“इसको कहा था कि ऑफिस से छुट्टी ले ले लेकिन मेरी सुनती कहां है?” रेवती गुस्से में बड़बड़ा रही थी। “छह बजे लड़के वाले आ जाएंगे इसे देखने और अभी तो इसका तैयार होना भी बाकी है और कम से कम एक नाश्ता तो अपने हाथ का बना कर रखें क्या सब बाजार का ही खि
लाएंगे?” रेवती अपने पति शंकर की ओर देखते हुए बोली।
शंकर:- “कहा तो था मैंने कि जल्दी घर आ जाना, रुको! मैं फोन करता हूं उसे। आजकल ट्रैफिक भी बहुत ज्यादा रहता है कहीं फस गई होगी।”
शंकर:- “हेलो! बेटा कहां हो? घर आने में कितनी देर है? तुम्हें पता है सब फिर भी लेट कर रही हो? चलो जल्दी घर आ जाओ।”
मुस्कान:- “जी पापा! बस निकल ही रही थी, आज काम भी जरा ज्यादा था बस आधे घंटे में आ रही हूं।”
शंकर:- “हां! ठीक है ।”
(शंकर रेवती से):- “आ रही है आधे घंटे में”
रेवती:- “भगवान करे सब ठीक से निपट जाए। आज छुट्टी ले लेती तो अच्छा होता। खैर।”
करीब पौने घंटे में मुस्कान घर आई।
मुस्कान:- “सॉरी – सॉरी जरा लेट हो गई। बस! अभी दस मिनट में रेडी हो जाती हूं।” रेवती के चेहरे पर नाराजगी के भाव थे।
मुस्कान:- “मम्मी ढोकले का गोल रेडी है ना अभी बना देती हूं।”
मुस्कान:- “अरे मम्मी! क्यों गुस्सा कर रही हो सब कुछ समय पर हो जाएगा। उन्हें आने में अभी एक घंटा बाकी है तब तक सब हो जाएगा।” रेवती बिना कुछ बोले किचन में चली जाती है। करीब आधे घंटे बाद मुस्कान पटियाला सलवार कमीज पहन कर बाहर आती है। कानों में झुमके, आंखों में काजल, गले में पतली चेन, हाथों में कड़े डालकर बहुत प्यारी लग रही थी। वो सादगी में भी बहुत अच्छी दिख रही थी।
रेवती:- “अरे! लिपस्टिक क्यों नहीं लगाई और वह पेंडेंट सेट रखा था वो पहनना था बेटा! इतना सिंपल कोई तैयार होता है क्या?”
मुस्कान:- “अरे मम्मी! जैसी हूं वैसे ही रहने दो ना! बाद में कमियां निकलेंगे उससे तो अच्छा है कि मैं जैसी हूं वैसी ही देख ले मुझे।”
शंकर:- “ठीक ही तो कह रही है मुस्कान की मां और अच्छी तो लग रही है। छोड़ो यह सब, अब जाओ बेटा जल्दी से नाश्ता बना लो।”
मुस्कान:- “जी पापा!”
करीब साढ़े छह बजे लड़के वाले घर आए। आपस में एक दूसरे को अभिवादन करने के बाद बैठक में सब लोग बैठ कर औपचारिक बातचीत करने लगे। लड़की की मां:- “बहन जी बिटिया को तो बुलाईये।”
रेवती:- “जी बस! अभी आ रही है।”
रेवती अंदर जाती है और मुस्कान को साथ लेकर बाहर आती है। मुस्कान सबको नमस्ते करती है और अपने पिता के बगल में बैठ जाती है।
लड़के की मां:- “और बेटा काम कैसा चल रहा है? वैसे तो सब बायोडाटा में ही पढ़ लिया था। तुम्हारे शौक क्या-क्या है? घर के काम में दिलचस्पी रखती हो क्या? क्योंकि मेरा मानना है कि कितने ही कामकाजी और आधुनिक क्यों ना हो लेकिन घर के कामकाज आने चाहिए।”
मुस्कान:- “जी! थोड़ा बहुत तो सभी काम कर लेती हूं। खाना भी बना लेती हूं, बस सिलाई कढ़ाई वगैरह नहीं आती।
रेवती:- “पढ़ाई और फिर नौकरी में लग जाने के बाद, थोड़ा बहुत घर के काम सीखने के बाद इन सब कामों के लिए समय नहीं मिल पाता था इसे लेकिन घर के सभी काम जानती है।”
लड़के की मां:- “समझती हूं मैं! आजकल दोहरी जिम्मेदारी हो जाती है लड़कियों पर। अगर तुम लोगों को आपस में कुछ बात करनी हो तो कर सकते हो।”
मुस्कान:- “नहीं! बात करने जैसा क्या है? लेकिन मुझे अपनी एक बात आप दोनों से कहनी है।” सभी सवालिया नजरों से उसे देखने लगते हैं।
लड़के की मां:- “हां बेटा! जरूर कहो!”
