्रत्येक वर्ष अपने महाविद्यालय में यह प्रतियोगिता आयोजित होगी और उत्कृष्ट प्रतिभागियों को मंडल तथा राज्य स्तरीय परीक्षा में भेजा जाएगा जिसके खर्च का संपूर्ण वहन महाविद्यालय करेगा प्राचार्य जी ने संस्कृत भाषा के संवर्धन हेतु छात्राओं को शुद्ध संस्कृत लेखन शुद्ध गायन व शुद्ध वाचन करने के लिए प्रोत्साहित किया कुलानुशासक प्रोफेसर कप्तान ममता अग्रवाल व हिंदी विभाग अध्यक्ष शुभा वाजपेई ने निर्णायक की भूमिका निभाई
महाविद्यालय की मीडिया प्रभारी डा प्रीति सिंह ने बताया प्रतिभागियों में कोमल गौड़ शुभी त्रिपाठी नित्या त्रिपाठी छाया वंशिता कश्यप गरिमा यादव इत्यादि छात्राओं ने प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान प्राप्त किया जिन्हें प्राचार्य द्वारा संस्कृत दक्षता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए प्रतियोगिता के संचालन का कार्य हिंदी सहायक आचार्य डॉ रेशमा और धन्यवाद ज्ञापन संस्कृत प्रवक्ता डॉक्टर अनुराधा द्विवेदी ने किया इस अवसर पर महाविद्यालय की अन्य शिक्षिकाएं मौजूद रही।
“काकोरी ट्रेन एक्शन” दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बी वी पी.जी. महाविद्यालय में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश के अनुपालन में वर्ष 2024-25 “काकोरी ट्रेन एक्शन” से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कराने के संदर्भ में “काकोरी ट्रेन एक्शन” दिवस पर संवाद कार्यक्रम एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। महाविद्यालय प्राचार्या प्रो. सुमन ने इस अवसर पर छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश सेवा सर्वोपरि सेवा है। देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाने में कई महत्वपूर्ण आंदोलन व संघर्ष किए गए। काकोरी ट्रेन एक्शन का भी इनमें से एक महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। हमें अपने क्रान्तिकारियों के बलिदान से सीख लेते हुए देश सेवा हेतु तत्पर रहना चाहिए।
कार्यक्रम की संयोजिका सहायक प्रोफेसर श्वेता रानी ने अपने संबोधन में छात्राओं को इतिहास से प्रेरणा लेते हुए देश के वर्तमान एवं भविष्य को संवारने हेतु सदैव तत्पर रहने का संदेश दिया। उन्होंने बताया स्वतंत्रता आंदोलन में काकोरी ट्रेन एक्शन का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम का आयोजन इतिहास विभाग की सहायक प्रोफेसर श्वेता रानी, डॉ. कोमल सरोज, एनसीसी प्रभारी प्रीति यादव द्वारा किया गया। भाषण प्रतियोगिता में मुख्य निर्णायक की भूमिका डॉ. रोली मिश्रा, डॉ. रेशमा द्वारा निर्वहन की गई। इस अवसर पर प्रो. चित्रा सिंह तोमर, डॉ. गार्गी यादव, प्रो. निशा वर्मा, डॉ. रिचा सिंह, डॉ. पूजा गुप्ता, डॉ. समीक्षा सिंह एवं अन्य शिक्षिकाओं व छात्राओं की उपस्थिति महत्त्वपूर्ण रही।
दयानंद पी जी कॉलेज में खाद्य सुरक्षा जागरूकता अभियान आयोजित
कानपुर 8 अगस्त भारतीय स्वरूप संवाददाता, राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर के द्वारा आज दिनांक 8 अगस्त , 2024 को खाद्य सुरक्षा जागरूकता अभियान के अंतर्गत व्याख्यान एवं ग्रुप डिस्कशन का आयोजन किया गया। जिसमें एनएसएस वॉलिंटियर्स ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किये। कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि खाद्य सुरक्षा किसी व्यक्ति की पौष्टिक और पर्याप्त मात्रा में भोजन तक पहुँचने की क्षमता का माप है। खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत भोजन को व्यक्ति की खाद्य प्राथमिकताओं और सक्रिय व स्वस्थ जीवन शैली के लिए आहार संबंधी ज़रूरतों को भी पूरा करना चाहिए, यही खाद्य सुरक्षा है। छात्राओं ने खाद्य सुरक्षा से संबंधित अपने अनुभव को एक दूसरे से साझा भी किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में भूगोल विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अंजना श्रीवास्तव एवं श्वेता गोंड का विशेष सहयोग रहा साथ ही एनएसएस वॉलिंटियर्स की सक्रिय सहभागिता अत्यंत सराहनीय रही।
बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज में संघीय बजट 2024- 25 पर वाद- विवाद प्रतियोगिता आयोजित
कानपुर 2 अगस्त भारतीय स्वरूप संवाददाता एस .एन. सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज ,कानपुर में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा संघीय बजट 2024- 25 पर एक वाद- विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर सुमन,विशिष्ट अतिथि डॉ रामकृपाल,निर्णायक सदस्य डॉक्टर किरण, प्रोफेसर मीनाक्षी व्यास तथा विभाग के सदस्यों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया । छात्राओं ने संघीय बजट 2024- 25 पर पक्ष- विपक्ष में अपने-अपने विचार प्रस्तुत किया। प्राचार्य जी, निर्णायक सदस्यों के द्वारा भी बजट के विभिन्न पहलुओं पर अपना विचार प्रस्तुत किया गया।विशिष्ट अतिथि ने बजट के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बताया।कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर रोली मिश्रा तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर निशा वर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रोफेसर प्रोफेसर गार्गी यादव ,डॉक्टर प्रीति सिंह , डॉ प्रीति पांडे, डॉ रचना निगम,प्रीति यादव, डॉ श्वेता डॉक्टर , प्रीता अवस्थी एवं डॉक्टर कीर्ति अवस्थी आदि उपस्थित रहे।
