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माय भारत 6 जून को त्यागराज स्टेडियम में ‘युवा विकसित भारत- माय भारत युवा सम्मेलन’ का आयोजन करेगा

प्रधानमंत्री मोदी के युवाओं को 2047 तक विकसित भारत की यात्रा में प्रेरक शक्ति के रूप में सशक्त बनाने के विजन के अनुरूप युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अधीन ‘ मेरा युवा भारत (एमवाई भारत)’ 6 जून 2026 को दोपहर 12:00 बजे नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में ‘युवा विकसित भारत- एमवाई भारत युवा सम्मेलन’ का आयोजन करेगा।

इस सम्मेलन में देश भर से 6,000 से अधिक युवा प्रतिभागी एकत्रित होंगे, जो छात्रों, युवा पेशेवरों, युवा महिलाओं, उद्यमियों, कंटेंट क्रिएटर्स, इनोवेटर्स, उभरते नेताओं और उपलब्धि अर्जित करने वालों सहित विविध पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात नेता, विशिष्ट अतिथि और युवा व्यक्तित्व उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम भारत के भविष्य निर्माताओं को वर्तमान में उपलब्धि हासिल करने वालों को एकजुट करेगा, जिससे राष्ट्रीय विकास और सार्वजनिक नेतृत्व के प्रति साझा प्रतिबद्धता को बढ़ावा मिलेगा।

इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के साथ संवाद होगा, जिनमें बीओएटी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी उद्यमी अमन गुप्ता, ओलंपिक पदक विजेता अमन सहरावतयूपीएससी अचीवर्स और राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी कंटेंट क्रिएटर जैसे मल्हार कलांबे , आरजे रौनक आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कई अन्य प्रभावशाली युवा भी होंगे, जिन्होंने अपने काम और सामाजिक प्रभाव से लाखों लोगों को प्रेरित किया है। यह कार्यक्रम देश भर के उन उभरते युवा प्रतिभाओं को भी सम्मानित करेगा जिन्होंने खेल, उद्यमिता, शासन और कंटेंट निर्माण के क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्रदर्शित की है ।

इस गति को और मजबूत करते हुए, मा भारत हाल ही में “एक सप्ताह में ऑनलाइन क्विज में भाग लेने वाले सबसे अधिक उपयोगकर्ता” के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में मिली मान्यता के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगा, जो कि विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (वीबीवाईएलडी) क्विज के माध्यम से हासिल की गई थी। इस पहल में सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 5 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया। आधिकारिक मूल्यांकन अवधि के दौरान 390,812 प्रतिभागियों ने सफलतापूर्वक क्विज़ पूरी की, जिससे एक नया विश्व रिकॉर्ड बना। यह उपलब्धि विकसित भारत @2047 के विजन में युवाओं की अभूतपूर्व भागीदारी को दर्शाती है और राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की सार्थक भागीदारी के लिए एक मंच के रूप में माई भारत में युवा नागरिकों के बढ़ते विश्वास को रेखांकित करती है।

भारत के 2047 के ‘विकसित भारत’ के सपने की ओर अग्रसर होने के साथ-साथ , ‘माई भारत’ युवा सम्मेलन देश के युवाओं की आकांक्षाओं, उपलब्धियों और परिवर्तनकारी क्षमता का उत्सव मनाएगा। भारत भर से हजारों युवा परिवर्तनकर्ताओं को एक साथ लाकर, यह सम्मेलन राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए अमृत पीठी के सामूहिक संकल्प की पुष्टि करेगा और प्रधानमंत्री के विकसित, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करेगा।

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टीडीबी-डीएसटी ने पुणे के मेसर्स ग्रीनजूल्स प्राइवेट लिमिटेड को स्वदेशी द्वितीय पीढ़ी के डीजल समतुल्य जैव ईंधन प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए सहयोग प्रदान किया है

