प्रधानमंत्री मोदी 19 नवंबर को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में महीने भर चलने वाले ‘काशी तमिल संगमम’ नामक विशिष्ट आयोजन का उद्घाटन करेंगे। ‘काशी तमिल संगमम’ का आयोजन 17 नवंबर से 16 दिसंबर, 2022 तक वाराणसी (काशी) में किया जाएगा, जिसका उद्देश्य देश के दो सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन ज्ञान केंद्रों तमिलनाडु एवं काशी के बीच सदियों पुरानी कड़ियों को फिर से तलाशना, उनकी पुन: पुष्टि करना और उनका उत्सव मनाना है।

केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास व उद्यमिता मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान प्रधानमंत्री के काशी दौरे से पहले की गई समस्त व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए वाराणसी में इस आयोजन की तैयारियों की सक्रियता से निगरानी कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने ‘काशी तमिल संगमम’ का सफल आयोजन सुनिश्चित करने के लिए रेल मंत्री, भारत सरकार, तमिलनाडु के राज्यपाल, उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों और अन्य प्रमुख हितधारकों के साथ बैठकें कीं।
‘काशी तमिल संगमम’ का आयोजन शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अन्य मंत्रालयों जैसे कि संस्कृति, वस्त्र, रेल, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, सूचना व प्रसारण मंत्रालयों और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य इन दोनों ही क्षेत्रों के विद्वानों, छात्रों, दार्शनिकों, व्यापारियों, कारीगरों, कलाकारों और जीवन के अन्य क्षेत्रों के लोगों को एकजुट होने, अपने ज्ञान, संस्कृति व सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और एक दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान करना है। यह आयोजन दरअसल एनईपी 2020 के तहत भारतीय ज्ञान प्रणालियों की मूल्यवान सामग्री को ज्ञान की आधुनिक प्रणालियों के साथ एकीकृत करने पर विशेष जोर देने के अनुरूप है। इस विशिष्ट आयोजन के लिए आईआईटी मद्रास और बीएचयू दो कार्यान्वयन एजेंसियां हैं।
छात्र, शिक्षक, साहित्य, संस्कृति, शिल्प, अध्यात्म, विरासत, व्यवसाय, उद्यमी, पेशेवर आदि सहित 12 श्रेणियों के तहत तमिलनाडु के 2500 से अधिक प्रतिनिधि वाराणसी के आठ दिवसीय दौरे पर जाएंगे। वे 12 श्रेणियों में से प्रत्येक के लिए क्यूरेट किए गए विशेष कार्यक्रमों में सेमिनारों, व्याख्यानों में हिस्सा लेंगे और विभिन्न स्थानों की यात्रा करेंगे ताकि उसी व्यापार, पेशे से जुड़े और उनके जैसी रुचि रखने वाले स्थानीय लोगों के साथ बातचीत कर सकें। प्रतिनिधि प्रयागराज व अयोध्या सहित वाराणसी और उसके आसपास के दर्शनीय स्थलों का भी दौरा करेंगे। बीएचयू और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। वे दो क्षेत्रों में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित तुलनात्मक कार्य प्रणालियों का अध्ययन करेंगे और अध्ययनों का दस्तावेजीकरण करेंगे। 200 छात्रों के प्रतिनिधियों के पहले समूह ने 17 नवम्बर को चेन्नई से अपना दौरा शुरू किया। उनकी ट्रेन को तमिलनाडु के राज्यपाल श्री आर एन रवि ने चेन्नई रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इसके साथ ही स्थानीय लोगों के लाभ के लिए वाराणसी में दो क्षेत्रों के हथकरघा, हस्तशिल्प, ओडीओपी उत्पादों, पुस्तकों, वृत्तचित्रों, व्यंजनों, कला रूपों, इतिहास, पर्यटन स्थलों आदि की एक महीने लंबी प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री तमिलनाडु से आने वाले प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे। उद्घाटन समारोह में श्री इलैयाराजा द्वारा गायन और पुस्तक विमोचन जैसे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने को मिलेंगे।
