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एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज में हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत “तिरंगा रैली” व पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 13 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में शासन के निर्देशानुसार चलाए जा रहे “हर घर तिरंगा अभियान” के अंतर्गत एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज में एनएसएस इकाई के तत्वावधान में ” तिरंगा रैली” व पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में देशभक्ति की भावना जागृत करना और तिरंगे के सम्मान व महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना था।कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर डॉ सुमन द्वारा की गई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि तिरंगा हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है। हर घर में तिरंगा फहराकर हम स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार कर सकते हैं।

एनएसएस प्रभारी डॉ. श्वेता रानी ने हर घर तिरंगा कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इस प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने “हर घर तिरंगा”, “एकता में अनेकता”, “स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव” जैसे विषयों पर सुंदर और प्रेरणादायक पोस्टर बनाए।
कार्यक्रम के आयोजन में स्वयं सेविका तनिष्का, प्रियल, माही, आंशिका यादव, दिव्यांशी ने योगदान दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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रेलवे समपार संख्या-80 पर 10 घंटे आवागमन रहेगा बंद

रेलवे समपार संख्या-80 पर 10 घंटे आवागमन रहेगा बन्द 

*घाटमपुर-जाहानाबाद मार्ग पर 15 अगस्त की रात से 16 अगस्त की सुबह तक रहेगा अस्थायी बंद*

वरिष्ठ अनुभाग अभियंता/घाटमपुर, उत्तर मध्य रेलवे, झांसी उपेन्द्र कुमार ने अवगत कराया है कि घाटमपुर से जहानाबाद जाने वाली सड़क पर हमीरपुर-घाटमपुर सेक्शन के मध्य स्थित रेलवे समपार संख्या-80, रेलवे किमी 1393/17-18 पर रेलवे यातायात की सुरक्षा के दृष्टिगत रेल मरम्मत कार्य कराया जाना सुनिश्चित किया गया है।

उन्होंने बताया कि मरम्मत कार्य दिनांक 15 अगस्त 2026 की रात्रि 09:00 बजे से 16 अगस्त 2026 को प्रातः 07:00 बजे तक किया जाएगा। इसके दृष्टिगत समपार संख्या-80 को उक्त अवधि में अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा। इस दौरान इस मार्ग से आवागमन करने वाले वाहन चालकों एवं आमजन को वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करना होगा।

उन्होंने बताया कि वैकल्पिक मार्ग से किया जा सकेगा आवागमन घाटमपुर से जहानाबाद जाने वाले यात्रियों एवं वाहन चालकों के लिए आनूपुर मोड़ से परास होते हुए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध रहेगा। आमजन से अपील है कि निर्धारित अवधि में असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक मार्ग का प्रयोग करें।

रेलवे द्वारा बताया गया है कि रेल पटरियों की सुरक्षा एवं सुचारु रेल यातायात की दृष्टि से यह मरम्मत कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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स्वतंत्रता दिवस पर नागरिक सुरक्षा विभाग के सायरन दो मिनट तक बजेंगे

🇮🇳🇮🇳उपनियंत्रक, नागरिक सुरक्षा, कानपुर नगर ने अवगत कराया है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिनांक 15 अगस्त, 2026 को प्रातः 07:58 बजे से 08:00 बजे तक कुल दो मिनट के लिए नागरिक सुरक्षा विभाग, कानपुर नगर के सायरन ऑल क्लीयर (उच्च ध्वनि) की ध्वनि में बजाए जाएंगे।🇮🇳🇮🇳

उन्होंने आम जनता से अपील की है कि सायरन की ध्वनि से किसी प्रकार का भ्रमित अथवा भयभीत न हों। यह ध्वनि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर निर्धारित कार्यक्रम के अंतर्गत बजाई जाएगी।🇮🇳🇮🇳

