भारत में बाल विवाह एक ऐसी सामाजिक और भौगोलिक चुनौती है, जो आधुनिक विकास और शिक्षा विस्तार के बावजूद आज भी अनेक समुदायों में गहराई तक जड़ें जमाए हुए है। यह प्रथा विशेष रूप से लड़कियों के जीवन को प्रभावित करती है—उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, अवसर, क्षमता और आत्मनिर्भर भविष्य, सभी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019–21) के अनुसार 20–24 वर्ष आयु-वर्ग की 23.3% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले ही हो चुका था। यह तथ्य इस बात का संकेत है कि कानूनी निषेध और नीति-हस्तक्षेपों के बावजूद सामाजिक-जड़ता, परंपरा और असमान विकास के कारण बाल विवाह अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। इसके स्थानिक पैटर्न भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं—पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्य, जैसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और छत्तीसगढ़, अभी भी बाल विवाह की उच्चतम दर वाले क्षेत्रों में आते हैं। इन राज्यों में शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना का कमजोर होना, ग्रामीण निर्धनता का व्यापक होना, सामाजिक-पितृसत्तात्मक मान्यताओं का प्रबल होना और महिलाओं की निम्न साक्षरता दर जैसे कारक इस कुप्रथा को बनाए रखते हैं। कम आयु में विवाह लड़कियों को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर अनेक जोखिमों के सामने ला देता है—कम उम्र में गर्भधारण से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर बढ़ती है, कुपोषण और एनीमिया की समस्याएँ गंभीर रूप ले लेती हैं और प्रजनन स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर पड़ता है। शिक्षा रुक जाने से लड़कियों के कौशल-विकास, रोजगार और आजीविका के अवसर भी सीमित हो जाते हैं, जिससे उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रगति बाधित होती है। भारतीय न्याय संहिता (2023) ने 18 वर्ष से कम आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध को बलात्कार की श्रेणी में रखा है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने भी विभिन्न याचिकाओं में राज्यों को बाल विवाह पर कड़ा नियंत्रण लागू करने के निर्देश दिए हैं। भारत सरकार द्वारा 2025 तक बाल विवाह की दर को 23.3% से घटाकर 10% तक लाने और 2030 तक देश को बाल विवाह-मुक्त बनाने का लक्ष्य भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विवाह पंजीकरण को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देना, समुदायों और धार्मिक संस्थानों को जागरूकता अभियानों में शामिल करना, महिलाओं को नेतृत्वकारी भूमिकाओं में सक्षम बनाना, तथा बाल संरक्षण एजेंसियों की क्षमता को मजबूत करना जैसे बहुआयामी उपाय लागू किए जा रहे हैं। समग्रतः, बाल विवाह केवल एक कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी एक गहरी सामाजिक-संरचनात्मक समस्या है, जिसका समाधान तभी संभव है जब सरकार, समाज और परिवार—तीनों स्तरों पर सतत और सामूहिक प्रयास किए जाएँ।~डॉ रश्मि गोयल
मधुमक्खी के हमले से शहीद अंपायर को खेल प्रेमियों ने दी श्रद्धांजलि
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर । क्रिकेट मैच के दौरान मधुमक्खियों के हमले से शहीद हुए अंपायर मानिक गुप्ता को आज याद किया गया । परेड स्थित भरत स्ट्राइकर क्लब कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ खिलाड़ियों एवं अंपायर ने पुष्पांजलि कर स्वर्गीय मानिक गुप्ता को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान मौजूद खेल प्रेमियों ने 2 मिनट का मौन रखकर मृतक अंपायर की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ अंपायर एवं क्रिकेट कोच जहीर अहमद ने कहा कि मानिक गुप्ता क्रिकेट के लिए एक समर्पित व्यक्ति थे,जिन्होंने संपूर्ण जीवन क्रिकेट के लिए ही दे दिया।ये एक हृदय विदारक घटना है,जिसने उनके परिवार को और क्रिकेट जगत को गहरी क्षति की है। भरत क्लब के कप्तान अरुण पाण्डेय(पूर्व अंपायर), ने कहा कि क्रिकेट मैदान में उनकी मृत्यु क्रिकेट के प्रति शहादत है। उन्होंने अपना पूरा जीवन क्रिकेट को समर्पित कर दिया था ।वरिष्ठ खिलाड़ी अतुल सक्सेना ने कहा स्वर्गीय मानिक गुप्ता का परिवार क्रिकेट पर ही निर्भर था, इसलिए उनके पूरे परिवार के समक्ष आर्थिक समस्या होगी,अतः उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को उनके परिवार को आर्थिक मदद करनी चाहिए। इस दौरान भारतेन्दु पुरी,जितेन्द्र मिश्रा और प्रदीप पांडे ने भी अपने विचार रखे। श्रद्धांजलि सभा का संचालन वरिष्ठ खिलाड़ी संजय भारती ने किया। सभा में अंपायर पुनीत झा,आदित्य पांडे,सुनील साहू, सतीश पांडे , प्रशान्त पुरी,दुर्गा सिंह,अतुल साहू, बाकर अली,रमेश शर्मा,पृथ्वीराज, कृपेश त्रिपाठी,दीपक पांडेय आदि ने उनकी श्रद्धांजलि अर्पित की।
