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फेम इंडिया योजना के चरण-II के तहत 13,41,459 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पर इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को 5,790 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई

हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों का तीव्र अंगीकरण और विनिर्माण (फेम) योजना के चरण-II के तहत बजटीय आवंटन और धनराशि के परिव्यय का विवरण निम्नलिखित है:

क्रम संख्या वित्तीय वर्ष बजट आवंटन धनराशि का उपयोग (31.01.2024 की स्थिति के अनुसार)
1 2019-20 500 करोड़ रुपये 500 करोड़ रुपये
2 2020-21 318.36 करोड़ रुपये 318.36 करोड़ रुपये
3 2021-22 800 करोड़ रुपये 800 करोड़ रुपये
4 2022-23 2897.84 करोड़ रुपये 2402.51 करोड़ रुपये
5 2023-24 5171.97 करोड़ रुपये 1980.83 करोड़ रुपये

 

भारी उद्योग मंत्रालय ने 25 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 68 शहरों में 2,877 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन की मंजूरी दी है। इन चार्जिंग स्टेशनों में से 148 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण किया जा चुका है और इनका परिचालन किया जा रहा है।

इसके अलावा भारी उद्योग मंत्रालय ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तीन तेल विपणन कंपनियों को 7,432 इलेक्ट्रिक वाहन सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए पूंजीगत सब्सिडी के रूप में 800 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

31 जनवरी, 2024 की स्थिति के अनुसार फेम इंडिया योजना के चरण-II के तहत इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माताओं को 13,41,459 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पर 5790 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है। (31 जनवरी, 2024 की स्थिति के अनुसार फेम-II पोर्टल पर दावाकृत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नीचे दिए गए ब्यौरे के अनुसार)

क्रम संख्या वाहन का प्रकार कुल वाहन संख्या
1 दोपहिया 11,85,829
2 तिपहिया 1,38,639
3 चौपहिया 16,991
  कुल 13,41,459

इसेक अलावा भारी उद्योग मंत्रालय ने शहर के भीतर परिचालन के उद्देश्य से विभिन्न शहरों/एसटीयू/राज्य सरकार की इकाइयों के लिए 6862 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी है। 29 नवंबर, 2023 की स्थिति के अनुसार इन 6,862 ई-बसों में से 3487 बसों की आपूर्ति एसटीयू को की जा चुकी है।

यह जानकारी भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने आज राज्य सभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।

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सरकार ने तमिलनाडु के समुद्र तट पर 4 गीगावॉट अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं

भारत सरकार ने 4 गीगावॉट की कुल क्षमता की समुद्र तट पर पवन ऊर्जा के विकास के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से तमिलनाडु के समुद्र तट पर अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए खुली पहुंच के आधार पर प्रत्येक 1 गीगावॉट के चार खंडों के लिए आमंत्रित बोलियां हैं। इस व्यवस्था के अंतर्गत, प्रत्येक खंड के लिए बोली जीतने वाले डेवलपर्स 1 गीगावॉट अपतटीय पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित करेंगे और ओपन एक्सेस व्यवस्था के अंतर्गत सीधे उपभोक्ताओं को बिजली बेचेंगे। ओपन एक्सेस बोलियों के अंतर्गत कोई व्यवहार्यता गैप फंडिंग (वीजीएफ) नहीं दी जाती है और उत्पन्न नवीकरणीय ऊर्जा उद्योगों जैसी संस्थाओं को बेची जाएगी जो वर्तमान में उच्च-टैरिफ बैंड में हैं।

अपतटीय पवन के अनेक लाभ हैं। यह भूमि की उपलब्धता की बाधाओं को दूर करता है; इसमें उच्च क्षमता उपयोग फ़ंक्शन (सीयूएफ) है – जो लगभग 50 प्रतिशत है। इसके अलावा, अपतटीय पवन टर्बाइनों की क्षमताएं ऑन-शोर पवन टर्बाइनों की तुलना में अधिक हैं; प्रत्येक टरबाइन 15 मेगावाट की है।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत भारत सरकार के उपक्रम सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेकी) के माध्यम से ऑफ-शोर पवन ऊर्जा बोलियां आमंत्रित की गई हैं। सभी आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने के बाद बोलियां आमंत्रित की जा रही हैं। निविदा आमंत्रण सूचना यहाँ पर प्राप्त की जा सकती है।

भारत पहले ही नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व के रूप में उभरा है। यह कदम भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा को एक और आयाम में ले जाएगा।

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रेल स्टेशनों पर भीड़भाड़ के कारण होने वाली भगदड़ और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भारतीय रेल के उठाए गए कदम

