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क्राइस्ट चर्च कॉलेज ने राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस मनाया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 3 अगस्त : क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस का आयोजन भारत के महान वैज्ञानिक एवं आधुनिक रसायन विज्ञान के अग्रदूत आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय की 165वीं जयंती के उपलक्ष्य में किया गया। यह कार्यक्रम केमिकल सोसायटी 2026–27 के तत्वावधान में विभागीय सेमिनार कक्ष में प्रातः 11:00 बजे से 12:00 बजे तक आयोजित हुआ।

कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रो. मीत कमल के स्वागत उद्बोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि, प्राचार्य, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत किया। इसके पश्चात मोहम्मद मुनीर द्वारा मुख्य अतिथि को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

रसायन विज्ञान विभाग की प्रभारी प्रो. अनिंदिता भट्टाचार्य ने शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए केमिकल सोसायटी के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों की घोषणा की तथा उन्हें वैज्ञानिक सोच और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।

इसके उपरांत प्रो.ज्योत्सना लाल ने राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस के महत्व एवं केमिकल सोसायटी की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। साथ ही, आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय के जीवन, उनके वैज्ञानिक योगदान तथा भारतीय रसायन विज्ञान के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर आधारित एक लघु वीडियो भी प्रस्तुत किया गया।

कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन ने अपने संबोधन में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और नैतिक मूल्यों के महत्व पर बल देते हुए विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में समर्पण एवं जिज्ञासा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि प्रो. अमर श्रीवास्तव, प्राचार्य, हर सहाय कॉलेज, कानपुर का परिचय डॉ. धनंजय डे ने कराया। अपने प्रेरणादायक व्याख्यान में प्रो. श्रीवास्तव ने आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय के अमूल्य योगदान, समकालीन वैश्विक चुनौतियों के समाधान में रसायन विज्ञान की भूमिका तथा युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उनका व्याख्यान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा अत्यंत सराहा गया।

व्याख्यान के पश्चात प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक रसायन विज्ञान एवं अनुसंधान से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न रखे।

कार्यक्रम का समापन प्रो. श्वेता चन्द द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, प्राचार्य, शिक्षकों, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह आयोजन रसायन विज्ञान विभाग की वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा देने तथा आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय के प्रेरणादायी योगदान को स्मरण करने की प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।

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एक देश, अनेक शिक्षा प्रणालियाँ !

क्या समान अवसर केवल संविधान की किताबों तक सीमित है?
यदि भारत एक है, तो क्या उसके बच्चों की शिक्षा भी कम-से-कम एक जैसी नहीं होनी चाहिए?विशेष संपादकीय | खोजी विश्लेषण

भारत को अक्सर “विविधताओं का देश” कहा जाता है। भाषाएँ अलग हैं, पहनावे अलग हैं, संस्कृतियाँ अलग हैं और जीवन-शैली भी अलग-अलग है। यही विविधता भारत की सबसे बड़ी शक्ति मानी जाती है। लेकिन एक प्रश्न ऐसा है, जिसे हमने शायद कभी गंभीरता से पूछने की कोशिश ही नहीं की—क्या शिक्षा भी विविधता का विषय होनी चाहिए, या समान अवसर का?

आज भारत का हर बच्चा चाहे राजस्थान में जन्मा हो, बिहार में, गुजरात में, तमिलनाडु में या असम में—वह अंततः उसी भारत का नागरिक है। आगे चलकर वही बच्चा UPSC देगा, वही JEE और NEET देगा, वही सेना में भर्ती होगा, वही न्यायपालिका, प्रशासन, विज्ञान, उद्योग और राजनीति में अपनी जगह बनाएगा। राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ सबके लिए समान हैं, लेकिन उन प्रतियोगिताओं तक पहुँचने का रास्ता सबके लिए समान नहीं है। यही भारतीय शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा विरोधाभास है।

संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है। अनुच्छेद 21A प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार देता है। नीति-निर्देशक तत्व राज्य से अपेक्षा करते हैं कि वह समान अवसर उपलब्ध कराए। लेकिन व्यवहार में भारत की शिक्षा व्यवस्था अनेक परतों में बँटी हुई दिखाई देती है। कहीं राज्य बोर्ड, कहीं CBSE, कहीं ICSE, कहीं अलग-अलग क्षेत्रीय पाठ्यक्रम। परिणाम यह है कि एक ही कक्षा में पढ़ने वाले दो बच्चों का शैक्षणिक आधार केवल इसलिए अलग हो सकता है क्योंकि उनका जन्म अलग-अलग राज्यों में हुआ।

यहाँ प्रश्न यह नहीं है कि राज्यों को अपनी भाषा, संस्कृति या इतिहास पढ़ाने का अधिकार होना चाहिए या नहीं। होना चाहिए, और अवश्य होना चाहिए। भारत की विविधता का सम्मान लोकतंत्र की मूल भावना है। प्रश्न यह है कि क्या गणित, विज्ञान, संविधान, नागरिक शास्त्र, अर्थव्यवस्था, डिजिटल साक्षरता और बुनियादी जीवन-कौशल जैसे विषयों का न्यूनतम स्तर भी राज्य-राज्य में अलग होना चाहिए?

