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भारत 12 से 17 अप्रैल, 2027 तक नई दिल्ली में आईसीएआर-सीजीआईएआर विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह 2027 की मेजबानी करेगा; इसमें 5,000 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है

सीजीआईएआर और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने आज नई दिल्ली में 12 से 17 अप्रैल, 2027 तक सीजीआईएआर विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह के आयोजन की घोषणा की। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के अंतर्गत आईसीएआर और सीजीआईएआर द्वारा किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम में दुनिया भर के शोधकर्ता, किसान, सरकारों के प्रतिनिधि, स्टार्टअप और व्यावसायिक संस्थान एक साथ शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में उन नवाचारों पर विचार-विमर्श किया जाएगा, जो पहले से ही किसानों तक पहुंच रहे हैं और उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां इन नवाचारों का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

भारत में इस आयोजन की मेजबानी स्वाभाविक है। आईसीएआर दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणालियों में से एक का नेतृत्व करता है और इसके वैज्ञानिक पांच दशकों से भी अधिक समय से सीजीआईएआर के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वर्तमान में सीजीआईएआर के दस अनुसंधान केंद्र भारत में फसलों, जल, पशुधन, मत्स्य पालन, पोषण और नीतिगत विषयों पर कार्य कर रहे हैं।

भारत के कृषि विज्ञान क्षेत्र का सीमाओं से परे भी प्रभाव है। अर्द्ध शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआईएसएटी) द्वारा संरक्षित और साझा किए गए भारत के मूंगफली के एक नमूने ने ऐसी किस्मों के विकास में योगदान दिया है, जिनकी खेती अब मलावी, युगांडा, मोजाम्बिक और जाम्बिया में की जा रही है। हैदराबाद स्थित कृषि में दक्षिण-दक्षिण सहयोग उत्कृष्टता केंद्र एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों के साथ सफल कृषि नवाचारों को साझा कर रहा है।

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने भारत और सीजीआईएआर के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी ने पांच दशकों से अधिक समय से देश में कृषि अनुसंधान एवं विकास को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि सीजीआईएआर एक अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान साझेदारी है, जिसके अंतर्गत 15 अनुसंधान केंद्र 100 से अधिक देशों में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि सीजीआईएआर का वैश्विक कृषि प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान है और भारत के साथ, विशेष रूप से आईसीएआर के माध्यम से यह सहयोग फसल सुधार, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियों का आधार बना है।

डॉ. जाट ने हरित क्रांति के बाद से भारत में कृषि क्षेत्र में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीआईएमएमवाईटी, आईआरआरआई और आईसीआरआईएसएटी सहित अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग ने भारत की खाद्य उत्पादन क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। खाद्यान्न की कमी और आयात पर निर्भर रहने वाले देश से भारत आज एक प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक देश के रूप में उभरा है।

उन्होंने कहा कि सीजीआईएआर विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह 2027 अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने तथा वैज्ञानिक ज्ञान, प्रौद्योगिकियों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को सुगम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।

डॉ. जाट ने कहा कि भारत की प्राथमिकता दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देना और अपनी सफल कृषि नवाचारों को विशेष रूप से अफ्रीकी देशों सहित अल्पविकसित देशों के साथ साझा करना होगा। उन्होंने जलवायु अनुकूल कृषि, डिजिटल कृषि एवं एग्रीस्टैक, कृषि मशीनीकरण, मोटे अनाज (श्री अन्न), प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

डॉ. जाट ने कहा कि इस आयोजन में कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला से जुड़ी उभरती प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। इनमें जलवायु अनुकूलता, जल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, स्टार्टअप, युवाओं एवं महिलाओं की भागीदारी तथा कृषि विज्ञान और नवाचारों के प्रभावी संचार में मीडिया की भूमिका शामिल हैं।

सीजीआईएआर की कार्यकारी प्रबंध निदेशक डॉ. इस्माहेन एलौफ़ी ने कहा कि सीजीआईएआर विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह 2027 का उद्देश्य भारत और सीजीआईएआर के बीच दीर्घकालिक साझेदारी की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ कृषि सहयोग के अगले 50 वर्षों के लिए भविष्य की कार्ययोजना तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारत ने दर्शाया है कि मजबूत राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान प्रणाली बड़े पैमाने पर उपलब्धियां हासिल कर सकती है। भारत के बीज और ज्ञान पहले से ही अफ्रीका और एशिया के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। अप्रैल में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में इस आदान-प्रदान को और आगे बढ़ाने तथा उन क्षेत्रों पर सामूहिक रूप से विचार करने का प्रयास किया जाएगा, जहां विज्ञान और अधिक योगदान दे सकता है।

डॉ. इस्माहेन एलौफ़ी ने मानव कल्याण में सुधार और खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाने में विज्ञान एवं वैज्ञानिकों के योगदान को मान्यता देने के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने अप्रैल 2025 में केन्या के नैरोबी में आयोजित सीजीआईएआर विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह के पहले संस्करण की सफलता का उल्लेख करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भारत में आयोजित होने वाला यह संस्करण वैश्विक साझेदारियों को और मजबूत करेगा तथा कृषि क्षेत्र की उभरती चुनौतियों के समाधान विकसित करने के लिए विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाएगा।

आईसीआरआईएसएटी के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा, “खाद्यान्न की कमी वाले देश से एक प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक देश तक भारत की कृषि यात्रा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाती है। सीजीआईएआर विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह 2027 के माध्यम से हमारा उद्देश्य भारत की कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों को प्रदर्शित करना, अपने नवाचारों को दुनिया के साथ साझा करना और कृषि एवं खाद्य प्रणालियों की उभरती चुनौतियों के समाधान सह-विकसित करने के लिए वैश्विक स्तर पर हुई प्रगति से सीखना है।”

सीजीआईएआर का पहला विज्ञान सप्ताह अप्रैल 2025 में केन्या के नैरोबी में आयोजित किया गया था, जहां सीजीआईएआर ने अपना वर्तमान अनुसंधान कार्यक्रम शुरू किया था। नई दिल्ली में आयोजित होने वाला संस्करण विज्ञान को जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणामों में बदलने और साझेदारियों के माध्यम से दक्षिण-दक्षिण सहयोग को आगे बढ़ाने पर केंद्रित होगा। इस आयोजन में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि अनुसंधान और नवाचार के योगदान पर भी विचार किया जाएगा।

इस कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा और इसमें भाग लेने वाले वक्ताओं की घोषणा आने वाले महीनों में की जाएगी।

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ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने खनन से निकले कबाड़ का उपयोग कर युद्धपोत का मॉडल तैयार किया और इसके माध्यम से भारतीय नौसेना के प्रति आभार व्यक्त किया

कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी और कोयला मंत्रालय के अधीन आने वाली ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के प्रति भारतीय नौसेना की अटूट वचनबद्धता के सम्मान में शुक्रवार को 1 बंगाल एनसीसी नौसेना इकाई, ग्रुप मुख्यालय एनसीसी कोलकाता ‘सी’ को युद्धपोत का एक विशेष मॉडल भेंट किया। कोयला खनन मशीनों के बेकार पुर्जों से बना यह मॉडल, कोयला खनिकों एवं नौसेना कर्मियों के बीच सेवा, समर्पण और राष्ट्र-निर्माण की उस साझा भावना का प्रतीक है, जो उन्हें एक-दूसरे से जोड़ती है।

ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. सतीश झा के मार्गदर्शन में तैयार किया गया यह मॉडल कंपनी में चलाए जा रहे ‘विशेष अभियान 6’ के तहत ‘कचरे से कंचन’ पहल का हिस्सा है। इसे ईसीएल की नियामतपुर केंद्रीय कार्यशाला में बेहद बारीकी से डिजाइन और तैयार किया गया है। यह कलाकृति ईसीएल के कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता और कारीगरी को दर्शाती है। इसके माध्यम से औद्योगिक कबाड़ को राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक में बदलने के साथ-साथ संसाधनों के पुनः उपयोग और पर्यावरणीय स्थिरता को भी बढ़ावा दिया गया है।

ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, कार्यात्मक निदेशकों और पूरे ईसीएल परिवार की ओर से कंपनी के सुरक्षा प्रमुख मेजर एस. तिवारी ने नियामतपुर केंद्रीय कार्यशाला की प्रबंधक (मानव संसाधन) सुश्री निश्चल सोनी के साथ भारतीय नौसेना के कमोडोर सीजर बसु तथा कमांडर संजीव सरन को यह मॉडल भेंट किया। यह प्रतिकृति राष्ट्र की सेवा में सशस्त्र बलों के समर्पण और योगदान के लिए आभार व्यक्त करने के प्रतीक के रूप में दी गई।

यह युद्धपोत मॉडल उन 10 विशिष्ट मॉडलों में से एक है, जिन्हें ईसीएल ने ‘विशेष अभियान 6’ के दौरान ‘कचरे से कंचन’ पहल के तहत तैयार किया है। इनमें से प्रत्येक प्रतिकृति जनहित से जुड़े किसी न किसी विषय पर प्रतीकात्मक संदेश देता है। बेकार पड़ी सामग्रियों को रचनात्मक रूप देकर तैयार किए गए ये मॉडल दर्शाते हैं कि औद्योगिक कचरे का उपयोग नवाचार और सार्थक अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में भी किया जा सकता है।