Read More »महिलाओं के लिए हैं विशेष रूप से 33 में से 19 राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान
सीआईटीएस के तहत स्वीकृत सीटों में से 50.45% महिला प्रशिक्षु थीं जबकि एनएसटीआई में सीटीएस प्रशिक्षण के तहत 84% प्रशिक्षु महिलाएं थीं।
महिला पाठ्यक्रमों में भागीदारी को और बढ़ाने के लिए, सभी लड़की उम्मीदवारों के लिए ट्यूशन और परीक्षा शुल्क माफ कर दिया गया है और सामान्य एनएसटीआई में प्रवेश के लिए सामान्य ट्रेडों में महिलाओं के लिए 30% सीटें आरक्षित हैं।
यह जानकारी कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर
महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराध रोकथाम’ योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता
भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश मुख्य रूप से अपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से साइबर अपराधों सहित अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अभियोजन के लिए जिम्मेदार हैं। केन्द्र सरकार राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों की पहलों को उनकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के क्षमता निर्माण के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत परामर्श और वित्तीय सहायता से पूरा करती है।
साइबर अपराध एक कठिन चुनौती है। इसकी विशाल और सीमाहीन प्रकृति के कारण, साइबर अपराधी कहीं भी बैठकर अपराध कर सकता है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर नागरिकों द्वारा बताए गए संदिग्ध मोबाइल नंबरों के आधार पर, 1 जनवरी 2024 से 22 जुलाई 2024 की अवधि के दौरान, देश में साइबर अपराध के प्रमुख शहर और उत्पत्ति स्थान डीग (राजस्थान), देवघर (झारखंड), नूह (हरियाणा), अलवर (राजस्थान), नवादा (बिहार), पश्चिमी दिल्ली (दिल्ली), नालंदा (बिहार), जामताड़ा (झारखंड), मथुरा (उत्तर प्रदेश), पटना (बिहार), बेंगलुरु शहरी (कर्नाटक), दुमका (झारखंड), गौतमबुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश), जयपुर (राजस्थान), खेड़ताल-तिजारा (राजस्थान), उत्तर 24 परगना (पश्चिम बंगाल), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), उत्तर पश्चिम दिल्ली (दिल्ली), शेखपुरा (बिहार) और दक्षिण पश्चिम दिल्ली (दिल्ली) हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) अपने प्रकाशन “भारत में अपराध” में अपराधों के बारे में सांख्यिकीय डेटा संकलित और प्रकाशित करता है। नवीनतम प्रकाशित रिपोर्ट वर्ष 2022 के लिए है। साइबर अपराध में लिप्त अपराधियों के बारे में विशिष्ट डेटा एनसीआरबी द्वारा अलग से नहीं रखा जाता है।
साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वित तरीके से निपटने के तंत्र को मजबूत करने के लिए, केन्द्र सरकार ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
i. गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराध से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए एक संलग्न कार्यालय के रूप में ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र’ (I4सी) की स्थापना की है।
ii. मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम और गुवाहाटी के लिए I4सी के तहत सात संयुक्त साइबर समन्वय दल (जेसीसीटी) गठित किए गए हैं, जो साइबर अपराध हॉटस्पॉट/बहु-न्यायालयीय मुद्दों वाले क्षेत्रों के आधार पर पूरे देश को कवर करते हैं, ताकि राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय ढांचे को बढ़ाया जा सके। 2023 में हैदराबाद, अहमदाबाद, गुवाहाटी, विशाखापत्तनम, लखनऊ, रांची और चंडीगढ़ में जेसीसीटी के लिए सात कार्यशालाएं आयोजित की गईं।
iii. राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश पुलिस के जांच अधिकारियों (आईओ) को प्रारंभिक चरण की साइबर फोरेंसिक सहायता प्रदान करने के लिए I4सी के एक भाग के रूप में नई दिल्ली में अत्याधुनिक ‘राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (जांच)’ की स्थापना की गई है। अब तक, राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (जांच) ने साइबर अपराधों से संबंधित मामलों की जांच में उनकी मदद करने के लिए मोबाइल फोरेंसिक, मेमोरी फोरेंसिक, सीडीआर विश्लेषण आदि जैसे लगभग 10,200 साइबर फोरेंसिक में राज्य एलईए को अपनी सेवाएं प्रदान की हैं।
