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लोकसभा ने संसद में जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2023 पारित किया

जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2023 आज लोकसभा में पारित हो गया।

विधेयक पहली बार 22 दिसंबर 2022 को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद, इसे संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया था। जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2022 पर संयुक्त समिति ने विधायी विभाग और कानूनी मामलों के विभाग के साथ सभी 19 मंत्रालयों/विभागों के साथ विस्तृत चर्चा की। समिति ने 09.01.2023 और 17.02.2023 के बीच 9 बैठकों की श्रृंखला के माध्यम से विधेयक की खंड-दर-खंड जांच की। समिति ने अंततः 13.03.2023 को आयोजित बैठक में अपनी रिपोर्ट को स्वीकृत किया।

समिति की रिपोर्ट क्रमशः 17 मार्च 2023 और 20 मार्च 2023 को राज्यसभा और लोकसभा के समक्ष रखी गई है। समिति ने विधेयक में कुछ और संशोधनों की अनुशंसा की। समिति ने 7 सामान्य अनुशंसा भी कीं, जिनमें से 6 अनुशंसा को सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।

जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2023 के माध्यम से, 19 मंत्रालयों/विभागों द्वारा प्रशासित 42 केंद्रीय अधिनियमों में कुल 183 प्रावधानों को अपराध मुक्त करने का प्रस्ताव किया जा रहा है। निम्नलिखित तरीके से गैर-अपराधीकरण हासिल करने का प्रस्ताव है: –

(i) कुछ प्रावधानों में कारावास और/या जुर्माना दोनों को हटाने का प्रस्ताव है।

(ii) कारावास को हटाने और कुछ प्रावधानों में जुर्माना बरकरार रखने का प्रस्ताव है।

(iii) कारावास को हटाने और कुछ प्रावधानों में जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव है।

(iv) कुछ प्रावधानों में कारावास और जुर्माने को दंड में बदलने का प्रस्ताव है।

(v) अपराधों के शमन को कुछ प्रावधानों में शामिल करने का प्रस्ताव है।

उपरोक्त के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए, विधेयक ऐसे उपायों का प्रस्ताव करता है जैसे (ए) किए गए अपराध के अनुरूप जुर्माने और जुर्माने का व्यावहारिक संशोधन; (बी) निर्णायक अधिकारियों की स्थापना; (सी) अपीलीय प्राधिकारियों की स्थापना; और (डी) जुर्माने और दंड की मात्रा में आवधिक वृद्धि

यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि सजा की डिग्री और प्रकृति अपराध की गंभीरता के अनुरूप हो।

संशोधन विधेयक के लाभ इस प्रकार बताए गए हैं:

1. संशोधन विधेयक आपराधिक प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने और यह सुनिश्चित करने में योगदान देगा कि नागरिक, व्यवसाय और सरकारी विभाग मामूली, तकनीकी या प्रक्रियात्मक कमी के लिए कारावास के डर के बिना काम करें।

2. किसी अपराध के दंडात्मक परिणाम की प्रकृति अपराध की गंभीरता के अनुरूप होनी चाहिए। यह विधेयक किये गये अपराध/उल्लंघन की गंभीरता और निर्धारित सजा की गंभीरता के बीच संतुलन स्थापित करता है। कानून की कठोरता को खोए बिना, प्रस्तावित संशोधन व्यवसायों और नागरिकों द्वारा कानून का पालन सुनिश्चित करते हैं।

3. तकनीकी/प्रक्रियात्मक गलती और गौण दोष के लिए निर्धारित आपराधिक परिणाम, न्याय वितरण प्रणाली को अवरुद्ध करते हैं और गंभीर अपराधों पर निर्णय को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। विधेयक में प्रस्तावित कुछ संशोधन, जहां भी लागू और व्यवहार्य हो, उपयुक्त प्रशासनिक न्यायनिर्णयन प्रणाली प्रस्तुत करने के लिए हैं। इससे न्याय प्रणाली पर भारी दबाव को कम करने, लंबित मामलों को कम करने और अधिक कुशल और प्रभावी न्याय वितरण में मदद मिलेगी।

4. नागरिकों और कुछ श्रेणियों के सरकारी कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले प्रावधानों को अपराधमुक्त करने से उन्हें मामूली उल्लंघनों के लिए कारावास से डरे बिना जीवन जीने में मदद मिलेगी।

5. इस कानून का अधिनियमन कानूनों को तर्कसंगत बनाने, बाधाओं को दूर करने और व्यवसायों के विकास को बढ़ावा देने की यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह कानून विभिन्न कानूनों में भविष्य के संशोधनों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में काम करेगा। एक समान उद्देश्य के साथ विभिन्न कानूनों में समेकित संशोधन से सरकार और व्यवसायों दोनों के लिए समय और लागत की बचत होगी।

42 अधिनियमों की मंत्रालय/विभागवार सूची

(जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2023 के अंतर्गत कवर)

क्रम संख्या अधिनियमों का नाम मंत्रालयों/विभागों के नाम
कृषि उपज (ग्रेडिंग और मार्किंग) अधिनियम, 1937 कृषि एवं किसान कल्याण विभाग
समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1972 वाणिज्य विभाग
रबर अधिनियम, 1947
चाय अधिनियम, 1953
मसाला बोर्ड अधिनियम, 1986
कानूनी माप विज्ञान अधिनियम, 2009 उपभोक्ता मामले विभाग
छावनी अधिनियम 2006 रक्षा विभाग
सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 आर्थिक कार्य विभाग
उच्च मूल्यवर्ग के बैंकनोट (विमुद्रीकरण) अधिनियम, 1978
सार्वजनिक ऋण अधिनियम, 1944
आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
भारतीय वन अधिनियम, 1927
सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम, 1994
जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम अधिनियम, 1961 वित्तीय सेवाएँ विभाग
फैक्टरिंग विनियमन अधिनियम, 2011
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981
राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
खाद्य निगम अधिनियम, 1964 खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग
भण्डारण निगम अधिनियम, 1962
औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006
फार्मेसी अधिनियम, 1948
मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय
प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
सिनेमैटोग्राफी अधिनियम, 1952
केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995
मर्चेंट शिपिंग अधिनियम, 1958 पत्तन,पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 डाक विभाग
बॉयलर अधिनियम, 1923 उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग
कॉपीराइट अधिनियम, 1957
वस्तु भौगोलिक संकेत अधिनियम, 1999
उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951
पेटेंट अधिनियम, 1970
ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999
रेलवे अधिनियम, 1989 रेलवे मंत्रालय
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 राजस्व विभाग
सांख्यिकी संग्रहण अधिनियम, 2008 सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय