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प्रदूषण सिर्फ मल, कचरा, सीवर लाइनों का बहना या यहां वहां पानी का जमा होना ही नहीं है बल्कि ऐसे तमाम कारक है जो प्रदूषण के दायरे में आते हैं और उनसे बचने का उपाय, उन्हें सुधारना, स्वच्छ रखना आज की मुख्य जरूरत है। भागमभाग वाली जीवनशैली, समयाभाव, कम समय में ज्यादा सुविधाओं की उपलब्धता और प्रकृति के प्रति लापरवाही ऐसे कारक हैं जो वातावरण में प्रदूषण बढ़ा रहे हैं और इसी वजह से प्राकृतिक वातावरण में प्रतिकूल परिवर्तन हो रहा है। वातावरण में फैले हानिकारक तत्व से अनजाने में ही व्यक्ति उनका शिकार होते जा रहा है, फलस्वरुप सांस की बीमारी, हृदयाघात, एलर्जी, कैंसर जैसी बीमारियांज्यादा पनप रही हैं। आज सड़कों पर नजर घुमायें तो दो चक्के और चार चक्कों से भरी हुई सड़कें दिखाई देंगी। अक्सर पैदल यात्रियों के चलने के लिए जगह भी कम पड़ जाती है और तो और इस समस्या से निजात पाने के लिए फ्लाईओवर बना दिए जा रहे हैं जो समस्या का कुछ हद तक निदान तो कर देता है लेकिन जगह का दायरा धीरे धीरे कम होते जा रहा है, खुलापन खत्म होते जा रहा है। साथ ही ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण को भी बढ़ावा मिल रहा है। बड़ी-बड़ी मिलों से और कारखानों से निकलता हुआ धुआं सिर्फ बीमार ही नहीं करता बल्कि प्रकृति को भी नुकसान पहुंचाता है। घने शहरीकरण और औद्योगिकरण के कारण ध्वनि प्रदूषण आम हो गया है और इसकी वजह से बहरापन, नींद विकार, बीपी की समस्या जैसी बीमारियां आम हो गई है। बात जब प्रदूषण की निकली है तो जल प्रदूषण को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। कहते हैं कि जल ही जीवन है और यही जीवनदायिनी जल अब दूषित जल में परिवर्तित हो गया है। मुझे याद नहीं आता कि बचपन में हमने कभी आर ओ का पानी या बिसलेरी का पानी पिया हो। सीधे नगरपालिका का पानी ही पीने के काम में और घर के कामकाज में इस्तेमाल किया जाता था। कहीं सफर पर भी जा रहे हों तो स्टेशन पर लगे नल से ही पानी भरकर काम चल जाता था लेकिन अब स्वच्छ हवा, पानी सब बिकने लगा है। आर ओ या फिल्टर पानी पीने से व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर होता जा रहा है लेकिन आज इसके अलावा कोई पर्याय भी नहीं बचा है। सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब पानी निकासी की व्यवस्था सही ढंग से नहीं हो पाती है। बारिश से जमा हुआ पानी, सीवर लाइनों और गटर का भरा हुआ होना, जहां तहां लीकेज यह प्रशासन की अव्यवस्था दर्शाती है और साथ ही बीमारियों को न्योता भी देती है। नदियों को स्वच्छ करने का अभियान काफी समय से चल रहा है लेकिन गंगा अभी तक दूषित है। कुछ ऐसी चीजों जिनका दैनिक जीवन में बहुत महत्व है लेकिन साथ ही वह जीवन के लिए हानिकारक भी है मसलन पॉलिथीन, प्लास्टिक से बनी चीजें, बॉटल यह जितनी सुविधाजनक है उतनी ही नुकसानदेह भी होती हैं। मुझे याद है कि बचपन में हमारे घरों में सामान लाने के लिए कपड़े की थैली का इस्तेमाल किया जाता था। दूध, छाछ, घी लाने के लिए बरनियों का इस्तेमाल किया जाता था, आज की तरह प्लास्टिक का इस्तेमाल नहींहोता था। लोगबाग सफाई के लिए भी जागरूक नहीं दिखाई देते हैं। पहले सड़कों पर सफाई कर्मचारी रोज सुबह झाड़ू लगाते थे लेकिन अब कर्मचारी गायब दिखते हैं। कचरा उठाने वाली गाड़ियाँ दो दो दिन तक गायब रहतीं हैं। जनता जनार्दन भी कचरा फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ती