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उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में आयोजित ‘पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026’ को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में ‘संकला फाउंडेशन’ के सहयोग से ‘यूएस-इंडिया पार्टनरशिप फोरम’ द्वारा आयोजित पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।

उपराष्ट्रपति ने एक ऐसा मंच तैयार करने के लिए आयोजकों की सराहना की, जो न केवल पर्यटन की संभावनाओं का जश्न मनाता है, बल्कि यात्रा और आतिथ्य क्षेत्र में भारत-अमेरिका आर्थिक गलियारे को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप भी तैयार करता है।

इस बात पर जोर देते हुए कि पर्यटन मात्र एक उद्योग नहीं है, श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे संस्कृतियों के बीच एक सेतु, आर्थिक अवसरों का एक चालक और सॉफ्ट कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन बताया।

उन्होंने कहा कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच पर्यटन लोगों के बीच गहरे संबंधों, साझा मूल्यों, उद्यमशीलता की भावना और भारतीय प्रवासी समुदाय की जीवंतता को दर्शाता है।

भारत की दूरदर्शी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पर्यटन विजन 2029 की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक राज्य में सुदृढ़ अवसंरचना और वैश्विक आतिथ्य मानकों के साथ कम से कम एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल का विकास करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहल सिर्फ सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्बाध संपर्क, स्मार्ट सुविधाएं, सुरक्षा, सततता डिजिटल एकीकरण और समृद्ध आगंतुक अनुभवों सहित समग्र पर्यटन इको-सिस्टम पर केंद्रित है।

भारत की सभ्यतागत विरासत, विविध भूदृश्यों और युवा जनसांख्यिकी लाभांश को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश वैश्विक स्तर पर पर्यटन को पुनर्परिभाषित करने के लिए तैयार है। उन्होंने भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के सरंक्षण और विश्व स्तरीय विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया, जिसमें बेहतर आगंतुक सुविधाएं, व्याख्या केन्द्र, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी, सतत प्रथाएं औऱ डिजिटल कहानी-वाचन शामिल हों।

श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने जोर देकर कहा कि पर्यटन विकास को पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने जलवायु-सचेत अवसंरचना, समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल तथा प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की वकालत की।

उन्होंने अंतरिक्ष, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले नए युग के पर्यटन स्थलों के विकास के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एआई जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण पर भी बल दिया।

पर्यटन को रोजगार सृजन के सबसे बड़े स्रोतों में से एक बताते हुए उपराष्ट्रपति ने समावेशी और समुदाय-संचालित विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण, उद्यमिता और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों में अधिक निवेश करने का आह्वान किया।

अपने संबोधन के समापन में सी.पी. राधाकृष्णन ने आशा व्यक्त की कि यह शिखर सम्मेलन सततता, नवाचार, समावेशिता और साझा समृद्धि पर आधारित भारत-अमेरिका सहयोग के एक नए अध्याय की शुरूआत करेगा।

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केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के 8 जिलों में व्‍याप्त रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने संबंधी तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 9,072 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने संबंधी तीन परियोजनाओं को स्‍वीकृति दी। इनमें

गोंडिया – जबलपुर लाइन दोहरीकरण

पुनारख-किऊल तीसरी और चौथी लाइन

गम्हरिया-चांडिल तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के 8 जिलों में व्‍याप्‍त इन तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 307 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी।

प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 5,407 गांवों में संपर्क में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 98 लाख है।

बढ़ी हुई रेल लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार आएगा और भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बढ़ेगी। रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव से परिचालन सुव्यवस्थित बनाने और यात्री तथा माल भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नए भारत के भविष्‍य दृष्टि अनुरूप इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास द्वारा रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ाकर वहां के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है।

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श द्वारा बहु-मार्गीय संपर्क और परिवहन दक्षता बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें जबलपुर के कचनार शिव मंदिर, बालाघाट में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, गंगुलपारा बांध और जलप्रपात, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, धुआंधार जलप्रपात, बरगी बांध, गोमजी-सोमजी मंदिर, चंदिल बांध, दलमा हिल टॉप, हेसाकोचा जलप्रपात, रायजामा घाटी, दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य आदि शामिल हैं।