जब राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्नपत्र समान होता है, तब तैयारी की बुनियाद अलग क्यों है? यदि अंतिम दौड़ एक ही ट्रैक पर होनी है, तो शुरुआती रेखा अलग-अलग क्यों खींची गई है?

शिक्षा विशेषज्ञ वर्षों से इस ओर ध्यान दिलाते रहे हैं कि भारत में केवल पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी अत्यंत असमान है। कहीं प्रयोगशालाएँ हैं, कहीं केवल नाम मात्र की। कहीं प्रशिक्षित शिक्षक हैं, कहीं वर्षों से रिक्त पद। कहीं डिजिटल बोर्ड और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रयोगशालाएँ हैं, तो कहीं बच्चों के पास बैठने के लिए पर्याप्त बेंच तक नहीं। ऐसे में केवल “समान परीक्षा” की बात करना, समान अवसर की गारंटी नहीं बन जाता।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा सुधार की दिशा में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। बुनियादी साक्षरता, कौशल विकास, बहुभाषिकता और लचीले पाठ्यक्रम जैसे विचार स्वागतयोग्य हैं। लेकिन आज भी भारत में ऐसा कोई राष्ट्रीय न्यूनतम शैक्षणिक मानक नहीं है, जो यह सुनिश्चित करे कि देश के हर बच्चे ने कम-से-कम समान बुनियादी ज्ञान प्राप्त किया है। यही वह खाली स्थान है, जिस पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।

समस्या केवल पाठ्यक्रम की नहीं है। किताबें अलग, उनकी कीमतें अलग, निजी विद्यालयों की फीस अलग, यूनिफॉर्म की व्यवस्था अलग, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता अलग। कई स्थानों पर अभिभावकों को विद्यालय द्वारा निर्धारित विशेष दुकानों से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदनी पड़ती हैं। शिक्षा धीरे-धीरे अधिकार से अधिक बाज़ार का विषय बनती दिखाई देती है। यदि दो समान आय वाले परिवार अलग-अलग राज्यों में रहते हैं, तो संभव है कि उनके बच्चों की शिक्षा पर होने वाला खर्च और मिलने वाली गुणवत्ता दोनों अलग हों।

यहाँ एक महत्वपूर्ण आपत्ति भी सामने आती है। कई लोग कहते हैं कि भारत जैसा विविध देश एक समान शिक्षा व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर सकता। राज्यों की अपनी ऐतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक आवश्यकताएँ हैं। यह तर्क महत्वपूर्ण है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। वास्तव में किसी भी सुधार का उद्देश्य राज्यों की पहचान समाप्त करना नहीं होना चाहिए।

इसीलिए समाधान “One Nation, One Syllabus” नहीं, बल्कि One Nation, One Minimum Education Standard” हो सकता है।

इसका अर्थ यह नहीं कि तमिलनाडु राजस्थान का इतिहास पढ़ाए या राजस्थान के विद्यालय मलयालम पढ़ाएँ। इसका अर्थ यह है कि देश का प्रत्येक बच्चा, चाहे वह किसी भी बोर्ड में पढ़ता हो, कम-से-कम गणित, विज्ञान, संविधान, नागरिक शास्त्र, भारतीय इतिहास की मूल रूपरेखा, अर्थव्यवस्था, डिजिटल साक्षरता, पर्यावरण और जीवन-कौशल का एक समान राष्ट्रीय स्तर प्राप्त करे। इसके ऊपर राज्य अपनी भाषा, साहित्य, संस्कृति, भूगोल और स्थानीय इतिहास पढ़ाएँ। विविधता भी बचे और समान अवसर भी।

ऐसी व्यवस्था केवल छात्रों के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए लाभकारी होगी। इससे राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में आधारभूत असमानता कम होगी। राज्यों के बीच शैक्षणिक तुलना सरल होगी। शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन अधिक वस्तुनिष्ठ हो सकेगा। और सबसे महत्वपूर्ण—किसी बच्चे का भविष्य उसके जन्मस्थान से कम और उसकी प्रतिभा व मेहनत से अधिक निर्धारित होगा।

इस चर्चा में फीस का प्रश्न भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शिक्षा यदि अधिकार है, तो उसकी पहुँच भी समान होनी चाहिए। यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं कि देश के हर निजी विद्यालय की फीस एक जैसी हो, क्योंकि भूमि, वेतन और संचालन लागत अलग-अलग हैं। लेकिन यह अवश्य संभव है कि फीस निर्धारण के लिए पारदर्शी राष्ट्रीय मानक हों, मनमानी वृद्धि पर नियंत्रण हो और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए सहायता की प्रभावी व्यवस्था हो। शिक्षा का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, नागरिक बनाना होना चाहिए।

यूनिफॉर्म के प्रश्न पर भी बहस आवश्यक है। पूरे देश में एक जैसी पोशाक व्यावहारिक न हो, लेकिन कम-से-कम ऐसा ड्रेस कोड विकसित किया जा सकता है जो अनावश्यक आर्थिक बोझ कम करे। यूनिफॉर्म किसी एक विक्रेता से खरीदने की बाध्यता समाप्त हो और अभिभावकों को खुले बाज़ार से निर्धारित मानक के अनुसार वस्त्र खरीदने की स्वतंत्रता मिले। इससे शिक्षा से जुड़े अनेक छोटे-छोटे आर्थिक शोषण स्वतः समाप्त हो सकते हैं।

आज भारत “विश्वगुरु” बनने की आकांक्षा रखता है। लेकिन कोई भी राष्ट्र अपनी शिक्षा व्यवस्था से ऊपर नहीं उठ सकता। विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं ने पहले अपनी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया, उसके बाद विज्ञान, उद्योग और नवाचार में नेतृत्व प्राप्त किया। यदि भारत को वास्तव में ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनना है, तो सबसे पहले उसे अपने बच्चों के लिए समान प्रारंभिक अवसर सुनिश्चित करने होंगे।

यह लेख किसी राज्य के विरुद्ध नहीं है, किसी बोर्ड के विरुद्ध नहीं है और न ही किसी सरकार के विरुद्ध। यह केवल एक प्रश्न उठाता है—क्या भारत के बच्चों को कम-से-कम समान बुनियादी शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए?

