वर्तमान पीआरएस प्रणाली 2010 में स्थापित की गई थी और यह आइटेनियम सर्वर और ओपन वीएमएस (वर्चुअल मेमोरी सिस्टम) पर चलती है। वर्तमान पीआरएस प्रणाली को पारंपरिक प्रौद्योगिकी प्रणालियों से नवीनतम क्लाउड प्रौद्योगिकी-संगत प्रणालियों में अपग्रेड करने की आवश्यकता है। पिछले कुछ वर्षों में, यात्रियों की प्राथमिकताएँ और आकांक्षाएँ बदली हैं। आधुनिक पीआरएस का उद्देश्य यात्रियों की बढ़ी हुई आकांक्षाओं को पूरा करना है।
रेलवे ने हाल ही में रेलवन ऐप शुरू किया है। इस ऐप के ज़रिए यात्री अपने मोबाइल फ़ोन पर आरक्षित और अनारक्षित दोनों तरह के टिकट बुक कर सकते हैं। इससे पी.आर.एस. सुविधा यात्रियों की पहुँच में आ गई है।
पहले, ट्रेनों में आरक्षित टिकट बुक करने के लिए 120 दिनों की अग्रिम आरक्षण अवधि (ए.आर.पी.) होती थी। 1 नवंबर 2024 से, यात्रा की तारीख को छोड़कर, ए.आर.पी. को घटाकर 60 दिन कर दिया गया है। यह बदलाव बुकिंग के रुझान को ध्यान में रखते हुए और अप्रत्याशित घटनाओं के कारण रद्दीकरण को कम करने के लिए किया गया है।
बुकिंग के रुझान और फीडबैक के आधार पर अग्रिम आरक्षण अवधि (ए.आर.पी.) में बदलाव एक सतत और जारी रहने वाली प्रक्रिया है। वर्तमान पी.आर.एस. प्रति मिनट लगभग 25,000 टिकट बुक कर सकता है और नई प्रणाली इस क्षमता से चार गुना अधिक क्षमता के लिए डिज़ाइन की गई है।
यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी है।
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