Breaking News

दो साल में 509 कृषक परिवारों को 23.84 करोड़ की राहत

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना में प्रकरणों की गहन जांच, पात्र आश्रितों तक पहुंच रही आर्थिक सहायता*

दैनिक भारतीय स्वरूप जिला सूचना कार्यालय कानपुर नगर। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना दुर्घटना में अपनों को खोने वाले कृषक परिवारों के लिए आर्थिक संबल बन रही है। जनपद में वित्तीय वर्ष 2025-26 से अब तक 509 दावों के सापेक्ष 23 करोड़ 84 लाख 40 हजार रुपये की सहायता पात्र लाभार्थियों एवं मृतकों के आश्रितों के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 341 दावों के सापेक्ष 16 करोड़ 56 लाख 90 हजार रुपये का भुगतान किया गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 168 दावों के सापेक्ष 7 करोड़ 27 लाख 50 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शासन की नीति के अनुरूप मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ प्रत्येक पात्र कृषक परिवार तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। किसी पात्र परिवार अथवा आश्रित को केवल तकनीकी अथवा अपूर्ण तथ्यों के आधार पर योजना के लाभ से वंचित न किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर प्रकरण की पुनः जांच कर राजस्व अभिलेखों के साथ वास्तविक कृषि कार्य एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पात्रता निर्धारित की जाए।

*सड़क हादसे में रामसिंह की मौत, पत्नी तारापती को मिला योजना का सहारा*

घाटमपुर के ग्राम कुंवाखेड़ा निवासी रामसिंह की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। रामसिंह कृषि कार्य के साथ मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे और राजस्व अभिलेखों में कृषि भूमि के सहखातेदार भी दर्ज थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में लगी गंभीर चोटों के कारण कोमा में जाने का उल्लेख था। ग्रामवासियों के बयान और पंचनामा में भी शरीर में आई गंभीर चोटों के कारण मृत्यु की बात सामने आई।

प्रकरण के पुनः परीक्षण में इन साक्ष्यों के आधार पर रामसिंह की मृत्यु दुर्घटनाजनित होना स्थापित हुआ। जिला स्तरीय समिति ने उन्हें योजना में निर्धारित कृषक की श्रेणी में माना। इसके आधार पर उनकी पत्नी तारापती का दावा पात्र मानते हुए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए गए।

*सिर्फ ‘शराब की गंध’ को नहीं माना अपात्रता का आधार*

नर्वल तहसील के ग्राम कनवांपुर, तिलसहरी खुर्द निवासी सुरेंद्र कुमार पाल की कृषि कार्य करते समय दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी नेहा देवी ने योजना के तहत आर्थिक सहायता के लिए दावा किया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज ‘शराब की गंध’ के आधार पर उनका दावा पूर्व में अस्वीकार कर दिया गया था।

प्रकरण के पुनः परीक्षण में सामने आया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहीं यह उल्लेख नहीं था कि मृतक के रक्त में एल्कोहल की मात्रा विधिक अथवा चिकित्सकीय रूप से निषिद्ध सीमा से अधिक थी। किसी रासायनिक अथवा फोरेंसिक रिपोर्ट से भी यह प्रमाणित नहीं था कि दुर्घटना नशे के कारण हुई थी। जिला स्तरीय समिति ने माना कि केवल ‘शराब की गंध’ के उल्लेख के आधार पर किसी कृषक परिवार को लोक कल्याणकारी योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके बाद नेहा देवी का दावा पात्र मानते हुए आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए।

*पिता के नाम थी जमीन, लेकिन बेटा संभालता था खेती; पत्नी भूरी को मिला हक*

घाटमपुर तहसील के ग्राम कोटरा में कृषि भूमि मृतक के नाम दर्ज नहीं थी, बल्कि उसके पिता जगदीश राजस्व अभिलेखों में 1.1060 हेक्टेयर कृषि भूमि के सहखातेदार थे। पिता के अस्वस्थ रहने के कारण खेती की जिम्मेदारी बेटे ने संभाल रखी थी। वह खेत में कृषि कार्य करता और इसी से परिवार का भरण-पोषण करता था।

