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विश्व कुष्ठ रोग दिवस के मौके पर, सीसीपीडी द्वारा कुष्ठ रोग से जूझ रहे विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने, मिथकों को तोड़ने और इससे जुड़े कलंक को मिटाने के लिए वर्चुअल सेमिनार आयोजित

मुख्य आयुक्त (सीसीपीडी), दिव्यांगजन, के कार्यालय ने विश्व कुष्ठ रोग दिवस के अवसर पर एक वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों और इस क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अनुभवों का आदान-प्रदान करना, मंथन करना और कुष्ठ रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना था, साथ ही समाज की मुख्यधारा में प्रभावित व्यक्तियों को शामिल करने की वकालत करके मिथकों को तोड़ना और कलंक को मिटाना था। राजेश अग्रवाल, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) एवं मुख्य आयुक्त दिव्यांगजन (सीसीपीडी), ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। एस. गोविन्दराज, आयुक्त, विशिष्ट अतिथि थे। पैनल में डॉ. एस. शिवसुब्रमण्यम, वरिष्ठ वैज्ञानिक; डॉ. शिवकुमार, कुष्ठ रोग विशेषज्ञ; सुश्री निकिता सारा, द लेप्रोसी मिशन ट्रस्ट इंडिया में वकालत और संचार प्रमुख; और अंतर्राष्ट्रीय कुष्ठ संघ के अध्यक्ष डॉ. पी. नरसिम्हा राव शामिल थे। कार्यक्रम की शुरुआत माधव साब्ले द्वारा मराठी में गाए गए एक प्रार्थना से हुई, जिसका बाद में श्री प्रवीण प्रकाश अंबस्था, डिप्टी सीसीपीडी द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किया गया। श्री विकास त्रिवेदी, डिप्टी सीसीपीडी, ने सेमिनार में पैनलिस्टों और प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. गोविन्दराज ने उद्घाटन भाषण दिया। राजेश अग्रवाल ने तीन दशक पहले एक युवा अधिकारी के रूप में महाराष्ट्र के जलगाँव में एक कुष्ठ रोग कॉलोनी का दौरा करने के अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग के कारण होने वाला अस्पृश्यता जाति आधारित भेदभाव से भी बदतर है, क्योंकि इसमें अपने परिवार के सदस्य भी प्रभावित व्यक्ति से दूरी बनाए रखते हैं। उन्होंने कानूनी सुधारों के महत्व और मामलों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने के लिए सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उपचार के बाद पुनर्वास उपायों के महत्व पर भी बल दिया।एस. गोविन्दराज ने कुष्ठ रोग से जुड़े कलंक और भेदभाव को तोड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत में अभी भी 750 कुष्ठ रोग कॉलोनियाँ हैं जो समाज की मुख्यधारा से अलग-थलग हैं। उन्होंने इस बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों द्वारा सामना की जाने वाली कानूनी चुनौतियों का भी जिक्र किया और व्यापक समाधान का आह्वान किया। डॉ. एस. शिवसुब्रमण्यम ने कुष्ठ रोग का एक सिंहावलोकन प्रस्तुत किया और खुलासा किया कि भारत में वैश्विक कुष्ठ रोग के 53% मामले हैं। उन्होंने भेदभाव को खत्म करने और प्रभावित व्यक्तियों का समर्थन करने के लिए समुदाय-आधारित पुनर्वास के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. शिवकुमार ने कुष्ठ रोग के हाल के ट्रेंड पर चर्चा की, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सबसे कम संक्रामक बीमारियों में से एक है। उन्होंने बताया कि भारत में 700 से अधिक जिलों में से 125 जिलों में अभी भी बड़ी संख्या में मामले दर्ज हो रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि ये जिले 14 राज्यों में फैले हुए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक 24 जिले हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2030 तक शून्य घरेलू स्वदेशी केस दर्ज करना है। निकिता सारा ने पीड़ितों को समाज से फिर से जोड़ने में मदद करने के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग से मुकाबला करने में अज्ञानता सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि समय पर पता चल जाए तो कुष्ठ रोग सबसे आसानी से ठीक होने वाली बीमारियों में से एक है और स्पष्ट किया कि यह कोई विकृति या विकलांगता नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कुष्ठ रोग से जुड़ा कलंक जागरूकता की कमी के कारण उत्पन्न होता है। डॉ. पी. नरसिम्हा राव ने कुष्ठ रोग के उन्मूलन में चिकित्सीय पहलुओं और चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस बीमारी को जैविक रूप से अनूठी बताया और कहा कि यह दुनिया के अधिकांश हिस्सों में दुर्लभ है, लेकिन ब्राजील, भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों में यह अभी भी चिंता का विषय है। कुष्ठ रोग से जूझने में अग्रणी सुश्री शबनम खान ने अपनी यात्रा साझा की जो कि दृढ़ता का प्रमाण है। कुष्ठ रोग और सामाजिक अस्वीकृति से जूझने के बावजूद, उन्होंने बाधाओं को पार कर अपने परिवार की पहली स्नातक बनने और एक स्वतंत्र जीवन जीने का लक्ष्य प्राप्त किया। सेमिनार का समापन कुष्ठ रोग को मिटाने और इससे प्रभावित लोगों का समर्थन करने के लिए अधिक जागरूकता, शीघ्र पता लगाने और पुनर्वास के व्यापक प्रयासों के आह्वान के साथ हुआ।