भारत स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों और पुनः उपयोग वाली अर्थव्यवस्था-संचालित औद्योगिक विकास की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। इसी क्रम में, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने पुणे के मेसर्स ग्रीनजूल्स प्राइवेट लिमिटेड को “द्वितीय पीढ़ी के डीजल समतुल्य जैव ईंधन का निर्माण” परियोजना के लिए सहयोग प्रदान किया है। इस परियोजना का उद्देश्य कृषि अपशिष्ट और कृषि-प्रसंस्करण अवशेषों से प्राप्त उन्नत जैव ईंधन के उत्पादन के लिए एक वाणिज्यिक स्तर की सुविधा स्थापित करना है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अपशिष्ट से धन सृजन के मिशन और शुद्ध शून्य ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देगी।

प्रस्तावित परियोजना में अभिलाषा बायोफ्यूल्स (एबीएफ) के उत्पादन के लिए एक ग्रीनफील्ड विनिर्माण केंद्र स्थापित करना शामिल है। एबीएफ अगली पीढ़ी का नवीकरणीय डीजल और नेफ्था विकल्प है, जिसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। “ड्रॉप-इन” ईंधन के रूप में डिज़ाइन किया गया, एबीएफ मौजूदा इंजनों, ईंधन प्रणालियों या वितरण बुनियादी ढांचे में किसी भी संशोधन की आवश्यकता के बिना पारंपरिक जीवाश्म-आधारित डीजल को सीधे प्रतिस्थापित कर सकता है, जिससे यह परिवहन और औद्योगिक ऊर्जा खपत को कार्बनमुक्त करने के लिए एक व्यावहारिक और बडे पैमाने पर समाधान बन जाता है।

पूरी तरह से भारत में विकसित, यह तकनीक नवीन थर्मो-केमिकल रूपांतरण प्रक्रियाओं को एकीकृत करती है जो कृषि अवशेषों और कृषि-औद्योगिक अपशिष्ट को उच्च गुणवत्ता वाले नवीकरणीय ईंधन में परिवर्तित करती है। यह प्रक्रिया थर्मल क्रैकिंग, उत्प्रेरक उन्नयन और डाउनस्ट्रीम शोधन तकनीकों को मिलाकर ऐसे जैव ईंधन का उत्पादन करती है जो जीवाश्म-आधारित समकक्षों के समान स्थापित गुणवत्ता विनिर्देशों को पूरा करती हैं। इस ईंधन का उत्पादन पहले ही लगभग चालीस विभिन्न फीडस्टॉक से सफलतापूर्वक किया जा चुका है, जो भारत के विविध जैव अवशेष संसाधनों के लिए उल्लेखनीय आसानी और अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।

इस तकनीक की एक प्रमुख विशेषता ग्रीनजूल्स की अधिकतम जैव अवशेष मिश्रणों की पहचान करने और ईंधन उत्पादन और दक्षता को अधिकतम करने के लिए उन्हें अनुकूलित उत्प्रेरक प्रणालियों के साथ मिलाने की उसकी प्रमुख विशेषज्ञता में निहित है। यद्यपि प्रक्रिया के अलग-अलग चरण ज्ञात औद्योगिक पद्धतियाँ हैं, कंपनी द्वारा फीडस्टॉक चयन, उत्प्रेरक अनुकूलन और प्रक्रिया अभियांत्रिकी का अनूठा एकीकरण इसकी मुख्य बौद्धिक संपदा है और यह कम मूल्य वाले कृषि अपशिष्ट से उन्नत जैव ईंधन का व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादन संभव बनाता है।

यह परियोजना नवीकरणीय डीजल, नवीकरणीय नेफ्था, जैव कचरा और गैसीय ईंधन के उत्पादन में कंपनी की क्षमताओं को और बढ़ाएगी, जिससे अपशिष्ट से ऊर्जा का एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार होगा। कृषि अवशेषों को, जिन्हें अक्सर जला दिया जाता है या फेंक दिया जाता है, मूल्यवान ऊर्जा उत्पादों में परिवर्तित करके, यह तकनीक एक साथ कई राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरा करती है, जिनमें पराली जलाने में कमी, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, ग्रामीण मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना और आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना शामिल है।