ये परियोजनाएं कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, गिट्टी और पत्थर के टुकड़े, फ्लाई ऐश, उर्वरक, चूना पत्थर, मैंगनीज, डोलोमाइट, खाद्यान्न, सार्वजनिक तेल और उत्पाद पीओएल जैसी वस्तुओं की ढुलाई के लिए आवश्यक मार्ग हैं। इन रेल मार्गों के क्षमता वर्धन से प्रति वर्ष 52 मिलियन टन (एमटीपीए) की अतिरिक्त माल ढुलाई हो सकेगी। पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने से रेलवे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की प्रचालन लागत कम करने में सहायक होगा। साथ ही इससे तेल आयात में 6 करोड़ लीटर की कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन लगभग 30 करोड़ किलोग्राम घटेगा, जो एक करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।

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मंत्रिमंडल ने ‘केरल’ राज्य के नाम को बदलकर “केरलम” करने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद, राष्ट्रपति द्वारा केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को केरल राज्य विधानसभा को संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधान के तहत विचार-विमर्श हेतु भेजा जाएगा। केरल राज्य विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और संसद में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने हेतु केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को लागू करने के लिए राष्ट्रपति की अनुशंसा प्राप्त की जाएगी।

केरल विधानसभा ने 24.06.2024 को एक प्रस्ताव पारित कर राज्य का नाम बदलकर “केरलम” करने का निर्णय लिया, जो इस प्रकार है:

मलयालम भाषा में हमारे राज्य का नाम केरलम‘ है। नवंबर, 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों का गठन हुआ था। केरल पिरवी दिवस भी नवंबर को ही मनाया जाता है। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी लोगों के लिए संयुक्त केरल के गठन की प्रबल मांग रही है। लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम केरल‘ ही दर्ज है। यह विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद के अनुसार तत्काल कदम उठाकर राज्य का नाम बदलकर केरलम‘ करने की अपील करती है।”

इसके बाद, केरल सरकार ने भारत सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने हेतु आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

संविधान के अनुच्छेद 3 में मौजूदा राज्यों के नाम परिवर्तन का प्रावधान है। अनुच्छेद 3 के अनुसार, संसद विधि द्वारा किसी भी राज्य का नाम बदल सकती है। अनुच्छेद 3 में आगे प्रावधान है कि इस उद्देश्य से कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना प्रस्तुत नहीं किया जाएगा, और यदि विधेयक में निहित प्रस्ताव किसी राज्य के क्षेत्रफल, सीमाओं या नाम को प्रभावित करता है, तो राष्ट्रपति द्वारा विधेयक को उस राज्य के विधानमंडल को निर्दिष्ट अवधि के भीतर या राष्ट्रपति द्वारा अनुमत अतिरिक्त अवधि के भीतर उस पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए संदर्भित किया जाना चाहिए और इस प्रकार निर्दिष्ट या अनुमत अवधि समाप्त हो जानी चाहिए।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के विषय पर विचार किया गया और केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की स्वीकृति से, केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष मसौदा ज्ञापन को विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि मामलों और विधायी विभाग को उनकी टिप्पणियों के लिए भेजा गया। विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि और विधायी विभाग ने केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव से सहमति व्यक्त की है।

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत-ब्राजील के बीच 15 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के महत्वाकांक्षी व्यापार विस्तार और रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मा और उभरती प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मज़बूत संबंधों का आह्वान किया

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में आयोजित भारत-ब्राजील व्यापार मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में भारत और ब्राजील के बीच बढ़ते सहयोग पर का उल्लेख किया। पिछले वर्ष द्विपक्षीय व्यापार में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह अब बढ़कर 15 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने वर्तमान स्तर को अपर्याप्त बताया और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए अधिक महत्वाकांक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित उच्च मानकों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राष्ट्र तेजी से विकास कर सकते हैं, विस्तार कर सकते हैं और साझा समृद्धि के लिए एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। भारत-ब्राजील साझेदारी का उल्लेख करते हुए वाणिज्य मंत्री ने दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बताया, जो लोकतंत्र, विविधता और विकास की साझा आकांक्षाओं से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि यह संबंध दोनो देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग से प्रेरित एक मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी में विकसित हुए हैं। ब्राजील लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और रक्षा, ऊर्जा, कृषि और कृषि रसायनों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध और भी प्रगाढ़ हो रहे हैं।

