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भारत-यूरोपीय संघ एक संतुलित मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप प्रदान करने के लिए ईमानदारी एवं प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) के 65वें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और यूरोपीय संघ एक व्यापक एवं संतुलित मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप प्रदान करने के लिए गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं जिससे दोनों पक्षों के व्यवसायों एवं उपभोक्ताओं को लाभ प्राप्त होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस प्रकार का समझौता एकतरफा नहीं हो सकता है क्योंकि प्रत्येक वार्ता को निष्पक्ष एवं संतुलन बनाने के लिए कुछ हद तक लेन-देन शामिल किया जाता है।

मंत्री ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि एक आदर्श समझौते को प्रगति का दुश्मन नहीं बनने दिया जाए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वार्ता बहुत सकारात्म दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस प्रक्रिया के माध्यम से उजागर हो रही संभावनाओं के प्रति आशा व्यक्त किया जो विशाल है और व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं गहन आर्थिक भागेदारी का अवसर खोलेगी।

श्री गोयल ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि ऑटोमोटिव घटक क्षेत्र जैसे साहसिक एवं दूरदर्शी उद्योग, जो पहले की एफटीए वार्ताओं से लगातार मजबूत हुआ है, को भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी के अंतर्गत तैयार किए जा रहे प्रावधान आकर्षक एवं संभावनाओं से भरपूर लगेंगे।

उन्होंने आशा व्यक्त किया कि ऑटोमोटिव घटक क्षेत्र, जिसने हमेशा एफटीए वार्ताओं को मजबूती प्रदान की है, को भारत और यूरोपीय संघ के बीच हो रही व्यवस्थाएं आकर्षक एवं रोमांचक लगेंगी तथा उनमें व्यवसायों के विकास, सहयोग, नवाचार तथा अनुसंधान एवं विकास में शामिल होने की भरपूर संभावनाएं होंगी। मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र ने भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता का समर्थन करके एवं वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत होकर लगातार लचीलापन एवं दूरदृष्टि दिखाई है।

श्री गोयल ने कहा कि एफटीए भारतीय निर्माताओं के लिए अपने यूरोपीय समकक्षों और विश्व के अन्य क्षेत्रों की कंपनियों के साथ साझेदारी करने का नया मार्ग खोलेगा, जिससे संयुक्त उद्यमों, प्रौद्योगिकी साझेदारी और सहयोगात्मक नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि जहां तक लागत प्रतिस्पर्धात्मकता का सावाल है तो भारत महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है चाहे वह डिज़ाइन, विकास या अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र हों और देश में कुशल प्रतिभा भंडार के साथ यह भारत को वैश्विक ऑटोमोटिव कंपनियों के लिए एक आकर्षक केंद्र बना देगा। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार की साझेदारियां लागत में कमी लाने, उत्पादकता बढ़ाने, भारतीय युवाओं के लिए रोज़गार उत्पन्न करने और देश को उच्च-गुणवत्ता वाले ऑटोमोटिव घटक निर्माण का एक अग्रणी केंद्र बनाने में मदद करेंगी।

इस सत्र को यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा, अंतर-संस्थागत संबंध एवं पारदर्शिता आयुक्त, महामहिम मारोस शेफोविच ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ अभूतपूर्व गति से एक अभूतपूर्व मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इस वर्तमान चर्चा को दोनों भागीदारों के बीच अब तक की सबसे गहन एवं रचनात्मक चर्चाओं में से एक कहा। उन्होंने कहा कि यद्यपि मुक्त व्यापार समझौते पर पहले भी बातचीत के प्रयास किए गए लेकिन इससे पहले यह प्रक्रिया इतनी गंभीर, आपसी विश्वास और साझा महत्वाकांक्षा के स्तर तक कभी नहीं पहुंची थी। आयुक्त ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा पूर्व में व्यक्त की गई प्रतिबद्धता के अनुरूप इस वर्ष के अंत तक बातचीत को अंतिम रूप देने के लिए अधिकतम प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दोनों पक्ष एक ऐसा आर्थिक रूप से सार्थक पैकेज बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो उत्पादकों, निर्यातकों एवं उपभोक्ताओं के हितों को समान रूप से संतुलित करे। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य एक ऐसे वास्तविक लाभप्रद समझौते पर पहुंचना है जो न केवल वस्तुओं एवं सेवाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाए बल्कि दोनों पक्षों के बीच निवेश, नवाचार, सतत प्रथाओं और गहन सहयोग को भी बढ़ावा दे। उन्होंने कहा कि भारत तेज गति से वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख इंजन बन रहा है और भारत के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी यूरोपीय संघ के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी,  ठीक उसी तरह जैसे यूरोपीय प्रौद्योगिकी एवं पैमाने से भारत के विकास को लाभ प्राप्त होगा।