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दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत देशभक्ति गीत प्रतियोगिता – आज़ादी के तराने कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर में प्राचार्या प्रो. वंदना निगम के मार्गदर्शन मे “हर घर तिरंगा अभियान–2026” के अंतर्गत देशभक्ति गीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्राओं में देशभक्ति, राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता एवं भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव की भावना को बढ़ावा देना था। प्रतियोगिता में 50 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और देशभक्ति से ओत-प्रोत गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। उनकी प्रस्तुतियों में राष्ट्र के प्रति प्रेम, समर्पण और एकता की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में देशभक्ति एवं राष्ट्रप्रेम का वातावरण बना रहा।

प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में हरीश कुमार झा, विभागाध्यक्ष, संगीत विभाग, एस.एन. सेन कॉलेज ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. रुचिमिता पांडेय एवं डॉ. अलका सिंह द्वारा किया गया। प्रतियोगिता में महाविद्यालय की एनसीसी, एनएसएस एवं रेंजर्स इकाइयों की सक्रिय सहभागिता रही।

कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्या प्रो. वंदना निगम ने सभी प्रतिभागियों की सराहना की तथा उन्हें देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता की भावना को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन “हर घर तिरंगा” अभियान को सफल बनाने तथा राष्ट्रप्रेम की भावना को जन-जन तक पहुँचाने के संकल्प के साथ हुआ।

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‘काकोरी दिवस’ पर विशेष कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 8 अगस्त क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के इतिहास विभाग द्वारा रसायन विज्ञान सेमिनार कक्ष में ‘काकोरी दिवस’ पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन का स्मरण करते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उसके महत्व को रेखांकित करना था। कार्यक्रम का संचालन अपराजिता सिंह ने किया। इतिहास विभाग की अंतिम वर्ष की बी.ए. छात्रा सुश्री उन्नति मेहरोत्रा ने काकोरी की घटनाओं और उनसे मिलने वाली प्रेरणाओं पर प्रकाश डाला। इतिहास विभाग की शिक्षिका सुश्री उज्मा मुमताज ने काकोरी ट्रेन एक्शन तथा विशेष रूप से राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाकउल्ला खान की क्रांतिकारी मित्रता पर विस्तार से चर्चा की, मुख्य वक्ता डॉ. हरेंद्र नारायण सिंह ने स्थानीय इतिहास के अध्ययन के महत्व पर बल देते हुए विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के योगदान का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में डॉ. श्वेता चंद, उप-प्राचार्य, डॉ. रामाशंकर सिंह, शिक्षकगण एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. रामाशंकर सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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नशा मुक्त भारत पखवाड़ा के अन्तर्गत पदयात्रा कार्यक्रम आयोजित 

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन महाविद्यालय में नशा मुक्त भारत अभियान के पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत प्राचार्या डॉ सुमन के निर्देशन में पदयात्रा का आयोजन किया गया। एनएसएस इकाई कार्यक्रम अधिकारी डॉ श्वेता रानी के नेतृत्व में महाविद्यालय से पदयात्रा प्रारम्भ की गयी। पदयात्रा में डॉ गार्गी यादव, कैप्टन ममता अग्रवाल, डॉ प्रीति पांडे, डॉ संगीता सिंह, डॉ अनामिका राजपूत, डॉ पूजा गुप्ता, डॉ प्रीता अवस्थी सहित समस्त शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया। कुछ छात्राओं द्वारा महाविद्यालय परिसर में स्लोगन चस्पा कर के जागरुकता फैलाई। स्वयंसेविका माही मिश्रा, शैली यादव,रानू यादव, दिव्यांशी तिवारी सहित 80 से अधिक NSS, NSS, Rangers की छात्राओं द्वारा प्रतिभाग किया जाएगा।

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सिनेमाटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम और आईटी ढांचा पायरेसी विरोधी प्रवर्तन को मजबूत करते हैं। 4,996 टेलीग्राम चैनलों और 1,263 वेबसाइटों सहित 7,393 यूआरएल निष्क्रिय किए गए।