श्री गोयल ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग और ब्रिक्स, आईबीएसए, जी-20 तथा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अंतर्गत सहयोग सहित साझेदारी के व्यापक आयामों पर भी जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के उज्ज्वल भविष्य के बारे में भी विश्वास व्यक्त किया।

भारत की व्यापार रणनीति का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री महोदय ने वैश्विक व्यापार और निवेश के लिए भारत के एक विश्वसनीय स्थल के रूप में उभरने का उल्लेख किया, जिसने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 80 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया। यह एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल ही में कई उच्च गुणवत्ता वाले मुक्त व्यापार समझौते संपन्न किए हैं और कई अन्य समझौतों पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। इन समझौतों के साथ, भारत को अब वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक प्राथमिकता की पहुंच प्राप्त है। उन्होंने बताया कि इज़राइल और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ संदर्भ की शर्तें तय कर ली गई हैं, कनाडा के साथ बातचीत शुरू हो गई है और निकट भविष्य में आगे की बातचीत शुरू होने की संभावना है।

उन्होंने मर्कोसुर क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत, बाजार पहुंच बढ़ाने, निवेश को बढ़ावा देने, प्रौद्योगिकी साझेदारी को मजबूत करने और खेल, शिक्षा तथा संस्कृति में भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए भारत-मर्कोसुर तरजीहीप्राथमिकता व्यापार समझौते का विस्तार करने के लिए काम कर रहा है।

श्री गोयल ने कहा कि यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब दोनों अर्थव्यवस्थाएं नई गति प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसकी दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि भारत अगले दो वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि वर्ष 2014 से संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाती है, जो कराधान, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, डिजिटल अवसंरचना, अनुपालन में कमी और व्यापार करने में सुगमता की दिशा में सुधारों से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सक्रिय रूप से बाहरी निवेश को बढ़ावा देता है और मुक्त व्यापार समझौते भारतीय उद्योग को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

श्री गोयल ने ब्राजील की शक्तियों का वर्णन करते हुए, इसके समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, जिनमें नायोबियम, लिथियम और लौह अयस्क शामिल हैं, का उल्लेख किया, जो वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कृषि, एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में ब्राजील की शक्तियों पर भी प्रकाश डाला और इन्हें महत्वपूर्ण सहयोग के क्षेत्रों के रूप में मान्यता प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील मिलकर संसाधनों, नवाचार और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को नया रूप देने की क्षमता रखते हैं और ब्राजील की कंपनियों को रोजगार सृजन, मूल्यवर्धन और प्रौद्योगिकी का  लाभ उठाने में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और वैश्विक बौद्धिक संपदा ढांचे के भीतर समान पहुंच को बढ़ावा देने, विशेष रूप से स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के संरक्षण के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने याद दिलाया कि जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ब्राजील की राजकीय यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा दोनों ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करने पर सहमति व्यक्त की थी।

श्री गोयल ने अपने संबोधन के समापन में विश्वास व्यक्त किया कि यह वार्ता भविष्य के अनुकूल कार्ययोजना तैयार करने और द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने सहयोग और नवाचार के माध्यम से भारत-ब्राजील साझेदारी को और प्रगाढ़ करने का आह्वान किया, ताकि आने वाले वर्षों में पारस्परिक समृद्धि की साझा दृष्टि बनी रहे।

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया

उपराष्ट्रपति  सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में श्री विजय गोयल द्वारा लिखित कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को सम्मानजनक और भावनात्मक क्षण बताया और कहा कि यह पुस्तक भारत के एक महानतम नेताओं में से एक, भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी को अर्पित उपयुक्त श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि यह प्रकाशन केवल तस्वीरों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसे राजनेता का उत्सव है, जिनका जीवन और विरासत राष्ट्र को निरन्तर प्रेरणा देती है।

