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कोविड के दौरान अपने माता-पिता खोने वाले बच्चों को डीएम ने दिया दीपावली का उपहार

*दीपावली पर जिलाधिकारी बने अभिभावक, 22 मासूमों संग साझा कीं खुशियाँ*

कानपुर नगर, 17 अक्तूबर। कलेक्ट्रेट सभागार शुक्रवार को दीपावली के दीपों से ज़्यादा उन नन्हीं आँखों की चमक से रोशन था, जिन्होंने कोविड महामारी में अपने माता पिता दोनों को खो दिया। गम के अंधेरे से गुज़र चुके इन बच्चों के चेहरों पर एक खास मुस्कान थी, जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने उन्हें मिठाई, दीया-बत्ती, चॉकलेट और किताबें भेंट कीं और कहा कि एक अभिभावक के रूप में वे हर पल उनके साथ खड़े हैं।

जिलाधिकारी ने बच्चों से कहा कि वे उनके जैविक पिता नहीं हैं लेकिन एक जिलाधिकारी के रूप में उनके वैधानिक अभिभावक हैं और उनकी देखभाल अभिभावक की तरह करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोई भी बच्चा खुद को अकेला महसूस न करे, प्रशासन और सरकार हर पल उनके साथ है।

संवाद के दौरान बच्चों ने अपने सपनों को साझा किया। किसी ने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई, किसी ने इंजीनियर या चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का लक्ष्य रखा। कुछ बच्चों ने एथलीट बनने का सपना बताया तो कई ने आईएएस और आईपीएस बनकर देश की सेवा करने का संकल्प लिया। जिलाधिकारी ने बच्चों को करियर काउंसलिंग दी और समझाया कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और धैर्य से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

कक्षा दसवीं की छात्रा गरिमा सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वजह से उनके सपने ज़िंदा हैं। योजनाओं से मिलने वाली मदद से पढ़ाई बेहतर तरीके से हो रही है। उन्होंने कहा कि दीपावली को खास बनाने के लिए जिलाधिकारी का आभार है। सिंधुजा यादव ने कहा कि इस आयोजन से उन्हें यह एहसास हुआ कि वे अकेली नहीं हैं। समाज और प्रशासन हर कदम पर उनका संबल बने हुए हैं।

जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत शून्य से अठारह वर्ष की आयु तक के बच्चों को प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। तेईस वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें दस लाख रुपये की एकमुश्त धनराशि मिलेगी जिससे उनकी उच्च शिक्षा और जीवन की राह आसान होगी। सभी बच्चों को आयुष्मान भारत योजना से पाँच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त लैपटॉप और टैबलेट भी वितरित किए गए हैं, ताकि पढ़ाई में किसी तरह की बाधा न आए।

जिन बच्चों को इस अवसर पर सम्मानित किया गया उनमें परिधि श्रीवास्तव, अद्वित मिश्रा, आराध्या मिश्रा, बबीता कपूर, सतीश कपूर, उत्कर्ष त्रिपाठी, वैष्णवी गुप्ता, अमन गुप्ता, नैतिक चड्ढा, परी मिश्रा, खुशी मिश्रा, रिद्धिमा कपूर, इशिता गुप्ता, तनिष्क गुप्ता, मानविक त्रिवेदी, अभिनव सिंह, गरिमा सिंह, अश्वनी कुमार, सिंधुजा यादव, संध्या, दिव्या और झलक शामिल हैं।

डीएम ने बच्चों के साथ आए परिजनों का आभार जताया और कहा कि रिश्तेदार और समाज यदि इन बच्चों की मदद के लिए आगे आते हैं तो यह पूरे प्रदेश के लिए सकारात्मक संदेश होगा।

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गोवा में पर्पल फेयर-2025 का शुभारंभ समावेशी, प्रतिभा और सशक्तीकरण का उत्सव

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने अंतर्राष्ट्रीय पर्पल फेस्ट – सेलिब्रेटिंग डायवर्सिटी के तीसरे संस्करण का उद्घाटन किया और एक समावेशी और सुलभ समाज के प्रति गोवा की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव दिव्यांगजनों की प्रतिभा और क्षमता को प्रदर्शित करते हुए सशक्तीकरण का प्रतीक बन गया है। “समावेशी सोच” पर ज़ोर देते हुए, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि दिव्यांगजन अब केवल लाभार्थी नहीं माने जाते। वे पेशेवरउद्यमी और समाज में सक्रिय योगदानकर्ता हैं। उन्होंने बहुप्रतीक्षित पर्पल फेयर-2025 पर कहा कि पर्पल फेयर न केवल प्रतिभा और समावेशिता का जश्न मनाता है बल्कि सामाजिक धारणा में एक बड़े बदलाव भी दर्शाता है – दिव्यांगता को एक सीमा के रूप में देखने से लेकर क्षमतायोगदान और उद्यमिता को मान्यता देने तक।

