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आकाश से बरसात तक : क्लाउड सीडिंग का विज्ञान और प्रभावशीलता

क्लाउड सीडिंग, यानी कृत्रिम वर्षा उत्पन्न करने की एक वैज्ञानिक तकनीक। जब बादल मौजूद होते हुए भी वर्षा नहीं होती, तब वैज्ञानिक उनमें कुछ रासायनिक तत्वों का छिड़काव करते हैं, जिससे जलवाष्प संघनित होकर वर्षा की बूंदों में बदल जाती है।आमतौर पर इसमें सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड या ड्राई आइस जैसे पदार्थों का प्रयोग किया जाता है।आज बढ़ते तापमान, घटते जलस्तर, पिघलते ग्लेशियर और जल–विनाश की वजह से सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है। ऐसे में क्लाउड सीडिंग को एक आशाजनक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।यह तकनीक कई देशों में लंबे समय से सफलतापूर्वक अपनाई जा रही है, जबकि भारत में अभी यह सीमित स्तर पर ही प्रयोग में है।हाल के वर्षों में भारत सरकार और कई राज्य सरकारें सूखे से निपटने के लिए इस तकनीक को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इसका प्रयोग हो चुका है।हालाँकि यह भी सच है कि हर जगह या हर मौसम में क्लाउड सीडिंग कारगर नहीं होती।अगर बादलों में नमी का स्तर या तापमान अनुकूल न हो, तो वर्षा की संभावना कम हो जाती है।इस प्रक्रिया के लिए वायुमंडलीय परिस्थितियाँ, ऊर्जा और नमी का सही संतुलन होना जरूरी है।इसी कारण बिना मौसम अनुमान के क्लाउड सीडिंग करना महंगा और व्यर्थ साबित हो सकता है।दिल्ली–एनसीआर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गंगा के मैदानी इलाकों में यह तकनीक वायु प्रदूषण घटाने के उपाय के रूप में भी चर्चा में रही है।ठंड के मौसम में जब वायुमंडलीय परतें नीचे बैठ जाती हैं और प्रदूषक कण ऊपर नहीं जा पाते, तब हवा की गुणवत्ता “खराब” या “बहुत खराब” स्तर पर पहुँच जाती है।ऐसे में यदि मौसम अनुकूल हो तो क्लाउड सीडिंग प्रदूषण कम करने का एक संभावित उपाय हो सकता है।

क्लाउड सीडिंग की संभावनाएँ और सीमाएँ

ठंड और गंगा–यमुना के मैदानी क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर रहती है।यह तब और बढ़ जाती है जब हवा की गति कम हो जाती है और धूल तथा धुआँ वातावरण में फँस जाता है।क्लाउड सीडिंग को इस स्थिति में संभावित समाधान के रूप में देखा गया है, क्योंकि कृत्रिम वर्षा से हवा में मौजूद धूल के कण नीचे बैठ सकते हैं और प्रदूषण का स्तर घट सकता है।हालाँकि यह प्रक्रिया पूरी तरह मौसम और नमी पर निर्भर करती है।भारत में इसका प्रयोग पहली बार 1945 में अमेरिका के उदाहरण से प्रेरित होकर किया गया था।इसके बाद 1983, 1984 और 1993–94 में भारत के कई राज्यों में इस पर कार्य हुआ।आईआईटी कानपुर ने भी 2003–06 के बीच क्लाउड सीडिंग पर शोध किया।आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर मनीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि बादलों में 15 फ़ीसदी नमी के चलते कृत्रिम बारिश का प्रयोग सफल नहीं हो सका , लेकिन उन्होंने माना कि भविष्य में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।दिल्ली की जलवायु को देखते हुए सर्दियों में क्लाउड सीडिंग की संभावना कम रहती है, क्योंकि ठंड तो होती है लेकिन पर्याप्त नमी नहीं होती।जब तक कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) न आए, तब तक यहाँ बादलों का बनना मुश्किल होता है।यानी, तकनीकी तौर पर जब तक वातावरण अनुकूल न हो, क्लाउड सीडिंग संभव नहीं ~डॉ. रश्मि गोयल

