
इस अवसर पर सोनोवाल ने अपने संबोधन में कहा है कि रूस तथा भारत के बीच संबंधों की जड़ें गहरी व ऐतिहासिक हैं और यह आपसी सम्मान एवं साझा हितों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि हम सशक्त संबंध बनाए रखने और विभिन्न क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वचनबद्ध हैं। श्री सोनोवाल ने बताया कि रूस की सरकार के सहयोग से हमारी टीम ने मई 2023 में व्लादिवोस्तोक, वोस्तोचन, नखोदका और कोजमिनो बंदरगाहों का दौरा किया था, जिससे हमें इस मुद्दे पर आगे बढ़ने के उद्देश्य से अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में मदद मिली है। उन्होंने बताया कि इन पत्तनों की यात्राओं के दौरान प्राप्त हुए सहयोग ने पूर्वी समुद्री गलियारे (ईएमसी) के पूर्ण पैमाने पर संचालन के लिए आवश्यकताओं की हमारी समझ में विशेष योगदान दिया है। सोनोवाल ने कहा कि चेन्नई में हमारी प्रस्तावित कार्यशाला ईएमसी के संचालन पर चर्चा करेगी और हम इस गलियारे के साथ कोकिंग कोयला, तेल तथा तरलीकृत प्राकृतिक गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं के व्यापार एवं परिवहन के लिए प्रासंगिक हितधारकों को शामिल करने की कल्पना करते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे आपको यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि हमने आगामी ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट (जीएमआईएस), 2023 में भाग लेने के लिए रूस को आमंत्रित किया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रूसी गणराज्य में सुदूर पूर्व और आर्कटिक के विकास मंत्री ए ओ चेकुनकोव ने कहा है कि हमने अपने सहयोगी देशों के बीच समुद्री संचार के विकास के साथ-साथ उत्तरी समुद्री मार्ग के उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की है। उन्होंने कहा है कि संपर्कों की यह गतिशीलता हमारी साझेदारी को और बेहतर करने की नींव रखने जैसा है। श्री ए ओ चेकुनकोव ने कहा है कि भारत के साथ सहयोग करना हमारे मंत्रालय की अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों की प्राथमिकताओं में से एक है और हम आपसी हित के सभी क्षेत्रों के लिए सुदूर पूर्व में भारतीय भागीदारों के साथ लाभप्रद संबंध विकसित करने का इरादा रखते हैं।
सोनोवाल ने भारत और रूस के बीच व्यापार एवं वाणिज्य के अवसरों की तलाश के लिए अन्य वैकल्पिक मार्गों की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत बढ़ी हुई संपर्क सुविधा और व्यापार की क्षमता को पहचानते हुए उत्तरी समुद्री मार्ग के विकास के संबंध में साझेदारी करने की इच्छा रखता है। ए ओ चेकुनकोव ने व्यापार के लिए वैकल्पिक मार्गों के बारे में अपने विचार भी साझा किये। उन्होंने कहा कि हम आपके निष्कर्ष से सहमत हैं कि इस क्षेत्र का संभावित कार्गो आधार कोकिंग कोयला, तेल, एलएनजी और उर्वरक ही होगा। सुदूर पूर्व में, यह उत्पाद श्रृंखला पर्याप्त मात्रा में मौजूद है और भारत के पूर्व में इसे प्राप्त करने के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। ए ओ चेकुनकोव ने कहा कि सुदूर पूर्वी बंदरगाहों की विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को विस्तारित भौगोलिक दायरे में लागू किया जाना चाहिए, जिसमें प्राथमिक के अलावा अन्य क्षेत्र तथा मुख्य रूप से खाबरोवस्क का समुद्री इलाका शामिल हैं। उन्होंने बताया कि हम इस वर्ष अक्टूबर में एक व्यावसायिक मिशन पर चेन्नई का दौरा करेंगे और प्रमुख रूसी निर्यातकों की भागीदारी के साथ उपरोक्त परियोजनाओं के शुभारंभ के लिए भारतीय पक्ष के साथ पारस्परिक रूप से लाभप्रद समाधान विकसित करने के उद्देश्य के साथ तैयार हैं। ए ओ चेकुनकोव ने कहा कि एनएसआर एक वैश्विक परिवहन परियोजना है और इसका विकास रूस तथा गैर-क्षेत्रीय देशों दोनों को आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह पोत निर्माण उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और उत्तरी गोलार्ध वाले देशों में सामान्य रसद व्यवसाय में भागीदारी से आय प्राप्त करने का एक अवसर भी है।