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पीएम सूर्याघर का उद्देश्य नागरिकों को ऊर्जा उत्पादक बनने के लिए सशक्त बनाना है: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री सौरघर-मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य नागरिकों को ऊर्जा उत्पादक बनाकर उन्हें सशक्त बनाना है, साथ ही डिस्कॉम को बिजली बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। मंत्री महोदय नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए आमंत्रित नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के 750 विशेष अतिथियों को संबोधित कर रहे थे।केंद्रीय मंत्री ने कहा “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, आम लोग अब भारत की अक्षय ऊर्जा क्रांति के केंद्र में हैं। उनका काम, समर्पण और सफलता इस बात का सबूत है कि हम एक राष्ट्र के रूप में क्या हासिल कर सकते हैं। पीएम सूर्यघर और पीएम कुसुम के लाभार्थी भारत के अक्षय ऊर्जा आंदोलन के असली राजदूत हैं।” उन्होंने देश की अक्षय ऊर्जा यात्रा में नेतृत्व करने के लिए उनकी सराहना भी की।

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देश के विभिन्न भागों से पीएम सूर्याघर और पीएम कुसुम के लाभार्थियों ने इस अवसर पर बात की। उन्होंने समय पर प्राप्त होने वाली सब्सिडी, बिना किसी हस्तक्षेप के पीएम सूर्याघर पोर्टल पर आसानी से पंजीकरण कराने और इसके कारण बिजली बिल शून्य होने और भारी बचत की सराहना की।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा, “कर्नाटक के धारवाड़ में, पीएम सूर्य घर के एक लाभार्थी ने सौर ऊर्जा अपनाकर शून्य बिजली बिल प्राप्त किया। केंद्र सरकार से ₹78,000 की सब्सिडी के साथ, यह सफलता की कहानी पूरे देश में टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल समाधानों को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को उजागर करती है।”उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के पीएम कुसुम लाभार्थी राकेश रोही ने बताया कि पीएम कुसुम योजना से लाभान्वित होने के बाद उन्होंने अपने खेत में सोलर पंप लगवाए हैं। इससे उनकी उपज में काफी सुधार हुआ है।