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सहज योग पर कार्यशाल आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में  सहज योग पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसके लिए नागपुर से ६ सदस्यीय टीम आई जिसमे महेश , राजू , उमेश, मेघा, वंदना एवं वनिता रहीं। माँ सरस्वती के वंदन से कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। आज की तनाव भरी ज़िंदगी में आस पास के लोगों से प्रभावित होने ,एकाग्रता की कमी ,पढ़ाई में रुचि न होने और मानसिक रूप से परेशान रहने की समस्या से बचने के लिये इस कार्यशाला का आयोजन किया गया ।
मुख्य वक्ता मेघा लड़वीकर ने सर्वप्रथम विभिन्न नाड़ी चक्रों की सैद्धांतिक जानकारी छात्राओं को प्रदान की। इसके पश्चात 20 मिनट का सहज योग अभ्यास सदन को करवाया। मैडिटेशन के पश्चात छात्राओं के अनुभव पूछे और प्रत्येक व्यक्ति के भिन्न भिन्न प्रश्नों के उत्तर दिए तथा उनके अनुभव के कारण बताए।

प्राचार्या प्रो. सुमन ने सहज योग समिति का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज की तनाव भरी जिंदगी में सहज योग का अभ्यास वांछनीय है। कार्यशाला का संयोजन तथा संचालन डॉ प्रीति सिंह द्वारा किया गया। इस कार्यशाला में ६२ छात्राओं तथा २५ प्रवक्ताओं ने सहजयोग की सहजता को समझा और लाभान्वित हुए, सभी छात्राओं तथा शिक्षिकाओं ने कार्यशाला में उत्साहपूर्ण सहभागिता की।

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बुलबुले फेस्टिवल 2025 – लखनऊ का प्रथम कला एवं सांस्कृतिक बाल महोत्सव (तीसरा संस्करण)

भारतीय स्वरूप संवाददाता लखनऊ, नवंबर 2025: लखनऊ में बच्चों के लिए समर्पित कला एवं संस्कृति का अद्वितीय उत्सव ‘बुलबुले फेस्टिवल 2025’ 7 और 8 नवम्बर 2025 को इंडिया लिटरेसी हाउस, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन, लखनऊ द्वारा किया जा रहा हैl एक ऐसी संस्था जो कला और ‘मेकिंग’ के माध्यम से बच्चों में कल्पनाशक्ति, रचनात्मक आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है। बुलबुले फेस्टिवल बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और कलाकारों सभी को एक ही मंच पर लाता है, जहाँ कला, खेल और सीख एक साथ मिलकर एक जीवंत अनुभव का रूप लेते हैं। कहानी-कथन से लेकर कठपुतली नाट्य तक, कार्यशालाओं से लेकर खेलों तक, संगीत से लेकर विविध कलाओं तक, यह महोत्सव हर बच्चे के लिए खोज, आनंद और सृजन का एक अद्भुत अवसर प्रदान करेगाl इस वर्ष, कई संस्थाएँ, सरकारी अधिकारी, शिक्षकों, अभिभावकों और स्वयं बच्चों ने मिलकर इस उत्सव को साकार करने में योगदान दिया है। सभी का साझा विश्वास यही है कि “बच्चे सबसे गहराई से और स्वाभाविक रूप से आनंद और खेल के माध्यम से सीखते हैं।”

स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन की को-फाउंडर ऋद्धि ने कहा, “‘बुलबुले’ इस विश्वास से जन्मा है कि हर बच्चे के भीतर एक अद्भुत और जादुई दुनिया होती है, और जब उन्हें खुलकर सोचने की आज़ादी मिलती है, तो उनके विचार रंग-बिरंगी, जीवंत बुलबुलों की तरह उड़ने लगते हैं। यह उत्सव हर उस बच्चे की असीम संभावनाओं को उजागर करने का वादा करता है जो इस रंगीन माहौल में कदम रखता है। हमारा उद्देश्य है कि हर बच्चा कला, खेल और रचनात्मक सोच के ज़रिए अपनी आवाज़ और पसंद को आत्मविश्वास के साथ व्यक्त कर सके,” ऐसा कहना है।”

बुलबुले फेस्टिवल 2025 में आकर्षक प्रस्तुतियों, सहभागिता-आधारित कार्यशालाओं और खोजपरक गतिविधियों की विविध श्रृंखला शामिल होगी जिनका उद्देश्य बच्चों की जिज्ञासा, कल्पना और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना है। यह आयोजन सभी के लिए खुला है, विशेषकर उन बच्चों के लिए जो सामान्यतः खेल और अनुभव के माध्यम से सीखने के अवसरों से वंचित रहते हैं। इस वर्ष, स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन ने ‘बचपन मनाओ’, जो कि एकस्टेप फाउंडेशन की पहल है, के साथ साझेदारी की है। ‘बचपन मनाओ’ पहल का उद्देश्य हर बच्चे के जीवन में पहले आठ वर्षों के दौरान खेल और आनंद के माध्यम से सीखने के अवसरों को बढ़ाना है। यह एक ऐसा समुदाय है जिसमें 100 से अधिक “कोलैब-एक्टर्स” सक्रिय रूप से बच्चों के चारों ओर सहयोगी माहौल तैयार करने में जुटे हैं।

