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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जैसलमेर के रामगढ़ में 20 किलोवाट आकाशवाणी एफएम ट्रांसमीटर का उद्घाटन किया

केन्द्रिय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आकाशवाणी जयपुर परिसर से जैसलमेर के रामगढ़ में 20 किलोवाट के आकाशवाणी एफएम ट्रांसमीटर का वर्चुअल रूप से उद्घाटन किया।

इस नए ट्रांसमीटर के जुड़ने से राजस्थान में एफएम ट्रांसमीटरों की संख्या बढ़कर 39 हो गई है। रामगढ़ ट्रांसमीटर सीमावर्ती क्षेत्र में 80 कि.मी. के दायरे में रेडियो कवरेज सुनिश्चित करेगा, जो जैसलमेर जिले के लगभग 20 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगा और लोगों को विभिन्न प्रकार के सूचनात्मक, शैक्षिक और मनोरंजक कार्यक्रमों तक पहुंच प्रदान करेगा।

सभा को संबोधित करते हुए श्री वैष्णव ने प्रसार भारती के कामकाज और दृष्टिकोण में परिवर्तन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तीव्र तकनीकी प्रगति के इस युग में प्रासंगिक और प्रभावशाली बने रहने के लिए रेडियो प्रसारण को “डिजिटल फर्स्ट” और “हाइपर-लोकल” दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने अधिकारियों को इस परिवर्तन के लिए एक रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रसारण प्रणाली में स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को एकीकृत करने के महत्व पर बल दिया।

श्री वैष्णव ने जयपुर में बन रहे आगामी एआई डेटा सेंटर का भी जिक्र किया और इसे भविष्य की नींव और तकनीकी प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने सभा को संबोधित करते हुए आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे संस्थानों के चिरस्थायी महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये संगठन समाज की जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं और व्यापक जनसमूह तक सूचना पहुंचाने और जमीनी हकीकतों को प्रतिबिंबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस ट्रांसमीटर का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अखिल भारतीय रेडियो और दूरदर्शन की पहुंच को मजबूत करना है। यह न केवल जैसलमेर बल्कि आसपास के क्षेत्रों को भी सेवा प्रदान करेगा जो सीमा संचार अवसंरचना में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल “कश्मीर से कच्छ तक” समर्पित प्रसारण अवसंरचना की परिकल्पना के अनुरूप है, जो संपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र में प्रसारण सेवाओं के व्यवस्थित विस्तार को सुनिश्चित करेगी।

इस कार्यक्रम के दौरान श्री वैष्णव ने प्रसार भारती के युवा अधिकारियों से भी बातचीत की। आकाशवाणी जयपुर परिसर में आयोजित इस समारोह में राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, जयपुर की सांसद मंजू शर्मा और आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव कुमार जैन उपस्थित थे। जैसलमेर के सांसद उमेदराम बेनीवाल भी कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

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भारत और नेपाल ने द्विपक्षीय वित्तीय संपर्क को मजबूत करने के लिए सीमा पार धन प्रेषण तंत्र की शुरुआत की

डिजिटल वित्तीय संपर्क और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में भारत और नेपाल ने  आधिकारिक तौर पर व्‍यक्ति-से-व्‍यक्ति (पी2पी) सीमा-पार धन प्रेषण तंत्र का शुभारंभ किया।

यह नव-संचालित प्रणाली भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) और नेपाल के राष्ट्रीय भुगतान इंटरफेस (एनपीआई) के बीच एक सीधा संबंध स्थापित करती है। यह एकीकरण दोनों देशों के नागरिकों को मोबाइल बैंकिंग अनुप्रयोगों और डिजिटल वॉलेट के माध्यम से निर्बाध, वास्तविक समय और सुरक्षित रूप से तत्काल धन हस्तांतरण करने में सक्षम बनाता है।

यूपीआई-एनपीआई जुड़ाव वित्तीय समावेशन में एक बडी प्रगति को दर्शाता है, जो भारत और नेपाल के बीच मजबूत आर्थिक और डिजिटल संबंधों को बढ़ावा देता है। यह सुलभ, सुरक्षित और किफायती सीमा पार भुगतानों के क्षेत्रीय लक्ष्यों के साथ पूरी तरह मेल खाता है, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक संबंध मजबूत होते हैं।

आर्थिक और डिजिटल एकीकरण को बढ़ावा:

यह तकनीकी एकीकरण नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की अंतरराष्ट्रीय शाखा-एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) और नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (एनसीएचएल) के बीच सहयोग के माध्यम से निष्‍पादित किया गया।

रणनीतिक प्रभाव: यूपीआई-एनपीआई धन प्रेषण लिंकेज की मुख्‍य विशेषताएं:

यह डिजिटल भुगतान गलियारा दोनों देशों के बीच लेन-देन की प्रणाली में महत्‍वपूर्ण परिवर्तन लाएगा और निम्‍नलिखित लाभ प्रदान करेगा:

  • यात्रियों के लिए अधिक सुविधा: मुद्रा विनिमय की जटिलताओं, बड़ी मात्रा में नकदी साथ रखने की आवश्‍यकता तथा अपरिचित विदेशी विनिमय शुल्कों से मुक्ति मिलेगी।
  • स्थानीय व्यापारियों के लिए आर्थिक लाभ: नेपाल के व्यवसायों को बडी संख्‍या में प्रौ‍द्योगिकी-सक्षम भारतीय पर्यटकों और ग्राहकों तक सीधी पहुंच प्राप्त होगी, जिससे लेनदेन की मात्रा बढेगी।
  • परिचालन दक्षता: स्थानीय व्यापारियों को नकदी प्रबंधन में सुविधा होगी, नकदी संभालने से जुडे खर्च कम होंगे तथा सुरक्षित और वास्तविक समय में भुगतान निपटान संभव होगा।
  • वास्‍तविक-समय में प्रत्‍यक्ष हस्‍तांतरण: सीमा-पार नकदी ले जाने या पारंपरिक बैंकिंग माध्‍यमों पर निर्भर रहने की आवश्यकता कम होगी।

विश्वभर में यूपीआई की पहुंच:

वर्तमान में यूपीआई नौ देशों- सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका और कंबोडिया- में स्वीकार किया जाता है। इन देशों में भारतीय यात्री अपने परिचित यूपीआई प्लेटफार्मों के माध्यम से आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकते हैं।

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केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भारत सरकार, असम सरकार और नगालैंड सरकार के बीच असम-नगालैंड सीमावर्ती क्षेत्रों में खनिज तेल संचालन के संबंध में त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में आज नई दिल्ली में भारत सरकार, असम सरकार और नगालैंड सरकार के बीच असम-नगालैंड सीमावर्ती क्षेत्रों में खनिज तेल संचालन (Mineral Oil Operations) के संबंध में एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा और नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो सहित केंद्र, असम एवं नगालैंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज हम एक ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने हैं। उन्होंने कहा कि इस समझौते से तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण और खनिज के खनन की संभावना बनेगी, साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा पूर्वोत्तर सहित पूरे देश के सामने रखी गई समृद्ध उत्तर-पूर्व की संकल्पना की राह में बहुत बड़ी बाधा दूर हुई है। श्री शाह ने कहा कि आज पूरा पूर्वोत्तर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से यह समझौता करके आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि असम और नगालैंड परस्पर सहयोग के जरिए भारत के तेल उत्खनन में कोई बाधा नहीं बनेंगे, क्योंकि यह राष्ट्रीय संपदा है।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि नगालैंड के मुख्यमंत्री ने बताया है कि छह फील्ड्स के अलावा पूरे नगालैंड में तेल की खोज के लिए राज्य सरकार पूरी तरह सहमत है। उन्होंने कहा कि असम सरकार भी इससे सहमत है, क्योंकि यह सभी के लिए ‘विन-विन सिचुएशन’ है। गृह मंत्री ने कहा कि इस त्रिपक्षीय समझौते से पूरे नॉर्थ-ईस्ट में खनिजों के खनन का रास्ता साफ होगा।

अमित शाह ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट में न केवल तेल और गैस, बल्कि खनिजों का असीम भंडार है। उन्होंने कहा कि आज इस MoU से हमारी 1,000-1,500 बैरल प्रतिदिन की दोहन क्षमता के दस गुना से अधिक बढ़ने की संभावना है।

गृह मंत्री श्री अमित शाह ने विश्वास जताया कि नगालैंड में उपलब्ध तेल और गैस का उत्खनन होने पर इस क्षेत्र में विदेशों पर हमारी निर्भरता काफी हद तक कम हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इस समझौते के अभाव और कुछ चुनौतियों के कारण लंबे समय तक दोनों राज्यों का आर्थिक विकास प्रभावित हुआ था। लेकिन आज हुआ यह समझौता  असम और नगालैंड के आर्थिक विकास के लिए बड़ा राजमार्ग खोलेगा। उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद का इस त्रिपक्षीय समझौते से बड़ा उदाहरण कुछ नहीं हो सकता।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से नॉर्थ-ईस्ट को अपने फोकस में रखा है। वे आजादी के बाद सबसे अधिक बार नॉर्थ-ईस्ट का दौरा करने वाले प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि लिए मोदी जी ने नॉर्थ-ईस्ट को शांत और विकसित बनाने के जो प्रयास किए हैं, आजाद भारत के इतिहास में उनकी तुलना बमुश्किल मिलेगी। श्री शाह ने कहा कि 2019 के बाद अलग-अलग प्रकार के 12 समझौते हुए हैं, जिससे पूर्वोत्तर में शांति सुनिश्चित हुई और हिंसा में करीब 80% की कमी दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट का इंफ्रास्ट्रक्चर जिस गति से बढ़ा है, वह इन समझौतों के बिना संभव नहीं था

गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार में नॉर्थ-ईस्ट में पर्यटन एवं निवेश बढ़ा है और औद्योगिक शांति के कारण निजी क्षेत्र का निवेश भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में 80% से अधिक क्षेत्र सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) से मुक्त हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि एक-दो राज्यों को छोड़कर अगले साल पूरे नॉर्थ-ईस्ट से AFSPA को समाप्त कर दिया जाएगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि देश के विकास, नॉर्थ-ईस्ट की समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को मजबूत करने के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के बिना किसी देश का विकास संभव नहीं है। अमेरिका, ईरान और इजराइल के संघर्षों के कारण हम और पूरी दुनिया गहरे संकट से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि यह त्रिपक्षीय समझौता इस वैश्विक संकट में भारत के लिए कितनी जल्दी मददगार साबित होगा यह नहीं कहा जा सकता, लेकिन समय आने पर इससे भारत को काफी सुकून मिलेगा और हम अधिक आत्मनिर्भर बनेंगे। गृह मंत्री ने कहा कि इस समझौते से खनिजों के खनन की संभावनाएँ बढ़ी हैं और छह फील्ड्स के अलावा नगालैंड में हर जगह एक्सप्लोरेशन की संभावना में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे दोनों राज्य न केवल समृद्ध होंगे, बल्कि आपसी सद्भाव भी बढ़ेगा और विकास को नई गति मिलेगी।