Read More »छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतर महाविद्यालय ताइक्वांडो प्रतियोगिता आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज कानपुर ने अंतर महाविधालयी ताइक्वांडो प्रतियोगिता का भव्य एवं सफल आयोजन विश्व विद्यालय के बहु उद्देशयीय सभागार में आयोजित किया गया। यह प्रतियोगिता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक एवं प्राचार्या प्रो सुमन के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में सम्पन्न हुई।
मुख्य अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता पूमसे खिलाड़ी राम गोपाल एवं बलराम यादव उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों को तकनीकी दक्षता, आत्मसंयम और निरंतर अभ्यास के महत्व पर प्रेरणादायी विचार साझा किए।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के खेल सचिव डॉ. निमिषा सिंह कुशवाहा, सह-प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर पांडे, की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों की टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और क्योरुगी एवं पूमसे दोनों वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता परिणाम इस प्रकार रहे — पूमसे (व्यक्तिगत) वर्ग में श्वेता तिवारी (CSJMU) ने प्रथम, ऋषिका (DAV) ने द्वितीय, दुर्गा त्रिवेदी (BND) ने तृतीय तथा शालिनी गुप्ता (DGPG) ने चतुर्थ स्थान प्राप्त किया। टीम पूमसे में CSJMU की श्रृष्टि वर्मा, श्वेता तिवारी एवं सानिया गौतम की टीम ने प्रथम स्थान अर्जित किया, जबकि दुर्गा त्रिवेदी (BND), दिव्या मौर्य (DAV) एवं रिया सुदर्शन (BND) की टीम द्वितीय रही। क्योरुगी के अंडर 46 किग्रा वर्ग में प्रभा सिंह (KSDDD PG) प्रथम एवं पायल (PD महिला) द्वितीय रहीं; अंडर 49 किग्रा वर्ग में सानिया गौतम (CSJMU) प्रथम एवं अर्चिता बिरहा (PPN) द्वितीय रहीं; तथा अंडर 53 किग्रा वर्ग में शिमरन कनौजिया ( बाबू सिंह) प्रथम एवं ऋषिका (DAV) द्वितीय स्थान पर रहीं। समग्र प्रदर्शन के आधार पर CSJMU को ओवरऑल चैंपियन तथा बाबू सिंह महाविद्यालय को रनर-अप घोषित किया गया।
प्रतियोगिता अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में सम्पन्न हुई। विश्वविद्यालय परिवार ने सभी विजेताओं एवं प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।
सम्पूर्ण कार्यक्रम की आयोजन सचिव प्रो प्रीती पाण्डेय ने सभी ‘ अतिथियो, खिलाडियो, मिर्णायक मण्डल का आभार व्यक्त किया ।
Read More »छात्राओं को शैक्षिक एवं व्यवसायिक निर्देशन के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज, कानपुर में प्राचार्या प्रो. सुमन के पर्यवेक्षण में शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा छात्राओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य छात्राओं का शैक्षिक एवं व्यवसायिक निर्देशन करना था। कार्यक्रम में सी. एस. जे. एम. यूनिवर्सिटी के बी. एड. विभाग की प्रवक्ता डॉ. स्नेह पाण्डेय एवं डॉ. प्रिया तिवारी ने छात्राओं को विश्वविद्यालय में चलाए जा रहे बी. एड. एवं अन्य कोर्सेज की जानकारी प्रदान की एवं छात्राओं की जिज्ञासा का निवारण किया।
कार्यक्रम का संयोजन शिक्षाशास्त्र विभाग प्रभारी प्रो. चित्रा सिंह तोमर के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षाशास्त्र विभाग की असि. प्रो. ऋचा सिंह, डॉ. अनामिका राजपूत, डॉ. रेनू शुक्ला द्वारा किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की शिक्षिकाएं कर्मचारी एवं छात्राएं उपस्थित रहे।
एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में एमएसएमई–टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर द्वारा उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित ल
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर में एमएसएमई–टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर द्वारा उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम(Entrepreneurship Awareness Program) का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुमन ने अपने संबोधन में कहा कि आज के युवाओं के लिए उद्यमिता आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की आयोजन सचिव प्रो. प्रीति पांडेय ने अपने वक्तव्य में कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा एमएसएमई द्वारा संचालित योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं के रूप में हृदयनारायण पांडेय, तनमय तिवारी, सपना रॉय एवं आदित्य निगम उपस्थित रहे।
सह-आयोजक मंडल में डॉ. शैल बाजपेयी, डॉ. रोली मिश्रा एवं डॉ. कोमल सरोज का विशेष योगदान रहा। मुख्य वक्ताओं ने उद्यमिता के महत्व, स्टार्टअप की संभावनाओं, व्यवसाय स्थापना की प्रक्रिया तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और अपने प्रश्नों के माध्यम से जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रो.अलका टंडन प्रोफेसर रेखा चौबे, प्रो.मीनाक्षी व्यास प्रो.निशा वर्मा। प्रो. गार्गी यादव,पूजा गुप्ता डॉ रेशमा, डॉ प्रीत अवस्थी डॉक्टर शुभा बाजपेई आदि उपस्थित रहे।
एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन, पोषण एवं खाद्य सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा लल्लनपूर्वा बस्ती में संचालित सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन समारोह दिनांक 17 फ़रवरी 2026 को महाविद्यालय प्राचार्या प्रोफेसर वन्दना निगम के के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। समापन दिवस का मुख्य विषय “पोषण एवं खाद्य सुरक्षा अभियान” रहा, जिसमें स्वयंसेविकाओं ने बस्ती की महिलाओं एवं बच्चों को संतुलित आहार, स्वच्छ भोजन, एनीमिया से बचाव तथा कुपोषण के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी।कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक और संवाद सत्र आयोजित किए गए। स्वयंसेविकाओं ने बताया कि हरी सब्ज़ियाँ, दालें, दूध, फल और स्वच्छ पानी का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। साथ ही खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, साफ-सफाई बनाए रखने और मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचने के उपाय भी बताए गए।
कार्यक्रम में महाविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना समिति की वरिष्ठ सदस्या डॉ अंजना श्रीवास्तव ने कहा कि सही पोषण से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है और युवाओं की भागीदारी से जागरूकता अभियान और प्रभावी बनता है। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही ने बताया कि शिविर के दौरान की गई गतिविधियों स्वच्छता, सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, ए आई/ डिजिटल लिटरेसी, साइबर सिक्योरिटी, नशामुक्त युवा – नशा मुक्त भारत अभियान और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए।समापन अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वयंसेविकाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अंत में सभी ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में पोषण संबंधी जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय की शिक्षिकाओं डॉ . साधना सिंह, डॉ . दीप्ति शुक्ला, डॉ . ज्योत्सना पाण्डेय, बसंत कुमार समस्त स्वयंसेविकाओं, क्षेत्रीय नागरिकों तथा मीडिया बंधुओं का विशेष योगदान रहा।कार्यक्रम अधिकारी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