आयोजकों के अनुसार, इस फेस्टिवल में लगभग 500 बच्चे (10 वर्ष तक आयु वर्ग) अपने शिक्षकों और मार्गदर्शकों के साथ भाग लेंगे। यह दो दिवसीय आयोजन कल्पना, सीख और उल्लास का सामूहिक उत्सव बनेगा जहाँ बच्चे और बड़ों, दोनों के लिए यह अनुभव अविस्मरणीय रहेगा।

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एड. असीम सरोदे की सनद निलंबन अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर सीधा हमला – ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन

भारतीय स्वरूप संवाददाता ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU) ख्यातनाम मानवाधिकार वकील एड. असीम सरोदे की सनद बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा (BCMG) द्वारा निलंबित करने के निर्णय की तीव्र निंदा करती है। आरएसएस प्रेरित भाजपा सत्ता में आने के बाद से अपने विरोधी सभी आवाजों का गला घोंटने की प्रक्रिया चल रही है। राजनीतिक विरोधी, सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक, लेखक, मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकार तथा वकील आदि लोगों को सरकार निशाना बना रही है। AILU इस बात की सार्वजनिक निंदा करती है तथा उन पर की गई इस कार्रवाई को रद्द करने की मांग करती है। यह तीन माह का निलंबन आदेश केवल मार्च २०२४ में हुए एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एड. सरोदे द्वारा की गई टिप्पणियों पर आधारित है, जहां उन्होंने न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली तथा संवैधानिक पदाधिकारियों की जवाबदारी पर भाष्य किया था। भाजपा के महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल पर टीका की तथा भाजपा के विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर असंतोष व्यक्त किया, इस कथित कारण के लिए वकीलों की महाराष्ट्र तथा गोवा बार एसोसिएशन की अनुशासन संबंधी समिति ने तीन माह के निलंबन की कार्रवाई की है।

उक्त कार्यक्रम में एड. सरोदे ने न्याय वितरण तंत्र में प्रणालीगत विलंब, सामान्य नागरिकों को न्यायालय में न्याय प्राप्त करने में कठिनाइयों तथा संवैधानिक पदाधिकारियों की अधिक जवाबदारी की आवश्यकता पर बोला था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कुछ संवैधानिक पदों — जिनमें राज्यपाल का भी समावेश है — अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की पद्धति पर प्रश्न उठाए तथा लोकतंत्र में सभी संवैधानिक पदाधिकारी जनता के प्रति जवाबदार रहने चाहिए, इस आशय का कथन किया था। उनकी यह टिप्पणी रचनात्मक तथा लोकतांत्रिक भावना से की गई थी, जिसमें संवैधानिक ढांचे की संस्थाओं को पारदर्शी तथा जवाबदारी से कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की गई थी। शासन प्रायोजित विलंब में प्रणाली की त्रुटियों को उजागर करना किसी व्यक्ति की बदनामी करना या न्याय व्यवस्था का अपमान करना नहीं होता। यदि सरोदे ने किसी दल के आंतरिक कार्यक्रमों में कोई टिप्पणी की हो तो वह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। इससे उन्होंने किसी पद का अनादर नहीं किया है। स्वयं भाजपा के पूर्व राज्यपाल तथा विधानसभा अध्यक्ष ने भी इसके लिए कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं की है। ऐसे होने पर भी किसी तृतीय पक्ष तथा भाजपा कार्यकर्ता के आवेदन पर वकील बार काउंसिल की अनुशासन संबंधी समिति द्वारा निलंबन जैसी कठोर सजा देना अत्यंत अनुचित, गलत तथा दमनकारी है। एड. सरोदे ने कोई अनुशासन भंग या वकील के रूप में कोई अनैतिक आचरण नहीं किया है किंतु इसका कोई विचार बार काउंसिल द्वारा किया गया। बार काउंसिल जैसे नियामक बोर्ड को राजनीतिक प्रभावों से स्वयं को अलग रखते हुए अपने निर्णय लेने अपेक्षित होते हैं। भाजपा या किसी भी राजनीतिक शक्ति के लिए बार काउंसिल का दुरुपयोग न होने देना बार काउंसिल की जिम्मेदारी है। प्रसिद्ध पर्यावरणवादी कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर हाल ही में देशद्रोह जैसे धारा के तहत दमनकारी कार्रवाई भाजपा सरकार द्वारा की गई है। इसी प्रकार देश में पत्रकार, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, वकील पर कार्रवाई तथा दमन जारी है। संविधान द्वारा दिए गए जनता के अभिव्यक्ति स्वतंत्रता को अबाधित रखना सभी कानूनी संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इस कार्यक्रम के बाद भाजपा व आरएसएस से संबंधित व्यक्तियों ने महाराष्ट्र तथा गोवा बार एसोसिएशन (BCMG) के पास शिकायत दर्ज की। उस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए बार काउंसिल ने १२ अगस्त २०२५ को एड. सरोदे की सनद तीन माह के लिए निलंबित करने का आदेश पारित किया। किंतु यह आदेश उन्हें ३ नवंबर २०२५ को अर्थात लगभग तीन माह बाद सूचित किया गया। आदेश सूचित करने में विलंब तथा आदेश के कारण स्पष्ट न करने से प्रक्रियात्मक न्याय तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पालन के संबंध में गंभीर संदेह उत्पन्न हुए हैं। कानून व्यवसाय के सदस्यों ने चिंता व्यक्त की है कि अनुशासनात्मक प्रक्रिया बाहरी दबाव या राजनीतिक विचारों से प्रभावित हुई प्रतीत होती है, क्योंकि लोकतांत्रिक मत व्यक्त करने पर दंडात्मक कार्रवाई न तो न्यायोचित है, न ही संविधान में गारंटीकृत अभिव्यक्ति स्वतंत्रता से सुसंगत है।