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर
~प्रियंका वर्मा महेश्वरी
कानपुर 14 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बालिका विद्यालय पी .जी .कॉलेज कानपुर के हिंदी विभाग ने वर्तमान में प्रायोजनमूलक हिंदी का वैश्विक महत्व विषय पर एक व्याख्यान एवं भाषण प्रतियोगिता करवाई कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता प्रोफेसर सुमन सिंह हिंदी विभाग दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज कानपुर, प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रवीण कुमार मिश्रा ,सचिव प्रोबीर कुमार सेन, संयुक्त सचिव शुभ्रो सेन, महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर सुमन ,समाजशास्त्र विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर निशि प्रकाश, प्रमुख अनुशासक कप्तान ममता अग्रवाल तथा हिंदी विभाग की प्रभारी डॉक्टर शुबा बाजपेई ने दीप प्रज्वलन कर किया।
वर्तमान में भारत के अमृतकाल प्रयोजनमूलक हिंदी का वैश्विक महत्व विषय पर मुख्य वक्ता ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के दौरान विश्व श्रृंखल भारत को एक सूत्र में बांधने का कार्य भी हिंदी नहीं किया था ।विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक छोटे से कालखंड में हिंदी को जो अहर्ता और प्रतिष्ठा प्राप्त हुई वह अकल्पनीय है ।महाविद्यालय की प्राचार्य जी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि आज हिंदी जीवकोपार्जन से जुड़े सभी कार्य -व्यापारो के मध्य की भाषा बन गई है और यही उसकी प्रयोजनपरकता है ।वह प्रशासन, शिक्षा, उद्योग ,व्यापार विज्ञान की भाषा बन गई है। तब एक राष्ट्र ,एक भाषा की बात हो वहां हिंदी की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है ।प्रबंध तंत्र समिति के अध्यक्ष श्री प्रवीण कुमार मिश्रा जी ,सचिव प्रोबीर कुमार सेन ,संयुक्त सचिव सुब्रोसेन तथा प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने मुख्य वक्ता प्रोफेसर सुमन सिंह को विघ्न विनाशक गणेश की प्रतिमा व प्रशस्ति पत्र स्मृति स्वरूप प्रदान किया ।प्रबंध तंत्र ने संयुक्त सचिव सुब्रोसेन से अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदी हमारे देश की समन्वय की भाषा है और हमारी राजभाषा के सम्मान के लिए युवाओं को सक्रिय प्रयास करते रहने चाहिए। हमें अपनी हिंदी भाषा बोलने लिखने में गर्व करना चाहिए ।भाषण प्रतियोगिता के प्रतिभागी छात्राओं के नाम रेशमा ने प्रस्तुत किया जिसमें छात्राओं ने उत्साह के साथ प्रतिभाग किया इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्रवक्ता गण कर्मचारी गण एवं छात्रों को पुरस्कार स्वरूप पुस्तक एवं प्रमाण पत्र प्रबंध समिति एवं प्राचार्या द्वारा प्रदान किए गए कार्यक्रम का संचालन विभाग की प्रभारी डॉक्टर शुबा वाजपेई ने तथा आभार ज्ञापन समाजशास्त्र विभाग की विभागा अध्यक्ष प्रोफेसर निशी प्रकाश ने किया ।प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार हैं प्रथम स्थान अंशिका दीप बी ए प्रथम वर्ष।द्वितीय स्थान हिना बानो एम ए प्रथम वर्ष। तृतीय स्थान अमृता शुक्ला एम ए प्रथम वर्ष।
कानपुर 14 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, हिंदी अपने चरित्र में लोकतांत्रिक है. इसका लचीलापन ही इसे अन्य भाषाओं से जुड़ने में मदद करता है और वही इसकी सबसे बड़ी ताकत है. यह विचार युवा आलोचक जगन्नाथ दुबे ने क्राइस्ट चर्च कॉलेज में हिंदी दिवस के अवसर पर बोलते हुए व्यक्त किया. क्राइस्ट चर्च कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी 14 सितंबर को हिंदी दिवस का आयोजन विभागीय पुस्तकालय “बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ पुस्तकालय में उत्साह से किया गया.