यह पहल कचरा प्रबंधन के नवाचारपूर्ण तरीकों, पुनर्चक्रण और संसाधनों के संरक्षण हेतु ईसीएल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही, यह भी बताती है कि कंपनी के कर्मचारियों का तकनीकी कौशल और रचनात्मकता किस प्रकार चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को बढ़ावा देते हुए पर्यावरण संरक्षण व सतत विकास में योगदान दे सकते हैं।

यह प्रस्तुति ईसीएल के कोयला खनिकों की ओर से भारतीय नौसेना के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अनूठा माध्यम है। यह सेवा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय गौरव के मूल्यों को एक सूत्र में पिरोती है। कोयला खदानों की गहराइयों से लेकर समुद्र के विशाल विस्तार तक, राष्ट्रसेवा की भावना दोनों को एक साझा बंधन में जोड़ती है।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और रेल मंत्री वाराणसी से नई दिल्ली के बीच नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे

भारतीय रेलवे वाराणसी और नई दिल्ली के बीच नई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू करने जा रहा है। इन सेवाओं के शुरू होने से आधुनिक रात्रिकालीन रेल सेवाओं का नेटवर्क और विस्तारित होगा। इससे दोनों शहरों के बीच संपर्क बेहतर होगा और यात्रियों को लंबी दूरी की रात की यात्रा के लिए आधुनिक, आरामदायक और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव कल वाराणसी से वाराणसी-नई दिल्ली के बीच नई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस सेवाओं को हरी झंडी दिखाएंगे।

जनवरी 2026 में हावड़ा-गुवाहाटी कॉरिडोर और उसकी वापसी यात्रा पर वंदे भारत स्लीपर सेवाओं की शुरुआत के बाद, ये नई सेवाएं इस अगली पीढ़ी की ट्रेन के लाभों का अन्य क्षेत्रों में विस्तार करेंगी। बेहतर ऑन-बोर्ड सुविधाओं, उन्नत सुरक्षा सुविधाओं और सोच-समझकर डिजाइन किए गए स्लीपर आवास के साथ, भारतीय रेलवे लंबी दूरी के रात्रिकालीन सफर को अधिक आरामदायक, विश्वसनीय और यात्री-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रही है।

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वाराणसी-नई दिल्ली: प्रमुख धार्मिक केंद्र और राष्ट्रीय राजधानी के बीच बेहतर संपर्क

वाराणसी और नई दिल्ली के बीच वंदे भारत स्लीपर सेवा शुरू होने से भारत के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में शामिल वाराणसी का राष्ट्रीय राजधानी से संपर्क और मजबूत होगा।

वाराणसी में पूरे साल श्रद्धालु, देशी-विदेशी पर्यटक, विद्यार्थी और दूसरे क्षेत्रों से आने वाले लोग पहुंचते हैं। नई दिल्ली के साथ रात की बेहतर रेल कनेक्टिविटी से धार्मिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक, प्रशासनिक और पर्यटन संबंधी कार्यों के लिए यात्रा करने वाले लोगों को अधिक सुविधा मिलेगी।

यह ट्रेन वाराणसी से चलकर प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद होते हुए नई दिल्ली पहुंचेगी। ये स्टेशन महत्वपूर्ण शहरी केंद्रों को जोड़ते हैं और आसपास के जिलों को भी रेल संपर्क उपलब्ध कराते हैं। इससे आधुनिक रेल यात्रा की सुविधा अधिक से अधिक यात्रियों तक पहुंच सकेगी।

यह ट्रेन वाराणसी से रात 8 बजकर 50 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर नई दिल्ली पहुंचेगी। वापसी में यह नई दिल्ली से रात 9 बजकर 40 मिनट पर रवाना होकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर वाराणसी पहुंचेगी।

मौजूदा शिव गंगा एक्सप्रेस की तुलना में वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस वाराणसी से नई दिल्ली की यात्रा में 55 मिनट और नई दिल्ली से वाराणसी की यात्रा में 35 मिनट की बचत करेगी। इससे दोनों दिशाओं में यात्रियों को रात के सफर के लिए तेज विकल्प मिलेगा।

यह सेवा सप्ताह में छह दिन चलेगी। वाराणसी से चलने वाली ट्रेन शुक्रवार को और नई दिल्ली से चलने वाली ट्रेन शनिवार को नहीं चलेगी। रात के समय यात्रा और अगली सुबह गंतव्य पर पहुंचने की सुविधा से यात्रियों को अपने समय का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी। यह सेवा विशेष रूप से श्रद्धालुओं, पर्यटकों, विद्यार्थियों, कामकाजी लोगों और उन परिवारों के लिए उपयोगी होगी, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बीच अक्सर यात्रा करते हैं।

 

वंदे भारत स्लीपर: रात की रेल यात्रा को मिलेगा नया अनुभव

लंबी दूरी की यात्राओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में आधुनिक तकनीक, बेहतर सुरक्षा प्रणालियों और यात्रियों की सुविधा से जुड़ी कई विशेषताएं शामिल की गई हैं। इसका डिजाइन लंबी दूरी की यात्रा के दौरान आरामदायक माहौल उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इसमें सोने की व्यवस्था, साफ-सफाई, सुरक्षा, सुगमता और यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है।

प्रमुख विशेषताएं

ऊर्जा और प्रदर्शन

– ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम।

– डिब्बों के नीचे स्थापित प्रणोदन प्रणाली।

– उन्नत वायुगतिकीय डिजाइन, अधिक सहज गति और झटकों से मुक्त सफर।

डिजाइन और सुविधाएं

– ऑस्टेनिटिक स्टेनलेस स्टील से निर्मित डिब्बे, जो EN15227 दुर्घटना सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं।

– पूरी तरह सीलबंद लचीला गैंगवे, जिसमें त्वरित रिलीज की व्यवस्था है।

– केंद्रीय रूप से नियंत्रित एकल पल्ले वाले स्वचालित स्लाइडिंग प्लग दरवाजे।

– डिब्बों के भीतर शोर कम करने और ध्वनि अवरोध की विशेष व्यवस्था।

– प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष एलईडी प्रकाश व्यवस्था।

– सेंसर आधारित इंटरकम्युनिकेशन डोर

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सुरक्षा और संरक्षा

– EN45545 HL3 अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुरूप।

– डिब्बों के अंतिम हिस्सों में अग्निरोधी दरवाजे।

– ट्रेन टक्कर से बचाव प्रणाली (टीसीएएस)।

– आपदा प्रबंधन के लिए विशेष लाइट।

– धुआं और आग का पता लगाने वाली प्रणाली।

– यात्रियों की सुरक्षा और निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे।

– यात्रियों के लिए आपातकालीन अलार्म पुश बटन।

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आराम और सुविधाएं

– वैक्यूम निकासी प्रणाली वाले आधुनिक, आरामदायक और दुर्गंध रहित शौचालय।

– दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष बर्थ और शौचालय।

– पर्याप्त सामान रखने की जगह के साथ आधुनिक यात्री सुविधाएं।

– तीन पिन वाले चार्जिंग सॉकेट और स्विच के साथ एकीकृत बीआरएल।

– टाइप-ए और टाइप-सी यूएसबी चार्जिंग पोर्ट।

– पीएपीआईएस आधारित चालक, गार्ड और यात्रियों के बीच संचार प्रणाली।

– प्रथम वातानुकूलित श्रेणी में गर्म पानी के साथ शॉवर की सुविधा।

– एक्सेस प्वाइंट नेटवर्क के साथ वाई-फाई राउटर।

– चालक केबिन में वातानुकूलन और रेलकर्मियों के लिए शौचालय।

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इन सुविधाओं के माध्यम से भारतीय रेलवे का लक्ष्य आधुनिक इंजीनियरिंग को यात्रियों के आराम, सुरक्षा और परिचालन दक्षता के साथ जोड़ना है।

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भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष अरुणाचल प्रदेश में 31 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026 तक सार्वजनिक पूजा के लिए रखे जाएंगे

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय अरुणाचल प्रदेश सरकार, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फ़ेडरेशन (आईबीसी) और राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली के साथ मिलकर 31 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026 तक अरुणाचल प्रदेश में शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों की एक प्रदर्शनी आयोजित कर रहा है। इस प्रदर्शनी में बौद्ध धर्म और उसकी विरासत के तीन महत्वपूर्ण केंद्रों — तवांग, बोमडिला और नामसाई को शामिल किया जाएगा, जिससे भक्तों और आम लोगों को पवित्र अवशेषों को श्रद्धांजलि देने का मौका मिलेगा।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत 31 अक्टूबर 2026 को ऐतिहासिक गादेन नामग्याल ल्हात्से (तवांग मठ) में इस प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में भाग लेने वाले हैं। इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश सरकार के जाने-माने प्रतिनिधि, बौद्ध संघ के सम्मानित सदस्य, बौद्ध संस्थानों के प्रतिनिधि, भक्त और अन्य गणमान्य लोग शामिल होंगे।