गृह मंत्री ने उम्मीद जताई कि नॉर्थ ईस्ट के सारे विवाद, चाहे वह सीमा से जुड़ा हो या कानून-व्यवस्था से, धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समूहों के साथ समझौते हो चुके हैं। 50% से अधिक सीमा विवाद हम सुलझा चुके हैं और आज एक नई शुरुआत हो रही है। श्री शाह ने कहा कि यह उत्तर-पूर्व के स्वर्णिम भविष्य के लिए आशा और विश्वास को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

आज हुआ त्रिपक्षीय समझौता भारत सरकार और असम व नगालैंड राज्य सरकारों की पहचाने गए रुचि वाले क्षेत्र (Area of Interest) में पेट्रोलियम की खोज और उत्पादन गतिविधियों के लिए एक स्थिर, सुरक्षित और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस MoU के माध्यम से क्षेत्र में खनिज तेल से जुड़े कामकाज को सुविधाजनक बनाने के लिए एक समन्वित ढांचा स्थापित किया गया है, जिसमें परिचालन संबंधी निरंतरता (operational continuity), कर्मियों और संपत्तियों की सुरक्षा तथा सभी हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया गया है। यह ढांचा खोज और उत्पादन (exploration and production) गतिविधियों को सहायता प्रदान करेगा, अपस्ट्रीम पेट्रोलियम क्षेत्र (upstream petroleum sector) में निवेश को प्रोत्साहित करेगा तथा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के उद्देश्यों में योगदान देगा।

गृह मंत्रालय ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा असम और नगालैंड की सरकारों के साथ मिलकर MoU पर हस्ताक्षर करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाया। इस समझौते से इलाके में चल रहे और भविष्य के हाइड्रोकार्बन ऑपरेशन्स के लिए ज़्यादा निश्चितता और स्थिरता मिलने की उम्मीद है।

यह MoU सभी संबंधित पक्षों के हितों की रक्षा करते हुए हाइड्रोकार्बन क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी हितधारकों के बीच सहकारी संघवाद (cooperative federalism) और रचनात्मक जुड़ाव की भावना को रेखांकित करता है।

भारत सरकार सहयोगी और पारदर्शी तरीकों से खोज और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में योगदान मिलता है।

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केन्‍द्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने जिनेवा में आयोजित 114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित किया; उन्होंने भारत के श्रम सुधारों, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर प्रकाश डाला

केन्‍द्रीय श्रम एवं रोजगार तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित 114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने सम्मेलन के आयोजन पर अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन को बधाई दी और तेजी से हो रहे वैश्विक परिवर्तनों के बीच सामाजिक न्याय और सम्मानजनक कार्य को बढ़ावा देने में इसके नेतृत्व की सराहना की।

सुश्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि भारत ने “अंत्योदय” के सिद्धांत के अनुरूप व्यापक श्रम सुधार किए हैं। इसके तहत 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेकित किया गया है ताकि अनुपालन को सरल बनाया जा सके, श्रमिकों के कल्याण को मजबूत किया जा सके और एक आधुनिक तथा पारदर्शी श्रम परितंत्र का निर्माण किया जा सके।

उन्होंने कहा कि युवाओं की रोजगार क्षमता 2014 में 34 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 56 प्रतिशत से अधिक हो गई है। 2017 और 2025 के बीच, बेरोजगारी दर 6 प्रतिशत से घटकर 3.1 प्रतिशत हो गई और महिलाओं की कार्यबल भागीदारी 22 प्रतिशत से बढ़कर 38.8 प्रतिशत हो गई।

केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल और ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से श्रम और रोजगार क्षेत्र में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विकास में भारत की प्रगति का उल्‍लेख किया। कौशल और व्यवसायों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व तथा व्यवसायों के अंतरराष्ट्रीय संदर्भ वर्गीकरण को विकसित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन (आईएलओ) के साथ भारत द्वारा किए जा रहे व्यवहार्यता अध्ययन पर भी प्रकाश डाला गया।

उन्होंने भारत के सामाजिक सुरक्षा दायरे में हुए महत्वपूर्ण विस्तारों का भी उल्‍लेख किया। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार यह दायरा लगभग 1001 मिलियन तक पहुंच गया है। भारत में महिला श्रम बल की बढ़ती भागीदारी और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के बारे में भी विस्तार से बताया गया।

इस दौरान सुश्री शोभा करांदलाजे ने रवांडा की लोक सेवा एवं श्रम मंत्री क्रिस्टीन नकुलिकियिंका के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की।

सम्‍मेलन में चर्चा का मुख्य विषय रोजगार सेवाओं, कौशल विकास, कार्यबल नियोजन और डिजिटल शासन में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना था। भारत ने राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल और ई-श्रम पोर्टल की सफलता को विस्तार से बताते हुए इन्हें एक व्यापक डिजिटल सार्वजनिक संसाधन बताया और रोजगार सेवाओं, श्रमिक पंजीकरण, नौकरियों और कौशल मिलान के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने हेतु तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव रखा। रवांडा ने भारत के प्रभावशाली डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की सराहना करते हुए कौशल विकास और श्रम के असंगठित क्षेत्र से संगठित क्षेत्र की ओर बढ़ने में सहयोग मांगा।