भारतीय रेल ने यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने और अतिरिक्त स्थान प्रदान करने के लिए नई सेवाएं शुरू करने के साथ उनका विस्तार किया है, उनकी उपलब्धता और सवारी डिब्बों की संख्या में बढ़ोतरी की जाती है, जो परिचालन संबंधित व्यवहार्यता, संसाधनों की उपलब्धता, प्रतिस्पर्धी मांगों आदि के अधीन संचालित प्रक्रियाएं हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान आरंभिक आधार पर यात्रियों की संख्या 639 करोड़ है।

इसके अलावा त्यौहारों के मौसम और छुट्टियों आदि के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ की जरूरतों पूरा करने के लिए विशेष ट्रेनों का परिचालन व इनकी संख्या में अस्थायी बढ़ोतरी भी की जाती है।

भारतीय रेल ने स्टेशनों पर अधिक भीड़ के कारण होने वाली भगदड़ और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:-

  1. भीड़ प्रबंधन के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कर्मियों को वाणिज्यिक विभाग और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के साथ समन्वय से स्टेशनों व रेल परिसरों में तैनात किया गया है।
  2. आरपीएफ की ओर से त्यौहारों के मौसम के दौरान ट्रेनों के लगने से पहले प्लेटफार्म पर यात्रियों की कतार बनाकर अनारक्षित कोचों में यात्रियों के व्यवस्थित प्रवेश के लिए हरसंभव प्रयास किए जाते हैं।
  3. भीड़ नियंत्रण के लिए सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से बार-बार उद्घोषणा की जाती हैं।
  4. यात्रियों के आवागमन को व्यवस्थित करने के लिए जीआरपी के समन्वय से आरपीएफ कर्मियों द्वारा फुट ओवर ब्रिज, प्रवेश और निकास द्वारों, प्लेटफॉर्मों पर सुरक्षा प्रदान की जाती है।
  5. भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की निगरानी और संभावित भीड़ के आवागमन की सूचना स्टेशन परिसर में तैनात कर्मियों को देने के लिए क्लोज्ड सर्किट टेलिविजन (सीसीटीवी) निगरानी कमरों में प्रशिक्षित रेल सुरक्षा बल के कर्मियों की तैनाती की गई है।
  6. रेलवे सुरक्षा विशेष बल (आरपीएसएफ) बटालियनों से सुरक्षा कर्मियों की अतिरिक्त जनशक्ति उपलब्ध कराई जाती है।
  7. सादे कपड़ों में कर्मियों को तैनात कर आपराधिक गतिविधियों पर निगरानी और सतर्कता सुनिश्चित की जाती है।

31 मार्च, 2023 की स्थिति के अनुरूप परिचालन के लिए 65301 सवारी डिब्बे उपलब्ध हैं।

कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए भारतीय रेल ने 23 मार्च, 2020 से सभी नियमित यात्री रेलगाड़ियों को बंद कर दिया था और केवल विशेष रेलगाड़ी सेवाएं चलाई जा रही थीं। इस दौरान भारतीय रेल ने आईआईटी बॉम्बे की सहायता से समय-सारणी का एक वैज्ञानिक विधि से युक्तिकरण किया था। इस अभ्यास को अन्य बातों के साथ-साथ अनुरक्षण गलियारा ब्लॉकों का सृजन करके बेहतर यात्री सुरक्षा उपलब्ध कराने, मौजूदा समय-सारणी में विरोधाभासों को न्यूनतम करने, जिसमें अन्य बातों के साथ- साथ यात्री सेवाओं को मेल/एक्सप्रेस सेवाओं परिवर्तित करना शामिल है, शुरू किया गया। नवंबर, 2021 से मेल/एक्सप्रेस सेवाओं को परिवर्तित समय-सारणी और नियमित गाड़ी संख्या के साथ-साथ परिचालित किया जा रहा है।

यह जानकारी रेल, संचार व इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्य सभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।

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अमृत ​​भारत स्टेशन योजना के तहत विकास/पुनर्विकास के लिए 1318 स्टेशनों की पहचान की गई है

रेल मंत्रालय ने भारतीय रेलवे पर स्टेशनों के विकास के लिए ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ शुरू की है। यह योजना दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ निरंतर आधार पर स्टेशनों के विकास की परिकल्पना करती है। इसमें ऐसे प्रत्येक स्टेशन पर आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए स्टेशन पहुंच, सर्कुलेटिंग एरिया, वेटिंग हॉल, शौचालय, आवश्यकतानुसार लिफ्ट/एस्केलेटर, स्वच्छता, मुफ्त वाई-फाई, ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों के लिए कियोस्क जैसी सुविधाओं में सुधार, बेहतर यात्री सूचना प्रणाली, कार्यकारी लाउंज, व्यावसायिक बैठकों के लिए नामांकित स्थान, भूनिर्माण आदि के लिए मास्टर प्लान तैयार करना और चरणों में उनका कार्यान्वयन शामिल है।