यह प्रदर्शनी पवित्र अवशेषों के गहरे आध्यात्मिक महत्व और भारत के बौद्ध सांस्कृतिक माहौल में अरुणाचल प्रदेश के खास स्थान को देखते हुए आयोजित की जा रही है। यह प्रदर्शनी देश की बौद्ध विरासत की सुरक्षा, बचाव एवं उसके प्रसार, और भारत तथा विदेश में बौद्ध समुदायों के साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने के लिए भारत सरकार की लगातार प्रतिबद्धता को भी दिखाता है।

तवांग मठ

तवांग में समारोहपूर्वक आवागमन और उद्घाटन

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में अभी रखे पवित्र अवशेष 30 अक्टूबर 2026 की रात को संग्रहालय में रस्मों के साथ अपनी पवित्र यात्रा शुरू करेंगे। इसके बाद उन्हें अरुणाचल प्रदेश ले जाने के लिए वायु सेना पालम हवाई अड्डे ले जाया जाएगा।

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, ये पवित्र अवशेष 31 अक्टूबर 2026 की सुबह पालम हवाई अड्डे से एक खास भारतीय वायु सेना विमान से निकलेंगे और हेलीकॉप्टर से तवांग ले जाने से पहले गुवाहाटी के वायु सेना हवाई अड्डा बोरझार पहुंचेंगे।

बोरझार पहुंचने पर, पवित्र अवशेषों को पूरे धार्मिक समारोह और श्रद्धा के साथ लिया जाएगा। इसके बाद उन्हें स्थापना और उद्घाटन समारोह के लिए तवांग मठ ले जाया जाएगा, जो 31 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:00 बजे से 11:30 बजे के बीच तय है।

एक और उद्घाटन समारोह 1 नवंबर 2026 को तय है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू मुख्य अतिथि होंगे। इसमें पवित्र अवशेषों के संबंधित प्रदर्शन और प्रदर्शनी का उद्घाटन भी शामिल है।

इसी समय तिब्बती बौद्ध परंपरा का एक खास त्योहार ल्हाबाब ड्यूचेन भी मनाया जाएगा, जो भगवान बुद्ध के स्वर्ग से नीचे उतरने की याद में मनाया जाता है। इस तरह, इस प्रदर्शनी में धार्मिक रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक विरासत और लोगों की भागीदारी को आध्यात्मिक रूप से एक सार्थक माहौल दिया जाएगा।

पवित्र अवशेषों को लाने-ले जाने और लगाने की योजना उनकी पवित्रता, सुरक्षा और बचाव की ज़रूरतों पर खास ध्यान देते हुए बनाई जा रही है। संस्कृति मंत्रालय ज़रूरी संचालन इंतज़ामों के लिए रक्षा मंत्रालय, भारतीय वायुसेना, अरुणाचल प्रदेश सरकार, राष्ट्रीय संग्रहालय और दूसरी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है।

बोमडिला मठ

प्रदर्शनी कार्यक्रम: तवांग, बोमडिला और नामसाई

पवित्र अवशेष इन जगहों पर आम लोगों के दर्शन के लिए उपलब्ध होंगे:

तारीख कार्यक्रम स्थल कार्यक्रम
31 अक्टूबर 2026 गादेन नामग्याल ल्हात्से, तवांग मठ आगमन, औपचारिक स्वागत और उद्घाटन समारोह
1–7 नवंबर 2026 तवांग मठ सार्वजनिक दर्शन और प्रदर्शनी
8–13 नवंबर 2026 टीजीएल मठ (लोअर गोम्पा), बोमडिला सार्वजनिक दर्शन और प्रदर्शनी
14–20 नवंबर 2026 गोल्डन पैगोडा, नामसाई सार्वजनिक दर्शन और प्रदर्शनी
21 नवंबर 2026 नामसाई-तेज़ू-नई दिल्ली पवित्र अवशेषों की औपचारिक विदाई और राष्ट्रीय संग्रहालय में वापसी

8 नवंबर को, पवित्र अवशेषों को हेलीकॉप्टर से तवांग से रूपा और उसके बाद सड़क के रास्ते बोमडिला ले जाया जाएगा। यात्रा कार्यक्रम में निचली गोम्पा में स्थापना से पहले ऊपरी गोम्पा में औपचारिक स्वागत शामिल है, जहां उद्घाटन समारोह दोपहर 3:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच तय है।

14 नवंबर को, पवित्र अवशेषों को बोमडिला से सड़क के रास्ते रूपा ले जाया जाएगा और उसके बाद हेलीकॉप्टर से नामसाई के नालुंग हेलीपैड ले जाया जाएगा। उन्हें गोल्डन पैगोडा ले जाया जाएगा, जहां सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच स्थापना और उद्घाटन समारोह तय है।

नामसाई में सार्वजनिक दर्शन खत्म होने के बाद, पवित्र अवशेषों को 21 नवंबर 2026 को तेजू हवाईअड्डे और वायु सेना हवाई अड्डे पालम होते हुए नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय वापस लाया जाएगा।

अवशेषों को लाने का समय और आने-जाने का इंतज़ाम संचालन, मौसम और सुरक्षा की बातों पर निर्भर रहेगा।

नामसाई पगोडा

पवित्र पिपराहवा अवशेष: एक असाधारण पुरातात्विक और आध्यात्मिक विरासत

अरुणाचल प्रदेश ले जाए जा रहे ये पवित्र अवशेष उत्तर प्रदेश में आज के सिद्धार्थनगर जिले के पिपराहवा से आए हैं, जो प्राचीन कपिलवस्तु और भगवान बुद्ध की शाक्य परंपरा से जुड़ा एक पुरातात्विक स्थल है।

बौद्ध धर्म के पुरातात्विक इतिहास में पिपराहवा का खास स्थान है। 1898 में, विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने उस जगह पर एक स्तूप की खुदाई की और हड्डियों के टुकड़े तथा कीमती चीज़ों वाले अवशेष खोजे, जिससे इस खोज के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर दुनिया भर का ध्यान गया।

इसके बाद, भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण ने पुरातत्वविद् श्री के. एम. श्रीवास्तव की देखरेख में 1971 और 1977 के बीच और खुदाई की। इसकी गहराई में खुदाई करने पर दो और ताबूत मिले जिनमें भगवान बुद्ध से जुड़े पुराने अस्थि अवशेष थे।

एक बड़े ताबूत में हड्डियों के 12 पवित्र टुकड़े थे, जबकि छोटे ताबूत में 10 थे। इस तरह इन खुदाई के दौरान कुल 22 पवित्र अवशेष मिले। इनमें से 20 राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और दो भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में सुरक्षित हैं।

ये अवशेष, जिनमें पुरानी आस्थिकी (ऑस्टियोलॉजिकल) चीज़ें हैं, बहुत ही दुर्लभ माने जाते हैं और बौद्ध समुदाय इन्हें बहुत धार्मिक सम्मान देते हैं। इनके ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के साथ-साथ इनका गहरा आध्यात्मिक महत्व भी है, जो अवशेषों की पूजा की पुरानी बौद्ध परंपरा में निहित है।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद, स्तूपों में उनके अवशेषों को रखने की परंपरा बौद्ध भक्ति की एक अहम पहचान बन गई। सदियों से, ये पवित्र जगहें तीर्थयात्रा, धार्मिक शिक्षा और सांस्कृतिक लेन-देन के केंद्र बन गईं।

यह प्रदर्शनी भक्तों को इस पुरानी आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ने का मौका देती है, साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए पुरातात्विक और धार्मिक विरासत को बचाकर रखने के महत्व से सबको अवगत कराती है।

अरुणाचल प्रदेश: बौद्ध परंपराओं का मिलन स्थल

अरुणाचल प्रदेश भारत के बौद्ध सांस्कृतिक भूगोल में एक खास जगह रखता है। इसके मठ, धार्मिक संस्थाएं और जीवित परंपराएं बड़े हिमालयी क्षेत्र और बौद्ध एशिया के दूसरे हिस्सों के साथ ऐतिहासिक जुड़ाव दिखाती हैं।

राज्य के पश्चिमी और उत्तरी हिस्से, जिसमें तवांग और पश्चिमी कामेंग शामिल हैं, खास तौर पर हिमालयी बौद्ध धर्म की महायान और वज्रयान परंपराओं से जुड़े हैं।

तवांग मठ को गादेन नामग्याल ल्हात्से के नाम से भी जाना जाता है। यह मठों की शिक्षा, धार्मिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक निरंतरता का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। बोमडिला के मठ भी इसी तरह इस क्षेत्र की आध्यात्मिक और कलात्मक परंपराओं को बनाए रखते हैं।

पूर्वी अरुणाचल प्रदेश में, खासकर नामसाई और आस-पास के इलाकों में, ताई खामती और दूसरे बौद्ध समुदायों की थेरवाद परंपराएं भारत की अलग-अलग तरह की बौद्ध विरासत का एक और ज़रूरी पहलू दिखाती हैं।

