दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर (जिला सूचना कार्यालय) नगर, दिनांक 02 अगस्त, 2026* पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सरसौल, कानपुर नगर के प्रभारी प्राचार्य आर. के. सिंह ने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा-2027 के अंतर्गत कक्षा-6 में प्रवेश हेतु ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर 07 अगस्त, 2026 कर दी गई है। ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे निर्धारित तिथि तक अपना ऑनलाइन आवेदन पूर्ण कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न की जाएगी। प्रथम चरण में अभ्यर्थी को राज्य, जनपद, विकास खंड, विद्यालय का नाम, वास्तविक पता, अभ्यर्थी का नाम, अभिभावक का मोबाइल नंबर तथा जन्मतिथि सहित आवश्यक विवरण दर्ज करना होगा। इसके पश्चात पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त यूजर आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से द्वितीय चरण की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी।
द्वितीय चरण में अभ्यर्थी का नवीनतम पासपोर्ट आकार का फोटो, हस्ताक्षर, माता-पिता के हस्ताक्षर तथा कक्षा-5 में अध्ययनरत होने का विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा निर्गत प्रमाण-पत्र वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। सभी विवरण एवं आवश्यक अभिलेख सफलतापूर्वक अपलोड होने के बाद आवेदन पत्र का प्रिंट सुरक्षित रख लेना चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रवेश हेतु अभ्यर्थी की जन्मतिथि 01 मई, 2015 से 31 जुलाई, 2017 (दोनों तिथियां सम्मिलित) के मध्य होनी चाहिए। अभ्यर्थी www.navodaya.gov.in तथा https://cbseitms.rcil.gov.in/nvs/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा शनिवार, 28 नवम्बर, 2026 को आयोजित की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें, जिससे किसी भी प्रकार की तकनीकी असुविधा से बचा जा सके। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी एवं अभिभावक उपरोक्त वेबसाइटों का अवलोकन कर सकते हैं।
कानपुर
डी जी कॉलेज में नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानन्द गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर में “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत : संकल्प अभियान” का आयोजन को सफलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु प्रेरित करना था। इस अवसर पर “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसमें प्रो रुचिमिता पांडे ने युवाओं को नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
अभियान के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों जैसे मेडिटेशन सत्र, जागरूकता कार्यक्रम, कला प्रतियोगिता , मेडिटेशन, खेलकूद एवं नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस अभियान के शुभारंभ का सजीव प्रसारण छात्राओं ने उत्साहपूर्वक देखा तथा नशामुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं एवं उपस्थित जनसमूह को यह शपथ दिलाई गई कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करेंगी तथा अपने परिवार एवं समाज को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगी। इस अवसर पर “Say No to Drugs, Say Yes to Life” तथा “युवा शक्तिशाली बनेगी, विकसित भारत गढ़ेगी” जैसे प्रेरणादायक संदेशों का प्रसार किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन डॉ. संगीता सिरोही (कार्यक्रम अधिकारी, एन.एस.एस.) के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. वंदना निगम तथा निदेशक (स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम) प्रो. अर्चना वर्मा तथा कार्यालय अधीक्षक कृष्णेन्द्र श्रीवास्तव का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, माय भारत वॉलंटियर्स, एन.सी.सी. इंचार्ज प्रो. शुभ्रा राजपूत, प्रेंजर प्रभारी प्रो. स्वाति सक्सेना, डॉ ज्योत्सना पांडे, डॉ पूजा श्रीवास्तव, डॉ कुमुद लता, डॉ उमा अवस्थी, डॉ अंजना श्रीवास्तव, डॉ साधना सिंह, डॉ सुषमा शर्मा, डॉ वंदना द्विवेदी, डॉ पिंकी द्विवेदी, डॉ दीपाली सक्सेना, समस्त एनएसएस समिति एवं सांस्कृतिक समिति का विशेष योगदान सराहनीय रहा।