केंद्रीय मंत्री गोयल ने आगे कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता रणनीतिक तत्वों से युक्त एक व्यापक आर्थिक साझेदारी होगी। उन्होंने कहा कि भारत को यूरोप की तकनीक एवं नवाचार से लाभ होगा जबकि यूरोपीय संघ को भारत के विकास, पैमाने एवं लचीलेपन से लाभ होगा। उन्होंने भारत में वाहनों तक लोगों की पहुंच को वर्तमान में प्रति हज़ार 34 कारों से बढ़ाकर उल्लेखनीय रूप से उच्च स्तर तक ले जाने की भारत की आकांक्षाओं का भी उल्लेख किया, जिससे ऑटो घटक उद्योग के लिए वैश्विक स्तर पर विस्तार के अवसर उत्पन्न होंगे।

मंत्री ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑटोमोबाइल उद्योग को मेक इन इंडिया कार्यक्रम का अग्रदूत कहा है। भारत में मेक इन इंडिया के 10 वर्ष पूरे होने पर, मंत्री ने कहा कि यह उच्च लक्ष्य निर्धारित करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, लचीलापन बनाने तथा रोजगार, निर्यात एवं उच्च-गुणवत्ता वाले विनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने का एक उपयुक्त समय है।

श्री गोयल ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के लचीलेपन की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश ने 100 से ज़्यादा देशों को दवाइयां और टीके, जिनमें से कई मुफ़्त थे, उपलब्ध कराने से लेकर बिना किसी मुनाफ़ा के आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर सभी वैश्विक प्रतिबद्धता को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि इससे भारत को वैश्विक रूप से विश्वास प्राप्त हुआ है और आज भारत को एक विश्वसनीय एवं भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखा जाता है।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हाल ही में किए गए जीएसटी सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना एक ऐतिहासिक सुधार है और ऑटो उद्योग के लिए एक बड़ी राहत है। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है जिससे कृषि क्षेत्र को बहुत बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि इस सुधार के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की जानी चाहिए क्योंकि इससे स्पेयर पार्ट्स और भी सस्ते हो जाएंगे, औपचारिकता मज़बूत होगी, रोज़गार के अवसर उत्पन्न होंगे और मूल्य श्रृंखला में मांग बढ़ेगी। उन्होंने बल देकर कहा कि इसका पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए।

मंत्री ने कहा कि जीएसटी सुधारों का यह दौर आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा सुधार है और इससे हर भारतीय को लाभ मिलेगा। उन्होंने बल देकर कहा कि 1.4 अरब लोगों में से एक भी नागरिक ऐसा नहीं होगा जिसे इन सुधारों से लाभ नहीं मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री गोयल ने रतन टाटा को उद्धृत करते हुए अपनी बात समाप्त की: “लोग आप पर जो पत्थर फेंकते हैं, उन्हें स्वीकार करें और एक स्मारक बनाएं।” उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को एवं राष्ट्र को चुनौतियों से विचलित नहीं होना चाहिए तथा आत्मविश्वास, लचीलेपन एवं सामूहिक प्रयास से भारत निरंतर मजबूत होता जाएगा।

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विश्व खाद्य भारत 2025, वैश्विक मेगा खाद्य आयोजन के चौथे संस्करण का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया जाएगा

वैश्विक मेगा फ़ूड इवेंट, वर्ल्ड फ़ूड इंडिया (WFI) 2025 के चौथे संस्करण का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 25 सितंबर 2025 को शाम 6:00 बजे भारत मंडपम, नई दिल्ली में करेंगे। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान भी उपस्थित रहेंगे।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई), भारत सरकार द्वारा आयोजित, विश्व खाद्य भारत 2025, 25-28 सितंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचानते हुए, इस प्रमुख वैश्विक आयोजन का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण मूल्य श्रृंखला में सहयोग, नवाचार और निवेश को बढ़ावा देकर भारत को “विश्व के खाद्य केंद्र” के रूप में स्थापित करना है।

अपने पिछले संस्करणों की उल्लेखनीय सफलता के आधार पर वर्ल्ड फ़ूड इंडिया का चौथा संस्करण एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करेगा, जो नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, उद्यमियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों को भारत के तेज़ी से विकसित होते खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र में अवसरों को जोड़ने, सहयोग करने और तलाशने के लिए एक साथ लाएगा। इसमें बड़ी संख्या में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों के भाग लेने की उम्मीद है, जो इसे वैश्विक खाद्य पारिस्थितिकी तंत्र के सबसे व्यापक प्रदर्शनों में से एक बना देगा।

इस वर्ष, न्यूजीलैंड और सऊदी अरब को भागीदार देश के रूप में नामित किया गया है, जबकि जापान, यूएई, वियतनाम और रूस फोकस देशों के रूप में भाग लेंगे। उनकी भागीदारी द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करेगी, ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाएगी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा करेगी।