गोवा के समाज कल्याण मंत्री सुभाष फल देसाई ने कहा कि समावेश कोई दान-पुण्य का कार्य नहीं है; यह एक आंदोलन और शासन का सिद्धांत है जो गरिमा, स्वतंत्रता और मान्यता दिलाता है। इस तरह के उत्सव समावेशन को आनंदमय, सार्थक और दृश्यमान बनाते हैं।

इस अवसर पर केन्द्रिय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री विश्व स्तर पर सबसे सक्रिय और लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं, जो देश के विकास और प्रत्येक समुदाय के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

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दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्तों (एससीपीडी) की उभरती भूमिका के बारे में बताया। पिछले कुछ वर्षों में  दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्तों ने 50 हजार से ज़्यादा शिकायतों का निपटारा किया है, जिनकी संतुष्टि दर अच्छी रही है, और हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसलों ने उनके आदेशों की विश्वसनीयता को और मज़बूत किया है। उन्होंने सामाजिक आउटरीच कार्यक्रमों, 50 करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों और सैकड़ों याचिकाओं का निपटारा करने वाली मोबाइल अदालतों सहित अभिनव पहलों पर प्रकाश डाला।

यह महोत्सव समावेशी शासन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, विकलांग व्यक्तियों की प्रतिभा, उद्यमशीलता और योगदान का जश्न मनाता है, तथा एक ऐसे समाज को प्रेरित करता है जहां प्रत्येक व्यक्ति सम्मान और अवसर के साथ प्रगति कर सके।

दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्त श्री गुरुप्रसाद पावस्कर ने इस महोत्सव को “दिव्यांग व्यक्तियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और लचीलेपन को प्रदर्शित करने के लिए एक अनूठा मंच” बताया।

श्री प्रमोद सावंत, मुख्यमंत्री, गोवा; डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री; श्री रामदास अठावले, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री; श्री श्रीपद नाइक, नवीन नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री, गोवा सरकार; श्री सदानंद शेत तनावड़े, सांसद (राज्यसभा); श्री सुभाष फल देसाई, दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री, गोवा; श्री राजेश अग्रवाल, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग; डॉ. वी. कैंडावेलौ, गोवा के मुख्य सचिव; श्री प्रसन्ना आचार्य, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, गोवा; श्री शोम्बी शार्प, भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट समन्वयक; श्री गुरुप्रसाद पावस्कर, दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्त, गोवा; तथा श्री ताहा हाजीक, सचिव, राज्य दिव्यांगजन आयुक्त, गोवा, उपस्थित गणमान्य व्यक्ति थे।

राष्ट्रीय दिव्यांगजन रोजगार संवर्धन केंद्र (एनसीपीईडीपी), सक्षम, बुकशेयर, डीएआईजी, राइजिंग फ्लेम, संयुक्त राष्ट्र भारत, विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी),  भारत सरकार और विकलांग व्यक्तियों के लिए राज्य आयुक्त के कार्यालय, गोवा में राजदूत सादिया बंदोदकर, साक्षी काले, ज़ेरिफ़ शेख, मंजू शर्मा, ललित पारगी, महादेव सावंत, क्रुणाल ठाकुर, केवाई वेंकटेश, जोसेफ, अंजलि व्यास, ज़मीर ढाले, धन्य रवि, संतोष वाणी, दीपश्री नरेंद्र, सुनील सहस्रबुद्धे, आरती बत्रा, प्रज्ञा सिंह, रक्षिता शेखर, निधि गोयल, जीजा घोष, उमेश सालगर और माया रानावरे भी उपस्थित थे।

यह कार्यक्रम गोवा के समाज कल्याण निदेशालय के दिव्यांगजन मामलों के राज्य आयुक्त, एंटरटेनमेंट सोसाइटी द्वारा भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस समारोह में सुश्री मनमीत कौर नंदाअतिरिक्त सचिव श्री राजेश शर्मासंयुक्त सचिवसुश्री ऋचा शंकरडीडीजीदिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग , श्री प्रवीण कुमार, सीएमडी, भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एएलआईएमसीओ), श्री पीपी अंबष्ट, डिप्टी सीसीपीडी, एनसीपीटी राज्य आयुक्तोंएनजीओ प्रतिनिधियोंमीडिया कर्मियों और विशेष आमंत्रितों सहित कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया!