Read More »दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार ग्वालियर में भारत का पहला दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (टीएमजेड) स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी सहित अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।
ग्वालियर में भारत के पहले दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र की स्थापना देश के घरेलू दूरसंचार विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस पहल का उद्देश्य निवेश आकर्षित करके, नवाचार को बढ़ावा देकर, स्वदेशी डिजाइन और विनिर्माण को प्रोत्साहित करके और अगली पीढ़ी के दूरसंचार उत्पादों और समाधानों के विकास में तेजी लाकर दूरसंचार उपकरणों और संबद्ध प्रौद्योगिकियों के लिए विश्व स्तरीय विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र से दूरसंचार उपकरण निर्माताओं, प्रौद्योगिकी कंपनियों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और दूरसंचार मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य हितधारकों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के पर्याप्त अवसर भी उत्पन्न होंगे, क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ेगी और भारत दूरसंचार विनिर्माण और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर से ग्वालियर में टीएमजेड चरण-1 की स्थापना की दिशा में सहयोग के ढांचे को औपचारिक रूप दिया जाएगा, जिससे भारत की दूरसंचार विनिर्माण और प्रौद्योगिकी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में केंद्र-राज्य साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।
इस कार्यक्रम में भारत सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और दूरसंचार क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी और हितधारक एक साथ आएंगे।
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पीएम श्री योजना का कार्यान्वयन
पीएम श्री योजना के कार्यान्वयन की अवधि वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक है। इसके अतिरिक्त, पीएम श्री योजना की कार्यान्वयन रूपरेखा निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध है:
https://pmshri.education.gov.in/assets/pdf/part1_pmshri.pdf
पीएम श्री योजना के अंतर्गत निधियों का आवंटन एवं निर्गमन वित्त वर्ष 2023-24 से प्रारंभ हुआ। वित्त वर्ष 2023-24, वित्त वर्ष 2024-25, वित्त वर्ष 2025-26 तथा वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान पीएम श्री योजना के अंतर्गत आवंटित एवं जारी की गई निधियों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/केवीएस/एनवीएस/एनसीईआरटी-वार विवरण संलग्नक में दिया गया है।
पीएम श्री योजना के अंतर्गत राज्य/संघ राज्य क्षेत्र केंद्र के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करते हैं, जिसमें विद्यालयों को पीएम श्री विद्यालयों के रूप में निर्धारित गुणवत्ता आश्वासन प्राप्त करने हेतु सहायता प्रदान करने संबंधी प्रतिबद्धताओं का उल्लेख होता है। इसके पश्चात, चैलेंज मोड के माध्यम से पीएम श्री विद्यालयों का चयन किया जाता है, जिसमें विद्यालय आदर्श विद्यालय बनने के लिए सहायता प्राप्त करने हेतु प्रतिस्पर्धा करते हैं।
पीएम श्री विद्यालयों में, सीबीएसई अथवा राज्य परीक्षा बोर्डों से संबद्धता के अनुसार सीबीएसई अथवा संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का पाठ्यक्रम अपनाया जाता है।
