स्मार्ट सिटी में कानून का हो रहा खुला उल्लंघन !
स्मार्ट सिटी की सड़कों पर ‘लोहे के अवैध कवच’ पहनकर दौड़ रहे सवारी वाहन
– करोड़ों खर्च कर लगाए गए कैमरों में क्यों नहीं कैद होती है मनमानी?
– चौराहों पर ड्यूटी में लगे यातायात पुलिस के जवान क्यों करते हैं अनदेखी ?
कानपुर। स्मार्ट सिटी कानपुर में सार्वजनिक परिवहन के नाम पर अराजकता का बोलबाला है। शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों—कल्याणपुर, रावतपुर, पनकी, विजय नगर, बर्रा, गोविंद नगर, किदवई नगर, बाबूपुरवा, नौबस्ता, रामादेवी, बारादेवी, झकरकटी, फजलगंज, टाटमिल, चुन्नीगंज, जरीब चौकी सहित अधिकतर क्षेत्रों में चलने वाले विक्रम टेम्पो, ऑटो और ई-रिक्शा के मालिकों के मनमाने रवैये ने सड़कों को असुरक्षित बना दिया है। इन वाहनों की बॉडी के चारों ओर अवैध रूप से लगाए गए लोहे के भारी एंगल न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि राहगीरों के लिए खतरनाक भी साबित हो रहे हैं।
मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के अनुसार, वाहनों की मूल संरचना (Structure) में इस तरह का बदलाव मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act) की धारा 52 का स्पष्ट उल्लंघन है।
वहीं वाहन की लंबाई, चौड़ाई या वजन में कोई भी ऐसा बदलाव जो आरसी (Registration Certificate) के विपरीत हो, पूरी तरह प्रतिबंधित है।
वहीं इन्हीं अवैध एंगलों की वजह से चालक, धारा 184 के तहत ‘खतरनाक ड्राइविंग’ को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि उन्हें अपने वाहन के क्षतिग्रस्त होने का डर नहीं रहता है।
स्मार्ट सिटी में चलने वाले ऑटो-विक्रम, ई रिक्शा चालक, अपने मनमुताबिक, लोहे के जालीदार एंगलों का इस्तेमाल ‘सुरक्षा कवच’ की तरह कर रहे हैं। जिसके कारण शहर के व्यस्त चौराहों पर आए दिन छोटी-मोटी भिड़ंत होती रहती है, जिससे कई बार विवाद पैदा हो जाता है और जाम की स्थिति पैदा होती है।
डिजिटल निगरानी पर सवाल ? आईटीएमएस (ITMS) के तहत लगे कैमरों की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर ये ‘मोडिफाइड’ वाहन चालान की जद से बाहर कैसे और क्यों हैं? वहीं यातायात पुलिस के जवानों की नजर इस ओर क्यों नहीं जाती ?
ऐसे में जरूरी है कि संभागीय परिवहन विभाग व यातायात पुलिस, एक साथ मिलकर संयुक्त चेकिंग अभियान चलाये और ऑटो – विक्रम व ई – रिक्शाओं में लगे अवैध एंगलों को मौके पर ही कटवाकर जब्त किया जाए।
~प्रेषक श्याम सिंह पंवार सम्पादक दैनिक जन सामना
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भारतीय स्वरूप संवाददाता
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