उन्होंने श्रीलंका के श्रम मंत्री अनिल जयंत फर्नांडो के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। श्रीलंका ने भारत के श्रम सुधारों में गहरी रुचि दिखाई और चार नए श्रम कानूनों के सफल कार्यान्वयन पर जानकारी ली। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अपने अनुभव साझा करते हुए सुधार की रूपरेखा, कार्यान्वयन पद्धतियों और व्यापक हितधारक परामर्शों पर प्रकाश डाला, जिन्होंने इस परिवर्तनकारी यात्रा को संभव बनाया।

चर्चाओं में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में सहयोग पर भी जोर दिया गया, जिसमें भारत ने कौशल विकास, रोजगार सेवाओं और कार्यबल विकास को मजबूत करने के लिए ई-श्रम और राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल जैसी पहलों के माध्यम से सहायता देने की पेशकश की।

केंद्रीय मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक श्री गिल्बर्ट एफ. होंगबो के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। बैठक के दौरान, उन्होंने सम्मानजनक कार्य, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की। उन्होंने महानिदेशक को भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार के बारे में जानकारी दी। वर्ष 2015 में यह कवरेज 19 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर 64.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके परिणामस्वरूप देशभर में अब 940 मिलियन लोग सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत आ गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक ने कम समय में भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज में हुई उल्लेखनीय वृद्धि की सराहना की। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले एक वर्ष में इस कवरेज का और विस्तार हुआ है, जिससे जनसंख्या का एक और भी बड़ा हिस्सा सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ गया है।

भारत के चार श्रम संहिताओं के माध्यम से किए गए ऐतिहासिक श्रम सुधारों, सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार, श्रम और रोजगार क्षेत्र में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विकास, भविष्योन्मुखी कौशल विकास पहलों और अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता पर ध्यान केंद्रित किया गया।

राज्य मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय व्यावसायिक वर्गीकरण के विकास पर व्यवहार्यता अध्ययन के लिए समर्थन सहित भारत के साथ अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के तकनीकी सहयोग की सराहना की। समावेशी, सुदृढ़ और भविष्य के लिए तैयार श्रम बाजारों के निर्माण के लिए आईएलओ के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया गया।

‘भारत के नए श्रम कानूनों पर वैश्विक संवाद’ विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने चार श्रम कानूनों के माध्यम से भारत के व्यापक श्रम सुधारों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि ये सुधार न्यूनतम मजदूरी संरक्षण को मजबूत करते हैं, असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करते हैं, व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों को सुदृढ़ करते हैं, लैंगिक समानता को बढ़ावा देते हैं और सामूहिक सौदेबाजी को मजबूत करते हैं। उन्होंने कौशल विकास को वैश्विक रोजगार अवसरों से जोड़ते हुए सुरक्षित, व्यवस्थित और पारदर्शी प्रवासन मार्गों को सुनिश्चित करने के लिए समन्वित सरकारी दृष्टिकोण के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता पर भारत की प्राथमिकता को भी स्पष्ट किया।

सुश्री शोभा करंदलाजे ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सामाजिक संवाद के माध्यम से सम्मानजनक काम को बढ़ावा देने, श्रमिक संरक्षण को मजबूत करने, वैश्विक रोजगार क्षमता को बढ़ाने और न्यायसंगत, समावेशी तथा भविष्य के लिए तैयार श्रम बाजार प्रणालियों के निर्माण के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

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हरिद्वार में भारतीय भेषज संहिता (आईपी) 2026 पर वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित; औषध गुणवत्ता को सुदृढ़ करने में औषध संहिता मानकों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था, भारतीय भेषज संहिता आयोग (आईपीसी) ने देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एडीपीआई) और उत्तराखंड के संबद्ध फार्मास्युटिकल विनिर्माण संघों के सहयोग से हरिद्वार में भारतीय फार्माकोपिया (आईपी) 2026 “फार्माकोपिया मानकों और गुणवत्ता अनुपालन के माध्यम से फार्मास्युटिकल विनिर्माण को सुदृढ़ बनाना” विषय पर एक वैज्ञानिक सम्मेलन और संवादात्मक सत्र का आयोजन किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य आईपी-2026 के प्रावधानों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और फार्मास्युटिकल विनिर्माण क्षेत्र में गुणवत्ता अनुपालन को बढ़ावा देना था।

उत्तराखंड भारत के प्रमुख दवा विनिर्माण केंद्रों में से एक है और उन राज्यों में शामिल है जो दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने के लिए आईपी और भारतीय फार्माकोपिया संदर्भ पदार्थों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे हैं। दवा विनिर्माण में राज्य के महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देते हुए, उद्योग जगत में जागरूकता बढ़ाने, फार्माकोपिया की आवश्यकताओं के अनुपालन को बढ़ावा देने और दवा क्षेत्र में आईपी मानकों को एकसमान रूप से अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए इस सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिससे राज्य के दवा निर्माताओं और अन्य हितधारकों को सहयोग प्रदान किया जा सके।