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भारतीय फुटवियर और चमड़ा उद्योग विदेशी मुद्रा का प्रमुख अर्जक है, यह 4.5 मिलियन लोगों को रोजगार देता है, जिनमें 40 प्रतिशत महिलाएं भी शामिल हैं: पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय फुटवियर व चमड़ा उद्योग न केवल विदेशी मुद्रा का एक प्रमुख अर्जक है, बल्कि श्रम प्रधान क्षेत्र होने के कारण यह लगभग यह 4.5 मिलियन लोगों को रोजगार देता है, जिनमें 40 प्रतिशत महिलाएं भी शामिल हैं।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फुटवियर मेला 2023 (आईआईएफएफ) को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत में विश्व का सबसे बड़ा और सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला फुटवियर निर्माता बनने की क्षमता निहित है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत विश्व में चमड़े से बने परिधानों का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक, जीन बनाने के सामान और घोड़ो के साजो सामान का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातकर्ता तथा चमड़े उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक है। श्री गोयल ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि इस क्षेत्र की उत्पादन वाली 95 प्रतिशत से अधिक इकाइयां वर्तमान में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) इकाइयां हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय फुटवियर को दुनिया भर में अलग पहचान दिलाने और विदेशी आकार-माप के प्रचलन पर निर्भरता कम करने के लिए देसी आकार व माप के फुटवियर बाजार में उतारे जाएंगे। उन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए उद्योगपतियों को तकनीकी सहयोग तथा गैर-चमड़े के फुटवियर के संयुक्त उद्यमों के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का पता लगाने का सुझाव दिया, जिससे देश के निर्यात में वृद्धि हो और भारतीय उत्पादों के साथ घरेलू बाजार में बढ़ोतरी भी हो। गोयल ने महाराष्ट्र की कोल्हापुरी चप्पल और राजस्थान के मोजरी फुटवियर की सुंदरता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए आकर्षण का क्षेत्र होना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि फुटवियर क्षेत्र में भारत को सामर्थ्य स्थानीय कच्चे माल और इसके समृद्ध एवं विविध इतिहास से प्राप्त होती है। पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का भी जिक्र किया, जो ‘भारत मंडपम्’ – अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी-सह-सम्मेलन केंद्र परिसर जैसे भव्य बुनियादी ढांचे का निर्माण जैसी पहल करने में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि सितंबर 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी ‘भारत मंडपम’ में होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय फुटवियर और चमड़ा उद्योग के विकास कार्यक्रम के हिस्से के रूप में सरकार द्वारा जांच एवं परीक्षण सुविधाएं शुरू की जाएंगी। उन्होंने चमड़े उत्पाद व्यवसाय करने में आसानी के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें कॉर्पोरेट अपराधों को अपराध मुक्त करना, अनुपालन बोझ को कम करना, सभी अनुमोदनों के लिए एक राष्ट्रीय सिंगल विंडो बनाना और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार करना आदि शामिल हैं। गोयल ने सभी हितधारकों से गुणवत्ता एवं स्थिरता, पर्यावरण-अनुकूल कार्य प्रणालियों, अपशिष्ट प्रबंधन और विद्युत ऊर्जा के लिए नवीकरणीय स्रोतों की खोज पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यवसाय का विस्तार करने का आग्रह किया। उन्होंने विस्तृत और बेहतर विकास के लिए नवीन डिजाइनों के रूप में प्रतिस्पर्धात्मकता को अपनाने पर बल दिया। केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वैश्विक बाजार बहुत प्रतिस्पर्धी है। उन्होंने देश के निर्यातकों से नवीन व टिकाऊ उत्पादों को विकसित करने का आग्रह किया, जिनकी दुनिया में अत्यधिक तथा लगातार बढ़ती हुई मांग है। गोयल ने कहा कि हमें मूल्य श्रृंखला में आगे बढ़ने के लिए न केवल अपनी डिजाइन क्षमताओं को और बेहतर करने की जरूरत है, बल्कि उत्पादन को विस्तार देने तथा नवीन उत्पादों को बाजार में उतारने के लिए अधिक निवेश एवं नई प्रौद्योगिकी लाने की भी आवश्यकता है। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि सीएलआरआई, एफडीडीआई और निफ्ट जैसे संस्थान बाजार के बदलते रुझानों व आवश्यकताओं के अनुरूप नए उत्पादों तथा प्रौद्योगिकियों को विकसित करने में उद्योग जगत के साथ मिलकर कार्य करेंगे।

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पीएम किसान सम्मान निधि की 14वीं किस्त में 17 हजार करोड़ रु. किसानों के खातों में जमा

प्रधानमंत्री मोदी ने आज देश के किसानों की आय सहायता के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 14वीं किस्त के रूप में 17 हजार करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में जमा किए। सीकर में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा आयोजित वृहद कार्यक्रम में श्री मोदी ने 1.25 लाख पीएम किसान समृद्धि केंद्र (पीएम-केएसके) राष्ट्र को समर्पित किए और सल्फर कोटेड यूरिया (यूरिया गोल्ड) लांच की। साथ ही, ओपन नेटवर्क फार डिजिटल कामर्स (ओएनडीसी) पर 1600 से अधिक कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के ऑनबार्डिंग का शुभारंभ किया। राजस्थान को एक साथ अनेक सौगातें प्रदान करते हुए प्रधानमंत्री ने 5 मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन व 7 मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास किया तथा 6 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों व एक केंद्रीय विद्यालय का शुभारंभ भी किया। समारोह में राज्यपाल श्री कलराज मिश्र, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर, रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मांडविया, जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी भी मौजूद थे। समारोह में, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि आज शुरू किए 1.25 लाख पीएम किसान समृद्धि केंद्र किसानों की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेंगे। इन्हें किसानों की जरूरतों के लिए वन-स्टॉप शॉप में विकसित किया जा रहा है। गांव व ब्लॉक लेवल पर इन केंद्रों से करोड़ों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। यहां किसानों को बीज, खाद, खेती के औजार व अन्य मशीनें भी मिलेगी। ये केंद्र खेती से जुड़ी हर आधुनिक जानकारी किसानों को देंगे। वर्षांत से पहले ऐसे और 1.75 लाख केंद्र खोले जाएंगे। ओएनडीसी पर एफपीओ की भागीदारी का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि इससे किसानों के लिए देश के किसी भी हिस्से से उपज को बाजार तक ले जाना आसान हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र की मौजूदा सरकार किसानों के दर्द और जरूरतों को समझती है व किसानों के खर्चें कम करने और जरूरत के समय उनका समर्थन करने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है। पिछले 9 वर्षों में बीज से बाज़ार तक नई व्यवस्था का निर्माण किया गया हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के माध्यम से करोड़ों किसान मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में ज्ञान के आधार पर इष्टतम निर्णय ले रहे हैं। मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि का जिक्र करते हुए कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी योजना है जिसमें सीधे किसानों के बैंक खाते में धनराशि ट्रांसफर की जाती है। आज की 14वीं किस्त को मिला लें तो अब तक 2.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं जिससे किसानों को विभिन्न खर्चों को कवर करने में फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि किसानों का सामर्थ्य, किसानों का परिश्रम, मिट्टी से भी सोना निकाल देता है इसलिए सरकार किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। हमारी सरकार कैसे अपने किसान भाइयों के पैसे बचा रही है, इसका एक उदाहरण यूरिया की कीमतें भी हैं। हमारी सरकार ने कोरोना और रूस-यूक्रेन युद्ध का असर किसानों पर नहीं पड़ने दिया। आज देश में यूरिया की जो बोरी 266 रु. में देते हैं, यहीं बोरी पाकिस्तान में करीब 800 रु. में मिलती है, बांग्लादेश में 720 रु. और चीन में 2100 रु. की मिलती है। अमेरिका में यूरिया की यही बोरी 3000 रु. से ज्यादा की मिल रही है। श्री मोदी ने कहा कि सरकार किसानों को यूरिया की कीमतों से परेशान नहीं होने देगी, जब कोई किसान यूरिया खरीदने जाता है तो उसे विश्वास होता है कि यह मोदी की गारंटी है। प्रधानमंत्री ने श्री अन्न को बढ़ावा देने हेतु उठाए कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे श्री अन्न के उत्पादन, प्रसंस्करण, निर्यात में वृद्धि हो रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत का विकास तभी संभव है, जब गांवों का विकास होगा इसीलिए सरकार गांवों में वो सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है जो सिर्फ शहरों में ही मिलती थी।” उन्होंने कहा कि दशकों तक गांवों में अच्छे स्कूलों, शिक्षा की कमी के कारण गांव-गरीब पीछे रह गए, अफसोसजनक रहा कि पिछड़े-आदिवासी समाज के बच्चों के पास सपनों को पूरा करने का कोई साधन नहीं था। श्री मोदी ने उल्लेख किया कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा के लिए बजट और संसाधन बढ़ाएं और एकलव्य आवासीय विद्यालय खोले जिससे आदिवासी युवाओं को काफी लाभ हुआ है। उन्होंने कहा, ”सफलता तभी बड़ी होती है, जब सपने बड़े हों।” कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने कहा कि आज एक बार फिर कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक अवसर है जब प्रधानमंत्री के कर-कमलों से इतनी सौगातें मिल रही है। उन्होंने इसके लिए करोड़ों किसानों की ओर से प्रधानमंत्री श्री मोदी का अभिनंदन करते हुए कहा कि देश इस बात का साक्षी है कि जबसे प्रधानमंत्री ने कार्यभार संभाला, उनकी प्राथमिकता रही है कि गांव-गरीब-किसानों की प्रगति हों, उनके घरों में खुशहाली आएं, कृषि क्षेत्र में उत्पादन-उत्पादकता बढ़ें, नवाचार बढ़ें, तकनीक का समर्थन हों, छोटे किसानों की ताकत व आमदनी बढ़ें, कृषि की अर्थव्यवस्था मजबूत हों और देश में योगदान दे सकें। इसके लिए मोदी जी के नेतृत्व में अनेक योजनाएं इन 9 वर्षों में शुरू हुई हैं। 2014-15 में कृषि मंत्रालय का बजट 23 हजार करोड़ रु. होता था जो अब करीब पांच गुना अधिक 1.25 लाख करोड़ रु. हो गया है, यह प्रधानमंत्री की प्राथमिकता का परिचय देता है। श्री तोमर ने कहा कि किसान कितना भी परिश्रम कर लें, सरकार की नीतियां अनुकूल हों, फिर भी उन्हें प्रकृति पर निर्भर रहना पड़ता है और जब प्रकृति का प्रकोप आता है तो फसलों को नुकसान होता ही है। इसके लिए श्री मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का बड़ा सुरक्षा कवच किसानों को दिया है। इस योजना अंतर्गत किसानों के अब तक 29 हजार करोड़ रु. प्रीमियम रूप में जमा हुए, जबकि 1.41 लाख करोड़ रु. मुआवजे के रूप में दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि पीएम किसान की किसी ने कल्पना नहीं की थी। श्री मोदी ने जब कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ना चाहिए तो इसके लिए किसानों, वैज्ञानिकों, बैंकों का आह्वान किया, तब अपना फर्ज भी निभाया व किसानों की आय में सालाना छह हजार रु. जोड़ने के लिए पीएम किसान योजना का सृजन किया। अब तक इस योजना से देशभर के 11 करोड़ किसानों के खातों में 2.42 लाख करोड़ रु. से अधिक की राशि बिना किसी बिचौलियों के जमा कराई जा चुकी है। एक कालखंड था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री कहा करते थे कि हम दिल्ली से 100 रु. भेजते हैं और गांव पहुंचते-पहुंचते 15 रु. बचते हैं। आज प्रधानमंत्री छह हजार रु. भेजते हैं, तो पूरी की पूरी राशि किसानों के खाते में जाती है, कहीं कोई बिचौलिया नहीं। आज पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 14वीं किस्त से सीकर के 2 लाख व राजस्थान के 57 लाख किसानों के खाते में 1278 करोड़ रुपये मिल जाएंगे। राजस्थान के किसानों को इस योजना के अंतर्गत अब तक 17 हजार करोड़ रु. से अधिक की राशि मिल चुकी है। इसी तरह, मध्य प्रदेश के 76 लाख व छत्तीसगढ़ के 20 लाख किसानों को स्कीम का लाभ मिल रहा है।