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सार्वजनिक अभिलेख सुशासन, पारदर्शिता और ऐतिहासिक निरंतरता की आधारशिला हैं: श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत

भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) ने सुशासन माह के अंतर्गत, नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में सुशासन और अभिलेख 2025″ नामक एक प्रदर्शनी का आयोजन किया । इस प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया, जो सुशासन और अभिलेखीय संरक्षण के बीच तालमेल की खोज के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण आयोजन की शुरुआत है। यह प्रदर्शनी 12 अक्टूबर 2025 तक जनता के लिए खुली रहेगी !अपने उद्घाटन भाषण में, श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सुशासन, पारदर्शिता और ऐतिहासिक निरंतरता की आधारशिला के रूप में सार्वजनिक अभिलेखों के संरक्षण के महत्व पर बल दिया । उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटलीकरण परियोजनाओं में से एक को लागू करने में भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के अग्रणी प्रयासों की सराहना की और कहा कि अब तक 15 करोड़ से अधिक पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।

प्रदर्शनी में दुर्लभ और महत्वपूर्ण अभिलेखीय अभिलेखों का एक संग्रह प्रदर्शित किया गया है जो पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी शासन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ी पहलों के तहत संरक्षित और व्यवस्थित ये अभिलेख प्रशासनिक दक्षता और अपनी दस्तावेजी विरासत के संरक्षण, दोनों को बनाए रखने के राष्ट्र के संकल्प को दर्शाते हैं। यह प्रदर्शनी राष्ट्रीय अभिलेखागार (NAI) की आधिकारिक वेबसाइट पर डिजिटल रूप से उपलब्ध है। वेबसाइट लिंक : https://nationalarchives.nic.in/sausaasana-aura-abhailaekha-2025

2021 और 2025 के बीच, 75,500 से अधिक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण दस्तावेजों की समीक्षा की गई और उन्हें भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार में स्थानांतरित कर दिया गया-जो देश की रिकॉर्ड-कीपिंग प्रणालियों को मजबूत करने और महत्वपूर्ण सार्वजनिक जानकारी के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

प्रदर्शनी में विभिन्न मंत्रालयों के योगदानों को प्रदर्शित किया गया, जिन्होंने भारत के प्रशासनिक ढाँचे और विकास पथ को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदर्शनी में विद्युत मंत्रालय, रेल मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय, आदि के अभिलेखीय अभिलेख भी शामिल थे।

प्रमुख प्रदर्शनियां निम्नलिखित ऐतिहासिक क्षणों पर केन्द्रित थीं:

  • भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की शुरूआत
  • जनरल एस.एच.एफ.जे. मानेकशॉ को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया
  • पंचायती राज और विजय दिवस समारोह पर गृह मंत्रालय की पहल प्रदर्शनी में भारत के दो सबसे सम्मानित नेताओं –  अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम – को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिनके दूरदर्शी नेतृत्व ने शासन, प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय विकास में भारत के विकास को आकार दिया। अभिलेखीय तस्वीरों और दस्तावेजों के माध्यम से, प्रदर्शनी ने समावेशी विकास, युवा सशक्तिकरण और बुनियादी ढाँचे के विकास को बढ़ावा देने में उनकी स्थायी विरासत को उजागर किया।

1891 में स्थापित, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार देश की दस्तावेजी विरासत का संरक्षक है, जिसमें 34 करोड़ से ज़्यादा सार्वजनिक अभिलेख संग्रहित हैं। इसके विशाल संग्रह में दुर्लभ पांडुलिपियाँ, संधियाँ, विधायी दस्तावेज़ और प्रशासनिक रिपोर्टें शामिल हैं—जो भारत के शासन, नीतिगत विकास और सामाजिक परिवर्तन के बारे में अद्वितीय जानकारी प्रदान करती हैं।

भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक श्री संजय रस्तोगी ने स्वागत भाषण दिया और संस्थान के आधुनिकीकरण एवं जन-जन तक पहुँच की दिशा में चल रही पहलों पर प्रकाश डाला। संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने राज्य और अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागारों के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने भी उपस्थित लोगों को संबोधित किया और बोर्न डिजिटल अभिलेखों के संरक्षण में राष्ट्रीय अभिलेखागार की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