बेटे की दुर्घटना में मृत्यु के बाद उसकी पत्नी भूरी ने योजना के तहत आर्थिक सहायता का दावा किया। पुनः जांच में एसडीएम घाटमपुर की आख्या और ग्रामवासियों के बयानों से सामने आया कि पिता के अस्वस्थ रहने के कारण परिवार की खेती वास्तव में मृतक ही संभाल रहा था। जिला स्तरीय समिति ने माना कि भूमि उसके नाम दर्ज न होने के बावजूद वह कृषक परिवार का सदस्य होने के साथ वास्तविक रूप से कृषि कार्य करता था। इसके आधार पर भूरी का दावा पात्र मानते हुए योजना का लाभ दिए जाने का निर्णय लिया गया।

*पिता की जमीन पर खेती के साथ बटाई पर भी लिया खेत, परिवार को मिला लाभ*

घाटमपुर के ग्राम कटरी के प्रकरण में मृतक अपने पिता रामबाबू के नाम दर्ज कृषि भूमि पर खेती करता था। इसके साथ ही वह गांव के एक अन्य व्यक्ति की 0.4400 हेक्टेयर कृषि भूमि बटाई पर लेकर भी कृषि कार्य करता था।

ग्राम प्रधान के प्रमाणपत्र एवं अन्य अभिलेखों से उसके बटाई पर भूमि लेकर वास्तविक रूप से कृषि कार्य करने की पुष्टि हुई। जिला स्तरीय समिति ने माना कि मृतक कृषक परिवार का सदस्य होने के साथ स्वयं भी बटाई पर भूमि लेकर खेती करता था, इसलिए वह योजना में निर्धारित कृषक की परिभाषा के अंतर्गत आता है। इसके आधार पर रामबाबू द्वारा प्रस्तुत दावा पात्र मानते हुए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया।

*एक नजर में : मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना*

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का उद्देश्य दुर्घटना की स्थिति में कृषकों और कृषि कार्य से जुड़े परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के निर्धारित प्रावधानों के तहत खातेदार एवं सहखातेदार कृषक, कृषक परिवार के सदस्य, बटाईदार तथा खेतिहर मजदूर भी पात्रता की शर्तें पूरी करने पर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

दुर्घटना में मृत्यु की स्थिति में अधिकतम 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। दिव्यांगता की स्थिति में उसकी प्रकृति एवं निर्धारित श्रेणी के अनुसार सहायता दी जाती है।

पात्रता का निर्धारण केवल भूमि के स्वामित्व के आधार पर नहीं, बल्कि योजना के प्रावधानों के अनुसार राजस्व अभिलेख, वास्तविक कृषि कार्य तथा उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के आधार पर किया जाता है।

Read More »

12 सितंबर को आयोजित होगी राष्ट्रीय लोक अदालत

दैनिक भारतीय स्वरूप (जिला सूचना कार्यालय) कानपुर नगर, 10 सितंबर, 2026 पूर्णकालिक सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कानपुर नगर अभिनव तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 12 सितंबर 2026, दिन शनिवार (द्वितीय शनिवार) को किया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न प्रकार के लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण आपसी सुलह-समझौते के आधार पर किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कानपुर नगर अनमोल पाल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया जाएगा। इस अवसर पर न्यायिक अधिकारीगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

पूर्णकालिक सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन 12 सितंबर 2026 को प्रातः 10 बजे दीवानी न्यायालय परिसर के प्रथम तल स्थित मीटिंग हॉल में किया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना वाद, सिविल वाद, फैमिली वाद, बैंक ऋण वसूली वाद, एनआई एक्ट वाद, राजस्व वाद तथा चालानी वादों सहित विभिन्न प्रकार के मामलों का निस्तारण किया जाएगा।

उन्होंने आमजन से अपील की कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से अपने लंबित अथवा प्री-लिटिगेशन मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराने के लिए इसका लाभ उठाएं। लोक अदालत के माध्यम से मामलों का त्वरित एवं सरल निस्तारण संभव है।

Read More »