स्वस्थ लोकतंत्र बनाए रखने के लिए वकील के रूप में न्याय व्यवस्था, सरकारी कृत्यों या संवैधानिक पदाधिकारियों पर टीका करना वकील का अधिकार तथा कर्तव्य है, प्रश्न उठाना तथा सुधार मांगना लोकतांत्रिक अधिकार है; ऐसे आवाजों को दबाना दुष्कृत्य है। अनुशासनात्मक कार्रवाई का उपयोग कर वकीलों को चुप कराना कानून व्यवस्था को ही अन्याय करना है।

AILU मांग करती है कि बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा तत्काल निलंबन वापस ले तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) हस्तक्षेप कर अनुशासनात्मक तंत्र को स्वतंत्र, पारदर्शी तथा राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने की गारंटी करे। संवैधानिक मत व्यक्त करने पर वकील को निशाना बनाना खतरनाक है तथा लोकतंत्र की स्वतंत्रताओं के मूल आधार पर ही प्रहार है इसलिए इसे कदापि सहन नहीं किया जाएगा। एड. असीम सरोदे को उनकी सनद तत्काल बहाल की जाए। ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन ॲड. असिम सरोदे के साथ पूर्ण एकजुटता से खड़ी है।

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सरदार पटेल जयंती के उपलक्ष्य में डी जी कॉलेज में निबंध लेखन एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा सरदार पटेल की जयंती पर “सरदार पटेल : विकसित भारत के आधार स्तंभ” विषय पर एक निबंध लेखन एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी डॉ संगीता सिरोही के दिशा निर्देशन में किया गया।जिसमें महाविद्यालय की 55 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर वंदना निगम तथा निर्देशक प्रोफेसर अर्चना वर्मा ने दीप प्रज्वलन कर किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ दीप्ति शुक्ला, डॉ विनीता श्रीवास्तव, डॉ अपर्णा शुक्ला, वान्या श्रीवास्तव, आकांक्षा का विशेषयोगदान रहा।

