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शिक्षा

क्राइस्ट चर्च कॉलेज में “अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस” मनाया गया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज में “अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस” बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आशिम कुमार नथानिएल के स्वागत और प्रार्थना से हुई। इसके बाद प्रिंसिपल प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन का प्रेरक संबोधन हुआ, जिसमें ओजोन परत की सुरक्षा में सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व पर जोर दिया गया।

छात्र प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और गहराई प्रदान की अनामता शहाबुद्दीन (बी.एससी. सेमेस्टर V) ने ओजोन दिवस के महत्व पर बात की। वंशिका सिंह (एम.एससी. सेमेस्टर I रसायन विज्ञान) ने पर्यावरण जागरूकता पर एक स्वरचित कविता सुनाई, और गुलनाज़ (एम.एससी. सेमेस्टर I रसायन विज्ञान) ने वैश्विक पर्यावरण मुद्दों और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर बात की। रसायन विज्ञान विभाग की प्रोफेसर ज्योत्सना लाल के एक विशेष व्याख्यान में ओजोन क्षरण के सबसे चिंताजनक पहलू के कारणों और मरम्मत पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने एक वीडियो प्रदर्शित करके प्रस्तुति को और अधिक रोचक बना दिया, जिससे सत्र और समृद्ध हो गया। उप-प्रिंसिपल, प्रो. श्वेता चंद ने कहा कि अपनी भावी पीढ़ियों की बेहतरी के लिए, हमें अपने पर्यावरण के संरक्षण पर काम करने के लिए छोटे कदम उठाने चाहिए।

कार्यक्रम का समापन रसायन विज्ञान विभाग की प्रभारी प्रोफेसर अनिंदिता भट्टाचार्य के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की सुरक्षा पर एक शक्तिशाली संदेश दिया गया।

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भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर ज्ञानशून्य भाषा से राष्ट्र का निर्माण कभी नहीं हो सकता। भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ कर ही हिंदी सही मायनों में राजभाषा से विश्वभाषा का सफर तय कर सकेगी। उपरोक्त विचार क्राइस्ट चर्च कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा हिन्दी दिवस के अवसर पर दिनांक 16.09.2025 को ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और हिन्दी ‘ विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन ने कहीं। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत पौधा देकर किया गया व औपचारिक स्वागत वक्तव्य हिन्दी विभाग की प्रभारी प्रो. सुजाता चतुर्वेदी ने दिया। 

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में ज्वाला देवी महाविद्यालय में हिंदी की सहायक आचार्य डॉ. खुशबू सिंह उपस्थित रहीं । अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े बिना हिंदी वैचारिक स्वराज्य की भाषा नहीं बन सकती । हिन्दी और भारतीय ज्ञान परंपरा एक दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं । हिंदी में शोध के अनेक नए आयाम व क्षेत्र भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़कर खुल सकते हैं। उप-प्राचार्या प्रो. श्वेता चंद ने भी इस अवसर पर अपनी शुभकामनाएँ ज्ञापित करते हुए हिंदी भाषा और साहित्य की समृद्धि से छात्रों को लाभान्वित होने का आह्वान किया। हिन्दी विभाग के सह-आचार्य श्री अवधेश मिश्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के बहुलतावादी व प्रतिरोधी चरित्र को सही मायने में हिंदी ही प्रतिबिंबित करती है। हिंदी विभाग के सहायक आचार्य अरुणेश शुक्ल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आधुनिक हिंदी साहित्य का पूरा ढाँचा पारंपरिक भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमि पर ही खड़ा है। हिंदी विभाग के विद्यार्थियों, विख्यात दुबे, फैरी , लुत्फ़ा,  ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि हिंदी का अपना चरित्र समन्वयवादी है। वह भारतीय ज्ञान परंपरा से इसी बिंदु पर जुड़ती है।