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एमएनआरई के विशेष अतिथियों ने पीएम संग्रहालय का दौरा किया और गणतंत्र दिवस परेड देखेंगे।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव निधि खरे ने कहा कि मंत्रालय योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार के लिए लाभार्थियों से सीखने और उन्हें सुनने के लिए हमेशा तत्पर है। इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव ललित बोहरा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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ग़णतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर प्रज्ञा परिवार द्वारा IMA के सहयोग से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 जनवरी ग़णतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर प्रज्ञा परिवार द्वारा कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि, कानपुर पूर्व भाग एवं IMA के सहयोग से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन IMA, कानपुर के सहयोग से प्रज्ञा परिवार (संबद्ध अखिल विश्व गायत्री परिवार) श्याम नगर कानपुर द्वारा लगाए गए रक्तदान शिविर में कुल 66 यूनिट रक्तदान हुआ। 18अगस्त 2024 को हुए रक्तदान शिविर में 56 यूनिट रक्त दान हुआ था। सर्वप्रथम भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवम दीपक प्रज्वलन कर प्रज्ञा परिवार के चेयरमैन अशोक पाण्डेय जी ने रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। पांडे जी ने रक्तदान के फायदे बताकर लोगों का मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्धन किया। प्रज्ञा परिवार ने सभी रक्तदानियों को “रक्तदानी कर्ण” की उपाधि वाला प्रमाण पत्र दिया। कर्ण ने कभी भी अपने दरवाजे से किसी को खाली हाथ नहीं जाने दिया। प्रज्ञा परिवार भी जरूरत पड़ने पर जरूरतमंद के लिए रक्तदान की व्यवस्था करता है।

IMA की ओर से सभी रक्तदानियों को उपहार स्वरूप मिल्टन की बोतल एवं प्रमाण पत्र दिया गया।राष्ट्र सेवा के अंतर्गत प्रज्ञा परिवार प्रत्येक 15 अगस्त एवं 26 जनवरी या पास के रविवार को रक्तदान शिविर का आयोजन करता रहता है।रक्तदान शिविर में सहयोग करने वालों में प्रमुख रूप से अध्यक्ष आर जे मिश्रा, अजय अग्रवाल, सुनील विश्वकर्मा, दिवाकर दीक्षित, शिवानंद गुप्ता, अच्छेलाल, सी एम मिश्रा, दीपक मिश्रा, निर्भय कुमार, सुरेश चंद्र जोशी, मुकेश आदि थे।

परिणय गेस्ट हाउस के मालिक भुवन अवस्थी,  ठंडो जी एवं पांडे जी को रक्तदान शिविर हेतु निशुल्क स्थान देने पर धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

 

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जन जागृति युवा समिति द्वारा किया गया झंडारोहण

भारतीय स्वरूप संवादसूत्र सुभाष मिश्र कानपुर 26 जनवरी श्यामनगर में जन जागृति युवा समिति के संयोजक एडवोकेट धर्मेंद्र पांडे के नेतृत्व में आज ध्वजारोहण का कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें बच्चों के द्वारा रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए क्षेत्र के गणमाय व्यक्तियों के द्वारा बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया मुख्य अतिथि के रूप में उत्तम कृष्ण दीक्षित, श्रीराम शुक्ला, जवाहरलाल साहू, राजेश मिश्रा, डॉक्टर विनीत दीक्षित, डॉ रंजना खंडेलवाल, अतुल दीक्षित, दीपक यादव, नवनीत श्रीवास्तव मधुसूदन साहू, प्रमोद खंडेलवाल, शिवकुमार शर्मा, सुभाष मिश्रा, सुदीप मिश्रा आदि लोग उपस्थित रहे

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डी जी कॉलेज द्वारा निकाली गई गणतंत्र दिवस परेड झांकी