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ऐस. ऐन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज में प्लेसमेंट सेल द्वारा “कैरियर वार्ता” आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर ऐस. ऐन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज, माल रोड, कानपुर में मिशन शक्ति 5.0 कार्यक्रम के अंतर्गत ,प्लेसमेंट सेल द्वारा “कैरियर वार्ता” का आयोजन सेवा योजन सूचना एवं मंत्रणा केंद्र , छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि डॉ ए. के.जैन, डॉ. ए.के.त्रिपाठी व महाविद्यालय प्राचार्या डॉ सुमन द्वारा माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन मिशन शक्ति प्रभारी प्रो. चित्रा तोमर द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. ए.के. जैन ने छात्राओं को रोजगार संगम पोर्टल पर रजिस्टर करने की प्रक्रिया के बारे में छात्राओं को विस्तार से अवगत कराया। मुख्य वक्ता ए. के. त्रिपाठी ने छात्राओं को व्यवसाय जगत की जानकारी प्रदान की और अपना व्यापार शुरू करने हेतु अवसर व सम्भावनाएँ तलाशने हेतु प्रेरित किया. स्वयंसेविका कोमल दिवाकर, नंदिका श्रीवास्तव,मन्तशा ने आयोजन में सहयोग किया। कार्यक्रम में डॉ निशा वर्मा, डॉ ऋचा सिंह, डॉ संगीता सिंह,डॉ कोमल सरोज, डॉ पूजा गुप्ता, डॉ प्रीता अवस्थी, डॉ सपना रॉय, डॉ मोनिका शुक्ला तथा अन्य शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।

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भूगोल विभाग द्वारा ईको क्लब के अंतर्गत ‘बायोडायवर्सिटी एवं इको सिस्टम’ पर प्रदर्शनी आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर के भूगोल विभाग द्वारा ईको क्लब के अंतर्गत “बायोडायवर्सिटी एवं इको सिस्टम” विषय पर एक प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य छात्राओं में पर्यावरणीय चेतना जागृत करना तथा जैव विविधता एवं पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना था। प्रदर्शनी का शुभारंभ महाविद्यालय प्रबंध समिति की वरिष्ठ सदस्या श्रीमती अनंta स्वरूप, डाइरेक्टर प्रो अर्चना वर्मा तथा प्राचार्य प्रो वंदना निगम के करकमलों द्वारा किया गया। उन्होंने छात्राओं द्वारा तैयार किए गए मॉडलों, चार्ट्स और पोस्टर्स का अवलोकन करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। प्रदर्शनी में छात्राओं ने विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण आदि का सजीव प्रदर्शन किया और जैव विविधता के संरक्षण के उपायों पर रोचक जानकारी प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का संयोजन डॉ. संगीता सिरोही, भूगोल विभागाध्यक्ष एवं ईको क्लब प्रभारी, के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने कहा कि “प्रकृति और मानव के मध्य संतुलन बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है, और ऐसी गतिविधियाँ छात्राओं में पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक दृष्टिकोण का विकास करती हैं।” छात्राओं की सृजनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने प्रदर्शनी को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों डॉ अंजना श्रीवास्तव, डॉ स्वेता गोंड एवं समस्त छात्राओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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सांसद खेल महोत्सव-2025 के अंतर्गत वॉकथॉन रैली आयोजित, उमड़े युवा

खेल से आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना होती है मजबूत:रमेश अवस्थी

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर, 17 अक्टूबर। सांसद खेल महोत्सव-2025 का आगाज शुक्रवार सुबह ग्रीन पार्क स्टेडियम से भव्य वॉकथॉन रैली के साथ हुआ। रैली को सांसद रमेश अवस्थी और इंग्लैंड के वेलिंगबरो शहर के मेयर राज मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली सरसैया घाट चौराहा होते हुए नानाराव पार्क में संपन्न हुई।

करीब पाँच हजार प्रतिभागियों ने इस वॉकथॉन में हिस्सा लिया। इसमें एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, युवक व महिला मंगल दल, पुलिस विभाग, सिविल डिफेंस, स्कूली छात्र-छात्राएं और विभिन्न खेल संघों के खिलाड़ी शामिल रहे। शहर में खेलों के प्रति जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का संदेश इस रैली के माध्यम से दिया गया।

सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि महोत्सव के तहत एक नवम्बर से 25 दिसम्बर तक विधानसभा स्तर पर कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, फुटबॉल, जूडो, बैडमिंटन, भारोत्तोलन और एथलेटिक्स सहित कई प्रतियोगिताएं होंगी। सब जूनियर, जूनियर और सीनियर वर्गों में होने वाले मुकाबलों के विजेता खिलाड़ी आगे सांसद खेल स्पर्धा, फिर जोन स्तर और अंततः राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे।