इसमें वैश्विक विचारकों, नीति निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों के साथ उच्च-स्तरीय ज्ञान सत्रों और पैनल चर्चाओं की एक श्रृंखला होगी। खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, मशीनरी, कोल्ड चेन और संबद्ध उद्योगों में नवीनतम नवाचारों, प्रौद्योगिकियों और समाधानों को उजागर करने वाली क्षेत्रीय प्रदर्शनियाँ, रणनीतिक साझेदारी और सहयोग बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए B2B और B2G नेटवर्किंग के अवसर। पाककला के अनुभव और शेफ प्रतियोगिताएं भारत की समृद्ध खाद्य विविधता और स्वस्थ, टिकाऊ और भविष्य के खाद्य पदार्थों में वैश्विक रुझानों को प्रदर्शित करेंगी।

दो प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन, एफएसएसएआई द्वारा तीसरा वैश्विक खाद्य नियामक शिखर सम्मेलन, जो वैश्विक नियामकों को खाद्य सुरक्षा मानकों के सामंजस्य पर चर्चा करने और नियामक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करेगा। सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईएआई) द्वारा 24वां इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो (आईआईएसएस) भारत की बढ़ती समुद्री खाद्य निर्यात क्षमता और वैश्विक बाजार संबंधों पर ध्यान केंद्रित करते हुए वर्ल्ड फूड इंडिया के हिस्से के रूप में समानांतर कार्यक्रमों के रूप में आयोजित किया जा रहा है।

इस मेगा इवेंट की तैयारी में, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, श्री चिराग पासवान ने 11 सितंबर 2025 को भारत मंडपम का दौरा किया और व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए स्थल लेआउट, लॉजिस्टिक्स, स्टॉल प्लानिंग, सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल का आकलन किया।

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कृषि क्षेत्र में सरकार का अपनी तरह का पहला एआई-आधारित मौसम पूर्वानुमान कार्यक्रम, 3.8 करोड़ किसानों तक पहुंच रहा है

देश के करोड़ों किसानों की आय और आजीविका का मुख्य स्रोत खरीफ की खेती है लेकिन इसके लिए किसान वर्षा पर निर्भर हैं। मानसून के बारे में यदि किसानों को पहले से ही मौसम संबंधी पूर्व जानकारी मिल जाए तो उन्हें यह निर्णय लेने काफी मदद मिल सकती है कि कौन सी फसल, कितनी मात्रा में और कब बोनी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा संचालित मौसम पूर्वानुमान में क्रांति के कारण अब यह संभव हो सका है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (एमओएएफडब्ल्यू) किसानों के लिए एआई की शक्ति का उपयोग कर रहा है। एक अनूठी सार्वजनिक पहल के तहत, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इस वर्ष 13 राज्यों के लगभग 3.8 करोड़ किसानों को एसएमएस (एम-किसान) के माध्यम से एआई-आधारित मानसून पूर्वानुमान भेजे । यह पूर्वानुमान बारिश से चार सप्ताह पहले तक कहीं उपलब्ध थे। एआई-आधारित मॉडलों ने किसानों की ज़रूरतों के अनुसार विशेष रूप से पूर्वानुमान तैयार करना संभव बना दिया है, जिससे किसानों को खरीफ फसल संबंधी निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण मिला। यह अब तक एआई मौसम पूर्वानुमानों का अपनी तरह का पहला लक्षित प्रसार है, जिसने मंत्रालय को किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए एआई मौसम पूर्वानुमान लागू करने में विश्व-अग्रणी के रूप में स्थापित किया है।

अपर सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मेहरदा और संयुक्त सचिव श्री संजय कुमार अग्रवाल ने कृषि भवन में 8 सितंबर को आयोजित एक कार्यक्रम समीक्षा बैठक में, नोबेल पुरस्कार विजेता और शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइकल क्रेमर के साथ मंत्रालय की इस अभूतपूर्व पहल और कार्यक्रम के विस्तार पर चर्चा की। डॉ. मेहरदा ने कहा, ” यह कार्यक्रम निरंतर वर्षा की भविष्यवाणी करने के लिए एआई-आधारित मौसम पूर्वानुमान में क्रांति का उपयोग करता है, जिससे किसानों को अधिक आत्मविश्वास के साथ कृषि गतिविधियों की योजना बनाने और जोखिमों का प्रबंधन करने में मदद मिलती है। हम आने वाले वर्षों में इस प्रयास को और बेहतर बनाने की आशा करते हैं।”