यह पहल भारत सरकार की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, पुनः उपयोग की अर्थव्यवस्था के उद्देश्यों और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है। यह उन्नत जैव ईंधन और वैकल्पिक ऊर्जा समाधानों में मजबूत घरेलू क्षमताएं विकसित करने के देश के दृष्टिकोण का भी समर्थन करती है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा, “कृषि अवशेषों से प्राप्त उन्नत जैव ईंधन ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और ग्रामीण आर्थिक विकास प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मार्ग प्रशस्त करते हैं। कचरे को उच्च मूल्य वाले ईंधन में परिवर्तित करने वाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियां न केवल जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करती हैं, बल्कि पुनः उपयोग वाली अर्थव्यवस्था के भीतर नए अवसर भी पैदा करती हैं। ऐसे नवाचार देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और आयातित कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। टीडीबी भारत के स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम को मजबूत करने वाली प्रौद्योगिकियों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही ठोस आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक लाभ भी प्रदान करती है।”

समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए, ग्रीनजूल्स प्राइवेट लिमिटेड ने कहा कि यह सहायता उनकी स्वदेशी जैव ईंधन प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण और विस्तार में तेजी लाने में सहायता करेगी, जिससे औद्योगिक और परिवहन क्षेत्रों में टिकाऊ ईंधन समाधानों का व्यापक उपयोग संभव होगा। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि यह परियोजना भारत के लिए एक स्वच्छ, आत्मनिर्भर और सुरक्षित ऊर्जा भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (एमओएसजेई) ने रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के माध्यम से मादक द्रव्यों के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान को मजबूत कर रहा है

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के तहत रोकथाम, जागरूकता सृजन, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण पर केंद्रित एक व्यापक और जन-केंद्रित रणनीति के माध्यम से मादक पदार्थों के दुरुपयोग के प्रति भारत की प्रतिक्रिया को मजबूत कर रहा है।

मादक द्रव्यों का सेवन, जिसे अधिक उपयुक्त रूप से मादक द्रव्यों के उपयोग विकार के रूप में समझा जाता है, एक प्रमुख मनोसामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है जो व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों को प्रभावित करती है, साथ ही उत्पादकता, सामाजिक सामंजस्य और मानवीय क्षमता को भी कमजोर करती है।

भारत में मादक पदार्थों के सेवन की व्यापकता पर मंत्रालय द्वारा 2019 में जारी किए गए पहले राष्ट्रीय सर्वेक्षण ने इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित किया, जिसमें पाया गया कि 7 करोड़ से अधिक व्यक्ति मादक पदार्थों के सेवन विकार से प्रभावित थे, जिनमें लगभग 1.2 करोड़ बच्चे और 58 लाख महिलाएं शामिल थीं। इसके जवाब में, मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने वाली नोडल एजेंसी के रूप में मंत्रालय ने रोकथाम, जागरूकता, क्षमता निर्माण, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण को शामिल करते हुए एक व्यापक ढांचा के रूप में एनएपीडीडीआर की शुरुआत की।

2020 में शुरू किए गए नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) ने जागरूकता अभियान का विस्तार करके और समुदायों को मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ लामबंद करके इन प्रयासों को और मजबूत किया है।

मादक द्रव्यों के दुरुपयोग से निपटने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो केवल कानून प्रवर्तन तक सीमित न हो। इसलिए, मादक द्रव्यों की मांग में कमी लाना मादक द्रव्यों के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय लड़ाई का एक अभिन्न अंग बन गया है, जिसमें साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप, मजबूत रोकथाम रणनीतियाँ और सतत जन जागरूकता अभियान शामिल हैं।