हिन्दी विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा निकाली जाने वाली भित्ति पटल पत्रिका और कविता पोस्टर प्रदर्शनी का लोकार्पण और उद्घाटन भी अतिथियों द्वारा किया गया। ये कविता पोस्टर कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा बनाए गए । 

कविता पोस्टर प्रतियोगिता में विजेता छात्र छात्राओं को पुरस्कार स्वरूप अतिथियों द्वारा पुस्तकें प्रदान की गई। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान वरीशा हाशमी (बी.ए. सेम. 3) ; राशू कनौजिया (बी.ए. सेम.1) ने द्वितीय स्थान ; शालिनी तिवारी (एम.ए. हिंदी सेम.1) तथा काव्या पाण्डेय (बी.ए. सेम.1) ने  तृतीय स्थान प्राप्त किया। साथ ही सांत्वना पुरस्कार निकिता श्रीवास्तव (एम.ए. हिंदी सेम. 1) तथा फैरी (बी.ए. सेम. 5) ने प्राप्त किया। 

औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. अरविंद सिंह ने किया । कार्यक्रम का कुशल संचालन हिंदी विभाग की छात्रा काव्या पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक , शिक्षणेत्तर कर्मचारी, शोधार्थी तथा छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम की सफलता में  अक्सा, आयतल, प्रज्ञा , फैरी आदि विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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वृद्ध जनों की स्थिति विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा “भारत में वृद्ध जनों की स्थिति” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सुमन, समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. निशि प्रकाश, प्रो. रेखा चौेबे, तथा कैप्टन ममता अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। प्रतियोगिता में बी.ए. प्रथम सेमेस्टर तथा बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की छात्राओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में निर्णायक मंडल में चित्रकला विभाग की अध्यक्षा डॉ. रचना, शिक्षाशास्त्र विभाग की डा. अनामिका ने महती भूमिका निभाई।

प्रतियोगिता में भारत में वृद्ध जनों का सम्मान, सुरक्षा, पहचान, वृद्धावस्था पेंशन, वृद्धावस्था हेतु सरकारी प्रयास, पारिवारिक संस्कार, और वृद्धों से जुड़ी समस्याओं के मुद्दे पर विचार प्रस्तुत किये गये। प्राचार्या ने अच्छे कार्यक्रम के आयोजन के लिए समाजशास्त्र विभाग को, प्रतिभागी छात्राओं तथा उपस्थित छात्राओं को बधाई दीं। प्रो. निशी प्रकाश ने जीवन में रिश्तों के सम्मान को बनाए रखने का संदेश छात्राओं को दिया। 

 प्रतियोगिता में प्रथम स्थान निदा परवीन, दि्तीय स्थान कृष्टि कनौजिया, तृतीय स्थान सिमरन वर्मा ने प्राप्त किया। सांत्वना पुरस्कार कुमकुम पांडे ने प्राप्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन समाजशास्त्र विभाग की डॉ. रेनू कुरील तथा प्रो. मीनाक्षी व्यास ने किया। कार्यक्रम में समाजशास्त्र विभाग की समस्त छात्राएं उपस्थित रही।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर महिला सशक्तिकरण और कल्याण को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर की मिशन शक्ति इकाई ने 13 सितंबर 2025 को मेरी आवाज, मेरी पसंद विषय पर मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं पर केंद्रित था और प्रॉक्टर एंड गैबल द्वारा उदारतापूर्वक प्रायोजित किया गया था। इसमें संकाय सदस्य, स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रही। मिशन शक्ति की प्रभारी प्रो मीत कमल ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया और मासिक धर्म स्वास्थ्य पर खुली बातचीत के महत्व पर जोर देकर सत्र की शुरुआत की उन्होंने कहा कि ये विषय हमेशा से कलंक और चुप्पी से घिरा रहा है।