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 जनवरी, 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर के द्वारा छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में महाकुंभ थीम पर झांकी निकाली गई। साथ ही छात्राओं ने महाकुंभ थीम पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओ में भी हिस्सा लिया। जिनमें रंगोली प्रतियोगिता, नृत्य प्रतियोगिता, गायन प्रतियोगिता आदि प्रमुख है। छात्राओं ने अत्यधिक जोश, उत्साह एवं उमंग के साथ हिस्सा लिया। समस्त कार्यक्रम छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक जी की प्रेरणा से संपन्न हुए। कार्यक्रमों को सफल बनाने में कार्यक्रम समन्वयक डॉ श्याम मिश्रा, महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम, कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही, गृह विज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ विनीता श्रीवास्तव समेत डॉ अलका त्रिपाठी डॉ अपर्णा शुक्ला, डॉ साधना सिंह एवं डॉ रश्मि शुक्ला का सहयोग सराहनीय रहा

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एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज में 76 वाँ गणतंत्र दिवस मनाया गया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 जनवरी एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज में 76 वां गणतंत्र दिवस मनाया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डॉ वंदना पाठक आयुर्वेदाचार्य ,महाविद्यालय प्रबंध तंत्र के अध्यक्ष पी के मिश्रा,सचिव पी के सेन ,सयुक्त सचिव शुभ्रों सेन, कोषाध्यक्ष दीपाश्री सेन, सदस्य भूतपूर्व क्रिकेटर गोपाल शर्मा प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने झंडारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात प्राचार्या प्रो सुमन ने अतिथिगण तथा प्रबंध समिति का सम्मान किया। महाविद्यालय की चीफ़ प्रॉक्टर कप्तान ममता अग्रवाल ने उच्च शिक्षा अधिकारी का संदेश पढ़ा। एन सी सी, रोवर रेंजर तथा एन एस एस की छात्राओ ने मार्च पास्ट किया और तलानी दी। कार्यक्रम में महाविद्यालय का नाम रोशन करने वाली मेधावी छात्राओं का सम्मान किया गया जिसमे कु सृष्टि राजपाल बी एस सी तृतीय वर्ष की छात्रा जिसका
जी एस वी एम, लखनऊ मेडिकल कालेज में सेलेक्शन हुआ, कु निकिता सविता ,कु सृष्टि रावत तथा कु ऋतुजा रही।देश भक्ति के गीत संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का संकलन एवं संचालन डॉ प्रीति सिंह ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की समस्त शिक्षिकाएं तथा तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उपस्थित रहे ।

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डी जी कॉलेज द्वारा 15वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर शपथ एवं रैली का आयोजन

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 25 जनवरी दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज कानपुर में 15वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर बीएड विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पुष्पलता तिवारी एवं डॉ उमा अवस्थी के कुशल निर्देशन में मतदाता शपथ एवं रैली का आयोजन किया गया। महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही मुहिम “वोट जैसा कुछ नहीं, वोट जरुर डालेंगे हम” के अंतर्गत समस्त छात्राओं को स्वयं अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए तथा अपने परिवार, रिश्तेदार एवं आस पड़ोस को भी मतदान करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। महाविद्यालय निदेशक प्रो अर्चना वर्मा ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि मतदान करना प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है हमें बिना किसी लालच तथा जाति, धर्म आदि के भेदभाव के बिना योग्य व्यक्तियों का चुनाव करना चाहिए ताकि एक अच्छी लोकतांत्रिक सरकार का गठन हो सके।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश शासन तथा क्षेत्रीय उच्च शिक्षा निदेशक, कानपुर मंडल, कानपुर नगर श्री मुरलीधर राम जी एवं मतदाता जागरूकता कार्यक्रम प्रभारी प्रो अपर्णा सिंह के निर्देशानुसार चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित मतदाता जागरूकता कार्यक्रम एवं सम्मान समारोह में महाविद्यालय की 100 छात्राओं ने प्रतिभाग किया।कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय की मतदाता जागरूकता अभियान – निर्वाचन साक्षरता क्लब कोऑर्डिनेटर डॉ संगीता सिरोही, बीएड विभाग प्रभारी डॉ सबीहा अंजुम, समस्त प्राध्यापिकाओं तथा कार्यालय अधीक्षक कृष्णेंद्र श्रीवास्तव का विशेष योगदान सराहनीय रहा।

