Breaking News

विविधा

डॉ. जितेंद्र सिंह ने लंदन विज्ञान संग्रहालय का दौरा किया और सफल कोविड वैक्‍सीन पहल में भारत के अनुभव को साझा किया

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान, राज्‍य मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज 175 साल पुराने लंदन विज्ञान संग्रहालय का दौरा किया और भारत में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा इसी तरह के विज्ञान संग्रहालयों की स्थापना की पहल का अनुभव साझा किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन संग्रहालयों को स्थापित करने का विचार आम नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं को उनकी छिपी क्षमताओं का पता लगाने में मदद करना और कभी-कभी उनके अंतर्निहित कौशल की खोज करना भी है, जिसका आभास उन्‍हें स्‍वयं भी नहीं होता। यह संग्रहालय जिज्ञासा के भाव को बढ़ाते हैं, इससे उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक नवाचार में मदद मिलती है। विज्ञान संग्रहालय लंदन में दक्षिण केंसिंग्टन प्रदर्शनी रोड पर स्थित है। इसकी स्थापना 1857 में हुई थी।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह का यह दौरा मुख्य रूप से ऊर्जा क्रांति, टीके और अंतरिक्ष गैलरी से संबंधित क्षेत्रों पर केंद्रित था। इस दौरान संग्रहालय का प्रबंधन भारत की कोविड सफलता की कहानी से बहुत प्रभावित था।

डॉ. सिंह को कोविड महामारी के इतिहास को दर्शाने के लिए बनाया गया विशेष पवेलियन दिखाया गया। यहां पर कोविड का टीका लगवाने के लिए आए पहले व्यक्ति से जागरूकता अभियान की यात्रा को क्रमानुसार दिखाया गया है। कोविड प्रबंधन और रोकथाम में भारत की अग्रणी भूमिका को पवेलियन में विशेष स्‍थान दिया गया है।

उन्‍होंने एक अन्‍य मंडप भी देखा जिसे भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित उष्णकटिबंधीय रोगों के लिए विशेष रूप से समर्पित पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम को हिन्‍दी भाषा में लिखे गए बैनरों के साथ दर्शाया गया था। भारत के नेतृत्‍व में चलाये गये पोलियो उन्‍मूलन अभियान ने स्‍वास्‍थ्‍य सेवा के क्षेत्र में विशिष्‍ठ रोल मॉडल का स्‍थान अर्जित किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत तेजी से दुनिया की प्रमुख जैव-अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है पिछले कुछ वर्षों में यह नवाचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र कई गुना बढ़ गया है। उन्‍होंने बताया कि भारत ने केवल दो वर्षों में चार स्वदेशी टीके विकसित किए हैं।

उन्‍होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने “मिशन कोविड सुरक्षा” के माध्यम से चार टीके वितरित किए हैं, कोवैक्सीन के निर्माण में तेजी आई है और भविष्य के टीकों के सुचारू विकास के लिए आवश्यक मूलभूत ढांचा तैयार किया है।  हमारा देश महामारी का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Description: IMG_256 

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुनिया अब निवारक स्वास्थ्य सेवा में भारत की उत्कृष्ट क्षमताओं से अवगत हो रही है और अब हम इस श्रृंखला में कई अन्‍य टीकों को विकसित करने की प्रक्रिया की विकास यात्रा में है। हाल ही में पहली डीएनए वैक्सीन के बाद, पहली नेज़ल वैक्‍सीन (नाक से दी जाने वाली वैक्‍सीन) का भी सफलतापूर्वक निर्माण किया गया है। देश में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) से संबंधित एक अन्य टीका भी विकसित किया गया है, जिससे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में मदद मिली है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने रेखांकित किया कि भारतीय वैक्सीन बाजार ने वैश्विक स्तर पर अपना विशिष्‍ट स्‍थान बनाया है। भारत का वैक्‍सीन बाजार के 2025 तक 252 बिलियन रुपये के मूल्‍यांकन तक पहुंचने की उम्‍मीद है। डॉ. सिंह ने ब्रिटेन के साथ बायोटेक स्टार्टअप और वैक्सीन विकास के क्षेत्र में सहयोग का आह्वान किया।

Description: IMG_256

डॉ. जितेंद्र सिंह ब्रिटेन की 6 दिवसीय यात्रा पर हैं और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक उच्च स्तरीय आधिकारिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

Read More »

भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को साकार करने के लिए एक मजबूत, स्थायी, निर्णायक और पारदर्शी सरकार अहम हैः नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने मुंबई में इंडियन मर्चेंट चैम्बर (आईएमसी) द्वारा आयोजित ‘इंडिया कॉलिंग कॉन्फ्रेंस 2023’ के दौरान पीएम गति शक्ति पर हुए एक सत्र में एक भाषण दिया। श्री गडकरी ने ‘ब्रांड-इंडिया’ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल ‘इंडिया कॉलिंग कॉन्फ्रेंस’ आयोजित करने के लिए आईएमसी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि 2025 तक भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के हमारे माननीय प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए एक मजबूत, स्थिर, निर्णायक और पारदर्शी सरकार अहम है।