सरकार ने सिनेमाई फिल्मों की ऑनलाइन पायरेसी से निपटने के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचे को मजबूत किया है। जिसमें टेलीग्राम के माध्यम से फिल्मों का अनधिकृत प्रसार भी शामिल है। सिनेमाई अधिनियम, 1952 को सिनेमाई (संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से संशोधित किया गया ताकि फिल्मों की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और प्रदर्शन पर अंकुश लगाने के लिए विशिष्ट प्रावधान शामिल किए जा सकें। नवगठित धारा 7(1ख)(ii) सरकार को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3) के अंतर्गत पायरेटेड सामग्री होस्ट करने वाले मध्यस्थों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देती है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(ख) के अंतर्गत उपयुक्त सरकारों द्वारा मध्यस्थों को अवैध सामग्री को हटाने/उस तक पहुंच को अक्षम करने के लिए अधिसूचना जारी करने का प्रावधान है। सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के अंतर्गत, मध्यस्थों को किसी भी ऐसी सामग्री को हटाना अनिवार्य है जो उस समय लागू किसी भी कानून का उल्लंघन करती हो, जैसे ही उन्हें न्यायालय के आदेश या उपयुक्त सरकार या उसकी अधिकृत एजेंसी द्वारा जारी नोटिस के माध्यम से इसकी जानकारी प्राप्त होती है।

फिल्मों की पायरेसी से संबंधित शिकायतें प्राप्त होने पर, मंत्रालय मध्यस्थों को अधिसूचना जारी कर उन्हें उल्लंघनकारी सामग्री को तुरंत हटाने या उस तक पहुंच को अक्षम करने का निर्देश देता है। सरकार ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (फिल्म) को सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के अंतर्गत मध्यस्थों को सामग्री हटाने के नोटिस जारी करने के लिए अधिकृत किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में एक संस्थागत तंत्र भी स्थापित किया गया है, जिसके तहत इंटरनेट पर उपलब्ध फिल्मों की पायरेटेड प्रतियों के संबंध में कॉपीराइट धारकों से शिकायतें प्राप्त की जाती हैं और मध्यस्थों को ऐसी सामग्री तक पहुंच को अक्षम करने के लिए अधिसूचना जारी की जाती है।

पायरेसी विरोधी कार्रवाई

कानून के उपर्युक्त प्रावधानों के अनुसार, मध्यस्थों को फिल्म पायरेसी के लिए 1,263 वेबसाइटों और 4,996 टेलीग्राम चैनलों सहित 7,393 यूआरएल को निष्क्रिय करने का निर्देश दिया गया है।

यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज लोकसभा में श्री बालाशौरी वल्लभनेनी द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रदान की।

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देश में संचालित फर्जी विश्वविद्यालय

शिक्षा समवर्ती सूची में है, और भारत में शिक्षा के विकास के लिए केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारें दोनों मिलकर काम करती हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) समय-समय पर भारत में फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची प्रकाशित करता है। फरवरी 2026 में प्रकाशित नवीनतम सूची के अनुसार, 32 संस्थानों की पहचान फर्जी विश्वविद्यालयों के रूप में की गई है।

इन फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) की वेबसाइट पर उपलब्ध है:

https://www.ugc.gov.in/universitydetails/Fakeuniversity.

इन स्वयं को विश्वविद्यालय घोषित करने वाले अथवा फर्जी विश्वविद्यालयों के संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) द्वारा निम्नलिखित कार्रवाई की गई है:

  1. फर्जी संस्थानों को स्पष्टीकरण/अनुपालन पत्र/कारण बताओ/चेतावनी नोटिस जारी किया गया।
  2. ऐसे स्वघोषित(फर्जी) संस्थानों के प्रति छात्रों और आम जनता को आगाह करने के लिए यूजीसी की वेबसाइट पर सार्वजनिक सूचनाएं जारी की गई।
  3. संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, शिक्षा सचिवों तथा प्रधान सचिवों को पत्र भेजकर ऐसे स्वघोषित फर्जी विश्वविद्यालयों/संस्थानों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 का उल्लंघन कर संचालित हो रहे इन संस्थानों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट(एफआईआर) दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश(यूटी) प्रशासनों के मुख्य सचिवों से अनुरोध किया है कि वे इन संस्थानों को बंद करने के लिए कानूनी कार्रवाई करें, और खुद को “विश्वविद्यालय” के रूप में गलत तरीके से पेश करके, डिग्रियां बांटकर और अपने नाम के साथ “विश्वविद्यालय” शब्द का उपयोग करके छात्रों को ठगने और धोखा देने में शामिल लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें। उनसे यह भी अनुरोध किया गया कि वे अपने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे किसी भी अन्य फर्जी विश्वविद्यालय के बारे में केंद्र सरकार/यूजीसी को सूचित करें जो यूजीसी की फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल नहीं भी हैं।  यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांता मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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रेप्को बैंक ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को 22.90 करोड रुपये का लाभांश चेक भेंट किया