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न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) यू.यू. ललित ने विधि शिक्षा का आह्वान किया, जो अधिवक्ताओं को सामाजिक और आर्थिक न्याय के जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए सक्षम बनाती है

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) यू.यू. ललित ने विधि शिक्षा का आह्वान किया है, जो अधिवक्ताओं को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय के जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए सक्षम बनाती है। उन्होंने भारत सरकार के वाणिज्य विभाग द्वारा स्थापित व्यापार और निवेश कानून केंद्र (सीटीआईएल) के सहयता से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वार्षिक ट्रेडलैब सम्मेलन के पूर्ण सत्र में अपने मुख्य भाषण के दौरान ये बातें कहीं। यह सत्र ट्रेडलैब नेटवर्क और डब्ल्यूटीओ चेयर्स प्रोग्राम के सहयोग से 13 और 14 दिसंबर, 2024 को नई दिल्ली में इंडियन हैबिटेट सेंटर के टैमरिंड हॉल में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का हिस्सा था।

 यू.यू. ललित ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों का उल्लेख किया, जिसने सकारात्मक कार्रवाई और प्रत्येक बच्चे के लिए मुफ्त अनिवार्य प्राथमिक तथा अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा के मौलिक अधिकार के मुद्दे को सामने रखा। उन्होंने भारत के सशक्त सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को आकार देने में उदारीकरण नीति के साथ-साथ आर्थिक न्याय के महत्व पर भी उल्लेख किया। इस संदर्भ में, उन्होंने ट्रेडलैब पहल की सराहना की, जो कानून के विद्यार्थियों को नि:शुल्क आधार पर नैदानिक ​​​​शिक्षा प्रदान करती है। इस कार्यक्रम से भविष्य के अधिवक्ताओं और शिक्षाविदों को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून के दायरे में सामाजिक एवंआर्थिक न्याय के जटिल मुद्दों को हल करने के लिए तैयार कर सकती है।

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उबर टेक्नोलॉजीज के सार्वजनिक नीति प्रमुख श्री संजय चड्ढा ने कार्यक्रम में उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक कानून के महत्व पर जोर दिया, जो यह देखता है कि संप्रभु राष्ट्र कानूनी और आर्थिक दृष्टिकोणों को मिलाकर व्यापार में किस तरह से मुद्दों को हल करते हैं। संजय चड्ढा ने व्यापार वार्ता में अपने अनुभवों से वास्तविक जीवन के किस्से साझा किए। उन्होंने व्यापार समझौतों को समझने में अंतर और वार्ताकारों को बेहतर ढंग से सुसज्जित करने के लिए बातचीत कौशल एवं कानूनी विशेषज्ञता में अधिक क्षमता निर्माण की आवश्यकता जताई।

सम्मेलन का मुख्य विषय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश कानून के क्षेत्र में शिक्षण शिक्षण व नैदानिक ​​कानूनी शिक्षा को आगे बढ़ाना था। इस दौरान कानूनी क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न प्रासंगिक और वर्तमान में न्यायसंगत विषयों पर पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इसके अलावा, मूल्यवान प्रतिक्रिया अवसर प्रदान करने के लिए ट्रेडलैब कार्यकारी समिति के सदस्यों और अकादमिक पर्यवेक्षकों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए।