इन प्रयासों का प्रभाव उन व्यक्तियों के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है जो समय पर सहायता मिलने से उबरने और अपना जीवन पुनर्निर्माण करने में सक्षम हुए हैं। इसका एक उदाहरण जम्मू और कश्मीर के बडगाम के 25 वर्षीय क्षेत्रीय क्रिकेटर हैं, जिन्हें नशामुक्ति केंद्र के माध्यम से निःशुल्क उपचार, नशामुक्ति सेवाएं, परामर्श, मनोवैज्ञानिक सहायता और अनुवर्ती देखभाल प्राप्त हुई, जिससे उन्हें आत्मविश्वास हासिल करने, स्वास्थ्य सुधारने और खेल गतिविधियों में लौटने में मदद मिली, साथ ही वे नशामुक्त भारत अभियान के लिए स्वयंसेवा भी कर रहे हैं।

एक और सशक्त उदाहरण मणिपुर के इम्फाल पश्चिम से आता है, जहाँ 37 वर्षीय एक महिला गंभीर भावनात्मक संकट के दौरान मादक पदार्थों की लत में पड़ गई थी। उसे महिला-केंद्रित नशामुक्ति केंद्र से सहायता मिली। निःशुल्क उपचार, परामर्श, पुनर्वास और 

पारिवारिक सहयोग के माध्यम से उसने नशा मुक्त जीवन व्यतीत किया, नर्सिंग लेक्चरर के रूप में अपना कार्यभार पुनः ग्रहण किया और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन गई। यह महिलाओं के लिए 

सुलभ और भेदभाव-मुक्त सेवाओं के महत्व को दर्शाता है। हाल के वर्षों में मंत्रालय ने उपचार और पुनर्वास सेवाओं तक पहुंच का काफी विस्तार किया है, जिसके तहत देश भर में 768 नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र कार्यरत हैं। इन सेवाओं पर जनता का भरोसा उपचार चाहने वाले व्यक्तियों की संख्या में 294 प्रतिशत की वृद्धि से परिलक्षित होता है, जो 2020 में 2.08 लाख से बढ़कर 2025 में 8.20 लाख से अधिक हो गई है।
टोल-फ्री नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 के माध्यम से सहायता प्रणालियों को भी मजबूत किया गया है, जिस पर 4.69 लाख कॉल आ चुकी हैं और यह सहायता चाहने वाले व्यक्तियों और परिवारों के लिए संपर्क का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक बिंदु है। एनएमबीए ऐप 2.0 के माध्यम से प्रौद्योगिकी इस अभियान को और भी सशक्त

 बना रही है, जो राज्यों, जिलों, आध्यात्मिक संगठनों और अन्य हितधारकों को एनएमबीए के तहत जमीनी गतिविधियों का डेटा अपलोड करने की सुविधा 

देती है, जिसमें वास्तविक समय की दृश्यता और नागरिक-केंद्रित विशेषताएं शामिल हैं।

भविष्य को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने चार व्यापक स्तंभों पर आधारित एक कार्य योजना की रूपरेखा तैयार की है: समस्या की गंभीरता का आकलन करना, उपचार अवसंरचना को मजबूत करना, क्षमता निर्माण करना और जागरूकता पैदा करना। जैसे-जैसे भारत नशामुक्त भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, यह अभियान नागरिकों, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों, संबंधित मंत्रालयों और नागरिक समाज से सहानुभूति, समन्वय और साझा जिम्मेदारी पर आधारित जन आंदोलन के माध्यम से सामूहिक कार्रवाई का आह्वान करता है।

नागरिकों को आधिकारिक एनएमबीए प्लेटफॉर्म के माध्यम से नशा मुक्त भारत की प्रतिज्ञा लेने और एक स्वस्थ, मजबूत और अधिक उत्पादक राष्ट्र के लिए आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत।

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कानपुर में 1 जून से 31 अगस्त तक सभी नदियाँ एवं बहती जलधाराएँ ‘नो फिशिंग जोन’ घोषित