पीएम गति शक्ति परियोजना के बारे में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कहा, “पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान (एनएमपी) एक बहुत बड़ी पहल है और इससे हमें लॉजिस्टिक की लागत को कम करने में मदद मिलेगी। अमेरिका जैसी अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सकल घरेलू उत्पाद के 8 से 9 प्रतिशत की तुलना में भारत में लॉजिस्टिक लागत जीडीपी की 13 से 14 प्रतिशत के स्तर तक है, जो काफी ज्यादा है। ऊंची लॉजिस्टिक लागत वैश्विक बाजारों में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करती है। लॉजिस्टिक की लागत को जीडीपी के 9 प्रतिशत तक कम करना सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर है।”

राजमार्ग नेटवर्क में सुधार की योजनाओं के बारे में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनएचएआई राजमार्गों से सटे 600 से ज्यादा स्थानों पर विश्व स्तरीय वेसाइड एमेनिटीज (डब्ल्यूएसए) यानी सड़क किनारे की सुविधाएं विकसित कर रहा है। अच्छे शौचालय, पार्किंग और रेस्तरां जैसी बुनियादी सुविधाओं के अलावा, इन वे साइड एमेनिटीज में ट्रक ड्राइवरों के लिए शयनगृह, ईवी चार्जिंग सुविधाएं, कन्वेंशन सेंटर, ट्रामा सेंटर और हस्तशिल्प और स्थानीय रूप से निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए खुदरा दुकानें भी होंगी। सड़क दुर्घटनाओं और अंग प्रत्यारोपण जैसी आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों से निपटने के लिए कुछ डब्ल्यूएसए में हेलीपैड और ड्रोन लैंडिंग की सुविधाएं भी होंगी।

अपने संबोधन में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग और आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत उस गति से आगे बढ़ रहा है जो पहले कभी नहीं देखी गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने में 60 साल लगे और अब, 2014 के बाद केवल 9 वर्षों में, भारत लगभग साढ़े तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हो गई है।”

श्री सोनोवाल ने कहा कि पीएम गति शक्ति एनएमपी के तहत, पत्तन, पोत परिवहन और जल मार्ग मंत्रालय ने 2025 तक कार्यान्वयन के लिए 62,227 करोड़ रुपये की 101 परियोजनाओं की पहचान की है। इन 101 परियोजनाओं में से 8,897 करोड़ रुपये की 26 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, 15,343 करोड़ रुपये की 42 परियोजनाएं विकास के चरण में है और 36,638 करोड़ रुपये की 33 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। कार्यान्वयन के तहत परियोजनाओं में से, 20,537 करोड़ रुपये की 14 परियोजनाओं के दिसंबर 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 101 गति शक्ति परियोजनाओं में से 9,867 करोड़ रुपये की 12 परियोजनाएं महाराष्ट्र में कार्यान्वित हो रही हैं, जिनमें से 3,165 करोड़ रुपये की 3 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। 675 करोड़ रुपये की 2 परियोजनाएं विकास के चरण में हैं, वहीं बाकी 6,027 करोड़ रुपये की 7 परियोजनाएं कार्यान्वयन के दौर में हैं और इनके 2025 तक पूरी होने का अनुमान है।

सागरमाला परियोजना के तहत प्रगति के बारे में विस्तार से बताते हुए श्री सोनोवाल ने कहा कि सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत 2035 तक 5.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 802 परियोजनाएं कार्यान्वित होनी हैं। 1,21,545 करोड़ रुपये की 228 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं और 2.36 लाख करोड़ रुपये की 260 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। महाराष्ट्र राज्य में, सागरमाला कार्यक्रम के तहत 1,13,285 करोड़ रुपये की 126 परियोजनाएं हैं। 126 परियोजनाओं में से 16,393 करोड़ रुपये की 39 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। 18,146 करोड़ रुपये की 42 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। 78,746 करोड़ रुपये की 45 परियोजनाएं विकास के चरण में हैं। हरित पहलों के बारे में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि देश के राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत 2035 तक सभी बड़े बंदरगाहों में ग्रीन हाइड्रोजन/ अमोनिया बंर और रिफ्यूलिंग की सुविधाएं स्थापित की जानी हैं। दीनदयाल, पारादीप और वी ओ चिदम्बरानार बंदरगाहों पर हाइड्रोजन बंकरिंग की स्थापना के लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है।

इस अवसर पर रेलवे और कपड़ा राज्य मंत्री दर्शना जरदोश ने कहा कि आईएमसी की स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वदेशी आंदोलन में योगदान देने की समृद्ध विरासत रही है। उन्होंने कहा कि रेल क्षेत्र में ऐसी कई परियोजनाएं हैं जहां निवेश के अवसर हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया, “कई घरेलू और विदेशी निवेशक रेल परियोजनाओं में निवेश करना चाह रहे हैं। रेल क्षेत्र में स्वचालित रूट से 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। सरकार की 2030 तक रेल बुनियादी ढांचे में 715 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना है।”

इससे पहले, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि परिचालन तैयारियों को बनाए रखने के लिए भारत मुख्य रूप से रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भर है और हमारे सामरिक लक्ष्यों के लिए आत्म निर्भरता और आयात पर निर्भरता को कम करना काफी अहम है। वे ‘रक्षा विनिर्माण में अवसर’ विषय पर आयोजित सत्र में बोल रहे थे।

Read More »