सम्मेलन के पहले दिन में ट्रेडलैब कार्यकारी समिति के सदस्यों के लिए एक विशेष सीमित सत्र आयोजित हुआ, जिसके बाद ट्रेडलैब इंडिया द्वारा अनुभव-साझाकरण सत्र सहित कई अन्य खुले सत्र भी संचालित हुए। अंतर्राष्ट्रीय कानूनी अभ्यास में नैदानिक ​​​​कानूनी शिक्षा के दायरे और इसके अवसरों पर सत्र तथा शिक्षण शिक्षण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाने पर अंतिम सत्र भी कार्यक्रम का हिस्सा था। सम्मेलन के दूसरे दिन पिछले वर्ष के दौरान आयोजित एमएनएलयू मुंबई, जीएनएलयू व क्यूएमयूएल लंदन की ट्रेडलैब परियोजनाओं पर तीन पैनल चर्चाएं और तीन छात्र प्रस्तुतियां देखी गईं, जिसके बाद समापन सत्र हुआ।

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सम्मेलन ने ट्रेडलैब क्लीनिक के विकास के संबंध में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि का प्रसार किया, जो नवीन दृष्टिकोण को बढ़ावा दे सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश कानून में अभूतपूर्व अनुसंधान करने के लिए कानून के विद्यार्थियों के बीच क्षमता विकसित कर सकता है।

ट्रेडलैब इंडिया का नेतृत्व सीटीआईएल द्वारा हब और स्पोक मॉडल में कानून के विद्यालयों में ट्रेडलैब क्लीनिक स्थापित करके अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून में भारत की क्षमता विकसित करने के लिए किया जाता है। अब तक, सीटीआईएल ने लगभग 15 परियोजनाओं का निर्माण किया है और वर्तमान में 6 शीर्ष स्तरीय राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय सीटीआईएल के ट्रेडलैब क्लीनिक चला रहे हैं।

सीटीआईएल द्वारा संचालित ट्रेडलैब-इंडिया पहल, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून में कानूनी शिक्षा और अभ्यास की क्षमता निर्माण में सबसे आगे है। ट्रेडलैब-इंडिया ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव से सुसज्जित किया है और वैश्विक व्यापार एवं निवेश के मुद्दों के साथ भारत के भविष्य को आकार देने में योगदान दिया है।                  

ट्रेडलैब की शुरुआत अंतर्राष्ट्रीय कानून के जानकार प्रोफेसर जोस्ट पॉवेलिन एवं प्रोफेसर सर्जियो पुइग द्वारा की गई थी और 2013 से सुश्री जेनिफर हिलमैन, प्रोफेसर डेबरा स्टीगर तथा प्रोफेसर वैलेरी ह्यूजेस जैसे प्रसिद्ध चिकित्सकों व शिक्षाविदों के इस पहल में शामिल होने के साथ कार्यक्रम में वैश्विक उपस्थिति दर्ज की गई। ट्रेडलैब को स्विस नागरिक संहिता के तहत स्विट्जरलैंड में एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में शामिल किया गया है। ट्रेडलैब के विद्यार्थियों ने 2023 और 2024 डब्ल्यूटीओ पब्लिक फोरम में सक्रिय रूप से भाग लिया है। ट्रेडलैब की सदस्यता केवल उन विश्वविद्यालयों/केंद्रों के लिए खुली हुई है, जो ट्रेडलैब नेटवर्क के कानूनी क्लिनिक या व्यावहारिक भाग में भाग लेते हैं या भाग लेना चाहते हैं।

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भारत द्वारा आयोजित “अनौपचारिक क्षेत्र में श्रमिकों के लिए औपचारिकीकरण और सामाजिक सुरक्षा कवरेज: चुनौतियाँ और नवाचार” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी नई दिल्ली में संपन्न

श्रम और रोजगार मंत्रालय और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) ने अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (आईएसएसए) के साथ मिलकर यशोभूमि – इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर, नई दिल्ली में दो दिन के अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में सामाजिक सुरक्षा विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और विचारकों ने “अनौपचारिक क्षेत्र में श्रमिकों के लिए औपचारिकीकरण और सामाजिक सुरक्षा कवरेज: चुनौतियां और नवाचार” पर विचार-विमर्श किया।