इस योजना में इमारतों के सुधार, शहर के दोनों किनारों के साथ स्टेशन को एकीकृत करने, मल्टीमॉडल एकीकरण, ‘दिव्यांगजनों’ के लिए सुविधाएं, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल समाधान, गिट्टी रहित ट्रैक का प्रावधान, आवश्यकता के अनुसार ‘रूफ प्लाजा’, लंबी अवधि में स्टेशन पर चरणबद्धता और व्यवहार्यता और सिटी सेंटरों के निर्माण की भी परिकल्पना की गई है।

इस योजना के तहत अब तक विकास/पुनर्विकास के लिए 1318 स्टेशनों की पहचान की गई है। भारतीय रेलवे पर ‘आदर्श स्टेशन योजना’ के तहत 1251 स्टेशनों का विकास किया गया है।

स्टेशनों के विकास और रखरखाव के लिए आवंटन और व्यय का विवरण क्षेत्रीय रेलवे-वार रखा जाता है, न कि राज्य-वार या स्टेशन-वार या योजना-वार। स्टेशनों के विकास और यात्री सुविधाओं के प्रावधान को आम तौर पर योजना शीर्ष – 53 ‘ग्राहक सुविधाएं’ के तहत वित्त पोषित किया जाता है। 02 क्षेत्रीय रेलवे हैं, अर्थात, उत्तर रेलवे (एनआर) और उत्तर पश्चिम रेलवे (एनडब्ल्यूआर) जो पंजाब राज्य को सेवाएं प्रदान करते हैं। वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान योजना शीर्ष-53 के तहत कुल ₹ 1148.74 करोड़ व्यय किए गए हैं और चालू वर्ष का कुल आवंटन ₹ 2613.36 करोड़ है।

‘रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण सहित यात्री सुविधाओं’ पर रेलवे पर स्थायी समिति (17वीं लोकसभा) की छठी रिपोर्ट में निहित सिफारिशों के कार्यान्वयन की स्थिति 08.03.2021 को संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखी गई है।

यह जानकारी रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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देश में डिफेंस इकोसिस्टम

सरकार ने देश के रक्षा इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए विभिन्न कार्य योजनाएं बनाई हैं। सार्वजनिक और निजी दोनों भारतीय उद्योगों को रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 (डीएपी-2020) के अध्याय-III में निर्धारित ‘मेक प्रोसीजर’ के तहत रक्षा प्रणालियों के डिजाइन, विकास और निर्माण में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिसमें प्रोटोटाइप विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के प्रावधान भी शामिल हैं।

पूर्वनिर्धारित वित्तीय और गुणवत्ता प्रमाण-पत्र वाली फर्मों को ग्रीन चैनल का दर्जा देने के लिए रक्षा भंडार और पुर्जों की खरीद के लिए एक ग्रीन चैनल नीति शुरू की गई है। ग्रीन चैनल सर्टिफिकेट का अनुदान रक्षा मंत्रालय के तहत विभिन्न खरीद एजेंसियों द्वारा संपन्न अनुबंधों के तहत आपूर्तिकर्ता की गारंटी/वारंटी के तहत भंडार के प्री-डिस्पैच निरीक्षण और स्वीकृति की छूट प्रदान करता है। रक्षा उद्योगों के लिए निवेश आकर्षित करने, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने और देश में डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग ईकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से दो डिफेंस इंडस्ट्रियल कोरिडोर (डीआईसी) – उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कोरिडोर (यूपीडीआईसी) और तमिलनाडु डिफेंस इंडस्ट्रियल कोरिडोर (टीएनडीआईसी) स्थापित किए गए हैं। ।

घरेलू रक्षा और एयरोस्पेस मैन्युफेक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए डिफेंस टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम शुरू की गई है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य सरकारी सहायता के लिए एक सामान्य परीक्षण सुविधा के रूप में ग्रीनफील्ड डिफेंस टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना है, जिसके तहत देश में रक्षा परीक्षण बुनियादी ढांचे में कमियों को कम करने के लिए एमएसएमई और स्टार्ट-अप की भागीदारी पर विशेष ध्यान देने के साथ स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है।

इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सिलेंस (आईडेक्स) को स्टार्ट-अप और एमएसएमई को इनोवेशन करने, प्रौद्योगिकियों को विकसित करने और रक्षा और एयरोस्पेस से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए लॉन्च किया गया है, जिसका उद्देश्य रक्षा और एयरोस्पेस, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों में  इनोवेशन और प्रौद्योगिकी विकास और एकेडमिया को बढ़ावा देने के लिए एक ईकोसिस्टम का निर्माण करना है।  साथ ही उन्हें अनुसंधान एवं विकास के लिए अनुदान/धन और अन्य सहायता प्रदान करता है जिसमें भविष्य में भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस आवश्यकताओं के लिए अपनाने की क्षमता है। डीएसपीयू विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के लिए विभिन्न उत्कृष्टता केंद्रों/शैक्षणिक संस्थानों जैसे आईआईटी, आईआईएससी, आईआईएम आदि के साथ हाथ मिला रहे हैं।

