कानपुर 5 अगस्त भारतीय स्वरूप संवाददाता, उत्तर प्रदेश के तीन लाख बीस हजार एनएसएस स्वयंसेवक फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे । इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु राजधानी लखनऊ में प्रदेश के 27 जनपदों और विभिन्न विश्वविद्यालयों के एनएसएस समन्वयक , नोडल अधिकारियों, और कार्यक्रम अधिकारियों की प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
जिसमे एनएसएस राज्य संपर्क अधिकारी प्रो मंजू सिंह, युवा अधिकारी समरदीप सक्सेना के दिशानिर्देशन में छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कार्यक्रम अधिकारियों ने प्रतिभाग किया । समन्वयक प्रो के एन मिश्रा के नेतृत्व में जिला नोडल अधिकारी डॉ श्याम मिश्रा , डॉ संगीता सिरोही , डॉ नीरज कुमार , डॉ आशीष गुप्ता , डॉ यश कुमार , नोडल कानपुर देहात ने प्रशिक्षण प्राप्त किया । इस प्रशिक्षण में फाइलेरिया के फैलाव , एमडीए , क्यूलेक्स मच्छर की रोकथाम जैसे विषयों को पीसीआई, मिलिंडा गेट फाउंडेशन के अधिकारियों और डॉक्टर्स द्वारा विस्तार से समझाया गया । प्रशिक्षण के उपरांत अब कानपुर विश्वविद्यालय अंतर्गंत जनपदों के एनएसएस महाविद्यालयों और अन्य महाविद्यालयों में 10 अगस्त से प्रस्तावित एमडीए वितरण में सहयोग देंगे साथ ही साथ स्वयं दवा खायेंगे और परिवार एवं आसपास के लोगो को दवा सेवन हेतु प्रेरित करेंगे ।
देश प्रदेश
ग्राम पंचायतों का डिजिटलीकरण
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत पंचायती राज मंत्रालय देश के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना का (एमएमपी) क्रियान्वयन कर रहा है। इसका उद्देश्य पंचायतों की कार्य प्रणाली में सुधार लाना और उन्हें अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना है। मंत्रालय ने योजना, लेखा और बजट जैसे पंचायत कार्यों को सरल बनाने के लिए एक लेखा अनुप्रयोग ई ग्राम स्वराज (eGramSwaraj) की शुरुआत की है। मंत्रालय ने विक्रेताओं/सेवा प्रदाताओं को वास्तविक समय पर भुगतान करने के लिए ग्राम पंचायतों (जीपी) के लिए सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के साथ ई-ग्राम स्वराज को भी एकीकृत किया है। पिछले तीन वर्षों और चालू वर्ष के दौरान ई-ग्राम स्वराज के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सहित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा की गई प्रगति का ब्यौरा अनुलग्नक में दिया गया है।
इसके अलावा, दूरसंचार विभाग (डीओटी) देश में सभी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए भारतनेट परियोजना को लागू कर रहा है। एक लाख ग्राम पंचायतों को जोड़ने की परियोजना का पहला चरण दिसंबर 2017 में पूरा हो चुका है। भारतनेट के पहले चरण के तहत 1.23 लाख ग्राम पंचायतों में से लगभग 1.22 लाख ग्राम पंचायतों को सेवा के लिए तैयार किया गया था। शेष ग्राम पंचायतों से जुड़ने के लिए दूसरे चरण का कार्यान्वयन प्रगति पर है। भारतनेट के दूसरे चरण के अंतर्गत 1.44 लाख आबंटित ग्राम पंचायतों में से 77,000 से अधिक ग्राम पंचायतों को सेवा के लिए तैयार कर दिया गया है।
पंचायती राज मंत्रालय योजनाओं और कार्यक्रमों के तहत वित्तीय तथा तकनीकी सहायता के माध्यम और समय-समय पर सलाह जारी करके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पीआरआई के सुदृढ़ीकरण और विकास के लिए कई अन्य कदम उठा रहा है। उठाए गए विभिन्न उपायों में अच्छा कार्य करने वाली पंचायतों को प्रोत्साहित करना, पंचायतों के क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना है ताकि वे प्रभावी ढंग और कुशलता से हस्तांतरित कार्यों को निष्पादित कर सकें। इसके अलावा, बजट, लेखांकन और लेखा परीक्षा की प्रणालियों को सुदृढ़ करना और पंचायतों द्वारा सहभागी ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार करने में राज्यों की सहायता करना शामिल है।
अनुलग्नक
वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान पंचायत स्तर पर अपनाया गया ई–ग्राम स्वराज
क्रं. संख्या | राज्य का नाम | 2020-21 | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | ||||||||
ग्राम पंचायतों की कुल संख्या और समतुल्य | ग्राम पंचायत में लागू | ऑनलाइन भुगतान सुविधा के साथ ग्राम पंचायत और समतुल्य | ग्राम पंचायतों की कुल संख्या और समतुल्य | ग्राम पंचायत में लागू | ऑनलाइन भुगतान सुविधा के साथ ग्राम पंचायत और समतुल्य | ग्राम पंचायतों की कुल संख्या और समतुल्य | ग्राम पंचायत में लागू | ऑनलाइन भुगतान सुविधा के साथ ग्राम पंचायत और समतुल्य | ग्राम पंचायतों की कुल संख्या और समतुल्य | ग्राम पंचायत में लागू | ऑनलाइन भुगतान सुविधा के साथ ग्राम पंचायत और समतुल्य | ||
1 | आंध्र प्रदेश | 13422 | 8843 | 0 | 13371 | 8840 | 0 | 13371 | 8763 | 2 | 13371 | 8763 | 0 |
2 | अरुणाचल प्रदेश | 2100 | 2068 | 0 | 2114 | 2096 | 0 | 2108 | 2096 | 1218 | 2108 | 2096 | 688 |
3 | असम | 2664 | 2197 | 2197 | 2664 | 2197 | 1973 | 2662 | 2197 | 2185 | 2662 | 2197 | 2111 |
4 | बिहार | 8387 | 8387 | 15 | 8221 | 8220 | 7924 | 8176 | 8175 | 7954 | 8176 | 8175 | 6782 |
5 | छत्तीसगढ़ | 11666 | 11663 | 11388 | 11658 | 11657 | 11303 | 11659 | 11658 | 11546 | 11659 | 11658 | 7405 |
6 | गोवा | 191 | 191 | 98 | 191 | 191 | 169 | 191 | 191 | 138 | 191 | 191 | 40 |
7 | गुजरात | 14308 | 14237 | 1 | 14343 | 14239 | 13168 | 14400 | 14272 | 13435 | 14589 | 14272 | 10616 |
8 | हरियाणा | 6304 | 6258 | 4497 | 6237 | 6204 | 3653 | 6230 | 6198 | 3768 | 6226 | 6188 | 4090 |
9 | हिमाचल प्रदेश | 3654 | 3613 | 29 | 3616 | 3613 | 1321 | 3615 | 3613 | 3563 | 3615 | 3613 | 2948 |
10 | जम्मू और कश्मीर | 4277 | 4276 | 4231 | 4291 | 4290 | 4251 | 4291 | 4290 | 4221 | 4291 | 4290 | 176 |
11 | झारखंड | 4364 | 4364 | 4268 | 4353 | 4352 | 4348 | 4345 | 4344 | 4338 | 4345 | 4344 | 4171 |
12 | कर्नाटक | 6008 | 6008 | 5940 | 5968 | 5967 | 5919 | 5958 | 5958 | 5942 | 5958 | 5958 | 5626 |
13 | केरल | 941 | 941 | 0 | 941 | 941 | 941 | 941 | 941 | 940 | 941 | 941 | 614 |
14 | लद्दाख | 193 | 193 | 173 | 193 | 193 | 151 | 193 | 193 | 82 | 193 | 193 | 0 |
15 | मध्य प्रदेश | 22813 | 22808 | 22496 | 23129 | 23069 | 22126 | 23032 | 22991 | 21495 | 23032 | 22991 | 18345 |