इस वर्ष, मानसून समय से पहले आ गया था, लेकिन उत्तर की ओर बढ़ने में रुकावट आने से 20 दिनों तक बारिश रुकी रही। मंत्रालय ने एआई आधारित पूर्वानुमानों से मानसून की इस रुकावट की सटीक पहचान की। सरकार ने किसानों को हर हफ्ते अद्यतन जानकारी भेजी। श्री अग्रवाल ने कहा, “जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में परिवर्तनशीलता बढ़ रही है, इसलिए पूर्वानुमान किसानों को समय के साथ तारतम्य स्थापित करने में मदद करने का एक उपयोगी साधन हैं।”

मौसम पूर्वानुमान में एआई क्रांति

वर्ष 2022 से, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्रेरित क्रांति ने मौसम पूर्वानुमान के विज्ञान को पूरी तरह बदल दिया है और कई स्थितियों में अधिक सटीक पूर्वानुमान प्रदान किए हैं। इन मॉडलों को उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है और ये भारतीय मानसून जैसी जटिल घटनाओं का हफ्तों पहले पूर्वानुमान लगाने की क्षमता को और बढ़ा रहे हैं। मंत्रालय ने करोड़ों किसानों के हित के लिए इस क्रांति को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा इस्तेमाल किए गए पूर्वानुमान दो ओपन-एक्सेस मॉडलों—गूगल के न्यूरल जीसीएम और ईसीएमडब्ल्यूएफ के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फोरकास्टिंग सिस्टम्स (एआईएफएस)—का मिश्रण थे। कड़े विश्लेषणों में, ये मॉडल किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर मानसून की शुरुआत की भविष्यवाणी करने में अन्य उपलब्ध पूर्वानुमानों से स्पष्ट रूप से बेहतर साबित हुए।

नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने कहा कि मौसम संबंधी जानकारी प्रदान करते समय किसानों की ज़रूरतों पर ध्यान देना ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “यह पहल बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसानों की ज़रूरतों पर केंद्रित है और आसान भाषा में मौसम संबंधी पूर्वानुमान प्रदान करके उन्हें कृषि संबंधी निर्णय लेने में मदद करती है।”

डेवलपमेंट इनोवेशन लैब – इंडिया और प्रिसिजन डेवलपमेंट की टीमों के साथ काम करते हुए मंत्रालय ने किसानों के साथ प्रत्यक्ष रूप से संवाद स्थापित किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संदेश उनकी समझ में आ गए हैं और उन्हें अमल में लाया जा सकता है।

नोबेल पुरस्कार विजेता माइकल क्रेमर ने कहा, “यह कृषि मंत्रालय की एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे लाखों किसानों को लाभ होगा और भारत किसानों की जरूरतों को पूरा करने में अग्रणी स्थान पर रहेगा।” उन्होंने कहा, “मंत्रालय का कार्यक्रम इस बात का एक मॉडल है कि एआई के युग में लोगों को कैसे प्राथमिकता दी जाए।”

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आज के बदलते समय में रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए उद्योग आधारित अनुसंधान एवं विकास संस्थान-अकादमिक सहयोग काफी महत्वपूर्ण है: रक्षा सचिव

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आज के लगातार परिवर्तित होते समय में सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक एवं निजी उद्योग, डीआरडीओ जैसे अनुसंधान संस्थानों और शिक्षाविदों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है। रक्षा सचिव 12 सितंबर, 2025 को महाराष्ट्र के पुणे में दक्षिणी कमान द्वारा आयोजित ‘प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का तालमेल’ विषय पर उद्घाटन सत्र स्ट्राइड 2025 सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रौद्योगिकी व्यवधान न केवल युद्ध की प्रकृति को बदल रहा है, बल्कि रक्षा उद्योग के व्यवसाय को भी परिवर्तित कर रहा है, उन्होंने सभी हितधारकों से नवीनतम तकनीकी रुझानों से अवगत रहने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

रक्षा सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी श्रेष्ठता एवं औद्योगिक सामर्थ्य अक्सर युद्ध के परिणाम को निर्धारित करते हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता व्यक्त है कि रक्षा उद्योग हमारे विनिर्माण क्षेत्र के बाकी हिस्सों के साथ गति से बढ़े ताकि विकसित भारत तथा वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन नवाचार के क्षेत्र में एक विकसित राष्ट्र बनने, भारत की स्टार्टअप संस्कृति को विस्तार देने, हमारे औद्योगिक आधार को व्यापक बनाने, देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी बढ़ाने व रोजगार सृजन तथा प्रौद्योगिकी के दोहरे उपयोग से होने वाले लाभों के व्यापक मुद्दे के लिए महत्वपूर्ण है।

राजेश कुमार सिंह ने बताया कि चल रहे संघर्षों के परिणामस्वरूप दुनिया भर में प्रतिस्पर्धी लोकलुभावनवाद एवं आर्थिक संरक्षणवाद को बढ़ावा मिला है और साथ ही आर्थिक विखंडन, बहुपक्षीय संस्थाओं का पतन तथा राष्ट्रवाद की बढ़ती लहर भी देखी गई है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “हमें अपनी सॉफ्ट पावर को सहयोग देने की आवश्यकता है, क्योंकि हार्ड पावर अधिकाधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।”

