होली करीब आते जा रही थी और मेरे मन में उमंगे बढ़ती जा रही थी। इस बार पक्का सोच लिया था कि प्रतीक को ढेर सारा गुलाल लगाऊंगी और खुद लगवाऊंगी भी। मैं खास होली के लिए सफेद रंग की ड्रेस भी खरीद कर ले आई थी।
नई-नई शादी और शादी के बाद मेरी पहली होली कुछ ज्यादा ही रोमांच था मेरे भीतर। मैं तरह-तरह के पकवान बनाने में व्यस्त हो गई। होली में गुझिया बहुत पसंद थी मुझे और हमारे यहां तो भांग की गुजिया भी बनाई जाती है। भाभियां अपने देवरों को भांग की गुझिया खिला देती और भांग भी बहुत पी जाती थी हमारे यहाँ। लेकिन मैंने इस सब का इंतजाम नहीं किया था क्योंकि मैं रंग में भंग नहीं डालना चाहती थी। मुझे बस प्रतीक के साथ होली खेलनी थी और उसके साथ समय बिताना था ताकि मेरी पहली होली की यादें हमेशा रंगीन रहे।
नीरजा! नीरजा ! कहां हो तुम? प्रतीक की आवाज आई।
मैं:- “आ रही हूं, बोलो क्या काम है? क्यों घर को सर पर उठा रखा है?”
प्रतीक:- “चलो बाजार चलते हैं। रंग गुलाल और पूजा का सामान वगैरा ले आते हैं, फिर बाद में मेरे पास वक्त नहीं होगा।”
मैं:- “अच्छा ठीक है! कुछ देर रुको मैं जरा हाथ का काम निपटा लूं फिर आती हूं।” दस मिनट बाद हम लोग बाजार सामान लेने के लिए निकल गए। रंगों को देखकर मेरा मन मचलने लगा। मन हुआ कि अभी प्रतीक को गुलाल मल दूं लेकिन मैंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखा। जरूरत की चीजें खरीद कर हम घर आ गए।
प्रतीक अगली सुबह ही दोस्तों के साथ बाहर चले गए। मैंने फोन किया तो उठाया नहीं और दोपहर में घर आए तो कुछ नशे की हालत में दिखे। मैंने कहा, “आज से ही पीना शुरू कर दिया? होली तो कल है?”
प्रतीक:- “अरे ! दोस्तों के साथ था तो थोड़ी ले ली। अब मुझे खाना दो बहुत भूख लगी है।
मैं:- “तुम्हारे कपड़े खराब है तो पहले नहा लो और मैं नींबू पानी लाती हूं तुम्हारे लिए।”
प्रतीक:- “नहीं ! मुझे वापस जाना है सब मेरा इंतजार कर रहे हैं बाद में आकर नहाऊंगा मैं।”
मैं:- “प्रतीक तुम्हारी हालत ठीक नहीं है और अब तुम्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं है। आराम करो। कल होली खेलेंगे।”
प्रतीक :- “तुम चुप रहो! फालतू बातें मत किया करो, मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं यह तुम मत बताओ। जो कहा है वह करो।”
मुझे प्रतीक का यह व्यवहार अच्छा नहीं लगा लेकिन मैं चुप रही। मेरे बहुत मना करने के बाद भी प्रतीक अपने दोस्तों के पास चले गए। रात को भी बहुत देर से घर आये और बहुत नशे में थे। आते ही सो गये। मैं जो इतने सपना संजो कर बैठी थी वह टूटते दिखाई दे रहे थे। सुबह होली की पूजा थी और प्रतीक सो रहे थे। मैंने प्रतीक को आवाज दी।
मैं:- “प्रतीक उठो आठ बज गए हैं।”
प्रतीक हड़बड़ा कर उठ गया ।
प्रतीक:- “अरे आठ बज गए तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं?”
मैं:- “मैंने उठाया था लेकिन तुम उठे नहीं। अब उठ जाओ मैं चाय लेकर आती हूं।”
प्रतीक हाथ मुंह धोने चला गया और चाय पीकर फ्रेश होकर कब चला गया मुझे मालूम ही नहीं पड़ा। मैंने फोन लगाया और पूछा, “अरे! कहां चले गए आप? नाश्ता भी नहीं किया?”