iv. I4सी के एक भाग के रूप में ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (https://cybercrime.gov.in) शुरू किया गया है, ताकि आम जनता सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सके, जिसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस पोर्टल पर दर्ज साइबर अपराध की घटनाओं, उन्हें एफआईआर में परिवर्तित करने और उसके बाद की कार्रवाई को कानून के प्रावधानों के अनुसार संबंधित राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
v. वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और धोखेबाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए I4सी के तहत ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ शुरू की गई है। अब तक 7.6 लाख से अधिक शिकायतों में 2400 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई गई है। ऑनलाइन साइबर शिकायत दर्ज करने में सहायता प्रदान करने के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ चालू किया गया है।
vi. साइबर अपराध जांच, फोरेंसिक, अभियोजन आदि के महत्वपूर्ण पहलुओं पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम के माध्यम से पुलिस अधिकारियों/न्यायिक अधिकारियों की क्षमता निर्माण के लिए I4सी के तहत बड़े पैमाने पर ओपन ऑनलाइन पाठ्यक्रम (एमओओसी) प्लेटफॉर्म, जिसका नाम ‘साइट्रेन’ पोर्टल है, तैयार किया गया है। पोर्टल के माध्यम से राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के 96,288 से अधिक पुलिस अधिकारी पंजीकृत हैं और 70,992 से अधिक प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।
vii. पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक भारत सरकार द्वारा 5.8 लाख से अधिक सिम कार्ड और 1,08,000 आईएमईआई ब्लॉक किए जा चुके हैं।
viii. I4सी ने भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के 6,800 अधिकारियों को साइबर स्वच्छता प्रशिक्षण दिया है।
ix. I4सी ने 35,000 से अधिक एनसीसी कैडेटों को साइबर स्वच्छता प्रशिक्षण दिया हैI
x. गृह मंत्रालय ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्ल्यूसी) योजना के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, जूनियर साइबर सलाहकारों की भर्ती और एलईए के कर्मियों, सरकारी अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण जैसे क्षमता निर्माण के लिए 131.60 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। 33 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं चालू की गई हैं और 24,600 से अधिक एलईए कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच, फोरेंसिक आदि पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
xi. हैदराबाद में राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (साक्ष्य) की स्थापना की गई है। इस प्रयोगशाला की स्थापना से साइबर अपराध से संबंधित साक्ष्यों के मामलों में आवश्यक फोरेंसिक सहायता मिलेगी, साक्ष्यों को संरक्षित किया जा सकेगा और आईटी कानून तथा साक्ष्य कानून के प्रावधानों के अनुरूप उनका विश्लेषण किया जा सकेगा; तथा समय की बचत होगी।
xii. साइबर अपराध के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए, केन्द्र सरकार ने कदम उठाए हैं, जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ, एसएमएस, आई4सी सोशल मीडिया अकाउंट यानी एक्स (पूर्व में ट्विटर) (@साइबरदोस्त), फेसबुक (साइबरदोस्तआई4सी), इंस्टाग्राम (साइबरदोस्तआई4सी), टेलीग्राम (साइबरदोस्ती4सी) के माध्यम से संदेशों का प्रसार, रेडियो अभियान, कई माध्यमों में प्रचार के लिए माईगव को शामिल करना, राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के सहयोग से साइबर सुरक्षा और सुरक्षा जागरूकता सप्ताह का आयोजन, किशोरों/छात्रों के लिए पुस्तिका का प्रकाशन आदि शामिल हैं। राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों से व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिए प्रचार करने का भी अनुरोध किया गया है।
यह बात गृह राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कही।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर की अनंतिम उम्मीदवारी रद्द की और उन्हें भविष्य की सभी परीक्षाओं/चयनों से स्थायी रूप से वंचित किया गया
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा 18 जुलाई, 2024 को सिविल सेवा परीक्षा-2022 (सीएसई-2022) की अनंतिम रूप से अनुशंसित उम्मीदवार सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर को कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी किया गया था। इस नोटिस में अपनी पहचान को गलत तरीके से पेश करके परीक्षा नियमों में निर्धारित प्रदत्त सीमा से अधिक प्रयास करने के लिए उन्हें 25 जुलाई, 2024 तक एस.सी.एन. में अपना जवाब प्रस्तुत करना था। हालांकि, उन्होंने 04 अगस्त, 2024 तक का अतिरिक्त समय मांगा था, ताकि वह अपने जवाब के लिए आवश्यक दस्तावेज एकत्र कर सकें।