प्राचार्य प्रो० विनय जॉन सेबेस्टियन ने इस पहल की सराहना की तथा इसे बाधाओं को तोडने वाला और महिलाओं को उपलब्ध स्वास्थ्य विकल्पों के बारे में जागरूक करने की दिशा में एक सार्थक कदम बताया। उप प्राचार्य प्रो. श्वेता चंद ने इस बात पर जोर दिया कि मासिक धर्म स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत स्वच्छता का मामला नहीं है, बल्कि यह सम्मान, समानता और अधिकारों का भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अतिधि वक्ताओं सूर्याश सक्सेना और अंजलि शुक्ला का संबोधन था, जिन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता के महत्व, उपेक्षा से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों और महिलाओं के प्रति भेदभाव को बढ़ावा देने वाले मिथकों को दूर करने की तत्काल आवश्यकता पर खुलकर बात की। इस सत्र में तथ्यों, व्यक्तिगत अंतर्दृष्टि और प्रेरक मार्गदर्शन का समावेश था, जिसने छात्राओं को गहराई से प्रभावित किया।कार्यक्रम का संचालन छात्रा स्वयंसेवकों ओजस्विनी, कांची, सुंदरम, अनमता, प्राची, वृंदा, वंशिका और आदर्श ने सुचारू रूप से किया। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. और एक स्वस्थ और अधिक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए जागरूकता, शिक्षा और स्वच्छता तक पहुँच आवश्यक है। सभी उपस्थित लोगों को सैनिटरी नैपकिन के निःशुल्क पैकेट वितरित किए गए। मिशन शक्ति मानसिकता बदलने और युवा महिलाओं को अपनी भलाई की जिम्मेदारी लेने के लिए सशक्त बनाने में योगदान देता है।

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दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने दुबई में आईआईएम अहमदाबाद के पहले विदेशी परिसर का उद्घाटन किया

दुबई के क्राउन प्रिंस, उप-प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री, महामहिम शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने आज दुबई में भारत के प्रमुख बिज़नेस स्कूल, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (आईआईएमए) के पहले विदेशी परिसर का उद्घाटन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान और संयुक्त अरब अमीरात के कार्यवाहक उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री डॉ. अब्दुल रहमान अब्दुल मन्नान अल अवार भी इस समारोह में उपस्थित थे।

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इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री प्रधान ने कहा कि दुबई के क्राउन प्रिंस, शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम द्वारा आईआईएम अहमदाबाद दुबई परिसर का उद्घाटन किया जाना हमारे लिए बेहद सम्मान की बात है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप भारतीय शिक्षा के वैश्वीकरण की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आईआईएम अहमदाबाद दुबई परिसर भारत की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा को दुनिया तक पहुंचाएगा। दुबई ने आज आईआईएम अहमदाबाद अंतर्राष्ट्रीय परिसर की मेजबानी करके ‘भारतीय भावना, वैश्विक दृष्टिकोण’ के सिद्धांत को साकार करने के लिए एक आदर्श मंच प्रदान किया है। उन्होंने भारत-यूएई ज्ञान सहयोग में एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ने के लिए शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में भारत के राजदूत श्री संजय सुधीर, भारत के महावाणिज्यदूत श्री सतीश सिवन, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष श्री पंकज पटेल, आईआईएमए के निदेशक प्रोफेसर भरत भास्कर और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। क्राउन प्रिंस शेख हमदान के साथ संयुक्त अरब अमीरात के गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे, जिनमें कैबिनेट मामले मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल्ला अल गर्गावी; अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम बिन्त इब्राहिम अल हाशिमी; शिक्षा मंत्री सारा बिन्त यूसुफ अल अमीरी; अर्थव्यवस्था और पर्यटन विभाग की महानिदेशक हेलाल सईद अल मारी और ज्ञान एवं मानव विकास प्राधिकरण की महानिदेशक आयशा अब्दुल्ला मीरान शामिल थे।