सांसद ने कहा कि खेल न केवल शारीरिक और मानसिक विकास का माध्यम हैं बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में जिला प्रशासन, पुलिस, खेल विभाग, युवा कल्याण विभाग, खिलाड़ियों, नागरिकों, एनसीसी, सिविल डिफेंस और पुलिस रिक्रूट्स के सहयोग के लिए आभार जताया। रैली के दौरान प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि “मा० सांसद खेल महोत्सव-2025” के शुभारंभ के उपरांत विधानसभा स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन 1 नवम्बर से 25 दिसम्बर 2025 तक किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं में विभिन्न आयु वर्गों—सब जूनियर, जूनियर एवं सीनियर—के खिलाड़ियों के बीच कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, फुटबॉल, जूडो, बैडमिंटन, भारोत्तोलन, एथलेटिक्स आदि विधाओं में प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की जाएंगी। विधानसभा स्तर पर विजयी खिलाड़ी सांसद खेल स्पर्धा में प्रतिभाग करेंगे, वहीं सांसद खेल स्पर्धा में विजयी प्रतिभागी जोन स्तर पर तथा उसके उपरांत राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। रैली में विधान परिषद सदस्य सलिल विश्नोई, विधायक महेश त्रिवेदी, मंडल अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, अन्य जनप्रतिनिधि और खेल संघों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं जिला प्रशासन की ओर से एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार, डीसीपी सेंट्रल, डीसीपी रवीन्द्र कुमार, नगर आयुक्त, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी भानु प्रसाद, जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला युवा कल्याण अधिकारी आरती जायसवाल ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

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कोविड के दौरान अपने माता-पिता खोने वाले बच्चों को डीएम ने दिया दीपावली का उपहार

*दीपावली पर जिलाधिकारी बने अभिभावक, 22 मासूमों संग साझा कीं खुशियाँ*

कानपुर नगर, 17 अक्तूबर। कलेक्ट्रेट सभागार शुक्रवार को दीपावली के दीपों से ज़्यादा उन नन्हीं आँखों की चमक से रोशन था, जिन्होंने कोविड महामारी में अपने माता पिता दोनों को खो दिया। गम के अंधेरे से गुज़र चुके इन बच्चों के चेहरों पर एक खास मुस्कान थी, जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने उन्हें मिठाई, दीया-बत्ती, चॉकलेट और किताबें भेंट कीं और कहा कि एक अभिभावक के रूप में वे हर पल उनके साथ खड़े हैं।

जिलाधिकारी ने बच्चों से कहा कि वे उनके जैविक पिता नहीं हैं लेकिन एक जिलाधिकारी के रूप में उनके वैधानिक अभिभावक हैं और उनकी देखभाल अभिभावक की तरह करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोई भी बच्चा खुद को अकेला महसूस न करे, प्रशासन और सरकार हर पल उनके साथ है।

संवाद के दौरान बच्चों ने अपने सपनों को साझा किया। किसी ने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई, किसी ने इंजीनियर या चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का लक्ष्य रखा। कुछ बच्चों ने एथलीट बनने का सपना बताया तो कई ने आईएएस और आईपीएस बनकर देश की सेवा करने का संकल्प लिया। जिलाधिकारी ने बच्चों को करियर काउंसलिंग दी और समझाया कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और धैर्य से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

कक्षा दसवीं की छात्रा गरिमा सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वजह से उनके सपने ज़िंदा हैं। योजनाओं से मिलने वाली मदद से पढ़ाई बेहतर तरीके से हो रही है। उन्होंने कहा कि दीपावली को खास बनाने के लिए जिलाधिकारी का आभार है। सिंधुजा यादव ने कहा कि इस आयोजन से उन्हें यह एहसास हुआ कि वे अकेली नहीं हैं। समाज और प्रशासन हर कदम पर उनका संबल बने हुए हैं।

जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत शून्य से अठारह वर्ष की आयु तक के बच्चों को प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। तेईस वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें दस लाख रुपये की एकमुश्त धनराशि मिलेगी जिससे उनकी उच्च शिक्षा और जीवन की राह आसान होगी। सभी बच्चों को आयुष्मान भारत योजना से पाँच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त लैपटॉप और टैबलेट भी वितरित किए गए हैं, ताकि पढ़ाई में किसी तरह की बाधा न आए।