16 | महाराष्ट्र | 27903 | 27810 | 1264 | 27902 | 27813 | 18364 | 27900 | 27783 | 26185 | 27555 | 27448 | 18499 |
17 | मणिपुर | 3811 | 161 | 160 | 3812 | 161 | 153 | 3812 | 161 | 160 | 3812 | 161 | 0 |
18 | मेघालय | 6758 | 0 | 0 | 6760 | 0 | 0 | 6760 | 0 | 0 | 6760 | 0 | 0 |
19 | मिजोरम | 834 | 834 | 2 | 834 | 834 | 832 | 834 | 834 | 764 | 834 | 834 | 27 |
20 | नागालैंड | 1280 | 5 | 0 | 1293 | 5 | 0 | 1293 | 5 | 0 | 1293 | 5 | 0 |
21 | ओडिशा | 6798 | 6798 | 6714 | 6798 | 6798 | 6734 | 6798 | 6798 | 6773 | 6798 | 6798 | 6228 |
22 | पंजाब | 13270 | 13206 | 8082 | 13268 | 13207 | 10309 | 13241 | 13183 | 9813 | 13241 | 13183 | 7284 |
23 | राजस्थान | 11347 | 11314 | 3858 | 11343 | 11316 | 8493 | 11342 | 11315 | 11244 | 11342 | 11315 | 7936 |
24 | सिक्किम | 185 | 181 | 4 | 185 | 181 | 130 | 199 | 181 | 175 | 199 | 181 | 138 |
25 | तमिलनाडु | 12519 | 12490 | 7986 | 12525 | 12496 | 7783 | 12525 | 12494 | 12029 | 12525 | 12494 | 10835 |
26 | तेलंगाना | 12771 | 12765 | 0 | 12773 | 12767 | 0 | 12769 | 12767 | 12543 | 12769 | 12767 | 12451 |
27 | दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव | 38 | 0 | 0 | 38 | 0 | 0 | 38 | 0 | 0 | 38 | 0 | 0 |
28 | त्रिपुरा | 1178 | 1178 | 1176 | 1178 | 1178 | 1177 | 1178 | 1178 | 1158 | 1178 | 1178 | 911 |
29 | उत्तराखंड | 7791 | 7791 | 7763 | 7791 | 7791 | 6291 | 7812 | 7811 | 7730 | 7812 | 7811 | 7316 |
30 | उत्तर प्रदेश | 58984 | 58950 | 58425 | 58842 | 58810 | 57857 | 58842 | 58810 | 58151 | 58853 | 58821 | 51048 |
31 | पश्चिम बंगाल | 3340 | 3229 | 1863 | 3340 | 3229 | 3213 | 3340 | 3229 | 3223 | 3340 | 3229 | 3218 |
कुल | 270099 | 252759 | 152630 | 269972 | 252655 | 198583 | 269855 | 252429 | 230775 | 269706 | 252095 | 189503 |
यह जानकारी केन्द्रीय पंचायती राज के राज्य मंत्री श्री कपिल मोरेश्वर पाटिल ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर के रूप में दी।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में भारत के पहले स्वदेशी रूप से विकसित, लागत प्रभावी, कम भार वाले, अत्यधिक तीव्र (अल्ट्राफास्ट), 1.5 टेस्ला के उच्च क्षेत्र (हाई फील्ड) वाले अगली पीढ़ी के मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैनर का शुभारभ किया
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह एमआरआई स्कैनर देश में विकसित किया गया है, अतः आम आदमी के लिए एमआरआई स्कैनिंग की लागत बहुत कम होने की उम्मीद है, जिससे अभी तक अत्यधिक लागत वाले एमआरआई स्कैन तक भी सबकी पहुंच हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय बाजार से एमआरआई स्कैनर की खरीद में पूंजी निवेश भी बहुत हद तक तक कम हो जाएगा, जिसके कारण बहुत सारी विदेशी मुद्रा की भी बचत होगीI साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत में नैदानिक और चिकित्सीय विनिर्माण के दोहरे मिशन के उद्देश्य और आत्मनिर्भरता के समग्र उद्देश्य को भी अत्याधुनिक बनाया जा सकेगा। मंत्री महोदय ने कहा कि आने वाले वर्षों में, “भारत में बनाएं- विश्व के लिए बनाएं (मेक इन इंडिया-मेड फॉर द वर्ल्ड)” होगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वास्तव में यह राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (एनबीएम), जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के लिए एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित करने वाली उपलब्धि है क्योंकि हम सार्वजनिक-निजी भागीदारी प्रारूप के अंतर्गत अपने पहले स्वदेशी रूप से विकसित अत्याधुनिक एमआरआई स्कैनर को सामने लेकर आए हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के अंतर्गत वोक्सेलग्रिड्स इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड ने देश की अब तक अपूर्ण आवश्यकता को पूरा करने के लिए अपने आप में सम्पूर्ण (कॉम्पैक्ट), कम भार वाले, अगली पीढ़ी के एमआरआई स्कैनर विकसित किया है।
मंत्री महोदय ने रेखांकित किया कि विश्व स्तरीय एमआरआई विकसित करने के लिए व्यय किए गए 17 करोड़ रुपये में से 12 करोड़ रुपये जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा प्रदान किए गए थे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सॉफ्टवेयर के साथ अगली पीढ़ी के हार्डवेयर के इस संयोजन ने नैदानिक छायांकन (डायग्नोस्टिक इमेजिंग) के क्षेत्र में एक अत्यधिक विघटनकारी उत्पाद को सफलतापूर्वक प्रस्तुत करने में सक्षम बनाया है, क्योंकि यह भारत सरकार के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से वाणिज्यिक बिक्री और निर्माण लाइसेंस प्राप्त करने वाली पहली भारतीय कंपनी है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि विश्व की 70 प्रतिशत जनसंख्या की मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) की नैदानिक (डायग्नोस्टिक) पद्धति तक पहुंच नहीं है। कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी), एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी अन्य छायांकन (इमेजिंग) प्रविधियों की तुलना में एमआरआई स्कैनर तक पहुंच सामान्य रूप से 3 गुना कम है। इसका कारण इसकी अत्यधिक उच्च पूंजीगत लागत है जो भारत जैसे विकासशील देशों में एक समस्या है। भारत में वर्तमान अनुमान बताते हैं कि एमआरआई का कुल स्थापित आधार 4800 है, जो कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) से 3 गुना कम है और जो संभवतः इस उत्पाद की उच्च लागत एवं आयात पर निर्भरता के कारण भी है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान में 350 से कम मशीनों की वार्षिक मांग है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ प्रमुख आयुष्मान भारत पहल सहित स्वास्थ्य देखभाल पहुंच और समावेशन में सुधार के लिए सरकार की कई पहलों के कारण, ग्लोबल डाटा इंक के अनुमानों के आधार पर वर्ष 2030 तक मांग दोगुनी से अधिक होने की उम्मीद है)।