डीआरडीओ ने एक प्रक्रिया निर्धारित की है जिसके द्वारा वह अपनी विकसित प्रौद्योगिकियों को उद्योगों को ट्रांसफर करता है। इसके लिए लाइसेंसिंग एग्रीमेंट फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नॉलजी साइन किया जाता है। डीआरडीओ ने अपने इंडस्ट्री पार्टनर्स (विकास सह उत्पादन भागीदार (डीसीपीपी)/विकास भागीदार (डीपी)) के लिए जीरो टीओटी फीस और भारतीय सशस्त्र बलों और सरकारी विभागों को आपूर्ति के लिए जीरो रॉयल्टी के साथ एक नई टीओटी नीति और प्रक्रियाएं विकसित की हैं। डीआरडीओ लैब्स में उद्योगों के लिए परीक्षण सुविधाएं अब खोली गई हैं। डीआरडीओ ने प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ) लॉन्च किया है जो नवीन रक्षा उत्पादों के डिजाइन विकास के लिए भारतीय उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। जून 2023 में, डीआरडीओ ने उद्योग में रक्षा अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने के लिए 75 प्राथमिकता वाले प्रौद्योगिकी क्षेत्रों/उत्पादों/प्रणालियों को जारी किया जिसे डीआरडीओ नहीं करेगा।

युवाओं को इनोवेशन, प्रौद्योगिकी विकास और रक्षा एवं एयरोस्पेस से संबंधित समस्या समाधान में आईडेक्टस योजना के तहत स्टार्ट-अप के रूप में जोड़ा जाता है। युवा इंजीनियर विभिन्न परियोजनाओं के लिए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के उत्कृष्टता केंद्रों/शैक्षणिक संस्थानों के साथ गठजोड़ के माध्यम से शामिल होते हैं जिनमें अनुसंधान एवं विकास और विनिर्माण शामिल हैं। डीआरडीओ ने विभिन्न आईआईटी, आईआईएससी, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों में 15 डीआरडीओ उद्योग अकादमी-उत्कृष्टता केंद्र (डीआईए-सीओई) स्थापित किए हैं, जिनमें से छह 2023 में चालू हो गए हैं। डीपीएसयू और निजी क्षेत्र रक्षा क्षेत्र में विभिन्न परियोजनाओं के लिए विशेषज्ञता वाले प्रशिक्षित युवाओं को काम पर रख रहे हैं।

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प्रधानमंत्री कोयला मंत्रालय के अंतर्गत महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड की अनेक परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे

मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी प्रदान करने और दक्षता बढ़ाकर लॉजिस्टिक्स लागत कम करने के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के सिद्धांतों के अनुरूप, कोयला मंत्रालय ने कोयले की कुशल निकासी को और बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे में वृद्धि की है। कोयला उत्पादक क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क को बढ़ाने के उद्देश्य से सीआईएल, इरकॉन और ओडिशा सरकार ने “महानदी कोल रेल लिमिटेड” के रूप में संयुक्त उद्यम गठित किया है। सीआईएल ने अतिरिक्त रेल लाइनें बिछाने, मौजूदा रेल लाइनों के दोहरीकरण, रेल-ओवर-रेल (आरओआर), वाई-कर्व्स आदि के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण रेल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्त पोषित किया है।

सभी सहायक कंपनियों में, सीआईएल ने फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजनाओं के निर्माण के माध्यम से पिट-हेड से रेलवे लोडिंग पॉइंट तक मशीनीकृत कोयला परिवहन बुनियादी ढांचा स्थापित करने की योजना बनाई है। सभी बड़ी खदानों के लिए कुल 100 से अधिक एफएमसी परियोजनाओं की योजना बनाई गई है। ये परियोजनाएँ एक ओर लोडिंग दक्षता में सुधार करती हैं, लोडिंग समय को कम करती हैं और दूसरी ओर उत्सर्जन और प्रदूषण को कम करने में योगदान देती हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 3 फरवरी, 2024 को ओडिशा में महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) की महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इनमें से एक भुवनेश्वरी चरण- I, तालचेर कोलफील्ड्स, अंगुल जिले में एक फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजना है। 335 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह परियोजना रेक लोडिंग का समय लगभग 50 मिनट तक कम कर देगी, पर्यावरण-अनुकूल ढुलाई शुरू कर देगी, इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी और कोयले की ढुलाई लागत कम हो जाएगी।