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इस प्रदर्शनी के माध्यम से, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने अभिलेखीय संरक्षण और सुशासन के बीच संबंध को मज़बूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। प्रदर्शित अभिलेखों ने भारत के प्रशासनिक विकास — चुनावी और न्यायिक सुधारों से लेकर अवसंरचनात्मक और नीतिगत प्रगति तक — की बहुमूल्य जानकारी प्रदान की, जिससे एक पारदर्शी, जवाबदेह और दूरदर्शी शासन प्रणाली सुनिश्चित करने में दस्तावेज़ीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया गया।

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भारत के महाकाव्य महाभारत का राष्ट्रीय टेलीविजन पर नवीन स्‍वरूप में प्रसारण

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/Mahabharat12QCI.JPGकलेक्टिव मीडिया नेटवर्क ने भारत के सबसे प्रसिद्ध महाकाव्य ‘महाभारत’ के एक अभूतपूर्व एआई-आधारित पुनर्कल्पना के प्रसारण की घोषणा की है। इस श्रृंखला का विशेष डिजिटल प्रीमियर 25 अक्टूबर 2025 को वेव्स ओटीटी पर होगा। इसके बाद 2 नवंबर 2025 से हर रविवार सुबह 11:00 बजे दूरदर्शन पर इसका प्रसारण होगा। यह श्रृंखला भारत और दुनिया भर के डिजिटल दर्शकों के लिए वेव्स ओटीटी के माध्यम से एक साथ उपलब्ध होगी।

अपनी तरह का यह पहला सहयोग भारत के सार्वजनिक प्रसारक की विरासत और देशव्यापी पहुंच को अगली पीढ़ी के मीडिया नेटवर्क के रचनात्मक नवाचार के साथ जोड़ता है। उन्नत एआई उपकरणों का उपयोग करते हुए, इस श्रृंखला में महाभारत महाकाव्‍य के व्‍यापक स्‍वरूप, उसके पात्रों, युद्धक्षेत्रों, भावनाओं और नैतिक दुविधाओं को सिनेमा के पैमाने और अद्भुत यथार्थवाद के साथ फिर से तैयार किया गया है। यह परियोजना मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया की भावना को मूर्त रूप देती है और यह दर्शाती है कि कैसे विरासत और नवाचार एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

प्रसार भारती के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी इस सहयोग पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि प्रसार भारती हमेशा से ही राष्ट्रीय और सांस्कृतिक महत्व की गाथाओं को हर भारतीय घर तक पहुंचाता रहा है। लॉकडाउन के दौरान मूल महाभारत के पुनः प्रसारण ने हमें याद दिलाया कि ये कथाएं परिवारों और पीढ़ियों को कितनी गहराई से एक साथ जोड़ती हैं। यह एआई-आधारित पुनर्कल्पना में भागीदारी दर्शकों को भारत के सबसे महान महाकाव्यों में से एक का नए सिरे से अनुभव करने का अवसर प्रदान करती है साथ ही इसमें परंपरा का सम्मान करते हुए कहानी बताने की अत्याधुनिक तकनीक को अपनाया गया है। यह आधुनिक प्रसारण में विकास और विरासत के एक साथ आने की अभिव्यक्ति है।

कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क के संस्थापक और समूह सीईओ, विजय सुब्रमण्यम ने इस साझेदारी पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि लाखों भारतीयों की तरह, वह भी हर रविवार को टेलीविजन पर क्लासिक महाभारत देखकर बड़े हुए हैं। यह एक ऐसा अनुभव था जिसने हमारी कल्पना और संस्कृति से हमारे जुड़ाव को आकार दिया। महाभारत के साथ, हमारी आशा है कि आज की पीढ़ी को इसके माध्‍यम से एक ऐसा भावपूर्ण अनुभव दिलाना है जो उनके लिए गहन और एकीकृत भाव से परिपूर्ण हो और इसे आज की तकनीक की संभावनाओं के माध्यम से दिखाया गया है। यह भक्ति और प्रगति के साथ मिलकर कुछ ऐसा तैयार करने के संदर्भ में है जो न सिर्फ गहराई से परंपरा में निहित हो अपितु साहसपूर्वक दूरदर्शी भी हो।