इसलिए, तवांग, बोमडिला और नामसाई में होने वाली यह प्रदर्शनी अलग-अलग बौद्ध परंपराओं को दिखाने वाले समुदायों तक पवित्र अवशेषों को पहुंचाएगी, जो राज्य में बौद्ध धर्म की विविधता और साझा आध्यात्मिक जड़ को दिखाएगी।

इसके धार्मिक महत्व के अलावा, इस पहल से अरुणाचल प्रदेश की बौद्ध विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ने, सांस्कृतिक लेन-देन को बढ़ावा मिलने और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से जुड़े शांति, करुणा, अहिंसा और सद्भाव जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बौद्ध विरासत के प्रति भारत सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, केंद्र सरकार ने देश की बौद्ध विरासत के संरक्षण, सुरक्षा, प्रचार और अंतरराष्ट्रीय प्रसार के लिए पहल की है।

इन कोशिशों में बौद्ध स्मारकों और पवित्र चीज़ों का बचाव, तीर्थयात्रा के आधारभूत ढांचे का विकास, बौद्ध छात्रवृति और सांस्कृतिक लेन-देन के लिए मदद, ज़रूरी विरासत की चीज़ों को वापस लाना और पवित्र अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का आयोजन शामिल है।

सरकार का नज़रिया भारत की सभ्यता की विरासत को सुरक्षित रखने के महत्व को समझता है, साथ ही उन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों को भी मज़बूत करता है जो भारत को दुनिया भर के बौद्ध समुदायों से जोड़ते हैं।

हाल ही में एक बड़ी बात यह हुई कि 1898 की ऐतिहासिक खोज से जुड़े पिपराहवा ज्वेल कलेक्शन को 2025 में भारत वापस लाया गया। कलेक्शन की प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय नीलामी के बाद, संस्कृति मंत्रालय ने कोशिशें कीं जिससे लगभग 127 साल बाद इसे वापस लाया जा सका।

इन कीमती चीज़ों की घर वापसी भारत की सांस्कृतिक विरासत के बचाव और उसे वापस लाने में एक ज़रूरी बदलाव थी। इससे पिपराहवा के इतिहास और शुरुआती बौद्ध परंपरा में लोगों की दिलचस्पी फिर से बढ़ी।

भारत सरकार की यह पहल “विकास भी, विरासत भी” के व्यापक सिद्धांत को भी प्रतिबिंबित करती है, जो विकास और विरासत के संरक्षण के पूरक महत्व पर बल देती है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी: भारत के बौद्ध सांस्कृतिक जुड़ाव को मज़बूत करना

भारत में अंतर्राष्ट्रीय अवशेष प्रदर्शनी के ज़रिए अपनी पवित्र बौद्ध विरासत को साझा करने की एक पुरानी परंपरा रही है, जिससे विदेश में रहने वाले भक्त सार्वजनिक पूजा में हिस्सा ले पाते हैं और दोस्ती के ऐतिहासिक रिश्ते मज़बूत होते हैं।

पिछले कई दशकों में, भारत सरकार की मदद से श्रीलंका, मंगोलिया, सिंगापुर, कोरिया और थाईलैंड जैसे देशों में प्रदर्शनियां हुई हैं।

हाल के सालों में, ऐसी कोशिशों से सांस्कृतिक कूटनीति और लोगों के बीच रिश्ते मज़बूत हुए हैं।

2022 में, मंगोलिया में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी ने भारत और मंगोलिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे बौद्ध संबंधों को फिर से पक्का किया है।

2024 में, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को उनके दो मुख्य शिष्यों, अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महामोग्गल्लाना के अवशेषों के साथ, बैंकॉक, चियांग माई, उबोन रत्चथानी और क्राबी में सार्वजनिक पूजा के लिए थाईलैंड ले जाया गया। इस प्रदर्शनी में लाखों भक्तों ने हिस्सा लिया।

2025 में, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को वेसाक उत्सव के दौरान वियतनाम ले जाया गया, जिसमें बड़े पैमाने पर लोगों ने हिस्सा लिया। रूस के कलमीकिया और भूटान में भी प्रदर्शनी लगाई गई, जिससे इन इलाकों में बौद्ध समुदायों के साथ भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रिश्ते और मज़बूत हुए।

फरवरी 2026 में, पवित्र देवनिमोरी अवशेषों को सार्वजनिक पूजा के लिए श्रीलंका ले जाया गया, जो दोनों देशों के बीच स्थायी बौद्ध संबंधों को दर्शाता है।

मई 2026 में, लद्दाख में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी ने हिमालयी क्षेत्र के भक्तों और मठवासी समुदायों को सामूहिक प्रार्थना और श्रद्धा का एक महत्वपूर्ण अवसर दिया।

इसके बाद, मई-जून 2026 के दौरान, सांची से अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महामोग्गल्लाना के पवित्र अवशेषों को उलानबटार के गंडन तेगचेनलिंग मठ में एक खास प्रदर्शनी के लिए मंगोलिया ले जाया गया।

ये पहल आपसी सम्मान, सांस्कृतिक समझ और आध्यात्मिक मेलजोल की भावना से अपनी बौद्ध विरासत को साझा करने के भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

अरुणाचल प्रदेश में यह प्रदर्शनी इस लगातार जुड़ाव में एक और ज़रूरी कदम है, जो राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित पवित्र विरासत को भारत के उत्तर-पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में बौद्ध समुदायों के करीब लाती है।

विशेष प्रदर्शनी: “पवित्र पिपराहवा का पता लगाना”

एक ज़रूरी पहल के तौर पर, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फ़ेडरेशन तवांग, बोमडिला और नामसाई में “पवित्र पिपराहवा की खोज: बुद्ध के पवित्र अवशेषों और उनकी खोज की कहानी” नाम की एक प्रदर्शनी लगाएगा।

यह प्रदर्शनी बौद्ध अवशेषों की पूजा के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को दिखाएगी, जिसकी शुरुआत सिद्धार्थ गौतम के जीवन और शिक्षाओं से होगी और उनके महापरिनिर्वाण के बाद पवित्र अवशेषों को स्थापित करने की परंपरा के विकास के बारे में बताया जाएगा।

यह पिपराहवा में हुई पुरातात्विक खोजों का पता लगाएगा, जिसमें 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा की गई खुदाई और उसके बाद भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण द्वारा की गई जांच शामिल है।

इस प्रदर्शनी में पिपराहवा ज्वेल्स की ऐतिहासिक यात्रा, पेप्पे फ़ैमिली कलेक्शन के साथ उनके जुड़ाव, 2025 में प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय नीलामी और उसके बाद की कोशिशों को भी दिखाया जाएगा, जिनकी वजह से वे भारत लौटे।

इस कहानी के ज़रिए, श्रद्धालुओं को पुरातात्विक अनुसंधान, धार्मिक परंपराओं, विरासत को बचाने और सांस्कृतिक रूप से ज़रूरी चीज़ों को वापस पाने के बीच के रिश्ते की समझ मिलेगी।

उम्मीद है कि यह प्रदर्शनी, खास तौर पर छात्रों, विद्वानों, युवा श्रद्धालुओं और भारत के बौद्ध इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले आम लोगों के लिए एक ज़रूरी शैक्षिक और सांस्कृतिक हिस्सा होगी।

“बौद्ध धर्म: हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे प्रसार” पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फ़ेडरेशन अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ मिलकर, 2 नवंबर 2026 को तवांग के कलावांगपो सम्मेलन कक्ष में “बौद्ध धर्म: हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे प्रसार” नाम से अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित करेगा।

इस सम्मेलन में भारत, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, मलेशिया, इंडोनेशिया और जर्मनी के जाने-माने भिक्षुओं, बौद्ध विद्वानों और प्रतिनिधिमंडलों के एक साथ आने की उम्मीद है।

यह बौद्ध शिक्षाओं के ऐतिहासिक प्रसार, मठों के विकास, बौद्ध ज्ञान परंपराओं के संरक्षण और बौद्ध दर्शन तथा नैतिक सिद्धांतों की आज के समय में प्रासंगिकता पर विद्वानों की बातचीत के लिए एक मंच देगा।

यह बातचीत तीन बड़े विषयों पर होगी:

1. महापरिनिर्वाण के बाद बुद्ध की विरासत को आगे बढ़ाना

इस मुख्य विषय में भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद बौद्ध धर्म की शिक्षाओं और तरीकों की निरंतरता की जांच की जाएगी। चर्चा में चार आर्य सत्य एक जीवित विरासत के रूप में, संरक्षण, और भौतिक संस्कृति, धार्मिक संस्थाओं का विकास, पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी के ज़रिए अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव और साझा सांस्कृतिक परंपराओं में बौद्ध धर्म के योगदान पर चर्चा होगी।

2. बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक और सैद्धांतिक निरंतरता

यह विषय बौद्ध धर्म की किताबों और मठों की परंपराओं के पीढ़ियों तक चलने वाले हस्तांतरण पर ध्यान केंद्रित करेगी, खासकर अरुणाचल प्रदेश के संदर्भ में। इसमें बौद्ध स्कूलों की बहुलता, एक जैसी सोच, भाषा और मतलब, पढ़ाने के तरीके, और कला एवं सांस्कृतिक उद्गार के ज़रिए बौद्ध विचारों को बचाने के बारे में भी बताया जाएगा।