प्रतीक:- “हां! मैं मेरे दोस्तों के साथ हूं। एक दोस्त के फार्म हाउस पर जा रहे हैं हम सब लोग।”
मैं:- “आज के दिन मुझे आपके साथ होली खेलनी थी। मम्मी पापा के यहां जाना था।”
प्रतीक:- “देखो आज तो समय नहीं है कल जाएंगे वहां और मैं आता हूं तब खेल लेना होली। यही एक दो दिन का तो मौका मिलता है जो मैं दोस्तों के साथ बिता सकता हूं और तुम पास में भाभी और दीदी है ना खेल लेना उनके साथ। अच्छा खाने पर मेरा इंतजार मत करना।”
मैं दुखी हो गई और मुझे सारे रंग फीके लगने लगे। मैं काम में लग गई और फिर बाद में तबीयत ठीक नहीं है का बहाना करके कमरे में आ गई। बाहर होली है… होली है की आवाजें… बच्चों की चिल्लाने की आवाजें आ रही थी और मैं अंदर ही अंदर कुढ़ रही थी। थकावट के कारण मेरी आंख लग गई थी कि प्रतीक के आने की आहट हुई। प्रतीक पूरे रंग में रंगे हुए थे।
प्रतीक:- “अरे! लेटी क्यों हो तुम? गई नहीं कहीं?”
मैं:- “नहीं मन नहीं हुआ।”
प्रतीक:- “अच्छा कुछ ले आओ खाने के लिए बहुत भूख लग रही है।”
मैं:- “क्यों वहां कुछ खाया नहीं?”
प्रतीक:- “खाया पर पता नहीं क्यों भूख लग रही है फिर से।”
मैं:- “अच्छा आती हूं लेकर।” मैं गुझिया पापड़ लेकर कमरे में आ गई कि प्रतीक ने गुलाल की थैली मेरे ऊपर पलट दी और आगे बढ़कर अपना गाल मेरे गाल से लगाकर गुलाल लगा दिया और पास आकर कहा “होली है”। मैं खुशी और शर्म से लाल हो गई। मैं प्रतीक को देखे जा रही थी।
प्रतीक:- “सुबह से तो कह रही थी कि आपके साथ होली खेलनी है, अब सब छोड़ कर आया हूं तो ऐसे क्यों खड़ी हो?”
खाने की प्लेट जो रंग से रंग गई थी मैंने बाजू में रख दी और हाथों में रंग लेकर प्रतीक को रंग दिया। मेरी होली रंगीन होने लगी थी और मन गा रहा था…. मल दे गुलाल मोहे…. कि आई होली आई रे…….। ~प्रियंका वर्मा माहेश्वरी
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 22 मार्च लाफिंग बुद्धा स्कूल में वृहद मतदाता जागरूकता अभियान ए सी एम फर्स्ट राजेश कुमार के नेतृत्व में संपन्न हुआ जिसमें करीब 200 लोग उपस्थित रहे जिसमें ए सी एम फर्स्ट महोदय ने सबसे पहले उपस्थित सभी व्यापरीकरण को वोटर हेल्पलाइन डाउनलोड कराया और बताया कि इस वोटर हेल्पलाइन में निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए समस्त निर्देश हैं इसके माध्यम से आप घर बैठे अपने दिए गए निर्धारित बूथ और कहां पर आपका वोट पड़ेगा की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं जिससे कि आपको किसी भी प्रकार की असुविधा न हो इस हेल्पलाइन के माध्यम से जिन लोगों के वोटर लिस्ट में नाम कट गए हैं उनको भी जोड़ने का तरीका बताया गया जिन लोगों के नाम गलत है उनके शुद्धिकरण के विषय में भी बताया गया बड़ी मात्रा में महिलाओं ने भी भागीदारी की कार्यक्रम में प्रमुख रूप से *किदवई नगर व्यापार मंडल* के अध्यक्ष हिमांशु पाल महामंत्री राम जी अग्रवाल कोषाध्यक्ष संजय सचान सह कोषाध्यक्ष कृष्ण कुमार सिंह जितेंद्र त्रिवेदी राजेंद्र सिंह विपिन सिंह शिखा पाल लाफिंग बुद्धा स्कूल की प्रधानाचार्य संध्या सचान ऋषि अवस्थी हर्षित पाल विकास रावत आदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। आए हुए सभी व्यापारी भाइयों और एसीएम फर्स्ट साहब का आभार संस्था के कोषाध्यक्ष संजय सचान ने व्यक्त किया।