श्री धर्मेन्‍द्र प्रधान ने संयुक्त अरब अमीरात के कार्यवाहक उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री, डॉ. अब्दुलरहमान अब्दुलमन्नान अल अवार के साथ भी बैठक की। दोनों पक्षों ने उच्च शिक्षा में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की और ज्ञान के संबंधों को और परिपुष्‍ट करने के साथ-साथ ज्ञान, नवाचार और अनुसंधान को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख घटक बनाने पर सहमति व्यक्त की। महत्वपूर्ण और उभरते क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान, क्षमता निर्माण और द्विपक्षीय सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई।

श्री प्रधान ने दुबई में भारतीय शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए योगदान, विशेष रूप से पारस्परिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक संपर्क को बढ़ावा देने और साथ ही संयुक्त अरब अमीरात में और अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले भारतीय संस्थानों की स्थापना के लिए दिए गए समर्थन की सराहना के लिए डॉ. अब्दुलरहमान अल अवार का धन्यवाद किया। मंत्री महोदय ने कहा कि भारत प्रतिभाओं का एक वैश्विक केंद्र है और संयुक्त अरब अमीरात एक वैश्विक आर्थिक केंद्र है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात दोनों ही लोगों के बीच संपर्क को मज़बूत करने और अपने सदियों पुराने और मज़बूत संबंधों को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

बाद में, धर्मेन्‍द्र प्रधान ने दुबई स्थित मणिपाल विश्वविद्यालय परिसर का भी दौरा किया, जहां उन्होंने सिम्बायोसिस, बिट्स पिलानी, एमआईटी, एमिटी आदि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के प्राचार्यों के साथ एक गोलमेज चर्चा की। श्री प्रधान ने यूएई के शैक्षणिक दृष्टिकोण और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्‍होंने शोध मूल्य श्रृंखला को शोध पत्रों के प्रकाशन से आगे बढ़ाकर उत्पादीकरण और विपणन की ओर ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता के मानचित्र पर ब्रांड इंडिया को मजबूत बनाने पर भी सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

श्री प्रधान ने संयुक्त अरब अमीरात में 109 भारतीय पाठ्यक्रम वाले स्कूलों के प्रधानाचार्यों से भी वार्तालाप किया। अन्य जीसीसी देशों और सभी वैश्विक सीबीएसई स्कूलों के सीबीएसई स्कूलों के प्रधानाचार्य वर्चुअल माध्यम से इसमें शामिल हुए। इस अवसर पर, श्री प्रधान ने जीसीसी देशों के सीबीएसई स्कूलों में 12 अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने की घोषणा की, ताकि छात्रों में व्यावहारिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) परियोजनाओं के माध्यम से वैज्ञानिक जिज्ञासा और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा सके।

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दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में आयोजित एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम में, श्री प्रधान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए “एक पेड़ मां के नाम 2.0” अभियान के अंतर्गत, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रीय वृक्ष- ग़फ़ का एक पौधा लगाया। श्री प्रधान ने कहा कि यह संयुक्त अरब अमीरात में स्थिरता और शांति का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक है। वाणिज्य दूतावास में स्थित ग़फ़ वृक्ष भारत-यूएई मैत्री का एक सदाबहार प्रमाण भी रहेगा।

इस यात्रा ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थायी मित्रता की पुष्टि की, जो पारस्परिक सम्मान, साझा आकांक्षाओं और शिक्षा के माध्यम से भावी पीढ़ियों को सशक्त बनाने के दृष्टिकोण पर आधारित है। श्री प्रधान ने सभी हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक गतिशील और समावेशी शैक्षिक पारिस्थितिकी व्‍यवस्‍था को आकार देने में निरंतर सहयोग की आशा व्यक्त की।

 

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आज के बदलते समय में रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए उद्योग आधारित अनुसंधान एवं विकास संस्थान-अकादमिक सहयोग काफी महत्वपूर्ण है: रक्षा सचिव