है। आज बहुत जरूरत है कि प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए यातायात के कुछ नियम बनाए जायें। नदियों का जल स्वच्छ किया जाए ताकि आर ओ या फिल्टर का पानी पीने से बचा जा सके और पानी की गुणवत्ता को बनाए रखा जा सके। प्रकृति की अवहेलना नहीं की जानी चाहिए वरना उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है प्राकृतिक आपदाओं के रूप में। दिल्ली एक ऐसा शहर है जहां इस समय सबसे ज्यादा प्रदूषण फैला हुआ है, और यह सरकार की विफलता और अव्यवस्था ही है कि हम प्रदूषण के इस भयानक मंजर पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं। दिल्ली वाले एक बार फिर से नजर बंद हो गए। दिल्ली में ए क्यू आई (गुणवत्ता सूचकांक) लेवल के खतरनाक स्तर तक पहुंचने के बाद सख्त नियम लागू किए गए थे जिसका प्रभाव आम नागरिकों को रोजगार और आर्थिकी रूप से चुकाना पड़ा। प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी के मद्देनज़र दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने शहर में BS-4 डीजल और BS-3 पेट्रोल गाड़ियों पर रोक लगाई थी। साथ ही लोगों को एक बार फिर से वर्क फार होम के लिए आदेश मिल गए थे। स्कूल कॉलेज बंद हो गए थे, फिर से ऑनलाइन क्लासेस शुरु हो गई थी। ऐसे में बच्चे क्या अपनी शिक्षा के साथ न्याय कर पाएंगे? और पराली जैसी गंभीर समस्या का स्थाई हल क्यों नहीं निकाला जा रहा?
कानपुर 19 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, क्राइस्ट चर्च कॉलेज में एनएसएस तथा एनसीसी इकाई द्वारा कानपुर विजन @ 2047 के अंतर्गत जागरूकता रैली निकाली गई । जिसका प्रारंभ कॉलेज की उप प्राचार्य डॉ सबीना बोदरा , एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ सुनीता वर्मा तथा एनसीसी अभीक्षक डॉ हिमांशु दीक्षित के निर्देशन में हुआ।
जिसमे एनएसएस एवं एनसीसी के स्वयंसेवक तथा वरिष्ठ ट्रैफिक इंस्पेक्टर राजबीर सिंह परिहार के द्वारा हम सब ने ये ठाना है , कानपुर को स्वच्छ बनाना है आदि के नारे लगाते हुए लोगो के बीच जागरूकता बढ़ते हुए कॉलेज से लेकर बड़े चौराहे तक रैली निकाली इस रैली में सब ने बढ़ चढ़ के भाग लिया, कार्यक्रम का समापन उप प्राचार्या डॉ सबीना बोदरा,डॉ सुनीता वर्मा तथा डॉ हिमांशु दीक्षित ने अपने स्वयंसेवक जिनमें विलायत फातिमा, प्रियांशी सिंह, मोमिन अली, निखिल सिंह, मेनका, अदिति तिवारी, रितेश, सिद्धार्थ सिंह, फरीना, आयुष वर्मा, अरबाज के साथ मिल कर कार्यक्रम का सफलता पूर्वक समापन किया।
कानपुर 19 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, एनएसएस एनसीसी व मिशन शक्ति की छात्राओं के द्वारा महाविद्यालय से ग्रीन पार्क तथा एल्गिन मिल तक 3 किलोमीटर के क्षेत्र में विजन कानपुर @2047 के संबंध में स्लोगन व बैनर के द्वारा जन जागरूकता पैदा करने हेतु रैली निकाली गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, कानपुर रिपुदमन सिंह रहे। वीरांगना लक्ष्मीबाई जयंती को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सहयोग से नारी शक्ति दिवस के रूप में माल्यार्पण व पुष्पांजलि देकर मनाया गया।
इस अवसर पर अभिव्यंजना सिंह ने रानी लक्ष्मीबाई बनकर उनके द्वारा कहे गए वक्तव्य को छात्राओं तक पहुंचाया तथा अन्य छात्राओं ने उनके जीवन वृत्त से संबंधित कविताएं व भाषण भी दिए। डॉ निवेदिता टंडन, डॉ साधना सिंह, डॉ सुमन सिंह, डॉ अर्चना दीक्षित, डॉ स्वाति सक्सेना, डॉ शुभ्रा राजपूत, डॉ संगीता सिरोही, व कृष्णेंद्र श्रीवास्तव समेत महाविद्यालय की सभी प्राध्यापिकाएं तथा छात्राएं रैली में उपस्थित रही।