केंद्रीय मंत्री श्री मांडविया ने स्वागत भाषण में कहा कि देश में सभी वादों से ऊपर उठकर विकासवाद की एक नई राजनीतिक विचारधारा को प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बढ़ावा दिया है। प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण देश को तीन दशकों के अंतराल के बाद नई शिक्षा नीति मिली है, जिसकी सकारात्मक चर्चा न केवल देश बल्कि अन्य देशों में भी है। किसानों के जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रधानमंत्री ने हमेशा प्रयास किया है। पिछले 9 वर्षों में ऐसा कोई माह नहीं गया होगा, जब उन्होंने किसानों के कल्याण के लिए कोई कदम न उठाया हों।

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान भाई-बहन व राजस्थान के मंत्री, सांसद-विधायकगण उपस्थित थे, वहीं 732 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) के 100 से ज्यादा संस्थानों, 75 राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, पीएम किसान समृद्धि केंद्रों, 50 हजार प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों व 4 लाख सामान्य सेवा केंद्रों पर उपस्थित लाखों सदस्यों और करोड़ों किसानों के साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री डा. भारती प्रवीण व डा. एस.पी. सिंह बघेल सहित मंत्री, सांसद, विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि वर्चुअल जुड़े थे।

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प्रधानमंत्री मोदी ने पोर्ट ब्लेयर में वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया

नया एकीकृत टर्मिनल भवन 710 करोड़ रुपए की लागत से 40,837 वर्ग मीटर क्षेत्र में निर्मित किया गया है
  • नए एकीकृत टर्मिनल भवन में व्यस्त समय में 1200 यात्रियों की सेवा करने की क्षमता होगी
  • श्री ज्योतिरादित्य सिधिंया ने हवाई अड्डे परिसर के भीतर स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण किया

प्रधानमंत्री मोदी ने आज केंद्रीय नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य एम.सिंधिया, नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जनरल(सेवानिवृत्त) विजय कुमार सिंह,अंडमान और निकाबोर द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल(सेवानिवृत) डी.के.जोशी और नागरिक उड्डयन सचिव श्री राजीव बंसल की उपस्थिति में वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया।

हवाईअड्डे के नए टर्मिनल भवन का निर्माण 40,837 वर्ग मीटर क्षेत्र में 710 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। इसमें व्यस्त समय में 1200 यात्रियों की सेवा करने की क्षमता होगी,जो कि वर्तमान क्षमता से तीन गुना से अधिक होगा। मनमोहक अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की जैव विविधता से प्रेरणा लेकर पोर्ट ब्लेयर टर्मिनल बिल्डिंग का डिजाइन शंख के आकार का है,जो समुद्र और द्वीप की सुंदरता को दर्शाता है। टर्मिनल भवन का डिजाइन दिन के समय प्राकृतिक रुप से प्रकाशित रहने के लिए बनाया गया है। हवाई अड्डे में स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।

कार्यक्रम का आयोजन हाईब्रिड मोड में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिग के द्वारा रिमोट बटन दबा कर टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अन्य गणमान्य अतिथि भी हवाई अड्डे पर उपस्थित थे। नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राज्यमंत्री जनरल (सेवानिवृत) विजय कुमार तथा अन्य गणमान्य अतिथियों ने महान स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) को श्रद्धांजलि स्वरुप उनकी प्रतिमा का अनावरण किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री सिंधिया ने कहा कि अंडमान ओर निकोबार हमारे देश के सबसे खूबसूरत रत्नों में से है। भारतीय स्वतंत्रता इतिहास में यह कई अहम घटनाओं का साक्षी रहा है। वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जीव जंतुओ और वनस्पति की अतुलनीय जैव विविधता को दर्शाता है। शंख के आकार में डिजाइन किए गए हवाई अड्डे को दिन के समय बाहरी प्रकाश स्रोत की आवश्यकता नहीं होगी। निरंतरता के संबंध में हवाई अड्डे में दोहरी इंसुलेटिंग प्रणाली, एलईडी प्रकाश व्यवस्था,वर्षाजल संचयन और सौर जल संयंत्र की व्यवस्था की गई है।

 सिधिंया ने कहा कि इस हवाई अड्डे के अतिरिक्त केंद्र सरकार 150 करोड़ रुपए के निवेश से शिबपुर,कार निकोबार और कैंपबेल में 3 अतिरिक्त हवाई अड्डे और शहीद द्वीप,स्वराज द्वीप और पोर्ट ब्लेयर में 4 जल एयरोड्रोम की स्थापना करेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम सेवा,सुशासन और गरीब कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। आगामी समय में यह हवाई अड्डा रोजगार,शिक्षा और निवेश का एक मार्ग बनेगा।

पोर्ट ब्लेयर हवाई अड्डे के नाम से भी जाने जाने वाला वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा,अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में पोर्ट ब्लेयर से दो किलोमीटर दक्षिण दिशा में स्थित है। प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के नाम पर निर्मित यह हवाई अड्डा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का एकमात्र व्यवसायिक हवाई अड्डा है। दक्षिण अंडमान द्वीप के पूर्वी तट पर स्थित पोर्ट ब्लेयर 500 से अधिक प्राचीन द्वीपो का मार्ग है। यह एक उभरता हुआ व्यवसायिक केंद्र है और यहां अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सरकारी कार्यालय भी स्थित हैं। पोर्ट ब्लेयर, जल पर आधारित स्नोर्कलिंग,स्कूबा डाईविंग,स्कूबा क्रूज गतिविधि के साथ क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति की झलक भी प्रदर्शित करता है।

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यूसीसी कानून या चुनावी मुद्दा….