पीएम श्री विद्यालय रूपरेखा के विद्यालय परिवर्तन संबंधी पैरा 1.1 में की गई परिकल्पना के अनुसार, पीएम श्री विद्यालयों में पाठ्यचर्या राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ)/राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (एससीएफ) के अनुरूप होगी, जिसे नई 5+3+3+4 पाठ्यचर्या एवं शिक्षाशास्त्रीय संरचना के अनुसार विकसित किया जाएगा। इसका प्रतिबिंब एनसीएफ-एफएस तथा एनसीएफ-एसई में दिखाई देगा। राज्यों को मूलभूत सिद्धांतों एवं संवैधानिक मूल्यों का पालन करते हुए अपनी राज्य-विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यचर्या को अनुकूलित करने की सुविधा प्रदान की गई है।
केरल राज्य ने 23 अक्टूबर 2025 को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके बाद पीएम श्री विद्यालयों के चयन के लिए पारदर्शी चैलेंज मोड प्रक्रिया अपनाई जानी थी।
पीएम श्री योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के सभी घटकों को प्रदर्शित करना है। यह योजना न केवल संज्ञानात्मक विकास पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों से युक्त समग्र एवं बहुआयामी व्यक्तित्व के निर्माण पर भी बल देती है।
यह योजना एक समतामूलक, समावेशी एवं आनंदमय शिक्षण वातावरण के निर्माण पर केंद्रित है, जो विविध सामाजिक पृष्ठभूमियों, बहुभाषी आवश्यकताओं और विभिन्न शैक्षणिक क्षमताओं वाले विद्यार्थियों की जरूरतों को पूरा करता है। इन विद्यालयों की परिकल्पना विद्यार्थियों को उनकी सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए की गई है, ताकि प्रत्येक बच्चा सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण में स्वयं को स्वागत योग्य, देखभाल प्राप्त करने वाला तथा समर्थ महसूस कर सके।
इसलिए, जो राज्य एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं या योजना से बाहर हो जाते हैं, वे पीएम श्री योजना के इन लाभों से वंचित रह सकते हैं।
यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
पीके/केसी/एके
अनुलग्नक
राज्यसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 1155 के भाग (ख) के उत्तर में संदर्भित अनुलग्नक, जिसका उत्तर 29.07.2026 को श्री अब्दुल वहाब, माननीय सांसद द्वारा “पीएम श्री योजना का कार्यान्वयन” के संबंध में पूछे गए प्रश्न के संदर्भ में दिया गया।
पीएम श्री योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2023-24, वित्त वर्ष 2024-25, वित्त वर्ष 2025-26 और वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान जारी की गई निधियों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/केवीएस/एनवीएस/एनसीईआरटी-वार विवरण निम्नानुसार है:
(₹ करोड़ में)


NA – संबंधित वर्ष में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों/एनसीईआरटी द्वारा पीएम श्री योजना को अपनाया (ऑनबोर्ड) नहीं किया गया था।
वित्त वर्ष 2025-26 से पीएम श्री योजना को एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) पर ऑनबोर्ड किया गया है। इसलिए, इन संघ राज्य क्षेत्रों/केवीएस/एनवीएस/एनसीईआरटी को छोड़कर यह आंकड़ा जारी की गई मूल स्वीकृति (Mother Sanction) को दर्शाता है।
उच्च शिक्षा में पद और रिक्तियां
रिक्तियों का सृजन और उनका भरा जाना एक सतत प्रक्रिया है। पदोन्नति, सेवानिवृत्ति, इस्तीफा, मृत्यु, नए संस्थानों, योजनाओं या परियोजनाओं के आरंभ होने तथा मौजूदा संस्थानों में छात्रों की संख्या में वृद्धि और क्षमता विस्तार के कारण अतिरिक्त आवश्यकताओं के चलते रिक्तियां सृजित होती हैं।
अगस्त 2021 में, शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सभी सीएचईआई से अनुरोध किया गया था कि वे मिशन मोड में अपने संस्थानों में लंबित रिक्तियों को भरने के लिए एक विशेष अभियान चलाएं। सीएचईआई ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सहित रिक्तियों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाए। सितंबर 2022 में, शिक्षा मंत्रालय ने सभी सीएचईआई से मिशन मोड में रिक्तियों को भरने का आग्रह किया था। अक्टूबर 2025 में, सभी सीएचईआई से पुनः मिशन मोड में सभी लंबित रिक्तियों को भरने का अनुरोध किया गया। सितंबर 2022 से सभी सीएचईआई ने रिक्तियों को भरने के लिए मिशन मोड भर्ती अभियान चलाया है। 23 मई 2026 तक (अर्थात अंतिम रोजगार मेले की तिथि तक), सभी सीएचईआई द्वारा कुल 32,114 पद (3,851 एससी, 1,643 एसटी, 6,785 ओबीसी, 1,191 ईडब्ल्यूएस) भरे गए हैं, जिनमें मिशन मोड के तहत 18,757 संकाय पद (2,315 एससी, 910 एसटी, 3,986 ओबीसी, 568 ईडब्ल्यूएस) शामिल हैं।