भारतीय स्वरूप संवाददाता 21 मार्च प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता निमिषा त्रिपाठी, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत – कानपुर प्रांत महिला प्रमुख – सेवाभारती महानगर किशोरी विकास प्रमुख, ने स्वयंसेविकाओं को महिलाओं के समाज में व्यवहार एवम सशक्त भूमिका के विषय में व्याख्यान दिया साथ मुख्य वक्ता ने व्याख्यान का प्रारंभ गयात्रिमंत्र के उच्चारण से किया। प्रोग्राम ऑफिसर प्रो. चित्रा सिंह तोमर ने पुष्पगुच्छ से मुख्य वक्ता का शिविर में स्वागत किया। अपने स्वयंसेविकाओं को किशोरी अवस्था में आने वाली शारीरिक, मानसिक एवम सामाजिक समस्याओं से अवगत कराते हुए उनके व्यवहारिक समाधानों पर प्रकाश डाला। व्याख्यान के अंत में स्वयंसेविकाओं ने कन्या भ्रूण हत्या तथा बेटी बचाओ पर सफल नुक्कड़ नाटक का मंधन किया।
भारतीय स्वरूप संवाददाता 21 मार्च इण्डियन सांईस काँग्रेस एसोशियेशन, कानपुर चैप्टर और डी०ए०वी कालेज के संयुक्त तत्वाधान मे सतत विकास की चुनौतियों(Challenges for Sustainable Development) पर 21 मार्च, 2024 को एक व्याख्यान माला डी०ए०वी कालेज, प्रेक्षागार में आयोजित की गयी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डी०ए०वी कालेज की प्रबंध समिति की सचिव श्रीमती कुमकुम स्वरूप ने सतत विकास की चुनौतियों में महिलाओं की भागीदारी का उल्लेख किया। प्रबंध समिति के संयुक्त सचिव ई0 गौरवेन्द्र स्वरूप ने प्राचीन भारत के गौरवशाली वैज्ञानिक योगदान पर चर्चा की। डा0 शक्ति विनय शुक्ला, निदेशक FFDC, कन्नौज ने रसायनिक प्रदूषण के निराकरण पर विचार व्यक्त किया।
भारतीय स्वरूप संवाददाता 21 मार्च डी जी कॉलेज के राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर के पांचवे दिन प्रथम सत्र में शिविर स्थल की सफाई, योग एवं व्यायाम के पश्चात गणपति वंदना एवं पूजन के साथ एनएसएस गीत गाकर शिविर का आरंभ महाविद्यालय की कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में किया गया। इस सत्र में वॉलिंटियर्स के द्वारा बस्ती के बच्चों की पाठशाला लगाई गई तथा उन्हें पौष्टिक आहार का वितरण भी किया गया। वॉलिंटियर्स ने बस्ती में घर-घर जाकर सर्वेक्षण का कार्य करने के उपरांत मध्याह्न भोजन ग्रहण किया उसके पश्चात सायंकालीन सत्र में डिजिटल इंडिया वर्कशॉप में रवि सी एस सी कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर से पधारे श्री अमर कुमार के द्वारा एनएसएस वॉलिंटियर्स तो ट्रेनिंग दी गई। महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर अर्चना वर्मा ने इस आदिवासी विशेष शिविर में छात्राओं के द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना में जिन मुद्दों पर कार्य किया जाता है वह छात्रों के व्यक्तित्व के विकास की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यालय अधीक्षक श्री कृष्णेंद्र श्रीवास्तव, डॉ श्वेता गोंड, डॉ अंजना श्रीवास्तव तथा टीम लीडर्स समेत समस्त वॉलिंटियर्स का सराहनीय योगदान रहा।JN72.jpg)
GI4P.jpeg)
