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कानपुर

क्राइस्ट चर्च कॉलेज में ‘रिसर्च प्रोजेक्ट एवं मेथडोलॉजी’ पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के राजनीति विज्ञान एवं समाजशास्त्र विभाग द्वारा “रिसर्च प्रोजेक्ट एवं मेथडोलॉजी” विषय पर 11–12 मार्च 2026 को सरवेपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑडिटोरियम में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य समाज शास्त्र एवं वाणिज्य विभाग के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों में शोध कौशल को विकसित करना था।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य एवं संरक्षक प्रो. विनय जे. सेबेस्टियन ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने उच्च शिक्षा में शोध के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों को शोध परियोजना तैयार करते समय वैज्ञानिक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे अकादमिक आयोजनों से अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के प्रथम दिन के पहले शैक्षणिक सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. ए. के. शर्मा (पूर्व विभागाध्यक्ष, एचएसएस विभाग, आईआईटी कानपुर) ने “सामाजिक विज्ञान में शोध कैसे करें” विषय पर व्याख्यान दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने शोध समस्या की पहचान, शोध प्रश्नों का निर्माण, परिकल्पना निर्माण तथा उपयुक्त शोध पद्धति के चयन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शोध कार्य में नैतिकता और शैक्षणिक ईमानदारी के महत्व को भी रेखांकित किया।

इसके बाद विशिष्ट अतिथि प्रो. अशुतोष सक्सेना (पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, क्राइस्ट चर्च कॉलेज) ने “रिसर्च प्रोजेक्ट निर्माण की कला और विज्ञान: सामाजिक विज्ञान के यूजी एवं पीजी विद्यार्थियों के लिए चरणबद्ध मार्गदर्शिका” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध विषय चयन, डेटा संग्रहण, अध्यायों की संरचना तथा शोध निष्कर्षों की प्रस्तुति के बारे में व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। साथ ही उन्होंने शोध कार्य की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए योजनाबद्ध अध्ययन और आलोचनात्मक विश्लेषण की आवश्यकता पर बल दिया।

दोनों सत्र अत्यंत संवादात्मक और ज्ञानवर्धक रहे। विद्यार्थियों ने शोध पद्धति, विषय चयन, डेटा संग्रहण तथा परियोजना लेखन से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।

कार्यक्रम के प्रो. विभा दीक्षित ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया और संयोजक डॉ. संजय शुक्ला धन्यवाद् ज्ञापन प्रस्तुत किया । कार्यक्रम के सहसंयोजक डॉ. प्रवीण के. सिंह, डॉ. मनीषी त्रिवेदी, डॉ. अर्चना वर्मा एवं डॉ. अर्चना पाण्डेय ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में अपना योगदान दिया.