एक अन्य महत्वपूर्ण परियोजना लगभग 375 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित लाजकुरा रैपिड लोडिंग सिस्टम (आरएलएस) है। इस प्रणाली को कोयले की गुणवत्ता और आपूर्ति बढ़ाने, लगभग 50 मिनट का लोडिंग समय प्राप्त करने, पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को अपनाने, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और कोयले की समग्र ढुलाई लागत को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये प्रयास न केवल पर्यावरणीय प्रभाव को काफी हद तक कम करते हैं बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के मूल्यवान अवसर भी पैदा करते हैं।

इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के अलावा, प्रधानमंत्री ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले में 550 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित आईबी वैली वॉशरी का भी उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना गुणवत्ता के लिए कोयला प्रसंस्करण में एक बुनियादी परिवर्तन, नवाचार और स्थिरता को दर्शाने, कोयला गुणवत्ता मानकों के लिए मानक बढ़ाने का प्रतीक होगी और स्वच्छ और अधिक कुशल ऊर्जा समाधानों के लिए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप होगी।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) द्वारा 878 करोड़ रुपये के निवेश से निर्मित झारसुगुड़ा-बारपाली-सारडेगा रेल लाइन चरण -1 का 50 किलोमीटर लंबा दूसरा ट्रैक राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह विस्तार रेल बुनियादी ढांचे को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने, निर्बाध परिवहन की सुविधा प्रदान करने और कुशल कोयला आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए तैयार है।

लगभग 2145 करोड़ रुपये के संयुक्त निवेश के साथ, ये प्रयास निरंतर और कुशल ऊर्जा आपूर्ति के लिए कोयला बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं। इन परियोजनाओं से ओडिशा में कोयला उद्योग को महत्वपूर्ण लाभ होने और देश की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान मिलने की उम्मीद है।

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डी जी कॉलेज में मनाया गया विश्व कैंसर दिवस

कानपुर 4 फरवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता, डी जी कॉलेज में सेंचरी क्लब , मिशन शक्ति तथा एन एस एस के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के निर्देशन में विश्व कैंसर दिवस मनाया गया। जिसमें प्राचार्य प्रो अर्चना वर्मा जी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिवर्ष विश्व कैंसर दिवस 4 फरवरी को कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर छात्राओं ने भी अपने विचार रखें तथा पोस्टर बनाकर, नुक्कड़ नाटक के द्वारा पास में स्थित मलिन बस्ती अस्पताल घाट में जाकर लोगों को कैंसर के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कर स्वस्थ कानपुर, स्वस्थ समाज के निर्माण का संदेश दिया। इस अवसर पर छात्राओं ने लोगों से बातचीत कर उन्हें तंबाकू, सिगरेट, नशीले पदार्थों का सेवन न करने तथा एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने एवं योग के द्वारा निरोग रहने की अपील की। कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस वालंटियर आकांक्षा यादव ने अग्रणी भूमिका निभाई साथ ही महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ निवेदिता टंडन समेत बायोटेक्नोलॉजी विभाग से अन्य प्राध्यापिकाओं डॉ मिली दुआ, डॉ पूनम, एवं डॉ मेहविश आदि का सहयोग भी सराहनीय रहा।

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कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की पीसीएस परीक्षा- 2023 में डिप्टी एसपी पद पर चयनित होने पर औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने एकता केसरवानी को घर जाकर बधाई दी। कानपुर नगर के जूही एरिया निवासी अजय केसरवानी की पुत्री एवं किशन केसरवानी की भतीजी कुमारी एकता केसरवानी का डिप्टी एसपी पद पर चयन हुआ था । जिससे रिश्तेदारों और शुभचिंतको मे ख़ुशी की लहर थी आज मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी एकता केसरवानी के घर पहुंचे इस दौरान मंत्री ने उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ही सफल प्रशासनिक कार्यकाल की अग्रिम शुभकामना भी दी। इस दौरान परिवार के सदस्य दीपक गुप्ता , विजय केसरवानी सहित बड़ी संख्या मे लोग मौजूद थे

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5वां गणतंत्र दिवस: राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों के 12 कर्मियों को मरणोपरांत सहित 80 सैन्य कर्मियों को वीरता पुरस्कार प्रदान किये जाने की स्वीकृति प्रदान की

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 75वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सशस्त्र बलों के 12 कर्मियों को मरणोपरांत सहित 80 सैन्य कर्मियों को वीरता पुरस्कार प्रदान किये जाने की स्वीकृति प्रदान की है। इनमें छह कीर्ति चक्र शामिल हैं, जिनमें से तीन मरणोपरांत होंगे; 16 शौर्य चक्र दो मरणोपरांत सहित; 53 सेना पदक सात मरणोपरांत सहित; एक नौसेना पदक (वीरता) और चार वायु सेना पदक (वीरता) दिये जाएंगे।

राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों एवं अन्य कर्मियों के लिए 311 रक्षा सम्मान पदकों को भी मंजूरी दी है। इनमें 31 परम विशिष्ट सेवा पदक; चार उत्तम युद्ध सेवा पदक; अति विशिष्ट सेवा पदक के लिए दो बार; 59 अति विशिष्ट सेवा पदक; 10 युद्ध सेवा पदक; सेना मेडल (कर्तव्य के प्रति समर्पण) हेतु आठ बार; 38 सेना पदक (कर्तव्य के प्रति समर्पण); 10 नौसेना पदक (कर्तव्य के प्रति समर्पण); 14 वायु सेना पदक (कर्तव्य के प्रति समर्पण); विशिष्ट सेवा पदक के लिए पांच बार और 130 विशिष्ट सेवा पदक शामिल हैं।

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प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 19,100 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर में 19,100 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। ये परियोजनाएं रेल, सड़क, तेल एवं गैस और शहरी विकास एवं आवास जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित हैं।

एकत्रित जनसमूह को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने बुलंदशहर के लोगों, विशेषकर भारी संख्या में उपस्थित माताओं और बहनों द्वारा दिखाए गए स्नेह और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया। श्री मोदी ने 22 जनवरी को भगवान श्री राम के दर्शन और आज उत्तर प्रदेश के लोगों की उपस्थिति को अपनी खुशकिस्‍मती बताते हुए धन्यवाद दिया। उन्होंने रेलवे, हाईवे, पेट्रोलियम पाइपलाइन, पानी, सीवेज, मेडिकल कॉलेज और औद्योगिक टाउनशिप जैसे क्षेत्रों में आज 19,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं के लिए बुलंदशहर और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को बधाई दी। उन्होंने यमुना और राम गंगा नदियों के स्वच्छता अभियान से जुड़ी परियोजनाओं के उद्घाटन का भी जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र ने देश को कल्याण सिंह जैसा सपूत दिया है, जिन्होंने अपना जीवन राम काज और राष्ट्र काज दोनों के लिए समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि देश ने श्री कल्याण सिंह और उनके जैसे लोगों का अयोध्या धाम का सपना पूरा किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”एक मजबूत राष्ट्र और सच्चे सामाजिक न्याय के उनके सपने को साकार करने के लिए हमें और गति हासिल करनी होगी।”

अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के समापन पर बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने ‘राष्ट्र प्रतिष्ठा’को प्राथमिकता देने और इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर जोर दिया। श्री मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित भारत में बदलने के सरकार के संकल्प पर प्रकाश डालते हुए कहा, “हमें देव से देश और राम से राष्ट्र के मार्ग को आगे बढ़ाना चाहिए।” उच्च लक्ष्यों को पूरा करने के बारे में, प्रधानमंत्री ने सबका प्रयास की भावना के साथ आवश्यक संसाधनों को इकट्ठा करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि, विज्ञान, शिक्षा, उद्योग और उद्यम के क्षेत्रों को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता पर ध्यान देते हुए कहा, “विकसित भारत के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश का तेज गति से विकास जरूरी है।” उन्होंने कहा, “आज का अवसर इस दिशा में एक बड़ा कदम है।”

प्रधानमंत्री ने आजादी के बाद के भारत में विकास के क्षेत्रीय असंतुलन का जिक्र करते हुए कहा कि सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की उपेक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने ‘शासक’मानसिकता, और पूर्व में सत्ता की खातिर सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने की की आलोचना की, जिसके परिणामस्वरूप राज्य और देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी। प्रधानमंत्री ने सवाल किया, “अगर देश का सबसे बड़ा राज्य कमजोर था, तो देश कैसे मजबूत हो सकता था?”

उत्तर प्रदेश में 2017 मेंडबल इंजन की सरकार के गठन के साथ, प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य ने पुरानी चुनौतियों से निपटने के नए तरीके खोजे हैं और आर्थिक विकास को गति प्रदान की है और आज का अवसर सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाल के विकास का उदाहरण देते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत में दो रक्षा गलियारों में से एक के विकास और कई नए राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक एक्सप्रेसवे के माध्यम से यूपी के सभी हिस्सों में कनेक्टिविटी बढ़ाने, पहली नमो भारत ट्रेन परियोजना की शुरुआत, कई शहरों में मेट्रो कनेक्टिविटी और राज्य को पूर्वी और पश्चिमी समर्पित माल गलियारों का केन्‍द्र बनाने पर सरकार विशेष रूप से जोर दे रही है। उन्होंने जोर देकर कहा, “ये विकास परियोजनाएं आने वाली सदियों तक प्रभावशाली रहेंगी।”प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट के पूरा होने से इस क्षेत्र को नई ताकत और उड़ान मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा, ”सरकार के प्रयासों से आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश देश में प्रमुख रोजगार प्रदाता क्षेत्रों में से एक बन रहा है।”प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार 4 विश्वस्तरीय औद्योगिक स्मार्ट शहरों पर काम कर रही है। इनमें से एक शहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में है, प्रधानमंत्री ने आज इस महत्वपूर्ण टाउनशिप का उद्घाटन किया। इससे क्षेत्र के उद्योग और लघु एवं कुटीर व्यवसायों को लाभ होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टाउनशिप कृषि आधारित उद्योग के लिए नए रास्ते खोलेगी और स्थानीय किसानों और श्रमिकों को अत्यधिक लाभ प्रदान करेगी।