प्रसार भारती का आधिकारिक ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म, वेव्स, भारत की संस्कृति, समाचार और मनोरंजन के समृद्ध ताने-बाने को एक डिजिटल मंच पर लाता है। वीडियो-ऑन-डिमांड, लाइव इवेंट और टीवी, रेडियो, ऑडियो और पत्रिका सामग्री के व्यापक संग्रह के साथ, वेव्स ने अपनी विश्वसनीय, परिवार-अनुकूल और बहुभाषी पेशकशों के साथ तेज़ी से लाखों उपयोगकर्ताओं को आकर्षित किया है। समावेशिता, नवाचार और विरासत के स्तंभों पर निर्मित, यह प्लेटफ़ॉर्म अत्याधुनिक कहानी कहने की कला के साथ भारत की कालातीत विरासत को जोड़ता है। कलेक्टिव एआई महाभारत के साथ इसका सहयोग इस बात का उदाहरण है कैसे तकनीक और परंपरा मिलकर शक्तिशाली, समकालीन आख्यान रच सकते हैं जो भारत और दुनिया भर के दर्शकों के साथ प्रतिध्वनित होते हैं

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कौशांबी के जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कौशांबी, जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी को उत्कृष्ट कार्यों के लिए मिला सम्मान, ₹6 लाख का पुरस्कार भी प्रदान किया गया कौशाम्बी। कौशाम्बी ने एक बार फिर अपनी पहचान पूरे देश में रोशन की है। नीति आयोग द्वारा लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन, मंसूरी में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी को उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान कौशाम्बी जनपद के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण साबित हुआ। नीति आयोग ने जिलाधिकारी को “कृषि सम्बन्धी निर्णय लेने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड” श्रेणी में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर सम्मानित किया, साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं और रचनात्मक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट योगदान के लिए भी उन्हें विशेष सम्मान से नवाज़ा। इस अवसर पर नीति आयोग ने जनपद कौशाम्बी को कुल ₹6 लाख (₹5 लाख एवं ₹1 लाख) का पुरस्कार भी प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने मंच से एक प्रभावशाली प्रजेंटेशन के माध्यम से नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों के समक्ष कौशाम्बी मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने “डेटा अंतर्दृष्टि और मूल कारण विश्लेषण, किए गए हस्तक्षेप, कार्यान्वयन प्रक्रिया, तथा लाभार्थियों पर प्रभाव” जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे टीमवर्क, सटीक रणनीति और जनसहभागिता के जरिए जनपद ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कीं।नीति आयोग के अधिकारियों ने जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि “कौशाम्बी मॉडल” अन्य जनपदों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।इस उपलब्धि से पूरे कौशाम्बी जनपद में गर्व की लहर दौड़ गई है। विकास की नई सोच और दूरदर्शी नेतृत्व के चलते जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे सशक्त हों तो सीमित संसाधन भी बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।

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भव्य शोभा यात्रा में दिखा विराट स्वरूप , लक्ष्मण और मेघनाथ का हुआ महासंग्राम

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर परेड रामलीला में आज भव्य शोभा यात्रा निकाली गई । रामलीला भवन मेस्टन रोड से शुरू हुई शोभायात्रा बड़ा चौराहा , माल रोड , बिरहाना रोड , नयागंज , किराना बाजार , शक्कर पट्टी , हालसी रोड , मूलगंज और अस्पताल लोड होते हुए परेड रामलीला मैदान पर समाप्त हुई । शोभा यात्रा में लक्ष्मण जी और मेघनाथ के महासंग्राम की झांकियां आकर्षण का केंद्र रही । झांकियां से ही दोनों ओर से वाण की खूब वर्षा हुई । बैंड बाजे के साथ निकली शोभा यात्रा में शंकर पार्वती , नवदुर्गा और बिहारी जी की झांकी खूब पसंद की गई । रामलीला मैदान परेड में भी रामलीला का भावपूर्ण मंचन हुआ , जिसमें मेघनाथ वध के बाद आतिशबाजी के साथ पुतला दहन हुआ । इस दौरान इस दौरान प्रधानमंत्री कमल किशोर अग्रवाल , वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव गर्ग , मंत्री अमरनाथ मेहरोत्रा , मंत्री आलोक अग्रवाल , श्रृंगार समिति संयोजक जगत नारायण गुप्ता , झांकी समिति के संयोजक अशोक अग्रवाल , सहसंयोजक लोकेश अग्रवाल , सह संयोजक श्याम सिंह राजोरिया , अजय अग्रवाल , संदीप निगम , अर्पित सिंह और शिवम जौहरी मौजूद थे ।

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हिंदी दिवस पर बाली “इंडोनेशिया” में लोकगायिका अपर्णा सिंह ने की शिरकत