रक्षा सचिव ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्यौरा दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश तकनीकी दौड़ में आगे रहे। इन उपायों में रक्षा खरीद मैनुअल 2009 और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में संशोधन करना शामिल है ताकि उन्हें अधिक गतिशील, सक्रिय, कम प्रक्रिया-भारी तथा परिणाम पर अधिक केंद्रित बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र और स्टार्टअप के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करने, जमीनी स्तर पर नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा प्रतिस्पर्धी बोली सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इसका उद्देश्य भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को व्यापक और विविध बनाना है।

राजेश कुमार सिंह ने रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने और इसे आत्मनिर्भर बनाने में निजी उद्योग की भूमिका की सराहना करते हुए उनसे अनुसंधान एवं विकास तथा विनिर्माण क्षमता में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में तब तक उस स्तर का नवाचार और क्षमता नहीं आ सकते हैं, जिसकी सशस्त्र सेनाओं को आवश्यकता है, जब तक कि निजी क्षेत्र में आगे रहने तथा निवेश करने की इच्छाशक्ति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि रक्षा एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें आपको छिटपुट आधार पर ऑर्डर मिलते हैं। राजेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि हमारे पास प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग की ताकत है, तो हम घरेलू तथा निर्यात ऑर्डर के संयोजन के माध्यम से खुद को बनाए रखने में सक्षम होंगे।

दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने अपने संबोधन में रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों के जाने-माने विशेषज्ञ, पूर्व सैनिक, विद्वान, डीआरडीओ, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी उद्योग और शिक्षा जगत के प्रतिनिधि एक साथ आए, जिसका उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास, उत्पादन, रखरखाव तथा नवाचार को शामिल करते हुए एक स्वदेशी डिफेंस इकोसिस्टम के लिए रोडमैप तैयार करना था। सेमिनार में निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर आकर्षक पैनल चर्चाएं हुईं:

  • रिवर्स इंजीनियरिंग और शैक्षणिक अनुसंधान के लिए उद्योग वित्तपोषण के माध्यम से विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को तेजी से आगे बढ़ाना।
  • स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने में डीआरडीओ की भूमिका को सशक्त करना।
  • निजी उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और शिक्षा जगत के बीच बेहतर सहयोग के माध्यम से रक्षा विनिर्माण विकास में तेजी लाना।

इस कार्यक्रम के एक भाग के रूप में एक उपकरण प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें अत्याधुनिक स्वदेशी नवाचारों को प्रदर्शित किया गया और भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं के निर्माण की दिशा में सहयोग तथा साझेदारी को बढ़ावा दिया गया।

सेमिनार में आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने, हितधारकों के बीच तालमेल को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर राष्ट्रीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए दक्षिणी कमान की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

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निफ्ट पटना और एबीएफआरएल ने केंद्रीय वस्‍त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह की उपस्थिति में स्वयं सहायता समूह जीविका की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) पटना ने आज केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह की मौजूदगी में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उद्योग कौशल प्रदान कर बिहार के बढ़ते वस्त्र क्षेत्र में रोजगार के अवसर दिलाना है, ताकि उनके जीवन में सकारात्‍मक बदलाव आए।

गिरिराज सिंह ने साझेदारी के महत्व का उल्‍लेख करते हुए कहा कि निफ्ट पटना ने बेगूसराय में जीविका दीदियों के लिए पहले ही कई सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं, जिससे उनके सिलाई कौशल और आय क्षमता में बढ़ोतरी हुई है। उन्‍होंने कहा कि इस समझौता ज्ञापन से निफ्ट विस्तार केंद्र में प्रशिक्षित जीविका दीदियों को अब एबीएफआरएल कारखाने में नौकरियां मिल पाएगी। शुरू में, आसपास के क्षेत्र की 3.5 लाख महिलाओं को लाभ मिलेगा और भविष्य में, निकटवर्ती जिलों की महिलाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

समझौता ज्ञापन सहयोग के तहत, जीविका दीदियों के नाम से पहचाने जाने वाली स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को निफ्ट पटना में परिधान निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और मशीनरी संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को बेगूसराय जिले में आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) की आगामी वस्त्र निर्माण इकाई में रोजगार देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे इन महिलाओं के कौशल विकास से लेकर सुरक्षित आजीविका तक का सुव्यवस्थित मार्ग तैयार होगा।