इस कार्यक्रम में दवा विनिर्माण इकाइयों के प्रतिनिधियों, गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता आश्वासन पेशेवरों, नियामक अधिकारियों, विश्लेषणात्मक वैज्ञानिकों और दवा परीक्षण प्रयोगशाला कर्मियों को एक साथ लाया गया ताकि फार्माकोपियल मानकों में हाल के घटनाक्रमों और दवा उद्योग में उनके कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श किया जा सके।

उद्घाटन सत्र का शुभारंभ देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री संदीप जैन के स्वागत भाषण से हुआ। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने फार्मास्युटिकल गुणवत्ता प्रणालियों को मजबूत करने में उद्योग और मानक-निर्धारण निकायों के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया।

इस सत्र को देहरादून स्थित केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के सहायक औषधि नियंत्रक (भारत) श्री सिद्धार्थ सहाय मल्होत्रा ​​और उत्तराखंड के औषधि नियंत्रक एवं राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण श्री ताजबेर सिंह ने भी संबोधित किया, जिन्होंने नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने और जन स्वास्थ्य की रक्षा में औषध संहिता मानकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में, आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन ने औषधियों के लिए वैज्ञानिक रूप से मान्य गुणवत्ता मानकों को स्थापित करने और वैश्विक फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को बनाए रखने में आईपी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने आईपी-2026 में शामिल प्रमुख प्रगति पर प्रकाश डाला और औषध संहिता की आवश्यकताओं के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में उद्योग की भागीदारी के महत्व पर बल दिया।

उद्घाटन सत्र के बाद आईपी के प्रमुख पहलुओं पर तकनीकी विचार-विमर्श और ज्ञान-साझाकरण संबंधी चर्चाओं की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें फार्माकोपियल मानकों, संदर्भ पदार्थों, सूक्ष्मजीवविज्ञानिक गुणवत्ता आवश्यकताओं, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियों, विश्लेषणात्मक जांच और जैविक मानकों में हाल के विकास शामिल थे। सत्रों ने प्रतिभागियों को फार्मास्युटिकल विनिर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण में आईपी मानकों के अनुप्रयोग की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की।

एक विशेष संवादात्मक सत्र ने प्रतिभागियों को आईपीसी वैज्ञानिकों के साथ सीधे बातचीत करने और आईपी-2026 के तकनीकी, नियामक और कार्यान्वयन संबंधी पहलुओं पर स्पष्टीकरण प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया। चर्चाओं में फार्माकोपियल आवश्यकताओं में हो रहे बदलावों को समझने और गुणवत्ता आश्वासन के लिए सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने में उद्योग की गहरी रुचि झलकती है।

इस सम्मेलन में आईपीसी ने औषध संहिता मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और गुणवत्ता सुनिश्चित दवाओं के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए हितधारकों के साथ सहयोग मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। कार्यक्रम का समापन नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ जिससे उत्तराखंड और पूरे देश में दवा की गुणवत्ता और अनुपालन को आगे बढ़ाने के लिए नियामकों, उद्योग प्रतिनिधियों और वैज्ञानिक विशेषज्ञों के बीच निरंतर संवाद स्थापित करने में मदद मिली।

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वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप (अकादमी रत्न) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (अकादमी पुरस्कार) तथा वर्ष 2024 और 2025 के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार की घोषणा

नई दिल्ली स्थित संगीत नाटक अकादमी (संगीत, नृत्य और नाटक की राष्ट्रीय अकादमी) की जनरल काउंसिल ने 22 से 26 मार्च 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित बैठक में प्रदर्शन कला के क्षेत्र की सात प्रतिष्ठित हस्तियों को सर्वसम्मति से अकादमी फेलो (अकादमी रत्न) के लिए चुना है। अकादमी फेलोशिप एक अत्यंत प्रतिष्ठित और दुर्लभ सम्मान है। इसकी संख्या किसी भी समय 40 तक ही सीमित रहती है।

जनरल काउंसिल ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (अकादमी पुरस्कार) के लिए संगीत, नृत्य, थिएटर, पारंपरिक/लोक/आदिवासी संगीत/नृत्य/थिएटर/कठपुतली कला, और प्रदर्शन कला के क्षेत्र में समग्र योगदान/स्कॉलरशिप क्षेत्रों से 108 कलाकारों का चयन भी किया।

चुने गए फेलो और पुरस्कार विजेता पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं और देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आते हैं। इसके अलावा ये प्रतिष्ठित कलाकार संगीत, नृत्य, नाटक, लोक और आदिवासी कला, कठपुतली कला और संबद्ध थिएटर कला रूपों के माध्यम से व्यक्त की जाने वाली प्रदर्शन कला की विविध विधाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

अकादमी की जनरल काउंसिल ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार’ के लिए 106 युवा कलाकारों का भी चयन किया है। ये पुरस्कार संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष द्वारा एक विशेष समारोह में प्रदान किए जाएंगे।

अकादमी पुरस्कार 1952 से प्रदान किए जा रहे हैं। ये सम्मान केवल उत्कृष्टता और उपलब्धि के उच्चतम मानक का प्रतीक हैं, बल्कि निरंतर व्यक्तिगत कार्य और योगदान को भी मान्यता देते हैं। अकादमी फेलो के सम्मान के साथ तीन लाख रुपये का नकद और अकादमी पुरस्कार में एक लाख रुपये की नकद राशि दी जाती है। साथ ही एक ताम्रपत्र और अंगवस्त्रम भी दिया जाता है।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार में पच्चीस हजार रुपये की पुरस्कार राशि के अलावा एक ताम्रपत्र और एक अंगवस्त्रम दिया जाता है।