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर नगर, 05 जून 2026।** मछलियों के प्रजनन काल की सुरक्षा तथा मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से जिला प्रशासन कानपुर नगर द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जिलाधिकारी  जितेंद्र प्रताप सिंह ने जनपद की समस्त नदियों एवं बहती जलधाराओं को 01 जून 2026 से 31 अगस्त 2026 तक ‘नो फिशिंग जोन’ घोषित किया है।

जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रतिबंध अवधि के दौरान किसी भी नदी अथवा बहती जलधारा में मत्स्य आखेट (मछली पकड़ना) तथा बाड़े (घेराबंदी) लगाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध मछलियों के प्रजनन एवं संवर्धन को सुरक्षित रखने तथा प्राकृतिक मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से लागू किया गया है।

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया है कि आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। इसके लिए मत्स्य विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने तथा सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सहायक निदेशक मत्स्य, कानपुर नगर डॉ. जितेंद्र कुमार ने सभी मत्स्यजीवी सहकारी समितियों के सदस्यों एवं जनपदवासियों से अपील की है कि वे मत्स्य संरक्षण अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान करें तथा प्रतिबंध अवधि के दौरान निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से ही जल संसाधनों एवं मत्स्य संपदा का प्रभावी संरक्षण संभव है।

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ओडीओपी प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना के तहत लेदर और होजरी ट्रेड में निःशुल्क प्रशिक्षण हेतु आवेदन आमंत्रित

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर नगर। उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केन्द्र, कानपुर नगर अंजनीश प्रताप सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में “एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना” संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत जनपद के इच्छुक अभ्यर्थियों को लेदर एवं होजरी टेक्सटाइल उत्पाद ट्रेड में 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि योजना के तहत आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक अभ्यर्थी विभागीय वेबसाइट http://msme.up.gov.in/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 21 जून 2026 निर्धारित की गई है।

योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी हेतु अभ्यर्थी कार्यालय दिवसों में जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केन्द्र, कानपुर नगर में संपर्क कर सकते हैं।

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विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता विषयक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर  विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय सेवा योजना दयानन्द गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर द्वारा कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता विषयक विभिन्न कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य फोकस जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास पर रहा, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो वंदना निगम के द्वारा पौधारोपण कर किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने तथा दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही ने पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता हेतु सक्रिय योगदान देने तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की शपथ दिलवायी।
इस अवसर पर एनएसएस वॉलंटियर्स के द्वारा वृक्षारोपण अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता तथा पर्यावरण जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। छात्राओं ने जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवन, स्वच्छता तथा हरित पर्यावरण जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में लगभग 50 छात्राओं के द्वारा प्रतिभाग किया गया।
कार्यक्रम में रेंजर प्रभारी प्रो स्वाति सक्सेना ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ विनीता श्रीवास्तव , डॉ अलका त्रिपाठी, डॉ. शिखा, श्वेता गोंड, एनसीसी एवं रेंजर्स छात्राओं एवं शिक्षिकाओं का योगदान सराहनीय रहा।

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नाबालिगों को वाहन न दें, गंगा बैराज पर स्टंटबाजों पर होगी कार्रवाई: डीएम

दैनिक भारतीय स्वरूप “जिला सूचना कार्यालय कानपुर” जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए विभिन्न विभागों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की नहीं बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है और जनजागरूकता के बिना दुर्घटनाओं में कमी लाना संभव नहीं है।