जीविका दीदियां, बिहार के जीविका कार्यक्रम की रीढ़ हैं, जिसे भारत सरकार और विश्व बैंक के सहयोग से बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (बीआरएलपीएस) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में पिछले कुछ वर्षों में  1.4 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी है, जिससे उन्हें कम राशि के वित्त प्राप्त करने, घरेलू आय में वृद्धि और सामाजिक सशक्तिकरण में मदद मिली है। यह समझौता ज्ञापन जीविका दीदियों को वस्‍त्र और फैशन क्षेत्र में रोज़गार के औपचारिक अवसरों से जोड़ता है, जिससे उनकी भूमिका स्थानीय उद्यमों से विस्‍तारित होकर मुख्यधारा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था तक पहुंचती है।

भारत की फ़ैशन और वस्‍त्र क्षेत्र की अग्रणी खुदरा कंपनियों में से एक, एबीएफआरएल के साथ साझेदारी सुनिश्चित करती है कि उसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले कौशल आधुनिक वस्त्र उत्पादन की मांग पूरा करेगी। निफ्ट की शैक्षणिक विशेषज्ञता को एबीएफआरएल की उद्योग आवश्यकताओं से जोड़ने संबंधी यह पहल शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग का सहक्रियात्मक मॉडल भी प्रस्‍तुत करती है। यह मॉडल पूरे भारत में  विशेषकर महिला समूह और ग्रामीण आजीविका स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ वाले राज्‍यों में भविष्य की साझेदारियों के लिए एक खाका प्रस्‍तुत करेगा।

तत्काल रोज़गार प्रदान करने के अलावा, इस कार्यक्रम से सामाजिक और आर्थिक दूरगामी परिणाम की उम्मीद है। महिलाओं को आजीविका के स्थिर साधन प्रदान कर  यह उन्‍हें अधिक वित्तीय स्वतंत्रता, घरों में निर्णय लेने की बेहतर शक्ति और सम्मान बढा़एगा। साथ ही, बेगूसराय में एबीएफआरएल की विनिर्माण इकाई की स्थापना से बिहार के औद्योगिक विकास में मदद मिलेगी,  जिससे महिलाओं के साथ ही स्थानीय स्‍तर पर कार्यबल के लिए व्‍यापक अवसर उत्‍पन्‍न होंगे।

यह समझौता ज्ञापन एक ऐतिहासिक पहल है जो समावेशी और सतत विकास लक्ष्‍य को पूरा करने के सरकार के दृष्टिकोण, शैक्षणिक विशेषज्ञता और उद्योग नेतृत्व को समेकित करता है। यह दर्शाता है कि कौशल विकास, रोज़गार आश्वासन के साथ जुड़कर, जीवन में कैसे बदलाव ला सकता है। यह विकास का ऐसा मॉडल दे सकता है, जिसे देशभर में मापा और दोहराया जा सके।

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भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) कार्यालयों के मीडिया और संचार अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की

  1. भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के कार्यालयों के मीडिया और संचार अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।
  1. कार्यक्रम में 51 मीडिया नोडल अधिकारियों (एमएनओ) और सोशल मीडिया नोडल अधिकारियों (एसएमएनओ) ने हिस्सा लिया।
  1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ उद्घाटन सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित किया।
  1. कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि गलत सूचनाओं के बढ़ते खतरे के मद्देनजर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भारत में संविधान के अनुसार चुनाव सख्ती से कराए जाते है और भ्रामक सूचनाओं का तथ्यों के साथ खंडन किया जाना चाहिए।
  1. मीडिया और अन्य हितधारकों के साथ समय पर तथ्यात्मक जानकारी देने के लिए सीईओ कार्यालयों के संचार संत्र को मजबूत करने के लिए सत्र आयोजित किए गए।
  1. कार्यशाला में मीडिया और सोशल मीडिया के परिप्रेक्ष्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण पर समर्पित सत्र आयोजित किए गए ।
  1. गलत सूचनाओं का खंडन करने के लिए विभिन्न उपकरणों, तकनीकों और रणनीतियों पर एक विशेषज्ञ सत्र भी आयोजित किया गया।
  1. यह कार्यक्रम इस तरह का तीसरा संवादात्मक आयोजन था। इससे पहले, आईआईआईडीईएम के सीईओ कार्यालयों के मीडिया और संचार अधिकारियों के लिए 9 अप्रैल, 2025 और 5 जून, 2025 को नई दिल्ली में नीतिगत कार्यक्रम (ओरिएंटेशन प्रोग्राम) आयोजित किए गए थे।

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दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज में नशा मुक्त युवा – विकसित भारत पर संगोष्ठी विषय पर संगोष्ठी आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत “नशा मुक्त युवा – विकसित भारत” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में विद्यार्थियों ने नशा मुक्ति के लिए सामूहिक शपथ ग्रहण की। भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के राष्ट्रीय सेवा योजना क्षेत्रीय निदेशालय से प्रायोजित और उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश शासन द्वारा समर्थित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे से होने वाले शारीरिक मानसिक और सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक करना रहा। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के राष्ट्रीय सेवा योजना विभाग द्वारा निर्देशित इस कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिनका उद्देश्य आज के समय में युवाओं के बीच तेजी से फैल रहे नशे की लत को जड़ से समाप्त करना है। कार्यक्रम का संयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा किया गया जिसमें कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने छात्राओं को नशे से होने वाले व्यापक नुकसान एवं उससे बचाव के उपायों पर विस्तार पूर्वक जानकारियां दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ अंजना श्रीवास्तव तथा समस्त वॉलिंटियर्स का विशेष योगदान रहा।