श्री वाजपेयी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें श्री वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान 12वें और 13वें लोकसभा के सदस्य के रूप में सेवा देने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि 1974 में कोयंबटूर में उन्होंने एक जनसभा का आयोजन किया था, जिसे श्री वाजपेयी ने संबोधित किया था, इस स्मरण को साझा करते हुए उन्होंने इसे अपने सार्वजनिक जीवन के प्रारंभिक वर्षों का अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि संसद सदस्य से प्रधानमंत्री तक श्री वाजपेयी की यात्रा भारतीय लोकतंत्र की ताकत को प्रतिबिंबित करती है। तीव्र राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान भी, उन्होंने अपनी निष्ठा, समावेशी दृष्टिकोण और गरिमापूर्ण आचरण के लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच सम्मान अर्जित किया।

श्री वाजपेयी के नेतृत्व की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने पोखरण परमाणु परीक्षण और दिल्ली मेट्रो जैसी दूरदर्शी अवसंरचना पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्री वाजपेयी ने यह दिखाया कि ताकत और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं और वे हमेशा संवाद, लोकतंत्र और विकास को मार्गदर्शक सिद्धांत मानते थे।

श्री वाजपेयी को एक उत्कृष्ट कवि, दूरदर्शी और संसद सदस्य के रूप में वर्णित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके भाषण संसद और देश दोनों को प्रभावित करते थे और उनमें बिना अप्रिय हुए असहमति जताने की दुर्लभ क्षमता थी — एक ऐसा गुण, जो सार्वजनिक जीवन में आवश्यक है।

कॉफी टेबल बुक की रचना के लिए श्री विजय गोयल की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह कार्य दुर्लभ तस्वीरों, व्यक्तिगत किस्सों और अभिलेखीय सामग्री के माध्यम से इतिहास को जीवंत स्मृति के रूप में संरक्षित करता है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुस्तक देशभर में घरों और संस्थानों तक पहुंचेगी, विशेष रूप से नई पीढ़ी को राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव के आदर्शों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करेगी।

इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान; हरियाणा के राज्यपाल प्रो. अशिम कुमार घोष; राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े; पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी; और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष श्री विजय गोयल सहित अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

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“स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ऋण देना राष्ट्र के लिए सबसे सुरक्षित निवेश है: शिवराज सिंह चौहान

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 20 फरवरी 2026 को हैदराबाद में वित्तीय साक्षरता और लचीलेपन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में  नीति निर्माताओं, नियामकों, वित्तीय संस्थानों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) और सामुदायिक नेताओं ने भाग लिया और ग्रामीण भारत में वित्तीय जागरूकता को मजबूत करने, घरेलू लचीलेपन को बढ़ाने और समावेशी आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।

इस सम्मेलन में वित्तीय साक्षरता, घरेलू स्तर पर वित्तीय सुदृढ़ता और आजीविका एवं उद्यमों के लिए ऋण तक पहुंच बढ़ाने जैसे विषयगत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। विभिन्न सत्रों के दौरान  निरंतर वित्तीय शिक्षा, व्यापक वित्तीय समावेशन और मजबूत संस्थागत समन्वय के महत्व पर बल दिया गया। स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और उनके संघों जैसी सामुदायिक संस्थाओं को वित्तीय सेवाएं और वित्तीय साक्षरता संबंधी हस्तक्षेप प्रदान करने के लिए विश्वसनीय और विस्तार योग्य मंच के रूप में मान्यता दी गई।