उप्र के समस्त जिलों में “सूचना संकुल” के निर्माण के सम्बन्ध में भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य श्याम सिंह ने मुख्य मंत्री को लिखा पत्र

कानपुर 1 मई भारतीय स्वरूप संवाददाता, भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य श्याम सिंह पंवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रेस / मीडिया कर्मियों के हितार्थ एक पत्र लिखा जिसमें उनके  द्वारा सभी जिलों में सूचना संकुल भवन के स्थापित कराए जाने की अपेक्षा की गई है। उन्होंने लिखा कि मुख्य सचिव उप्र शासन के परिपत्र संख्या-588/उन्नीस / 2-2015-77/2015 दिनाँक 29.09. 2015 की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं कि उप्र के समस्त जिलों में (कुछेक को छोड़कर) ‘सूचना संकुल’ स्थापित किये जाने की घोषणा की जा चुकी है। ‘सूचना संकुल’ के परिसर में ही जिला सूचना कार्यालय, प्रेस / मीडिया कर्मियों के लिये एक सूचना केन्द्र, शासन / प्रशासन के विभिन्न पदाधिकारियों, गणमान्य एवं विशिष्ट व्यक्तियों के द्वारा प्रेसवार्ता करने हेतु मीडिया सेंटर स्थापित करने हेतु भूमि की निःशुल्क उपलब्धता करवाते हुए भवन का मानचित्र एवं उक्त पर आने वाले व्यय का आकलन जिले के आलाधिकारियों से की जा चुकी है। पीसीआई सदस्य ने आगे कहा कि अवगत हो कि उपरोक्त विषयक जिलाधिकारी कानपुर नगर व मंडलायुक्त कानपुर मंडल को समय-समय पर कई पत्र लिखें हैं और ‘सूचना संकुल’ निर्माण विषयक कई बार ध्यानाकर्षित किया है किन्तु अभी तक कोई भी सार्थक कार्यवाई नहीं की गई है, बल्कि उनके द्वारा कागजी औपचारिकता निभाते हुए उदासीनता का परिचय दिया गया है। पीसीआई सदस्य ने पत्र में लिखते हुए कहा कि हम आपसे अपेक्षा करते हैं, कानपुर नगर ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के समस्त जिलों में ‘सूचना संकुल’ निर्माण हेतु यथोचित दिशा-निर्देश जारी करेंगे।

Read More »

अरुणाचल प्रदेश में कल दो सौ चौवन 4जी मोबाइल टावर राष्ट्र को समर्पित किए गए

प्रधानमंत्री मोदी ने 16वें सिविल सेवा दिवस पर अपने संबोधन में कहा था कि हम भारत में सुदूर सीमावर्ती गांवों को देश के पहले गांव मानते हैं, आखिरी नहीं और हमें शत प्रतिशत परिपूर्णता प्राप्त करने के लिए ईमानदारी से प्रयास करने तथा नवीन संसाधनों की आवश्यकता होगी।

भारत सरकार ने इन्हीं प्रयासों के हिस्से के रूप में 2,675 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ अरुणाचल प्रदेश में 3,721 से अधिक गांवों को कनेक्टिविटी प्रदान करने के उद्देश्य से 2,605, 4जी मोबाइल टावरों को स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की है।

ये 254, 4जी मोबाइल टावर 22 अप्रैल, 2023 को संचार, रेलवे तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा राष्ट्र को समर्पित किए जाएंगे। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री  किरेन रिजिजू; संचार राज्य मंत्री श्री देवू सिंह चौहान और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू तथा केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उनके साथ उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन समारोह राजधानी ईटानगर में राज्य विधान सभा परिसर में आयोजित किया जाएगा।

ये टावर बेहतरीन कनेक्टिविटी से अब तक वंचित रहे गांवों में 4जी सेवाएं प्रदान करेंगे, जिससे अरुणाचल के 336 गांवों को डिजिटल कनेक्टिविटी आसानी से मिलेगी। इन गांवों में कई ऐसे क्षेत्र शामिल हैं जो आजादी के बाद से अब तक बिना कनेक्टिविटी के रहे हैं। उम्मीद है कि इस पहल से 70,000 से अधिक ग्राहक लाभान्वित होंगे और अपेक्षित डाटा उपयोग हर महीने 40 टीबी को पार कर सकता है।

विभिन्न योजनाओं एवं परियोजनाओं के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश के लिए हाई-स्पीड नेटवर्क कनेक्टिविटी तक पहुंच सुनिश्चित की जा रही है, जैसे कि ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विस्तृत दूरसंचार विकास योजना (सीटीडीपी-एनईआर), ‘अरुणाचल प्रदेश के दूर-दराज के बिना डाटा कनेक्टिविटी वाले गांवों और असम के 2 जिलों में मोबाइल सेवाओं का प्रावधान’ तथा 4जी परिपूर्णता परियोजना।

भारत, देश भर में डिजिटल और मोबाइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने और देश के अंतिम छोर तक डिजिटल क्रांति तथा मोबाइल एवं डिजिटल सेवाओं के तेजी से प्रसार के माध्यम से आम नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

Read More »

मानकों को ताक पर रखकर सुरक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ कर रही कैब कम्पनी ओला