संगीत नाटक अकादमी फ़ेलोशिप और पुरस्कार माननीय राष्ट्रपति द्वारा एक विशेष अलंकरण समारोह में प्रदान किए जाएंगे।

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संगीत को जीने वालों ने सजाई सुरों की शानदार महफिल

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर , गीत संगीत सुनने और जीने का शौक रखने वालों के लिए रविवार का दिन अत्यंत खूबसूरत रहा कार्यक्रम में कानपुर और आस पास के शहरों के संगीत में रुचि रखने वालों के लिए खुशनुमा त्यौहार जैसा था। कार्यक्रम के आयोजन का विचार रेलबाजार निवासी गोविंद सिंह का था, जिसे अति अल्प समय में बेहद खूबसूरत तरीके से क्रियान्वित करने का कार्य उनकी टीम खासकर बॉबी खान, टेक्निकल टीम के चौधरी भाई आदि ने बखूबी निभाया, मंच संचालन कर रहे बॉबी खान की फुलझड़ियों और माही के अंदाज ने सबका मन मोह लियामाँ शारदे का आशीर्वाद लेकर और विघ्न विनाशक श्री गणेश जी की कृपा पाकर कार्यक्रम का शुभारंभ सुमधुर बांसुरी वादन और गोविंद जी के गायन से हुआ,

समाज के विभिन्न क्षेत्रों जैसे समाजसेवा, मीडिया आदि से भी लोगों की सहभागिता रही।  म्यूजिकल किसी भी कार्यक्रम की सफलता के दो मुख्य घटक गायक/गायिका और श्रोता होते है, और कहना पड़ेगा कि इस मामले में सारे श्रोता बेहद शालीन और अनुशासित दिखे । पूरे कार्यक्रम के दौरान मौजूद सभी श्रोताओं ने गायक गायिकाओं का जोरदार उत्साहवर्धन किया।. इस मंच के तत्वावधान में पहला आयोजन होने के कारण आयोजकों में पहले जो असमंजस और डर था , थोड़ी ही देर में सभी के परफॉर्मेंस और सहयोग से दूर हो गया। पूरे दिन एक से बढ़कर एक नए और पुराने गीतों की वो स्वर लहरी बही कि कोई भी उससे अछूता नहीं रह गया।

कार्यक्रम में राजेंद्र श्रीवास्तव , आशीष अवस्थी , दिवाकर शुक्ला, अतुल दीक्षित , गिरीश मारवाह ,आरती त्रिपाठी , अंजना अवस्थी , रेनू अग्रवाल , रेनू अवस्थी ,सुषमा श्रीवास्तव , प्रीति श्रीवास्तव, भारती दीक्षित, नीलम दीक्षित, स्मिता श्रीवास्तव आदि की धमाकेदार गीतों की प्रस्तुति को सबने खूब सराहा।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के सूरत में 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया, उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया और आधारशिला रखी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के सूरत में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ने एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए गुजरात की जनता को उनके अटूट समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। मोदी ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद मैं पहली बार सूरत आया हूं। सूरत से मैं पूरे गुजरात की जनता को सलाम करता हूं और बधाई देता हूं।

कार्यक्रम में उपस्थित सूरत और नवसारी के अनेक निर्वाचित प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने सभी हितधारकों को याद दिलाया कि गुजरात की जनता ने सेवा भावना का समर्थन किया है। इस विशाल विजय को सेवा के मिशन को और आगे बढ़ाने का जनादेश बताते हुए उन्होंने सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों से और भी अधिक मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने इस दृष्टिकोण को साकार करने में सभी निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा कि हमारा संकल्प  एक विकसित गुजरात और एक विकसित भारत का निर्माण करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संकल्प देश के प्रत्येक गांव, प्रत्येक जिले, प्रत्येक शहर के विकास से ही पूरा होगा।

पर्यावरण दिवस के अवसर पर इस कार्यक्रम के शुभ संयोग की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने आज 5 जून को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक सूरत में उपस्थित होने पर गर्व व्यक्त किया। एक समय प्लेग महामारी से प्रभावित शहर से आज स्वच्छता के लिए पहचाने जाने वाले सूरत के बदलाव को याद करते हुए उन्होंने नागरिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और जन प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों द्वारा पिछले ढाई दशकों में किए गए निरंतर प्रयासों की सराहना की। श्री मोदी ने कहा कि ेयह अत्यंत गर्व की बात है कि प्लेग महामारी से प्रभावित यही सूरत आज स्वच्छता के लिए पहचाना जा रहा है

हरित भविष्य की ओर वैश्विक बदलाव में गुजरात की अग्रणी भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक चारंका सोलर पार्क के साथ-साथ 2009 में भारत के पहले जलवायु परिवर्तन विभाग की स्थापना में राज्य की दूरदर्शिता को याद किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि सूरत किस प्रकार अपनी नवोन्मेषी ‘चक्रीय जल अर्थव्यवस्था’, औद्योगिक उपयोग के लिए अपशिष्ट जल के उपचार और पिछले बारह वर्षों के राष्ट्रव्यापी ‘अपशिष्ट से धन’ आंदोलन के माध्यम से प्रकृति के साथ प्रगति के संतुलन के राष्ट्रीय मंत्र का पूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। भविष्य में पेयजल और जल निकासी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्होंने तापी बैराज परियोजना की मंजूरी का उल्लेख किया और साथ ही सूरत के तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में विस्तार, बढ़ते मेट्रो नेटवर्क और हजीरा औद्योगिक क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होने वाले आगामी हरित इस्पात उत्पादन की भविष्यवाणी की। श्री मोदी ने कहा कि हमारी बसों को इलेक्ट्रिक बनाने से लेकर हरित ऊर्जा का उपयोग करके इस्पात उत्पादन तक, ये सभी कदम सूरत को एक सच्चे हरित शहर के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत करेंगे।