यदि उत्तर “हाँ” है, तो अब बहस केवल शिक्षा नीति पर नहीं, बल्कि शिक्षा समानता पर होनी चाहिए। शायद समय आ गया है कि देश National Minimum Education Standard” पर गंभीर राष्ट्रीय विमर्श शुरू करे—ऐसा मानक जो राज्यों की विविधता का सम्मान करे, लेकिन बच्चों के भविष्य में असमानता न पैदा करे।

क्योंकि अंततः प्रश्न केवल शिक्षा का नहीं है। प्रश्न उस भारत का है, जहाँ एक बच्चे की सफलता उसकी प्रतिभा और परिश्रम से तय हो—न कि उसके पिन कोड, बोर्ड या राज्य से। और शायद लोकतंत्र में इससे बड़ा प्रश्न कोई नहीं हो सकता।

लेखक :  सी एम जैन
संपर्क : +91 9408887777
 

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पीएम-अजय आदर्श ग्राम कंपोनेंट के तहत देश भर में 47,328 गांवों का चयन, तेलंगाना में 435 गांव

भारत सरकार अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अपने आदर्श ग्राम कंपोनेंट के तहत गांवों के एकीकृत विकास के माध्यम से प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) लागू कर रही है। इस योजना का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के कनवर्जेंस और प्रमुख विकास कमियों को दूर करके प्रमुख सामाजिक-आर्थिक संकेतकों का सैचुरेशन सुनिश्चित करना है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने राज्यसभा में श्री अनिल कुमार यादव मंडाडी को दिए एक लिखित जवाब में यह जानकारी साझा की। सदन को बताया गया कि पीएम-अजय के आदर्श ग्राम घटक के तहत देशभर में 47,328 गांवों का चयन किया गया है, जिनमें तेलंगाना के 435 गांव शामिल हैं। चयनित गांवों का राज्यवार विवरण सदन के पटल पर रख दिया गया है।

लिखित उत्तर में आगे कहा गया कि आदर्श ग्राम कंपोनेंट शिक्षा सहित 10 क्षेत्रों में 50 निगरानी योग्य सामाजिक-आर्थिक संकेतकों की पूर्णता के माध्यम से चयनित गांवों के एकीकृत विकास पर केंद्रित है। इन संकेतकों की बेसलाइन स्टेटस स्थापित करने के लिए एक नीड असेसमेंट सर्वे आयोजित किया जाता है। पहचानी गई कमियों को केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वय से या पीएम-अजय के तहत सहायता प्राप्त हस्तक्षेपों द्वारा दूर किया जाता है। राज्यों द्वारा की गई प्रगति को पीएमएजीवाई पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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सदन को यह भी सूचित किया गया कि इस योजना के अंतर्गत देशभर में 3,28,131 विकास कार्यों और 1,10,51,213 लाभार्थियों की पहचान की गई है। इनमें से अब तक 46,642 विकास कार्य पूरे हो चुके हैं, जिससे 47,59,399 लाभार्थी लाभान्वित हुए हैं।

तेलंगाना के संबंध में, लिखित उत्तर में कहा गया कि शिक्षा क्षेत्र के तहत 3,529 लाभार्थियों की पहचान की गई है, जिनमें से 472 लाभार्थियों को योजना के तहत लाभ प्राप्त हो चुका है।

थर्ड-पार्टी ऑडिट के संबंध में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए सदन को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पीएम-

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आईआईटी दिल्ली में आयोजित हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 का सफल समापन हुआ, जिसमें भारत के हथकरघा क्षेत्र के लिए प्रौद्योगिकी आधारित नवाचारों का प्रदर्शन किया गया

हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 – ‘‘बुनाई में नवाचार’’ का दूसरा संस्करण आईआईटी दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफआईटीटी) में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस हैकाथॉन में 2,500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्‍सा लिया, जिनमें से 280 प्रतिभागी देश भर से चयनित शीर्ष 100 टीमों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इनका उद्देश्य भारत के हथकरघा क्षेत्र के लिए प्रौद्योगिकी आधारित समाधान विकसित करना था।

इस हैकाथॉन ने नवप्रवर्तकों, शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों और हथकरघा विशेषज्ञों को करघे के आधुनिकीकरण, डिजाइन नवाचार, स्थिरता, बाजार पहुंच और बुनकरों की आजीविका से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया। चयनित टीमों ने उत्पादकता में सुधार, पारंपरिक शिल्प कौशल के संरक्षण और हथकरघा क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न विषयों पर अभिनव समाधान प्रस्तुत किए।