देश के लोगों की जानमाल से खिलवाड़ कर रही है कैब कम्पनी ‘‘ओला’’
-मानकों को ताक पर रखकर सुरक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ कर रही ओला कैब कम्पनी
-बिना बीमा, बिना फिटनेश, बिना टैक्स जमा किये गाड़ियों पर की जा रही बुकिंग
-देशहित में अन्य कैब कम्पनियों की भी जाँच करने की जरूरत है
कानपुर 23 अप्रैल, भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य श्याम सिंह पंवार ने कहा, कानपुर महानगर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था की कमान जब से पुलिस उपायुक्त यातायात आई0 पी0 एस0 रवीना त्यागी ने संभाली है, तब से उनके द्वारा अनेक प्रयास किये गये हैं और अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। परिणामतः शहर की सड़कों पर चलने वाले वाहन सवारों को पहले की अपेक्षा बहुत राहत मिली है और शहर की सड़कों पर गुजरने वाले लोगों को काफी हद तक सुरक्षा का अहसाह हो रहा है। किन्तु शहरवासियों की ही नहीं अपितु कानपुर महानगर में आने वाले सभी व्यक्तियों की सुरक्षित यात्रा और उनकी सुरक्षा को लेकर किये जा रहे प्रयासों को देश की एक कैब कम्पनी ओला (ओ0 एल0 ए0) कमीशन के लालच में जमकर पलीता लगा रही है। ऐसे नजारे सामने आ चुके हैं जिनसे स्पष्ट है कि कैब कम्पनी ओला (ओ0 एल0 ए0) के द्वारा बुकिंग कर यात्रा करना सुरक्षित कतई नहीं माना जा सकता है और अपने कमीशन के लालच में यह कम्पनी लोगों की जानमाल से खिलवाड़ कर रही है, इतना ही नहीं बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिये एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है!  बताते चलें कि ओला (ओ0 एल0 ए0) कैब कम्पनी से हुण्डई कम्पनी की एक कार नम्बर यू0पी0 78 एफ0 एन0 5980 सम्बद्ध है। कैब कम्पनी के अभिलेखों में इस गाड़ी को चलाने हेतु विजय कुमार नामक व्यक्ति अधिकृत है। दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद कई महीनों से उपरोक्त कार, जी0-1 टी/17, अर्मापुर स्टेट कानपुर नगर के पते पर खड़ी है। इस गाड़ी का फिटनेश 16 जनवरी 2021 तक, टैक्स 31 दिसम्बर 2019 तक व इन्श्योरेन्स 15 जनवरी 2020 तक वैध है और उपरोक्त गाड़ी के नाम पर ओला (ओ0 एल0 ए0) कैब कम्पनी, लोगों को बुकिंग दे कर कमीशन के लालच में उनकी जानमाल की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया है। ऐसे में आशंका है कि ऐसा ही अनेक मामलों में और भी हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि देश की अन्य कैब कम्पनियों में भी क्या ऐसा नहीं हो रहा होगा और लोगों की जानमाल की सुरक्षा के साथ अन्य कम्पनियों द्वारा खिलवाड़ किया जा रहा होगा ?
लोगों की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए और लोगों के साथ घटित हो सकने वाली वाली किसी भी तरह की अनहोनी को देखते हुए एवं ओला कैब कम्पनी के रीजनल सेल्स मैनेजर उप्र अंकुर त्रिपाठी व विधिक सलाहकार एडवोकेट संजय जायसवाल की मौजूदगी में थाना गुजैनी परिसर में जब ओला कैब कम्पनी के द्वारा निर्धारित किये गये सुरक्षा मानकों जैसे-कम्पनी से सम्बद्ध होने वाली गाड़ी का मेकअप, गाड़ी में लिखा जाने वाला विवरण (मालिक का नाम, ड्राईवर का नाम, हेल्पलाइन नम्बर आदि) ड्राईवर की ड्रेस, गाड़ी में लगने वाला सुरक्षात्मक बटन, प्रथम दृष्टया चिकित्सकीय बॉक्स, आग लगने केे दौरान बचाव हेतु रखा जाने वाला सिलेण्डर, उपभोक्ता द्वारा ओटीपी बताने के बाद वेरीफाई करने वाला ध्वनि सूचक यन्त्र, बुकिंग के अनुसार यात्रा का नियत किये गये मानचित्र पर ही यात्रा करवाना, गाड़ी की फिटनेश, टैक्स, इन्श्योरेन्स, चालक का चरित्र सत्यापन आदि जरूरी तथ्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की गई तो अंकुर त्रिपाठी ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टिगत सभी जरूरी मानक होने ही चाहिये, इसके अलावा समय-समय पर उनका भौतिक परीक्षण/सत्यापन भी ओला कैब कम्पनी की टीम द्वारा होना चाहिये।
तत्पश्चात ओला कैब एप के माध्यम से शुक्रवार को कई लोगों के मोबाइलों ओला एप के माध्यम से बुकिंग कर कई गाड़ियाँ, गुजैनी थाना के निकट कारगिल पेट्रोल पम्प की लोकेशन पर भौतिक परीक्षण/सत्यापन हेतु बुलवाईं और सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में गाड़ियों का भौतिक परीक्षण/सत्यापन श्री त्रिपाठी से करवाया तो पाया गया कि गाड़ियाँ सुरक्षा की दृष्टि के कतई फिट नहीं थीं, एक बुकिंग में जो चालक गाड़ी को लेकर आया था, वह अभिलेख पर दर्ज नहीं था, बल्कि उसके स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति चालक बना था।
ऐसे में इससे कतई इनकार नहीं किया जा सकता है कि ओला कैब कम्पनी से सम्बद्ध गाड़ियों की फिटनेश, बीमा, टैक्स, रजिस्ट्रेशन, डाईवर के चरित्र, ड्राईवर की वर्दी, सुरक्षा हेतु नियत मानकों की जाँच सहित अन्य बिन्दुओं पर ओला कैब कम्पनी कतई ध्यान नहीं दे रही है और अपने कमीशन के लालच में भोली भाली जनता की ही नहीं अपितु हर आम-औ-खास हर व्यक्ति की जानमाल से खिलवाड़ कर रही है।
रीजनल सेल्स मैनेजर अंकुर त्रिपाठी की मानें तो ओला कैब कम्पनी देश के लोगों की सुरक्षा के साथ ही नहीं बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ भारी खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने स्वयं देखा कि कैब कम्पनी में अटैच अनेेक गाड़ियां जो चलन में नहीं उनके एप दूसरी गाड़ियों में धड़ल्ले से प्रयोग किये जा रहे हैं और जो गाड़ियां चलने लायक ही नहीं हैं उनके द्वारा बुकिंग धड़ल्ले से की जा रही है।
ओला कम्पनी के रीजनल सेल्स मैनेजर अंकुर त्रिपाठी ने लिखित रूप में स्वीकार किया है कि ओला की गाड़ियों में यात्रा करना लोगों के लिये सुरक्षित नहीं है। उन्होंने यह तक लिख कर दिया है कि ओला कैब की गाड़ी से कोई भी अपराध हो सकता है, आतंकवादी हमला हो सकता है।
ऐसे में क्या कानपुर पुलिस कमिश्नरेट की पुलिस उपायुक्त यातायात रवीना त्यागी (आई0 पी0 एस0) व सभी राज्य सरकारों सहित भारत सरकार को इस बारे में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता नहीं है, क्यों यह सिर्फ कानपुर महानगर के लोगों की ही नहीं बल्कि देश के सभी लोगों की जानमाल की सुरक्षा से जुड़ा गम्भीर विषय है ? ऐसे में जिम्मेदारों को चाहिये कि सिर्फ ओला कैब कम्पनी ही नहीं बल्कि सभी कैब कम्पनियों की जाँच गहनता से करवायें जिससे कि देश के लोगों की जानमाल की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को सबक मिल सके।