एस.एन.सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर छात्राओं को “आत्महत्या रोकथाम, आत्मरक्षा, नई रोशनी स्कीम” से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन.सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज, कानपुर (यू. पी.) में  मनोविज्ञान विभाग व 17वीं यूपी गर्ल्स बटालियन से जुड़ी एनसीसी इकाई द्वारा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर मिशन निडर के संयुक्त तत्वाधान में छात्राओं को “आत्महत्या रोकथाम, आत्मरक्षा, नई रोशनी स्कीम” से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मिशन निडर की संस्थापक शिखा शुक्ला, मुख्य वक्ता डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी (काउंसलर व थैरेपिस्ट) द्वारा छात्राओं को आत्महत्या से जुड़े कारणों, रोकथाम के उपाय, साथ-ही सेल्फ डिफेंस संबंधी जानकारी दी गई। मुख्य वक्ता डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने बताया अगर हमारे मस्तिष्क में आत्महत्या संबंधी विचार आ रहे तो सबसे पहले अपने विचार को वही रोक दें,किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करे, जरूरत पड़ने पर किसी एक्सपर्ट से सलाह लें, साथ-ही ऑनलाइन टोल फ्री नंबर 14416 टेली मानस पर भी बात कर सकते है। इस अवसर पर छात्राओं ने अपनी समस्याओं को काउंसलर के साथ साझा किया व उनके निदान पर चर्चा की। मिशन निडर की संस्थापक शिखा शुक्ला द्वारा छात्राओं से सेल्फ डिफेंस से संबंधित जानकारी साझा की गई। व सेल्फ डिफेंस से जुड़ी व्यावहारिक टिप्स दी गई। एनसीसी प्रभारी प्रीति यादव द्वारा छात्राओं को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित ‘नई रोशनी’ स्कीम के बारे में बताया गया। नई रोशनी योजना विशेषकर अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं के नेतृत्व विकास और सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसके अंतर्गत कई चरणों में महिला सशक्तिकरण संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किये जाते है।

धन्यवाद ज्ञापन मनोविज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ. मोनिका सहाय द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर निशि प्रकाश, प्रोफेसर रेखा चौबे, कैप्टन ममता अग्रवाल, डॉ. रेशमा की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम में कुल 80 छात्राओं व कैडेट्स ने प्रतिभाग किया।

Read More »

आईएनएस निपुण को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया

आईएनएस निपुण को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया

भारतीय नौसेना ने 31 अगस्त, 2026 को मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में निस्तार श्रेणी के दूसरे गोताखोरी सहायता पोत (डीएसवी) आईएनएस निपुण को नौसेना में शामिल किया। इस उपलब्धि से नौसेना की गहरे समुद्र में गोताखोरी, पानी के भीतर अभियानों और पनडुब्बी बचाव अभियानों की क्षमताओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने इस कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन भी मौजूद रहे। समारोह में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) के प्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों, गणमान्य अतिथियों और कमीशनिंग क्रू के परिवारजनों ने भी हिस्सा लिया।

विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित आईएनएस निपुण भारतीय नौसेना की समुद्र में दूर तक गहराई तक काम करने की विशेष क्षमता में एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी के रूप में है। इसका नौसेना में शामिल होना तकनीकी रूप से जटिल व विशेष नौसैनिक प्लेटफॉर्म को डिजाइन तथा निर्मित करने की भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। आईएनएस निपुण रक्षा जहाज निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। यह नौसेना की स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने में भारतीय शिपयार्ड, घरेलू उद्योग और संबंधित एजेंसियों के योगदान को भी उजागर करता है।

आईएनएस निपुण को खास तौर पर गहरे समुद्र में गोताखोरी और समुद्र में नीचे किए जाने वाले कार्यों के लिए एक विशेष जहाज के रूप में डिजाइन किया गया है। यह पोत सैचुरेशन, एयर और हेलिओक्स डाइविंग में सहायता करने में सक्षम है। इसमें पानी के नीचे जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए दूर से संचालित प्रणालियां भी लगी हैं। इसका विशेष गोताखोरी परिसर, डायनामिक पोजिशनिंग क्षमता तथा जीवन-रक्षक और चिकित्सा सुविधाएं समुद्र में लंबे समय तक कठिन अभियानों को संचालित करने में मदद करते हैं।

आईएनएस निपुण पनडुब्बी बचाव अभियानों में सहायता करने में भी सक्षम है, जिससे पानी के भीतर आपातकालीन स्थितियों से निपटने की भारतीय नौसेना की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है। अपने सहयोगी जहाज आईएनएस निस्तार के साथ मिलकर यह पोत गोताखोरी, पानी के नीचे कार्रवाई, बचाव कार्य व पनडुब्बी बचाव अभियानों में नौसेना की विशेष क्षमताओं को और मजबूत करता है।