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आज के लगातार परिवर्तित होते समय में सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक एवं निजी उद्योग, डीआरडीओ जैसे अनुसंधान संस्थानों और शिक्षाविदों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है। रक्षा सचिव 12 सितंबर, 2025 को महाराष्ट्र के पुणे में दक्षिणी कमान द्वारा आयोजित ‘प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का तालमेल’ विषय पर उद्घाटन सत्र स्ट्राइड 2025 सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रौद्योगिकी व्यवधान न केवल युद्ध की प्रकृति को बदल रहा है, बल्कि रक्षा उद्योग के व्यवसाय को भी परिवर्तित कर रहा है, उन्होंने सभी हितधारकों से नवीनतम तकनीकी रुझानों से अवगत रहने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

रक्षा सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी श्रेष्ठता एवं औद्योगिक सामर्थ्य अक्सर युद्ध के परिणाम को निर्धारित करते हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता व्यक्त है कि रक्षा उद्योग हमारे विनिर्माण क्षेत्र के बाकी हिस्सों के साथ गति से बढ़े ताकि विकसित भारत तथा वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन नवाचार के क्षेत्र में एक विकसित राष्ट्र बनने, भारत की स्टार्टअप संस्कृति को विस्तार देने, हमारे औद्योगिक आधार को व्यापक बनाने, देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी बढ़ाने व रोजगार सृजन तथा प्रौद्योगिकी के दोहरे उपयोग से होने वाले लाभों के व्यापक मुद्दे के लिए महत्वपूर्ण है।

राजेश कुमार सिंह ने बताया कि चल रहे संघर्षों के परिणामस्वरूप दुनिया भर में प्रतिस्पर्धी लोकलुभावनवाद एवं आर्थिक संरक्षणवाद को बढ़ावा मिला है और साथ ही आर्थिक विखंडन, बहुपक्षीय संस्थाओं का पतन तथा राष्ट्रवाद की बढ़ती लहर भी देखी गई है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “हमें अपनी सॉफ्ट पावर को सहयोग देने की आवश्यकता है, क्योंकि हार्ड पावर अधिकाधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।”

रक्षा सचिव ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्यौरा दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश तकनीकी दौड़ में आगे रहे। इन उपायों में रक्षा खरीद मैनुअल 2009 और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में संशोधन करना शामिल है ताकि उन्हें अधिक गतिशील, सक्रिय, कम प्रक्रिया-भारी तथा परिणाम पर अधिक केंद्रित बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र और स्टार्टअप के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करने, जमीनी स्तर पर नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा प्रतिस्पर्धी बोली सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इसका उद्देश्य भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को व्यापक और विविध बनाना है।

राजेश कुमार सिंह ने रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने और इसे आत्मनिर्भर बनाने में निजी उद्योग की भूमिका की सराहना करते हुए उनसे अनुसंधान एवं विकास तथा विनिर्माण क्षमता में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में तब तक उस स्तर का नवाचार और क्षमता नहीं आ सकते हैं, जिसकी सशस्त्र सेनाओं को आवश्यकता है, जब तक कि निजी क्षेत्र में आगे रहने तथा निवेश करने की इच्छाशक्ति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि रक्षा एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें आपको छिटपुट आधार पर ऑर्डर मिलते हैं। राजेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि हमारे पास प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग की ताकत है, तो हम घरेलू तथा निर्यात ऑर्डर के संयोजन के माध्यम से खुद को बनाए रखने में सक्षम होंगे।

दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने अपने संबोधन में रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों के जाने-माने विशेषज्ञ, पूर्व सैनिक, विद्वान, डीआरडीओ, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी उद्योग और शिक्षा जगत के प्रतिनिधि एक साथ आए, जिसका उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास, उत्पादन, रखरखाव तथा नवाचार को शामिल करते हुए एक स्वदेशी डिफेंस इकोसिस्टम के लिए रोडमैप तैयार करना था। सेमिनार में निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर आकर्षक पैनल चर्चाएं हुईं:

  • रिवर्स इंजीनियरिंग और शैक्षणिक अनुसंधान के लिए उद्योग वित्तपोषण के माध्यम से विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को तेजी से आगे बढ़ाना।
  • स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने में डीआरडीओ की भूमिका को सशक्त करना।
  • निजी उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और शिक्षा जगत के बीच बेहतर सहयोग के माध्यम से रक्षा विनिर्माण विकास में तेजी लाना।

इस कार्यक्रम के एक भाग के रूप में एक उपकरण प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें अत्याधुनिक स्वदेशी नवाचारों को प्रदर्शित किया गया और भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं के निर्माण की दिशा में सहयोग तथा साझेदारी को बढ़ावा दिया गया।

सेमिनार में आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने, हितधारकों के बीच तालमेल को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर राष्ट्रीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए दक्षिणी कमान की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

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निफ्ट पटना और एबीएफआरएल ने केंद्रीय वस्‍त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह की उपस्थिति में स्वयं सहायता समूह जीविका की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) पटना ने आज केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह की मौजूदगी में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उद्योग कौशल प्रदान कर बिहार के बढ़ते वस्त्र क्षेत्र में रोजगार के अवसर दिलाना है, ताकि उनके जीवन में सकारात्‍मक बदलाव आए।

गिरिराज सिंह ने साझेदारी के महत्व का उल्‍लेख करते हुए कहा कि निफ्ट पटना ने बेगूसराय में जीविका दीदियों के लिए पहले ही कई सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं, जिससे उनके सिलाई कौशल और आय क्षमता में बढ़ोतरी हुई है। उन्‍होंने कहा कि इस समझौता ज्ञापन से निफ्ट विस्तार केंद्र में प्रशिक्षित जीविका दीदियों को अब एबीएफआरएल कारखाने में नौकरियां मिल पाएगी। शुरू में, आसपास के क्षेत्र की 3.5 लाख महिलाओं को लाभ मिलेगा और भविष्य में, निकटवर्ती जिलों की महिलाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

समझौता ज्ञापन सहयोग के तहत, जीविका दीदियों के नाम से पहचाने जाने वाली स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को निफ्ट पटना में परिधान निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और मशीनरी संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को बेगूसराय जिले में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) की आगामी वस्त्र निर्माण इकाई में रोजगार देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे इन महिलाओं के कौशल विकास से लेकर सुरक्षित आजीविका तक का सुव्यवस्थित मार्ग तैयार होगा।

जीविका दीदियां, बिहार के जीविका कार्यक्रम की रीढ़ हैं, जिसे भारत सरकार और विश्व बैंक के सहयोग से बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (बीआरएलपीएस) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में पिछले कुछ वर्षों में  1.4 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी है, जिससे उन्हें कम राशि के वित्त प्राप्त करने, घरेलू आय में वृद्धि और सामाजिक सशक्तिकरण में मदद मिली है। यह समझौता ज्ञापन जीविका दीदियों को वस्‍त्र और फैशन क्षेत्र में रोज़गार के औपचारिक अवसरों से जोड़ता है, जिससे उनकी भूमिका स्थानीय उद्यमों से विस्‍तारित होकर मुख्यधारा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था तक पहुंचती है।

भारत की फ़ैशन और वस्‍त्र क्षेत्र की अग्रणी खुदरा कंपनियों में से एक, एबीएफआरएल के साथ साझेदारी सुनिश्चित करती है कि उसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले कौशल आधुनिक वस्त्र उत्पादन की मांग पूरा करेगी। निफ्ट की शैक्षणिक विशेषज्ञता को एबीएफआरएल की उद्योग आवश्यकताओं से जोड़ने संबंधी यह पहल शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग का सहक्रियात्मक मॉडल भी प्रस्‍तुत करती है। यह मॉडल पूरे भारत में  विशेषकर महिला समूह और ग्रामीण आजीविका स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ वाले राज्‍यों में भविष्य की साझेदारियों के लिए एक खाका प्रस्‍तुत करेगा।