सीएचईआई में पीएचडी प्रवेश की संख्या गतिशील है और प्रवेश चक्रों के अनुसार बदलती रहती है, जो संकाय पर्यवेक्षकों की उपलब्धता, विभागीय आवश्यकताओं और वित्तीय सहायता पर निर्भर करती है। इसके अलावा, पीएचडी पदों की उपलब्धता संस्थान की संकाय संख्या के साथ बदलती रहती है। नए संकाय सदस्य अतिरिक्त शोध पर्यवेक्षण क्षमता उत्पन्न करते हैं, जबकि उन संकाय सदस्यों के शोधार्थी जो इस्तीफा देते हैं, सेवानिवृत्त होते हैं या स्थानांतरित किए जाते हैं, उन्हें संस्थान के शैक्षणिक नियमों के अनुसार अन्य योग्य पर्यवेक्षकों को पुनः आवंटित किया जाता है। पीएचडी में नामांकन की संख्या 1,17,301 (एआईएसएचई रिपोर्ट 2014-15 के अनुसार) से बढ़कर 3,43,559 (एआईएसएचई रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार) हो गई है, जो 192.89% की वृद्धि दर्शाती है।
यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार द्वारा आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई।
राजकीय पॉलिटेक्निक को मिलेगी नई पहचान, बन रहा टाटा टेक्नोलॉजीज का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
जिला सूचना कार्यालय कानपुर नगर। गुरुदेव चौराहा स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक में टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से स्थापित किए जा रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। गुरुवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने निर्माणाधीन परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर कार्य की प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा की। उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। राजकीय पॉलिटेक्निक के छात्र-छात्राओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधा शीघ्र उपलब्ध कराई जाए।
निरीक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, निर्माण खंड कानपुर-01 के अधिशासी अभियंता फराज़ असलम ने बताया कि 706.75 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन इस परियोजना का कार्य 21 मई 2026 से प्रारंभ हुआ है। परियोजना को 20 मई 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है। प्रथम किश्त के रूप में 353.37 लाख रुपये अवमुक्त किए जा चुके हैं, जिनमें से अब तक 86.38 लाख रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति लगभग पांच प्रतिशत है तथा फाउंडेशन एवं पेडेस्टल कास्टिंग का कार्य प्रगति पर है।
प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जी प्लस टू प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें आधुनिक प्रयोगशालाएं, तकनीकी वर्कशॉप, डिजिटल प्रशिक्षण कक्ष, वीसैट स्टूडियो, कौशल विकास के लिए समर्पित लैब स्पेस तथा अन्य अत्याधुनिक आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक एवं रोजगारपरक तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध होगा। इससे तकनीकी दक्षता और रोजगार क्षमता को मजबूती मिलेगी।
*प्रदेश के अग्रणी राजकीय पॉलिटेक्निक को मिलेगा नया आयाम*
प्रदेश के अग्रणी राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में शामिल यह संस्थान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के बाद तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में और सशक्त होगा। आधुनिक प्रयोगशालाओं, उद्योग आधारित प्रशिक्षण सुविधाओं तथा व्यावहारिक शिक्षण व्यवस्था से विद्यार्थियों को बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास का अवसर मिलेगा। संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता और रोजगारपरक शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
*तकनीकी शिक्षा को उद्योगों से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल*