सभी राजनीतिक दलों ने 2024 की लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है और गठबंधन की गठजोड़ जारी है। इस चुनावी जोर आजमाइश के माहौल में भाजपा ने यूनिफार्म सिविल कोड का कार्ड चल दिया है। 2019 में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। समान नागरिक संहिता मतलब जिसका उद्देश्य हर धर्म रीति-रिवाजों और परंपराओं पर आधारित व्यक्तिगत कानूनों को सभी के लिए एक समान करना है।

यूं तो भारत विविधताओं वाला देश है अनेक धर्म, जातियां उनकी संस्कृति, परंपरा अलग-अलग है। ऐसे में समान कानून वाली बात लोग अपनाएंगे इसमें जरा संशय है। समान नागरिक संहिता कानून पर जब भी विवाद होता है तो यह विवाद अन्य धर्मों के बजाय हिंदू और मुस्लिम समुदाय पर आकर टिक जाता है। सबसे पहले 1835 में ब्रिटिश सरकार ने समान नागरिक संहिता पर का मुद्दा उठाया था फिर उसके बाद 1948 में अंबेडकर जी ने इसकी चर्चा की थी लेकिन समान  राय ना होने के कारण यह विवादित ही रहा। दरअसल भारत में यह मसला कानूनी नहीं रहा बल्कि सामाजिक और राजनीतिक तौर पर बेहद संवेदनशील हो गया है।
अल्पसंख्यक समुदाय इसे अपने धर्म के ऊपर हमला मान रहे हैं और इसका विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह सिर्फ वोटो की राजनीति है और इससे हमारे मौलिक अधिकारों का हनन होगा। वो इसे अपनी पहचान खत्म होने की साजिश बता रहे हैं। करीब – करीब सभी राजनीतिक दल यूनिफार्म सिविल कोड का विरोध करते नजर आ रहे हैं। “एक देश एक कानून” का नियम लागू करना इतना आसान नहीं है वो भी तब जब हम विविधताओं वाले देश में रहते हों। जहां उनके धर्म के हिसाब से अलग-अलग कानून बने हुये है जो कि वर्षों से चले आ रहे हैं। इसे खत्म करना बहुत मुश्किल है और यह एक मुश्किल मुद्दा है।
हिंदू एक्ट के अनुसार तलाक के नियम कुछ अलग है उसी प्रकार मुसलमान जैन, ईसाई और पारसियों के भी नियम अलग-अलग है। हिंदू मैरिज एक्ट, हिंदू उत्तराधिकार कानून समेत ऐसे कई नियम हैं जो हिंदू समाज के निजी और पारिवारिक मामलों पर लागू होते हैं। 1955 में बना हुआ मैरिज एक्ट शादी और तलाक के मामलों पर लागू होता है। इसके अलावा हिंदू उत्तराधिकार एक्ट 1956 में संपत्ति के बंटवारे के नियम बताए गए हैं। हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत बेटियों को भी संपत्ति में बराबर का हक दिया गया है। उन्हें बेटों के बराबर ही संपत्ति दिए जाने का प्रावधान है। इसके विपरीत भारत में रहने वाले मुसलमान मुस्लिम पर्सनल लॉ का पालन करते हैं इसमें शरीयत में दी गई मान्यता की बात कही जाती है। मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लीकेशन एक्ट 1937 के के अनुसार मुसलमानों के शादी उत्तराधिकार तलाक और मेंटेनेंस को लेकर फैसले होते रहते हैं। हालांकि तीन तलाक के मामले को लेकर विवाद बढ़ा तो एक अलग ही कानून बन गया जो इसे गलत ठहराता है। यहूदी, ईसाई पारसियों के लिए भी अलग  नियम है। इन पर इंडियन सक्सेशन एक्ट लागू होता है।
यह सिर्फ तलाक से जुड़े कानून है। इन सबके अलावा उत्तराधिकार, विवाह, वसीयत अन्य में अलग-अलग कानून ईसाई पारसी आदिवासियों के अपने अलग कानून है। सिर्फ गोवा में समान नागरिक संहिता कानून पहले से ही लागू है। गोवा को संविधान का विशेष दर्जा हासिल है। गोवा में सभी धर्म और जातियों के लिए फैमिली लॉ लागू है। इसके तहत सभी धर्म जाति संप्रदाय और वर्ग से जुड़े लोगों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत के कानून समान है।
भाजपा ने समान नागरिक संहिता का कार्ड तब चला है जब चुनावी सरगर्मियां तेज है “मेरा बूथ सबसे मजबूत” कैंपेनिंग के तहत पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि, “क्या कोई परिवार अलग – अलग नियमों से पल सकता है? हमारा संविधान सभी के लिए समान अधिकार की गारंटी देता है।” आज के राजनीतिक माहौल में धार्मिक उन्माद हद से ज्यादा फैला हुआ है ऐसे में यह एक मुश्किल मुद्दा है जिसे अपनाने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। सवाल यह भी उठता है कि यदि यह चुनावी मुद्दा है तो क्या कुछ समय पश्चात यह शांत हो जाएगा और क्या इसका मकसद सिर्फ वोटो को भुनाना है? देश में समान नागरिक संहिता कानून लागू होगा कि नहीं ये तो आने वाला समय ही बताएगा मगर इस मुद्दे को लेकर लोगों की तीखी प्रतिक्रियायें जरूर आनी शुरू हो गई है।

प्रियंका वर्मा महेश्वरी

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शहरी-20 (यू-20) के मेयरों के शिखर सम्मेलन का गांधीनगर में उद्घाटन

शहरी-20 (यू-20) के मेयरों के शिखर सम्मेलन का उद्घाटन 7 जुलाई को गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र भाई पटेल और आवास और शहरी मामलों के राज्यमंत्री, माननीय श्री कौशल किशोर द्वारा किया गया। राज्य के शहरीकरण के सिंधु घाटी सभ्यता तक जुड़े समृद्ध इतिहास के बारे में बोलते हुए श्री पटेल ने राज्य में अमल में ले जा रहे भविष्यगामी, दूरदर्शी शहरी उपक्रमों पर प्रकाश डाला। श्री कौशल किशोर ने हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई कुछ नीतियों और कार्यक्रमों की मुख्य झलकियाँ साझा कीं, जिनमें लाइफ मिशन, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, ई-मोबिलिटी पर नीतियां और सभी के लिए आवास, स्वच्छ भारत मिशन जैसे मिशन शामिल हैं। छठे यू-20 चक्र के अध्यक्ष के रूप अहमदाबाद, जी-20 देशों के 60 से अधिक शहरों के 140 से अधिक विदेशी शहर नेताओं, 70 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं को शहरी क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर विचार-विमर्श करने और सतत शहरी विकास प्राप्त करने में बाधक चुनौतियों का समाधान करने के लिए, एक साथ लेकर आया है। शिखर सम्मेलन में 30 से अधिक शहरों के 100 से अधिक भारतीय प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।।