कार्यशाला में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया तथा इसे विद्यार्थियों के लिए शोध की दिशा में एक महत्वपूर्ण और उपयोगी पहल बताया गया। कार्यशाला का दूसरा दिन 12 मार्च को शोध सिनॉप्सिस तथा प्रभावी शोध परियोजना लेखन पर केंद्रित सत्रों के साथ आयोजित किया जाएगा।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 9 मार्च क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के जेंडर सेंसिटाइजेशन एंड वूमेन डेवलपमेंट सेल (GSWDC) द्वारा सरवेपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑडिटोरियम में बड़े उत्साह के साथ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। यह कार्यक्रम “Celebrating Strength, Equality & Empowerment” विषय के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य समकालीन समाज में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के महत्व को रेखांकित करना था। कार्यक्रम की शुरुआत छात्र एंकर अक्षिता वर्मा और आदर्श के स्वागत एवं परिचयात्मक संबोधन से हुई, जिन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। कविता पाठ के सत्र में गौरी अग्निहोत्री, पूजा डे और श्रुति ने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में प्रभावशाली कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिनमें महिलाओं की दृढ़ता, सशक्तिकरण और शक्ति के भाव को अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत छात्र एंकर अक्षिता वर्मा और आदर्श के स्वागत एवं परिचयात्मक संबोधन से हुई, जिन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। कविता पाठ के सत्र में गौरी अग्निहोत्री, पूजा डे और श्रुति ने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में प्रभावशाली कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिनमें महिलाओं की दृढ़ता, सशक्तिकरण और शक्ति के भाव को अभिव्यक्त किया गया।कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने महिला प्रतिनिधित्व पर केंद्रित चर्चित फिल्मों की समीक्षाएँ भी प्रस्तुत कीं। ये समीक्षाएँ पूजा डे, श्रेयांशी शर्मा, अंशिका मिश्रा और आदित्य कुमार द्वारा प्रस्तुत की गईं, जिन्होंने मीडिया में महिलाओं की छवि और प्रस्तुति पर विचारोत्तेजक चर्चा को प्रेरित किया।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण “आईना-ए-समाज” शीर्षक से प्रस्तुत एक नाट्य मंचन रहा, जिसमें ध्रुव, श्रुति, विभांश, रिद्धिमा यादव, श्रेयांशी, शिवा, उपासना और क्रति ने अभिनय किया तथा इसका संचालन अक्षिता द्वारा किया गया। यह प्रस्तुति दो लिंगों के बीच भूमिका परिवर्तन की हास्यपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से सामाजिक संरचनाओं पर व्यंग्य करती हुई दिखाई गई।सांस्कृतिक कार्यक्रम में एक भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति भी शामिल रही, जिसने महिलाओं की गरिमा, साहस और शक्ति का सुंदर चित्रण किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य अतिथि प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन, संरक्षक एवं प्राचार्य, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर ने की। इस कार्यक्रम का सफल आयोजन डॉ. विभा दीक्षित, समन्वयक, जेंडर सेंसिटाइजेशन एंड वूमेन डेवलपमेंट सेल के मार्गदर्शन में किया गया। इस आयोजन में सह-समन्वयकों डॉ. फिरदौस, डॉ. आशीष, डॉ. रुक्मणी और डॉ. मनीषी त्रिवेदी का विशेष योगदान रहा।

छात्र समन्वयक आर्यन, आदर्श और पूजा ने कार्यक्रम के आयोजन और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन डॉ. मनीषी त्रिवेदी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

औपचारिक कार्यक्रम के पश्चात कॉलेज के संकाय सदस्यों को प्रो. सत्य प्रकाश और प्रो. मीत कमल द्वारा एक आनंदपूर्ण अवकाश समारोह में आमंत्रित किया गया, जिसने सभी शिक्षकों को आपसी सौहार्द और उत्सव की भावना के साथ एकत्र होने का अवसर प्रदान किया।

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एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज के विज्ञान संकाय के रसायन विज्ञान,वनस्पति विज्ञान एवं जंतु विज्ञान विभाग ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया ।महाविद्यालय की मुख्य प्रॉक्टर कैप्टन ममता अग्रवाल, प्रो गार्गी यादव,डॉ प्रीति सिंह तथा डॉ शैल बाजपेयी ने माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । इस अवसर पर इस वर्ष की थीम “विज्ञान में महिलाओं का योगदान “ तथा अपने पाठ्यक्रम से संबंधित विषयों पर पोस्टर एवं मॉडल बनाकर छात्राओं ने प्रदर्शनी में प्रतिभाग किया । छात्राओं ने ५० पोस्टर और मॉडल प्रदर्शित किये और उनके विषय में बताया ।इस प्रदर्शनी का मूल्यांकन कैप्ट ममता अग्रवाल, प्रो प्रीति पांडे और प्रो मीनाक्षी व्यास ने किया ।

परिणाम इस प्रकार रहा –बी एस सी द्वितीय सेमेस्टर प्रथम कीर्ति गुप्ता, द्वितीय- सृष्टि पाल तथा अंजलि सिंह, तृतीय-आयना ,सांत्वना-इशिता 