जिलाधिकारी ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने नाबालिग बच्चों को किसी भी स्थिति में वाहन न चलाने दें। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक 12 ऐसे चालान किए जा चुके हैं जिनमें नाबालिग बच्चे वाहन चलाते हुए पाए गए। साथ ही गंगा बैराज क्षेत्र में स्टंट करने वाले बाइक सवारों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में सर्वाधिक दुर्घटना वाले स्थलों पर पांच मिनट के भीतर एंबुलेंस पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने, ऐसे मार्गों पर स्थित राजकीय चिकित्सालयों की आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा बड़ी सड़क दुर्घटनाओं से निपटने के लिए जनपद स्तरीय आकस्मिक मेडिकल एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में रोड सेफ्टी क्लब स्थापित कर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि प्रधानमंत्री राहत जन आरोग्य योजना के अंतर्गत जनपद के नौ अस्पताल चिन्हित हैं, जिनमें वेदांता हॉस्पिटल, डेल्टा हॉस्पिटल, आशिर्य हॉस्पिटल, चांदनी हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस कुलवंती हॉस्पिटल, नारायणा हॉस्पिटल, रामादेवी मेडिकल सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, रामा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर तथा रामा हॉस्पिटल शामिल हैं। ये सभी अस्पताल हाईवे के निकट स्थित हैं। दुर्घटना की स्थिति में पात्र घायलों का डेढ़ लाख रुपये तक उपचार निःशुल्क किया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने राहवीर योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश देते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने से उसकी जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि राहवीर योजना के अंतर्गत घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है तथा पुलिस द्वारा उससे अनावश्यक पूछताछ भी नहीं की जाती।

बैठक में अप्रैल 2026 के प्रवर्तन कार्यों की समीक्षा भी की गई। यातायात पुलिस द्वारा बिना हेल्मेट वाहन चलाने पर 24,885, बिना सीट बेल्ट 572, रेड लाइट जंपिंग के 493, शराब पीकर वाहन चलाने के 90 तथा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग करने के 175 मामलों में कार्रवाई की गई। वहीं परिवहन विभाग द्वारा 38 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए, जिनमें 31 ओवरलोडिंग, चार वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के प्रयोग तथा तीन शराब पीकर वाहन चलाने से संबंधित थे।

बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. विवेक चतुर्वेदी, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी अखंडेश्वर, एआरटीओ आलोक कुमार सिंह, बीएसए सुरजीत कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।


 

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उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना एवं केएफसीएल प्रबंधन का असहयोगात्मक रवैया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 30 मई अतिरिक्त श्रम आयुक्त के आदेश के अनुपालन में श्रमिक श्रम कार्यालय एवं तत्पश्चात केएफसीएल परिसर में उपस्थित हुए। हमारा उद्देश्य माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रदत्त राहत के अनुरूप नौकरी बहाली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था।

कई घंटों की प्रतीक्षा एवं वार्ता के उपरांत श्रम प्रवर्तन अधिकारी श्री सुरेश सिंह एवं श्री हेमंत कुमार द्वारा हमें अवगत कराया गया कि केएफसीएल प्रबंधन के विधिक सलाहकार एस. एल. मुखर्जी ने स्पष्ट रूप से यह कहा है कि “ये मेरे श्रमिक नहीं हैं, मैं इन्हें नहीं रखूंगा।”

यदि यह कथन सही है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है, क्योंकि यह माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश एवं श्रमिकों को प्रदान किए गए वैधानिक संरक्षण की भावना के प्रतिकूल प्रतीत होता है। हम पिछले लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की अपेक्षा कर रहे हैं, किंतु प्रबंधन का यह रवैया अत्यंत निराशाजनक एवं चिंताजनक है।

आज की बैठक से यह स्पष्ट हो गया कि प्रबंधन हमारी नौकरी बहाली के संबंध में सकारात्मक कदम उठाने के बजाय टालमटोल की नीति अपना रहा है। हम सभी श्रमिक कई घंटों तक भीषण गर्मी में प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन अंततः हमें यह जानकारी दी गई कि प्रबंधन हमें कर्मचारी के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

हम माननीय उच्च न्यायालय, श्रम विभाग तथा समस्त सक्षम प्राधिकारियों से मांग करते हैं कि इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए न्यायालय के आदेशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए तथा आदेशों की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए।