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‘एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् की बैठक संपन्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता अड्डांकी, बापट्ला। देश के लघु एवं मझोले वर्ग के समाचारपत्र संगठन ‘एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् की बैठक आन्ध्र पदेश राज्य के बापट्ला जिले के अड्डांकी, सिंगारकोण्डा में आयोजित।

सम्मेलन का शुभारम्भ पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्रीदुग्गाबत्ती वेंकटेश्वरा राव, पूर्व मंत्री गोट्टीपति पति रवि कुमार, पद्मश्री येदलापल्ली वेंकटेश्वरा राव, मुख्य सूचना आयुक्त, एसोसियेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव दत्त चन्दोला, राष्ट्रीय महासचिव शंकर कतीरा के करकमलों द्वारा संयक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

लघु एवं मझोले वर्ग के अखबारों के प्रकाशकों के तीन दिवसीय सम्मेलन में लघु एवं मझोले वर्ग की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, असम, उत्तराखण्ड, उड़ीसा सहित अनेक राज्यों से शामिल हुए प्रकाशकों ने अनेक समस्याओं को विस्तार से बताया।

सम्मेलन में शामिल हुए प्रकाशकों व पदाधिकारियों द्वारा रखे गये प्रस्तावों पर राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव दत्त चन्दोला ने कहा कि छोटे व मझोले वर्ग के अखबारों का उत्पीड़न, केन्द्र व राज्यों की सरकारों को बन्द करना चाहिये छोटे व मझोले वर्ग के अखबार ही स्थानीय स्तर की समस्याओं को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। ऐसे में उनका उत्पीड़न निन्दनीय है।

श्री चन्दोला ने कहा कि, हम मांग करते हैं कि छोटे व मझोले वर्ग के अखबारों की विकासदर बढ़ाने के लिये केन्द्र व राज्यों की सरकारों को आगे आना चाहिये और अखबारों का आर्थिक स्तर मजबूत करने के लिये उनके हिस्से का विज्ञापन, विज्ञापन नियमावली के अनुसार नियत बजट के आधार पर जारी करना चाहिये।

राष्ट्रीय सचिव डॉ. अनन्त शर्मा ने कहा कि सभी पदाधिकारी अपने अपने राज्यों से प्रकाशित होने वाले अखबारों की समस्याओं को बिन्दुवार लिखकर भेजें। उनका समाधान करवाने हेतु केन्द्र सरकार व सम्बन्धित राज्यों की सरकारों को पत्र प्रेषित किया जायेगा।

सम्मेलन में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय सचिव प्रवीण पाटिल, कोषाध्यक्ष भगवती चन्दोला, संगठन सचिव अतुल दीक्षित, किरि रांगहेंग, उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष श्याम सिंह पंवार राजस्थान राज्य इकाई के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता, महाराष्ट्र राज्य इकाई अध्यक्ष प्रदीप कुलकर्णी, गुजरात राज्य इकाई अध्यक्ष मयूर बोरीचा, उड़ीसा राज्य इकाई अध्यक्ष चन्द्रकान्त सूतर, राष्ट्रीय कार्यपरिषद् के सदस्य एम. अरुणा, के. वेंकटेश रेड्डी, वेनुगोपाल, तारिका वेल्कर, के. परशुराम, अकरम खान सहित अनेक प्रकाशक मौजूद रहे। एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् के सम्मेलन में आन्ध्र प्रदेश राज्य के अध्यक्ष सेंडीरेड्डी कोण्डला राव ने उपस्थित प्रदेश अध्यक्षों को शॉल उढ़ाकर व स्मृतिचिन्ह भेंट कर एवं राष्ट्रीय परिषद् के सदस्यों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इसी दौरान राजस्थान राज्य इकाई, असम राज्य इकाई ने भी अतिथियों व पदाधिकारियों को सम्मानित किया।

एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् के सम्मेलन में छात्राओ ने उपस्थित जनों के स्वागत में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। 

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सेन कॉलेज में इनोवेशन सेल के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम “संकल्प: हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वोमेन” विषय पर कार्यशाला आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज में इनोवेशन सेल के तत्वावधान में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम संकल्प: हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वोमेन के १० दिवसीय अभियान के अंतर्गत किया