प्रधानमंत्री ने महामारी, वैश्विक संघर्षों और अस्थिर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं सहित अभूतपूर्व चुनौतियों को संबोधित करते हुए, जिसे उन्होंने ‘आपदाओं का दशक’ कहा, 140 करोड़ भारतीयों की इन विशाल वैश्विक झटकों का दृढ़ता से सामना करने के लिए प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में गुजरात के भारी योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य देश की 250 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का पांचवां हिस्सा (50 गीगावाट) उत्पादन करता है और हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया जैसे उभरते क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। पिछले बारह वर्षों में निर्मित ऊर्जा क्षमताओं के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने  सौर ऊर्जा, इथेनॉल मिश्रण, रेलवे विद्युतीकरण, परमाणु ऊर्जा, आधुनिक विद्युत पारेषण नेटवर्क और गैस पाइपलाइनों और बंदरगाह भंडारण क्षमताओं के व्यापक विस्तार में किए गए ऐतिहासिक निवेशों का उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा कि जारी  वैश्विक संकट दर्शाता है कि ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता कितनी आवश्यक है और पिछले बारह वर्षों में देश द्वारा निर्मित विशाल क्षमता आज अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

कार्यक्रम से पहले हजीरा की अपनी यात्रा पर विचार करते हुए प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र को केवल एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं बल्कि ऊर्जा, इस्पात, रक्षा उत्पादन और वैश्विक समुद्री व्यापार को समाहित करने वाले एक व्यापक, समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में वर्णित किया। उन्होंने इस समुद्री-औद्योगिक केंद्र को ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का जीवंत प्रमाण बताया और देश के उन निराशावादी गुटों की कड़ी निंदा की जो आत्मनिर्भरता अभियान का उपहास करते हैं और जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से देश को विदेशी संस्थाओं पर निर्भर रखा है। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि जो लोग लगातार देश के संकल्प को कमतर आंकते हैं वे यह भूल जाते हैं कि दूसरों पर निर्भर देश कभी भी विकास की उन ऊंचाइयों को प्राप्त नहीं कर सकता जिनका वह हकदार है।

आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक कनेक्टिविटी पर सरकार के रुख को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने समर्पित माल गलियारा, बुलेट ट्रेन और वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के नव-उद्घाटित खंड जैसी मेगा परियोजनाओं को औद्योगिक और व्यापारिक विकास के लिए महत्वपूर्ण उत्प्रेरक बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अवसंरचना अभियान समावेशी है, जो दाहोद-बोदेली-वापी गलियारे जैसी पहलों के माध्यम से पहले से उपेक्षित आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। छोटा उदेपुर, नर्मदा, भरूच और तापी के आदिवासी क्षेत्रों में चार लेन के राजमार्ग बनाकर, सरकार यात्रा के समय और माल ढुलाई लागत को कम कर रही है तथा साथ ही स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और सपूतारा जैसे स्थलों पर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन तक अभूतपूर्व पहुंच प्रदान कर रही है। श्री मोदी ने कहा कि हमारे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कनेक्टिविटी लाकर, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उन्हें शिक्षा, चिकित्सा और बेहतर आय के अवसरों के लिए उत्कृष्ट सुविधाएं प्राप्त हों।

सूरत में आधुनिक ईएसआईसी अस्पताल का उद्घाटन करते हुए, जो अन्य राज्यों से आए श्रमिकों और प्रवासी परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करेगा, प्रधानमंत्री ने इन विकास उपलब्धियों को सरकार पर राष्ट्र के अटूट चुनावी विश्वास से जोड़ा। अपने संबोधन का समापन करते हुए उन्होंने भारतीय नागरिकों के असीम आशावाद की सराहना की और एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए जनता की सामूहिक शक्ति पर पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा कि भारत अविश्वसनीय आकांक्षाओं और असीम आशावाद से परिपूर्ण देश है और जब राष्ट्र की पूरी शक्ति पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित होती है, तो ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है जिसे हम प्राप्त नहीं कर सकते।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू में देश के सातवें क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारम्भ किया

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जम्मू में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि भारत के क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान नेटवर्क के विस्तार के लिए जल्द ही लखनऊ में भी इसी प्रकार का एक केंद्र स्थापित किया जाएगा।