3. बौद्ध धर्म और सही आजीविका

तीसरा मुख्य विषय बौद्ध नैतिक शिक्षाओं की आज के समय में क्या ज़रूरत है, इस पर बात करेगी। इसमें नालंदा की बौद्धिक परंपराओं और आधुनिक अकादमी के बीच संबंध, सांस्कृतिक पर्यटन एवं तीर्थयात्रा, कौशल विकास, निरंतर रोज़ी-रोटी, और बौद्ध धर्म, वैश्वीकरण और उपभोक्तावाद के बीच संबंध शामिल हैं।

यह सम्मेलन अरुणाचल प्रदेश के महत्व को बौद्ध विरासत के एक जीवंत केंद्र के रूप में दिखाएगा, जहां मठों, सामुदायिक प्रथाओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से अलग-अलग परंपराओं को बनाए रखा गया है।

इससे यह देखने का भी मौका मिलेगा कि बौद्ध विचार और नैतिक सिद्धांत शिक्षा, निरंतरता, सांस्कृतिक बचाव और शांतिपूर्ण साथ रहने पर आजकल की चर्चाओं में कैसे योगदान दे सकते हैं।

संस्थागत समन्वय और सार्वजनिक सुविधा

यह प्रदर्शनी संस्कृति मंत्रालय, अरुणाचल प्रदेश सरकार, राष्ट्रीय संग्रहालय, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फ़ेडरेशन और दूसरे संबंधित संस्थानों के मिलकर किए जा रहे प्रयासों से की जा रही है।

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय एक नोडल एजेंसी के तौर पर, पवित्र अवशेषों के तकनीकी और संरक्षण से जुड़े कामों के लिए ज़िम्मेदार है, जिसमें उनका सुरक्षित रख-रखाव, परिवहन, स्थापना और सुरक्षित वापसी शामिल है।

अरुणाचल प्रदेश सरकार संबंधित जगहों पर सुरक्षा, रिसेप्शन, आधारभूत संरचना, भीड़ प्रबंधन, मेडिकल सुविधाएं, सफ़ाई, स्थानीय परिवहन और सार्वजनिक सुविधा समेत सभी इंतज़ाम देख रही है।

इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फ़ेडरेशन धार्मिक तालमेल, आदरणीय भिक्षुओं की भागीदारी, जुड़े हुए सांस्कृतिक और ज्ञान के कार्यक्रम, पिपराहवा प्रदर्शनी और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को आसान बना रहा है।

अरुणाचल प्रदेश के मुश्किल इलाके और संचालन ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, पवित्र अवशेषों को ले जाने के लिए ज़रूरी विमान और हेलीकॉप्टर सपोर्ट के लिए रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना से संपर्क किया गया है।

प्रदर्शनी और उससे जुड़े कार्यक्रम के बारे में जानकारी फैलाने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ मीडिया कवरेज और सार्वजनिक पहुंच को समन्वित किया जा रहा है।

इन इंतज़ामों का मकसद यह पक्का करना है कि लोगों की पूजा सही तरीके से, सुरक्षित और इज्ज़तदार तरीके से हो, और साथ ही धार्मिक पवित्रता और बचाव के सबसे ऊंचे मानक भी बनाए रखें।

शांति, करुणा और सद्भाव का साझा संदेश

अरुणाचल प्रदेश में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी आध्यात्मिक सोच, सांस्कृतिक भागीदारी और भारत की बौद्ध विरासत के जश्न का एक महत्वपूर्ण मौका है।

पवित्र अवशेषों को तवांग, बोमडिला और नामसाई में लाने की इस पहल से अलग-अलग बौद्ध परंपराओं के भक्तों को सार्वजनिक पूजा में हिस्सा लेने और अपनी साझा आध्यात्मिक विरासत को फिर से पक्का करने का मौका मिलेगा।

साथ में होने वाली प्रदर्शनी और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, धार्मिक भक्ति को ऐतिहासिक समझ, छात्रवृति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जोड़कर इस मौके को और बेहतर बनाएगी।

यह प्रदर्शनी एक बड़े महत्व का संदेश भी देती है। भगवान बुद्ध की शिक्षाएं—करुणा, अहिंसा, ज्ञान, संयम और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व — आजकल एक-दूसरे से जुड़ती जा रही दुनिया में इंसानियत को कीमती रास्ता दिखाती रहती हैं।

पवित्र विरासत को बचाकर और उसे ज़िम्मेदारी से फैलाकर, भारत सरकार सांस्कृतिक समझ को मज़बूत करना, लोगों के बीच जुड़ाव को बढ़ावा देना और भगवान बुद्ध से जुड़े शांति और सद्भाव के हमेशा रहने वाले संदेश को बढ़ावा देना चाहती है।

यह प्रदर्शनी 21 नवंबर 2026 को पवित्र अवशेषों को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में औपचारिक रूप से वापस लाने के साथ खत्म होगी।

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डीआरआई ने उत्तर प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग्स बनाने वाली एक बड़ी गुप्त प्रयोगशाला का भंडाफोड़ किया; लगभग 1,100 किलोग्राम मादक पदार्थ और इसे बनाने वाले रसायन जब्त किए; दो लोग गिरफ्तार

राजस्‍व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने देश में अवैध सिंथेटिक ड्रग्स बनाने के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक दूर-दराज के गांव में मादक पदार्थ बनाने वाली एक बड़ी गुप्त प्रयोगशाला का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में लगभग 1,100 किलोग्राम मादक पदार्थ और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने रसायनों (प्रिकर्सर केमिकल्स) के साथ-साथ भारी मात्रा में निर्माण उपकरण जब्‍त किए गए हैं। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

डीआरआई अधिकारियों की एक बड़ी टीम ने पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर उत्‍तर प्रदेश एटीएस की मदद से 29 अक्टूबर 2026 तड़के एक संदिग्ध जगह पर संयुक्त अभियान चलाया।

तलाशी के दौरान वहां सिंथेटिक ड्रग्स बनाने की एक पूरी तरह से तैयार और चालू प्रयोगशाला मिली। इस दौरान लगभग 184 किलोग्राम अर्ध-निर्मित ड्रग्स, करीब 582 किलोग्राम कच्चे रसायन और मादक पदार्थ बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए गए।

कार्रवाई में आरोपियों के घरों की तलाशी लेने पर लगभग 15.4 किलोग्राम तैयार ‘मेथाक्वालोन’ बरामद हुआ। इसके साथ ही लगभग 153 किलोग्राम रसायन और निर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली एक मशीन भी मिली। एक अन्य आरोपी के ठिकाने की तलाशी लेने पर लगभग 168 किलोग्राम कच्चे रसायन की एक और बड़ी खेप जब्त की गई। इस गुप्त निर्माण इकाई से जुड़े दो लोगों को एनडीपीएस एक्ट, 1985 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है।

बड़ी मात्रा में तैयार मादक पदार्थ, अर्ध-तैयार सामग्री, कच्चे रसायनों और निर्माण उपकरणों की बरामदगी से पता चलता है कि यहाँ एक संगठित और अवैध मादक पदार्थ निर्माण का काम चल रहा था। इस कार्रवाई ने अवैध मादक पदार्थ के तंत्र को एक बड़ा झटका दिया है। एक बड़ी गुप्त निर्माण इकाई को नष्ट करके, अवैध आपूर्ति श्रृंखला से भारी मात्रा में मादक पदार्थ और कच्चे रसायनों को हटाकर और सिंथेटिक मादक पदार्थ के उत्पादन को रोककर इस तंत्र को कमजोर किया गया है।

डीआरआई नशीले पदार्थों और मनोतेजक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए गुप्त ड्रग निर्माण नेटवर्क को तोड़ने और अवैध मादक पदार्थ उत्पादन को बनाए रखने वाली सप्लाई चेन को बाधित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है

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माय भारत(MY Bharat) ने 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 23 ‘विकसित भारत युवा संवाद: अपना वोट जानें’ कार्यक्रम आयोजित किया

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के युवा कार्यक्रम विभाग के तहत, मेरा युवा भारत(माय भारत), ने आज 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के महाविद्यालयों एवं संस्थानों में ‘विकसित भारत युवा संवाद: अपना वोट जानें’ के 23 संस्करणों का आयोजन किया, जिनमें 5,481 युवाओं ने भाग लिया। इस पहल का उद्देश्य युवाओं, विशेष रूप से पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं में चुनावी जागरूकता को बढ़ावा देना तथा उन्हें मतदान के अधिकारों, चुनावी प्रक्रियाओं और नागरिक दायित्वों से परिचित कराकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जागरूक एवं सूचित भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना है।

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26 अक्टूबर से 5 नवंबर, 2026 तक 500 विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और संस्थानों में आयोजित किए जा रहे इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत 29 अक्टूबर तक 19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 50 युवा संवाद आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों में 11,787 युवाओं और 51 युवा आइकॉन्स ने भाग लिया है। इन सत्रों में युवाओं, जनप्रतिनिधियों और युवा आइकॉन्स को एक मंच पर लाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी, नागरिक दायित्वों तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की जाती है।

छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित डीसा कॉलेज में आयोजित इस कार्यक्रम में 250 से अधिक युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने मतदान के अधिकारों, चुनावी प्रक्रियाओं और नागरिकों के रूप में अपने दायित्वों पर चर्चा की। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों ने संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने, लोकतंत्र की रक्षा करने और जिम्मेदार नागरिकता को बढ़ावा देने की शपथ भी लिया।

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मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और युवा आइकन्स के साथ संवाद के माध्यम से लोकतांत्रिक भागीदारी और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया गया। बैतूल में केन्द्रीय मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने युवाओं से संवाद किया, जबकि युवा आइकन योगी देशमुख ने सक्रिय मतदान और लोकतंत्र में भागीदारी के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया। मंदसौर में सांसद श्री सुधीर गुप्ता ने प्रतिभागियों से बातचीत की। नर्मदापुरम में सांसद श्री दर्शन सिंह चौधरी और एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता सुश्री हर्षिता तोमर ने युवाओं से संवाद किया तथा मतदान के अधिकार और जागरूकतापूर्ण चुनावी भागीदारी के महत्व के बारे में बतलाया।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में, अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग में आयोजित कार्यक्रम में युवा आइकन श्री श्याम मोगर ने भाग लिया और मतदाता सूचियों तथा चुनावी जागरूकता के महत्व पर चर्चा की। संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों के सवालों के जवाब दिए गए, जिसके बाद लोकतांत्रिक शपथ दिलाई गई। त्रिपुरा के अगरतला में आयोजित कार्यक्रम में सांसद श्री राजीव भट्टाचार्य और युवा आइकन श्री शुभ्रजीत भट्टाचार्य शामिल हुए। विद्यार्थियों ने जनहित के मुद्दों, सिविल सेवाओं, नागरिक जिम्मेदारियों और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं की भूमिका पर चर्चा की तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।  

जम्मू-कश्मीर और गुजरात में आयोजित सत्रों में भी चुनावी जागरूकता और मतदाता पंजीकरण पर विशेष जोर दिया गया। कुपवाड़ा में उप-मंडल मजिस्ट्रेट डॉ. मुदासिर अहमद ने छात्रों से संवाद किया और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े उनके सवालों के जवाब दिए। कच्छ(भुज) में पहली बार मतदान करने वाले युवाओं ने मतदान से संबंधित मुद्दों पर निर्वाचन पंजीकरण प्रतिनिधि और युवा आइकन के साथ संवाद किया। साबरकांठा(हिम्मतनगर) में छात्रों ने सांसद श्रीमती शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया के साथ मतदान के अधिकार और चुनावी भागीदारी पर चर्चा की।

उत्तर प्रदेश में, शाहजहांपुर के छात्रों ने मतदान के अधिकारों, जिम्मेदारियों और चुनावी प्रक्रियाओं पर चर्चा की। गाजियाबाद में आयोजित कार्यक्रम में मतदाता पंजीकरण, विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद(वीबीवाईएलडी) प्रश्नोत्तरी और युवा संसद से संबंधित गतिविधियां शामिल रहीं। सुल्तानपुर में प्रतिभागियों ने भारतीय निर्वाचन आयोग और चुनावी भागीदारी पर आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में हिस्सा लिया। इसके साथ ही, ‘माय भारत’ के बैनर तले एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। बिहार के शेखपुरा में युवाओं ने लोकतांत्रिक शपथ ली और जिम्मेदार नागरिकता तथा लोकतांत्रिक भागीदारी पर आयोजित संवादात्मक चर्चा में भाग लिया।

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कुल 23 कार्यक्रमों का आयोजन छत्तीसगढ़ के रायपुर; मध्य प्रदेश के बैतूल, मंदसौर और नर्मदापुरम; गुजरात के साबरकांठा(हिम्मतनगर) और कच्छ(भुज); जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा; उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, शाहजहांपुर और सुल्तानपुर; तथा बिहार के शेखपुरा में किया गया। अन्य स्थानों में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर, बदायूं, देवरिया, सिद्धार्थनगर और सोनभद्र; अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग(बोमडिला); त्रिपुरा के अगरतला(पश्चिम त्रिपुरा); कर्नाटक के बेंगलुरु शहरी; केरल के कोट्टायम; तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली; तथा तेलंगाना के महबूबनगर और रंगा रेड्डी शामिल थे।

इस अभियान में लोकतांत्रिक शपथ और ‘अपने वोट को जानें’ ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम स्थलों पर ‘माय भारत'(MY Bharat) पंजीकरण और क्यूआर(QR) कोड-आधारित सुझावों का संकलन युवाओं की भागीदारी के लिए अतिरिक्त अवसर प्रदान करते हैं।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा में 14,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के राष्ट्रीय विकास परियोजना का शिलान्यास, उद्घाटन और लोकार्पण किया

प्रधानमंत्र नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के बनासकांठा में 14,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के राष्ट्रीय विकास परियोजना का शिलान्यास, उद्घाटन और लोकार्पण किया। नवरात्रि के ठीक बाद मां अम्बा की पवित्र धरती पर बोलते हुए, उन्होंने महिलाओं, बच्चों, किसानों और पशुपालकों के लिए कई पहलों का शुभारंभ किया, साथ ही देश भर के करोड़ों छोटे किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की नई किस्त भी जारी की।

किसानों और अन्नदाताओं को विकसित भारत के सबसे मज़बूत स्तंभ में से एक बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने लगातार उनकी भलाई और मजबूती को प्राथमिकता दी है, और 2013-14 के मुकाबले देश का कृषि बजट पांच गुना से ज्यादा बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि छोटे किसानों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गई है, गुजरात में 50 लाख से ज्यादा किसानों के अकाउंट में 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा किए गए हैं, जिसमें बनासकांठा के लाखों किसान परिवारों के लिए लगभग 50 करोड़ रुपये शामिल हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि आज लगभग 10 करोड़ किसानों के अकाउंट में 18 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम भेजी गई है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में सरकार की नीतियों से किसानों को 50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मिले हैं या उनकी बचत हुई है। उन्होंने पांच खास उदाहरणों में से पहला उदाहरण देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये सीधे छोटे किसानों के बैंक अकाउंट में भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि छोटे किसान खेती करने वाले समुदाय का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा हैं और हमारी सरकार ने ऐसे छोटे किसानों का ध्यान रखा और उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से मदद दी।

पिछले कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के बीच वैश्विक खाद की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की ओर इशारा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी किसान-केंद्रित सरकार ने किसानों को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “सरकार ने इस पर लगभग 16 लाख करोड़ रुपये खर्च किए।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने एमएसपी का अपना वादा पूरा किया है। पिछले 12 सालों में, गेहूं और धान के किसानों को एमएसपी के तौर पर 24 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मिले हैं।

पीएम फसल बीमा योजना के ज़रिए किसानों को मिले मज़बूत सुरक्षा कवच के बारे में बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में किसानों को फसल बीमा के मुआवजे के तौर पर 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मिले हैं, साथ ही पीएम-कुसुम योजना की बढ़ती भूमिका के जरिए सिंचाई का खर्च कम करने की लगातार कोशिशें भी की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत लगभग 12 लाख सोलर पंप बांटने से ज्यादा बिजली बनी है और लाखों किसानों का 80 करोड़ लीटर से ज्यादा डीजल खरीदने का खर्च बचा है, जिससे सिर्फ़ इन पांच बड़ी स्कीमों और फ़ैसलों से कुल आर्थिक या बचत 50 लाख करोड़ रुपये हो गई है। श्री मोदी ने कहा कि इन 50 लाख करोड़ रुपये ने देश के किसानों की आय बढ़ाई है और भारत में खेती की क्षमता को बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि खेती एक परंपरा भी है और भारतीय संस्कृति का एक जरूरी हिस्सा भी। सरकार ने पिछले 12 वर्षों में खेती और पशुपालन में विज्ञान और तकनीक को बड़े पैमाने पर शामिल किया है। उन्होंने मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड का उदाहरण दिया, जिसने किसानों को अपने खेतों के लिए जरूरी खाद की सही तरह और मात्रा तय करने में पहले होने वाली मुश्किलों को दूर किया और देश भर में खेती के तरीकों को आधुनिक बनाया। श्री मोदी ने कहा कि आज देश के किसानों के पास 26 करोड़ से ज्यादा मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड हैं।

यह मानते हुए कि मौसम का बदलता पैटर्न किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती है, प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को मौसम के हिसाब से नई बीज किस्में देने की लगातार कोशिश कर रही है। पीएम मोदी ने कहा, “हाल के सालों में, किसानों को बीजों की लगभग तीन हजार नई किस्में उपलब्ध कराई गई हैं।”