मंत्री महोदय ने कहा कि भारत स्वदेशी रूप से विकसित पहला एमआरआई स्कैनर उपलब्ध कराकर इनमें से कई समस्याओं का समाधान करेगा, जो पहले से उपलब्ध मशीनों की तुलना में अत्यधिक लागत प्रभावी है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास इस सफलता को ग्लोबल साउथ में अन्य देशों के साथ साझा करने की संभावना भी प्रदान करता है ताकि उन्हें भी सस्ते और विश्वसनीय चिकित्सा इमेजिंग समाधानों तक पहुंच बनाने में सहायता मिल सके।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभा को यह भी बताया कि संसद में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी के मष्तिष्क की परिकल्पना, राष्ट्रीय अनुसन्धान फाउंडेशन (नेशनल रिसर्च फाउंडेशन -एनआरएफ) विधेयक के पारित होने के बाद, यह वैज्ञानिक और संबंधित मंत्रालयों के अलावा उद्योगों और राज्य सरकारों की भागीदारी तथा योगदान के लिए तंत्र बनाने के लिए उद्योग, शिक्षा और सरकारी विभागों एवं अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग स्थापित करने के साथ ही एक इंटरफ़ेस भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि यह एक नीतिगत ढांचा बनाने और नियामक प्रक्रियाओं को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करेगा जो अनुसंधान एवं विकास पर उद्योग द्वारा सहयोग और बढ़े हुए परिव्यय को प्रोत्साहित कर सके।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस सफलता को प्राप्त करने में यूपी इंडिया और डिजिटल इंडिया हमें देश को प्रगति और अंतरराष्ट्रीय पहचान की दिशा में ले जाने के लिए प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हमारे सक्षम नेतृत्व और इस सफलता को प्राप्त करने के लिए मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी राष्ट्रीय पहलों द्वारा निभाई गई भूमिका को स्वीकार करते हुए उनके प्रति आभार प्रकट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत, प्रौद्योगिकी का मात्र उपभोक्ता बने रहने के स्थान पर अब नवप्रवर्तक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अपने संबोधन में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव, डीबीटी, डॉ. राजेश गोखले ने कहा कि उनके विभाग ने अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से भारत में उपकरणों और नैदानिक पारिस्थितिकी तंत्र पर ध्यान देने के साथ ही जैवऔषधि (बायोफार्मा) क्षेत्र को सशक्त करने के लिए जबरदस्त प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) द्वारा कार्यान्वित जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) का राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (एनबीएम) टीकों, समरूपजैव चिकित्सा उत्पादों (बायोसिमिलर्स), चिकित्सा उपकरणों और नैदानिकी (डायग्नोस्टिक्स) सहित जैव चिकित्सा शास्त्र (बायोथेराप्यूटिक्स) में भारत की प्रौद्योगिक एवं उत्पाद विकास करने की क्षमताओं में तेजी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
मेजर जनरल अमिता रानी ने एमएनएस, अपर महानिदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया

जनरल ऑफिसर 1983 में मिलिट्री नर्सिंग सेवा में शामिल हुईं। मेजर जनरल अमिता रानी ने गुणवत्ता नियंत्रण, संक्रमण नियंत्रण और रोकथाम प्रबंधन, स्वास्थ्य देखभाल में सिक्स सिग्मा ग्रीन बेल्ट पर अल्पकालिक पाठ्यक्रम पूरा किया है। इसके अलावा उन्होंने नेशनल हेल्थ केयर एकेडमी, जिसका मुख्यालय सिंगापुर में स्थित है, वहां से अस्पताल और गुणवत्ता प्रबंधन में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम का प्रमाणपत्र हासिल किया है। एक सक्षम प्रशासक के रूप में उन्होंने डीपीएम सीएच (ईसी) कोलकाता, 154 जीएच में प्रिंसिपल मैट्रॉन, एमएच जालंधर, एमएच इलाहाबाद और कमांड हॉस्पिटल एयर फोर्स, बैंगलोर जैसे प्रमुख पदों पर काम किया है।
प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के पुणे में विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया
सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगस्त उत्सव और क्रांति का महीना है। स्वतंत्रता संग्राम में पुणे शहर के योगदान पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महानगर ने बाल गंगाधर तिलक सहित देश को कई स्वतंत्रता सेनानी दिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आज महान अन्ना भाऊ साठे की जयंती है जो एक समाज सुधारक थे और डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के आदर्शों से प्रेरित थे। प्रधानमंत्री ने आज भी बताया कि कई छात्र और शिक्षाविद् उनके साहित्यिक कार्यों पर शोध करते हैं और उनके कार्य और आदर्श सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “पुणे एक जीवंत शहर है जो देश की अर्थव्यवस्था को गति देता है और पूरे देश के युवाओं के सपनों को पूरा करता है। आज की लगभग 15 हजार करोड़ की परियोजनाएं इस पहचान को और मजबूत करेंगी।”
प्रधानमंत्री ने शहरी मध्यम वर्ग के जीवन की गुणवत्ता को लेकर सरकार की गंभीरता की ओर लोगों का ध्यान दिलाया। प्रधानमंत्री ने पांच साल पहले मेट्रो के काम की शुरुआत को याद करते हुए कहा कि इस अवधि में 24 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क पहले ही काम करना शुरू कर चुका है।
श्री मोदी ने हर शहर में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कारण से मेट्रो नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है, नए फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं और ट्रैफिक लाइटों की संख्या कम करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 से पहले देश में केवल 250 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क था और ज्यादातर मेट्रो लाइनें दिल्ली तक ही सीमित थीं, जबकि आज देश में मेट्रो नेटवर्क 800 किलोमीटर से ज्यादा हो गया है और 1000 किलोमीटर की नई मेट्रो लाइनों पर काम चल रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 से पहले मेट्रो नेटवर्क भारत के केवल 5 शहरों तक ही सीमित था, जबकि आज मेट्रो पुणे, नागपुर और मुंबई सहित 20 शहरों में काम कर रही है, जहां नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने पुणे जैसे शहर में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मेट्रो विस्तार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, “मेट्रो आधुनिक भारत के शहरों के लिए एक नई जीवन रेखा बन रही है।”
श्री मोदी ने शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार में स्वच्छता की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, स्वच्छ भारत अभियान केवल शौचालय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपशिष्ट प्रबंधन भी एक बड़ा फोकस क्षेत्र है। मिशन मोड में कूड़े के पहाड़ हटाये जा रहे हैं। उन्होंने पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी) के तहत अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्र के लाभों के बारे में बताया।