रेप्को बैंक ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत सरकार द्वारा धारित ₹76.32 करोड़ की शेयर पूंजी पर 30% की दर से लाभांश के रूप में ₹22.90 करोड़ का लाभांश चेक भेंट किया। श्री अमित शाह ने रेप्को बैंक के चेयरमैन श्री ई. संथानम, बैंक के डायरेक्टर और रेपको होम फाइनेंस लिमिटेड के चेयरमैन श्री सी. थंगाराजू और मैनेजिंग डायरेक्टर श्री ओ.एम. गोकुल से चेक प्राप्त किया।

X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में श्री अमित शाह ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹169 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित कर सहकारी बैंकिंग में मिसाल कायम करने के लिए रेप्को बैंक प्रबंधन को बधाई। उन्होंने कहा कि यह बैंक के इतिहास में अब तक का सबसे ज़्यादा लाभ है। गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इस बैंक की सफलता इसके पेशेवर और बेहतरीन कामकाज का सबूत है। रेप्को बैंक के मैनेजमेंट और स्टाफ़ को शुभकामनाएँ।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन, सचिव (सीमा प्रबंधन और एफ.एफ.आर) डॉ. राजेंद्र कुमार, संयुक्त सचिव (एफ.एफ.आर. डिवीजन) श्री गया प्रसाद और संयुक्त सचिव (आर.एच.एस) श्री मक्खन लाल मीणा उपस्थित थे।

बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ₹169 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया है जो बैंक के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक है। बैंक पिछले तीन दशकों से लगातार लाभ अर्जित कर शेयरधारकों को लाभांश दे रहा है। 30.06.2026 की स्थिति के अनुसार बैंक का बिजनेस मिक्स 26,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

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सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढांचा और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में विकास

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, पुलिस और लोक व्यवस्था के विषय राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हालाकि, भारत सरकार वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित रहे राज्यों के प्रयासों में सहायता करती रही है। एलडब्ल्यूई के खतरे से समग्र रूप से निपटने हेतु, 2015 में “एलडब्ल्यूई से निपटने हेतु राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना” को मंज़ूरी दी गई थी और इसमें ‘संपूर्ण सरकार’ वाले दृष्टिकोण पर जोर दिया गया था। इसमें सुरक्षा संबंधी उपाय, विकास के कदम और स्थानीय समुदायों के अधिकारों व सुविधाओं को सुनिश्चित करने जैसी विविध प्रकार की रणनीतियां शामिल हैं। इस नीति के दृढ़ कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप देश से वामपंथी उग्रवाद का उन्मूलन हुआ है।

लगभग छह दशकों की हिंसा के बाद, देश वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हो गया है। वामपंथी उग्रवाद को कभी देश की आंतरिक सुरक्षा के सबसे बड़े खतरों में से एक माना जाता था। यह सफलता “वामपंथी उग्रवाद से निपटने हेतु राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना” 2015 को दृढ़ता  से कार्यान्वित करने और केन्द्र व राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से हासिल हुई है। वर्तमान में, छत्तीसगढ़ या किसी अन्य राज्य का कोई भी जिला वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित नहीं है। अभी देश के 38 जिलों (जिनमें छत्तीसगढ़ के 13 जिले शामिल हैं) को ‘विरासत एवं जोर (लिगेसी एंड थ्रस्ट)’ वाले जिलों की श्रेणी में रखा गया है। ये जिले अब वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित नहीं हैं, लेकिन स्थिति को सुदृढ़ बनाए रखने तथा इनके दोबारा उग्रवाद की चपेट में आने की किसी भी संभावना को रोकने हेतु सुरक्षा एवं विकास के उपायों के तहत कुछ और समय तक निरंतर सहयोग जारी रखने की आवश्यकता है।