पोत की शिखर चोटी व आदर्श वाक्य इसके विशेष कार्य और समुद्र की गहराइयों में उतरने वाले कर्मियों की भावना को दर्शाते हैं। इसका आदर्श वाक्य ‘बहुत नीचे, कुछ ही उससे आगे’ समुद्री वातावरण के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम करने के लिए आवश्यक दृढ़ संकल्प, कौशल और सहनशक्ति को दर्शाता है।

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने अपने संबोधन में कहा कि आईएनएस निपुण का नौसेना में शामिल होना भारतीय नौसेना, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड और घरेलू रक्षा औद्योगिक नेटवर्क के बीच बेहतरीन तालमेल को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि समुद्री परीक्षणों के दौरान एक ही बार में सभी गोताखोरी प्रणालियों की कार्यक्षमता साबित करना देश के तकनीकी आत्मविश्वास और इंजीनियरिंग कौशल का प्रमाण है।

नौसेना प्रमुख ने इस बात पर बल दिया कि समुद्री क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरों के बीच भारतीय नौसेना के लिए युद्ध के लिए तैयार रहना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी नौसेना कमान के तहत पश्चिमी तट पर तैनात होने वाला आईएनएस निपुण, बहु-क्षेत्रीय अभियानों को जारी रखने के लिए आवश्यक विशेष पानी के नीचे काम करने की क्षमताओं में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करेगा।

नौसेना प्रमुख ने जोर देकर कहा कि आईएनएस निपुण की विशेष क्षमताएं भारतीय नौसेना को अपनी और मित्र देशों की संकट में फंसी पनडुब्बियों पर तेजी से कार्रवाई करने में सक्षम बनाती हैं, जो दुनिया की बहुत कम नौसेनाओं के पास हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षमता भारत को इस क्षेत्र में ‘पसंदीदा पनडुब्बी बचाव साझेदार’ के रूप में स्थापित करती है। साथ ही, आईएनएस निपुण पानी के नीचे बचाव अभियानों तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) अभियानों के लिए विशेष सहायता प्रदान करेगा।

नौसेना प्रमुख ने कमीशनिंग क्रू को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें न केवल एक आधुनिक और बेहतरीन पोत मिला है, बल्कि पोत की आत्मा को आकार देने तथा उसके इस्पात में जोश भरने की बड़ी जिम्मेदारी भी मिली है। उन्होंने क्रू से पोत के आदर्श वाक्य ‘निश्चय, निर्भय, निपुण’ यानी संकल्प, निडरता और पेशेवर दक्षता पर खरा उतरने का आग्रह किया। एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने क्रू को नौसेना के मुख्य मूल्यों कर्तव्य, सम्मान और साहस से हमेशा जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।

कमीशनिंग पताका फहराए जाने के साथ ही आईएनएस निपुण औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना की परिचालन सेवा में शामिल हो गया। यह पोत समुद्र की गहराइयों में काम करने वाले कर्मियों की सहायता करने और भारत के समुद्री हितों की रक्षा में योगदान देने के लिए तैयार है।

 

 

Read More »

रक्षा मंत्री नई दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र के 16 रक्षा उपक्रमों के वार्षिक कार्य-निष्पादन की समीक्षा करेंगे

रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह 1 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र के 16 रक्षा उपक्रमों (डीपीएसयू) के वार्षिक कार्य-निष्पादन की समीक्षा करेंगे। इस दौरान नई स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास और निर्यात को बढ़ावा देने के महत्व पर विशेष बल दिया जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के सात रक्षा उपक्रमों – हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई), बीईएमएल और मिधानी (एमआईडीएचएएनआई) – के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी पर प्राप्त लाभांश के चेक रक्षा मंत्री को सौंपेंगे।

इस अवसर पर राजनाथ सिंह चार पुस्तकों का विमोचन करेंगे। इनमें ‘आत्मनिर्भर डीपीएसयू – आत्मनिर्भरता की दिशा में डीपीएसयू की यात्रा’; ‘दिशा (डीआईएसएचए)’- रक्षा प्रौद्योगिकियों और आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं के संबंध में विद्यार्थियों को व्यावहारिक जानकारी देने के लिए डीपीएसयू की एक पहल है; ‘एचएएल का आधुनिकीकरण रोडमैप’ तथा ‘एचएएल का स्वदेशीकरण रोडमैप’ शामिल हैं।

गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 में डीपीएसयू का कार्य-निष्पादन सराहनीय रहा है। उनका कुल कारोबार 1.29 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों की तुलना में 15.4 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2025-26 में डीपीएसयू ने कुल 23,136 करोड़ रुपये का कर पश्चात संचयी लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। विशेष रूप से, 2025-26 में डीपीएसयू के निर्यात में  पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 151.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

Read More »

एनपीसीआई इंटरनेशनल और उज्बेकिस्तान के एनआईपीसी ने ‘यूजेडक्यूआर’ के माध्यम से पूरे उज्बेकिस्तान में यूपीआई भुगतान सक्षम करने के लिए साझेदारी की

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की अंतरराष्ट्रीय शाखा एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) ने 30 अगस्त 2026 को उज्बेकिस्तान की राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली एचयूएमओ के संचालक ‘नेशनल इंटरबैंक प्रोसेसिंग सेंटर जेएससी’ (एनआईपीसी) के साथ एक वाणिज्यिक समझौते पर हस्‍ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी भारतीय यात्रियों को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय अंतर-संचालनीय क्यूआर कोड ‘यूजेडक्यूआर’ को अपने परिचित यूपीआई-सक्षम ऐप का उपयोग करके स्कैन करने और देशभर में व्यापारियों को त्‍वरित भुगतान करने की सुविधा देती है।

यह घोषणा भारत के प्रधानमंत्री की उज्बेकिस्तान की द्विपक्षीय यात्रा के दौरान की गई। यह समझौता भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और उज्बेकिस्तान के केंद्रीय बैंक (सीबीयू) सहित संबंधित वित्तीय नियामकों से औपचारिक अनुमोदन प्राप्त होने के बाद किया गया है। इन नियामकों ने एचयूएमओ को सीमा-पार मर्चेंट भुगतान स्वीकार करने के लिए एनआईपीएल PL के अधिकृत साझेदार के रूप में नामित किया है।

समझौते की प्रमुख बातें

  1. व्‍यापारियों द्वारा सार्वभौमिक भुगतान स्वीकृति:

सीबीयू द्वारा अनिवार्य एकीकृ‍त राष्‍ट्रीय क्‍यूआर अवसंरचना (यूजेडक्‍यूआर) के साथ एकीकरण से यूपीआई उपयोगकर्ताओं को उज्बेकिस्तान में खुदरा, आतिथ्‍य और सेवा क्षेत्र के व्‍यापारियों के यहां लगभग सर्वभौगिक भुगतान स्‍वीकृति की सुविधा मिलेगी।

  1. सुगम यात्रा अनुभव :

भारतीय पर्यटक, कारोबारी यात्री और विद्यार्थी अपने भारतीय बैंक खातों से सीधे व्यक्ति से व्यापारी (पी2एम) भुगतान कर सकेंगे। इससे विदेशी मुद्रा पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क की समस्या कम होगी तथा अंतरराष्ट्रीय कार्ड या नकदी पर निर्भरता भी घटेगी।

  1. द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती:

यह पहल डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआईI) के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को आगे बढ़ाती है और दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक एवं आर्थिक उद्देश्यों के अनुरूप है।

यूपीआई दस देशों में स्वीकार किया जाता है :

यूपीआई को वर्तमान में सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस में स्‍वीकार किया जाता है।

इससे भारतीय यात्रियों को विदेशों में यूपीआई के माध्यम से निर्बाध भुगतान करने की सुविधा मिलती है।

Read More »

ऊष्मा को विद्युत में परिवर्तित करने की सदी पुरानी सीमा को पार कर लिया गया है, जिससे अति संवेदनशील तापमान संवेदन संभव हो गया है।

वैज्ञानिकों को एक ऐसा क्रिस्टलीय अर्धचालक मिला है जो तापमान के अंतर को विद्युत वोल्टेज में परिवर्तित करता है जो भौतिकी की पाठ्यपुस्तकों में वर्णित वोल्टेज से लगभग एक हजार गुना अधिक है।

उत्पन्न होने वाला थर्मोइलेक्ट्रिक वोल्टेज इतना अधिक होता है कि यह उन मानों के बराबर होता है जो आमतौर पर केवल तरल इलेक्ट्रोलाइट्स और आयनिक जैल में देखे जाते हैं, ठोस पदार्थों में नहीं, विशेष रूप से एकल-क्रिस्टलीय पदार्थों में।