बी एस सी चतुर्थ सेमेस्टर –प्रथम-काजोल गौतम, द्वितीय-ज़िया, तृतीय-सदा 

बी एस सी षष्ठ सेमेस्टर –प्रथम समरीन अनवर, द्वितीय मुस्कान, तृतीय एकता तथा लक्ष्मी सभी विजेता छात्राओं को मेडल प्रदान किए गए और सभी प्रतिभागी छात्राओं को उत्साह वर्धन करते हुए अल्प पुरस्कार दिए गए। 

कार्यक्रम में डॉ प्रीता अवस्थी ,डॉ प्रीति यादव, डॉ अनामिका डॉ समीक्षा डॉ श्वेता आदि उपस्थित रहे  अवधेश तथा रेखा ने विशेष सहयोग प्रदान किया।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में युवा संसद आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा सरवेपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑडिटोरियम में युवा संसद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक संसदीय कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्राचार्य एवं संरक्षक प्रो. विनय जॉन सेबास्टियन तथा विशिष्ट निर्णायकगण — प्रो. आशुतोष सक्सेना (पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान), प्रो. साधना सिंह (पूर्व प्राचार्य एवं अर्थशास्त्र विभाग, डी.जी. कॉलेज) एवं प्रो. संजय सक्सेना (प्रभारी, इतिहास विभाग) — के आगमन से हुआ। राजनीति शास्त्र विभाग के सदस्यों एवं छात्रों ने ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा पर्यावरण संरक्षण के संदेश स्वरूप उन्हें पौधा भेंट किया गया।
दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। स्वागत भाषण में प्रो. विभा दीक्षित ने युवा संसद के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि प्रो. सेबास्टियन ने विद्यार्थियों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के संप्रेषण कौशल एवं नेतृत्व क्षमता के विकास में सहायक सिद्ध होते हैं। इस अवसर पर निर्णायकगण को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
उद्घाटन सत्र के पश्चात छात्र संयोजकों पूर्वी, कृतिका एवं आदर्श ने संसदीय कार्यवाही का संचालन संभाला। विद्यार्थियों ने बारह मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय संसद की कार्यप्रणाली का प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया। प्रश्नकाल एवं वाद-विवाद के दौरान पर्यावरण संरक्षण, कर नीति, नागरिक शिष्टाचार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते तथा सुशासन जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सारगर्भित चर्चा हुई।
विस्तृत विचार-विमर्श के पश्चात एक विधेयक प्रस्तुत किया गया, जिस पर धारा-वार चर्चा के बाद बहुमत से पारित किया गया। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन विषय-वस्तु, अभिव्यक्ति, वक्तृत्व कौशल, उच्चारण एवं समग्र प्रस्तुति के आधार पर किया तथा विद्यार्थियों के आत्मविश्वास एवं संसदीय प्रक्रिया के प्रभावी प्रदर्शन की सराहना की।
कार्यक्रम का समापन डॉ. मनीषी त्रिवेदी द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम में अन्य विभागों के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों में डॉ. अर्चना पांडेय, डॉ. प्रवीण सिंह, डॉ. अंकिता पांडेय, डॉ. रुक्मणी दुबे, डॉ. अर्चना वर्मा सहित अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। यह आयोजन पूर्णतः सफल एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ।

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बाल विवाह: भारतीय समाज की स्थानिक-सामाजिक चुनौती