प्रधानमंत्री ने अपनी टिप्पणी में कहा, “आजादी के बाद से ही महाराष्ट्र के औद्योगिक विकास ने भारत के औद्योगिक विकास को निरंतर गति दी है।” राज्य में औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र में सरकार द्वारा किए जा रहे अभूतपूर्व निवेश के बारे में चर्चा की। उन्होंने राज्य में नए एक्सप्रेसवे, रेलवे मार्गों और हवाई अड्डों के विकास का उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री ने बताया कि रेलवे के विस्तार के लिए 2014 से पहले की तुलना में खर्च में बारह गुना वृद्धि हुई है। महाराष्ट्र के विभिन्न शहर पड़ोसी राज्यों के आर्थिक केंद्रों से भी जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल का उदाहरण दिया, जिससे महाराष्ट्र और गुजरात दोनों को लाभ होगा, दिल्ली-मुंबई आर्थिक गलियारा जो महाराष्ट्र को मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों से जोड़ेगा, राष्ट्रीय समर्पित माल ढुलाई गलियारा जो बदलाव लाएगा। महाराष्ट्र और उत्तर भारत के बीच रेल संपर्क, और राज्य को छत्तीसगढ़, तेलंगाना, अन्य पड़ोसी राज्यों से जोड़ने के लिए ट्रांसमिशन लाइन नेटवर्क, जिससे उद्योगों, तेल और गैस पाइपलाइनों, औरंगाबाद औद्योगिक शहर, नवी मुंबई हवाई अड्डे और शेंद्रा बिडकिन औद्योगिक पार्क को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाएं महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार करने की क्षमता रखती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य के विकास से देश के विकास के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “जब महाराष्ट्र विकसित होगा, तो भारत विकसित होगा। जब भारत बढ़ेगा, तो महाराष्ट्र को भी लाभ मिलेगा।” नवाचार और स्टार्टअप के केंद्र के रूप में भारत की बढ़ती पहचान के बारे में चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने 9 साल पहले कुछ सौ की तुलना में 1 लाख स्टार्टअप को पार कर लिया है। उन्होंने इस सफलता के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार को श्रेय दिया और भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे की नींव में पुणे की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, “सस्ता डेटा, किफायती फोन और हर गांव तक पहुंचने वाली इंटरनेट सुविधाओं ने इस क्षेत्र को मजबूत किया है। भारत 5जी सेवाओं के सबसे तेज़ रोलआउट वाले देशों में से एक है।” उन्होंने यह भी कहा कि फिनटेक, बायोटेक और एग्रीटेक में युवाओं द्वारा की गई प्रगति से पुणे को फायदा हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने कर्नाटक और बेंगलुरु के लिए राजनीतिक स्वार्थ के परिणामों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कर्नाटक और राजस्थान में विकास ठप होने पर भी अफसोस जताया।
श्री मोदी ने कहा, “देश को आगे ले जाने के लिए नीति, नियत और नियम (नीति निष्ठा और नियम) भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।” उन्होंने कहा कि यह विकास के लिए एक निर्णायक शर्त है। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले के 10 सालों में उस वक्त की दो योजनाओं में सिर्फ 8 लाख घर बने थे। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों ने महाराष्ट्र में 50 हजार सहित 2 लाख से अधिक ऐसे घरों को खराब गुणवत्ता के कारण खारिज कर दिया।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार ने सही इरादे से काम करना शुरू किया और 2014 में सत्ता में आने के बाद नीति में बदलाव किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 9 वर्षों में सरकार ने गांवों और शहरी गरीबों के लिए 4 करोड़ से अधिक पक्के घर बनाए हैं, जबकि शहरी गरीबों के लिए 75 लाख से अधिक घर बनाए गए हैं। उन्होंने निर्माण में लाई गई पारदर्शिता और उनकी गुणवत्ता में सुधार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि देश में पहली बार अधिकांश पंजीकृत घर आज महिलाओं के नाम पर हैं। यह देखते हुए कि इन घरों की लागत कई लाख रुपये है, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले 9 वर्षों में देश में करोड़ों महिलाएं अब ‘लखपति’ बन गई हैं। प्रधानमंत्री ने उन सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दीं जिन्होंने अपना नया घर पाया है।
उन्होंने कहा, ”गरीब हो या मध्यमवर्गीय परिवार, हर सपने को पूरा करना मोदी की गारंटी है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि एक सपने के साकार होने से कई संकल्पों की शुरुआत होती है और यह उस व्यक्ति के जीवन में प्रेरक शक्ति बन जाती है। उन्होंने कहा, “हमें आपके बच्चों, आपकी वर्तमान और आपकी आने वाली पीढ़ियों की परवाह है।”
संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने एक मराठी कहावत उद्धृत करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास न केवल आज को बेहतर बनाना है बल्कि कल को भी बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण का संकल्प इसी भावना की अभिव्यक्ति है। श्री मोदी ने महाराष्ट्र में एक ही उद्देश्य के साथ एक साथ आने वाली कई अलग-अलग पार्टियों की तरह एक साथ काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा, “उद्देश्य यह है कि सभी की भागीदारी से महाराष्ट्र के लिए बेहतर काम किया जा सके, महाराष्ट्र का तेज गति से विकास हो।”
इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री रमेश बैस, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फड़नवीस और श्री अजीत पवार और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और अन्य लोग उपस्थित थे।
पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री ने पुणे मेट्रो चरण-I के दो गलियारों के पूर्ण खंडों पर सेवाओं के उद्घाटन के अवसर पर मेट्रो ट्रेनों को झंडी दिखाई। ये खंड फुगेवाड़ी स्टेशन से सिविल कोर्ट स्टेशन और गरवारे कॉलेज स्टेशन से रूबी हॉल क्लिनिक स्टेशन तक हैं। परियोजना की आधारशिला भी 2016 में प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई थी। नए खंड पुणे शहर के महत्वपूर्ण स्थानों जैसे शिवाजी नगर, सिविल कोर्ट, पुणे नगर निगम कार्यालय, पुणे आरटीओ और पुणे रेलवे स्टेशन को जोड़ देंगे। यह उद्घाटन पूरे देश में नागरिकों को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल व्यापक तीव्र शहरी परिवहन प्रणाली प्रदान करने के प्रधानमंत्री के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मार्ग पर कुछ मेट्रो स्टेशनों का डिज़ाइन छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरणा ग्रहण करता है। छत्रपति संभाजी उद्यान मेट्रो स्टेशन और डेक्कन जिमखाना मेट्रो स्टेशनों का अनोखा डिज़ाइन छत्रपति शिवाजी महाराज के सैनिकों द्वारा पहनी जाने वाली टोपी से मिलता-जुलता है – जिसे ‘मावला पगड़ी’ के नाम से भी जाना जाता है। शिवाजी नगर भूमिगत मेट्रो स्टेशन का एक विशिष्ट डिज़ाइन है जो छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा निर्मित किलों की याद दिलाता है।