जम्मू स्थित यह केंद्र देश का सातवां क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र बन गया है और यह जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश के लिए काम करेगा। इसके साथ ही यह हिमालयी क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार की गई मौसम सेवाएं, आपदा चेतावनी और जलवायु सहायता प्रदान करेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह नया केंद्र मैदानी इलाकों से लेकर ऊंचे पर्वतों तक फैले विविध भूभाग वाले क्षेत्र में मौसम की निगरानी, ​​पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करेगा। यह जिला स्तरीय पूर्वानुमान, पर्वतीय मौसम पूर्वानुमान, पर्यटक सलाह, शहर-विशिष्ट मौसम सेवाएं और अचानक बाढ़, बादल फटने, हिमस्खलन, भारी हिमपात, आंधी-तूफान और भूस्खलन की चेतावनी प्रदान करेगा। इन सेवाओं से अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों, किसानों, परिवहन संचालकों, पनबिजली परियोजनाओं, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और दुर्गम भूभाग में कार्यरत सुरक्षा बलों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले एक दशक में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम विज्ञान संबंधी बुनियादी ढांचे के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 2014 में इस क्षेत्र में कोई डॉप्लर मौसम रडार नहीं थालेकिन अब जम्मूश्रीनगरलेह और बनिहाल टॉप पर चार डॉप्लर मौसम रडार कार्यरत हैं। मिशन मौसम के तहत अनंतनागराजौरीबारामूलाकिश्तवार और डोडा के लिए पांच अतिरिक्त डॉप्लर मौसम रडार प्रस्तावित किए गए हैं।

अवलोकन नेटवर्क का भी काफी विस्तार हुआ है। वर्तमान में इस क्षेत्र में 56 वेधशालाएं हैंजिनमें 15 मैनुअल वेधशालाएं, 25 स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) और 16 स्वचालित वर्षामापी (एआरजीशामिल हैंजबकि 2014 में 13 एडब्ल्यूएस और 14 एआरजी थी। हाल ही मेंकरगिलरामबन जिले के उखराल और माता वैष्णो देवी भवन में एडब्ल्यूएस स्थापित किए गए हैं। चालू वित्त वर्ष में लगभग आठ और एडब्ल्यूएस तथा पांच एआरजी स्थापित किए जाने की उम्मीद है। दैनिक वर्षा निगरानी योजना के अंतर्गत स्टेशनों की संख्या 2014 में 30 से बढ़कर वर्तमान में 85 हो गई हैजिससे वर्षा की निगरानी और पूर्वानुमान क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आरएमसी जम्मू की स्थापना भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के क्षेत्रीय संचालन का एक महत्वपूर्ण पुनर्गठन है। अब तक, दिल्ली स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को मौसम और जलवायु सेवाएं प्रदान करता था। जम्मू केंद्र की स्थापना के साथ, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के लिए मौसम सेवाओं का प्रबंधन जम्मू से किया जाएगा, जबकि प्रस्तावित लखनऊ केंद्र उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सेवाएं प्रदान करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्र में शुरू की गई कई वैज्ञानिक और संस्थागत पहलों पर भी प्रकाश डाला। श्रीनगर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने मौसम और जलवायु विज्ञान में अनुसंधान और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एसकेयूएएसटी)-जम्मू, एसकेयूएएसटी-कश्मीर और इस्लामिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में बादलों और एरोसोल के अध्ययन के लिए स्विस वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से पटनीटॉप में स्थापित काफी ऊंचाई वाले बादल भौतिकी प्रयोगशाला का भी उल्लेख किया।

भूकंप निगरानी पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जम्मू और कश्मीर के भूकंपीय नेटवर्क का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है। जम्मू और कश्मीर के भूकंपीय स्टेशनों को डिजिटल सिस्टम में अपग्रेड किया गया है और उधमपुर में एक अतिरिक्त वेधशाला स्थापित की गई है। किश्तवार में भी एक नई भूकंपीय वेधशाला प्रस्तावित है। वर्तमान में, जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में पांच भूकंपीय स्टेशन कार्यरत हैं, जो राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को लगभग वास्तविक समय का डेटा भेजते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि पिछले वर्ष की आपदा के मद्देनजर किश्तवार में एक स्वचालित मौसम केंद्र और एक भूकंप विज्ञान केंद्र स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि एक सदी से अधिक समय से कार्यरत श्रीनगर मौसम विज्ञान वेधशाला को विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा शताब्दी वेधशाला के रूप में मान्यता दी गई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब क्षेत्रीय पूर्वानुमानजिलावार पूर्वानुमानपर्यटकों के लिए अलग पूर्वानुमान और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग पूर्वानुमान उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि अनुकूलित पूर्वानुमान हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगा।

आपदा प्रबंधन में मौसम सेवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अचानक आने वाली बाढ़, बादल फटने, हिमस्खलन, भारी बर्फबारी, आंधी-तूफान और भूस्खलन – इन सभी का समय पर पूर्वानुमान लगाया जाएगा।

 

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होने की अपील की

उपराष्ट्रपति ने विश्व पर्यावरण दिवस को चिह्नित करते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत राष्ट्रपति भवन में पौधारोपण किया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सभी भारतीयों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होने और पर्यावरण की रक्षा एवं संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय रूप से योगदान देने और स्थिरता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा कि भारत के सभ्यतागत ज्ञान ने लंबे समय से मानवता को प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना सिखाया है। तिरुक्कुरल के चिरस्थायी संदेश— “பகுத்துண்டு பல்லுயிர் ஓம்பல்” (संसाधनों का विवेकपूर्ण बंटवारा और सभी जीवित प्राणियों की रक्षा)— का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थिरता और सभी प्रकार के जीवन के प्रति करुणा भारत की सांस्कृतिक मूल्यों में गहराई से निहित मूलभूत कर्तव्य हैं।

उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को सुदृढ़ करने और दैनिक जीवन में सतत प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य के निर्माण हेतु सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

 

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