इस खोज ने ठोस पदार्थों में इस प्रभाव की सीमा के बारे में दशकों पुरानी धारणा को बदल दिया है और अति संवेदनशील तापमान सेंसर, हीट डिटेक्टर और क्वांटम सेंसिंग उपकरणों की एक नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त किया है।

जब दो अलग अलग  पदार्थों के बीच के जोड़ के एक सिरे को गर्म किया जाता है जबकि दूसरे सिरे को ठंडा रखा जाता है, तो गतिशील आवेश वाहक गर्म सिरे से ठंडे सिरे की ओर प्रवाहित होते हैं जिससे जोड़ के आर-पार वोल्टेज उत्पन्न होता है। इस घटना को सीबेक प्रभाव के नाम से जाना जाता है जिसकी खोज दो शताब्दी पहले हुई थी और यह तापमान सेंसर से लेकर अपशिष्ट ऊष्मा को बिजली में परिवर्तित करने वाले थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर तक की तकनीकों का आधार है।

दशकों से, सीबेक गुणांक के रूप में मापी जाने वाली इस वोल्टेज की मात्रा, क्रिस्टलीय ठोस में इस प्रभाव की ऊपरी सीमा को केवल कुछ मिलीवोल्ट प्रति केल्विन तक ही सीमित रखती है। अधिकांश धातुएँ प्रति केल्विन केवल कुछ दहाई माइक्रोवोल्ट (µV/K) का वोल्टेज उत्पन्न करती हैं जबकि अच्छे अर्धचालक भी शायद ही कभी कुछ सौ माइक्रोवोल्ट प्रति केल्विन से अधिक उत्पन्न करते हैं। केवल तरल प्रणालियाँ, जैसे कि आयनिक जैल और इलेक्ट्रोलाइट्स, जिनमें इलेक्ट्रॉनों के बजाय आवेशित आयन ऊष्मा का संचरण करते हैं, मिलीवोल्ट प्रति केल्विन की सीमा को पार करती हुई पाई गई हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की एक स्वायत्त संस्थान, जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) के शोधकर्ताओं के एक समूह ने ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय और बैंगलोर के भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के साथ मिलकर अब यह दिखाया है कि ठोस, एपिटैक्सियल क्रिस्टल में इस सीमा को तोड़ा जा सकता है।

प्रोफेसर बिवास साहा के नेतृत्व वाली टीम ने रेणुका करंजे और धीमही राव के साथ-साथ जेएनसीएएसआर से दीक्षा दाधिच और सौरव रुद्र, सिडनी विश्वविद्यालय से आशालाथा इंदिरादेवी कमलासनन पिल्लई और डॉ. मैग्नस गारब्रेक्ट और आईआईएससी से प्रोफेसर सुब्रतो मुखर्जी के सहयोग से अल्ट्राहाई-वैक्यूम मैग्नेट्रॉन स्पटरिंग का उपयोग करके मैग्नीशियम ऑक्साइड सब्सट्रेट पर स्कैंडियम नाइट्राइड (एससीएन), एक दुर्दम्य संक्रमण-धातु नाइट्राइड की पतली फिल्में विकसित कीं।

उन्होंने इनमें मैग्नीशियम मिलाया ताकि ऑक्सीजन डोपेंट से उत्पन्न होने वाले स्वाभाविक रूप से मौजूद मुक्त इलेक्ट्रॉनों की भरपाई हो सके। इससे एक ऐसा अर्धचालक बना जिसे अत्यधिक डोप किया हुआ और अत्यधिक संतुलित (एचडीएचसी) अर्धचालक कहा जाता है, एक ऐसा पदार्थ जिसमें धनात्मक और ऋणात्मक आवेश वाले डोपेंट परमाणु क्रिस्टल में लगभग समान संख्या में बेतरतीब ढंग से बिखरे होते हैं।

एक्स-रे विवर्तन और परमाणु-रिज़ॉल्यूशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी ने पुष्टि की कि फिल्में एकल-क्रिस्टलीय और एपिटैक्सियल बनी रहीं, जिसमें डोपेंट परमाणु समान रूप से वितरित थे और कोई द्वितीयक चरण या अवक्षेप नहीं थे।