Read More »

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उड़ान 5.0 का शुभारंभ किया

बोली प्रक्रिया के चार सफल दौर के बाद, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने देश के दूर-दराज और क्षेत्रीय इलाकों में कनेक्टिविटी को और बढ़ाने तथा अंतिम स्थल तक हवाई-संपर्क का लक्ष्य हासिल करने के लिए क्षेत्रीय हवाई-संपर्क योजना (आरसीएस) – उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) के 5वें चरण की शुरुआत की है।

उड़ान 5.0 की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • उड़ान का यह चरण, श्रेणी-2 (20-80 सीटों) और श्रेणी-3 (>80 सीटों) पर केंद्रित है।
  • पहले चरण की 600 किमी की सीमा को समाप्त कर दिया गया है और उड़ान के मूल और गंतव्य के बीच की दूरी के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है।
  • प्रदान की जाने वाली व्यावहारिक अंतर वित्तीय सहायता (वायबिलिटी गैप फंडिंग -वीजीएफ) को प्राथमिकता और गैर-प्राथमिकता वाले दोनों क्षेत्रों के लिए ऊपरी सीमा 600 किमी की दूरी पर निर्धारित की जायेगी, जबकि पहले ऊपरी सीमा 500 किमी थी।
  • कोई पूर्व निर्धारित रूट पेश नहीं किया जाएगा। केवल एयरलाइंस द्वारा प्रस्तावित नेटवर्क और व्यक्तिगत रूट के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
  • एयरलाइनों को एलओए जारी होने के 2 महीने बाद एक कार्य/व्यवसाय योजना प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें वे तकनीकी प्रस्ताव के समय अपनी विमान अधिग्रहण योजना/विमान की उपलब्धता, चालक दल, स्लॉट आदि प्रस्तुत करेंगे।
  • एक रूट, एक एयरलाइन को एक से अधिक बार नहीं दिया जाएगा, चाहे वह अलग-अलग नेटवर्क में हो या एक ही नेटवर्क में।
  • एक रूट पर एकाधिकार को रोकने के लिए, यदि चार लगातार तिमाहियों में औसत तिमाही पीएलएफ 75% से अधिक है, तो विशिष्टता वापस ले ली जाएगी।
  • त्वरित संचालन को और प्रोत्साहित करने के लिए 4 महीने तक की देरी होने पर, प्रत्येक महीने के लिए प्रदर्शन गारंटी का 25% भुना लिया जाएगा।
  • एयरलाइंस को रूट दिए जाने के 4 महीने के भीतर परिचालन शुरू करना होगा। पहले यह समय सीमा 6 महीने थी।
  • हवाई अड्डों की एक सूची – जो संचालन के लिए तैयार हैं, या जल्द ही संचालन के लिए तैयार होंगे – को योजना में शामिल किया गया है, ताकि योजना के तहत मार्गों के त्वरित संचालन को सुविधाजनक बनाया जा सके।
  • एक ऑपरेटर द्वारा रूट को दूसरे ऑपरेटर को दिए जाने से जुड़ी नवीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और इसे प्रोत्साहित किया गया है।