इस कार्यक्रम में वस्त्र मंत्रालय की विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीनाआईएएस, आईआईटी दिल्ली के वस्त्र और फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख डॉ. दीप्ति गुप्ता, आईआईटी दिल्ली पूर्व छात्र संघ के सचिव श्री पंकज कपाडिया और थिंकस्टार्टअप के सह-संस्थापक श्री संजीव शिवेश ने भाग लिया, जो हथकरघा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के सहयोगात्मक प्रयासों को प्रदर्शित करता है।

डॉ. एम. बीना ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत और आधुनिक प्रौद्योगिकी के बीच पूरक संबंध पर प्रकाश डाला।

‘‘हथकरघा हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक है, जबकि प्रौद्योगिकी भविष्य का प्रतिनिधित्व करती है। हथकरघा हैकाथॉन के माध्यम से, हम अपने बुनकर समुदाय को सशक्त बनाने के लिए इन दोनों क्षेत्रों को एक साथ ला रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि हथकरघा बुनाई में स्थिरता और चक्रीयता अंतर्निहित होती है और उन्होंने बुनाई प्रक्रियाओं, डिजाइन विकास और आधुनिक विपणन में नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय की प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें इंडियन हैंडमेड पोर्टल भी शामिल है, जो एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है और बुनकरों को बिना किसी मध्यस्थ के अपने उत्पादों को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करने और बेचने में सक्षम बनाता है।

डॉ. एम. बीना ने मैनुअल श्रम को कम करने, पारंपरिक बुनाई प्रक्रियाओं में वैज्ञानिक सटीकता को एकीकृत करने और बुनकरों की आजीविका को बढ़ाने वाले तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए आईआईटी और एनआईएफटी जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ संस्थागत साझेदारी के महत्व पर जोर दिया।

श्री पंकज कपाडिया ने इस अवसर पर कहा कि हथकरघा क्षेत्र को पुनर्जीवित करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डाला और पारंपरिक शिल्प कौशल और नवाचार के बीच सहयोग का स्वागत किया।

डॉ. दीप्ति गुप्ता ने कहा कि आईआईटी दिल्ली में स्थापित होने वाला आगामी हथकरघा प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र हथकरघा के साथ प्रौद्योगिकी के एकीकरण को मजबूत करेगा, जिससे हस्तनिर्मित वस्त्रों की विशिष्टता को संरक्षित करते हुए मानकीकरण और उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा। वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से अगले सप्ताह इस केंद्र का उद्घाटन प्रस्तावित है।

श्री संजीव शिवेश ने फाइनलिस्ट टीमों को बधाई दी और उन्हें हथकरघा क्षेत्र के लिए नवोन्मेषी समाधान विकसित करना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही फाइनलिस्टों में उनके चयन को उचित सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

इस हैकाथॉन ने भारत के हथकरघा उद्योग को सुदृढ़ करने के लिए नवाचार, सहयोगात्मक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी आधारित पहलों को बढ़ावा देने के प्रति वस्त्र मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। युवा नवप्रवर्तकों को इस क्षेत्र के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करके, इस पहल का उद्देश्य उत्पादकता, स्थिरता और बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने के साथ-साथ देश की समृद्ध हथकरघा विरासत को संरक्षित करना भी है।

हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 के विजेताओं को चार विषयगत श्रेणियों में सम्मानित किया गया – बुनकरों की आजीविका और वित्तीय समावेशन, बाजार पहुंच और डिजिटल एकीकरण, स्थिरता और पर्यावरणीय प्रभाव, और डिजाइन और संचालन में नवाचार। विजेता समाधानों में बुनकरों की आजीविका के लिए एआई-सक्षम प्लेटफॉर्म, डिजिटल बाजार पहुंच उपकरण, पर्यावरण के अनुकूल रंगाई और निगरानी प्रणाली, और करघे के आधुनिकीकरण और डिजाइन के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार शामिल थे।

विजेता टीमों ने केसीजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, आईआईएचटी सलेम, आईआईटी मद्रास, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, श्री ईश्वर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कुमारगुरु कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, केएलबी आईआईएचटी हैदराबाद और स्टार्टअप सविन्या स्टूडियो जैसे विभिन्न कॉलेजों का प्रतिनिधित्व किया।

हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 का सफल समापन वस्त्र मंत्रालय के नवाचार को बढ़ावा देने, अकादमिक-उद्योग सहयोग को मजबूत करने और प्रौद्योगिकी-सक्षम और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी हथकरघा इकोसिस्‍टम के निर्माण के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत के बुनकरों के दीर्घकालिक विकास और समृद्धि का समर्थन करता है।

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सीबीए ने ‘ऑपरेशन वज्र’ के तहत बिहार में नकली दवाओं के अंतर-राज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया; मास्टरमाइंड गिरफ्तार

‘ऑपरेशन वज्र’ के तहत, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की मध्य प्रदेश यूनिट ने बिहार के गया और मसौढ़ी (पटना) में नकली दवाओं/ अवैध दवाओं के 8 गोदामों और एक अवैध विनिर्माण इकाई को जब्त किया है। इन जगहों का इस्तेमाल नशीले पदार्थों और अन्य दवाओं को अवैध रूप से बनाने और भंडारण करने के लिए किया जा रहा था।