भारतीय स्वरूप संवाददाता अपर्णा सिंह ने बताया ये मेरे लिए ये बहुत खुशी की बात है। #स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र बाली एवं शब्द यात्रा के संयुक्त तत्वाधान से चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक और सांस्कृतिक सम्मेलन में हमारे गुरुजनों, माता पिता, बड़े बुजुर्गों, मित्रों और जीवन साथी के आशीर्वाद और सहयोग से भारत का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य इंडोनेशिया के बाली द्वीप में प्राप्त हुआ। लखनऊ से गई अपर्णा सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ अपनी टीम के साथ स्वागत गीत से और फिर कजरी गा कर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस गीत के माध्यम से अपने देश की माटी उसकी सुगंध से पूरा वातावरण महक उठा। खचाखच भरा पूरा सभागार लोगों की तालियों से पूरा वातावरण गूंज उठा#। भारत और बाली के साथ ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आए अनेक प्रतिष्ठित लेखक और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के माननीय निदेशक आदरणीय नवीन मेघवाल और बाली के जनरल काउंसलर डॉ शशांक ने सभी प्रतिभागियों,साहित्यकारों को अंग वस्त्र और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया । विशिष्ट अतिथि के रूप में बाली से पद्मश्री इंद्रा आगुस उड्डियान तथा पद्मश्री आई वायन डिबिया ने मंच की शोभा बढ़ाई। इस आयोजन ने ना केवल साहित्य के नए आयाम प्रस्तुत किए बल्कि विभिन्न देशों के साहित्यिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक विविधताओं को समझने का एक सुनहरा मंच भी प्रदान किया । इस प्रकार के आयोजन ना केवल साहित्य को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं बल्कि देशों के बीच आपसी संबंधों और सौहार्द बढ़ाने में सहायक होते हैं।

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उच्च ऊर्जा परमाणु जुड़ाव नई दिशा प्रदान कर रहा है, जिससे अगली पीढ़ी के क्वांटम उपकरणों के विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है

भारतीय क्वांटम अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि जब ऐसे परमाणु, जो हमारे चारों ओर के पदार्थ के मूल निर्माण के छोटे-छोटे खंड हैं, उनको बहुत अधिक ऊर्जा दी जाती है, तो वे स्वतंत्र कणों की तरह व्यवहार करना बंद कर देते हैं। इस अवस्था में वे अब अलग-अलग कणों की तरह नहीं रहते, बल्कि आपस में इतनी मजबूती से जुड़ जाते हैं कि रोशनी के साथ उनका संबंध भी बदल जाता है और उसकी प्रतिक्रिया विकृत दिखाई देने लगती है।

इतनी उच्च अवस्थाओं पर रिडबर्ग परमाणु संकेतों पर पहली बार देखी गई यह अनोखी विकृति भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर, सेंसर और संचार उपकरण बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

साधारण परमाणु छोटे-से कण होते हैं, लेकिन रिडबर्ग परमाणु असाधारण रूप से विशाल होते हैं। जब वैज्ञानिक किसी परमाणु के सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन को ऊर्जा के बहुत ऊंचे स्तर पर ले जाते हैं, तो उसका आकार सामान्य से कहीं बड़ा हो जाता है और वह अपने आस-पास के वातावरण के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाता है। यही अनोखे गुण रिडबर्ग परमाणुओं को भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों और अति-सटीक सेंसरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। हालांकि, यही संवेदनशीलता उन्हें अप्रत्याशित भी बना देती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान, रमन अनुसंधान संस्थान (आरआरआई) की एक टीम ने रुबिडियम परमाणुओं को लगभग परम शून्य तापमान तक ठंडा किया — इतना ठंडा कि वे मुश्किल से हिल पाते हैं। इन परमाणुओं को बाद में लेजर और चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से फंसा दिया गया। इसके बाद, प्रकाश किरणों का उपयोग करके वैज्ञानिकों ने उन्हें रिडबर्ग अवस्था में उत्तेजित किया। आमतौर पर परमाणु अपनी उत्तेजना को एक स्पष्ट और मूलग्रंथ जैसे पैटर्न में प्रकट करते हैं, जिसे ऑटलर-टाउन्स स्प्लिटिंग कहा जाता है।

चित्र- फंसे हुए ठंडे परमाणु सेट-अप में रिडबर्ग उत्तेजना का एक कलात्मक प्रतिनिधित्व

हालांकि जब शोधकर्ताओं ने परमाणुओं को 100वें ऊर्जा स्तर से आगे धकेला, तो साफ और नियमित पैटर्न अचानक टूट गया। अब उनका व्यवहार धुंधला तथा विकृत दिखने लगा। यह कोई त्रुटि नहीं थी, बल्कि एक अद्भुत खोज थी: परमाणु अब अकेले नहीं, बल्कि एक साथ कार्य कर रहे थे। यह ऐसा था कि जैसे एक बड़ा झुंड तालमेल से नाच रहा हो, वे एक-दूसरे से जुड़ रहे थे, प्रभाव डाल रहे थे और सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया दे रहे थे।