एक अनूठी विशेषता यह है कि सिविल कोर्ट मेट्रो स्टेशन देश के सबसे गहरे मेट्रो स्टेशनों में से एक है, जिसकी सबसे अधिक गहराई 33.1 मीटर है। स्टेशन की छत इस तरह बनाई गई है कि प्लेटफॉर्म पर सीधी धूप पड़े।
सभी के लिए आवास प्राप्त करने के मिशन की दिशा में आगे बढ़ते हुए, प्रधानमंत्री ने पीसीएमसी द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित 1280 से अधिक घरों के साथ-साथ पुणे नगर निगम द्वारा निर्मित 2650 से अधिक पीएमएवाई घरों को सौंप दिया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने पीसीएमसी द्वारा निर्मित किए जाने वाले लगभग 1190 पीएमएवाई घरों और पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित 6400 से अधिक घरों की आधारशिला भी रखी।
प्रधानमंत्री ने पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी) के तहत अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन किया। इसे लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है, जो बिजली उत्पादन के लिए सालाना लगभग 2.5 लाख मीट्रिक टन कचरे का इस्तेमाल करेगा।
जुलाई 2023 के लिए सकल जीएसटी राजस्व संग्रह 1,65,105 करोड़ रुपये रहा; वर्ष-दर-वर्ष 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई
सरकार ने आईजीएसटी से सीजीएसटी में 39,785 करोड़ रुपये और एसजीएसटी को 33,188 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। नियमित भुगतान के बाद जुलाई 2023 महीने में केंद्र और राज्यों का कुल राजस्व सीजीएसटी के लिए 69,558 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिए 70,811 करोड़ रुपये है।
जुलाई 2023 महीने का राजस्व पिछले साल के इसी महीने में प्राप्त जीएसटी राजस्व से 11 प्रतिशत अधिक है। इस मास के दौरान, घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात सहित) से प्राप्त राजस्व पिछले वर्ष के इसी महीने के दौरान इन स्रोतों से प्राप्त राजस्व से 15 प्रतिशत अधिक है। ऐसा पांचवीं बार है, जब सकल जीएसटी संग्रह 1.60 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।
नीचे दिया गया चार्ट चालू वर्ष के दौरान मासिक सकल जीएसटी राजस्व में आए रुझान को दर्शाता है। तालिका-1 जुलाई 2022 की तुलना में जुलाई 2023 के महीने के दौरान प्रत्येक राज्य में संग्रहित जीएसटी के राज्य-वार आंकड़े दर्शाती है और तालिका-2 जुलाई 2023 में राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों को प्राप्त/भुगतान किए गए आईजीएसटी के एसजीएसटी और एसजीएसटी हिस्से को दर्शाती है।
जुलाई 2023 के दौरान जीएसटी राजस्व की राज्यवार वृद्धि [1] (करोड़ रुपये में)
राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश | जुलाई’22 | जुलाई’23 | विकास(प्रतिशत) |
जम्मू एवं कश्मीर | 431 | 549 | 27 |
हिमाचल प्रदेश | 746 | 917 | 23 |
पंजाब | 1733 | 2000 | 15 |
चंडीगढ़ | 176 | 217 | 23 |
उत्तराखंड | 1390 | 1607 | 16 |
हरियाणा | 6791 | 7953 | 17 |
दिल्ली | 4327 | 5405 | 25 |
राजस्थान | 3671 | 3988 | 9 |
उत्तर प्रदेश | 7074 | 8802 | 24 |
बिहार | 1264 | 1488 | 18 |
सिक्किम | 249 | 314 | 26 |
अरुणाचल प्रदेश | 65 | 74 | 13 |
नगालैंड | 42 | 43 | 3 |
मणिपुर | 45 | 42 | -7 |
मिजोरम | 27 | 39 | 47 |
त्रिपुरा | 63 | 78 | 23 |
मेघालय | 138 | 175 | 27 |
असम | 1040 | 1183 | 14 |
पश्चिम बंगाल | 4441 | 5128 | 15 |
झारखंड | 2514 | 2859 | 14 |
ओडिशा | 3652 | 4245 | 16 |
छत्तीसगढ़ | 2695 | 2805 | 4 |
मध्य प्रदेश | 2966 | 3325 | 12 |
गुजरात | 9183 | 9787 | 7 |
दमन और दीव | 313 | 354 | 13 |
दादरा और नगर हवेली | |||
महाराष्ट्र | 22129 | 26064 | 18 |
कर्नाटक | 9795 | 11505 | 17 |
गोवा | 433 | 528 | 22 |
लक्षद्वीप | 2 | 2 | 45 |
केरल | 2161 | 2381 | 10 |
तमिलनाडु | 8449 | 10022 | 19 |
पुदुचेरी | 198 | 216 | 9 |
अंडमान व निकोबार द्वीप समूह | 23 | 31 | 32 |
तेलंगाना | 4547 | 4849 | 7 |
आंध्र प्रदेश | 3409 | 3593 | 5 |
लद्दाख | 20 | 23 | 13 |
अन्य क्षेत्र | 216 | 226 | 4 |
केंद्र क्षेत्राधिकार | 162 | 209 | 29 |
कुल योग | 106580 | 123026 | 15 |
जुलाई‘ 2023 में राज्यों/केंद्र–शासित प्रदेशों को भुगतान किए गए आईजीएसटी के एसजीएसटी और एसजीएसटी हिस्से की राशि (करोड़ रुपये में)
राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश | एसजीएसटी संग्रह | आईजीएसटी का एसजीएसटी भाग | कुल |
जम्मू एवं कश्मीर | 234 | 429 | 663 |
हिमाचल प्रदेश | 233 | 285 | 518 |
पंजाब | 727 | 1138 | 1865 |
चंडीगढ़ | 57 | 133 | 190 |
उत्तराखंड | 415 | 210 | 625 |
हरियाणा | 1610 | 1256 | 2866 |
दिल्ली | 1221 | 1606 | 2827 |
राजस्थान | 1380 | 1819 | 3199 |
उत्तर प्रदेश | 2751 | 3426 | 6176 |
बिहार | 718 | 1469 | 2187 |
सिक्किम | 30 | 53 | 83 |
अरुणाचल प्रदेश | 37 | 113 | 150 |
नगालैंड | 18 | 70 | 88 |
मणिपुर | 23 | 58 | 80 |
मिजोरम | 22 | 57 | 79 |
त्रिपुरा | 40 | 86 | 125 |
मेघालय | 50 | 99 | 149 |
असम | 451 | 696 | 1146 |
पश्चिम बंगाल | 1953 | 1531 | 3483 |
झारखंड | 721 | 330 | 1051 |
ओडिशा | 1300 | 416 | 1716 |
छत्तीसगढ़ | 627 | 382 | 1009 |
मध्य प्रदेश | 1045 | 1581 | 2626 |
गुजरात | 3293 | 1917 | 5210 |
दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव | 56 | 29 | 85 |
महाराष्ट्र | 7958 | 4167 | 12124 |
कर्नाटक | 3181 | 2650 | 5831 |
गोवा | 173 | 146 | 320 |
लक्षद्वीप | 2 | 13 | 14 |
केरल | 1093 | 1441 | 2534 |
तमिलनाडु | 3300 | 2119 | 5419 |
पुदुचेरी | 41 | 57 | 99 |
अंडमान व निकोबार द्वीप समूह | 11 | 25 | 37 |
तेलंगाना | 1623 | 1722 | 3345 |
आंध्र प्रदेश | 1199 | 1556 | 2755 |
लद्दाख | 11 | 47 | 58 |
अन्य क्षेत्र | 19 | 55 | 75 |
कुल योग | 37623 | 33188 | 70811 |