एनएसएस विशेष शिविर एआई उपयोग शपथ एवं मतदाता जागरूकता अभियान आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 16 फरवरी दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा लल्लनपूर्वा बस्ती में संचालित सात दिवसीय विशेष शिविर के षष्टम् दिवस पर एआई जिम्मेदार उपयोग की शपथ तथा मतदाता जागरूकता से संबंधित विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही के निर्देशन एवं प्राचार्या प्रो. वंदना निगम के मार्गदर्शन में कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रथम सत्र का शुभारंभ प्रातः व्यायाम एवं योगाभ्यास से हुआ। इसके उपरांत इंडिया ए आई मिशन द्वारा आयोजित ए आई समिट के अंतर्गत जिम्मेदार एआई उपयोग हेतु अधिकतम प्रतिज्ञाओं का रिकॉर्ड बनाने के प्रयास में एनएसएस स्वयंसेविकाओं ने “AI for All” की शपथ ली। स्वयंसेविकाओं ने डिजिटल तकनीक के सुरक्षित, नैतिक एवं सकारात्मक उपयोग का संकल्प लिया।
स्वल्पाहार के उपरांत द्वितीय सत्र में स्वयंसेविकाओं ने बस्ती क्षेत्र में मतदाता जागरूकता अभियान चलाया। लोगों को मतदान के महत्व, मतदाता पहचान पत्र बनवाने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। रैली के माध्यम से “हर वोट की कीमत”, “मतदान ज़रूरी–लोकतंत्र मज़बूत” जैसे नारों से लोगों को प्रेरित किया गया।इस अवसर पर पोस्टर एवं स्लोगन प्रदर्शनी आयोजित की गई तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बालिका शिक्षा, महिला सम्मान और एआई के जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया गया। स्वयंसेविकाओं ने बस्तीवासियों से संवाद कर प्रत्येक निर्वाचन में मतदान करने की अपील एवं शपथ भी दिलाई।कार्यक्रम में 50 स्वयंसेविकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बस्तीवासियों ने इस पहल की सराहना करते हुए महिला सम्मान, डिजिटल जिम्मेदारी और मतदान जागरूकता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। शिविर को सफल बनाने में डॉ. अंजना श्रीवास्तव, डॉ. साधना सिंह, बसंत कुमार तथा ग्रुप लीडर्स वैष्णवी, सिमरन, वासु, वंशिका एवं शीतल का विशेष सहयोग रहा। अंत में राष्ट्रगान के साथ षष्टम् दिवस का समापन किया गया।
Read More »डी.ए-वी. कॉलेज में प्राथमिक उपचार एवं सीपीआर विषयक ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। डी ए वी कॉलेज में रीजेंसी इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग (रीजेंसी हेल्थकेयर लिमिटेड की इकाई) के सहयोग से प्राथमिक उपचार (First Aid), सीपीआर (CPR) एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर परामर्श विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक कौशलों के प्रति जागरूक करना तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार संभावनाओं से परिचित कराना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अरुण कुमार दीक्षित ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ उन्हें व्यावहारिक दक्षताओं से भी सशक्त करते हैं।
कार्यक्रम में विशिष्ट वक्तव्य प्रोफेसर अनुराग सक्सेना द्वारा प्रदान किया गया। उन्होंने प्राथमिक उपचार एवं सीपीआर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समय पर दी गई उचित सहायता किसी भी व्यक्ति के जीवन की रक्षा कर सकती है।
कार्यक्रम की विषय-वस्तु का प्रस्तुतीकरण डॉ. सरस द्वारा किया गया। रीजेंसी संस्थान के नर्सिंग विशेषज्ञ श्रीधर एवं ज्योति ने सीपीआर तथा प्राथमिक उपचार की प्रक्रियाओं का विस्तृत एवं व्यवहारिक विवरण प्रस्तुत किया। साथ ही, करियर विशेषज्ञ जीशान ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उपलब्ध विविध अवसरों की जानकारी दी। इस अवसर पर डॉ. भावना श्रीवास्तव, डॉ. सुनीत कुमार सक्सेना, डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी एवं डॉ. अरुण कुमार तिवारी सहित विभिन्न संकायों के अनेक शिक्षक ऑनलाइन रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन नीतू पाण्डेय, कोमल यादव एवं विशाल कुमार द्वारा किया गया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आशुतोष कुमार झा ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की तथा कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
Read More »वित्त वर्ष 2025-26 (जनवरी 2026 तक) में क्षमता में वृद्धि 50,000 मेगावाट से अधिक हो गई है
चालू वित्त वर्ष 2025-26 (जनवरी 2026 तक) के दौरान, सभी स्रोतों से रिकॉर्ड 52,537 मेगावाट उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है। इसमें से 39,657 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से जोड़ी गई है जिसमें 34,955 मेगावाट सौर ऊर्जा और 4,613 मेगावाट पवन ऊर्जा शामिल हैं।