21 फरवरी 2026 को हैदराबाद में 25वीं केंद्रीय स्तरीय समन्वय समिति (सीएलसीसी) की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ग्रामीण वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में नीतिगत संवाद को आगे बढ़ाने और समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री और सीएलसीसी के अध्यक्ष श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बैठक की अध्यक्षता की। इसमें माननीय केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी और तेलंगाना सरकार की माननीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती डी. अनुसूया सीताक्का ने भी भाग लिया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय और तेलंगाना सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह, अतिरिक्त सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार, संयुक्त सचिव श्रीमती स्मृति शरण और संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति शर्मा भी शामिल थे। तेलंगाना सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास के प्रधान सचिव श्री एन. श्रीधर और पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास आयुक्त एवं एसईआरपी तेलंगाना की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती दिव्या देवराजन शामिल थीं, साथ ही नाबार्ड, आरबीआई, बैंकों, एशियाई विकास बैंक और विभिन्न राज्यों के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय सम्मेलन से प्राप्त प्रमुख जानकारियों के सारांश के साथ हुई, जिसके बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती स्मृति शरण द्वारा “डेय-एनआरएलएम की रणनीतिक अंतर्दृष्टि और आगे का रोडमैप” विषय पर एक प्रस्तुति दी गई।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों, नियामकों और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों, जिनमें बैंक सखी, बीसी सखी, वित्तीय साक्षरता सामुदायिक संसाधन व्यक्ति और बीमा सखी शामिल हैं, के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, स्वयं सहायता समूहों के लिए बैंक संपर्क को मजबूत करने और व्यक्तिगत महिला उद्यमियों को समर्थन देने के लिए एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर जोर दिया।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ऋण देना जोखिम नहीं बल्कि राष्ट्र के लिए सबसे सुरक्षित निवेशों में से एक है। महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों के सामूहिक सहयोग से, “दीदी” लखपति से करोड़पति बन सकती हैं, जिससे महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण परिवर्तन में तेजी आएगी और विकसित भारत के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

माननीय केंद्रीय मंत्री ने अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय पहुंच को मजबूत करने, उद्यम वित्तपोषण का विस्तार करने और ग्रामीण परिवारों के लिए जोखिम संरक्षण तंत्र में सुधार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

इस आयोजन के दौरान तीन प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया गया:

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए व्यक्तिगत उद्यम बैंक ऋण प्रणाली*

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए यूपीआई आधारित क्रेडिट लाइनें*

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए वित्तीय साक्षरता पर डिजिटल मॉड्यूल*

इन पहलों का उद्देश्य ऋण वितरण को सरल बनाना, डिजिटल वित्त को अपनाने को बढ़ावा देना और ग्रामीण महिलाओं के बीच वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है।

ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह ने वित्तीय समावेशन, उद्यम विकास और आर्थिक लचीलेपन को बढ़ावा देने में सामुदायिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा को अब उद्यम-नेतृत्व वाली सशक्तिकरण की ओर विकसित होना चाहिए, जिसमें वित्त तक पहुंच से ध्यान हटाकर उत्पादक ऋण, उद्यम प्रोत्साहन और सतत वित्तीय क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया जाए।

श्रीमती डी. अनुसूया सीताक्का ने कहा कि हालांकि तेलंगाना देश का सबसे युवा राज्य है, लेकिन यहां सबसे पुराना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) है, और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मिशन के नेतृत्व में किए गए हस्तक्षेप तेलंगाना की महिलाओं को उद्यम निर्माण के अगले चरण का नेतृत्व करने में सक्षम बनाएंगे।

इस कार्यक्रम में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकिंग संस्थानों को पुरस्कार देकर वित्तीय संस्थानों के योगदान को भी मान्यता दी गई।

बैठक का समापन हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करने, वित्तीय नवाचार को बढ़ावा देने और ग्रामीण भारत में समावेशी विकास को गति देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

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नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत कृषि ड्रोन का वितरण

सरकार ने वर्ष 2023-24 से 2025-26 की अवधि के लिए ₹1261 करोड़ के परिव्यय के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान करने के लिए ‘नमो ड्रोन दीदी’ को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में मंजूरी दी है। उर्वरक विभाग द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, लीड फर्टिलाइजर कंपनियों (एलएफसी) ने 2023-24 में अपने आंतरिक संसाधनों का उपयोग करके स्वयं सहायता समूहों की ड्रोन दीदियों को 1094 ड्रोन वितरित किए हैं। वितरित किए गए इन 1094 ड्रोनों में से 500 ड्रोन ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत वितरित किए गए हैं। ड्रोन प्राप्त करने वाली ड्रोन दीदियों को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा अधिकृत विभिन्न रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (आरपीटीओ) में ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। जनवरी 2026 तक एलएफसी (एलएफसी) द्वारा स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए ड्रोनों की राज्य-वार संख्या और ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का विवरण अनुलग्नक-I में दर्शाया गया है।