2. यूपीएससी ने सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के अनुरोध पर सावधानीपूर्वक विचार किया और न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए, उन्हें 30 जुलाई, 2024 को दोपहर 3:30 बजे तक का समय दिया गया, ताकि वे एस.सी.एन. में अपना जवाब प्रस्तुत कर सकें। सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर को यह भी स्पष्ट रूप से बता दिया गया कि यह उनके लिए अंतिम अवसर है और इससे आगे उन्हें कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। उन्हें स्पष्ट शब्दों में यह भी बताया गया कि यदि उपरोक्त तिथि/समय तक कोई जवाब नहीं मिलता है, तो यूपीएससी उनसे कोई और संदर्भ लिए बिना आगे की कार्रवाई करेगा। उन्हें दिए गए अतिरिक्त समय के बावजूद, वह निर्धारित समय के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने में विफल रहीं।
3. यूपीएससी ने उपलब्ध अभिलेखों की सावधानीपूर्वक जांच की है और उसे सीएसई-2022 नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करने का दोषी पाया। सीएसई-2022 के लिए उसकी अनंतिम उम्मीदवारी रद्द कर दी गई है और उन्हें यूपीएससी की सभी आगामी परीक्षाओं/चयनों से स्थायी रूप से वंचित कर दिया गया है।
4. सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के मामले को देखते हुए, यूपीएससी ने वर्ष 2009 से 2023 यानि 15 वर्षों के सीएसई के 15,000 से अधिक अंतिम रूप से अनुशंसित उम्मीदवारों के उपलब्ध अभिलेखों की उनके द्वारा प्राप्त प्रयासों की संख्या के संबंध में गहन जांच की। इस विस्तृत जांच के बाद, सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के मामले को छोड़कर, किसी अन्य उम्मीदवार को सीएसई नियमों के तहत प्रदत्त संख्या से अधिक प्रयासों का लाभ उठाते हुए नहीं पाया गया है। सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के एकमात्र मामले में, यूपीएससी की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) मुख्य रूप से इस तथ्य के कारण उसके प्रयासों की संख्या का पता नहीं लगा सकी क्योंकि उन्होंने न केवल अपना नाम बल्कि अपने माता-पिता का नाम भी बदल लिया था। यूपीएससी एसओपी को और सशक्त करने की प्रक्रिया में है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसा मामला दोबारा ना आ सके।
5. जहां तक झूठे प्रमाणपत्र (विशेष रूप से ओबीसी और पीडब्ल्यूबीडी श्रेणियों) जमा करने की शिकायतों का सवाल है, यूपीएससी यह स्पष्ट करना चाहता है कि वह प्रमाण पत्रों की केवल प्रारंभिक जांच करता है, जैसे कि प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया है या नहीं, प्रमाण पत्र किस वर्ष से संबंधित है, प्रमाण पत्र जारी करने की तिथि, प्रमाण पत्र पर कोई ओवरराइटिंग है या नहीं, प्रमाण पत्र का प्रारूप आदि। आम तौर पर, यदि प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया है, तो उसे असली माना जाता है। यूपीएससी के पास हर साल उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए हजारों प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच करने का न तो अधिदेश है और न ही साधन। हालांकि, यह समझा जाता है कि प्रमाण पत्रों की सत्यता की जांच और सत्यापन का कार्य कार्य सौंपे गए अधिकारियों द्वारा किया गया है।
यूनियन बजट – 2024 में युवा एवं महिलाओं के कौशल विकास एवं रोजगार हेतु किए गए विशेष प्रावधान
कानपुर 29 जुलाई, भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के द्वारा कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के निर्देशन में एनएसएस वालंटियर्स एवं अन्य छात्र छात्राओं को बजट 2024 में युवाओं के कौशल विकास , रोजगार एवं महिला सशक्तिकरण हेतु विशेष रूप से किए गए प्रावधानों पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें सभी वॉलिंटियर्स ने सक्रिय सहभागिता की तथा अपने-अपने विचार रखें। कार्यक्रम अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि आत्मनिर्भर भारत , मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया , एवम् स्किल इंडिया आदि योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए छात्राओं को बताया गया कि किस प्रकार से युवा खासकर महिलाएं एवं युवतियां किस प्रकार से , कहां से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं तथा अपना रोजगार (स्टार्टअप) प्रारंभ कर स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं तथा अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कर देश के आर्थिक विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
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