यह एक वर्ष में अब तक की सबसे अधिक क्षमता वृद्धि को दर्शाता है, जो वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान प्राप्त किए गए 34,054 मेगावाट के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया है।
इसके अलावा, इसका यह भी तात्पर्य है कि 2025-26 (31.1.2026 तक) के दौरान देश की कुल स्थापित क्षमता में 11 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।
31 जनवरी 2026 तक, भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 520,510.95 मेगावाट है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता: 248,541.62 मेगावाट
- गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता: 271,969.33 मेगावाट
- परमाणु ऊर्जा: 8,780 मेगावाट
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: 263,189.33 मेगावाट
वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय के दो दिवसीय चिंतन शिविर का आज कर्नाटक के कूर्ग में सफलतापूर्वक समापन

इस शिविर का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने और वित्तीय संस्थानों की भूमिका को लेकर नए दृष्टिकोण और रचनात्मक विचारों को प्रोत्साहित करना था। इस शिविर में सभी हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विकसित भारत के रणनीतिक संदर्भ में बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं के प्रतिभागियों को जिन महत्वपूर्ण कदमों को उठाने की आवश्यकता है, उन पर गहन चर्चाएं हुई।
अपने संबोधन में, वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव एम. नागराजू ने विकसित भारत के लक्ष्यों के अनुरूप, सकल घरेलू उत्पादन में साख के अनुपात को बढ़ाने, वित्तीय संस्थानों को अधिक चुस्त बनाने और बड़े पैमाने पर वित्तपोषण के नए तरीके तलाशने की आवश्यकता पर बल दिया। सचिव ने कहा कि सत्र के दौरान प्राप्त विचार विभाग और उसके वित्तीय संस्थानों के लिए एक साझा दृष्टिकोण और कार्य योजना का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. के. पी. कृष्णन ने अपने भाषण में भारत में कुछ और गिफ्ट-शहरों की आवश्यकता, एक मजबूत और समृद्ध बॉन्ड बाजार, मध्यस्थता की लागत में कमी आदि पर जोर दिया।
नीति आयोग के पूर्व सीईओ श्री अमिताभ कांत ने सभा को संबोधित करते हुए एमएसएमई के वित्तपोषण में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका, जन आधार की तर्ज पर जन व्यापार की आवश्यकता और व्यापार करने की लागत को और कम करने के लिए उपयुक्त नियम-आधारित साधनों के विकास के बारे में बताया।
अन्य प्रख्यात विशेषज्ञों, पैनलिस्टों और प्रतिभागियों ने बैंकिंग और साइबर सुरक्षा, वित्तीय समावेशन, 2047 तक पूर्णतः बीमित और पेंशनभोगी समाज सुनिश्चित करने जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। चर्चा के दौरान शैडो सीईओ की अवधारणा को दोहराना, स्वायत्त संगठन, डिजिटल ट्रस्ट, नॉलेज हाफ लाइफ, निवेश बढ़ाने के नवीन तरीके, नए बीमा और पेंशन उत्पादों की खोज, वित्तीय साक्षरता बढ़ाना और तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश में अधिक लचीली वित्तीय प्रणाली बनने के तरीकों सहित कई विचार सामने आए।
शीर्ष टीम प्रभावशीलता, सचेतनता और कल्याण पर सत्र भी आयोजित किए गए जिनमें प्रतिभागियों ने उच्च प्रदर्शन करने वाली टीमों के निर्माण, विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ तनाव प्रबंधन के लिए सचेतनता का अभ्यास करने और सतत संगठनात्मक विकास को गति देने के लिए कल्याण की संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व का अनुभव किया।

चिंतन शिविर, 2026 ने इस बात पर फिर से जोर दिया कि भारतीय वित्तीय संस्थानों का भविष्य बड़ी महत्वाकांक्षाओं और परिवर्तनकारी उद्देश्य से आकार लेगा जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक/सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थान राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित संस्थानों के रूप में उभरने की आकांक्षा रखने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।
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