प्रधानमंत्री ने पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक जरूरी हिस्सा बताया, जिसमें ग्रामीण महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी है। उन्होंने पिछले एक दशक में डेयरी और पशुधन सेक्टर में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि अच्छी नस्ल के जानवरों से दूध की पैदावार बढ़ती है, जबकि समय पर टीकाकरण और मेडिकल इलाज से बीमारियों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। श्री मोदी ने कहा, “अगर पशु सेहतमंद है, तो मेरे पशुपालक भाई-बहनों की कमाई भी बढ़ेगी।”

देसी जानवरों के बचाव और साइंटिफिक ब्रीडिंग को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय गोकुल मिशन की भूमिका पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि बनासकांठा में नया बना रिसर्च सेंटर देसी गाय की नस्लों जैसे गिर, साहीवाल और कांकरेज के साथ-साथ मेहसाणा, मुर्रा और जाफराबादी जैसी भैंस की नस्लों की क्वालिटी को बचाकर और बेहतर बनाकर इस मिशन को मजबूत करेगा। यह कांकरेज नस्ल के लिए देश की पहली ऐसी सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि जब कोई किसान ज्यादा दूध देने वाली, कम देखभाल वाली, सेहतमंद गाय के गुण आने वाली पीढ़ियों को देना चाहता है, तो आईवीएफ जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकी उन बेहतर गुणों को बउलाव करने की संभावना को बढ़ा देती हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “पशुपालक किसान को इसका सीधा फायदा मिलेगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि जानवरों को खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाना एक बड़ी प्राथमिकता है, क्योंकि ऐसी बीमारियां जानवरों की सेहत और दूध की उत्पादन दोनों पर असर डालती हैं। उन्होंने देश भर में फ्री वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 150 करोड़ वैक्सीन डोज दी जा चुकी हैं, जिससे 8 करोड़ से ज्यादा किसानों के जानवरों को फ्री वैक्सीनेशन मिला है। श्री मोदी ने कहा, “इससे पशुपालकों पर पैसे का बोझ भी कम हुआ है।”

डेयरी उत्पादन पर इन दखल के साफ़ असर की ओर इशारा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 2013-14 में हर गाय या भैंस का रोज़ का औसत दूध 5 लीटर से बढ़कर आज लगभग 8 लीटर हो गया है, जिससे भारत दुनिया में सबसे तेज़ दूध उत्पादन दर हासिल कर रहा है और गांव के किसान परिवारों को फ़ायदा हो रहा है। पीएम श्री मोदी ने कहा, “भारत दूध उत्पादन में दुनिया में नंबर वन है।”

पशुपालकों को गाय के गोबर के साथ-साथ दूध से भी कमाई करने में मदद करने के सरकार के वादे को बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि गोबर और खेत के बचे हुए हिस्से से बायोगैस, बायो-सीएनजी और ऑर्गेनिक खाद बनाने के लिए बनास डेयरी जैसे संस्थानों की ज़रूरी मदद से इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया जा रहा है, जिसकी आज दो बायो-सीएनजी प्लांट की नींव रखी गई। उन्होंने पशुओं को स्वस्थ रखने, दूध की उत्पादन बढ़ाने और गोबर का पूरा इस्तेमाल पक्का करने के साफ़ मकसद पर जोर दिया। श्री मोदी ने कहा, “हम पशुपालन को सिर्फ़ एक परंपरा नहीं, बल्कि किसानों की इनकम बढ़ाने और गांवों को बेहतर बनाने का एक मजबूत जरिया बना रहे हैं।”

यह बताते हुए कि सरकार ने हाल के सालों में गांवों में खुशहाली पक्की करने के लिए एक ईमानदारी से काम किया है, प्रधानमंत्री ने फिशरीज सेक्टर के बड़े विस्तार और उसमें सहकारी समितियों को बढ़ावा देने की ओर इशारा किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “आपको यह सुनकर खुशी होगी कि भारत का सीफूड एक्सपोर्ट दोगुने से भी ज्यादा हो गया है।”

किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक और बड़ा जरिया मधुमक्खी पालन को बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 सालों में शहद का उत्पादन दोगुना हो गया है और इस मधु क्रांति को आगे बढ़ाने में महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स के बढ़ते योगदान की तारीफ़ की। श्री मोदी ने कहा, “आपको यह जानकर गर्व होगा कि हमारा देश प्राकृतिक शहद का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है।”

7 अक्टूबर, 2001 को शपथ लेने के बाद सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल की सेवा पूरी करने को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने हर गुजराती से मिले अपार प्यार और मार्गदर्शन को याद किया, उस समय जब उन्हें सरकारी दफ्तरों या आधिकारिक फाइलों के बारे में कुछ भी नहीं पता था। उन्होंने एक गरीब परिवार के व्यक्ति को, जिसके पुरखों ने कभी गांव का सरपंच बनने का सपना भी नहीं देखा था, पहले गुजरात और फिर देश की सेवा करने की जिम्मेदारी सौंपने के लिए लोगों का शुक्रिया अदा किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “और प्यार से भी ज्यादा, हर एक गुजराती ने मुझे सिखाया है और सही रास्ते पर ले गया है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे सिर्फ दो ही बातें जानते हैं – जनता की सेवा करके देश की सेवा करना और गुजरात के विकास के जरिए देश का विकास करना, बाकी सब कुछ उन्होंने लोगों से सीखा है। उन्होंने देश के लिए जो कुछ भी हासिल किया है, उसका श्रेय नागरिकों को दिया। श्री मोदी ने कहा, “इसके लिए मैं जिंदगी भर आपका एहसानमंद रहूंगा और जिंदगी के आखिरी पल तक आपकी सेवा में लगा रहूंगा।”

प्रधानमंत्री ने बुज़ुर्ग नागरिकों को 25 साल पहले इस इलाके में पानी और बिजली की बहुत ज्यादा कमी की याद दिलाते हुए कहा कि कैसे लोगों ने दोनों संसाधनों को बचाने की उनकी अपील पर ध्यान दिया और अपने हालात इतने अच्छे से बदल दिए कि वे पुरानी मुश्किलें अब सिर्फ़ यादों में रह गई हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “मैं आज फिर आपसे यही कहूंगा कि हमें पानी बचाना है, बिजली बचानी है।”

प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे नर्मदा के पानी और ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक तकनीक ने बनासकांठा को बदल दिया है और इसके आलू को दुनिया भर में मशहूर बना दिया है, साथ ही बनास डेयरी ने सहकारिता आंदोलन को काशी और उससे आगे तक बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि फ्रेंच फ्राइज़ बनाने वाले आलू प्लांट की क्षमता भी बढ़ा दी गई है ताकि आलू की ज्‍यादा खरीद हो सके। श्री मोदी ने कहा, “आलू के किसानों के लिए यह बहुत बड़ी सुविधा है।”

फल और सब्जी उगाने वालों के लिए चल रहे क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम के बारे में बताते हुए, जिसके तहत आज टमाटर, आलू, मिर्च, अंगूर, केला, प्याज, संतरा, अनार और कोको के लिए 12 क्लस्टर मंजूर किए गए, प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को नए बाग लगाने और पुराने बागों को फिर से जिंदा करने के लिए सब्सिडी मिल रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “उत्तर गुजरात में मिले दो क्लस्टर से बनासकांठा और साबरकांठा के आलू किसानों को बहुत फ़ायदा होगा।”

गुजरात के विकास के लिए आज शुरू किए गए या शुरू किए गए कई बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के बारे में बताते हुए, प्रधानमंत्री ने दो नई रेल सर्विस, अहमदाबाद-वाराणसी साबरमती एक्सप्रेस और मेहसाणा-बेचारजी-साबरमती मेमू ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के साथ-साथ अहमदाबाद मेट्रो के विस्तार और जीआईएफटी सिटी और एयरपोर्ट को जोड़ने वाले मेट्रो प्रोजेक्ट्स की नींव रखने पर जोर दिया। श्री मोदी ने कहा, “अहमदाबाद-मेहसाणा हाईवे अब चार-लेन से आठ-लेन का हो जाएगा।”

आज राज्य के बच्चों के लिए शुरू किए गए नए सोशल वेलफेयर इंफ्रास्ट्रक्चर पर बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि पूरे गुजरात में 4,000 से ज्यादा आधुनिक आंगनवाड़ी शुरू की गई हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “इससे लगभग 4 लाख बच्चों और गर्भवती माताओं को फ़ायदा होगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास की हर कोशिश का मकसद एक विकसित भारत बनाना है, क्योंकि हर किसान, युवा, बहन और बेटी विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से कुछ लोगों को यह तरक्की पसंद नहीं है और वे देश को मुश्किल में देखना चाहते हैं। श्री मोदी ने कहा, “जब देश पर संकट आता है, तो वे खुश होते हैं।”

ईरान और खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का उदाहरण देते हुए, जिसमें भारत हालात का सामना करने के लिए एकजुट था, जबकि कुछ लोग किसानों को खाद की कमी और महिलाओं को गैस सप्लाई के बारे में डराने के लिए अफवाहें फैला रहे थे, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका प्लान उन्हें बदनाम करने के लिए देश में अफरा-तफरी मचाना था। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “जब भारत एकजुट होकर इसका सामना कर रहा था, तब ये लोग अफवाहें फैलाते रहे।”