बेंगलुरु स्थित एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट एंड रूरल ट्रांसफॉर्मेशन सेंटर (एडीआरटीसी) ने नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत उर्वरक कंपनियों द्वारा प्रदान किए गए इन 500 ड्रोनों के संचालन की आर्थिक और व्यावसायिक व्यवहार्यता पर एक अध्ययन किया है। यह अध्ययन दर्शाता है कि स्वयं सहायता समूह पहले मुख्य रूप से खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों में लगे हुए थे, और उन्हें दिए गए ड्रोनों ने ड्रोन तकनीक के माध्यम से आधुनिक कृषि पद्धतियों तक उनकी पहुंच का विस्तार किया है, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर, ड्रोन को अपनाने से स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों में विविधता आई है, कृषि पद्धतियों में सुधार हुआ है और ग्रामीण समुदायों में महिलाओं के लिए आय के अवसर बढ़े हैं।

अनुलग्नक-I

जनवरी 2026 तक लीड फर्टिलाइजर कंपनियों द्वारा स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए ड्रोनों की राज्य-वार संख्या और ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का विवरण

क्रम संख्या  राज्य का नाम  एलएफसी द्वारा ड्रोन प्रदान किए गए एसएचजी की संख्या और ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित महिला एसएचजी के सदस्यों की संख्या
1 आंध्र प्रदेश 108
2 असम 28
3 बिहार 32
4 छत्तीसगढ़ 15
5 गोवा 1
6 गुजरात 58
7 हरियाणा 102
8 हिमाचल प्रदेश 4
9 जम्मू और कश्मीर 2
10 झारखंड 15
11 कर्नाटक 145
12 केरल 51
13 मध्य प्रदेश 89
14 महाराष्ट्र 60
15 ओडिशा 16
16 पंजाब 57
17 राजस्थान 40
18 तमिलनाडु 44
19 तेलंगाना 81
20 उत्तर प्रदेश 128
21 उत्तराखंड 3
22 पश्चिम बंगाल 15
कुल 1094

यह जानकारी आज राज्यसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर द्वारा एक लिखित उत्तर में दी गई।

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अमरोहा कौशल महोत्सव में 2400 से अधिक नौकरियों की पेशकश;- जयंत चौधरी ने नियुक्ति पत्र सौंपे

भारत सरकार में कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री  जयंत चौधरी ने आज अमरोहा कौशल महोत्सव में चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे। यह जमीनी स्तर पर कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने पर सरकार के निरंतर ध्यान को दर्शाता है।

भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित कौशल महोत्सव में अमरोहा और आसपास के जिलों के युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिसमें लगभग 4,000 उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए उपस्थित हुए। विभिन्न क्षेत्रों में 2,400 से अधिक उम्मीदवारों का चयन किया गया और उन्हें नौकरी के प्रस्ताव दिए गए। इसमें 55 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया और ऑटोमोटिव, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवा, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ एवं बीमा (बीएफएसआई), विनिर्माण, खुदरा और सेवाएं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए।

यह कार्यक्रम रोजगार, प्रशिक्षण और करियर मार्गदर्शन तक पहुंच प्रदान करने वाले एक एकल-खिड़की मंच के रूप में कार्य करता था, जो परिणामोन्मुखी कौशल विकास पर मंत्रालय के विशेष प्रयास को दर्शाता है। अमरोहा में आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद श्री चौधरी कंवर सिंह तंवर, विधायक श्री महेंद्र सिंह खड़गवंशी, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, डीडीजी श्री अरुण यादव और एमएसडीई के निदेशक श्री वीएस अरविंद भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में  जयंत चौधरी ने कहा, “चौधरी अजीत सिंह जी की जयंती पर, हम ग्रामीण भारत और उसके युवाओं की शक्ति में उनके अटूट विश्वास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। अमरोहा में उद्यमशीलता की भावना से लेकर मेहनती युवा आबादी तक अपार संभावनाएं हैं। आज 4,000 से अधिक युवाओं द्वारा दिखाया गया उत्साह उनकी आकांक्षा और तत्परता दोनों को दर्शाता है। कौशल महोत्सव जैसे मंच प्रतिभा और अवसर के बीच की खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये हमारे युवाओं के दरवाजे तक उद्योग को लाते हैं जिससे उन्हें काम की तलाश में पलायन किए बिना रोजगार, प्रशिक्षण और करियर मार्गदर्शन प्राप्त करने में मदद मिलती है।”