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव, श्री मनोज जोशी ने भारत में शहरीकरण की तेज गति के बारे में बात की, जहाँ 2050 तक शहरी आबादी मौजूदा 450 मिलियन से बढ़कर, लगभग 800 मिलियन होने की उम्मीद है। श्री जोशी ने क्षमता निर्माण की आवश्यकता और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने के लिए पर्याप्त वित्त की जरूरत को रेखांकित किया।

अहमदाबाद के माननीय महापौर, श्री किरीट कुमार जे परमार ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और यू-20 विचार-विमर्श के परिणाम- दस्तावेज विज्ञप्ति के माध्यम से टिकाऊ और न्यायसंगत शहरी विकास सुनिश्चित करने के लिये एक कार्य-उन्मुख एजेंडे की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

जी-20 के सूस शेरपा, श्री अभय ठाकुर ने शहरी उपक्रमों में निजी निवेश की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और तेजी से शहरी विकास के परिणाम जैसे किफायती आवास की कमी और बुनियादी सेवाओं तक पहुँच जैसी समस्याओं के समाधान के लिए अविलंब, अभिनव समाधानों की आवश्यकता को दोहराया। श्री ठाकुर ने समावेशी शासन और नवाचार के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और सतत विकास को बढ़ावा देने के महत्त्व पर भी ज़ोर दिया।

यू-20 यू,सी,एल,जी और सी-40 शहरों के वैश्विक संयोजकों के प्रमुख अधिकारियों ने भी शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।  यूसीएलजी महासचिव, सुश्री एमिलिया सैज कैरैनशेडो ने कहा कि यू-20 विचार-विमर्श शहरों, राष्ट्रीय सरकारों और जी-20 को  नई उम्मीद दे रहा है। उन्होंने कहा, ‘यू-20 केवल शिखर सम्मेलन नहीं, यह रूपांतरण की प्रक्रिया है’ उन्होंने कहा- सी-40 सिटीज के उप कार्यकारी निदेशक डॉ. केविन ऑस्टिन ने जलवायु और स्वच्छ हवा के लिए भारतीय शहरों द्वारा किए गए उपायों की सराहना की और इस बात पर ज़ोर दिया कि शहरों की सक्रिय भागीदारी के बिना जलवायु संकट का समाधान नहीं किया जा सकता है।

‘मेयोरल-समिट’ के पहले दिन अहमदाबाद क्लाइमेट एक्शन प्लान भी लॉन्च किया गया। इसे आईसीएलईआई, स्विस विकास एजेंसी और अहमदाबाद नगर निगम के सहयोग से विकसित किया गया है। योजना का उद्देश्य 2017 तक नेट-ज़ीरो  उत्सर्जन प्राप्त करना है और शहरों में बढ़ती गर्मी, बाढ़ और प्राकृतिक संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना है।

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समर्थ योजना के अंतर्गत 43 नए कार्यान्वयन भागीदार सूचीबद्ध; 75,000 लाभार्थियों को अतिरिक्त प्रशिक्षण का लक्ष्य

वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना (समर्थ) के लिए अधिकार प्राप्त समिति की आज आयोजित बैठक में, 43 नए कार्यान्वयन भागीदारों के पैनल के साथ कार्यान्वयन भागीदारों के पैनल को व्यापक बनाया गया है और कार्यबल को कौशल प्रदान करने में सक्षम बनाने के लिए लगभग 75,000 भागीदार लाभार्थियों को प्रशिक्षण का अतिरिक्त लक्ष्य आवंटित किया गया है। ।

लागत मानदंडों में 5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ फंडिंग पैटर्न को भी संशोधित किया गया है, जिससे इस योजना के अंतर्गत कौशल प्रदान करने वाले उद्योगों को आवश्यक अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलेगी।

इसके साथ, वस्त्र मंत्रालय ने वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना (समर्थ) के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने के लिए 157 कपड़ा उद्योग/उद्योग संघों, 16 केंद्रीय/राज्य सरकार एजेंसियों और मंत्रालय के 3 क्षेत्रीय संगठनों के साथ साझेदारी की है।

यह योजना देश के 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की गई है और अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जन जाति (एसटी) और अन्य हाशिए पर मौजूद श्रेणियों सहित समाज के सभी वर्गों को शामिल करती है। अब तक आवंटित 4.72 लाख लाभार्थियों के कौशल लक्ष्य में से 1.88 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। योजना के अंतर्गत अब तक प्रशिक्षित लाभार्थियों में 85 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल हैं। संगठित क्षेत्र के पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित 70 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों को रोज़गार प्रदान किया गया है।

समर्थ योजना वस्त्र मंत्रालय का एक मांग आधारित और रोज़गार प्रदान करने वाला प्रमुख कौशल कार्यक्रम है, जिसे कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा अपनाई गई व्यापक कौशल नीति ढांचे के अंतर्गत तैयार किया गया है।

इस योजना का उद्देश्य संगठित वस्त्र और संबंधित क्षेत्रों में नौकरियां पैदा करने में उद्योग के प्रयासों को प्रोत्साहित करना और पूरक बनाना है। प्रवेश स्तर के कौशल के अलावा, परिधान और परिधान क्षेत्रों में मौजूदा श्रमिकों की उत्पादकता में सुधार की दिशा में योजना के अंतर्गत कौशल में वृद्धि / कौशल को बढाने वाले कार्यक्रम के लिए एक विशेष प्रावधान भी संचालित किए गए हैं। समर्थ योजना हथकरघा, हस्तशिल्प, रेशम और जूट जैसे पारंपरिक वस्त्र क्षेत्रों की कौशल में वृद्धि / कौशल को बढाने की आवश्यकता को भी पूरा करता है।

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चंद्रयान-3 विश्व  के लिए एक नए चन्द्रमा  के द्वार खोलेगा-डॉ. जितेंद्र सिंह

 केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमन्त्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि चंद्रयान-3 विश्व के लिए नए एक चंद्रमा के द्वार खोलेगा। ईटी (इकोनॉमिक टाइम्स) गवर्नेंस के साथ एक विशेष साक्षात्कार में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के पहले मिशन, चंद्रयान-1 ने चंद्रमा के विभिन्न पहलुओं पर एक नया प्रकाश डाला था, क्योंकि यह चंद्रयान-1 ही था जो पहली बार चंद्रमा की सतह पर पानी की उपस्थिति के प्रमाण लेकर दुनिया के सामने आया था। उन्होंने कहा कि अब समूचा विश्व चंद्रयान-3 को बड़ी आशा, अपेक्षा और संभावना के साथ देख रहा है और इसके साथ ही चंद्रमा तथा ब्रह्मांड की कई और नई विशेषताओं एवं रहस्यों के उजागर होने की प्रतीक्षा कर रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन चंद्रमा की ओर एक कदम और आगे बढ़ने का संकेत देने के साथ ही इस तथ्य को भी प्रदर्शित करता है कि जहां तक ​​चंद्रमा की खोज का प्रश्न है, भारत अन्य देशों से पीछे नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मिशन की अनूठी विशेषता यह है कि यह न केवल चंद्रमा से चंद्रमा का निरीक्षण करेगा, बल्कि चंद्रमा से पृथ्वी को इस प्रकार भी देखेगा, जिससे भारत विश्व के तीन या चार देशों के विशिष्ट क्लब का हिस्सा बन जाएगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की हाल की संयुक्त राज्य अमेरिका यात्रा के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि अमेरिका अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत को एक समान भागीदार और सहयोगी के रूप में मानता है। उन्होंने कहा कि नासा (एनएएसए) आज भारत के अंतरिक्ष यात्रियों से आग्रह कर रहा है और आर्टेमिस समझौता, जिसमें भारत भी हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक है, भारत की महान अंतरिक्ष यात्रा का प्रमाण भी है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी केवल रॉकेट प्रक्षेपित (लॉन्च) करने तक ही सीमित नहीं है, वरन इसका क्षेत्रीय विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के 6 दशकों के दौरान अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की अनुप्रयोग क्षमता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि आज, अंतरिक्ष ने मानव जीवन के सभी क्षेत्रों को छू लिया है, जिनमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आपदा चेतावनी और शमन, जलवायु परिवर्तन का अध्ययन, नेविगेशन, रक्षा तथा शासन शामिल हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अमृत काल के अगले 25 वर्षों के लिए अंतरिक्ष के माध्यम से भारत का उत्थान शुरू हो गया है और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था भविष्य में समग्र आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ होगी। भारत द्वारा अब तक अन्तरिक्ष में भेजे गए 424 विदेशी उपग्रहों में से 389 प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान पिछले नौ वर्षों में प्रक्षेपित किए गए हैं। इसके अलावा, अर्जित 17 करोड 40 लाख अमेरिकी डॉलर में से 15 करोड़ 70 लाख तो पिछले नौ वर्षों में आए और इसी तरह अब तक अर्जित 25 करोड़ 60 लाख यूरो में से 22 करोड़ 30 लाख प्रधानमन्त्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 9 वर्षों के दौरान आए। एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी शिक्षा का माध्यम बन गई है और इसने भूभौतिकी, टेलीमेडिसिन जैसे विषयों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि आज अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (स्पेस टेक्नोलॉजी) के द्वारा वाईफाई के माध्यम भी शिक्षा प्राप्त की जा रही है। अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दृष्टिकोण की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि एकीकरण नया मंत्र है क्योंकि साइलो में काम करने के दिन खत्म हो गए हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर नतीजों के लिए न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर ब