सरकार ने जनजातीय और दूर-दराज के इलाकों में विकास पर ध्यान देकर नक्सलवाद की जड़ पर प्रहार किया है। बेहतर कानून एवं व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में निवेश ने आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाला माहौल बनाया है, जिससे सरकारी और निजी निवेश में भी बढ़ोतरी हुई है।

विकास के मोर्चे पर, भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं के अलावा, पूर्व में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में कई खास पहल की गई हैं। इन पहलों में सड़कों के नेटवर्क के विस्तार, दूरसंचार कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने, शिक्षा, कौशल विकास और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया गया है। छत्तीसगढ़ में विकास के मोर्चे पर की गई कुछ पहलों का विवरण इस प्रकार है:

  • सड़कों के नेटवर्क के विस्तार हेतु, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए दो खास योजनाओं – सड़क आवश्यकता योजना (आरआरपी) और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क कनेक्टिविटी परियोजना (आरसीपीएलडब्ल्यूईए) – के तहत 4,314 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई गई हैं। इसके अलावा, भारत सरकार ने पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न इलाकों में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा 127.08 किलोमीटर महत्वपूर्ण सड़कों और 06 महत्वपूर्ण पुलों के निर्माण को भी मंजूरी दी है।
  •  दूरसंचार कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने हेतु, कुल 1511 टावर लगाए गए हैं।
  • कौशल विकास हेतु, कुल 09 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और 14 कौशल विकास केन्द्र (एसडीसी) खोले गए हैं।
  • जनजातीय इलाकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए 45 एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल (ईएमआरएस) शुरू किए गए हैं।
  • वित्तीय समावेशन हेतु, डाक विभाग ने बैंकिंग सेवाओं से लैस 1,508 डाकघर खोले हैं। साथ ही, 413 बैंक शाखाएं और 269 एटीएम भी खोले गए हैं।
  • छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच बेहतर बनाने हेतु, प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत जगदलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में 240 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू किया गया है। इस सुविधा से बस्तर के लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं अब और अधिक सुलभ हो गई हैं, जिससे मरीजो को इलाज के लिए दूर के शहरों में जाने की जरूरत कम हो गई है।
  • स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हक को सुनिश्चित करने हेतु, लाभार्थियों को 5,34,068 मालिकाना हक के दस्तावेज (टाइटल डीड) वितरित किए गए हैं। इनमें 4,81,432 व्यक्तिगत और 52,636 सामुदायिक मालिकाना हक के दस्तावेज शामिल हैं। छत्तीसगढ़ समेत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में स्थानीय स्व-शासन को और सुदृढ़ करने हेतु, गृह मंत्रालय पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर एक संयुक्त योजना बना रहा है। ये कदम वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हुए इलाकों में सामुदायिक अधिकारों को मजबूत करने और भागीदारी वाली शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे सात जिलों में एक स्वतंत्र एजेंसी के जरिए एक सर्वेक्षण कराया है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं एवं विकासात्मक पहलों के कवरेज के स्तर और आजीविका के सृजन की संभावनाओं का आकलन करना था। इस सर्वेक्षण में शिक्षा के स्तर, स्वास्थ्य संबंधी संकेतकों और प्राथमिक विद्यालयों, आंगनवाड़ी केन्द्रों एवं द्वितीयक स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता की जानकारी एकत्रित की गई है। इस सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी केन्द्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार को विकास संबंधी अंतर को कम करने तथा आजीविका सुनिश्चित करने के लक्ष्य को पूरा करने में मदद कर रही है।