इन एचडीएचसी एससीएन फिल्मों में, टीम ने सीबेक गुणांक का मान अकार्बनिक अर्धचालकों में आमतौर पर देखे जाने वाले मान से कई सौ से लेकर एक हजार गुना अधिक मापा, और यह पहले से ज्ञात अधिकतम सीमा से लगभग सौ गुना अधिक था (लगभग 200 नैनोमीटर मोटी फिल्म में कमरे के तापमान के पास -124.6 मिलीवोल्ट प्रति केल्विन से अधिक)। यह इसे तरल इलेक्ट्रोलाइट्स और हाइड्रोजेल और आयनिक जिलेटिन जैसे आयनिक चालकों से भी पहले से जुड़े दायरे से काफी ऊपर रखता है।

शोधकर्ताओं ने इस परिणाम को पूरी तरह से क्रिस्टलीय अर्धचालक के अंदर इलेक्ट्रोलाइट जैसी ऊष्माशक्ति के ठोस-अवस्था अनुरूप के रूप में वर्णित किया है।

एचडीएचसी एससीएन फिल्मों को पतला करने पर यह प्रभाव और भी मजबूत हो गया।

इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर बिवास साहा ने कहा कि जब हमने यह काम शुरू किया था तब हमारा लक्ष्य कोई रिकॉर्ड तोड़ना नहीं था बल्कि हम यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि अव्यवस्था और आवेश क्षतिपूर्ति स्कैंडियम नाइट्राइड में इलेक्ट्रॉनिक परिवहन को कैसे नया आकार देते हैं।इसके बजाय हमने पाया कि एक पूरी तरह से क्रिस्टलीय, एपिटैक्सियल, एकल-चरण अर्धचालक तरल इलेक्ट्रोलाइट की तरह ऊष्माविद्युत रूप से व्यवहार कर सकता है। यह वास्तव में आश्चर्यजनक था और इससे हमें पता चलता है कि ठोस पदार्थों में अत्यधिक ऊष्माविद्युत और संवेदन क्षमता प्राप्त करने के लिए इंजीनियर की गई अव्यवस्था एक काफी हद तक अनछुआ मार्ग है।

चित्र 1 : अत्यधिक डोपिंग और उच्च क्षतिपूर्ति वाले ScN के इलेक्ट्रॉनिक बैंड आरेख का योजनाबद्ध चित्रण, जो बोल्ट्जमैन सीमा से अधिक ऊष्माशक्ति प्रदर्शित करता है।

टीम ने दो क्रोमियम संपर्कों वाली एचडीएचसीएससीएन  फिल्म का उपयोग करके एक प्रारंभिक प्रोटोटाइप फोटॉन सेंसर बनाया है। एक संपर्क को लेजर से प्रकाशित करने पर उपकरण में एक सूक्ष्म, स्थानीयकृत तापमान अंतर उत्पन्न हुआ और परिणामस्वरूप वोल्टेज -102.4 मिलीवोल्ट प्रति केल्विन के सीबेक प्रतिक्रिया में परिवर्तित हो गया जो  प्रकाश पहचान के लिए पर्याप्त है और टीम का सुझाव है कि आगे अनुकूलन के साथ कमरे के तापमान के आसपास एकल-फोटॉन स्तर की पहचान के लिए भी उपयुक्त है। वोल्टेज प्रतिक्रिया तीव्र थी कई प्रकाश चक्रों में दोहराने योग्य थी और सामग्री को अपरिवर्तित छोड़ दिया। इस कार्य के आधार पर तापमान और फोटॉन पहचान के लिए थर्मोइलेक्ट्रिक पतली-फिल्म सामग्री और सेंसर पर टीम द्वारा एक भारतीय पेटेंट आवेदन दायर किया गया है।

चित्र 2 : (बाएं से दाएं) जेएनसीएएसआर टीम, प्रोफेसर बिवास साहा, सौरव रुद्र, दीक्षा दाधीच, रेणुका करंजे और धीमाही राव

Read More »

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आज बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आज नई दिल्ली में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, केन्द्रीय गृह सचिव और भारत सरकार और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच आज के समझौते से पूर्वी भारत के बहुप्रतीक्षित जलविवाद का समाधान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से बिहार और झारखंड के बहुत बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसानों को सिंचाई के लिये जल मिलने के साथ ही लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा।