श्री जयंत चौधरी ने कहा,  “मैं अमरोहा के युवाओं को एसओएआर – ‘एआई के लिए तैयारी के प्रति कौशल विकास’ जैसी पहलों के माध्यम से अपने कौशल को लगातार निखारने के लिए प्रोत्साहित करता हूं, जो उन्हें उभरती प्रौद्योगिकी-आधारित भूमिकाओं के लिए तैयार करती हैं। उन्हें हर दूसरे वर्ष आयोजित होने वाली इंडियास्किल्स प्रतियोगिता के क्षेत्रीय सत्रों में भी भाग लेना चाहिए, जहां अमरोहा जैसे जिलों की प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकती हैं और यहां तक ​​कि अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर सकती हैं। आज कौशल विकास का अर्थ है स्थानीय क्षमता को उजागर करना और वैश्विक स्तर पर आत्मविश्वास बढ़ाना। ऐसे मंचों के माध्यम से ही अमरोहा जैसे जिले विकसित भारत 2047 की परिकल्‍पना में सार्थक योगदान दे सकते हैं।”

कौशल महोत्सव को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) द्वारा व्यापक जमीनी स्तर पर जागरूकता प्रयासों के माध्यम से समर्थन दिया गया था, इसके साथ ही निर्बाध उद्योग समन्वय और कार्यक्रम के प्रभावी जमीनी क्रियान्वयन को भी सुनिश्चित किया गया है।

अमरोहा कौशल महोत्सव, रोजगार और प्रशिक्षण के अवसरों को युवाओं तक उनके घरों के करीब पहुंचाने के लिए मंत्रालय के चल रहे जिला स्तरीय प्रयासों का एक हिस्सा है। इस कार्यक्रम में पीएमकेवीवाई 4.0 जैसी पहलों, एनएपीएस के तहत विस्तारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और हाल ही में घोषित पीएम-एसईटीयू योजना के तहत आईटीआई के आधुनिकीकरण के माध्यम से भारत के कौशल विकास तंत्र में हो रहे व्यापक परिवर्तन का भी उल्‍लेख किया गया।

मंत्रालय ने समावेशी विकास को मजबूत करने और कुशल, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण करने के लिए देश भर में इस तरह के कौशल महोत्सवों को बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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पर्यटन मंत्रालय ने देश में पर्यटन अवसंरचना और अनुभवों के उन्नयन सहित गंतव्य आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 (स्वदेश दर्शन योजना का संशोधित संस्करण) पर्यटन गंतव्यों के सतत विकास पर केंद्रित है और इस योजना के तहत मंत्रालय ने 53 परियोजनाओं को 2208.31 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अलावा, स्वदेश दर्शन योजना के तहत चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) के अंतर्गत पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए 38 परियोजनाओं को 697.94 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

‘तीर्थ यात्रा पुनरुज्जीवन एवं आध्यात्मिक धरोहर संवर्धन अभियान (प्राशाद)’ योजना के तहत मंत्रालय ने 54 परियोजनाओं को 1726.74 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद योजनाओं के तहत परियोजनाओं की स्वीकृति देते समय क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाता है, जबकि परियोजनाओं की स्वीकृति संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा योजना दिशानिर्देशों, सरकारी निर्देशों, बजट उपलब्धता, परस्पर प्राथमिकता आदि के अनुरूप परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने के अधीन प्रदान की जाती है।