युवाओं और स्थानीय समुदायों को रचनात्मक तरीके से जोड़ने हेतु, भारत सरकार ‘ट्राइबल यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम (टीवाईईपी)’ चलाती है। इस कार्यक्रम के तहत, छत्तीसगढ़ समेत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे इलाकों के जनजातीय समुदाय के युवाओं को देश के विभिन्न  हिस्सों में एक सप्ताह के जानकारी बढ़ाने वाले दौरे (एक्सपोजर विजिट) पर ले जाया जाता है। यह कार्यक्रम उन्हें अलग-अलग इलाकों एवं पृष्ठभूमि के लोगों से मिलने-जुलने का मौका देता है। इससे राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलता है, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता के बारे में जागरूकता बढ़ती है और देश की औद्योगिक व विकासात्मक प्रगति की जानकारी मिलती है। वर्ष 2014 से अब तक छत्तीसगढ़ समेत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे राज्यों के कुल 37,655 जनजातीय युवाओं ने टीवाईईपी में हिस्सा लिया है।

इसके अलावा, ‘सिविक एक्शन प्रोग्राम’ के तहत, भारत सरकार छत्तीसगढ़ समेत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे इलाकों में तैनात केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) को फंड देती है। इस फंड का सदुपयोग वे अपने अभियान वाले इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाने, खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने और स्थानीय समुदायों के बीच आवश्यक सामग्रियां वितरित करने जैसी विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियों में करते हैं। इससे सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच की दूरी कम करने में बहुत मदद मिली है। वर्ष 2014 से अब तक, इस योजना  के तहत छत्तीसगढ़ समेत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे इलाकों में तैनात सीएपीएफ को कुल 221.88 करोड़ रुपये का फंड जारी किया गया है।

सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत सरकार पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे राज्यों की सरकारों की सहायता करती है। इसके लिए वह केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल और इंडिया रिजर्व बटालियन उपलब्ध कराती है, हेलीकॉप्टर की सहायता देती है, सुरक्षा शिविरों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करती है, प्रशिक्षण देती है, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए फंड एवं हथियार व उपकरण देती है, खुफिया जानकारी साझा करती है और सुरक्षित पुलिस थाने निर्मित करवाती  है।  

  • वर्ष 2014-15 से राज्यों की क्षमता बढ़ाने हेतु, ‘सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई)’ योजना के तहत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे राज्यों को कुल 3805.04 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह राशि सुरक्षा बलों के संचालन संबंधी खर्च एवं प्रशिक्षण संबंधी जरूरतों, आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवाद के कैडरों के पुनर्वास, और वामपंथी उग्रवाद द्वारा की गई हिंसा में मारे गए सुरक्षा बल के जवानों/नागरिकों के परिवारों को अनुग्रह राशि देने जैसे कामों के लिए दी गई है। एसआरई योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य को कुल 1453.95 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
  •  “पुलिस बलों के आधुनिकीकरण” की योजना के तहत अपने पुलिस बलों को आधुनिक बनाने तथा जरूरी संसाधनों से लैस करने के राज्यों के प्रयासों को और ठोस किया गया है। इस योजना के तहत, राज्य सरकारों को हथियार, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के उपकरण, दूरसंचार व्यवस्था, प्रशिक्षण, पुलिस थानों के निर्माण, आवाजाही की सुविधा, पुलिस कर्मियों के लिए आवास और अन्य पुलिस अवसंरचना आदि के लिए केन्द्र सरकार की और से सहायता प्रदान की जाती है। इसकी एक उप-योजना यानी ‘विशेष बुनियादी ढांचा योजना (एसआईएस) के तहत, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों में संबंधित राज्य के विशेष बलों, विशेष खुफिया शाखाओं (एसआईबी), जिला पुलिस को मजबूत करने और सुरक्षित पुलिस थानों (एफपीएस) के निर्माण हेतु 1,761 करोड़ रुपये के कार्यों को मंजूरी दी गई है। इसमें से छत्तीसगढ़ को 451.2 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। सुरक्षा संबंध बुनियादी ढांचे पर भारत सरकार का ध्यान बहुत अहम रहा है। अब तक 663 सुरक्षित पुलिस थानों का निर्माण किया जा चुका है, जिनमें से 135 छत्तीसगढ़ में निर्मित किए गए हैं। एसआईएस-2017-21 और एसआईएस-2022-26 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य को 110.34 करोड़ रुपये (केन्द्रीय हिस्से का 60 प्रतिशत) जारी किए गए हैं।
  • ‘वामपंथी उग्रवाद के प्रबंधन हेतु केन्द्रीय एजेंसियों को सहायता (एसीएएलडब्ल्यूईएमएस)’ योजना के तहत, शिविरों के बुनियादी ढांचे और वामपंथी उग्रवाद-विरोधी अभियानों के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के जरिए 2014-15 से केन्द्रीय एजेंसियों को कुल 1303.68 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
  • पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से सबसे अधिक प्रभावित रहे जिलों के विकास को गति देने हेतु, ‘विशेष केन्द्रीय सहायता (एससी) योजना’ के तहत सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में अहम कमियों को पूरा करने के लिए फंड दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से अब तक, छत्तीसगढ़ राज्य को लगभग 1715.83 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
  • वामपंथी उग्रवादियों की आर्थिक आपूर्ति को रोकने और सीपीआई (माओवादी) तथा उनके आर्थिक समर्थकों के बीच के गठजोड़ का पर्दाफाश करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। केन्द्रीय एजेंसियों के सहयोग से राज्य पुलिस द्वारा विभिन्न तरीकों से की गई समन्वित कार्रवाई से अतीत में वामपंथी उग्रवादियों को मिलने वाले फंड और संसाधनों को रोकने में काफी सफलता मिली है।