उड़ान 5.0 के लॉन्च के अवसर पर नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “उड़ान कई क्षेत्रों के लिए जीवनदायिनी साबित हुई है, जो अब देश भर के स्थानों से अच्छी तरह से जुड़ गई हैं। योजना का यह नया और मजबूत संस्करण गति को बढ़ाएगा, नए मार्गों को जोड़ेगा और हमें निकट भविष्य में 1000 मार्गों तथा 50 अतिरिक्त हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और जल हवाई अड्डों के संचालन के लक्ष्य के करीब लाएगा। अब उड़ेगा देश का हर आम नागरिक!”

उड़ान योजना ने हितधारकों के एक विविध समूह को लाभान्वित किया है। यात्रियों को हवाई संपर्क का लाभ मिला है, एयरलाइनों को क्षेत्रीय मार्गों के संचालन के लिए रियायतें मिली हैं, हवाई संपर्क से जुड़े नए क्षेत्रों को उनके आर्थिक विकास के लिए हवाई संपर्क का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिला है। किफायती और रियायती हवाई किराए पर आम आदमी हवाई यात्रा करे– इस बात से जुड़े प्रधानमंत्री के विजन की दिशा में यह एक और कदम है।

Read More »

सेल-बीएसएल ने टेलीकम्युकेशंस कंसल्टैंट्स इंडिया लिमिटेड (टीसीआईएल) के साथ समझौता ज्ञापन किया

सेल-बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) ने सेल की झारखंड स्थित खानों और कोयला खदानों, सेंट्रल कोल सप्लाई ऑर्गनाइजेशन और सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट सहित सेल-बोकारो स्टील प्लांट में 5जी/ आईटी/ दूरसंचार और अन्य वायरलेस संचार प्रौद्योगिकियों के उपयोग की संभावनाओं को खोजने के लिए टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टैंट्स इंडिया लि. (टीसीआईएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। सेल के बोकारो स्टील प्लांट में 21 अप्रैल, 2023 को इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। सेल-बीएसएल की ओर से कार्यकारी निदेशक (वर्क्स) बी. के. तिवारी और टीसीआईएल की ओर से कार्यकारी निदेशक (आईटी और दूरसंचार) सुश्री अलका सेलोट अस्थाना ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001Y2DE.jpg

सेल-बीएसएल ने टीसीआईएल की मदद से एक समर्पित 5जी नेटवर्क स्थापित करने की पहल करने वाला देश का पहला पीएसयू बनने की दिशा में कदम उठाया है, जिससे इस्पात निर्माण में 5जी/ आईटी/ दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग का मार्ग प्रशस्त होगा। इस्पात संयंत्र के अलावा, यह साझेदारी झारखंड में सेल खानों और कोयला खदानों, स्मार्ट शहरों आदि में नवीन समाधान प्रदान करने में भी उपयोगी साबित होगी। कार्यकारी निदेशक (आईटी और दूरसंचार) सुश्री अलका सेलोट ने कहा कि टीसीआईएल के पास सेल-बीएसएल के लिए 5जी/ आईटी/ दूरसंचार प्रौद्योगिकियों को प्रसारित करने, परीक्षण, स्थापना और रखरखाव के लिए टर्नकी समाधान प्रदान करने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, अनुभव और संसाधन हैं।

Read More »

जिन टीवी कैमरों को अपना अभेद्य सुरक्षा कवच समझता था, उन्हीं कैमरों के बीच से हुई गोलियों की बौछार