भारत में बाल विवाह एक ऐसी सामाजिक और भौगोलिक चुनौती है, जो आधुनिक विकास और शिक्षा विस्तार के बावजूद आज भी अनेक समुदायों में गहराई तक जड़ें जमाए हुए है। यह प्रथा विशेष रूप से लड़कियों के जीवन को प्रभावित करती है—उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, अवसर, क्षमता और आत्मनिर्भर भविष्य, सभी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019–21) के अनुसार 20–24 वर्ष आयु-वर्ग की 23.3% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले ही हो चुका था। यह तथ्य इस बात का संकेत है कि कानूनी निषेध और नीति-हस्तक्षेपों के बावजूद सामाजिक-जड़ता, परंपरा और असमान विकास के कारण बाल विवाह अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। इसके स्थानिक पैटर्न भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं—पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्य, जैसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और छत्तीसगढ़, अभी भी बाल विवाह की उच्चतम दर वाले क्षेत्रों में आते हैं। इन राज्यों में शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना का कमजोर होना, ग्रामीण निर्धनता का व्यापक होना, सामाजिक-पितृसत्तात्मक मान्यताओं का प्रबल होना और महिलाओं की निम्न साक्षरता दर जैसे कारक इस कुप्रथा को बनाए रखते हैं। कम आयु में विवाह लड़कियों को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर अनेक जोखिमों के सामने ला देता है—कम उम्र में गर्भधारण से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर बढ़ती है, कुपोषण और एनीमिया की समस्याएँ गंभीर रूप ले लेती हैं और प्रजनन स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर पड़ता है। शिक्षा रुक जाने से लड़कियों के कौशल-विकास, रोजगार और आजीविका के अवसर भी सीमित हो जाते हैं, जिससे उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रगति बाधित होती है। भारतीय न्याय संहिता (2023) ने 18 वर्ष से कम आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध को बलात्कार की श्रेणी में रखा है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने भी विभिन्न याचिकाओं में राज्यों को बाल विवाह पर कड़ा नियंत्रण लागू करने के निर्देश दिए हैं। भारत सरकार द्वारा 2025 तक बाल विवाह की दर को 23.3% से घटाकर 10% तक लाने और 2030 तक देश को बाल विवाह-मुक्त बनाने का लक्ष्य भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विवाह पंजीकरण को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देना, समुदायों और धार्मिक संस्थानों को जागरूकता अभियानों में शामिल करना, महिलाओं को नेतृत्वकारी भूमिकाओं में सक्षम बनाना, तथा बाल संरक्षण एजेंसियों की क्षमता को मजबूत करना जैसे बहुआयामी उपाय लागू किए जा रहे हैं। समग्रतः, बाल विवाह केवल एक कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी एक गहरी सामाजिक-संरचनात्मक समस्या है, जिसका समाधान तभी संभव है जब सरकार, समाज और परिवार—तीनों स्तरों पर सतत और सामूहिक प्रयास किए जाएँ।~डॉ रश्मि गोयल 

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मधुमक्खी के हमले से शहीद अंपायर को खेल प्रेमियों ने दी श्रद्धांजलि

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर । क्रिकेट मैच के दौरान मधुमक्खियों के हमले से शहीद हुए अंपायर मानिक गुप्ता को आज याद किया गया । परेड स्थित भरत स्ट्राइकर क्लब कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ खिलाड़ियों एवं अंपायर ने पुष्पांजलि कर स्वर्गीय मानिक गुप्ता को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान मौजूद खेल प्रेमियों ने 2 मिनट का मौन रखकर मृतक अंपायर की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ अंपायर एवं क्रिकेट कोच जहीर अहमद ने कहा कि मानिक गुप्ता क्रिकेट के लिए एक समर्पित व्यक्ति थे,जिन्होंने संपूर्ण जीवन क्रिकेट के लिए ही दे दिया।ये एक हृदय विदारक घटना है,जिसने उनके परिवार को और क्रिकेट जगत को गहरी क्षति की है। भरत क्लब के कप्तान अरुण पाण्डेय(पूर्व अंपायर), ने कहा कि क्रिकेट मैदान में उनकी मृत्यु क्रिकेट के प्रति शहादत है। उन्होंने अपना पूरा जीवन क्रिकेट को समर्पित कर दिया था ।वरिष्ठ खिलाड़ी अतुल सक्सेना ने कहा स्वर्गीय मानिक गुप्ता का परिवार क्रिकेट पर ही निर्भर था, इसलिए उनके पूरे परिवार के समक्ष आर्थिक समस्या होगी,अतः उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को उनके परिवार को आर्थिक मदद करनी चाहिए। इस दौरान भारतेन्दु पुरी,जितेन्द्र मिश्रा और प्रदीप पांडे ने भी अपने विचार रखे। श्रद्धांजलि सभा का संचालन वरिष्ठ खिलाड़ी संजय भारती ने किया। सभा में अंपायर पुनीत झा,आदित्य पांडे,सुनील साहू, सतीश पांडे , प्रशान्त पुरी,दुर्गा सिंह,अतुल साहू, बाकर अली,रमेश शर्मा,पृथ्वीराज, कृपेश त्रिपाठी,दीपक पांडेय आदि ने उनकी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतर महाविद्यालय ताइक्वांडो प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज कानपुर ने अंतर महाविधालयी ताइक्वांडो प्रतियोगिता का भव्य एवं सफल आयोजन विश्व विद्यालय के बहु उद्देशयीय सभागार में आयोजित किया गया। यह प्रतियोगिता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक एवं प्राचार्या प्रो सुमन के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में सम्पन्न हुई।