*जिलाधिकारी* जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि राजकीय पॉलिटेक्निक पहले से ही प्रदेश के अग्रणी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल है। टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से स्थापित हो रहा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इसकी गुणवत्ता और उपयोगिता को नई ऊंचाई देगा। विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी वातावरण में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण मिलेगा। उनका कौशल विकास होगा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों एवं समयबद्धता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए। नियमित मॉनिटरिंग के साथ परियोजना निर्धारित अवधि में पूरी की जाए। विद्यार्थियों को इसका लाभ जल्द उपलब्ध कराया जाए।
Read More »25 किलो रंगीन फिंगर चिप्स कराए गए नष्ट, दूध, पनीर समेत आठ खाद्य पदार्थों के नमूने
जिला सूचना कार्यालय कानपुर जिलाधिकारी के आदेश एवं सहायक आयुक्त (खाद्य) द्वितीय के निर्देश पर गुरुवार को जनपदभर में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने विशेष अभियान चलाकर विभिन्न प्रतिष्ठानों से खाद्य पदार्थों के नमूने संग्रहित किए। अभियान के दौरान 25 किलोग्राम रंगीन फिंगर चिप्स को मौके पर ही नष्ट कराया गया तथा खाद्य कारोबारियों को वर्षा ऋतु के दृष्टिगत स्वच्छता एवं खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन के निर्देश दिए गए।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने ठाकुर दूध डेयरी, बर्रा से दूध एवं पनीर, गोवर्धन डेयरी, घाटमपुर से मिश्रित दूध, पांडेय स्वीट एंड नमकीन, घाटमपुर से पनीर, जवाहर नगर से कुल्फी, राठौर दूध डेयरी, पनकी से पनीर, गोपाल दूध भंडार, रामनारायण मार्केट से भैंस का दूध, गुलशन डेयरी, फजलगंज से दही तथा स्पाइसी फूड, किदवई नगर से सांभर एवं चिली पनीर के नमूने संग्रहित किए।
अभियान के दौरान स्पाइसी फूड, किदवई नगर में विक्रय के लिए भंडारित 25 किलोग्राम रंगीन फिंगर चिप्स को मौके पर ही नष्ट कराया गया।
सहायक आयुक्त (खाद्य) द्वितीय संजय प्रताप सिंह ने बताया कि नमूना संग्रहण के साथ-साथ खाद्य कारोबारियों को बारिश के मौसम में खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई बनाए रखने तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
Read More »नशा मुक्त भारत पखवाड़ा कार्यक्रम आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन पी जी महाविद्यालय में नशा मुक्त भारत अभियान के पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत प्राचार्या डॉ सुमन के निर्देशन में डाक्यूमेंट्री प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह अभियान कॉलेज की एनएसएस इकाई कार्यक्रम अधिकारी डॉ श्वेता रानी के द्वारा आयोजित किया गया। डॉ पूजा गुप्ता ने कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग किया।
इस अवसर पर 80 से अधिक NSS, NCC, Rangers की छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
Read More »एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में ‘महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं आत्म-सशक्तिकरण’ कार्यशाला में ‘एपिजेनेटिक्स’ और आध्यात्मिक जीवन शैली में गहन मंथन
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में ‘महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं आत्म-सशक्तिकरण’ कार्यशाला के दूसरे दिन ‘एपिजेनेटिक्स’ और आध्यात्मिक जीवन शैली पर हुआ गहन मंथन
एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर के विज्ञान संकाय द्वारा शांतिकुंज, हरिद्वार एवं “आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी” (कानपुर, उ.प्र.) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला (20 से 28 जुलाई 2026) “Workshop on Women Health, Hygiene & Self Empowerment” के दूसरे दिन आज ‘एपिजेनेटिक्स’ विषय पर विशेष व्याख्यान एवं सत्र का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. संगीता सारस्वत ने अपने संबोधन में विज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत समन्वय को रेखांकित करते हुए एपिजेनेटिक्स और जीवनशैली के प्रभावों पर प्रकाश डाला।