दर्जनों लोगों को तड़पा-तड़पा कर मारने का आरोपी जिन टीवी कैमरों को अपना अभेद्य सुरक्षा कवच समझता था, जिन कैमरों के साये में उसके चहरे पर मृत्यु का खौफ तो दूर, रंच मात्र का शक भी नहीं था| उन्हीं कैमरों के बीच से हुई गोलियों की बौछार ने माफिया और उसके भाई का पल भर में काम तमाम कर दिया| यह सब अचानक हुआ या पूर्व नियोजित साजिश के तहत, इसकी चर्चा इस समय गाँव की गलियों से लेकर शहर के नुक्कड़ों तक हो रही है| किसी भी निष्कर्ष पर न पहुँच पाने के बाद लोग यह कहते हुए बातचीत का विषय बदल देते हैं कि सच जल्द ही सबके सामने आएगा| वहीँ कुछ लोग यह भी आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि पकड़े गये तीनों हमलावरों को किसी बहाने से मौत के घाट उतारकर कहीं सत्य को सदा सर्वदा के लिए दफ़न ही न कर दिया जाए| आगे क्या होगा यह तो भविष्य के गर्त में है| लेकिन इस घटना के बाद से लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ पत्रकारिता, अब सन्देह की दृष्टि से देखा जाने लगा है| समाज के कुछ बुद्धिजीवियों ने अभी तक पत्रकारिता को विरोधी और गोदी मीडिया के रूप में वर्गीकृत कर रखा था| लेकिन अब वह गोली मीडिया के रूप में लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ का तीसरा वर्ग भी निर्धारित कर सकते हैं| टीवी चैनलों की आई बाढ़ और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन ने पत्रकारिता के मायने आज पूरी तरह बदल दिये हैं| टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में हल्ला बोल पत्रकारिता के शोरगुल के बीच मूल्यों की तिलांजलि न जाने कब दी जा चुकी है| लेकिन प्रयागराज की घटना ने पत्रकारिता का जो नवीन चेहरा प्रस्तुत किया है, उससे चिन्तित हुए बिना नहीं रहा जा सकता| वरिष्ठ पत्रकारों से अक्सर उनके जानने वाले प्रेस का परिचय-पत्र बनवाने के लिए निवेदन करते रहते हैं| ताकि वह अपने वाहन पर प्रेस लिखा सकें तथा सरकारी विभागों में पत्रकारिता का रौब जमाकर अपना व्यक्तिगत काम करवा सकें| रजिस्ट्रार ऑफ़ न्यूजपेपर्स फॉर इण्डिया से किसी तरह रजिस्ट्रेशन नम्बर हासिल करने वाले अनेक सम्पादक ऐसे हैं जिनके अख़बार का धरातल पर कहीं कोई बजूद नहीं है| ऐसे सम्पादक शौकिया लोगों से सदस्यता शुल्क के नाम पर अच्छी खासी रकम वसूल कर, अपने अख़बार का परिचय-पत्र प्रदान करके पत्रकारिता धर्म का निर्वहन कर रहे हैं| इसी सदस्यता शुल्क से ही सम्पादक जी के परिवार का खर्च चलता है| भले ही उनके अख़बार का पहचान-पत्र प्राप्त करने वाले उसका किसी भी हद तक दुर्पयोग क्यों न करते हों| यहाँ सदुपयोग के बारे में तो सोचना ही व्यर्थ है| अतीक और अशरफ के तीनों कातिलों के पास से जो डमी कैमरे बरामद हुए हैं| उनके बारे में अभी तक यह खुलासा नहीं हुआ है कि उनके माइक पर चिपका लोगो किस मीडिया संस्थान का है| लेकिन इससे इतना तो अनुमान लग ही जाता है कि कुछ टीवी चैनल भी फर्जी आईडी बनाने का कारोबार कर रहे हैं|

बीते लगभग पाँच वर्षों में इलेक्ट्रानिक तथा प्रिंट मीडिया के हुए जबरदस्त विस्तार के बाद पत्रकारों की संख्या बढ़ना स्वाभाविक है| जिसके कारण आज यदि कोई वरिष्ठ पत्रकार भी किसी बड़े अधिकारी के साथ अलग से समय लेकर किसी विषय पर चर्चा करना चाहे तो अधिकारीगण प्रायः समय देने से परहेज करते हैं| अब वह सिर्फ पत्रकारों की भीड़ को सम्बोधित करने के लिए ही समय देते हैं| अतीक-अशरफ की हत्या के बाद से सुरक्षा के नाम पर पत्रकारों से दूरी बनाना अब उनके लिए और भी अधिक आसान हो गया है| पत्रकारिता को दर्पण की भी संज्ञा दी गयी है, जिसका एकमात्र उद्देश्य सत्य को सार्वजनिक करना भर है| परन्तु यह तभी सम्भव है जबकि पत्रकारों को हर जगह आने-जाने की निर्बाध छूट हो| लेकिन 15 अप्रैल 2023 को रात साढ़े दस बजे प्रयागराज में हुए हत्याकाण्ड ने पत्रकारिता की इस स्वाभाविक स्वतन्त्रता को प्रतिबन्ध की बेड़ियों से जकड़ने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है| सरकार तथा उसके तन्त्र को इस हेतु अब पर्याप्त कारण मिल चुके हैं|

अपराधियों को विश्वविख्यात बनाने का चलन भी इन दिनों भारतीय मीडिया में जबर्दस्त ढंग से व्याप्त है| जब भी कोई बड़ा अपराधी पकड़ा जाता है या फिर उसके मामले की सुनवाई शुरू होती है| तब लगभग सभी चैनल सिर्फ और सिर्फ उसी पर डिबेट करवाते हैं, वह भी निराधार एवं निष्कर्षहीन| किसी भी अपराधी को एक जेल से दूसरी जेल में सिफ्ट करते समय या अदालत ले जाते वक्त सभी चैनलों के रिपोर्टर रात-दिन एक करके उसका पीछा करते हैं| मार्ग में जब भी कहीं उन्हें अपराधी की गाड़ी के निकट पहुँचने का अवसर मिलता है तो एंकर ‘वह देखो, यह देखो….’ करके जोर-जोर चिल्लाने लगते हैं और कैमरामैन उस अपराधी को अपने कैमरे में कैद करने के लिए ऐसे जान लगा देता है जैसे वह कोई अपराधी न होकर ईश्वर तुल्य धर्मात्मा पुरुष हो, जिसके दर्शन करके चैनल के सारे दर्शक स्वयं को धन्य महसूस करेंगे| विश्व के शायद ही किसी देश में अपराधियों को इतना महिमामंडित किया जाता हो| हद तो तब हो गयी जब मेडिकल परिक्षण के लिए पुलिस जीप से उतारे गये अतीक और उसके भाई से पत्रकारों ने ‘सर’ का सम्बोधन करते हुए पूंछा कि ‘सर, कुछ कहना चाहेंगे आप|’ जिस देश का चौथा स्तम्भ अपराधियों की इतनी अधिक इज्जत करता हो, वहां के नवयुवक यदि यह कहते हैं कि वह बड़ा डॉन बनना चाहते हैं तो इसमें आश्चर्य जैसी कोई बात नहीं होनी चाहिए| सम्भवता संविधान विशेषज्ञ ही यह बात समझ सकते हैं कि जब किसी अपराधी पर न्यायालय में मुकदमा चल रहा हो और वह न्यायिक हिरासत में हो तब मीडिया को उससे बातचीत करने का कोई औचित्य नहीं बनता है| लेकिन यहाँ तो अपराधियों से बाकायदा उनका इस्टेटमेंट लेने का प्रयास किया जाता है| इसका उद्देश्य भला क्या हो सकता है? अपराधी को बचाना, फंसाना या फिर उसका चेहरा दिखाकर चैनल की टीआरपी बढ़ाना| सत्य का उदघटन इसे कहा नहीं जा सकता| क्योंकि किसी भी अपराधी के दोषी या निर्दोष होने का सत्य उसके साथ नहीं बल्कि उसकी पृष्ठभूमि में छुपा होता है| जहाँ कोई जाना नहीं चाहता है| –