मुख्य अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता पूमसे खिलाड़ी राम गोपाल एवं बलराम यादव उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों को तकनीकी दक्षता, आत्मसंयम और निरंतर अभ्यास के महत्व पर प्रेरणादायी विचार साझा किए।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के खेल सचिव डॉ. निमिषा सिंह कुशवाहा, सह-प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर पांडे, की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों की टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और क्योरुगी एवं पूमसे दोनों वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता परिणाम इस प्रकार रहे — पूमसे (व्यक्तिगत) वर्ग में श्वेता तिवारी (CSJMU) ने प्रथम, ऋषिका (DAV) ने द्वितीय, दुर्गा त्रिवेदी (BND) ने तृतीय तथा शालिनी गुप्ता (DGPG) ने चतुर्थ स्थान प्राप्त किया। टीम पूमसे में CSJMU की श्रृष्टि वर्मा, श्वेता तिवारी एवं सानिया गौतम की टीम ने प्रथम स्थान अर्जित किया, जबकि दुर्गा त्रिवेदी (BND), दिव्या मौर्य (DAV) एवं रिया सुदर्शन (BND) की टीम द्वितीय रही। क्योरुगी के अंडर 46 किग्रा वर्ग में प्रभा सिंह (KSDDD PG) प्रथम एवं पायल (PD महिला) द्वितीय रहीं; अंडर 49 किग्रा वर्ग में सानिया गौतम (CSJMU) प्रथम एवं अर्चिता बिरहा (PPN) द्वितीय रहीं; तथा अंडर 53 किग्रा वर्ग में शिमरन कनौजिया ( बाबू सिंह) प्रथम एवं ऋषिका (DAV) द्वितीय स्थान पर रहीं। समग्र प्रदर्शन के आधार पर CSJMU को ओवरऑल चैंपियन तथा बाबू सिंह महाविद्यालय को रनर-अप घोषित किया गया।

प्रतियोगिता अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में सम्पन्न हुई। विश्वविद्यालय परिवार ने सभी विजेताओं एवं प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।

सम्पूर्ण कार्यक्रम की आयोजन सचिव प्रो प्रीती पाण्डेय ने सभी ‘ अतिथियो, खिलाडियो, मिर्णायक मण्डल का आभार व्यक्त किया ।