जिन बच्चों को इस अवसर पर सम्मानित किया गया उनमें परिधि श्रीवास्तव, अद्वित मिश्रा, आराध्या मिश्रा, बबीता कपूर, सतीश कपूर, उत्कर्ष त्रिपाठी, वैष्णवी गुप्ता, अमन गुप्ता, नैतिक चड्ढा, परी मिश्रा, खुशी मिश्रा, रिद्धिमा कपूर, इशिता गुप्ता, तनिष्क गुप्ता, मानविक त्रिवेदी, अभिनव सिंह, गरिमा सिंह, अश्वनी कुमार, सिंधुजा यादव, संध्या, दिव्या और झलक शामिल हैं।

डीएम ने बच्चों के साथ आए परिजनों का आभार जताया और कहा कि रिश्तेदार और समाज यदि इन बच्चों की मदद के लिए आगे आते हैं तो यह पूरे प्रदेश के लिए सकारात्मक संदेश होगा।

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कोविड के दौरान अपने माता-पिता खोने वाले बच्चों को डीएम ने दिया दीपावली का उपहार

*दीपावली पर जिलाधिकारी बने अभिभावक, 22 मासूमों संग साझा कीं खुशियाँ*

कानपुर नगर, 17 अक्तूबर। कलेक्ट्रेट सभागार शुक्रवार को दीपावली के दीपों से ज़्यादा उन नन्हीं आँखों की चमक से रोशन था, जिन्होंने कोविड महामारी में अपने माता पिता दोनों को खो दिया। गम के अंधेरे से गुज़र चुके इन बच्चों के चेहरों पर एक खास मुस्कान थी, जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने उन्हें मिठाई, दीया-बत्ती, चॉकलेट और किताबें भेंट कीं और कहा कि एक अभिभावक के रूप में वे हर पल उनके साथ खड़े हैं।

जिलाधिकारी ने बच्चों से कहा कि वे उनके जैविक पिता नहीं हैं लेकिन एक जिलाधिकारी के रूप में उनके वैधानिक अभिभावक हैं और उनकी देखभाल अभिभावक की तरह करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोई भी बच्चा खुद को अकेला महसूस न करे, प्रशासन और सरकार हर पल उनके साथ है।

संवाद के दौरान बच्चों ने अपने सपनों को साझा किया। किसी ने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई, किसी ने इंजीनियर या चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का लक्ष्य रखा। कुछ बच्चों ने एथलीट बनने का सपना बताया तो कई ने आईएएस और आईपीएस बनकर देश की सेवा करने का संकल्प लिया। जिलाधिकारी ने बच्चों को करियर काउंसलिंग दी और समझाया कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और धैर्य से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

कक्षा दसवीं की छात्रा गरिमा सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वजह से उनके सपने ज़िंदा हैं। योजनाओं से मिलने वाली मदद से पढ़ाई बेहतर तरीके से हो रही है। उन्होंने कहा कि दीपावली को खास बनाने के लिए जिलाधिकारी का आभार है। सिंधुजा यादव ने कहा कि इस आयोजन से उन्हें यह एहसास हुआ कि वे अकेली नहीं हैं। समाज और प्रशासन हर कदम पर उनका संबल बने हुए हैं।

जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत शून्य से अठारह वर्ष की आयु तक के बच्चों को प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। तेईस वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें दस लाख रुपये की एकमुश्त धनराशि मिलेगी जिससे उनकी उच्च शिक्षा और जीवन की राह आसान होगी। सभी बच्चों को आयुष्मान भारत योजना से पाँच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त लैपटॉप और टैबलेट भी वितरित किए गए हैं, ताकि पढ़ाई में किसी तरह की बाधा न आए।

जिन बच्चों को इस अवसर पर सम्मानित किया गया उनमें परिधि श्रीवास्तव, अद्वित मिश्रा, आराध्या मिश्रा, बबीता कपूर, सतीश कपूर, उत्कर्ष त्रिपाठी, वैष्णवी गुप्ता, अमन गुप्ता, नैतिक चड्ढा, परी मिश्रा, खुशी मिश्रा, रिद्धिमा कपूर, इशिता गुप्ता, तनिष्क गुप्ता, मानविक त्रिवेदी, अभिनव सिंह, गरिमा सिंह, अश्वनी कुमार, सिंधुजा यादव, संध्या, दिव्या और झलक शामिल हैं।

डीएम ने बच्चों के साथ आए परिजनों का आभार जताया और कहा कि रिश्तेदार और समाज यदि इन बच्चों की मदद के लिए आगे आते हैं तो यह पूरे प्रदेश के लिए सकारात्मक संदेश होगा।

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