तत्काल रोज़गार प्रदान करने के अलावा, इस कार्यक्रम से सामाजिक और आर्थिक दूरगामी परिणाम की उम्मीद है। महिलाओं को आजीविका के स्थिर साधन प्रदान कर  यह उन्‍हें अधिक वित्तीय स्वतंत्रता, घरों में निर्णय लेने की बेहतर शक्ति और सम्मान बढा़एगा। साथ ही, बेगूसराय में एबीएफआरएल की विनिर्माण इकाई की स्थापना से बिहार के औद्योगिक विकास में मदद मिलेगी,  जिससे महिलाओं के साथ ही स्थानीय स्‍तर पर कार्यबल के लिए व्‍यापक अवसर उत्‍पन्‍न होंगे।

यह समझौता ज्ञापन एक ऐतिहासिक पहल है जो समावेशी और सतत विकास लक्ष्‍य को पूरा करने के सरकार के दृष्टिकोण, शैक्षणिक विशेषज्ञता और उद्योग नेतृत्व को समेकित करता है। यह दर्शाता है कि कौशल विकास, रोज़गार आश्वासन के साथ जुड़कर, जीवन में कैसे बदलाव ला सकता है। यह विकास का ऐसा मॉडल दे सकता है, जिसे देशभर में मापा और दोहराया जा सके।

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दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज में नशा मुक्त युवा – विकसित भारत पर संगोष्ठी विषय पर संगोष्ठी आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत “नशा मुक्त युवा – विकसित भारत” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में विद्यार्थियों ने नशा मुक्ति के लिए सामूहिक शपथ ग्रहण की। भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के राष्ट्रीय सेवा योजना क्षेत्रीय निदेशालय से प्रायोजित और उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश शासन द्वारा समर्थित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे से होने वाले शारीरिक मानसिक और सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक करना रहा। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के राष्ट्रीय सेवा योजना विभाग द्वारा निर्देशित इस कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिनका उद्देश्य आज के समय में युवाओं के बीच तेजी से फैल रहे नशे की लत को जड़ से समाप्त करना है। कार्यक्रम का संयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा किया गया जिसमें कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने छात्राओं को नशे से होने वाले व्यापक नुकसान एवं उससे बचाव के उपायों पर विस्तार पूर्वक जानकारियां दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ अंजना श्रीवास्तव तथा समस्त वॉलिंटियर्स का विशेष योगदान रहा।

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सेन कॉलेज में इनोवेशन सेल के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम “संकल्प: हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वोमेन” विषय पर कार्यशाला आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज में इनोवेशन सेल के तत्वावधान में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम संकल्प: हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वोमेन के १० दिवसीय अभियान के अंतर्गत किया

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चरणों में श्रद्धा पूर्वक पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर प्रबन्ध तंत्र के सचिव श्री पी के सेन, प्राचार्या प्रोफ़ेसर डॉ सुमन तथा राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती अनीता गुप्ता ने किया ।एंटी क्राइम ब्यूरो के चेयरमैन एडवोकेट रिजवान अली खान , महिला थाने की एस एच ओ कमर सुल्ताना, महिला कल्याण विभाग की काउंसलर मनोवैज्ञानिक डॉ राबिया सुल्ताना,श्रम विभाग तथा यूनिसेफ के टेक्निकल रिसोर्स पर्सन प्रतीक श्रीवास्तव,महिला कल्याण की जिला कोऑर्डिनेटर मोनिका यादव, महिला कल्याण विभाग की जेंडर स्पेशलिस्ट शैल शुक्ला तथा रागिनी श्रीवास्तव ने छात्राओं को अपने अपने विषय की जानकारी देते हुए हौसला बढ़ाया और बताया जीवन के संघर्ष में सरकार और महिला कल्याण मंत्रालय विभिन्न प्रकार से सहयोग के लिए तत्पर है । सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा एवं सहायता के लिये फ्री विधिक सहायता, पुलिस सहायता और अन्य सहायता योजनाएं संचालित की हैं जो तभी कारगर होंगी जब आपको उसकी जानकारी हो ।कार्यक्रम में १०० से अधिक छात्राओं ने जानकारी प्राप्त कर स्वयं का संबल बढ़ाया और भविष्य में स्वयं एवं अन्य महिलाओं की सुरक्षा में भागीदारी का संकल्प लिया ।कार्यक्रम में छात्राओं के अतिरिक्त महाविद्यालय की समस्त शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया ।डॉ प्रीति सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया और प्रो रेखा चौबे , प्रो गार्गी यादव प्रो अलका टंडन,कैप्टन ममता अग्रवाल डा रचना निगम डॉ शुभा,डॉ अनामिका और डॉ समीक्षा सिंह ने सक्रिय योगदान दिया।