हम मीडिया जगत से भी अनुरोध करते हैं कि श्रमिकों के इस न्यायसंगत संघर्ष को जनता तक पहुंचाएं, ताकि सत्य सामने आए और श्रमिकों को उनका वैधानिक अधिकार प्राप्त हो सके। हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्याय और अपने वैधानिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए है।

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चौथे बड़े मंगल पर संकल्प ट्रस्ट द्वारा भव्य भंडारा आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता लखनऊ चौथे बड़े मंगल के पावन अवसर पर संकल्प ट्रस्ट द्वारा एक विशाल एवं भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं की भारी संख्या ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। यह भंडारा केवल अपने विशाल स्वरूप के कारण ही नहीं, बल्कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और कुशल व्यवस्थापन के कारण भी विशेष रूप से चर्चा का विषय बना रहा।

संकल्प ट्रस्ट की इस अनूठी पहल में भंडारे की संपूर्ण व्यवस्था महिलाओं द्वारा संचालित की गई। भोजन की तैयारी से लेकर प्रसाद वितरण, श्रद्धालुओं की सेवा, व्यवस्था संचालन तथा अतिथियों के स्वागत तक की सभी जिम्मेदारियां महिलाओं ने पूरी निष्ठा, समर्पण और अनुशासन के साथ निभाईं। यह आयोजन महिला सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया।

भंडारे में लगभग 2000 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं को स्वादिष्ट कढ़ी-चावल, पूड़ी-सब्जी तथा शीतल एवं ताजगी भरे शरबत का निरंतर वितरण किया गया। सेवा कार्य में जुटी महिलाओं ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ यह सुनिश्चित किया कि किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह सुचारु एवं अनुशासित रही। उपस्थित लोगों ने संकल्प ट्रस्ट की इस सेवा भावना की मुक्त कंठ से सराहना की तथा महिलाओं द्वारा किए गए उत्कृष्ट प्रबंधन की प्रशंसा की। सभी ने माना कि जब सेवा, संगठन और समर्पण की शक्ति महिलाओं के हाथों में होती है, तब समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित होता है।

संकल्प ट्रस्ट का यह भव्य भंडारा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा भावना और महिला सशक्तिकरण का भी एक उत्कृष्ट संदेश देने में सफल रहा। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि संगठित प्रयास, सेवा भाव और दृढ़ संकल्प के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए जा सकते हैं।

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*जनगणना-2027* दो प्रगणकों ने महज तीन दिन में पूरा किया शत-प्रतिशत मकान सूचीकरण कार्य

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर नगर, जनगणना-2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत तहसील घाटमपुर में दो प्रगणकों ने सेवा, निष्ठा और समयबद्धता का परिचय देते हुए महज तीन दिन में अपने निर्धारित क्षेत्र का शत-प्रतिशत मकान सूचीकरण एवं भवन गणना कार्य पूरा कर लिया। उत्कृष्ट कार्य के लिए तहसीलदार अंकिता पाठक ने उन्हें सम्मानित किया।

प्रगणक सुरेन्द्र सिंह, शिक्षामित्र द्वारा एचएलबी 722 में 72 भवनों के 81 जनगणना मकानों का सूचीकरण एवं गणना कार्य पूर्ण किया गया। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकत्री गायत्री देवी द्वारा 126 भवनों में स्थित 158 जनगणना मकानों का शत-प्रतिशत कार्य पूरा किया गया।

दोनों प्रगणकों से कवरेज प्रमाण पत्र प्राप्त किए गए। तहसील टीम ने उनके कार्य की सराहना करते हुए कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ किया गया कार्य अन्य प्रगणकों के लिए प्रेरणादायक है।

उप जिलाधिकारी घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह ने दोनों प्रगणकों को बधाई देते हुए अन्य प्रगणकों से भी पूरी निष्ठा और गंभीरता के साथ कार्य करने की अपील की।

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