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प्रधानमंत्री ने तेलंगाना के वारंगल में लगभग 6,100 करोड़ रुपये की विभिन्न ढांचागत विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी

प्रधानमंत्री  मोदी ने आज तेलंगाना के वारंगल में लगभग 6,100 करोड़ रुपये की लागत वाली कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। विकास कार्यों में 5,550 करोड़ रुपये से अधिक की 176 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं और काजीपेट में 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित की जाने वाली एक रेलवे विनिर्माण इकाई भी शामिल है। प्रधानमंत्री ने भद्रकाली मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना भी की।

उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यद्यपि तेलंगाना अपेक्षाकृत नया राज्य है और इसने अपने अस्तित्व के केवल 9 वर्ष ही पूरे किए हैं, लेकिन तेलंगाना और यहां के निवासियों का भारत के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा, “तेलुगू लोगों की क्षमताओं ने हमेशा भारत की क्षमताओं का विस्तार किया है। प्रधानमंत्री ने भारत को विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में तेलंगाना के नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अवसरों की वृद्धि में विश्वास व्यक्त किया, क्योंकि विश्व भारत को निवेश के केन्द्र के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा “विकसित भारत के लिए बहुत-सी उम्मीदें हैं।”

प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी के तीसरे दशक में स्वर्णिम काल के आगमन को स्वीकार करते हुए कहा कि आज का नया युवा-भारत, ऊर्जा से परिपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास के क्षेत्र में भारत का कोई भी हिस्सा पिछड़ना नहीं चाहिए। उन्होंने पिछले 9 वर्षों में तेलंगाना के बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में सुधार को रेखांकित किया। उन्होंने आज शुरू की गई विभिन्न परियोजनाओं के लिए तेलंगाना के लोगों को बधाई दी। इन परियोजनाओं पर 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी।

प्रधानमंत्री ने नए लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नए तरीके खोजने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि भारत में तेज गति से विकास पुराने बुनियादी ढांचे के साथ संभव नहीं है। यह देखते हुए कि खराब कनेक्टिविटी और महंगी लॉजिस्टिक लागत व्यवसायों की प्रगति में बाधा डालती है, प्रधानमंत्री ने सरकार द्वारा विकास की गति और पैमाने में कई गुना वृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, इकोनॉमिक कॉरिडोर और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का उदाहरण दिया, जो एक नेटवर्क का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो लेन को चार और चार लेन के राजमार्गों को छह लेन के राजमार्गों में परिवर्तित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि तेलंगाना के राजमार्ग नेटवर्क में 2500 किलोमीटर से 5000 किलोमीटर तक दो गुना वृद्धि देखी जा सकती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2500 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण कार्य विकास के विभिन्न चरणों में है। उन्होंने हैदराबाद-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर, चेन्नई-सूरत इकोनॉमिक कॉरिडोर, हैदराबाद-पणजी इकोनॉमिक कॉरिडोर और हैदराबाद-विशाखापत्तनम इंटर कॉरिडोर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार से तेलंगाना आसपास के आर्थिक केंद्रों को जोड़ रहा है और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन रहा है।

आज जिस नागपुर-विजयवाड़ा कॉरिडोर के मंचेरियल-वारंगल खंड की आधारशिला रखी गई है, उसके बारे में जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश के साथ तेलंगाना को आधुनिक सुविधा से पूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जबकि मंचेरियल और वारंगल के बीच की दूरी को भी कम करेगा और यातायात की समस्याओं को समाप्त करेगा। यह क्षेत्र कई आदिवासी समुदायों का निवास है और लंबे समय से उपेक्षित रहा है। श्री मोदी ने कहा कि यह कॉरिडोर राज्य में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को नया दृष्टिकोण प्रदान करेगा और करीमनगर-वारंगल खंड को चार लेन का बनाने से हैदराबाद-वारंगल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, काकतीय मेगा टेक्सटाइल पार्क और वारंगल सेज के लिए कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि तेलंगाना में कनेक्टिविटी के बढ़ने से राज्य के उद्योग और पर्यटन को सीधे लाभ हो रहा है क्योंकि तेलंगाना में विरासत केंद्रों और आस्था स्थलों की यात्रा अब अधिक सुविधाजनक हो रही है। उन्होंने कृषि उद्योग और करीमनगर के ग्रेनाइट उद्योग का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार के प्रयासों से उन्हें सीधे सहायता मिल रही है। उन्होंने कहा, ”चाहे किसान हो या मजदूर, छात्र हों या व्यावसायिक, सभी लाभान्वित हो रहे हैं। युवाओं को उनके घर के पास ही नए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं।

मेक इन इंडिया अभियान और विनिर्माण क्षेत्र युवाओं के लिए किस प्रकार रोजगार का स्रोत बन रहा है, इस विषय पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने देश में विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए पीएलआई योजना का उल्लेख किया। श्री मोदी ने बताया कि इस योजना के तहत तेलंगाना में 50 से अधिक बड़ी परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं और जो लोग अधिक विनिर्माण कर रहे हैं उन्हें सरकार से विशेष सहायता मिल रही है। प्रधानमंत्री ने इस वर्ष रक्षा निर्यात में भारत के एक नया रिकॉर्ड बनाने का उल्लेख भी किया। उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा निर्यात 9 साल पहले लगभग 1000 करोड़ रुपये का था, वह अब 16,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। उन्होंने हैदराबाद स्थित भारतीय डायनामिक्स लिमिटेड का उल्लेख किया और कहा कि यह भी लाभान्वित हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने भारतीय रेल द्वारा विनिर्माण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान और नए मील के पत्थर स्थापित करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने ‘मेड इन इंडिया’ वंदे भारत रेलगाड़ियों के बारे में चर्चा की और कहा कि भारतीय रेलवे ने हाल के वर्षों में हजारों आधुनिक कोच और लोकोमोटिव का निर्माण किया है। आज काजीपेट में रेलवे विनिर्माण इकाई की आधारशिला के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारतीय रेलवे का कायाकल्प है और काजीपेट मेक इन इंडिया की नई ऊर्जा का हिस्सा बनेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और प्रत्येक परिवार किसी न किसी रूप में लाभान्वित होगा। अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘यह सबका साथ, सबका विकास है’। उन्होंने विकास के इस मंत्र पर तेलंगाना को आगे ले जाने का आग्रह किया।