यह 2025 में दर्ज अपराध की जांच में एक और बड़ी कामयाबी है। एक बड़े अनुवर्ती (फॉलो-अप) अभियान के दौरान बिहार के गया में चार अवैध गोदामों का भंडाफोड़ किया गया, जिसमें 68,200 ट्रामाडोल टैबलेट, 59,000 अन्य टैबलेट और कोडीन सिरप की 52,542 बोतलें जब्त की गईं।

लगातार जांच और तकनीकी व मानवीय खुफिया जानकारी जुटाने के आधार पर, सीबीएन ने 22 जुलाई 2026 को मुख्य आरोपी को सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी से महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिससे आगे बड़े पैमाने पर कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ।

16 से 27 जुलाई 2026 के बीच, सीबीएन की एमपी इकाई (नीमच) के निवारक अनुभाग (प्रिवेंटिव सेक्शन) ने पूरे बिहार में कड़ी निगरानी और क्षेत्रीय अभियान चलाए। जांच के दौरान पता चला कि फरार आरोपी ने गया के खानजहांपुर इलाके में गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए नशीले पदार्थों और नकली दवाओं को जमा करने के लिए फिर से अवैध गोदाम चलाना शुरू कर दिया था। कई दिनों तक उसकी गतिविधियों पर गुप्त रूप से नजर रखने के बाद, सीबीएन की टीम ने उसे सफलतापूर्वक पकड़ लिया।

आरोपी द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर, सीबीएऩ की टीम ने दो अपंजीकृत और बिना मंजूरी वाले गोदामों की तलाशी ली और गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए 21,373 ब्यूप्रेनोर्फिन इंजेक्शन एम्प्यूल बरामद किए। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में नकली और मिलावटी गैर-एनडीपीएस दवाएं भी ज़ब्त की गईं, जिनमें क्लैवम-625, पैन-40, बेटाडीन ऑइंटमेंट, एजिथ्रल और कई अन्य दवाएं शामिल थीं।

स्थानीय पुलिस की सहायता से किए गए बाद के अनुवर्ती अभियानों से शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित छह और अपंजीकृत और अनधिकृत गोदामों की पहचान की गई। इन परिसरों से पर्याप्त मात्रा में नकली और अनाधिकृत रूप से भंडार की गई गैर-एनडीपीएस दवाएं मिलीं। जब्त किए गए भंडार और सील किए गए गोदामों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बिहार राज्य औषधि प्रशासन को सौंप दिया गया।

सीबीएन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर, राज्य औषधि विभाग ने अवैध गोदामों से निम्नलिखित मात्रा में गैर-एनडीपीएस नकली दवाएं जब्त कीं:

  • टैबलेट/कैप्सूल – 439,774
  • इंजेक्शन/वायल/एम्प्यूल – 1,895
  • सिरप/बोतलें – 3,811
  • अन्य दवा उत्पाद (लोशन/ट्यूब/ड्रॉप्स, आदि) – 3,490

लगातार पूछताछ के दौरान, संदिग्धों ने आगे बताया कि उनके पहले गिरफ्तार किए गए एक साथी ने पटना के मसौढ़ी के पास एक फार्महाउस में गैर-कानूनी विनिर्माण इकाई बनाई थी, जहां बुप्रेनोरफिन और अन्य नशीले पदार्थों को गैर-कानूनी तरीके से बनाने के लिए मशीनरी और उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस जानकारी पर तुरंत कार्रवाई करते हुए, सीबीए की टीम ने स्थानीय पुलिस, राज्य औषधि विभाग और खाद्य विभाग के अधिकारियों की मदद से उस जगह पर संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान विनिर्माण से जुड़ी कई मशीनें, उपकरण, रसायन और आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट बरामद किए गए। पूरी गैर-कानूनी विनिर्माण इकाई को बंद कर दिया गया और एनडीपीएस अधिनिय, 1985 के प्रावधानों के तहत सभी मशीनरी, उपकरणों और संबंधित सामान को ज़ब्त कर लिया गया।

जांच से इस सिंडिकेट के काम करने के तरीके का भी पता चला है। आरोपियों ने कम आय वाले इलाकों में बिना किसी किराए के समझौते (टेनेंसी एग्रीमेंट) के जगह किराए पर ली, किसी भी तरह का डिजिटल रिकॉर्ड न बने, इसलिए किराए का भुगतान नकद में किया, और कानून लागू करने वाली एजेंसियों से बचने के लिए नकली पहचान दस्तावेजों के जरिए लिए गए मोबाइल कनेक्शन का इस्तेमाल किया।

इस कैलेंडर वर्ष में, सीबीएन एमपी इकाई ने अब तक 90 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें 3 अवैध लैब का भंडाफोड़ शामिल है और 121 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) संगठित ड्रग तस्करी सिंडिकेट को खत्म करने और नशीले पदार्थों व साइकोट्रोपिक पदार्थों के अवैध विनिर्माण, भंडारण और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कानून को सख्ती से लागू करने तथा भारत में दवाओं के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने के अपने पक्के संकल्प को दोहराता है।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया; प्रत्येक नागरिक से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने आज ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रव्यापी वीडियो कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 28,000 से अधिक स्थानों से जुड़े एक करोड़ से अधिक युवा नागरिकों सहित विविध समूहों का औपचारिक रूप से स्वागत किया। इस अवसर के सामूहिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र के एक महत्वपूर्ण सामूहिक संकल्प का अवसर बताया। श्री मोदी ने कहा, “आज हम सभी देशवासी एक महान और महत्वपूर्ण संकल्प के लिए एकजुट हुए हैं।”