इन परियोजनाओं का कार्यान्वयन, संचालन और प्रबंधन भी संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाता है। उपरोक्त योजनाओं के तहत स्वीकृत घटक मुख्य रूप से पर्यटकों और आगंतुकों की सुविधा से संबंधित हैं, जिनमें डिजिटल हस्तक्षेप शामिल हैं।

ये घटक परियोजना आवश्यकता के अनुसार स्वीकृति के लिए विचार किए जाते हैं और पर्यटन मुख्य उत्पादों से संबंधित हो सकते हैं जैसे पर्यटक सुविधा केंद्र, व्याख्या केंद्र, पर्यटन गतिविधियां, स्वास्थ्य स्वच्छता एवं सुरक्षा, कनेक्टिविटी, पार्किंग, सामान्य स्थल विकास, सॉफ्ट हस्तक्षेप आदि।

पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन 2.0 के योजना दिशानिर्देशों में पर्यटन क्षमता बढ़ाने वाले घटकों की एक उदाहरणात्मक सूची भी शामिल की है।

एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद के तहत परियोजनाएं पूरे भारत स्तर पर स्वीकृत की गई हैं और ये स्थानीय रोजगार के अवसरों के सृजन तथा पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं और साधनों के सृजन में सहायता प्रदान करती हैं, जिससे आगंतुकों की संख्या में वृद्धि होती है। चूंकि इन योजनाओं के माध्यम से सृजित संपत्तियां राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन की जाती हैं, इसलिए मंत्रालय ने उन्हें फुटफॉल, रोजगार, उत्पन्न राजस्व और अन्य मापदंडों के संबंध में डेटा कैप्चर करने की सलाह दी है।मंत्रालय अपनी चल रही प्रचार गतिविधियों के हिस्से के रूप में अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया गतिविधियों, आयोजनों आदि के माध्यम से देश के विभिन्न पर्यटन गंतव्यों और उत्पादों का भी प्रचार करता है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दी गई।

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मधुमक्खी के हमले से शहीद अंपायर को खेल प्रेमियों ने दी श्रद्धांजलि

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर । क्रिकेट मैच के दौरान मधुमक्खियों के हमले से शहीद हुए अंपायर मानिक गुप्ता को आज याद किया गया । परेड स्थित भरत स्ट्राइकर क्लब कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ खिलाड़ियों एवं अंपायर ने पुष्पांजलि कर स्वर्गीय मानिक गुप्ता को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान मौजूद खेल प्रेमियों ने 2 मिनट का मौन रखकर मृतक अंपायर की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ अंपायर एवं क्रिकेट कोच जहीर अहमद ने कहा कि मानिक गुप्ता क्रिकेट के लिए एक समर्पित व्यक्ति थे,जिन्होंने संपूर्ण जीवन क्रिकेट के लिए ही दे दिया।ये एक हृदय विदारक घटना है,जिसने उनके परिवार को और क्रिकेट जगत को गहरी क्षति की है। भरत क्लब के कप्तान अरुण पाण्डेय(पूर्व अंपायर), ने कहा कि क्रिकेट मैदान में उनकी मृत्यु क्रिकेट के प्रति शहादत है। उन्होंने अपना पूरा जीवन क्रिकेट को समर्पित कर दिया था ।वरिष्ठ खिलाड़ी अतुल सक्सेना ने कहा स्वर्गीय मानिक गुप्ता का परिवार क्रिकेट पर ही निर्भर था, इसलिए उनके पूरे परिवार के समक्ष आर्थिक समस्या होगी,अतः उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को उनके परिवार को आर्थिक मदद करनी चाहिए। इस दौरान भारतेन्दु पुरी,जितेन्द्र मिश्रा और प्रदीप पांडे ने भी अपने विचार रखे। श्रद्धांजलि सभा का संचालन वरिष्ठ खिलाड़ी संजय भारती ने किया। सभा में अंपायर पुनीत झा,आदित्य पांडे,सुनील साहू, सतीश पांडे , प्रशान्त पुरी,दुर्गा सिंह,अतुल साहू, बाकर अली,रमेश शर्मा,पृथ्वीराज, कृपेश त्रिपाठी,दीपक पांडेय आदि ने उनकी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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