वामपंथी उग्रवादियों को मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, भारत सरकार और राज्य सरकारों ने व्यापक ‘आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास’ नीतियां तैयार की हैं। भारत सरकार, ‘सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई)’ योजना के तहत ‘आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास’ नीति के माध्यम से इस प्रयास में भी राज्यों की सहायता करती है।

भारत सरकार, एसआरई योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास पर वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों द्वारा किए गए खर्च की भरपाई करती है। पुनर्वास पैकेज में, अन्य चीजों के अलावा, वामपंथी उग्रवाद के ऊंचे पद वाले कैडरों के लिए 5 लाख रुपये और वामपंथी उग्रवाद के अन्य कैडरों के लिए 2.5 लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि शामिल है। इसके अलावा, इस योजना के तहत हथियार/गोला-बारूद समर्पित करने पर प्रोत्साहन भी दिया जाता है। इसमें उनकी पसंद के क्षेत्र/व्यवसाय में प्रशिक्षण देने और तीन वर्षों तक हर महीने 10,000 रुपये का स्टाइपेंड देने का भी प्रावधान है। राज्यों को आकर्षक ‘आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास’ नीतियां अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।

वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन के बाद की स्थिति में, भारत सरकार का ध्यान आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के पुनर्वास में मदद करने, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को पूर्ण रूप से कार्यान्वित करने, स्थानीय स्व-शासन को मजबूत करने, जनजातीय पहचान एवं संस्कृति को संरक्षित करने और दूर-दराज के इलाकों में शासन व सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर है।

इसके अलावा, वामपंथी उग्रवाद के समाप्त होने के बाद, वामपंथी उग्रवाद से मुक्त इलाकों में मौजूद एक-तिहाई सुरक्षा शिविरों को ‘जन सुविधा केन्द्रों’ में बदला जा रहा है। ये केन्द्र स्थानीय समुदायों को आजीविका को प्रोत्साहित करने, कौशल विकास, सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करने, डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सेवाएं और सांस्कृतिक व खेल-कूद की सुविधाएं  सुलभ कराने जैसी विभिन्न प्रकार की सेवाएं देंगे। पहला ‘जन सुविधा केंद्र’ छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर में नेतानार में ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा केन्द्र’ के रूप में शुरू किया गया है।

कुल मिलाकर, भारत सरकार पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे देश के विभिन्न जिलों में सुरक्षा और तेजी से विकास सुनिश्चित करने हेतु प्रतिबद्ध है।

यह जानकारी गृह राज्यमंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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