प्रधानमंत्री ने इस पहल की व्यापक प्रकृति को रेखांकित करते हुए कहा कि यह अभियान केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और पूरे राष्ट्र के व्यापक हितों से जुड़ा हुआ है।’विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए यह आवश्यक है कि देश की युवा पीढ़ी शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सशक्त, आत्मविश्वास से परिपूर्ण और नशे जैसी आत्म विनाशकारी आदतों से पूरी तरह मुक्त हो। श्री मोदी ने कहा, “आज जब राष्ट्र ने विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है, तब यह आवश्यक है कि देश का युवा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे, आत्मविश्वास से भरपूर हो और नशे जैसी विनाशकारी आदतों से हमेशा दूर रहे।”

अभियान की शुरुआत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि यह पहल पिछले वर्ष पवित्र भूमि काशी से एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक स्पष्टता, आध्यात्मिक ऊर्जा और गहरे सांस्कृतिक समर्पण के अनूठे समन्वय से प्रेरित इस अभियान का व्यापक विस्तार हुआ है। श्री मोदी ने कहा, “काशी घोषणा के तहत 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठनों और अनेक गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सहयोग से शुरू हुई यह जन कल्याणकारी पहल अब सफलतापूर्वक एक राष्ट्रीय परियोजना बन गई है।”

प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि “विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान” का शुभारंभ, प्रधानमंत्री के विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण के केंद्र में हमेशा भारत के युवाओं को रखा है और उन्हें अमृत काल की प्रेरक शक्ति के रूप में देखा है।

इस विजन से प्रेरित होकर सरकार ने युवाओं को स्वयंसेवा, नेतृत्व, मार्गदर्शन और राष्ट्र सेवा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए मेरा युवा भारत (MY Bharat) को एकल खिड़की मंच के रूप में स्थापित किया है, जिसके माध्यम से देशभर के 2.23 करोड़ से अधिक युवा जुड़े हैं। लाल किले से प्रधानमंत्री द्वारा नशा मुक्त भारत के आह्वान का उल्लेख करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि मेरा युवा भारत (MY Bharat) निरंतर युवा भागीदारी के माध्यम से इस मिशन को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि 100 सप्ताह की कार्य योजना और प्रमुख आध्यात्मिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श के माध्यम से तैयार काशी घोषणा ने मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध देशव्यापी जन आंदोलन की नींव रखी है। अभियान के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जन भागीदारी ने स्वच्छ भारत, फिट इंडिया और कई अन्य राष्ट्रीय अभियानों को जन आंदोलन की सफलता में परिवर्तित किया है, उसी प्रकार “विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान” भी लाखों-करोड़ों भारतीय युवाओं को स्वस्थ, नशा मुक्त और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, 26 राज्यों के राज्यपालों और 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस राष्ट्रव्यापी अभियान में भाग लिया।

नशा विरोधी शपथ लेने वाले लाखों युवाओं की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके नशामुक्त जीवन जीने के संकल्प और अपने विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा समुदायों में नशा मुक्त जीवन का संदेश सक्रिय रूप से प्रसारित करने के प्रयासों की प्रशंसा की। अभियान की महत्वाकांक्षी 100 सप्ताह की कार्य योजना का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि प्रत्येक आगामी रविवार को कला, संस्कृति, खेल और ध्यान से संबंधित विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिससे नए प्रतिभागियों को लगातार जोड़ा जा सकेगा।

श्री मोदी ने कहा, “आने वाले 100 रविवार निश्चित रूप से पूरी तरह नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 सशक्त कदम साबित होंगे।”

छात्रों, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सदस्यों और मेरा युवा भारत (MY Bharat) के स्वयंसेवकों की विशाल ऑनलाइन सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं द्वारा प्रदर्शित जागरूकता, संवेदनशीलता और गंभीर प्रतिबद्धता पर गर्व व्यक्त किया।

युवा पीढ़ी को भारत की ‘अमृत पीढ़ी’ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी ऊर्जा, कल्पनाशक्ति और प्रतिभा वर्ष 2047 तक देश के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

श्री मोदी ने कहा, “देश के उज्ज्वल भविष्य और अपने स्वयं के जीवन के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि आप स्वयं को नशे से पूरी तरह मुक्त रखें।”

संशोधन के बाद यह संस्करण PIB राजभाषा शैली के अनुरूप है। इसमें तकनीकी शब्दावली, सरकारी भाषा और मूल अंग्रेजी अर्थ का मिलान कर दिया गया है।

नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के विनाशकारी प्रभावों की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने आज के युवाओं की स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, खेल और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों का उल्लेख किया और चेतावनी दी कि नशे की लत किस प्रकार एकाग्रता को भटकाती है तथा सपनों को नष्ट कर देती है। परिवारों पर पड़ने वाले इसके गंभीर दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इससे माता-पिता के सपने टूटते हैं और बुजुर्गों को प्रतिदिन पीड़ा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने समाज पर पड़ने वाले इसके व्यापक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, “जब किसी परिवार या समाज में यह विनाश होता है, तो पूरे राष्ट्र की समग्र शक्ति भी कमजोर हो जाती है।”