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व्यक्तित्व विकास हेतु सॉफ्ट स्किल्स पर दो दिवसीय कार्यशाला” 10 और 11 सितंबर 2025”

भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर में लैंगिक संवेदनशीलता एवं महिला विकास प्रकोष्ठ के अंतर्गत, 10 और 11 सितंबर को सर्वपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज सभागार में “व्यक्तित्व विकास हेतु सॉफ्ट स्किल्स पर दो दिवसीय कार्यशाला” संपन्न।कार्यशाला के पहले दिन व्यावसायिक और व्यक्तिगत सफलता के लिए छात्रों में संचार कौशल को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। सत्र का विषय था “बोलें, नेतृत्व करें और प्रेरित करें: नेतृत्व और प्रबंधन के लिए संचार कौशल में निपुणता प्राप्त करें।”

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि वक्ता प्रो. नीता जैन, प्राचार्य विनय जे. सेबेस्टियन, उप-प्राचार्य प्रो. श्वेता चांद और जीएसडब्ल्यूडीसी समन्वयक प्रो. विभा दीक्षित द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद आदरणीय प्राचार्य ने अपने संबोधन में करियर की सफलता और व्यक्तिगत विकास के लिए प्रभावी संचार के महत्व पर अपने विचार साझा किए। जीएसडब्ल्यूडीसी समन्वयक, विभा दीक्षित ने सॉफ्ट स्किल कार्यशाला के विषय और उद्देश्यों तथा छात्रों के लिए इसके अपेक्षित परिणामों के बारे में जानकारी दी। मुख्य सत्र सीएसजेएम विश्वविद्यालय और क्राइस्ट चर्च कॉलेज की पूर्व प्राचार्य और डीन प्रो. नीता जैन ने दिया, जिन्होंने व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास में प्रभावी संचार, आत्मविश्वास निर्माण और नेतृत्व के महत्व पर बहुमूल्य अंतर्दृष्टि साझा की। उन्होंने इंटरैक्टिव गतिविधियों और रोल-प्ले सत्रों के माध्यम से टीम निर्माण, निर्णय लेने और समस्या-समाधान जैसे नेतृत्व और प्रबंधन कौशल पर विस्तार से बताया। डॉ. रुक्मणी देवी ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा और मनीषी त्रिवेदी ने प्रभावी ढंग से सत्र का संचालन किया।

कार्यशाला में काफी संख्या में छात्रों और शिक्षकों ने बहुत उत्साह से सहभागिता की और आत्म-अभिव्यक्ति और नेतृत्व रणनीतियों के लिए आयोजित व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लिया। उपस्थित कुछ संकाय सदस्यों में प्रोफेसर सुजाता चतुर्वेदी, ज्योत्सना लाल, मीतकमल, एस.पी. सिंह, फिरदौस कटियार, आशीष ओमर और छात्र टीम में वर्षा, छवि, सृष्टि और सुप्रिया शामिल हुए

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