एशिया प्रशांत क्षेत्र के देशों के सामाजिक सुरक्षा संगठनों, भारत सरकार के मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, श्रमिकों और नियोक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 200 से अधिक प्रतिभागि इस विचार-विमर्श में शामिल हुए।

In the 2nd session of Day 2, experts discussed extending social security coverage to empower women & promote gender equality. Presentations by UN Women & ISSA explored tailored policies & systemic solutions to support the female workforce.#ISSAESIC2025#LabourMinistry#MoLE pic.twitter.com/RCegW8GYiq

— Ministry of Labour & Employment, GoI (@LabourMinistry) January 21, 2025

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने संगोष्ठी का शुभांरभ किया और भारत में सामाजिक सुरक्षा पर एक पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे और श्रम और रोजगार सचिव सुमिता डावरा भी उपस्थित थीं। पुस्तक “भारत में सामाजिक सुरक्षा: अब तक की यात्रा की झलकियाँ” प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक भारत में सामाजिक सुरक्षा और कल्याण परिदृश्य के विकास का वृत्तांत प्रस्तुत करती है।

तकनीकी सत्रों के दौरान लैंगिक समानता, पारदर्शिता और सुशासन पर ध्यान केंद्रित करते हुए सार्वभौमिक, पर्याप्त, टिकाऊ और समावेशी सामाजिक सुरक्षा कवरेज की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञों ने श्रम बाजार के विकास, कवरेज बढ़ाने की चुनौतियों और कमजोर समूहों के लिए औपचारिकता और सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए नवीन ढांचे पर गहन चर्चा की।

Day 2 Session 1 at the ISSA-ESIC International Seminar explored digital solutions like eShram & emphasised effective outreach strategies. Experiences from Nepal added depth to the discussions, setting the stage for innovative reforms ahead.#ISSAESIC2025#LabourMinistryIndia pic.twitter.com/g9bOPmJR0t

— Ministry of Labour & Employment, GoI (@LabourMinistry) January 21, 2025

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन, आईएसएसए, विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र भारत, संयुक्त राष्ट्र महिला और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन सहित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि और वैश्विक दृष्टिकोण साझा किए। ओमान, थाईलैंड, मलेशिया, नेपाल और इंडोनेशिया के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने अनुभव और अध्ययन को प्रदर्शित किया, जबकि प्रतिभागियों ने सामाजिक सुरक्षा कवरेज और औपचारिकता को बढ़ाने के लिए नवीन दृष्टिकोणों पर चर्चा की।

श्रम और रोजगार मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने तकनीकी सत्रों के दौरान ई-श्रम, रोजगार से जुड़ी योजना, गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था के लिए सामाजिक सुरक्षा और ईएसआईसी में स्वास्थ्य देखभाल लाभ सहित अपनी प्रमुख पहलों और उपलब्धियों को प्रस्तुत किया।

Session 3 of Day 2 📊 Measuring progress in #SocialSecurity coverage requires robust data collection, focusing on inclusion, sectoral coverage, and participation rates. (1/2) pic.twitter.com/K3OHHLmF0v

— Ministry of Labour & Employment, GoI (@LabourMinistry) January 21, 2025

श्रम एवं रोजगार सचिव सुश्री सुमिता डावरा ने अपने समापन भाषण में सभी को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के दृष्टिकोण की दिशा में भारत द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने स्वास्थ्य सुरक्षा, पेंशन, आजीविका और खाद्य सुरक्षा के प्रावधान में भारत की उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने कहा, “ई-श्रम पोर्टल अनौपचारिक श्रमिकों को उनकी सामाजिक सुरक्षा और कल्याण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए “वन स्टॉप सॉल्यूशन” प्रदान करके भारतीय सामाजिक सुरक्षा परिदृश्य को नया आकार देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”

अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (आईएसएसए) के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद अज़मान ने अनौपचारिक श्रमिकों सहित श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में भारत के पथप्रदर्शक प्रयासों की सराहना की।