सहकारी आंदोलन की अग्रणी संस्था कानपुर क्रय विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड के निर्वाचन की घोषणा
कानपुर सहकारी आंदोलन की अग्रणी संस्था कानपुर क्रय विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड के निर्वाचन का क्रियान्वन घोषणा निर्वाचन अधिकारी दिग्विजय सिंह जिला उद्यान अधिकारी ने भाजपा के राहुल सिंह को सभापति श्रीमती श्वेता सिंह को उप सभापति घोषित किया तथा संचालक सर्वश्री ज्ञान पाल सिंह अभिलाष कुमार त्रिपाठी जयराम रोहित कुमार उमेश कुमार निषाद सुमन लता सिंह प्रताप सिंह रामचंद्र भारती नीरज सिंह को निर्वाचित घोषित किया निर्वाचन में सभापति हेतु राहुल सिंह ने अपने प्रतिद्वंदी प्रताप सिंह को 5 वोटों से पराजित किया तथा उपसभापति में श्वेता सिंह ने भी रामचंद्र भारती को 5 मतों से हराया निर्वाचन की घोषणा होते ही राहुल सिंह के कैंप व श्वेता सिंह के कैंपों में खुशी की लहर दौड़ गई लोगों ने मालाओं से लाद दिया की जबकि नामांकन ज्ञातव्य हो कि जब नामांकन में प्रत्याशी सहित दो संचालकों के और हस्ताक्षर होते हैं कुल 3 मत की जगह दो मत ही मिले लगता है कि प्रस्तावक या समर्थक में कोई एक मत जो राहुल सिंह व श्वेता सिंह को प्राप्त हुआ!. उक्त निर्वाचन में सहकारिता आंदोलन के खाटी नेता सुरेश गुप्ता की अहम भूमिका रही उक्त निर्वाचन के समय श्री अजय प्रताप सिंह चेयरमैन जिला सहकारी फेडरेशन शिव हर्षवर्धन सिंह शिव मोहन सिंह ए.पी.सिंह भदोरिया गंगाराम शर्मा पुष्पेंद्र सिंह आदित्य तिवारी संजय सिंह सत्यम सिंह संदीप गुप्ता शिवनाथ कुरील रमाशंकर अग्रहरि आदि प्रमुख थे
दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के अंतर्गत सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा अर्थात सड़क सुरक्षा पखवाड़ा आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता, विगत दिवस दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के अंतर्गत महाविद्यालय में गठित किए गए रोड सेफ्टी क्लब तथा राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के संयुक्त तत्वाधान में रोड सेफ्टी क्लब की प्रभारी डॉ संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में *सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा अर्थात सड़क सुरक्षा पखवाड़े* के समापन 31 जुलाई, 2023 के अवसर पर छात्राओं के द्वारा निबंध लेखन व पोस्टर प्रतियोगिता, जन-जागरण रैली एवम् शपथ का आयोजन किया गया।
जन–जागरण हेतु वॉलिंटियर्स के द्वारा महाविद्यालय के बाहर एवं मर्चेंट चेंबर चौराहे पर आने जाने वाले यात्रियों, वाहन चालको, विशेष रुप से ई- रिक्शा चालक को रोककर
रोड सेफ्टी तथा यातायात के नियमों के बारे में अवगत कराया गया ताकि दिन-प्रतिदिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके तथा ट्रैफिक जाम की समस्या को भी समाप्त किया जा सके। छात्राओं के द्वारा जनसामान्य को रोड एक्सीडेंट के समय बरतने वाली सुविधाओं व किए जाने वाले प्राथमिक उपचार के बारे में भी बताया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो अर्चना वर्मा ने रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय कार्यालय अधीक्षक कृष्णेंद्र कुमार श्रीवास्तव, प्रो मधुरिमा, डॉ अंजना श्रीवास्तव आदि प्राध्यापिकाओं का विशेष योगदान रहा।
वीर शहीद पुरुषों और महिलाओं के सम्मान में ‘मेरी माटी मेरा देश’ अभियान शुरू किया जाएगा: प्रधानमंत्री
उन्होंने यह भी बताया, “इसके तहत हमारे अमर शहीदों की याद में देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। इन विभूतियों की स्मृति में देश की लाखों ग्राम पंचायतों में विशेष शिलालेख भी लगाये जायेंगे। इस अभियान के तहत देशभर में ‘अमृत कलश यात्रा’ भी आयोजित की जाएगी।”
उन्होंने कहा कि यह ‘अमृत कलश यात्रा’ देश के कोने-कोने से 7500 कलशों में मिट्टी लेकर देश की राजधानी दिल्ली पहुंचेगी। यह यात्रा अपने साथ देश के विभिन्न हिस्सों से पौधे भी लेकर आएगी। 7500 कलशों में आने वाली मिट्टी और पौधों को मिलाकर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के पास ‘अमृत वाटिका’ बनाई जाएगी। ये ‘अमृत वाटिका’ ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का भी भव्य प्रतीक बनेगी।
एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के जुड़ाव की अवधारणा के माध्यम से विभिन्न राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लोगों के बीच बातचीत और आपसी समझ को बढ़ावा देना है।
अमृत सरोवरों के बारे में बोलते हुए श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि बारिश का यह चरण ‘वृक्षारोपण’ और ‘जल संरक्षण’ के लिए महत्वपूर्ण है। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के दौरान बने 60 हजार से ज्यादा अमृत सरोवर उदहारणस्वरुप हैं। वर्तमान में 50 हजार से अधिक अमृत सरोवरों के निर्माण का कार्य चल रहा है। हमारे देशवासी पूरी जागरूकता और जिम्मेदारी के साथ ‘जल संरक्षण’ के लिए नये प्रयास कर रहे हैं।
भविष्य की पीढ़ी के लिए जल संचयन और संरक्षण के उद्देश्य से 24 अप्रैल 2022 को मिशन अमृत सरोवर शुरू किया गया है। मिशन अमृत सरोवर की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं-
- मिशन अमृत सरोवर ग्रामीण विकास मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और तकनीकी संगठनों की भागीदारी के साथ “संपूर्ण सरकार” के दृष्टिकोण पर आधारित है।
- मिशन के तहत देश के हर जिले में कम से कम 75 अमृत सरोवरों का निर्माण या कायाकल्प किया जाएगा।
- प्रत्येक अमृत सरोवर में कम से कम 1 एकड़ का तालाब क्षेत्र होगा और लगभग 10,000 घन मीटर जल धारण क्षमता होगी।
- प्रत्येक अमृत सरोवर नीम, पीपल और बरगद आदि वृक्षों से घिरा होगा।
- प्रत्येक अमृत सरोवर सिंचाई, मछली पालन, बत्तख पालन, सिंघाड़े की खेती, जल पर्यटन और अन्य गतिविधियों जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए पानी का उपयोग करके आजीविका सृजन का स्रोत होगा। अमृत सरोवर उस इलाके में एक सामाजिक मिलन स्थल के रूप में भी काम करेगा।
- मिशन अमृत सरोवर आज़ादी का अमृत महोत्सव के दौरान किए गए कार्यों का एक सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