मुस्कान:- “मेरे मम्मी पापा का मेरे अलावा और कोई नहीं है और मेरे जाने के बाद वो एकदम अकेले हो जाएंगे तो मैं चाहूंगी कि शादी के बाद भी मैं इनका ध्यान रखूं। उम्मीद है कि आपको आपत्ति नहीं होगी।”
लड़के की मां:- “मेरा भी एक ही बेटा है, इसके पापा की जाने के बाद हम दोनों ही एक दूसरे का सहारा है, अब तुम आ जाओगी तो मेरा एक हाथ और बढ़ जाएगा। उसी तरह मुकुल से शादी करने के बाद तुम्हारे मम्मी पापा को भी एक बेटा मिल जाएगा और तुम दोनों हम तीनों का ख्याल रखना। क्यों ठीक है ना मुकुल?”
मुकुल:- “जी मम्मी! आप बिल्कुल ठीक कह रही हैं।”
रेवती और शंकर जरा घबराये हुये थे कि कहीं रिश्ता टूट न जाए लेकिन उनका जवाब सुनकर उन्होंने चैन की सांस ली और मुस्कान की भी टेंशन खत्म हो गई थी। वह किचन में नाश्ता लाने चली गई। नाश्ते के साथ वो दो गुलाब के फूल भी साथ लाई। एक अपनी होने वाली सास को और एक अपनी मां को फूल देते हुए बोली “हैप्पी मदर्स डे” घर में खुशी का माहौल बन गया था। मुकुल भी सभी को नाश्ता परोसने में मुस्कान की मदद करने लगा। ~प्रियंकर वर्मा माहेश्वरी
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अतुल दीक्षित
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भारतीय स्वरूप संवाददाता देहरादून, फुटबॉल के प्रति प्रतिस्पर्धा और प्रोत्साहन बढ़ाने के उद्देश्य से अपोलो टायर्स द्वारा आयोजित ‘यूनाइटेड वी प्ले’ के चौथे सीज़न के ट्रायल का आयोजन देहरादून में हुआ। ट्रायल में 250 से अधिक युवा फुटबॉल खिलाड़ी ने भाग लिया, जिनमें से शीर्ष 40 का चयन अगले चरण के लिए किया गया। इस ट्रायल का आयोजन पवेलियन ग्राउंड में किया गया था, जहां देहरादून और आसपास के क्षेत्रों के युवा उम्मीदवारों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। इस पहल का मकसद देशभर में फुटबॉल के खेल की पहुंच को बढ़ाना और खिलाड़ियों के टैलेंट को विकसित करना है। चयनित फुटबॉल खिलाड़ियों को मैनचेस्टर यूनाइटेड के युवा टीम के साथ ट्रेनिंग, क्लब के दिग्गजों से मिलने और मैच डे का अनुभव मिलेगा।
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कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता, डी जी कॉलेज, कानपुर के द्वारा उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश शासन , कमिश्नर, कानपुर नगर तथा क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, कानपुर मंडल, कानपुर नगर के निर्देशन में कानपुर नगर के ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक एवं शैक्षणिक पर्यटन को बढ़ावा देने एवं छात्र-छात्राओं के मध्य उसके व्यापक प्रचार प्रसार हेतु स्थापित किए गए युवा पर्यटन क्लब के सौजन्य से क्लब की कोऑर्डिनेटर डॉ संगीता सिरोही के कानपुर दर्शन यात्रा का आयोजन किया गया । जिसमें महाविद्यालय की 32 छात्राओं ने प्रतिभाग किया । इस यात्रा के दौरान छात्राओं ने अटल घाट पर स्वच्छता अभियान भी चलाया। कानपुर दर्शन यात्रा में मुख्य रूप से गंगा बैराज, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, इस्कॉन टेंपल, ब्रह्मव्रत घाट, ब्रह्मा जी की खूंटी, लव कुश जन्मस्थली, ध्रुव टीला, नाना राव पेशवा स्मारक पार्क, ग्रीन पार्क स्थित विजिटर्स गैलरी एवं म्यूजियम, मोतीझील स्थित कारगिल पार्क, ओपन जिम एवं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एरेना पार्क तथा कानपुर विश्वविद्यालय का भ्रमण कराया गया। साथ में उपस्थित गाइड कार्तिकेय सिंह ने समस्त स्थानो के बारे में छात्राओं को विस्तार पूर्वक जानकारियां दी। कानपुर दर्शन यात्रा को सफलतापूर्वक संचालित करने में नगर निगम अधिकारी श्री शशांक दीक्षित जी एवं महाविद्यालय प्राचार्या प्रो अर्चना वर्मा तथा कार्यालय अधीक्षक श्री कृष्णेंद्र श्रीवास्तव का सहयोग सराहनीय रहा।