पहले के समय में कनेक्टिविटी की कमी के कारण कृषि पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका समाधान नए हवाई अड्डे और नए समर्पित माल गलियारे में देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी और मंडी में उपज बिकने के बाद सीधे किसानों के खाते में त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डबल इंजन सरकार की सराहना की। इसी तरह, इथेनॉल पर ध्यान देना गन्ना किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रहा है।

श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “किसानों का कल्याण हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने भारतीय किसानों के लिए कम लागत वाले उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि भारत के बाहर यूरिया का एक थैला जिसकी कीमत 3,000 रुपये है, किसानों को 300 रुपये से भी कम कीमत में उपलब्ध कराया जाता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नैनो यूरिया के निर्माण के बारे में भी बात की, जिसकी एक छोटी बोतल उर्वरक की एक बोरी के बराबर काम करती है। इससे खपत कम और पैसे की बचत होती है। श्री मोदी ने बताया कि सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में 2.75 लाख करोड़ रुपये भेजे हैं।

प्रधानमंत्री ने कृषि और कृषि-अर्थव्यवस्था में किसानों के योगदान को रेखांकित करते हुए, सहकारी समितियों के दायरे के निरंतर विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने छोटे किसानों को मजबूत करने के उपायों के रूप में पीएसी, सहकारी समितियों और एफपीओ को गिनाया। बिक्री-खरीद, ऋण, खाद्य प्रसंस्करण या निर्यात के लिए सहकारी संस्थाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। श्री मोदी ने दुनिया की सबसे बड़ी भंडारण संबंधी योजनाओं का भी जिक्र किया जिसके तहत पूरे देश में कोल्ड स्टोरेज का नेटवर्क बनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए सरकार के प्रयासों को दोहराया और इस तथ्य को रेखांकित किया कि नारी शक्ति इसका एक बड़ा माध्यम बन सकती है। उन्होंने नमो ड्रोन दीदी योजना का उल्लेख किया जहां महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन पायलट बनने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “नमो ड्रोन दीदी भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए एक बड़ी ताकत बनने जा रही है।”

छोटे किसानों और महिलाओं को सशक्त बनाने हेतु पिछले 10 वर्षों के दौरान शुरू की गई लोक कल्याण योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने करोड़ों पक्के मकानों, शौचालयों, नल के पानी के कनेक्शन, किसानों एवं मजदूरों के लिए पेंशन सुविधाओं, पीएम फसल बीमा योजना जिसके तहत फसल बर्बाद होने की स्थिति में किसानों को 1.5 लाख करोड़ रुपये दिए जाते हैं, मुफ्त राशन योजना और आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा, “सरकार का प्रयास है कि कोई भी लाभार्थी सरकारी योजना से वंचित न रहे और इसके लिए मोदी की गारंटी वाहन हर गांव तक पहुंच रहे हैं और उत्तर प्रदेश में भी लाखों लोगों का नामांकन कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “यह मोदी की गारंटी है कि हर नागरिक को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले। आज देश मोदी की गारंटी को किसी भी गारंटी के पूरा होने की गारंटी मानता है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “आज हम यह सुनिश्चित करने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं कि सरकारी योजना का लाभ हर लाभार्थी तक पहुंचे। इसीलिए मोदी संतृप्ति की गारंटी दे रहा है। मोदी शत प्रतिशत लाभार्थियों तक पहुंचने पर जोर दे रहा है।” इससे भेदभाव या भ्रष्टाचार की कोई भी संभावना नहीं रह जाती है। उन्होंने कहा, “यही सच्ची धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय है।” उन्होंने कहा कि किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं के सपने हर समाज में एक जैसे होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के वास्तविक प्रयासों से पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरे लिए आप ही मेरा परिवार हैं। आपका सपना ही मेरा संकल्प है।” उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि देश के सामान्य परिवारों के सशक्तिकरण ही मोदी की संपत्ति बनी हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि चाहे गांव हों, गरीब हों, युवा हों, महिलाएं हों या किसान हों, सभी को सशक्त बनाने का अभियान जारी रहेगा।

इस अवसर पर, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक और भारत के केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह भी उपस्थित थे।