इस अवसर पर तेलंगाना की राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सौंदरराजन, केन्द्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी, केन्द्रीय पर्यटन मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी और सांसद श्री संजय बंदी भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने 5,550 करोड़ रुपये से अधिक की 176 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं में नागपुर-विजयवाड़ा कॉरिडोर का 108 किलोमीटर लंबा मंचेरियल-वारंगल खंड शामिल है। यह खंड मंचेरियल और वारंगल के बीच की दूरी को लगभग 34 किलोमीटर कम कर देगा। इस प्रकार यात्रा का समय कम होगा और एनएच-44 और एनएच-65 पर यातायात व्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-563 के 68 किलोमीटर लंबे करीमनगर-वारंगल खंड को वर्तमान दो-लेन से चार-लेन में अपग्रेड करने की आधारशिला भी रखी। इससे हैदराबाद-वारंगल औद्योगिक कॉरिडोर, काकतीय मेगा टेक्सटाइल पार्क और वारंगल में एसईजेड के लिए कनेक्टिविटी में सुधार करने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने काजीपेट में रेलवे विनिर्माण इकाई की आधारशिला रखी। 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित होने वाली आधुनिक विनिर्माण इकाई में रोलिंग स्टॉक विनिर्माण क्षमता में वृद्धि होगी। यह नवीनतम प्रौद्योगिकी मानकों और सुविधाओं जैसे माल डिब्बों की रोबोटिक पेंटिंग, अत्याधुनिक मशीनरी और आधुनिक सामग्री भंडारण और प्रबंधन के साथ एक संयंत्र में उपलब्ध होगी। इससे स्थानीय क्षेत्र में रोजगार सृजन होगा और आस-पास के क्षेत्रों में अधीनस्थ इकाइयों के विकास में मदद मिलेगी।

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प्रधानमंत्री ने वाराणसी, उत्तर प्रदेश में 12,100 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया

प्रधानमंत्री मोदी ने आज वाराणसी, उत्तर प्रदेश में 12,100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन-सोन नगर रेलवे लाइन, विद्युतीकरण या दोहरीकरण पूरा होने के बाद तीन रेलवे लाइनों, एनएच-56 के वाराणसी-जौनपुर खंड का चार-लेन चौड़ीकरण और वाराणसी में कई परियोजना को समर्पित किया जाना शामिल है। प्रधानमंत्री ने पीडब्ल्यूडी की 15 सड़कों के निर्माण और नवीनीकरण, 192 ग्रामीण पेयजल योजनाओं, मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाटों के पुन: डिजाइन और पुनर्विकास सहित छह धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्नान घाटों पर फ्लोटिंग चेंजिंग रूम जेटीस और सीआईपीईटी परिसर करसरा में छात्रों के लिए छात्रावास के निर्माण सहित कई रेलवे परियोजनाओं की आधारशिला रखी। मोदी ने पीएम स्वनिधि के ऋणों, पीएमएवाई ग्रामीण घरों की चाबियां और आयुष्मान भारत कार्ड के वितरण की भी शुरुआत की। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर, प्रधानमंत्री ने मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के मॉडल का अवलोकन किया।

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रावण के पवित्र महीने की शुरुआत, भगवान विश्वनाथ और मां गंगा के आशीर्वाद और वाराणसी के लोगों की उपस्थिति से जीवन धन्य हो जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारों शिव भक्त ‘जल’ चढ़ाने के लिए वाराणसी आ रहे हैं और कहा कि शहर में रिकॉर्ड संख्या में तीर्थयात्रियों का आना निश्चित है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों के आतिथ्य सत्कार पर प्रकाश डालते हुए कहा, “जो भी वाराणसी आ रहा है, हमेशा सुखद अहसास के साथ वापस लौटेगा।” उन्होंने जी20 के प्रतिनिधियों का स्वागत करने और पूजा स्थलों के परिसरों को स्वच्छ और भव्य बनाए रखने के लिए काशी के लोगों की प्रशंसा की।

उन्होंने लगभग 12,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिनका आज शिलान्यास किया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा, “यह काशी की प्राचीन आत्मा को बरकरार रखते हुए उसे नया शरीर प्रदान करने के हमारे संकल्प का विस्तार है।” उन्होंने परियोजनाओं के लिए लोगों को बधाई दी।

प्रधानमंत्री विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों के साथ पूर्व में संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पिछले संवाद के दौरान योजनाएं जमीनी स्तर तक नहीं जुड़ चुकी थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने लाभार्थियों के साथ संवाद और बातचीत की एक नई परंपरा शुरू की है, जिसका अर्थ है ‘सीधे लाभ के साथ-साथ प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया।’ उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप विभागों और अधिकारियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “आजादी के इतने वर्षों के बाद लोकतंत्र का असली लाभ सही मायने में सही लोगों तक पहुंचा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि लाभार्थी वर्ग सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के सबसे सच्चे रूप का उदाहरण बन गया है क्योंकि सरकार हर योजना में अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का प्रयास करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दृष्टिकोण के साथ कमीशन चाहने वालों, दलालों और घोटालेबाजों को खत्म करने में मदद मिली है जिससे भ्रष्टाचार और भेदभाव खत्म हो गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में सरकार ने सिर्फ एक परिवार और एक पीढ़ी के लिए ही काम नहीं किया है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया है। उन्होंने पीएमएवाई का उदाहरण दिया जहां 4 करोड़ से अधिक परिवारों को पक्के घर सौंपे गए हैं और साथ ही बताया कि आज उत्तर प्रदेश में लाभार्थियों को 4 लाख पक्के घर दिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इनमें से ज्यादातर मकानों की स्वामी महिलाएं हैं, जिनके नाम पर पहली बार संपत्ति की रजिस्ट्री हुई है। उन्होंने कहा, “ये घर सुरक्षा की भावना पैदा करते हैं और घरों के मालिकों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं।” उन्होंने कहा कि इन पक्के मकानों से महिलाओं को वित्तीय रूप से सुरक्षा मिलेगी।

सरकारी योजनाओं के प्रभाव को सामने रखते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना भी केवल 5 लाख रुपये के मुफ्त इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई पीढ़ियों को प्रभावित करती है, क्योंकि चिकित्सा व्यय पीढ़ियों को गरीबी और कर्ज में धकेल सकता है। उन्होंने कहा, “आयुष्मान योजना गरीबों को इस नियति से बचा रही है। इसीलिए, मैं मिशन मोड में हर गरीब तक कार्ड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इतनी मेहनत कर रहा हूं।” आज के कार्यक्रम में एक करोड़ साठ लाख लोगों को आयुष्मान भारत कार्ड के वितरण की शुरुआत हुई।

प्रधानमंत्री ने कहा, “एक राष्ट्र के संसाधनों पर सबसे बड़ा दावा गरीब और वंचित लोगों का होता है।” उन्होंने 50 करोड़ जन धन खातों और मुद्रा योजना के तहत बिना गारंटी के ऋण जैसे वित्तीय समावेशन के कदमों का उल्लेख। इससे गरीबों, दलितों, वंचितों, पिछड़ों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और महिला उद्यमियों को लाभ हुआ है।

प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि का भी उल्लेख किया और कहा कि भले ही अधिकांश स्ट्रीट वेंडर पिछड़े समुदायों से आते हैं, लेकिन अतीत की सरकारों ने कभी भी उनके मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया और केवल उन्हें परेशान किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना से अब तक 35 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं और आज वाराणसी में 1.25 लाख से अधिक लाभार्थियों को ऋण वितरित किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा, “गरीबों के लिए आत्म-सम्मान मोदी की गारंटी है।”