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छात्राओं को शैक्षिक एवं व्यवसायिक निर्देशन के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज, कानपुर में प्राचार्या प्रो. सुमन के पर्यवेक्षण में शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा छात्राओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य छात्राओं का शैक्षिक एवं व्यवसायिक निर्देशन करना था। कार्यक्रम में सी. एस. जे. एम. यूनिवर्सिटी के बी. एड. विभाग की प्रवक्ता डॉ. स्नेह पाण्डेय एवं डॉ. प्रिया तिवारी ने छात्राओं को विश्वविद्यालय में चलाए जा रहे बी. एड. एवं अन्य कोर्सेज की जानकारी प्रदान की एवं छात्राओं की जिज्ञासा का निवारण किया।
कार्यक्रम का संयोजन शिक्षाशास्त्र विभाग प्रभारी प्रो. चित्रा सिंह तोमर के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षाशास्त्र विभाग की असि. प्रो. ऋचा सिंह, डॉ. अनामिका राजपूत, डॉ. रेनू शुक्ला द्वारा किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की शिक्षिकाएं कर्मचारी एवं छात्राएं उपस्थित रहे।

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एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में एमएसएमई–टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर द्वारा उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित ल

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर में एमएसएमई–टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर द्वारा उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम(Entrepreneurship Awareness Program) का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुमन ने अपने संबोधन में कहा कि आज के युवाओं के लिए उद्यमिता आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की आयोजन सचिव प्रो. प्रीति पांडेय ने अपने वक्तव्य में कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा एमएसएमई द्वारा संचालित योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं के रूप में हृदयनारायण पांडेय, तनमय तिवारी, सपना रॉय एवं आदित्य निगम उपस्थित रहे।
सह-आयोजक मंडल में डॉ. शैल बाजपेयी, डॉ. रोली मिश्रा एवं डॉ. कोमल सरोज का विशेष योगदान रहा। मुख्य वक्ताओं ने उद्यमिता के महत्व, स्टार्टअप की संभावनाओं, व्यवसाय स्थापना की प्रक्रिया तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और अपने प्रश्नों के माध्यम से जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रो.अलका टंडन प्रोफेसर रेखा चौबे, प्रो.मीनाक्षी व्यास प्रो.निशा वर्मा। प्रो. गार्गी यादव,पूजा गुप्ता डॉ रेशमा, डॉ प्रीत अवस्थी डॉक्टर शुभा बाजपेई आदि उपस्थित रहे।

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एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन, पोषण एवं खाद्य सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा लल्लनपूर्वा बस्ती में संचालित सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन समारोह दिनांक 17 फ़रवरी 2026 को महाविद्यालय प्राचार्या प्रोफेसर वन्दना निगम के के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। समापन दिवस का मुख्य विषय “पोषण एवं खाद्य सुरक्षा अभियान” रहा, जिसमें स्वयंसेविकाओं ने बस्ती की महिलाओं एवं बच्चों को संतुलित आहार, स्वच्छ भोजन, एनीमिया से बचाव तथा कुपोषण के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी।कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक और संवाद सत्र आयोजित किए गए। स्वयंसेविकाओं ने बताया कि हरी सब्ज़ियाँ, दालें, दूध, फल और स्वच्छ पानी का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। साथ ही खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, साफ-सफाई बनाए रखने और मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचने के उपाय भी बताए गए।
कार्यक्रम में महाविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना समिति की वरिष्ठ सदस्या डॉ अंजना श्रीवास्तव ने कहा कि सही पोषण से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है और युवाओं की भागीदारी से जागरूकता अभियान और प्रभावी बनता है। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही ने बताया कि शिविर के दौरान की गई गतिविधियों स्वच्छता, सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, ए आई/ डिजिटल लिटरेसी, साइबर सिक्योरिटी, नशामुक्त युवा – नशा मुक्त भारत अभियान और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए।समापन अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वयंसेविकाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अंत में सभी ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में पोषण संबंधी जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय की शिक्षिकाओं डॉ . साधना सिंह, डॉ . दीप्ति शुक्ला, डॉ . ज्योत्सना पाण्डेय, बसंत कुमार समस्त स्वयंसेविकाओं, क्षेत्रीय नागरिकों तथा मीडिया बंधुओं का विशेष योगदान रहा।कार्यक्रम अधिकारी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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