कला और संस्कृति भारत की समृद्ध एवं विविध विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मन की बात के 103वें एपिसोड में भारत की समृद्ध विरासत के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “आइए हम न केवल अपनी विरासत को अपनाएं, बल्कि इसे दुनिया के सामने जिम्मेदारी से पेश भी करें। और मुझे खुशी है कि ऐसा ही एक प्रयास इन दिनों उज्जैन में चल रहा है, यहां देशभर के 18 चित्रकार पुराणों पर आधारित आकर्षक चित्र कथा पुस्तकें बना रहे हैं। ये पेंटिंग कई विशिष्ट शैलियों जैसे बूंदी शैली, नाथद्वारा शैली, पहाड़ी शैली और अपभ्रंश शैली में बनाई जाएंगी। इन्हें उज्जैन के त्रिवेणी संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा।”
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि प्राचीन काल से, हमारे धर्मग्रंथों और पुस्तकों को भोजपत्रों पर संरक्षित किया गया है। महाभारत भी भोजपत्र पर लिखा गया था। आज देवभूमि (उत्तराखंड) की महिलाएं भोजपत्र से बेहद खूबसूरत कलाकृतियां और स्मृति चिन्ह बना रही हैं। आज भोजपत्र के उत्पाद यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को काफी पसंद आ रहे हैं और वे इसे अच्छे दामों पर खरीद भी रहे हैं। भोजपत्र की ये प्राचीन विरासत उत्तराखंड की महिलाओं के जीवन में खुशियों के नए रंग भर रही है।
प्रधानमंत्री ने इस बात का भी जिक्र किया कि पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूरा देश ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के लिए एक साथ आया था और कहा कि इसी तरह इस बार भी हमें हर घर पर तिरंगा फहराना है और इस परंपरा को जारी रखना है।
प्रधानमंत्री महाराष्ट्र के पुणे में लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर लोकमान्य तिलक की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने लोकमान्य तिलक को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि यह उनके लिए एक विशेष दिन है। इस अवसर पर अपनी भावनाओं के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि तथा अन्ना भाऊ साठे की जयंती है। प्रधानमंत्री ने कहा, “लोकमान्य तिलक जी भारत के स्वतंत्रता संग्राम के ‘तिलक’ हैं।” उन्होंने समाज के कल्याण के लिए अन्ना भाऊ साठे के असाधारण और अद्वितीय योगदान को भी रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने छत्रपति शिवाजी, चापेकर बंधु, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की भूमि को श्रद्धांजलि दी। इसके पहले प्रधानमंत्री ने दगड़ूशेठ मंदिर में आशीर्वाद लिया।
प्रधानमंत्री ने आज लोकमान्य से सीधे जुड़े स्थान और संस्था द्वारा उन्हें दिए गए सम्मान को ‘अविस्मरणीय’ बताया। प्रधानमंत्री ने काशी और पुणे के बीच समानताओं का उल्लेख किया, क्योंकि दोनों स्थल ज्ञान-प्राप्ति के केंद्र हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोई पुरस्कार प्राप्त करता है, तो उसकी जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं, विशेषकर जब पुरस्कार के साथ लोकमान्य तिलक का नाम जुड़ा हो। प्रधानमंत्री ने लोकमान्य तिलक पुरस्कार भारत के 140 करोड़ नागरिकों को समर्पित किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार उनके सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मदद करने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी। प्रधानमंत्री ने नकद पुरस्कार की धनराशि नमामि गंगे परियोजना को दान करने के अपने फैसले की भी जानकारी दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता में लोकमान्य तिलक के योगदान को कुछ शब्दों या कुछ घटनाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता, क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम के सभी नेताओं और घटनाओं पर उनका स्पष्ट प्रभाव था। प्रधानमंत्री ने कहा, “यहां तक कि अंग्रेजों को भी उन्हें ‘भारतीय अशांति का जनक’ कहना पड़ता था।” श्री मोदी ने बताया कि लोकमान्य तिलक ने अपने ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ के दावे के साथ स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदल दी। तिलक ने अंग्रेजों द्वारा भारतीय परंपराओं को पिछड़ा बताने को भी गलत सिद्ध किया। प्रधानमंत्री ने याद किया कि महात्मा गांधी ने तिलक को आधुनिक भारत का निर्माता कहा था।
प्रधानमंत्री ने लोकमान्य तिलक की संस्था-निर्माण क्षमताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल के साथ उनका सहयोग, भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक स्वर्णिम अध्याय है। प्रधानमंत्री ने तिलक द्वारा समाचार पत्रों और पत्रकारिता के उपयोग किये जाने को भी याद किया। ‘केसरी’ आज भी महाराष्ट्र में प्रकाशित होता है और पढ़ा जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “यह सभी लोकमान्य तिलक द्वारा मजबूत संस्था निर्माण के प्रमाण हैं।”
संस्था निर्माण से आगे बढ़ते हुए, प्रधानमंत्री ने तिलक द्वारा परंपराओं का पोषण किये जाने पर प्रकाश डाला और छत्रपति शिवाजी के आदर्शों का उत्सव मनाने के लिए गणपति महोत्सव तथा शिव जयंती की शुरुआत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “ये आयोजन, भारत को एक सांस्कृतिक सूत्र में पिरोने तथा पूर्ण स्वराज की परिकल्पना से जुड़े अभियान भी थे। यह भारत की विशेषता रही है कि नेताओं ने स्वतंत्रता जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए लड़ाई लड़ी और सामाजिक सुधार का अभियान भी चलाया।”
देश के युवाओं में लोकमान्य तिलक के विश्वास का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने वीर सावरकर को मार्गदर्शन देने और श्यामजी कृष्ण वर्मा को सिफारिश करने को याद किया, जो लंदन में दो छात्रवृत्तियां चला रहे थे- छत्रपति शिवाजी छात्रवृत्ति तथा महाराणा प्रताप छात्रवृत्ति। पुणे में न्यू इंग्लिश स्कूल, फर्ग्यूसन कॉलेज और डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना इसी दृष्टिकोण के हिस्से हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “प्रणाली निर्माण से संस्था निर्माण, संस्था निर्माण से व्यक्ति निर्माण और व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का विजन, राष्ट्र के भविष्य के लिए एक रोडमैप की तरह है और देश इस रोडमैप का प्रभावी ढंग से पालन कर रहा है।”