Kumar Shukla

Read More »

एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलज में मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग समारोह आयोजित

कानपुर 19 अप्रैल भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज कानपुर में मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग समारोह (MoU Ceremony) का आयोजन महाविद्यालय सभागार में किया गया। महाविद्यालय ने अपना प्रथम समझौता ज्ञाप (MoU) वरदान इंस्टीट्यूट ऑफ़ अल्टरनेटिव मेडिसिंस एंड एलाइड साइंसेज मेरठ के साथ किया। वरदान इंस्टीट्यूट की चेयरपर्सन डॉ. पल्लवी रस्तौगी, सेन महाविद्यालय के सचिव श्री प्रोबीर कुमार सेन, प्राचार्य प्रो. सुमन ने MoU पर हस्ताक्षर किए। प्रो. सुमन ने अपने वक्तव्य में कहा कि विद्यार्थी हित हेतु महाविद्यालय आगे भी ऐसी ही कड़ियां जोड़ता रहेगा। श्री पी. के. सेन जी ने इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार को बधाई एवम् शुभकामनाएं दी। डॉ. पल्लवी रस्तौगी ने छात्राओं को अवगत कराया कि वरदान इंस्टीट्यूट के सहयोग से सेन महाविद्यालय में व्यवसायपरक शिक्षा के अंतर्गत एक्यू फिजियो कोर्स, चक्र संतुलन, कलर थैरेपी, एक्यूप्रेशर व नेचुरोपैथी का बेसिक कोर्स, डाइट एंड न्यूट्रीशन कोर्स आदि विभिन्न पाठ्यक्रम तथा कार्यशालाएं संचालित की जाएंगी। साथ ही मेधावी छात्राओं को इन पाठक्रमों हेतु छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाएगी। इस MoU सेरेमनी के अवसर पर प्रबंध तंत्र सदस्य श्रीमती दीपाश्री सेन सहित समस्त महाविद्यालय परिवार उपस्थित रहा।

Read More »

उमेश पाल हत्याकांड में शूटरों पर इनाम घोषित

कानपुर जिला सूचना कार्यालय➡️एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश का बयान, ‘उमेश पाल हत्याकांड में शूटरों पर इनाम है’, ‘तीन ऐसे शूटर्स हैं इनपर 5-5 लाख का इनाम’, गुड्डू मुस्लिम, साबिर, अरमान पर है इनाम- STF ADG, ‘गुड्डू मुस्लिम खतरनाक और कांट्रेक्ट किलर है’, ये अतीक गैंग में काफी समय से जुड़ा है- STF ADG, ये अकेले ही क्राइम कर सकता है- अमिताभ यश, इसका गिरफ्तार होना अति आवश्यक है- STF ADG, गिरफ्तारी न होने तक खतरा बना रहेगा- STF ADG, 1999 में नारकोटिक्स में गिरफ्तार हुआ था- STF ADG, ‘पटना में राजन तिवारी से मिलने जेल गया था गुड्डू’, ‘किसी किलिंग का कॉन्ट्रैक्ट लेने गया था पटना’, इसने जानकारी दी थी कैसे मर्डर करता है- STF ADG, ‘चलते फिरते रॉ मैटेरियल से बम बना सकता है’, ‘शाइस्ता अभी फरार है, इनका एक लेटर वायरल है’, ‘उमेश पाल हत्याकांड में सीसीटीवी सभी ने देखा है’, साइस्ता को सरेंडर कर देना चाहिए- एसटीएफ एडीजी, साइस्ता को जांच में सहयोग करना चाहिए-STF ADG, ‘अतीक गिरोह को पंजाब से हथियार सप्लाई हो रहे थे’, ‘ड्रोन के जरिए खतरनाक हथियार सप्लाई हो रहे थे’, ‘मुझे अतीक या किसी के भी चैट की जानकारी नहीं’.

Read More »