प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों की बुनियादी बेईमानी पर प्रकाश डाला, जिसके कारण धन की लगातार कमी बनी रही। उन्होंने कहा कि आज, “चाहे गरीब कल्याण हो या इंफ्रास्ट्रक्चर, बजट की कोई कमी नहीं है। करदाता वही, व्यवस्था वही, बस सरकार बदल गई है। इरादे बदले तो नतीजे भी सामने आए हैं।” अतीत की घोटालों और कालाबाजारी की खबरों की जगह नई परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास की खबरों ने ले ली है। उन्होंने इस बदलाव के उदाहरण के तौर पर मालगाड़ियों के लिए विशेष ट्रैक से संबंधित परियोजना ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि 2006 में जिस परियोजना की परिकल्पना की गई थी, उसमें 2014 तक एक भी किलोमीटर लंबा ट्रैक नहीं बन पाया। बीते 9 साल में, परियोजना का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया गया है और इस क्षेत्र में मालगाड़ियों का परिचालन हो रहा है। उन्होंने कहा, “आज भी दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से नए सोननगर सेक्शन का उद्घाटन किया गया है। इससे न केवल मालगाड़ियों की गति बढ़ेगी बल्कि पूर्वांचल और पूर्वी भारत में रोजगार के कई नए अवसर पैदा होंगे।”

देश की तेज गति से चलने वाली ट्रेनों की आकांक्षा को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि भले ही देश में पहली बार राजधानी एक्सप्रेस लगभग 50 साल पहले चली थी, लेकिन आज तक यह केवल 16 रूट पर ही चल सकी है। उन्होंने शताब्दी एक्सप्रेस का उदाहरण भी दिया जो 30-35 साल पहले शुरू हुई थी लेकिन वर्तमान में केवल 19 रूट पर चल रही है। प्रधानमंत्री ने वंदे भारत एक्सप्रेस का उल्लेख किया और बताया कि यह ट्रेन 4 साल की छोटी अवधि में 25 रूट पर चल रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, “बनारस को देश की पहली वंदे भारत ट्रेन मिली थी।” उन्होंने बताया कि आज गोरखपुर से गोरखपुर-लखनऊ और जोधपुर-अहमदाबाद रूट पर दो नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई गई है। श्री मोदी ने कहा, “यह वंदे भारत देश के मध्यम वर्ग के बीच इतनी सुपरहिट हो गई है और इसकी मांग बढ़ती ही जा रही है।” उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं जब वंदे भारत देश के हर कोने को जोड़ देगी।

पिछले 9 वर्षों में काशी से संपर्क को बेहतर बनाने के लिए किए गए अभूतपूर्व कार्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि इससे रोजगार के कई नए अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि काशी में 7 करोड़ पर्यटक और श्रद्धालु आए, जो एक वर्ष के भीतर 12 गुना वृद्धि है। इससे रिक्शा चालकों, दुकानदारों से लेकर ढाबों और होटलों में काम करने वाले लोगों और बनारसी साड़ी उद्योग के लिए आय के बेहतर अवसर पैदा हुए। उन्हें यह भी कहा कि इससे मल्लाहों को बहुत लाभ हुआ और उन्होंने शाम को गंगा आरती के दौरान नावों की संख्या पर भी आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “आप लोग इसी तरह बनारस का ख्याल रखते रहिए।”

संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने आज की परियोजना के लिए सभी को बधाई दी और विश्वास जताया कि बाबा के आशीर्वाद से वाराणसी की विकास यात्रा आगे भी जारी रहेगी।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल सुश्री आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य और श्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री श्री महेंद्र नाथ पांडे, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रोफेसर एस पी सिंह बघेल और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों सहित कई अन्य उपस्थित रहे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन-सोन नगर रेलवे लाइन को समर्पित किया। 6760 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाई गई नई लाइन माल की तेज और अधिक कुशल आवाजाही की सुविधा प्रदान करेगी। उन्होंने राष्ट्र को तीन रेलवे लाइनें भी समर्पित कीं, जिनका 990 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से विद्युतीकरण या दोहरीकरण किया गया है। इनमें गाजीपुर शहर-औंरिहार रेल लाइन, औंरिहार-जौनपुर रेल लाइन और भटनी-औंरिहार रेल लाइन शामिल हैं। इन परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश में रेलवे लाइनों के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण को हासिल करने में मदद मिली है।

प्रधानमंत्री ने एनएच-56 के वाराणसी-जौनपुर खंड के चार लेन चौड़ीकरण को राष्ट्र को समर्पित किया, जिसे 2,750 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है और इससे वाराणसी से लखनऊ के लिए सफर आसान और तेज हो गया है।

वाराणसी में जिन कई परियोजनाओं का उद्घाटन प्रधानमंत्री करेंगे उनमें 18 पीडब्ल्यूडी सड़कों का निर्माण और नवीनीकरण; बीएचयू परिसर में अंतर्राष्ट्रीय गर्ल्स हॉस्टल भवन का निर्माण; सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी) – ग्राम करसरा में व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र; पुलिस स्टेशन सिंधौरा, पीएसी भुल्लनपुर, फायर स्टेशन पिंडरा और सरकारी आवासीय विद्यालय तरसदा में आवासीय भवन और सुविधाएं; आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन भवन; मोहन कटरा से कोनिया घाट तक सीवर लाइन और रमना गांव में आधुनिक सेप्टेज प्रबंधन प्रणाली; 30 डबल साइड बैकलिट एलईडी यूनिपोल; एनडीडीबी मिल्क प्लांट रामनगर में गाय के गोबर पर आधारित बायो-गैस संयंत्र; और दशाश्वमेध घाट पर एक विशेष फ्लोटिंग चेंजिंग रूम जेटी शामिल हैं। फ्लोटिंग चेंजिंग रूम जेटी से गंगा नदी पर श्रद्धालुओं को नहाने की सुविधा मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया, उनमें चौखंडी, कादीपुर और हरदत्तपुर रेलवे स्टेशनों के पास दो लेन वाले तीन रेल ओवर ब्रिज (आरओबी); व्यासनगर- पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन रेल फ्लाईओवर का निर्माण; और पीडब्ल्यूडी की 15 सड़कों का निर्माण एवं नवीकरण शामिल है। इन परियोजनाओं को लगभग 780 करोड़ रुपये की कुल लागत से विकसित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने जल जीवन मिशन के तहत 550 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाली 192 ग्रामीण पेयजल योजनाओं की आधारशिला भी रखी। इससे 192 गांवों के 7 लाख लोगों को शुद्ध पेयजल मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाटों के पुन: डिजाइन और पुनर्विकास की आधारशिला भी रखी। पुनर्विकसित किए गए घाटों में सार्वजनिक सुविधाएं, प्रतीक्षा क्षेत्रों, लकड़ी भंडारण, अपशिष्ट निपटान और पर्यावरण-अनुकूल दाह संस्कार के प्रावधान होंगे।

जिन अन्य परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई उनमें दशाश्वमेध घाट के फ्लोटिंग चेंजिंग रूम जेटी की तर्ज पर वाराणसी में गंगा नदी पर छह धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्नान घाटों पर फ्लोटिंग चेंजिंग रूम जेटी और सीआईपीईटी परिसर करसरा में छात्रों के छात्रावास का निर्माण शामिल है।

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश में लाभार्थियों को पीएम स्वनिधि के ऋण, पीएमएवाई ग्रामीण घरों की चाबियां और आयुष्मान भारत कार्ड भी वितरित किए। इससे 5 लाख पीएमएवाई लाभार्थियों का गृह प्रवेश, पात्र लाभार्थियों को 1.25 लाख पीएम स्वनिधि ऋण का वितरण और 2.88 करोड़ आयुष्मान कार्ड का वितरण शुरू हो जाएगा।

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