लोकमान्य तिलक के साथ महाराष्ट्र के लोगों के विशेष बंधन पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात के लोग भी उनके साथ समान बंधन साझा करते हैं। उन्होंने उस समय को याद किया जब लोकमान्य तिलक ने अहमदाबाद की साबरमती जेल में लगभग डेढ़ महीने बिताए थे। उन्होंने बताया कि 1916 में 40,000 से अधिक लोग उनका स्वागत करने और उनके विचार सुनने के लिए इकट्ठा हुए थे। इन लोगों में सरदार वल्लभभाई पटेल भी शामिल थे। उन्होंने आगे कहा कि तिलक के भाषण के प्रभाव के कारण सरदार पटेल ने अहमदाबाद में लोकमान्य तिलक की एक प्रतिमा स्थापित की, जब वे अहमदाबाद नगर पालिका के प्रमुख थे। प्रधानमंत्री ने कहा, “सरदार पटेल में लोकमान्य तिलक के दृढ़ संकल्प को देखा जा सकता है।” यह प्रतिमा विक्टोरिया गार्डन में स्थापित की गई है। इस स्थल के बारे में प्रधानमंत्री ने बताया कि अंग्रेजों ने इस मैदान को 1897 में रानी विक्टोरिया के हीरक जयंती समारोह को मनाने के लिए विकसित किया था। उन्होंने लोकमान्य तिलक की प्रतिमा स्थापित करने में सरदार पटेल के क्रांतिकारी कार्य पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों के विरोध के बावजूद महात्मा गांधी ने 1929 में इस प्रतिमा का अनावरण किया था। प्रतिमा के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक भव्य प्रतिमा है, जिसमें तिलक जी को आराम की मुद्रा में बैठे देखा जा सकता है। ऐसा महसूस होता है कि वे स्वतंत्र भारत के उज्ज्वल भविष्य पर विचार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “गुलामी के काल में भी सरदार पटेल ने भारत के सुपुत्र का सम्मान करने के लिए पूरे ब्रिटिश शासन को चुनौती दी थी।” प्रधानमंत्री ने आज की स्थिति पर अफसोस जताते हुए कहा कि जब सरकार एक विदेशी आक्रमणकारी के नाम के बदले एक भारतीय व्यक्तित्व का नाम देना चाहती है, तो कुछ लोग शोरगुल करते हैं।
प्रधानमंत्री ने गीता में लोकमान्य की आस्था का जिक्र किया। सुदूर मांडले में कारावास में रहते हुए भी लोकमान्य ने गीता का अध्ययन करना जारी रखा और ‘गीता रहस्य’ के रूप में एक अमूल्य उपहार दिया।
प्रधानमंत्री ने प्रत्येक व्यक्ति में आत्मविश्वास जगाने की लोकमान्य की क्षमता के बारे में बात की। तिलक ने स्वतंत्रता, इतिहास और संस्कृति की लड़ाई के प्रति लोगों में विश्वास पैदा किया। उन्हें लोगों, श्रमिकों और उद्यमियों पर भरोसा था। उन्होंने कहा, “तिलक ने भारतीयों की हीनभावना के मिथक को तोड़ा और उन्हें उनकी क्षमताओं से अवगत कराया।”
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अविश्वास के वातावरण में देश का विकास संभव नहीं है। उन्होंने पुणे के एक व्यक्ति श्री मनोज पोचट जी के ट्वीट को याद किया, जिन्होंने उल्लेख किया था कि पीएम के तौर पर उन्होंने 10 साल पहले पुणे की यात्रा की थी। प्रधानमंत्री ने तिलक जी द्वारा फर्ग्यूसन कॉलेज की स्थापना के समय को याद किया और कहा कि उस समय भारत में विश्वास की कमी के बारे में बात की गई थी। प्रधानमंत्री ने विश्वास की कमी का मुद्दा उठाने के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि देश विश्वास की कमी से अतिरिक्त विश्वास की ओर बढ़ गया है।
प्रधानमंत्री ने पिछले 9 वर्षों में हुए बड़े बदलावों में इस अतिरिक्त विश्वास का उदाहरण दिया। उन्होंने उल्लेख किया कि इस विश्वास के परिणामस्वरूप भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने देश के स्वयं पर विश्वास के बारे में बात की। उन्होंने मेड इन इंडिया कोरोना वैक्सीन जैसी सफलताओं का उल्लेख किया और कहा कि इस उपलब्धि में पुणे ने एक बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीयों की कड़ी मेहनत और निष्ठा के प्रति विश्वास के बारे में कहा कि मुद्रा योजना के तहत गिरवी-मुक्त ऋण इसका एक प्रतीक है। इसी तरह, अधिकांश सेवाएं अब मोबाइल पर उपलब्ध हैं और लोग अपने दस्तावेज़ों को स्वयं सत्यापित कर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि व्यापार अधिशेष के कारण स्वच्छता अभियान और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जन आंदोलन बन गये हैं। ये सभी देश में एक सकारात्मक वातावरण बना रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने इस बात को याद करते हुए कि लाल किले से अपने संबोधन के दौरान जब उन्होंने लोगों से गैस सब्सिडी छोड़ने का आह्वान किया था, तो इसके बाद लाखों लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी थी। उन्होंने बताया कि कई देशों का एक सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें पता चला कि भारत का सरकार के प्रति सबसे अधिक विश्वास है। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि बढ़ता जन-विश्वास भारत के लोगों की प्रगति का माध्यम बन रहा है।
संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि आजादी के 75 वर्षों के बाद देश अमृत काल को कर्तव्य काल के रूप में देख रहा है, जहां प्रत्येक नागरिक देश के सपनों और संकल्पों को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने स्तर पर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, इसीलिए पूरी दुनिया भी आज भारत में अपना भविष्य देख रही है, क्योंकि हमारे आज के प्रयास पूरी मानवता के लिए आश्वासन बन रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकमान्य तिलक के विचारों और आशीर्वाद की शक्ति से देशवासी निश्चित रूप से एक मजबूत और समृद्ध भारत के सपने को साकार करेंगे। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि हिंद स्वराज्य संघ, लोगों को लोकमान्य तिलक के आदर्शों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री रमेश बैस, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस और श्री अजीत पवार, संसद सदस्य श्री शरदचंद्र पवार, तिलक स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. दीपक तिलक, तिलक स्मारक ट्रस्ट के उपाध्यक्ष डॉ. रोहित तिलक, तिलक स्मारक ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री सुशील कुमार शिंदे व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
पृष्ठभूमि
लोकमान्य तिलक की विरासत का सम्मान करने के लिए तिलक स्मारक मंदिर ट्रस्ट द्वारा 1983 में इस पुरस्कार की स्थापना की गयी थी। यह उन लोगों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने राष्ट्र की प्रगति और विकास के लिए काम किया है तथा जिनके योगदान को उल्लेखनीय और असाधारण कहा जा सकता है। यह हर साल लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि, 1 अगस्त को प्रदान किया जाता है।
प्रधानमंत्री इस पुरस्कार के 41वें प्राप्तकर्ता बने हैं। इससे पहले डॉ. शंकर दयाल शर्मा, श्री प्रणब मुखर्जी, श्री अटल बिहारी वाजपेयी, श्रीमती इंदिरा गांधी, डॉ. मनमोहन सिंह, श्री एन.आर. नारायण मूर्ति और डॉ. ई. श्रीधरन जैसे प्रमुख व्यक्तियों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।