युवाओं को नशीले पदार्थों की भ्रामक प्रकृति से आगाह करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नशीले पदार्थों से मिलने वाला क्षणिक नशे का प्रभाव अंततः उनके करियर और पारिवारिक जीवन के लिए स्थायी नुकसान का कारण बनता है। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक गुरुओं के गहन ज्ञान, जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं का भी उल्लेख शामिल है, का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ने ऐतिहासिक रूप से चेतना को प्रभावित करने वाले पदार्थों को स्वीकार नहीं किया है। श्री मोदी ने कहा, “हमें किसी भी परिस्थिति में नशे को किसी भी प्रकार की सामाजिक स्वीकृति नहीं देनी चाहिए।”

नशे की लत से मुक्ति के लिए उपलब्ध व्यापक सहायता प्रणालियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सामाजिक सहयोग, योग, ध्यान और आधुनिक पुनर्वास केंद्र नशे की आदत को दूर करने में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने परिवारों से सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी गलत चिंताओं के बजाय चिकित्सा सहायता को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने घरों में खुले संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देने की अपील की, ताकि संवेदनशील बच्चे नशे के जाल में फंसने से बच सकें। श्री मोदी ने कहा, “यदि कोई युवा गलती से नशे की लत में पड़ गया है, तो इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि उसके सभी रास्ते हमेशा के लिए बंद हो गए हैं।”

शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े लोगों से विशेष अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपने नियमित पाठ्यक्रम में नशीले पदार्थों के खतरों से संबंधित चर्चाओं को सक्रिय रूप से शामिल करें और अपने परिसरों में नशा विरोधी विशेष अभियान शुरू करें। नशे की लत से उबर रहे लोगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाज से उनके प्रति सम्मान और दूसरा अवसर देने का आह्वान किया तथा उनके अतीत से जुड़े कलंक को पूरी तरह अस्वीकार करने की बात कही। श्री मोदी ने कहा, “नशे की लत से संघर्ष कर बाहर आने वाले युवा कमजोर नहीं होते; वे सच्चे योद्धा होते हैं, जिनका अद्भुत साहस ही उनकी वास्तविक पहचान है।”

अपने संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री ने युवाओं को आश्वस्त किया कि इस महत्वपूर्ण लड़ाई में सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने देश भर में नशीले पदार्थों के खिलाफ की गई अभूतपूर्व कड़ी कार्रवाई, हजारों करोड़ रुपये मूल्य की जब्ती और नशीले पदार्थों के तस्करों तथा कारोबारियों के खिलाफ बढ़ती गिरफ्तारियों का उल्लेख किया। युवा पीढ़ी की दृढ़ता पर अटूट विश्वास व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह राष्ट्रीय अभियान अत्यंत सफल होगा। श्री मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि हमारे युवा नशे से मुक्त रहकर अपनी ऊर्जा की रक्षा करेंगे और विकसित भारत के संकल्पों को आगे बढ़ाएंगे।”

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भारत की राष्ट्रपति ने पीबीजी सोल्जरेथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज, 2 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित समारोह में राष्‍ट्रपति के अंगरक्षक रेजिमेंट द्वारा आयोजित, पीबीजी सोल्जरेथॉन को वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मिजोरम के राज्‍यपाल, जनरल (सेवानिवृत्‍त) डॉ. वी.के. सिंह भी उपस्‍थित थे। जनरल सिंह इस पहल के संरक्षक हैं। राष्ट्रपति ने इस अवसर की स्‍मृति में एक विशेष डाक आवरण का भी विमोचन किया। यह दौड़ (रेस) दिल्ली छावनी स्‍थित करियप्पा परेड ग्राउंड में आयोजित की गई थी।

‘सैनिकों के लिए दौड़ें, सैनिकों के साथ दौड़ें’ की संकल्‍पना पर आधारित ‘सोल्जरेथॉन’ सामान्‍य जनों और सशस्त्र बलों के बीच संबंधों को सुदृढ़ करने का एक विशिष्‍ट मंच है। ‘वास्‍तविक नायक – भारत के सशस्त्र बलों का समर्थन’ थीम पर आधारित यह आयोजन हमारे सैनिकों के समर्पण, साहस और बलिदान को सम्मान अर्पित करता है और नागरिकों को इस बात के लिए प्रोत्‍साहित करता है कि वे इसमें सक्रियतापूर्वक भाग लेकर उनके प्रति एकजुटता दिखाएं।

सोल्जरेथॉन रेस तीन श्रेणियों में आयोजित की जाती है – 3 किमी, 5 किमी और 10 किमी। सोल्जरेथॉन से प्राप्‍त राशि का उपयोग सशस्‍त्र बलों के पैराप्लेजिक रिहैबिलिटेशन सेंटर की सहायता करने और लड़ाई में हताहत हुए सैनिकों के परिवारजनों के कल्याण, आदि के लिए किया जाता है। पीबीजी सोल्जरेथॉन का उदेश्य इस बल के घोड़ों और सैनिकों की सहायता करना है।

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जवाहर नवोदय विद्यालय, कानपुर नगर में कक्षा-6 प्रवेश हेतु ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि 07 अगस्त तक बढ़ी*