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चरणों में श्रद्धा पूर्वक पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर प्रबन्ध तंत्र के सचिव श्री पी के सेन, प्राचार्या प्रोफ़ेसर डॉ सुमन तथा राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती अनीता गुप्ता ने किया ।एंटी क्राइम ब्यूरो के चेयरमैन एडवोकेट रिजवान अली खान , महिला थाने की एस एच ओ कमर सुल्ताना, महिला कल्याण विभाग की काउंसलर मनोवैज्ञानिक डॉ राबिया सुल्ताना,श्रम विभाग तथा यूनिसेफ के टेक्निकल रिसोर्स पर्सन प्रतीक श्रीवास्तव,महिला कल्याण की जिला कोऑर्डिनेटर मोनिका यादव, महिला कल्याण विभाग की जेंडर स्पेशलिस्ट शैल शुक्ला तथा रागिनी श्रीवास्तव ने छात्राओं को अपने अपने विषय की जानकारी देते हुए हौसला बढ़ाया और बताया जीवन के संघर्ष में सरकार और महिला कल्याण मंत्रालय विभिन्न प्रकार से सहयोग के लिए तत्पर है । सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा एवं सहायता के लिये फ्री विधिक सहायता, पुलिस सहायता और अन्य सहायता योजनाएं संचालित की हैं जो तभी कारगर होंगी जब आपको उसकी जानकारी हो ।कार्यक्रम में १०० से अधिक छात्राओं ने जानकारी प्राप्त कर स्वयं का संबल बढ़ाया और भविष्य में स्वयं एवं अन्य महिलाओं की सुरक्षा में भागीदारी का संकल्प लिया ।कार्यक्रम में छात्राओं के अतिरिक्त महाविद्यालय की समस्त शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया ।डॉ प्रीति सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया और प्रो रेखा चौबे , प्रो गार्गी यादव प्रो अलका टंडन,कैप्टन ममता अग्रवाल डा रचना निगम डॉ शुभा,डॉ अनामिका और डॉ समीक्षा सिंह ने सक्रिय योगदान दिया।

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व्यक्तित्व विकास हेतु सॉफ्ट स्किल्स पर दो दिवसीय कार्यशाला” 10 और 11 सितंबर 2025”

भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर में लैंगिक संवेदनशीलता एवं महिला विकास प्रकोष्ठ के अंतर्गत, 10 और 11 सितंबर को सर्वपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज सभागार में “व्यक्तित्व विकास हेतु सॉफ्ट स्किल्स पर दो दिवसीय कार्यशाला” संपन्न।कार्यशाला के पहले दिन व्यावसायिक और व्यक्तिगत सफलता के लिए छात्रों में संचार कौशल को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। सत्र का विषय था “बोलें, नेतृत्व करें और प्रेरित करें: नेतृत्व और प्रबंधन के लिए संचार कौशल में निपुणता प्राप्त करें।”

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि वक्ता प्रो. नीता जैन, प्राचार्य विनय जे. सेबेस्टियन, उप-प्राचार्य प्रो. श्वेता चांद और जीएसडब्ल्यूडीसी समन्वयक प्रो. विभा दीक्षित द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद आदरणीय प्राचार्य ने अपने संबोधन में करियर की सफलता और व्यक्तिगत विकास के लिए प्रभावी संचार के महत्व पर अपने विचार साझा किए। जीएसडब्ल्यूडीसी समन्वयक, विभा दीक्षित ने सॉफ्ट स्किल कार्यशाला के विषय और उद्देश्यों तथा छात्रों के लिए इसके अपेक्षित परिणामों के बारे में जानकारी दी। मुख्य सत्र सीएसजेएम विश्वविद्यालय और क्राइस्ट चर्च कॉलेज की पूर्व प्राचार्य और डीन प्रो. नीता जैन ने दिया, जिन्होंने व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास में प्रभावी संचार, आत्मविश्वास निर्माण और नेतृत्व के महत्व पर बहुमूल्य अंतर्दृष्टि साझा की। उन्होंने इंटरैक्टिव गतिविधियों और रोल-प्ले सत्रों के माध्यम से टीम निर्माण, निर्णय लेने और समस्या-समाधान जैसे नेतृत्व और प्रबंधन कौशल पर विस्तार से बताया। डॉ. रुक्मणी देवी ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा और मनीषी त्रिवेदी ने प्रभावी ढंग से सत्र का संचालन किया।

कार्यशाला में काफी संख्या में छात्रों और शिक्षकों ने बहुत उत्साह से सहभागिता की और आत्म-अभिव्यक्ति और नेतृत्व रणनीतियों के लिए आयोजित व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लिया। उपस्थित कुछ संकाय सदस्यों में प्रोफेसर सुजाता चतुर्वेदी, ज्योत्सना लाल, मीतकमल, एस.पी. सिंह, फिरदौस कटियार, आशीष ओमर और छात्र टीम में वर्षा, छवि, सृष्टि और सुप्रिया शामिल हुए

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