🌟 The two-day ‘ISSA-ESIC International Seminar’ emphasized addressing challenges faced by informal workers, with solutions focusing on universality, adequacy, and gender equality. (1/2) pic.twitter.com/KZh6KcqZnR

— Ministry of Labour & Employment, GoI (@LabourMinistry) January 21, 2025

श्रम और रोजगार मंत्रालय तथा ईएसआईसी, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), रोजगार महानिदेशक और श्रम कल्याण महानिदेशक सहित इसके संगठनों के इंटरेक्टिव डिजिटल कियोस्क को प्रतिभागियों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली।

मंत्रालय की ऐतिहासिक पहलों ई-श्रम, एनसीएस पोर्टल, श्रम सुधार, ईपीएफओ और ईएसआईसी को डिजिटल फ्लिपबुक और वर्चुअल रियलिटी (वीआर) प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। इन आकर्षक कियोस्क ने सामाजिक सुरक्षा को अधिक सुलभ, पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की भारत की प्रतिबद्धता पर बल दिया।

सेमिनार के समापन पर श्रम और रोजगार सचिव ने निरंतर संवाद और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सामाजिक सुरक्षा सभी तक पहुंचे और कोई भी श्रमिक पीछे न छूटे।

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आयुध पैराशूट निर्माणी द्वार पर पांच सूत्रीय मांगों को लेकर “पैराशूट राष्ट्रीय मजदूर संघ” द्वारा एक दिवसीय “धरना आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 22 जनवरी “सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ” एवं “भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ” के अखिल भारतीय आवाहन पर रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर (दिनांक 15-30 जनवरी) एक पाक्षिक आंदोलन कार्यक्रम के क्रम में दिनांक 22/01/2025 को आयुध पैराशूट निर्माणी द्वार पर पांच सूत्रीय मांगों को लेकर “पैराशूट राष्ट्रीय मजदूर संघ” द्वारा एक दिवसीय “धरना” किया गया। 

आंदोलन में केंद्र सरकार से मांग की गई कि

1) न्यू पेंशन स्कीम NPS और UPS रद्द करके सभी को OPS प्रदान किया जाय।

2) सरकार ने आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा तो कर दी है लेकिन वेतन आयोग 01/01/2026 के वास्तविक काल से भत्तों सहित लागू करे।

3) आयुध निर्माणियों के निगमीकरण पर सरकार पुनः विचार करे और वर्तमान में कार्यरत समस्त कर्मचारियों को उनके सेवानिवृत्त तक प्रसार भारती मॉडल की तरह सरकारी दर्जा प्रदान किया जाए।

04) आयुध कारखानों तथा ई.एम.ई. में अनुकंपा नियुक्ति में 5% की सीमा है जिसमें प्रतीक्षारत समस्त मृतक आश्रितों को वन टाइम रिलैक्सेशन देते हुए 100% नियुक्ति प्रदान की जाए। 

05) रक्षा प्रतिष्ठानों में ठेका प्रणाली को समाप्त कर समस्त रिक्त पदों को भरा जाए।

धरना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में GENC के महासचिव श्री साधू सिंह, BPMS के संयुक्तमंत्री योगेंद्र चौहान, BPMS के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुधीर त्रिपाठी, अध्यक्ष सचिन वर्मा , महामंत्री वेद प्रकाश शर्मा , प्रेम कुमार, संजीव कश्यप, अमर बाबू तिवारी, सुधीर शंखवार ने संबोधित किया । धरना कार्यक्रम में सुनील कुमार, सूरज कुमार, राज कुमार विश्वकर्मा, प्रवीण यादव, अखिलेश प्रताप सिंह, जय कुमार, वीरेंद्र यादव, संजीत सिंह, पीयूष शर्मा, सुधांशु आर्य,अमित शुक्ल, विमल कठेरिया, विजय सिंह, अमित शर्मा के साथ अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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