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर  (जिला सूचना कार्यालय) नगर, दिनांक 02 अगस्त, 2026* पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सरसौल, कानपुर नगर के प्रभारी प्राचार्य आर. के. सिंह ने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा-2027 के अंतर्गत कक्षा-6 में प्रवेश हेतु ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर 07 अगस्त, 2026 कर दी गई है। ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे निर्धारित तिथि तक अपना ऑनलाइन आवेदन पूर्ण कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न की जाएगी। प्रथम चरण में अभ्यर्थी को राज्य, जनपद, विकास खंड, विद्यालय का नाम, वास्तविक पता, अभ्यर्थी का नाम, अभिभावक का मोबाइल नंबर तथा जन्मतिथि सहित आवश्यक विवरण दर्ज करना होगा। इसके पश्चात पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त यूजर आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से द्वितीय चरण की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी।
द्वितीय चरण में अभ्यर्थी का नवीनतम पासपोर्ट आकार का फोटो, हस्ताक्षर, माता-पिता के हस्ताक्षर तथा कक्षा-5 में अध्ययनरत होने का विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा निर्गत प्रमाण-पत्र वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। सभी विवरण एवं आवश्यक अभिलेख सफलतापूर्वक अपलोड होने के बाद आवेदन पत्र का प्रिंट सुरक्षित रख लेना चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रवेश हेतु अभ्यर्थी की जन्मतिथि 01 मई, 2015 से 31 जुलाई, 2017 (दोनों तिथियां सम्मिलित) के मध्य होनी चाहिए। अभ्यर्थी www.navodaya.gov.in तथा https://cbseitms.rcil.gov.in/nvs/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा शनिवार, 28 नवम्बर, 2026 को आयोजित की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें, जिससे किसी भी प्रकार की तकनीकी असुविधा से बचा जा सके। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी एवं अभिभावक उपरोक्त वेबसाइटों का अवलोकन कर सकते हैं।

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डी जी कॉलेज में नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानन्द गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर में “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत : संकल्प अभियान” का आयोजन को सफलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु प्रेरित करना था। इस अवसर पर “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसमें प्रो रुचिमिता पांडे ने युवाओं को नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।

अभियान के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों जैसे मेडिटेशन सत्र, जागरूकता कार्यक्रम, कला प्रतियोगिता , मेडिटेशन, खेलकूद एवं नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस अभियान के शुभारंभ का सजीव प्रसारण छात्राओं ने उत्साहपूर्वक देखा तथा नशामुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं एवं उपस्थित जनसमूह को यह शपथ दिलाई गई कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करेंगी तथा अपने परिवार एवं समाज को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगी। इस अवसर पर “Say No to Drugs, Say Yes to Life” तथा “युवा शक्तिशाली बनेगी, विकसित भारत गढ़ेगी” जैसे प्रेरणादायक संदेशों का प्रसार किया गया। 

कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन डॉ. संगीता सिरोही (कार्यक्रम अधिकारी, एन.एस.एस.) के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. वंदना निगम तथा निदेशक (स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम) प्रो. अर्चना वर्मा तथा कार्यालय अधीक्षक कृष्णेन्द्र श्रीवास्तव का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, माय भारत वॉलंटियर्स, एन.सी.सी. इंचार्ज प्रो. शुभ्रा राजपूत, प्रेंजर प्रभारी प्रो. स्वाति सक्सेना, डॉ ज्योत्सना पांडे, डॉ पूजा श्रीवास्तव, डॉ कुमुद लता, डॉ उमा अवस्थी, डॉ अंजना श्रीवास्तव, डॉ साधना सिंह, डॉ सुषमा शर्मा, डॉ वंदना द्विवेदी, डॉ पिंकी द्विवेदी, डॉ दीपाली सक्सेना, समस्त एनएसएस समिति एवं सांस्कृतिक समिति का विशेष योगदान सराहनीय रहा।

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दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार ग्वालियर में भारत का पहला दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (टीएमजेड) स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे

भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (डीओटी) और मध्य प्रदेश सरकार 30 जुलाई 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में भारत के पहले दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (टीएमजेड) के प्रथम चरण की स्थापना के लिए मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेंगे।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी सहित अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।

ग्वालियर में भारत के पहले दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र की स्थापना देश के घरेलू दूरसंचार विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस पहल का उद्देश्य निवेश आकर्षित करके, नवाचार को बढ़ावा देकर, स्वदेशी डिजाइन और विनिर्माण को प्रोत्साहित करके और अगली पीढ़ी के दूरसंचार उत्पादों और समाधानों के विकास में तेजी लाकर दूरसंचार उपकरणों और संबद्ध प्रौद्योगिकियों के लिए विश्व स्तरीय विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र से दूरसंचार उपकरण निर्माताओं, प्रौद्योगिकी कंपनियों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और दूरसंचार मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य हितधारकों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के पर्याप्त अवसर भी उत्पन्न होंगे, क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ेगी और भारत दूरसंचार विनिर्माण और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर से ग्वालियर में टीएमजेड चरण-1 की स्थापना की दिशा में सहयोग के ढांचे को औपचारिक रूप दिया जाएगा, जिससे भारत की दूरसंचार विनिर्माण और प्रौद्योगिकी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में केंद्र-राज्य साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।

इस कार्यक्रम में भारत सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और दूरसंचार क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी और हितधारक एक साथ आएंगे।

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