 

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मालगाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) पर न्यू खुर्जा-न्यू रेवाड़ी के बीच 173 किलोमीटर लंबी डबल लाइन विद्युतीकृत खंड को राष्ट्र को समर्पित किया। यह नया डीएफसी खंड काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पश्चिमी और पूर्वी डीएफसी के बीच अहम संपर्क स्थापित करता है। इसके अलावा, यह खंड इंजीनियरिंग की उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए भी जाना जाता है। इसमें ‘उच्च विद्युतीकरण के साथ एक किलोमीटर लंबी डबल लाइन रेल सुरंग’ है, जो दुनिया में अपनी तरह की पहली सुरंग है। इस सुरंग को डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों को निर्बाध रूप से चलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। मालगाड़ियां अब इस नए डीएफसी ट्रैक पर चलेंगी जिससे यात्री ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने मथुरा-पलवल खंड और चिपियाना बुजुर्ग-दादरी खंड को जोड़ने वाली चौथी लाइन भी राष्ट्र को समर्पित की। ये नई लाइनें राष्ट्रीय राजधानी की दक्षिणी पश्चिमी और पूर्वी भारत तक रेल कनेक्टिविटी में सुधार करेंगी।

प्रधानमंत्री ने कई सड़क विकास परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं। इन परियोजनाओं में अलीगढ़ से भदवास फोर-लेन कार्य पैकेज-1 (एनएच-34 के अलीगढ़-कानपुर खंड का हिस्सा); शामली (एनएच-709ए) के माध्यम से मेरठ से करनाल सीमा का चौड़ीकरण; और एनएच-709 एडी पैकेज-II के शामली-मुजफ्फरनगर खंड को चार लेन का बनाना शामिल हैं। 5000 करोड़ रुपये से अधिक की कुल लागत से विकसित ये सड़क परियोजनाएं कनेक्टिविटी में सुधार करेंगी और क्षेत्र में आर्थिक विकास में मदद करेंगी।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने इंडियन ऑयल की टूंडला-गवारिया पाइपलाइन का भी उद्घाटन किया। करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह 255 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन परियोजना तय समय से काफी पहले पूरी हो गई है। यह पाइपलाइन परियोजना मथुरा और टूंडला में पंपिंग सुविधाओं और टूंडला, लखनऊ और कानपुर में डिलीवरी सुविधाओं के साथ बरौनी-कानपुर पाइपलाइन के टूंडला से गवारिया टी-पॉइंट तक पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन में मदद करेगी।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को ‘ग्रेटर नोएडा में एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप’ (आईआईटीजीएन) भी समर्पित किया। इसे पीएम-गतिशक्ति के तहत बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित कार्यान्वयन के प्रधानमंत्री के विज़न के अनुरूप विकसित किया गया है। इस परियोजना पर 1,714 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह परियोजना 747 एकड़ में फैली हुई है। यह दक्षिण में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और पूर्व में दिल्ली-हावड़ा ब्रॉड गेज रेलवे लाइन के साथ पूर्वी और पश्चिमी समर्पित माल गलियारों के चौराहे के पास स्थित है। आईआईटीजीएन का रणनीतिक स्थान अद्वितीय कनेक्टिविटी सुनिश्चित करता है क्योंकि मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के लिए अन्य बुनियादी ढांचे जैसे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे (5 किमी), यमुना एक्सप्रेसवे (10 किमी), दिल्ली एयरपोर्ट (60 किमी), जेवर एयरपोर्ट (40 किमी), अजायबपुर रेलवे स्टेशन (0.5 किमी) और न्यू दादरी डीएफसीसी स्टेशन (10 किमी) इस परियोजना के आसपास मौजूद हैं। यह परियोजना क्षेत्र में औद्योगिक विकास, आर्थिक समृद्धि और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने लगभग 460 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण सहित पुनर्निर्मित मथुरा सीवरेज योजना का उद्घाटन किया। इस कार्य में मसानी में 30 एमएलडी एसटीपी का निर्माण, ट्रांस यमुना में मौजूदा 30 एमएलडी और मसानी में 6.8 एमएलडी एसटीपी का पुनर्वास और 20 एमएलडी टीटीआरओ प्लांट (तृतीयक उपचार और रिवर्स ऑस्मोसिस प्लांट) का निर्माण शामिल है। उन्होंने मुरादाबाद  (रामगंगा) सीवरेज प्रणाली और एसटीपी कार्यों (चरण I) का भी उद्घाटन किया। लगभग 330 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना में 58 एमएलडी एसटीपी, लगभग 264 किमी लंबा सीवरेज नेटवर्क और मुरादाबाद में रामगंगा नदी के प्रदूषण निवारण के लिए नौ सीवेज पंपिंग स्टेशन शामिल हैं।

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