रिडबर्ग परमाणुओं में उच्च ऊर्जा पर दिखने वाली ये विचित्र विकृतियां क्वांटम तकनीक के लिए एक संकेत की तरह हैं। ये वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करती हैं कि किस समय परमाणु अकेले रहते हैं और कब वे एक साथ जुड़कर जटिल, आपस में उलझे समूह बनाते हैं, जो बड़ी एवं जटिल प्रणाली की नकल करने में सक्षम होते हैं। ये वास्तव में परिशुद्धता वाले प्रयोगों में उपयोगी हैं। यह जानना कि परमाणु कब और कैसे एक-दूसरे से ‘जुड़ना’ शुरू करते हैं, भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर, सेंसर और संचार उपकरण बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

आरआरआई में प्रोफेसर संजुक्ता रॉय और उनके पीएचडी विद्यार्थियों शिल्पा बी एस और शोवन के बारिक के नेतृत्व में आईआईएसईआर पुणे में प्रोफेसर रेजिश नाथ की टीम द्वारा सैद्धांतिक मॉडलिंग के साथ किये गए इस प्रयोग ने नाजुक इंजीनियरिंग को गहन भौतिकी अंतर्दृष्टि के साथ जोड़ा है। उनकी विशेष रूप से निर्मित पहचान प्रणाली इतनी संवेदनशील थी कि वह बहुत कम संख्या में फोटॉनों को भी पहचान सकती थी, जिससे उन्हें अत्यधिक उच्च ऊर्जा स्तरों पर रिडबर्ग परमाणुओं का अध्ययन करने में सहायता मिली, जहां अन्य विफल हो गए थे।

डॉ. रॉय के अनुसार, ‘हमारे प्रयोग में एक अत्यंत संवेदनशील पहचान प्रणाली स्थापित की गई, जो परमाणुओं द्वारा उत्सर्जित कुछ ही फोटॉनों का भी पता लगाने में सक्षम है। इससे हमें अत्यधिक उत्तेजित रिडबर्ग अवस्थाओं (n > 100) में मौजूद परमाणुओं का पता लगाने में मदद मिली, भले ही उनके संक्रमण की संभावनाएं बहुत कम रही हों। हमने अपने प्रयोग को इस तरह अनुकूलित किया है कि अत्यधिक उत्तेजित रिडबर्ग अवस्थाओं से आने वाले सिग्नल को उच्च सिग्नल-टू-शोर अनुपात के साथ मापा जा सके।’

इस खोज ने भारतीय शोधकर्ताओं को वैश्विक क्वांटम अनुसंधान के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर दिया है। यह दिखाता है कि जब वैज्ञानिक परमाणुओं को लगभग पूरी तरह स्थिर अवस्था तक ठंडा करते हैं और फिर उन्हें अत्यधिक ऊर्जावान बनाते हैं, तो वे पदार्थ को व्यक्तिगत से सामूहिक रूप में बदलते हुए देख सकते हैं।

परमाणु व्यवहार को समझने यह नई खोज भविष्य की क्वांटम प्रौद्योगिकियों की सीमाएं निर्धारित करती है। इस नाजुक संतुलन पर ही क्वांटम प्रौद्योगिकियों का भविष्य आकार ले रहा है और यह ज्ञान आने वाले उपकरणों के निर्माण में मार्गदर्शन करेगा।

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अगस्त, 2025 के लिए आठ प्रमुख उद्योगों का सूचकांक (आधार वर्ष: 2011-12=100)

अगस्त, 2024 के सूचकांक की तुलना में अगस्त, 2025 में आठ प्रमुख उद्योगों (आईसीआई) का संयुक्त सूचकांक 6.3 प्रतिशत (अनंतिम) बढ़ गया। इस्पात, कोयला, सीमेंट, उर्वरक, बिजली और पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में अगस्त, 2025 में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। वार्षिक सूचकांक, मासिक सूचकांक और वृद्धि दर का विवरण अनुबंध और अनुबंध II में दिया गया है।

आठ प्रमुख उद्योगों अर्थात् कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली के उत्पादन के संयुक्त और अलग-अलग प्रदर्शन को मापता है। यह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में शामिल वस्तुओं के भार का 40.27 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।

जुलाई, 2025 के लिए आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक की अंतिम वृद्धि दर 3.7 प्रतिशत रही। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान आठ प्रमुख उद्योग की संचयी वृद्धि दर पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 2.8 प्रतिशत (अनंतिम) है।

आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक का सारांश निम्नलिखित है:

कोयला – कोयला उत्पादन (भारांक: 10.33 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 11.4 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 0.7 प्रतिशत कम रहा।

कच्चा तेल – कच्चे तेल का उत्पादन (भारांक: 8.98 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 1.2 प्रतिशत घट गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 1.7 प्रतिशत घट गया।

प्राकृतिक गैस – प्राकृतिक गैस का उत्पादन (भारांक: 6.88 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 2.2 प्रतिशत घट गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 2.5 प्रतिशत घट गया।

पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद – पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादन (भारांक: 28.04 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 3.0 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 0.4 प्रतिशत बढ़ गया।

उर्वरक – उर्वरक उत्पादन (भारांक: 2.63 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 4.6 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 0.8 प्रतिशत कम हो गया।

इस्पात – इस्पात उत्पादन (भारांक: 17.92 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 14.2 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 10.4 प्रतिशत बढ़ गया।

सीमेंट – सीमेंट उत्पादन (भारांक: 5.37 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 6.1 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 8.4 प्रतिशत बढ़ गया।

बिजली – बिजली उत्पादन (भारांक: 19.85 प्रतिशत) अगस्त, 2025 में अगस्त, 2024 की तुलना में 3.1 प्रतिशत बढ़ गया। अप्रैल से अगस्त, 2025-26 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 0.5 प्रतिशत बढ़ गया।

 

नोट 1: जुलाई, 2025 के आँकड़े अंतिम हैं। अगस्त, 2025 के आंकड़े अनंतिम हैं। प्रमुख उद्योगों के सूचकांक स्रोत एजेंसियों से प्राप्त अद्यतन आँकड़ों के अनुसार संशोधित/अंतिम किए जाते हैं।

नोट 2: अप्रैल 2014 से नवीकरणीय स्रोतों से बिजली उत्पादन के आंकड़े भी शामिल हैं।

नोट 3: ऊपर दर्शाए गए उद्योग-वार भार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक से प्राप्त अलग-अलग उद्योग भार हैं तथा इन्हें आठ प्रमुख उद्योग के संयुक्त भार के अनुपातिक आधार पर 100 के बराबर बढ़ाया गया है।

नोट 4: मार्च 2019 से, तैयार स्टील के उत्पादन के अंतर्गत ‘कोल्ड रोल्ड (सीआर) कॉइल्स’ मद के अंतर्गत हॉट रोल्ड पिकल्ड एंड ऑइल्ड (एचआरपीओ) नामक एक नया स्टील उत्पाद भी शामिल किया गया है।

नोट 5: सितंबर, 2025 के लिए सूचकांक मंगलवार, 21 अक्टूबर, 2025 को जारी किया जाएगा।

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श्रीराम जन्म होते ही गूंजे गीत, बाल कलाकारो ने मन मोहा

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। श्रीराम रामलीला सोसाइटी परेड में रामलीला शुरू हुई। लीला के पहले दिन नारद मोह, राम जन्म और बाल लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। प्रभु श्रीराम के जन्म लेते ही अयोध्यावासी खुशी से झूम उठे। हर घर में लोग बधाइयां गाने लगे। महाराज दशरथ ने प्रभु राम को गोद में लेकर सभी अयोध्यावासियों को दर्शन कराए। लीला के मंचन में कलाकारों ने संवाद के माध्यम से ऐसा समा बांध की माहौल भक्तिमयीं हो गया । भगवान राम की जन्म और बाल लीला में प्रथम साहू सहित अन्य बच्चों ने अपनी लीला से सभी का मन मोह लिया । मंचन से पहले दोपहर में रामलीला भवन में मुकुट पूजन हुआ। शाम को बैंड बाजे के साथ रामलीला भवन से शोभायात्रा निकाली गई जो परेड रामलीला मैदान पहुंच कर समाप्त हुई । भगवान लक्ष्मी नारायण जी की आरती के बाद लीला का मंचन शुरू हुआ । व्यास महेश दत्त चतुर्वेदी के भजनों से भक्त भाव विभोर हो गए । इस दौरान सोसाइटी प्रधानमंत्री कमलकिशोर अग्रवाल, लाल जी शुक्ल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव गर्ग, संरक्षक राकेश गर्ग, मंत्री आलोक अग्रवाल, संयोजक जगत नारायण गुप्ता , अशोक अग्रवाल लोकेश अग्रवाल और वीरेंद्र अग्रवाल मौजूद थे ।

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