अमित शाह ने कहा कि सोन नदी के जल के बंटवारे के संबंध में आज हुआ समझौता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा की गई Team Bharat की परिकल्पना और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों का अलग अलग अस्तित्व तो है ही मगर भारत के परिप्रेक्ष्य में सभी राज्य टीम इंडिया बनकर आगे बढ़ें, तो कोई समस्या ऐसी नहीं है जिसका निराकरण न हो सके। श्री शाह कहा कि इस वर्ष अभी तक विभिन्न राज्यों के बीच यह चौथा जल समझौता है जिससे सिंचाई, ग्रामीण विकास और पेयजल के लिए जल उपलब्धता में वृद्धि होगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच लगभग 25 साल पुराने जल विवाद के हल के लिए आज हुआ यह समझौता इस बात का उदाहरण है कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद हो तो हर समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र,  किसानों, ग्रामीण क्षेत्र और पीने के जल की समस्या का हमेशा के लिए आज निराकरण हो गया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज के समझौते से बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना की बड़ी आबादी के लिए पीने के पानी और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो जाएगा। इसके साथ ही, झारखंड के पलामू, गढ़वा और अन्य क्षेत्रों में सिंचाई और पीने के पानी के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा।

झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी ने सोन नदी  जल बंटवारे के समाधान के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया!

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोन नदी  जल बंटवारे के समाधान के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।

गृह मंत्री श्री अमित शाह की पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के माध्यम से विभिन्न राज्यों के बीच कई दशकों से लंबित जल विवादों का समाधान निकाला जा रहा है, इस वर्ष अब तक चार ऐतिहासिक समझौते हो चुके हैं।
07 जुलाई, 2026 को केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की उपस्थिति में नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबित भुगतान के निपटारे पर ऐतिहासिक समझौता हुआ। यह समझौता मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर है, जिसके तहत लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है
29 जून, 2026 को श्री अमित शाह की उपस्थिति में यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइपलाइंस के जरिए राजस्थान तक पहुंचेगा। इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के ज़रिए राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुँचाना है। इससे राजस्थान, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बँटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा। इस परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों लोगों को फ़ायदा होगा।

16 जून, 2026 को केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ पर संबंधित राज्यों में सहमति बनी। बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान “किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना” के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हुए। किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90% केन्द्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा और शेष 10% राशि का वित्तीय भार 06 राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के विद्युत् घटक के हिस्से की लागत को साझा करने के एवज में हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर सहमति बनी।

Read More »

प्रधानमंत्री ने भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर की सराहना की

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून की पहली तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज होने को असाधारण उपलब्धि बताया है। श्री मोदी ने कहा कि तेल की कीमतों में बढोत्तरी, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, यह उपलब्धि देश के लोगों की सामूहिक शक्ति और प्रतिकूल स्थिति से उभरने की क्षमता दर्शाती है।

श्री मोदी ने सोशल मीडिया एक्‍स पर कहा:

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत की अनुकरणीय जीडीपी वृद्धि दर असाधारण उपलब्धि है।

यह वृद्धि हमारे लोगों की सामूहिक शक्ति से सुनिश्चित हुई है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच तेल की कीमतों में बढोत्तरी और आपूर्ति शृंखला की समस्याओं के बावजूद भारत ने ऐसी वृद्धि हासिल की।

निराशावादी फिर गलत साबित हुए और भारत फल-फूल रहा है!

Read More »

एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरान के राष्ट्रपति से मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आज बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन-एससीओ से इतर ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियान के साथ द्विपक्षीय बैठक हुई।

बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया संघर्ष के हाल के घटनाक्रमों पर भी बातचीत की और बदलती स्थिति पर अपने विचार साझा किए। श्री मोदी ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की और भारत का रुख फिर दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीतिक उपायों से ही होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने नौवहन और वाणिज्यक स्वतंत्रता की रक्षा का आह्वान करते हुए इस बात पर बल दिया कि वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों सहित नागरिक और असैन्य ढांचे को किसी भी स्थिति में नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स और एससीओ सहित बहुपक्षीय संगठनों में ईरान के साथ भारत के घनिष्ठ सहयोग की तत्परता दोहराते हुए कहा कि वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पेज़ेशकियान का भारत में स्वागत करने को उत्सुक हैं।

Read More »