सत्र के मुख्य बिंदु:
गायत्री मंत्र, योग एवं ध्यान: डॉ. सारस्वत ने बताया कि किस प्रकार गायत्री मंत्र का जाप, योग, ध्यान और धारणा के सूत्र हमारे मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाते हैं और जीन अभिव्यक्ति में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।
मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण: शांतिकुंज के विचार-दर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आत्म-साधना और अध्यात्म के माध्यम से मनुष्य में देवत्व का जागरण कर समाज में सुख-शांति स्थापित की जा सकती है।
स्वामी विवेकानंद का वक्तव्य: स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध कथन “Every soul is potentially divine” (प्रत्येक आत्मा में अंतर्निहित देवत्व है) को संदर्भित करते हुए छात्राओं को अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचानने और सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया गया।
जड़, चेतना एवं अध्यात्म संस्कार: मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और सकारात्मक सोच के महत्व प्रकाश डाला
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो सुमन ने छात्राओं से आह्वान किया कि वे उपर्युक्त सीखी हुई बातो को अपने घर परिवार तक पहुचाकर स्वस्थ समाज के निर्माण मे योगदान दे।
कार्यशाला के द्वितीय सत्र का कुशल संचालन प्रो गार्गी यादव ने किया व कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्य डॉ प्रीति सिंह और डा शैल वाजपेई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं कार्यशाला में कॉलेज की वरिष्ठ प्रवक्ताएं प्रो निशि प्रकाश प्रो रेखा चौबे व अन्य सभी प्रवक्ताए उपस्थित थी। स्नातक व स्नातकोत्तर वर्ग की छात्राएं कार्यशाला मे प्रतिभाग कर रही है। महाविद्यालय के द्वितीय , तृतीय चतुर्थ कर्मचारीगण ने सकृय भूमिका निभाई ।
फातिमा कान्वेंट स्कूल में “अभिभावक ओरिएंटेशन प्रोग्राम ” आयोजित
दैनिक भारतीय स्वरूप संवादसूत्र सुनील साहू कानपुर । फातिमा कान्वेंट स्कूल अशोक नगर में आज “अभिभावक ओरिएंटेशन प्रोग्राम ” का आयोजन किया गया । प्रिंसपल सिस्टर सोनी ए सी के विशेष प्रयासों से विद्यालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रयागराज से आए फादर सेबेस्टियन फ्रांसिस ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की । छात्राओं और अभिभावकों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य अतिथि फादर सेबेस्टियन फ्रांसिस और प्रिंसपल सिस्टर सोनी ए सी ने दीप जलाकर शुभारंभ किया । फादर सेबेस्टियन फ्रांसिस ने घर और स्कूल के बीच की साझेदारी को कैसे और मजबूत किया जाए इस पर अपने विचार रखे । उन्होंने ने कहा कि अक्सर अभिभावक बच्चों से ज्यादा मार्क्स और उनके अधिक परसेंटेज के लिए दबाव बनाते है । जबकि नंबरों से ज्यादा जरूरी है बच्चों का संस्कारी होना । फादर के मुताबिक वर्तमान समय में पूरे देश में बड़ी संख्या में ऐसे अभिभावक भी हैं , जिनका अपने बच्चों से तालमेल उतना अच्छा नहीं है , जिस कारण अक्सर बच्चों और अभिभावकों में दूरियां बढ़ जाती हैं । इसलिए जरूरत इस बात की है कि पहले अभिभावक बच्चों से तालमेल बढ़ाएं , उनसे बातचीत करे , बच्चों की भावनाओं को समझे और उन्हें विश्वास दिलाए कि वह उनके साथ है । अभिभावक और छात्रों के बीच तालमेल अच्छा होने से बच्चों में सकारात्मक विचारो का प्रभाव बढ़ेगा । उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों को अच्छे संस्कार दें , जिससे घर और स्कूल के बीच साझेदारी तो मजबूत होगी साथ ही स्कूल की अपेक्षाए पूर्ण होने में मदद मिलेगी और आपके बच्चे के सर्वांगीण विकास भी होगा ।
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