किसान समुदाय को उनके साथ मजबूती से खड़े रहने का अपना पक्का भरोसा याद दिलाते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि चल रहे झगड़े के बावजूद सरकार ने खेती के सामान की किसी भी कमी को नहीं रोका।

यह देखते हुए कि युद्ध की वजह से दुनिया भर में खाद और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू गईं, प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने भारतीय किसानों को इस बोझ से बचाया, दुनिया भर में 3,000 रुपये की यूरिया की बोरी भारत में 300 रुपये से कम में दी, और दुनिया भर में 5,000 रुपये से ज्‍यादा की डीएपी की बोरी सिर्फ़ 1,350 रुपये में दी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “देश यह मदद इसलिए दे रहा है ताकि हमारा किसान मज़बूत हो, और किसान की ज़िंदगी बेहतर हो।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का तेज़ी से विकास अनिश्चित दुनिया को नई उम्मीद देता है और इसके लिए एक भारत, श्रेष्ठ भारत के रास्ते पर लगातार चलते रहने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर को राष्‍ट्रीय एकता दिवस है, जब पूरा देश रन फॉर यूनिटी की शानदार तैयारियों के बीच एकता की प्रेरणा से दौड़ता है। श्री मोदी ने कहा, “मैं सभी देशवासियों, खासकर अपने युवा साथियों से, कल सुबह रन फॉर यूनिटी में जोश के साथ हिस्सा लेने की अपील करता हूं।”

31 अक्टूबर को एकता नगर में होने वाले वार्षिक एकता उत्सव के शेड्यूल में बदलाव की ओर इशारा करते हुए, प्रधानमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि इस वर्ष का उत्सव कल शाम 5:30 बजे बड़े पैमाने पर होगा, जिसमें पुलिस और सुरक्षा बल परेड और झांकियां दिखाएंगे। उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामाख्या तक के लोगों से इस कार्यक्रम में शामिल होने और सरदार पटेल को नमन करते हुए एक भारत, श्रेष्ठ भारत का संकल्प दोहराने की अपील की। ​​प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आखिर में कहा, “इसी अनुरोध के साथ, एक बार फिर आप सभी को विकास के कामों के लिए शुभकामनाएं।”

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एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, एवं ‘इनर व्हील क्लब ऑफ कानपुर (मेन)’ के सहयोग से “ड्रग एडिक्शन एंड सबस्टेंस एब्यूज” (नशा मुक्ति और मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव) विषय पर शैक्षणिक कार्यशाला आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर में “ड्रग एडिक्शन एवं सबस्टेंस एब्यूज” पर जागरूकता व शैक्षणिक कार्यशाला का आयोजन ‘इनर व्हील क्लब ऑफ कानपुर (मेन)’ के सहयोग से “ड्रग एडिक्शन एंड सबस्टेंस एब्यूज” (नशा मुक्ति और मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव) विषय पर एक जागरूकता एवं शैक्षणिक कार्यशाला का सफल आयोजन शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा किया गया। कार्यशाला का संचालन प्रो. प्रीति पांडे ने किया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. अंचला सिंह ने युवाओं को ड्रग्स के दुष्प्रभावों से अवगत कराया। उन्होंने डिप्रेशन, कैफीन, हैलोसिन, एलएसडी और डोपामिन के प्रभावों पर चर्चा करते हुए बताया कि अत्यधिक ड्रग्स की मात्रा का किडनी, हार्ट और ब्रेन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इससे व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और व्यावहारिक स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है और सोचने-समझने की क्षमता खत्म हो जाती है। उन्होंने ड्रग्स से जुड़े मिथकों को दूर करने तथा इस लत को शुरुआत में ही रोकने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही, उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों जैसे कि मेंस्ट्रुअल (11-16 वर्ष), मीनोपॉज (38-40 वर्ष), PCOD, कैल्शियम का महत्व, UTI से बचाव के उपाय, पर्याप्त पानी पीने की आदत और मेंस्ट्रुअल कप के उपयोग के बारे में जानकारी दी।

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि डॉ. रोचना विश्नोई ने नई पीढ़ी को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के उपाय बताए। उन्होंने मेडिटेशन पर जोर देते हुए निःस्वार्थ भाव से परमार्थ करने के लिए प्रेरित किया।

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुमन की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं को सैनिटरी पैड वितरित किए गए। संगीत विभाग के प्रो. हरीश झा के निर्देशन में वंदे मातरम का राष्ट्रगीत गाया गया।महाविद्यालय की मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने बताया इस अवसर पर कला संकाय अध्यक्षा प्रो निशि प्रकाश, प्रोफेसर रेखा चौबे प्रो निशा वर्मा प्रोफेसर कैप्टन ममता अग्रवाल, मीनाक्षी व्यास डा रेनू कुरील, किरन डा रचना निगम ,डॉ शुभा बाजपेयी , डॉक्टर कोमल सरोज ,डॉक्टर रोली मिश्रा डा संगीता सिंह ,डा पूजा गुप्ता डा अनामिका ,डॉ रेशमा इत्यादि उपस्थित रहे महाविद्यालय के तृतीय व चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों ने सकृय भूमिका निभाई इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी संकाय की छात्राएं उपस्थित रहीं ।

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दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज की छात्राओं ने मिशन शक्ति जागरूकता यात्रा निकाल दिया महिला सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तीकरण का संदेश

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई, एनसीसी एवं रेंजर्स इकाई के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को मिशन शक्ति जागरूकता यात्रा निकाली गई। महाविद्यालय परिसर से ग्रीन पार्क स्टेडियम तक आयोजित इस यात्रा में 50 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. वंदना निगम एवं सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो. अर्चना वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस जागरूकता यात्रा का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, अधिकारों तथा सशक्तीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। यात्रा के माध्यम से छात्राओं ने महिला सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, लैंगिक समानता तथा महिलाओं के प्रति सकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण विकसित करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन मिशन शक्ति प्रभारी डॉ. संगीता सिरोही के नेतृत्व में किया गया। इसमें रेंजर्स प्रभारी प्रो. स्वाति सक्सेना की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. साधना सिंह, डॉ. अपर्णा शुक्ला, डॉ. अलका त्रिपाठी एवं डॉ. अंजना श्रीवास्तव का विशेष सहयोग रहा।

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एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज एवं उजाला सिग्नस नोबल हॉस्पिटल, के संयुक्त तत्वाधान में निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज, कानपुर की कांदोबिनी देवी राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के द्वितीय एक-दिवसीय शिविर के अंतर्गत उजाला सिग्नस नोबल हॉस्पिटल, कानपुर के कुशल चिकित्सकों की टीम एवं महाविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग के सहयोग से निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य छात्राओं, अभिभावकों एवं समाज के अन्य लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य जाँच एवं चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराना था।

शिविर के प्रथम सत्र का शुभारंभ राष्ट्रीय सेवा योजना की स्वयंसेविकाओं द्वारा NSS गीत प्रस्तुत करके किया गया। इसके पश्चात प्राचार्य प्रो. सुमन, उपस्थित चिकित्सकों के द्वारा मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण किया गया | फिजिशियन डॉक्टर आर. के. तिवारी के निर्देशन में चिकित्सकों की टीम ने उपस्थित छात्राओं एवं अन्य आगंतुकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। शिविर में सामान्य स्वास्थ्य जाँच, नेत्र दृष्टि परीक्षण, बीएमडी (BMD) टेस्ट, रक्तचाप (BP), रैंडम ब्लड शुगर (RBS), रक्त में ऑक्सीजन के स्तर (SpO₂) एवं नाड़ी की जाँच के साथ चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई।

कार्यक्रम की संयोजक एवं राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. श्वेता रानी ने समुदाय के लोगों को स्वास्थ्य जाँच के महत्व से अवगत कराते हुए अधिकाधिक संख्या में शिविर में सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया।

शिविर के द्वितीय सत्र में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुमन ने स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं एवं अन्य आगंतुकों को नियमित स्वास्थ्य जाँच कराने, संतुलित आहार अपनाने तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान एवं उपचार कराने के लिए प्रेरित किया।

इस निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर में लगभग 200 छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षिकाओं, और अन्य कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाया। शिविर के सफल आयोजन में रसायन शास्त्र विभागाध्यक्षा प्रो. गार्गी यादव, डॉ. संगीता सिंह, डॉ. अनामिका, डॉ. मोनिका शुक्ला एवं डॉ. प्रीता अवस्थी ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में राष्ट्रीय सेवा योजना की स्वयंसेविकाओं अक्षिता शर्मा, इंदु पाल, आकांक्षा राठौर, मुस्कान सोनी, नेहा विश्वकर्मा, माही गुप्ता, दीक्षा शुक्ला, गौरांशी, ज्योति, अंजली चौहान, प्रिन्सि, अंशिका, खुशी, इंदु, अंजलि एवं अक्षिता का सराहनीय योगदान रहा। स्वयंसेविकाओं ने शिविर की व्यवस्थाओं, प्रतिभागियों के सहयोग तथा स्वास्थ्य जाँच के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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